Video: 5,700 पौधों से भर दिया पूरा घर, इस पाकिस्तानी शख्स ने आखिर क्यों उठाया ये कदम?

पाकिस्तान के पंजाब स्थित पट्टोकी में एक ऐसा घर है, जो अपनी अनोखी हरियाली के कारण लोगों का ध्यान खींच रहा है। बाहर से देखने पर यह एक सामान्य मकान जैसा लगता है, लेकिन अंदर कदम रखते ही चारों तरफ पेड़-पौधे नजर आते हैं। घर की दीवारों, दरवाजों और आसपास की जगहों को इस तरह पौधों से सजाया गया है कि पूरा मकान किसी छोटे जंगल जैसा दिखाई देता है। इस हरे-भरे घर के पीछे Mian Asghar Ali की सालों की मेहनत और अपनी मां के लिए पूरा किया गया एक सपना है।

दरअसल, उनकी मां चाहती थीं कि घर में एक खूबसूरत बगीचा हो। Asghar ने इस छोटी-सी इच्छा को गंभीरता से लिया और 2016 में कुछ पौधों के साथ शुरुआत की। धीरे-धीरे उनका यह शौक जुनून में बदल गया और आज घर में हजारों पेड़-पौधे मौजूद हैं। अब यह मकान स्थानीय लोगों के साथ सोशल मीडिया यूजर्स के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है।

50 पौधों से शुरू हुई थी कहानी

साल 2016 में Asghar ने करीब 50 पौधे खरीदकर इस सपने की शुरुआत की। उन्होंने 10 पौधे घर के अंदर लगाए, जबकि करीब 40 पौधे बाहरी दीवार के आसपास लगाए गए। शुरुआत में उन्हें खुद भी लगता था कि इतने छोटे घर में ज्यादा पौधों के लिए जगह कहां होगी। लेकिन मां के चेहरे की निराशा देखकर उन्होंने अपना इरादा बदल लिया और धीरे-धीरे घर में पौधों की संख्या बढ़ाते चले गए।

लोगों ने कहा ‘पागल’, फिर बदल गई सोच

जैसे-जैसे पौधे बढ़ते गए, Asghar ने उन्हें दरवाजों, दीवारों और घर के अलग-अलग हिस्सों में जगह देना शुरू किया। उनका यह तरीका लोगों को अजीब लगा और कई लोग उन्हें पागल तक कहने लगे। लेकिन वक्त के साथ तस्वीर बदल गई। जब लोगों ने घर को हरियाली से भरा खूबसूरत ठिकाना बनते देखा तो आलोचना की जगह तारीफ शुरू हो गई।

रोज सुबह पौधों के साथ बीतते हैं घंटे

Asghar की दिनचर्या भी इस हरियाली से जुड़ी हुई है। फज्र की नमाज के बाद वह रोज करीब दो से तीन घंटे पौधों को पानी देने और उनकी देखभाल में लगाते हैं।इस पूरे प्रोजेक्ट पर अब तक वह 40 लाख पाकिस्तानी रुपये से ज्यादा खर्च कर चुके हैं। पौधों की देखभाल पर हर महीने करीब 30 हजार पाकिस्तानी रुपये खर्च होते हैं, जिसमें नए पौधे, मिट्टी, गार्डनिंग टूल्स और रखरखाव शामिल है।

5,700 से ज्यादा पेड़-पौधों का घर

कुछ पौधों से शुरू हुआ यह जुनून अब करीब 5,700 पेड़-पौधों तक पहुंच चुका है। Asghar ने ऐसे पौधों की किस्मों को चुना है जो तेज धूप और कड़ाके की सर्दी को सह सकें। इससे उन्हें हर मौसम में पौधों को ढकने जैसी अतिरिक्त परेशानी नहीं होती।

वायरल हुआ तो दूर-दूर से आने लगे लोग

जब इस अनोखे घर की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई। अब दूर-दराज से लोग इस घर को देखने पहुंचते हैं। Asghar बताते हैं कि पहले घर में पर्याप्त रोशनी नहीं थी, लेकिन लोगों के आने के बाद उन्होंने पूरे घर में लाइट्स लगवा दीं, जिससे रात में भी यह जगह रोशनी और हरियाली से जगमगाती नजर आती है।

अब 10 हजार पौधों का लक्ष्य

5,700 से ज्यादा पौधों के बाद भी Asghar रुकना नहीं चाहते। उनका अगला लक्ष्य घर में 10,000 पौधे लगाना है। इसके साथ ही वह Guinness World Records में नाम दर्ज कराने की कोशिश करने की योजना भी बना रहे हैं।

