रोशनदान के पास बस एक पौधा और घर में बरसेगा पैसा! जानिए फेंग शुई के नियम

घर के रोशनदान को सिर्फ रोशनी और हवा आने की जगह न समझें, इसे हरियाली से भी खूबसूरत बनाया जा सकता है रोशनदान के पास सही पौधे लगाने से घर का यह छोटा सा हिस्सा और भी सुंदर दिखने लगता है। साथ ही, फेंग शुई के अनुसार पौधों को घर में सकारात्मक माहौल और ताजगी से भी जोड़ा जाता है।

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बैरिंगटोनिया का पेड़

बैरिंगटोनिया अपने खूबसूरत फूलों और हरे-भरे रूप के लिए जाना जाता है। इसके बड़े फूल घर के बड़े आंगन या खुले रोशनदान वाली जगह को बेहद सुंदर बना सकते हैं। फेंग शुई से जुड़ी मान्यताओं में इस पेड़ को समृद्धि, सौभाग्य और शांति का प्रतीक माना जाता है। घर में बड़ा रोशनदान या खुला स्थान है, तो यह पेड़ वहां अच्छी तरह सज सकता है। इसे भरपूर धूप, रेफूलर पानी और पोषक मिट्टी की जरूरत होती है। साथ ही, ड्रेनेज का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि ज्यादा पानी जमा होकर जड़ों को नुकसान न पहुंचाए।

ताइवानी टर्मिनलिया कैटाप्पा 

ताइवानी टर्मिनलिया कैटाप्पा का पेड़ अपनी खूबसूरत पत्तियों और साइज के कारण घर के खुले हिस्सों और बड़े रोशनदान के लिए परफेक्ट है। इसकी पत्तियां ज्यादा घनी नहीं होतीं, इसलिए आसपास की जगह बहुत बंद या भारी नहीं लगती। फेंग शुई की मान्यताओं में इसे पॉजिटिव एनर्जी, बैलेंस और शांति से जोड़ा जाता है। इस पौधे को अच्छी धूप पसंद होती है और रेगुलर पानी की जरूरत पड़ती है। इसे ऐसी मिट्टी में लगाना बेहतर होता है, जिसमें पानी आसानी से निकल सके और पौधे को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिले।

पर्वतीय धन का पेड़

पर्वतीय धन वृक्ष यानी मनी ट्री अपनी घनी हरी पत्तियों के कारण घर के डेकोरेशन में काफी पसंद किया जाता है। फेंग शुई की मान्यताओं के अनुसार इसे धन, समृद्धि, सफलता और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। रोशनदान के पास इसे रखने से घर के उस हिस्से में हरियाली और ताजगी भी बढ़ती है। इस पौधे को तेज रोशनी पसंद है, लेकिन यह हल्की छाया में भी बढ़ सकता है। इसलिए अलग-अलग तरह के रोशनदान वाली जगहों में इसे रखा जा सकता है। मिट्टी सूखने पर पानी दें और गमले या जमीन में पानी जमा न होने दें।

स्टारफ्रूट का पेड़

स्टारफ्रूट का पेड़ अपने हरे पत्तों, छोटे खूबसूरत फूलों और स्वादिष्ट फलों के लिए जाना जाता है। बड़े रोशनदान या खुले आंगन में यह पेड़ अच्छी तरह बढ़ सकता है। इसकी हरियाली घर को नेचुरल और शांत लुक देती है। लोक मान्यताओं में स्टारफ्रूट के पेड़ को समृद्धि, परिवार में एकता और सुख-शांति से जोड़ा जाता है। इसे नियमित पानी की जरूरत होती है, लेकिन मिट्टी में पानी जमा नहीं होना चाहिए। समय-समय पर इसकी शाखाओं की कटाई-छंटाई करें और फर्टिलाइजर दें, ताकि पौधे की अच्छी ग्रोथ बनी रहे।

 

