जिसे आप सिंक में बहा देते हैं, वो चावल का पानी बचा सकता है आपके हजारों रुपये! जानिए कैसे

अक्सर लोग चावल पकने के बाद बचने वाले पानी को बेकार समझकर इसे फेंक देते है। लेकिन इसे सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यही मांड घर के कई कामों में आसानी से इस्तेमाल हो सकता है। रोज की जरूरतों में छोटी-छोटी चीजों के लिए इसे दोबारा इस्तेमाल करना न सिर्फ आसान है, बल्कि इससे बेवजह चीजें फेंकने की आदत भी कम हो सकती है। इसलिए चावल का पानी बच जाए, तो उसे तुरंत सिंक में डालने के बजाय एक बार इन आसान इस्तेमालों के बारे में जरूर जान लें।

1. पौधों की देखभाल में काम आए

चावल पकाने के बाद बचा हुआ मांड पौधों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे पहले अच्छी तरह ठंडा कर लें और फिर पौधों की मिट्टी में थोड़ी मात्रा डालें। इससे पानी फेंकने की बजाय उसका दोबारा इस्तेमाल हो जाता है।

2. आटा गूंथने में करें इस्तेमाल

आटा गूंथते समय साधारण पानी की जगह थोड़ा चावल का मांड मिलाकर देख सकते हैं। इससे आटा नरम हो सकता है और रोटियां या पराठे भी मुलायम बन सकते हैं। इसके लिए अलग से कुछ खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।

3. बालों में दे सकते हैं एक्स्ट्रा केयर

कई लोग बालों की देखभाल के लिए चावल के पानी का इस्तेमाल करते हैं। इसे बालों और स्कैल्प पर लगाने से बाल थोड़े मुलायम और संभालने में आसान महसूस हो सकते हैं।

4. खाना बनाने में बढ़ाएं स्वाद

चावल के पानी को सिर्फ पीने या फेंकने तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है। इसे सूप, ग्रेवी या स्टिर-फ्राई जैसी डिश में थोड़ी मात्रा में डाला जा सकता है। इसका स्टार्च खाने को हल्का सा गाढ़ापन देता है और टेस्ट को भी अच्छी तरह मिलाने में मदद कर सकता है।

5. बेकिंग में भी आ सकता है काम

ब्रेड, बन या दूसरे बेकिंग आइटम बनाते समय भी चावल के मांड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे आटे में नमी बनी रह सकती है और तैयार चीज का टेक्सचर थोड़ा नरम आ सकता है।

6. घर पर बनाएं हल्का फेस पैक

चावल के पानी को स्किन की देखभाल में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसे कॉटन की मदद से चेहरे पर हल्के से लगाया जा सकता है या ओट्स जैसे सिंपल इंग्रीडिएंट्स के साथ मिलाकर स्किन पैक बनाया जा सकता है।

मांड का इस्तेमाल करते समय बरतें ये सावधानियां

  • चावल के मांड को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
  • इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह ठंडा कर लें और लंबे समय तक रूम टेम्परेचर पर रखकर इस्तेमाल न करें।
  • पौधों में डालने के लिए सिर्फ सादा मांड लें, उसमें नमक, मसाला या तेल मिला हुआ नहीं होना चाहिए।
  • स्किन या बालों पर लगाने से पहले थोड़ी मात्रा में पैच टेस्ट कर लें, यदि आपकी स्किन सेंसेटिव है।
  • मांड का इस्तेमाल हमेशा ताजा और साफ तरीके से करें और यदि उसमें बदबू आने लगे या वह खराब दिखाई दे, तो उसे इस्तेमाल करने से बचें।
इन तरीकों का उपयोग करके आप चावल बनाने के बाद बचे हुए माड़ को घर में कई तरह से काम में ला सकते है और इसे खाना बनाने, पौधों की देखभाल या कुछ रोज के कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है। सही तरीके से दोबारा इस्तेमाल करने पर यह बचा हुआ पानी काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

मुरझाए पौधे भी होंगे हरे-भरे! चावल के पानी का इस्तेमाल करते समय रखें इन 4 बातों का ध्यान

आजकल पौधों की देखभाल के लिए लोग कई तरह के घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। चावल को धोने के बाद बचा हुआ पानी फेंकने के बजाय कई लोग इसे पौधों में डालते हैं। इसमें मौजूद स्टार्च और कुछ पोषक तत्वों की वजह से इसे पौधों के लिए फायदेमंद माना जाता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार चावल धोने का पानी पौधों में डाल दिया जाए। गमलों में जरूरत से ज्यादा पानी देने से मिट्टी लगातार गीली रह सकती है, जिससे पौधे की जड़ों पर असर पड़ सकता है। इसलिए चावल का पानी इस्तेमाल करने से पहले यह जानना जरूरी है कि इसे कब, कितनी मात्रा में और किस तरह पौधों में डालना सही रहेगा।

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1. कम मात्रा से शुरुआत

छोटे गमलों में चावल का पानी डालते समय ज्यादा सावधानी रखें, क्योंकि इनमें पानी जल्दी जमा हो सकता है। गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद होना जरूरी है। हर पौधे की पानी की जरूरत अलग होती है। पहली बार इस्तेमाल कर रहे हैं तो कम मात्रा से शुरुआत करें और पौधे की मिट्टी, पत्तियों और ग्रोथ पर ध्यान रखें।

2. सादा पानी इस्तेमाल करें

पौधों में वही चावल का पानी डालें जिसमें सिर्फ सादे चावल धोए गए हों। यदि पानी में नमक, तेल, मसाला या साबुन जैसी कोई चीज मिली है, तो उसे गमले में डालने से बचें। ऐसी चीजें मिट्टी की क्वालिटी को प्रभावित कर सकती हैं और पौधे की जड़ों के लिए सही नहीं हैं।

3. ज्यादा पानी का पौधों पर असर

चावल का पानी बार-बार डालने से गमले की मिट्टी लगातार गीली रह सकती है। इससे जड़ों को सही मात्रा में हवा नहीं मिल पाती और जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर पौधे की पत्तियों पर भी दिख सकता है, जैसे पत्तियां पीली पड़ना या ग्रोथ धीमी होना। इसलिए इसे रोज या बहुत ज्यादा मात्रा में डालने से बचें।

4. फफूंद दिखे तो सावधान रहे

चावल के पानी में स्टार्च होता है, इसलिए इसे बार-बार मिट्टी में डालने से कुछ मामलों में मिट्टी की ऊपर फफूंद जैसी लेयर दिखाई दे सकती है। यदि ऐसी लेयर लगातार बढ़ रही है, तो कुछ समय के लिए चावल का पानी देना बंद कर दें और मिट्टी को सूखने का मौका दें।

चावल धोने का पानी पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन इसे पौधों की खाद समझकर रोज डालना भी सही नहीं है. अगर इस्तेमाल करना है तो सादे चावल का साफ पानी लें, उसे ठंडा होने दें और कभी-कभार ही मिट्टी में डालें. सबसे जरूरी है कि गमले में पानी जमा न हो. पौधों की अच्छी ग्रोथ के लिए सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय धूप, सही मिट्टी, पानी और जरूरत के हिसाब से खाद का भी ध्यान रखें.