मां की खुशी से शुरू हुआ जुनून

Asghar की कहानी सिर्फ एक असामान्य बगीचा बनाने की नहीं है। इसकी शुरुआत अपनी मां के चेहरे पर खुशी देखने की इच्छा से हुई थी। कुछ पौधों से शुरू हुआ यह प्रयास आज हजारों पेड़-पौधों वाले ऐसे घर में बदल चुका है, जिसे देखने लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी इस घर को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। किसी ने इसे धरती के लिए खूबसूरत तोहफा बताया, तो किसी ने इतने पेड़-पौधों के भार को लेकर घर की संरचना और नींव की मजबूती पर सवाल उठाए।

Video: 81 साल की उम्र में पत्नी के लिए 14 घंटे उठाता रहा भारी सामान, कहानी सामने आते ही लोगों ने जुटाए ₹2 करोड़

जिसे आप सिंक में बहा देते हैं, वो चावल का पानी बचा सकता है आपके हजारों रुपये! जानिए कैसे

अक्सर लोग चावल पकने के बाद बचने वाले पानी को बेकार समझकर इसे फेंक देते है। लेकिन इसे सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यही मांड घर के कई कामों में आसानी से इस्तेमाल हो सकता है। रोज की जरूरतों में छोटी-छोटी चीजों के लिए इसे दोबारा इस्तेमाल करना न सिर्फ आसान है, बल्कि इससे बेवजह चीजें फेंकने की आदत भी कम हो सकती है। इसलिए चावल का पानी बच जाए, तो उसे तुरंत सिंक में डालने के बजाय एक बार इन आसान इस्तेमालों के बारे में जरूर जान लें।

1. पौधों की देखभाल में काम आए

चावल पकाने के बाद बचा हुआ मांड पौधों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे पहले अच्छी तरह ठंडा कर लें और फिर पौधों की मिट्टी में थोड़ी मात्रा डालें। इससे पानी फेंकने की बजाय उसका दोबारा इस्तेमाल हो जाता है।

2. आटा गूंथने में करें इस्तेमाल

आटा गूंथते समय साधारण पानी की जगह थोड़ा चावल का मांड मिलाकर देख सकते हैं। इससे आटा नरम हो सकता है और रोटियां या पराठे भी मुलायम बन सकते हैं। इसके लिए अलग से कुछ खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।

3. बालों में दे सकते हैं एक्स्ट्रा केयर

कई लोग बालों की देखभाल के लिए चावल के पानी का इस्तेमाल करते हैं। इसे बालों और स्कैल्प पर लगाने से बाल थोड़े मुलायम और संभालने में आसान महसूस हो सकते हैं।

4. खाना बनाने में बढ़ाएं स्वाद

चावल के पानी को सिर्फ पीने या फेंकने तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है। इसे सूप, ग्रेवी या स्टिर-फ्राई जैसी डिश में थोड़ी मात्रा में डाला जा सकता है। इसका स्टार्च खाने को हल्का सा गाढ़ापन देता है और टेस्ट को भी अच्छी तरह मिलाने में मदद कर सकता है।

5. बेकिंग में भी आ सकता है काम

ब्रेड, बन या दूसरे बेकिंग आइटम बनाते समय भी चावल के मांड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे आटे में नमी बनी रह सकती है और तैयार चीज का टेक्सचर थोड़ा नरम आ सकता है।

6. घर पर बनाएं हल्का फेस पैक

चावल के पानी को स्किन की देखभाल में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसे कॉटन की मदद से चेहरे पर हल्के से लगाया जा सकता है या ओट्स जैसे सिंपल इंग्रीडिएंट्स के साथ मिलाकर स्किन पैक बनाया जा सकता है।

मांड का इस्तेमाल करते समय बरतें ये सावधानियां

  • चावल के मांड को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
  • इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह ठंडा कर लें और लंबे समय तक रूम टेम्परेचर पर रखकर इस्तेमाल न करें।
  • पौधों में डालने के लिए सिर्फ सादा मांड लें, उसमें नमक, मसाला या तेल मिला हुआ नहीं होना चाहिए।
  • स्किन या बालों पर लगाने से पहले थोड़ी मात्रा में पैच टेस्ट कर लें, यदि आपकी स्किन सेंसेटिव है।
  • मांड का इस्तेमाल हमेशा ताजा और साफ तरीके से करें और यदि उसमें बदबू आने लगे या वह खराब दिखाई दे, तो उसे इस्तेमाल करने से बचें।
इन तरीकों का उपयोग करके आप चावल बनाने के बाद बचे हुए माड़ को घर में कई तरह से काम में ला सकते है और इसे खाना बनाने, पौधों की देखभाल या कुछ रोज के कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है। सही तरीके से दोबारा इस्तेमाल करने पर यह बचा हुआ पानी काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

किचन का वो ‘कचरा’ जो आपकी त्वचा और पौधों के लिए है असली सोना!