बड़ा फ्रैंगिपानी पेड़

फ्रैंगिपानी यानी प्लुमेरिया अपने खूबसूरत सफेद, गुलाबी और हल्के पीले फूलों के साथ अपनी खुशबू के लिए भी जाना जाता है। इसका मोटा तना और चमकदार हरी पत्तियां इसे अट्रैक्टिव बनाती हैं। फेंग शुई और लोक मान्यताओं में इसे शांति, पवित्रता और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। रोशनदान के पास इसे लगाने से घर में हरियाली के साथ फूलों की खूबसूरती भी देखने को मिलती है। इसे भरपूर धूप पसंद है, इसलिए खुली और अच्छी रोशनी वाली जगह इसके लिए बेहतर रहती है। पौधे को जरूरत के हिसाब से पानी दें और ऐसी मिट्टी चुनें जिसमें पानी आसानी से बाहर निकल सके।

 

रोशनदान के पास सही पौधे लगाने से घर में हरियाली और खूबसूरती बढ़ती है। फेंग शुई की मान्यताओं के अनुसार, ये पौधे घर में सकारात्मक माहौल, शांति और समृद्धि का एहसास भी ला सकते हैं। बस पौधे की जरूरत के हिसाब से धूप, पानी और मिट्टी का ध्यान रखें, ताकि आपका रोशनदान सुंदर और हरा-भरा बना रहे।

बेडरूम में एक चीज रखते ही बदल जाएगी आपकी लव लाइफ, फेंगशुई के है ये अचूक नियम, जानिए कैसे!

बेडरूम जगह है जहां दिनभर की भागदौड़ के बाद हमें सबसे ज्यादा आराम मिलता है। इसलिए इस कमरे को डेकोरेट करते समय केवल खूबसूरती ही नहीं, बल्कि माहौल का भी ध्यान रखना चाहिए। सही तरीके से रखा गया फर्नीचर और कम सामान कमरे को ज्यादा खुला और सुकून भरा बना सकता है।

फेंगशुई में बेडरूम डेकोरेशन और चीजों की जगह को लेकर कई मान्यताएं हैं। यहां बेड, शीशे और पौधों को कहां रखना चाहिए, इस पर काफी ध्यान दिया जाता है। अपने बेडरूम को शांत और आरामदायक रखने के लिए इन छोटी-छोटी बातों पर गौर करना चाहिए।

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बेड के नीचे सामान

कम जगह होने पर लोग अक्सर बेड के नीचे जूते, इलेक्ट्रॉनिक सामान, पुराने कपड़े या दूसरी चीजें रख देते हैं। फेंगशुई के अनुसार बेड के नीचे की जगह साफ और खाली रखना बेहतर माना जाता है। मान्यता है कि इससे कमरे में एनर्जी का फ्लो बना रहता है और माहौल ज्यादा शांत रहता है। इसलिए बेड के नीचे बेकार सामान जमा करने के बजाय उसे साफ रखें और जरूरत न होने वाली चीजों को किसी दूसरी जगह व्यवस्थित करें।

ज्यादा पौधे 

बेडरूम आराम करने और सुकून पाने की जगह है, इसलिए यहां जरूरत से ज्यादा डेकोरेशन करने से बचना चाहिए। फेंगशुई की मान्यता के अनुसार बेडरूम में बहुत ज्यादा पौधे या पानी से जुड़े डेकोरेटिव आइटम जैसे फाउंटेन रखना सही नहीं माना जाता। ऐसा माना जाता है कि इन चीजों की एक्टिव एनर्जी कमरे के शांत माहौल को प्रभावित कर सकती है। अगर पौधे रखने का शौक है, तो कमरे में बहुत ज्यादा पौधे रखने के बजाय सीमित संख्या में ही रखें और कमरे को खुला व आरामदायक बनाए रखें।