आलू की सब्जी या कोई दूसरी डिश बनाने के बाद हम उसके छिलके निकालकर सीधे डस्टबिन में डाल देते हैं। लेकिन जिन्हें हम बेकार समझते हैं, वे घर के कई छोटे-बड़े कामों में इस्तेमाल हो सकते हैं, इन छिलकों को सही तरीके से इस्तेमाल करके बर्तन साफ करने, पौधों की देखभाल करने और यहां तक कि खाने के लिए कुछ नया बनाने में भी काम लिया जा सकता है।

यदि आप भी घर में चीजों को दोबारा इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, तो आलू के छिलकों को फेंकने से पहले एक बार जरूर सोचें। इन्हें थोड़ी मेहनत के साथ उपयोगी चीज में बदला जा सकता है और इससे किचन का कचरा भी कम होगा। आलू के छिलकों के कुछ आसान और काम के इस्तेमाल करके आप घर पर आसानी से आजमा सकते हैं।

potato pos

1. चेहरे की सफाई और निखार में मदद

आलू के छिलकों में कुछ एंटीऑक्सिडेंट और पोषक तत्व पाए जाते हैं, इसलिए कई लोग इन्हें स्किन की देखभाल के लिए इस्तेमाल करते हैं। छिलकों को गुलाब जल से हल्का गीला करके चेहरे पर बहुत हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। आप चाहें तो छिलकों को पीसकर उसमें थोड़ा दूध मिलाकर पेस्ट भी बना सकते हैं। इसे करीब 10 मिनट चेहरे पर लगाकर साफ पानी से धो लें। इससे स्किन साफ और मुलायम महसूस हो सकती है।

2. बालों के लिए इस्तेमाल

आलू के छिलकों से तैयार पानी को बालों की देखभाल के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए छिलकों को करीब 1 लीटर पानी में 10-15 मिनट तक उबालें। पानी आधा रह जाए तो इसे छानकर ठंडा कर लें। शैम्पू करने के बाद इस पानी को बालों और स्कैल्प पर लगाएं और कुछ देर बाद नॉर्मल पानी से धो लें।

3. डार्क सर्कल और टैनिंग के लिए

आलू के छिलकों को डार्क सर्कल, झाइयों और टैनिंग के लिए घरेलू उपाय के समान इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए छिलके के अंदर वाले हिस्से को एफेक्टेड जगह पर करीब 5 मिनट तक बहुत हल्के हाथों से लगाएं। आंखों के आसपास इस्तेमाल करते समय सावधानी रखें और आंखों में जाने से बचाएं। आपकी स्किन सेंसेटिव है, तो पहले पैच टेस्ट जरूर कर लें।

4. वेट लॉस में फायदेमंद

आलू के छिलकों में डाइटरी फाइबर पाया जाता है, जो पेट को कुछ समय तक भरा रखने में मदद कर सकता है। इसी कारण छिलके सहित आलू को डाइट में शामिल किया जा सकता है। यदि आपको कुरकुरा खाना पसंद है, तो साफ किए हुए आलू के छिलकों को हल्के मसालों के साथ बेक या रोस्ट करके स्नैक की तरह भी खा सकते हैं।

5. पौधों के लिए न्यूट्रिशन

आलू के छिलकों को कूड़े में फेंकने के बजाय पौधों की देखभाल में इस्तेमाल किया जा सकता है। इन्हें अच्छी तरह साफ करके कुछ दिनों तक सुखाएं या पानी में भिगोकर इसका पानी तैयार करें। छाने हुए पानी को पौधों की मिट्टी में सीमित मात्रा में डाला जा सकता है। छिलकों को सीधे बहुत ज्यादा मात्रा में मिट्टी में डालने से बचें, ताकि कीड़े न लगे।

6. होम क्लीनिंग में मददगार

आलू के छिलकों से तैयार पानी का इस्तेमाल कुछ घरेलू सफाई के कामों में किया जा सकता है। छिलकों को पानी में उबालकर उस पानी को ठंडा कर लें और फिर इसे सफाई के लिए इस्तेमाल करें। छोटे-मोटे दाग या गंदगी साफ करने में इसे आजमाया जा सकता है।

आलू के छिलके सिर्फ किचन वेस्ट नहीं हैं, बल्कि इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करके स्किन, बालों, पौधों और घर की सफाई जैसे कई कामों में मदद ली जा सकती है। इसलिए अगली बार इन्हें फेंकने से पहले इनके इन आसान इस्तेमालों को जरूर आजमाएं।

मुरझाए पौधे भी होंगे हरे-भरे! चावल के पानी का इस्तेमाल करते समय रखें इन 4 बातों का ध्यान

आजकल पौधों की देखभाल के लिए लोग कई तरह के घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। चावल को धोने के बाद बचा हुआ पानी फेंकने के बजाय कई लोग इसे पौधों में डालते हैं। इसमें मौजूद स्टार्च और कुछ पोषक तत्वों की वजह से इसे पौधों के लिए फायदेमंद माना जाता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार चावल धोने का पानी पौधों में डाल दिया जाए। गमलों में जरूरत से ज्यादा पानी देने से मिट्टी लगातार गीली रह सकती है, जिससे पौधे की जड़ों पर असर पड़ सकता है। इसलिए चावल का पानी इस्तेमाल करने से पहले यह जानना जरूरी है कि इसे कब, कितनी मात्रा में और किस तरह पौधों में डालना सही रहेगा।

ricewtr2

1. कम मात्रा से शुरुआत

छोटे गमलों में चावल का पानी डालते समय ज्यादा सावधानी रखें, क्योंकि इनमें पानी जल्दी जमा हो सकता है। गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद होना जरूरी है। हर पौधे की पानी की जरूरत अलग होती है। पहली बार इस्तेमाल कर रहे हैं तो कम मात्रा से शुरुआत करें और पौधे की मिट्टी, पत्तियों और ग्रोथ पर ध्यान रखें।

2. सादा पानी इस्तेमाल करें

पौधों में वही चावल का पानी डालें जिसमें सिर्फ सादे चावल धोए गए हों। यदि पानी में नमक, तेल, मसाला या साबुन जैसी कोई चीज मिली है, तो उसे गमले में डालने से बचें। ऐसी चीजें मिट्टी की क्वालिटी को प्रभावित कर सकती हैं और पौधे की जड़ों के लिए सही नहीं हैं।

3. ज्यादा पानी का पौधों पर असर

चावल का पानी बार-बार डालने से गमले की मिट्टी लगातार गीली रह सकती है। इससे जड़ों को सही मात्रा में हवा नहीं मिल पाती और जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर पौधे की पत्तियों पर भी दिख सकता है, जैसे पत्तियां पीली पड़ना या ग्रोथ धीमी होना। इसलिए इसे रोज या बहुत ज्यादा मात्रा में डालने से बचें।

4. फफूंद दिखे तो सावधान रहे

चावल के पानी में स्टार्च होता है, इसलिए इसे बार-बार मिट्टी में डालने से कुछ मामलों में मिट्टी की ऊपर फफूंद जैसी लेयर दिखाई दे सकती है। यदि ऐसी लेयर लगातार बढ़ रही है, तो कुछ समय के लिए चावल का पानी देना बंद कर दें और मिट्टी को सूखने का मौका दें।

चावल धोने का पानी पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन इसे पौधों की खाद समझकर रोज डालना भी सही नहीं है. अगर इस्तेमाल करना है तो सादे चावल का साफ पानी लें, उसे ठंडा होने दें और कभी-कभार ही मिट्टी में डालें. सबसे जरूरी है कि गमले में पानी जमा न हो. पौधों की अच्छी ग्रोथ के लिए सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय धूप, सही मिट्टी, पानी और जरूरत के हिसाब से खाद का भी ध्यान रखें.

घर की खूबसूरती और चूहों से बचाव, एक साथ दो काम करेंगे ये 3 खुशबूदार पौधे!

चूहे घर में तो आते ही हैं, इसके साथ ही बगीचे में इनका आना भी कोई नई बात नहीं है। यदि इनकी संख्या बढ़ जाए तो परेशानी भी बढ़ जाती है। कई बार चूहे पौधों और आसपास रखी चीजों को नुकसान पहुंचाने लगते हैं और उनकी वजह से बगीचे की साफ-सफाई बनाए रखना भी मुश्किल हो जाता है।