साफ और शांत कमरा

बेडरूम में अच्छी एनर्जी और शांत माहौल बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है कि कमरा साफ और व्यवस्थित रहे। रोज थोड़ा समय निकालकर फर्श, बेड और आसपास की जगह को साफ करें। बेड के नीचे कबाड़ जमा न होने दें और जरूरत से ज्यादा सामान कमरे में न रखें। अगर बेड के सामने शीशा लगा है और उसे हटाना संभव नहीं है, तो सोते समय उस पर पर्दा या कवर लगाया जा सकता है। साथ ही फेंगशुई के अनुसार डेकोर की चीजों को जोड़ी में रखना भी अच्छा माना जाता है।

 

बेड के सामने शीशा

फेंगशुई की मान्यता के अनुसार बेड के ठीक सामने शीशा लगाना सही नहीं माना जाता। ऐसा माना जाता है कि इससे कमरे का माहौल शांत रहने के बजाय बेचैनी वाला हो सकता है। कुछ लोगों को इससे नींद में परेशानी या रात में बार-बार जागने जैसी दिक्कत महसूस हो सकती है। कपल्स के बीच तनाव बढ़ने की बात भी फेंगशुई में कही जाती है। इसलिए अगर बेडरूम में शीशा लगाना जरूरी है, तो उसे बेड से थोड़ा हटकर ऐसी जगह रखें जहां सीधे बेड का प्रतिबिंब न दिखाई दे।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी फेंगशुई की मान्यताओं पर आधारित है। इसे पूरी तरह सही मानने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

पैसे टिकते नहीं तो हो रही है ये गलती, आपकी रसोई बना देगी अमीर! बस ये काम कभी न करें

रोटी हर भारतीय रसोई का सबसे जरूरी हिस्सा है। कई लोग आटा बर्बाद न हो, इसलिए पहले से तय करके गिनती के हिसाब से रोटियां बनाते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रोटी या अन्न का इस तरह हिसाब लगाना शुभ नहीं माना जाता। माना जाता है कि रसोई में अपनाई गई छोटी-छोटी आदतें भी घर की सुख-समृद्धि, बरकत और सकारात्मक ऊर्जा पर असर डाल सकती हैं। रोटियां गिनकर बनाने से जुड़ी मान्यताएं और रसोई के कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियम।

 

रोटियां गिनकर बनाना

सनातन परंपरा में अन्न को भगवान का स्वरूप और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद माना गया है। इसलिए भोजन को सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि जीवन का आधार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रोटियां गिनकर बनाना या परोसना अन्न का हिसाब लगाने जैसा माना जाता है। कहा जाता है कि इससे मां अन्नपूर्णा और मां लक्ष्मी प्रसन्न नहीं होतीं, इसलिए भोजन का हमेशा सम्मान करना चाहिए।

 

बरकत पर असर

वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई घर की ऊर्जा पूरे घर को प्रभावित करती है। मान्यता है कि हर चीज का जरूरत से ज्यादा हिसाब रखा जाए, भोजन का, तो घर की बरकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। इससे आर्थिक परेशानियां, धन की कमी और खर्च बढ़ने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए रोटियां बनाते समय थोड़ा ज्यादा भोजन रखना शुभ माना जाता है।

 

सूर्य ग्रह का संबंध

ज्योतिष शास्त्र में गेहूं का संबंध सूर्य ग्रह से माना गया है। ऐसी मान्यता है कि भोजन को गिनकर बनाने की आदत सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा को कमजोर कर सकती है। इसके कारण घर में तनाव, मनमुटाव और पारिवारिक मतभेद बढ़ने की संभावना बताई जाती है। हालांकि यह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता है।

 

पहली और आखिरी रोटी

वास्तु और धार्मिक परंपरा के अनुसार रोटी बनाते समय पहली रोटी गाय के लिए निकालनी चाहिए। लेकिन आखिर में बनने वाली रोटी कुत्ते, पक्षियों या अन्य जीवों के लिए अलग रखने की परंपरा भी है। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा व सुख-शांति बनी रहने की मान्यता है।

 