यदि आप इस परेशानी को कम करना चाहते हैं, तो कुछ आसान घरेलू तरीके आजमा सकते हैं। थोड़ी-सी सावधानी और सही पौधों को बगीचे में जगह देकर चूहों को कम किया जा सकता है। इसके लिए कुछ ऐसे खुशबूदार पौधे भी हैं, जिनकी तेज खुशबू चूहों को बगीचे से दूर रखने में मदद कर सकती है। इन्हें लगाने के साथ बगीचे की साफ-सफाई का ध्यान रखकर आप चूहों की परेशानी को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

ratsssssssss

1. रोजमेरी

रोजमेरी भी तेज खुशबू वाला पौधा है, जिसे बगीचे में लगाना कई तरह से फायदेमंद हो सकता है। इसकी खुशबु चूहों को आसपास नहीं आने देती है। इसे बगीचे की किनारी, घर के बाहर या उन जगहों के पास लगाया जा सकता है जहां चूहों की आवाजाही नजर आती है। रोजमेरी सिर्फ बगीचे की हरियाली नहीं बढ़ाता, बल्कि इसकी पत्तियों का इस्तेमाल खाना बनाने में भी किया जाता है। यानी इसे लगाने से आपको हर्ब भी मिल जाती है और बगीचे में एक खुशबूदार पौधा भी।

2. लैवेंडर

लैवेंडर अपने खूबसूरत फूलों और मन को अच्छी लगने वाली खुशबू के लिए काफी पसंद किया जाता है। इसकी खुशबु बगीचे के आसपास के माहौल को चूहों के लिए कम अट्रैक्ट बनाने में कुछ मदद कर सकती है। आप इसे बगीचे की किनारी, घर के बाहर, बैठने वाली जगह या ऐसे हिस्सों में लगा सकते हैं, जहां चूहे सबसे ज्यादा आते है। लैवेंडर लगाने से बगीचे की सुंदरता भी बढ़ती है और आसपास अच्छी खुशबू बनी रहती है। इसे ज्यादा जगह की जरूरत भी नहीं होती और गमले में भी लगाया जा सकता है।

3. पुदीना

पुदीना अपनी तेज और ताजी खुशबू के लिए जाना जाता है और इसे बगीचे में आसानी से उगाया जा सकता है। इसकी महक चूहों को बगीचे के आसपास आने से रोकती है। खासतौर पर जब इसकी पत्तियों को छुआ या हल्का-सा मसल दिया जाता है, तो खुशबू और ज्यादा फैलती है। इसलिए इसे बगीचे की उन जगहों पर लगाया जा सकता है, जहां चूहे ज्यादा ज्यादा दिखाई देते है। पुदीना लगाने का एक फायदा यह भी है कि इसका उपयोग चटनी, चाय और कई दूसरी चीजों में किया जा सकता है। इसे आप जमीन में लगाने के साथ गमले में भी आसानी से उगा सकते हैं।

चूहों को दूर रखने के दूसरे तरीके

सिर्फ खुशबूदार पौधे लगाने से चूहों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती। अगर बगीचे में उन्हें खाने के लिए चीजें और छिपने की जगह आसानी से मिलती रहे, तो वे बार-बार वहां आ सकते हैं। इसलिए कूड़ेदान को हमेशा ढककर रखें और खाने के बचे हुए टुकड़ों को खुले में न छोड़ें। घर या बगीचे के आसपास खाना गिर जाए, तो उसे तुरंत साफ कर दें और कचरे को सही जगह पर डालें।

बगीचे में सूखे पत्ते, लकड़ियां, गत्ते, पुराने डिब्बे और बेकार सामान जमा न होने दें, क्योंकि चूहे इनमें आसानी से छिप सकते हैं। दीवार, दरवाजे, पाइप या बाउंड्री के आसपास छोटे छेद और दरारें दिखें, तो उन्हें बंद कर दें। साथ ही, घास और झाड़ियों को समय-समय पर काटते रहें, ताकि चूहों को छिपने के लिए कम जगह मिले। इन आसान बातों का ध्यान रखने से बगीचे को चूहों के लिए कम आकर्षक बनाया जा सकता है।

ध्यान रखें

पुदीना, लैवेंडर और रोजमेरी जैसे खुशबूदार पौधे बगीचे में लगाने से चूहों को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, बगीचे की सफाई रखना, खाने की चीजें खुले में न छोड़ना और चूहों के छिपने की जगह हटाना भी जरूरी है। यदि चूहों की समस्या ज्यादा बढ़ गई है या वे घर के अंदर आने लगे हैं, तो सिर्फ इन घरेलू उपायों पर डिपेंड न रहें और जरूरत पड़ने पर प्रोफेशनल पेस्ट कंट्रोल की मदद लें।

रोशनदान के पास बस एक पौधा और घर में बरसेगा पैसा! जानिए फेंग शुई के नियम

घर के रोशनदान को सिर्फ रोशनी और हवा आने की जगह न समझें, इसे हरियाली से भी खूबसूरत बनाया जा सकता है रोशनदान के पास सही पौधे लगाने से घर का यह छोटा सा हिस्सा और भी सुंदर दिखने लगता है। साथ ही, फेंग शुई के अनुसार पौधों को घर में सकारात्मक माहौल और ताजगी से भी जोड़ा जाता है।

 plant 2astro

बैरिंगटोनिया का पेड़

बैरिंगटोनिया अपने खूबसूरत फूलों और हरे-भरे रूप के लिए जाना जाता है। इसके बड़े फूल घर के बड़े आंगन या खुले रोशनदान वाली जगह को बेहद सुंदर बना सकते हैं। फेंग शुई से जुड़ी मान्यताओं में इस पेड़ को समृद्धि, सौभाग्य और शांति का प्रतीक माना जाता है। घर में बड़ा रोशनदान या खुला स्थान है, तो यह पेड़ वहां अच्छी तरह सज सकता है। इसे भरपूर धूप, रेफूलर पानी और पोषक मिट्टी की जरूरत होती है। साथ ही, ड्रेनेज का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि ज्यादा पानी जमा होकर जड़ों को नुकसान न पहुंचाए।

ताइवानी टर्मिनलिया कैटाप्पा 

ताइवानी टर्मिनलिया कैटाप्पा का पेड़ अपनी खूबसूरत पत्तियों और साइज के कारण घर के खुले हिस्सों और बड़े रोशनदान के लिए परफेक्ट है। इसकी पत्तियां ज्यादा घनी नहीं होतीं, इसलिए आसपास की जगह बहुत बंद या भारी नहीं लगती। फेंग शुई की मान्यताओं में इसे पॉजिटिव एनर्जी, बैलेंस और शांति से जोड़ा जाता है। इस पौधे को अच्छी धूप पसंद होती है और रेगुलर पानी की जरूरत पड़ती है। इसे ऐसी मिट्टी में लगाना बेहतर होता है, जिसमें पानी आसानी से निकल सके और पौधे को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिले।

पर्वतीय धन का पेड़

पर्वतीय धन वृक्ष यानी मनी ट्री अपनी घनी हरी पत्तियों के कारण घर के डेकोरेशन में काफी पसंद किया जाता है। फेंग शुई की मान्यताओं के अनुसार इसे धन, समृद्धि, सफलता और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। रोशनदान के पास इसे रखने से घर के उस हिस्से में हरियाली और ताजगी भी बढ़ती है। इस पौधे को तेज रोशनी पसंद है, लेकिन यह हल्की छाया में भी बढ़ सकता है। इसलिए अलग-अलग तरह के रोशनदान वाली जगहों में इसे रखा जा सकता है। मिट्टी सूखने पर पानी दें और गमले या जमीन में पानी जमा न होने दें।

स्टारफ्रूट का पेड़

स्टारफ्रूट का पेड़ अपने हरे पत्तों, छोटे खूबसूरत फूलों और स्वादिष्ट फलों के लिए जाना जाता है। बड़े रोशनदान या खुले आंगन में यह पेड़ अच्छी तरह बढ़ सकता है। इसकी हरियाली घर को नेचुरल और शांत लुक देती है। लोक मान्यताओं में स्टारफ्रूट के पेड़ को समृद्धि, परिवार में एकता और सुख-शांति से जोड़ा जाता है। इसे नियमित पानी की जरूरत होती है, लेकिन मिट्टी में पानी जमा नहीं होना चाहिए। समय-समय पर इसकी शाखाओं की कटाई-छंटाई करें और फर्टिलाइजर दें, ताकि पौधे की अच्छी ग्रोथ बनी रहे।

 

बड़ा फ्रैंगिपानी पेड़

फ्रैंगिपानी यानी प्लुमेरिया अपने खूबसूरत सफेद, गुलाबी और हल्के पीले फूलों के साथ अपनी खुशबू के लिए भी जाना जाता है। इसका मोटा तना और चमकदार हरी पत्तियां इसे अट्रैक्टिव बनाती हैं। फेंग शुई और लोक मान्यताओं में इसे शांति, पवित्रता और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। रोशनदान के पास इसे लगाने से घर में हरियाली के साथ फूलों की खूबसूरती भी देखने को मिलती है। इसे भरपूर धूप पसंद है, इसलिए खुली और अच्छी रोशनी वाली जगह इसके लिए बेहतर रहती है। पौधे को जरूरत के हिसाब से पानी दें और ऐसी मिट्टी चुनें जिसमें पानी आसानी से बाहर निकल सके।

 

रोशनदान के पास सही पौधे लगाने से घर में हरियाली और खूबसूरती बढ़ती है। फेंग शुई की मान्यताओं के अनुसार, ये पौधे घर में सकारात्मक माहौल, शांति और समृद्धि का एहसास भी ला सकते हैं। बस पौधे की जरूरत के हिसाब से धूप, पानी और मिट्टी का ध्यान रखें, ताकि आपका रोशनदान सुंदर और हरा-भरा बना रहे।

किचन से निकला ये देसी जुगाड़ आएगा काम, घर की हरियाली को हरा-भरा बनाने में!