रोटी बनाने का तरीका

रोटी बनाने से पहले गर्म तवे पर पानी या दूध की कुछ बूंदें छिड़कना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही रोटियां बनाते समय साफ-सफाई, शांत मन और सकारात्मक सोच रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ऐसे वातावरण में बना भोजन परिवार के लिए शुभ फल देता है और घर का माहौल भी अच्छा बना रहता है।

 

आटा स्टोर करना

अगर घर के लिए आटा गूंधना हो, तो रोटियों की गिनती तय करने के बजाय परिवार के सदस्यों की जरूरत का अंदाजा लगाकर आटा निकालना बेहतर माना जाता है। साथ ही 2–3 रोटियां ज्यादा बनाना भी शुभ माना जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी मेहमान, जरूरतमंद या पशु-पक्षी के लिए भोजन मिल सके।

 

बचे हुए आटे का नियम

वास्तु शास्त्र में गूंथे हुए आटे को लंबे समय तक फ्रिज में रखने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि बासी आटा नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है। इसलिए जितनी जरूरत हो उतना ही आटा गूंधें और ताजा भोजन बनाने की कोशिश करें। यह धार्मिक मान्यता होने के साथ-साथ ताजा भोजन खाने की अच्छी आदत भी मानी जाती है।

पैसा, शांति और खुशी! बस इस एक कोने से आएगी घर में पॉजिटिव एनर्जी

फेंगशुई के अनुसार घर की हर दिशा किसी न किसी ऊर्जा से जुड़ी होती है। इन्हीं में से एक है वेल्थ कॉर्नर, जिसे धन, समृद्धि और आर्थिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि अगर इस जगह को साफ-सुथरा रखकर सही तरीके से सजाया जाए और कुछ आसान उपाय अपनाए जाएं, तो घर में पॉजिटिव एनर्जी बढ़ती है और आर्थिक तरक्की के नए मौके मिलने लगते हैं।

 

वेल्थ कॉर्नर की दिशा (Wealth Corner Direction)

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फेंगशुई के अनुसार घर का वेल्थ कॉर्नर मेन गेट से अंदर आने पर दक्षिण-पूर्व दिशा में माना जाता है। यह दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी होती है। इसलिए इस स्थान को हमेशा साफ, ऑर्गेनाइज और खुला रखना चाहिए। इस जगह पर टूटा-फूटा सामान, बेकार की चीजें या कबाड़ रखने से बचना चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि इससे पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

वेल्थ कॉर्न को एक्टिव (Activate Wealth Corner)

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फेंगशुई में माना जाता है कि वेल्थ कॉर्नर को सही तरीके से सजाने और वहां शुभ चीजें रखने से पॉजिटिव एनर्जी बढ़ती है। इस जगह पर ऐसे डेकोरेटिव आइटम या नेचुरल एलिमेंट रखने चाहिए, जो समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माने जाते हैं। इससे घर का माहौल सकारात्मक बना रहता है और आर्थिक उन्नति के अवसर बढ़ने की मान्यता है।

 

शुभ रंग से सकारात्मक ऊर्जा (Use Auspicious Colors)

वेल्थ कॉर्नर में हरे और बैंगनी रंग का विशेष महत्व माना जाता है। इन रंगों के पर्दे, कुशन, सोफा कवर, शोपीस या अन्य डेकोरेटिव आइटम रखने से इस दिशा की ऊर्जा मजबूत होती है। हरा रंग विकास और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, जबकि बैंगनी रंग समृद्धि और वैभव का संकेत देता है।

 

पानी से जुड़ी चीजें (Add Water Elements)

फेंगशुई के अनुसार पानी को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वेल्थ कॉर्नर में छोटा इनडोर वॉटर फाउंटेन, बहते पानी की पेंटिंग या पानी से जुड़ा कोई डेकोरेटिव आइटम रखा जा सकता है। माना जाता है कि इससे पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह बेहतर होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

 

पौधों से पॉजिटिव एनर्जी (Plants for Positive Energy)

वेल्थ कॉर्नर में जेड प्लांट और लकी बैम्बू रखना फेंगशुई में शुभ माना जाता है। ये दोनों पौधे पॉजिटिव एनर्जी, तरक्की और आर्थिक स्थिरता के प्रतीक माने जाते हैं। साथ ही ये घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ वातावरण को भी ताजगी देते हैं।

 

 

साफ-सफाई का ध्यान (Wealth Corner Clean)

वेल्थ कॉर्नर में रेगुलर साफ-सफाई करना जरूरी माना जाता है। इस जगह पर धूल, गंदगी या बेकार का सामान जमा नहीं होने देना चाहिए। माना जाता है कि जितना यह कोना साफ और व्यवस्थित रहेगा, उतनी ही पॉजिटिव एनर्जी बनी रहेगी और घर का वातावरण भी सुखद महसूस होगा।

 

ध्यान दे

यह जानकारी फेंगशुई से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

मेटल डेकोर से चमकेगा घर का हर कोना? फेंगशुई में बताए गए हैं ये खास फायदे

फेंगशुई (Feng Shui) एक प्राचीन चीनी पद्धति है, जिसे घर और ऑफिस (Office) में सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) बनाए रखने के लिए अपनाया जाता है। इसमें धातु को पांच प्रमुख तत्वों में से एक माना गया है, जो प्रोग्रेस, डिसिप्लिन और सुख-समृद्धि का प्रतीक है। मान्यता है कि सही जगह पर धातु की कलाकृतियां (metal artifacts) रखने से घर का माहौल पॉजिटिव बना रहता है। आइए जानते हैं फेंगशुई में धातु की कलाकृतियों का क्या महत्व है और इन्हें किस तरह इस्तेमाल करना शुभ (auspicious) माना जाता है:

घर का माहौल बदल सकती है ये छोटी-सी चीज

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फेंगशुई (Feng Shui) के अनुसार धातु की कलाकृतियां (Feng Shui) घर या ऑफिस में एनर्जी के फ्लो को बैलेंस करने में मदद करती हैं। खासतौर पर पीतल, तांबा, स्टील या कांस्य से बनी डेकोरेटिव आइटम नकारात्मक ऊर्जा (negative energy) को कम कर सकारात्मक माहौल बनाने का प्रतीक मानी जाती हैं। इन्हें ऐसी जगह रखना बेहतर माना जाता है, जहां लोग सबसे ज्यादा समय बिताते हैं।

सफलता से जुड़ा है इसका खास कनेक्शन

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धातु तत्व (metal element) को फोकस, डिसिप्लिन और डिसीजन लेने की एबिलिटी से जोड़ा जाता है। इसलिए ऑफिस (offices), स्टडी रूम (study room) या वर्कप्लेस (workplace) में धातु की कलाकृतियां (metal artifact) रखने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इससे काम के प्रति एकाग्रता बढ़ती है और करियर (career) या व्यवसाय (business) में नई संभावनाओं का माहौल बनता है।

खुशहाली का छिपा हुआ राज

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फेंगशुई में धातु के सिक्के (metal coin), धातु का जहाज (metal ship model), सुनहरे रंग की कलाकृतियां (gold-colored artifact) या धातु से बने शुभ प्रतीकों (metal symbol) को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इन्हें घर के उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा में रखने की सलाह दी जाती है, ताकि पॉजिटिव एनर्जी का बैलेंस बना रहे।

सजावट के साथ मिलेगा डबल फायदा

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धातु की कलाकृतियां (Metal artifact) केवल फेंगशुई के लिहाज से ही नहीं, बल्कि इंटीरियर डेकोरेशन में भी खास भूमिका निभाती हैं। मॉडर्न डिजाइन वाली मेटल वॉल आर्ट, मूर्तियां या हैंगिंग पीस घर को स्टाइलिश और एलिगेंट लुक देते हैं। इससे घर का माहौल भी ज्यादा ऑर्गेनाइज्ड और अट्रैक्टिव दिखाई देता है।