चावल बनाने या धोने के बाद बचा हुआ पानी हम बिना सोचे सिंक में बहा देते हैं। लेकिन इसे फेंकने के बजाय आप अपने घर के पौधों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। सादे चावल के पानी में थोड़ा स्टार्च और कुछ मिनरल्स होते हैं, जो मिट्टी के लिए काम आ सकते हैं और पौधों की अच्छी ग्रोथ में मदद कर सकते हैं।

पौधों में डालने से पहले चावल के पानी को पूरी तरह ठंडा कर लें और जरूरत हो तो इसमें थोड़ा सादा पानी मिला लें। इसमें नमक, तेल या मसाले नहीं होने चाहिए। इसे पत्तियों पर डालने के बजाय पौधे की जड़ों के आसपास की मिट्टी में डालना बेहतर है। अगर आप भी किचन की चीजों का सही इस्तेमाल करके पौधों की देखभाल करना चाहते हैं, तो आगे जानिए कौन-से पौधों में चावल का पानी इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्पाइडर प्लांट और पीस लिली

2plant

स्पाइडर प्लांट को हल्की नमी वाली मिट्टी पसंद होती है। आप कुछ हफ्तों में एक बार इसमें सादा चावल का पानी डाल सकते हैं। इसे पत्तियों पर डालने के बजाय सीधे मिट्टी और जड़ों के पास डालें। साथ ही, जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचें।

पीस लिली को बढ़ने के समय हल्का पोषण पसंद होता है। ऐसे में कभी-कभी सादा चावल का पानी मिट्टी में डाला जा सकता है। इसे पत्तियों पर डालने के बजाय सीधे जड़ों के पास डालें। बहुत ज्यादा चावल का पानी इस्तेमाल न करें।

टमाटर के पौधे और पोथोस

टमाटर के पौधों को अच्छी ग्रोथ, फूल और फल के लिए पर्याप्त पोषण चाहिए। कभी-कभी चावल का पानी जड़ों के पास डाला जा सकता है, लेकिन यह फर्टिलाइजर का ऑप्शन नहीं है। टमाटर के लिए कम्पोस्ट और सही फर्टिलाइजर देना ज्यादा जरूरी है।

पोथोस घर के अंदर आसानी से उगने वाला पौधा है। इसमें कभी-कभी सादा चावल का पानी डाला जा सकता है। इससे मिट्टी को कुछ पोषण मिल सकता है और पौधे की ग्रोथ में मदद मिल सकती है। लेकिन मिट्टी को हमेशा गीला न रखें, क्योंकि ज्यादा पानी से जड़ों को नुकसान हो सकता है।

मनी प्लांट और फर्न

मनी प्लांट मिट्टी पानी दोनों में आसानी से बढ़ता है। मिट्टी में लगे मनी प्लांट को कभी-कभी ठंडा और सादा चावल का पानी दिया जा सकता है। इससे मिट्टी में मौजूद अच्छे माइक्रोब्स को मदद मिल सकती है। इसे नार्मल पानी की जगह नहीं, बल्कि कभी-कभी ही इस्तेमाल करें।

फर्न को हल्की नम मिट्टी पसंद होती है, इसलिए कभी-कभी इसमें सादा चावल का पानी दिया जा सकता है। लेकिन पानी बहुत ज्यादा न डालें, क्योंकि फर्न की जड़ों के पास पानी जमा होने से समस्या हो सकती है। गमले में अच्छी ड्रेनेज होना भी जरूरी है।

चावल का पानी इस्तेमाल करने टिप्स

घर के बगीचे में लगे पौधों के लिए कभी-कभी सादे चावल के पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। पौधों की बढ़त के समय थोड़ी मात्रा में चावल का पानी दिया जा सकता है, लेकिन इसे नार्मल पानी की जगह इस्तेमाल न करें। पौधों में चावल का पानी डालते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हमेशा सादा चावल का पानी इस्तेमाल करें, जिसमें नमक, तेल, मक्खन या मसाले न मिले हों। चावल का पानी पत्तियों पर डालने के बजाय सीधे जड़ों के पास मिट्टी में डालें। पानी देने के रूटीन के साथ हर 2 से 4 हफ्ते में एक बार चावल का पानी देना फायदेमंद है।

नर्सरी जाने की जरूरत नहीं! एक छोटी सी कटिंग का बड़ा कमाल, फूल ही फूल से घर गार्डन बन जायेगा