मन को सुकून देने वाला आसान तरीका

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फेंगशुई के अनुसार धातु तत्व मेंटल क्लैरिटी और इमोशनल बैलेंस का प्रतीक है। शांत और सुंदर धातु की कलाकृतियां (metal artifact) देखने से मन को सुकून महसूस हो सकता है और घर में सकारात्मक वातावरण का एहसास बढ़ सकता है। हालांकि इसे व्यक्तिगत आस्था के रूप में देखा जाता है।

एक छोटी-सी गलती बिगाड़ सकती है असर

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फेंगशुई में धातु तत्व के लिए पश्चिम (West) और उत्तर-पश्चिम दिशा (Northwest direction) को शुभ माना जाता है। इसलिए धातु की कलाकृतियों को इन दिशाओं में रखना बेहतर माना जाता है। साथ ही इन्हें हमेशा साफ और अच्छी कंडीशन में रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि टूटी या जंग लगी वस्तुएं शुभ नहीं मानी जातीं।

इसे अपनाते समय भूलकर भी न करें ये काम

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फेंगशुई में किसी भी एलिमेंट का बैलेंस सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए पूरे घर में केवल धातु की डेकोरेटिव आइटम (decorative item) रखने के बजाय लकड़ी, पौधे, पानी और मिट्टी जैसे अन्य तत्वों के साथ बैलेंस बनाकर डेकोरेट करने की सलाह दी जाती है। इससे घर का वातावरण बैलेंस्ड और खूबसूरत बना रहता है।

खुशहाली का प्रवेश द्वार है, जानिए कैसी होनी चाहिए आपके घर की नेमप्लेट?

वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) में घर के मुख्य द्वार पर लगी नेम प्लेट को सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है कि सही दिशा, आकार और मटेरियल की नेम प्लेट घर में शुभता और खुशहाली लाने में सहायक होती है। इसलिए नेम प्लेट लगवाने से पहले कुछ जरूरी वास्तु नियमों का ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है:

सही नेम प्लेट चुनना है जरूरी

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वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार, नेम प्लेट ऐसे मटेरियल से बनवानी चाहिए जो मजबूत और प्राकृतिक हो। लकड़ी (wood) या पत्थर (stone) की नेम प्लेट को शुभ माना जाता है, क्योंकि इन्हें स्टेबिलिटी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वहीं प्लास्टिक की नेम प्लेट लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही, नेम प्लेट को मेन गेट के दाईं ओर लगाना बेहतर माना जाता है।

इस बात का रखें ध्यान

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नेम प्लेट पर केवल फैमिली हेड या फैमिली मेंबर का नाम और जरूरत हो तो उनका प्रोफेशन लिखवाना सही माना जाता है। बहुत ज्यादा जानकारी लिखने से बचना चाहिए। नाम को साफ, बड़े और आसानी से पढ़े जाने वाले अक्षरों में लिखवाएं। गोल्डन या ब्रास फिनिश वाले अक्षरों का यूज शुभ माना जाता है।

यह गलती न करें

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वास्तु के अनुसार, नेम प्लेट (nameplate) ऐसी जगह लगनी चाहिए जहां वह आसानी से दिखाई दे। यदि संभव हो तो इसे मेन गेट के पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। इस दिशा को सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) के आने का रास्ता माना जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और शुभता का संचार होता है।

एक छोटा-सा उपाय

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घर की नेम प्लेट हमेशा साफ दिखाई देनी चाहिए। इसके लिए नेम प्लेट के ऊपर या पास में हल्की पीली रोशनी लगाई जा सकती है। माना जाता है कि इससे घर के एंट्रेंस गेट पर पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है और नेम प्लेट भी अट्रेक्टिव दिखती है।

इसे नजरअंदाज न करें

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नेम प्लेट पर धूल या गंदगी जमा नहीं होने देनी चाहिए। अगर नेम प्लेट पुरानी, टूटी या उसके अक्षर धुंधले हो जाएं, तो उसे बदल देना बेहतर माना जाता है। साफ और अच्छी स्थिति में रखी नेम प्लेट घर की सकारात्मक छवि को दर्शाती है।

ये चीजे न जोड़ें

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वास्तु मान्यताओं के अनुसार, नेम प्लेट पर देवी-देवताओं की आकृति बनवाने से बचना चाहिए। यदि शुभ प्रतीक लगाना चाहें, तो स्वास्तिक या ‘ॐ’ जैसे चिन्ह का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें शुभता और पाजिटिविटी का प्रतीक माना जाता है।

घर में नहीं टिक रहा पैसा तो ऑफिस की टेबल पर रखे ये प्लांट, होगी बरकत बिजनेस में!

क्रासुला प्लांट (Crassula plant), जिसे जेड प्लांट भी कहा जाता है, आजकल घरों की सजावट के साथ-साथ वास्तु में भी काफी पॉपुलर है। मान्यता है कि अगर इसे सही दिशा में रखा जाए, तो यह घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति का प्रतीक बन सकता है। आइए जानते हैं इसे कहां रखना शुभ माना जाता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

जानिए इसकी खासियत

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वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra)में क्रासुला प्लांट (Crassula plant) को सुख, समृद्धि और धन का प्रतीक माना जाता है। इसकी गोल और मोटी पत्तियां आर्थिक मजबूती और बचत का संकेत मानी जाती हैं। कई लोग इसे घर और ऑफिस (office)में अच्छी ऊर्जा बनाए रखने के लिए भी लगाते हैं।

एक छोटी-सी जगह, बड़ा असर

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वास्तु के अनुसार, क्रासुला प्लांट को घर के मेन गेट की दाहिनी ओर रखना शुभ माना जाता है। जब आप घर से बाहर निकलें, तो यह पौधा आपके दाहिने हाथ की तरफ होना चाहिए। मान्यता है कि इससे पॉजिटिव एनर्जी (Positive energy) का आना बढ़ता है और घर में सुख-शांति का माहौल बना रहता है।

यह गलती न करें

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क्रासुला प्लांट को दक्षिण दिशा, बाथरूम (Bathroom), बेडरूम (Bedroom) या पूरी तरह अंधेरी जगह पर रखने से बचने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, ऐसी जगहों पर रखने से इसकी पॉजिटिव एनर्जी का इफेक्ट कम हो सकता है। इसके लिए ऐसी जगह चुनें जहां नेचुरल लाइट और ताजी हवा आती हो।

एक दिशा मानी जाती है सबसे शुभ

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अगर घर में जगह हो, तो इस पौधे को उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में रखना भी शुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार, यह दिशा पॉजिटिव एनर्जी और समृद्धि से जुड़ी होती है। मान्यता है कि यहां रखा क्रासुला परिवार में शांति और खुशहाली का माहौल बनाए रखता है।

किन लोगों के लिए है ज्यादा फायदेमंद?

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वास्तु एक्सपर्ट (Vastu expert) की मान्यता है कि क्रासुला प्लांट बिजनेस करने वाले लोगों के लिए शुभ माना जाता है। कई लोग इसे दुकान, ऑफिस या वर्कप्लेस के एंट्री गेट के पास भी रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे नई ऑपर्चुनिटी मिलने और फाइनेंशल ग्रोथ (Financial growth) में मदद मिल सकती है।

 

इसे स्वस्थ रखने का आसान तरीका

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क्रासुला एक कम देखभाल वाला पौधा है। इसे हल्की धूप या तेज रोशनी वाली जगह पर रखें। मिट्टी पूरी तरह सूखने के बाद ही पानी दें, क्योंकि ज्यादा पानी इसकी जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। समय-समय पर पत्तों की सफाई करते रहें ताकि पौधा स्वस्थ बना रहे।

क्या सच में बदल सकती है किस्मत?