घर की बालकनी या गार्डन को हरा-भरा बनाने के लिए कम खर्च में मानसून का मौसम सबसे अच्छा होता है। इस मौसम में कई पौधे सिर्फ एक छोटी-सी कटिंग से आसानी से उग जाते हैं। सही तरीका अपनाकर बिना नए पौधे खरीदे भी गार्डन में कई नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इससे न केवल पैसों की बचत होती है, बल्कि घर की हरियाली भी तेजी से बढ़ती है।

 

गुड़हल

This may contain: many different types of flowers in pots on a balcony

गुड़हल की थोड़ी मोटी और मजबूत टहनी कटिंग के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। इसे अच्छी मिट्टी वाले गमले में लगाने के बाद ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती। मानसून की नमी इसकी जड़ों को जल्दी बनने में मदद करती है। कुछ समय बाद नई पत्तियां निकलने लगती हैं और पौधा तेजी से बढ़ने लगता है। सही देखभाल मिलने पर इसमें सुंदर और बड़े फूल भी आने लगते हैं।

 

 

गुलाब

घर में पहले से गुलाब का पौधा है, तो उसकी एक मजबूत और स्वस्थ टहनी काटकर नए गमले में लगा सकते हैं। कटिंग लेते समय ऐसी टहनी चुनें जिसमें कोई बीमारी या कीड़े न लगे हों। अच्छी मिट्टी में लगाने और हल्की नमी बनाए रखने से कुछ ही हफ्तों में नई जड़ें बनने लगती हैं। धीरे-धीरे नई पत्तियां निकलती हैं और पौधा बढ़ने लगता है। सही देखभाल मिलने पर यही पौधा कुछ महीनों बाद सुंदर फूल भी देने लगता है।

 

 

मनी प्लांट

This may contain: many potted plants are on the balcony

मनी प्लांट कटिंग से सबसे आसानी से उगने वाले पौधों में से एक है। इसकी टहनी पर बनी गांठ के नीचे से कटिंग लेकर आप इसे पानी या मिट्टी, दोनों में लगा सकते हैं। बारिश के मौसम में इसकी जड़ें बहुत जल्दी बनती हैं और नया पौधा तेजी से बढ़ने लगता है। यह पौधा घर की सुंदरता बढ़ाता है। इसकी देखभाल भी बहुत आसान होती है।

 

 

बोगनवेलिया

अगर आप रंग-बिरंगे फूलों वाला पौधा लगाना चाहते हैं, तो बोगनवेलिया अच्छा ऑप्शन है। इसकी मजबूत टहनी की कटिंग मानसून में जल्दी जड़ पकड़ लेती है। सही मिट्टी और हल्की देखभाल के साथ यह तेजी से बढ़ता है और कुछ समय बाद खूबसूरत फूलों से भर जाता है। यह घर की दीवार, गेट या बालकनी की सुंदरता भी बढ़ाता है।

 

 

स्नेक प्लांट

स्नेक प्लांट उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो कम देखभाल वाले पौधे पसंद करते हैं। इसकी पत्ती या छोटे हिस्से को अलग करके मिट्टी में लगाने से नया पौधा तैयार किया जा सकता है। यह पौधा कम पानी में भी अच्छी तरह बढ़ता है और ज्यादा देखभाल नहीं मांगता। साथ ही इसे घर के अंदर भी आसानी से रखा जा सकता है। यह हवा को साफ रखने में भी मदद करता है।

 

 

जेड प्लांट

जेड प्लांट अपनी छोटी, मोटी और चमकदार पत्तियों की वजह से बहुत पसंद किया जाता है। इसकी एक छोटी टहनी या पत्ती से भी नया पौधा तैयार किया जा सकता है। बारिश के मौसम में मिट्टी में नमी बनी रहने से इसकी जड़ें जल्दी बढ़ती हैं और पौधा तेजी से बढ़ने लगता है। कई लोग इसे घर में शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी मानते हैं। यह कम देखभाल में भी लंबे समय तक हरा-भरा रहता है।

 

 

देखभाल टिप्स

कटिंग से पौधे उगाने के लिए हमेशा स्वस्थ और मजबूत टहनी का ही चुनाव करें। पौधा लगाने के बाद मिट्टी को हल्का नम रखें, लेकिन उसमें पानी जमा न होने दें। गमले को शुरुआत में ऐसी जगह रखें जहां हल्की धूप या अच्छी रोशनी आती हो। अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी का इस्तेमाल करें ताकि जड़ें सड़ें नहीं। समय-समय पर पौधे की निगरानी करते रहें और सूखी या खराब पत्तियों को हटा दें। थोड़ी-सी देखभाल से कटिंग पौधे में बदल जाएगी।