वास्तु मान्यताओं के अनुसार, सही दिशा में रखा क्रासुला प्लांट घर में सकारात्मक माहौल, सुख-शांति और आर्थिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, सफलता और आर्थिक प्रगति मेहनत, सही प्लानिंग और अच्छे फैसलों पर भी डिपेंड करती है। इसलिए इस पौधे को वास्तु से जुड़ी एक पारंपरिक मान्यता के रूप में ही देखें।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं और वास्तु शास्त्र पर आधारित है। किसी भी फैसले से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

रसोई का ये एक नियम चमका सकता है आपकी किस्मत, सिर्फ रोटी बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान!

हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में रसोई घर को घर का सबसे पवित्र जगह माना गया है, क्योंकि यहां साक्षात माता अन्नपूर्णा का वास होता है. रसोई में बनने वाले भोजन का सीधा संबंध हमारी सेहत और आर्थिक स्थिति से होता है। अक्सर अनजाने में हम रोटी बनाते समय कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं. जिससे घर में कंगाली व दरिद्रता का वास होने लगता है. आइए जानते हैं रोटी बनाते समय किन विशेष नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:

पहली रोटी गाय के लिए निकालने की परंपरा

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वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तवे पर बनने वाली पहली रोटी घर के किसी सदस्य को नहीं खिलानी चाहिए। इसे थोड़ा घी और गुड़ या चीनी लगाकर गाय को खिलाने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ दोष शांत होते हैं, ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

आखिरी रोटी का भी है विशेष महत्व

टिप्स और ट्रिक्स: लंच बॉक्स में रोटी और चपाती को नरम कैसे रखें?

जैसे पहली रोटी का महत्व बताया गया है, वैसे ही आखिरी रोटी भी विशेष मानी जाती है। इसे काले कुत्ते या किसी अन्य कुत्ते को खिलाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और परिवार पर आने वाली परेशानियां दूर रहती हैं।

ताजा आटे का प्रयोग क्यों जरूरी है?

टिप्स और ट्रिक्स: लंच बॉक्स में रोटी और चपाती को नरम कैसे रखें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित रूप से बासी आटे का उपयोग करने से घर में मानसिक तनाव, आलस्य और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। साथ ही यह भी माना जाता है कि इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है। इसलिए रोजाना ताजा आटा गूंथकर भोजन तैयार करना शुभ माना जाता है।

बासी आटे की रोटी बनाने से बचें

 

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आजकल कई लोग सुविधा के लिए रात में आटा गूंथकर फ्रिज में रख देते हैं और अगले दिन उसी से रोटियां बनाते हैं। वास्तु शास्त्र में इसे शुभ नहीं माना गया है। मान्यता है कि लंबे समय तक रखा गूंथा आटा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है, इसलिए हमेशा ताजा आटा गूंथकर ही रोटियां बनाना बेहतर माना जाता है।

रोटियां गिनकर बनाने से बचें

The Butter Substitute To Use For Impossibly Soft Roti Bread

मान्यता है कि परिवार के लिए रोटियां बनाते समय उनकी संख्या गिनकर नहीं बनानी चाहिए। ऐसा करने से अन्न का सम्मान कम होता है और घर की बरकत प्रभावित हो सकती है। इसलिए भोजन को श्रद्धा और सम्मान के साथ तैयार करने की सलाह दी जाती है।

तवे से जुड़ी इन गलतियों से बचें

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वास्तु शास्त्र के अनुसार, गर्म तवे पर सीधे पानी नहीं डालना चाहिए और रोटी बनाने के बाद तवे को खाली चूल्हे पर भी नहीं छोड़ना चाहिए। इसके अलावा गंदे तवे पर रोटी बनाना, तवे को उल्टा रखना या उसे नुकीली चीज से खुरचना भी शुभ नहीं माना जाता। तवे को हमेशा साफ-सुथरा और सही तरीके से रखना चाहिए।

इस तरह वास्तु शास्त्र में रसोई और भोजन से जुड़े कुछ नियमों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है। हालांकि, इन मान्यताओं का पालन करना पूरी तरह व्यक्ति की आस्था और विश्वास पर निर्भर करता है।