दशकों बाद गंगा में हुआ बड़ा चमत्कार! लौटी सबसे कीमती हिल्सा मछली, जानिए क्यों है ये शुभ संकेत

उत्तर प्रदेश के चंदौली से एक अच्छी खबर सामने आई है। करीब तीन दशक बाद उत्तर प्रदेश के चंदौली में हिल्सा मछली दोबारा दिखाई दी है। पिछले कई सालों से इन इलाकों में नजर न आने वाली हिल्सा मछली अब गंगा नदी के मध्य और ऊपरी हिस्सों में फिर से दिखाई देने लगी है। हिल्सा की ये प्रजाति करीब 30 साल पहले गंगा के ऊपरी इलाकों से गायब हो गई थी और अब यहां दोबारा दिखाई दी है।अधिकारियों के मुताबिक, हिल्सा की वापसी नदी के बेहतर होते पर्यावरण और जलीय जीवों की बढ़ती बायोडायवर्सिटी का संकेत है। इसे गंगा नदी को फिर से स्वस्थ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (ICAR-CIFRI) के अनुसार, उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में मार्कंडेय महादेव मंदिर के पास गंगा नदी से दो हिल्सा मछलियां मिली हैं। दोनों मछलियों का कुल वजन करीब 740 ग्राम था।

1975 में बैराज के बाद रुक गया रास्ता

पहले हिल्सा मछली बंगाल की खाड़ी से गंगा नदी के रास्ते वाराणसी, प्रयागराज और ऊपरी इलाकों तक पहुंचती थी। लेकिन 1975 में फरक्का बैराज बनने के बाद हिल्सा के नदी में आगे बढ़ने का रास्ता काफी हद तक रुक गया। इसके कारण मध्य और ऊपरी गंगा में हिल्सा की संख्या तेजी से घट गई और इस मछली पर निर्भर नदी किनारे रहने वाले मछुआरों को भी काफी नुकसान हुआ।

ICAR-CIFRI ने शुरु किया प्रोगाम

हिल्सा मछली का पर्यावरण और मछुआरों की कमाई में खास महत्व है। इसे देखते हुए ICAR-CIFRI, बैरकपुर और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) ने हिल्सा को गंगा में फिर से बढ़ाने के लिए लंबे समय का वैज्ञानिक कार्यक्रम शुरू किया। इसका मकसद हिल्सा के लिए बेहतर माहौल बनाना और नदी में इसकी संख्या बढ़ाना था। संस्थान के अनुसार, 2019 से जून 2026 के बीच हिल्सा की संख्या बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर काम किया गया। ICAR-CIFRI ने नदी में हिल्सा के पालन-पोषण और संख्या बढ़ाने, कृत्रिम प्रजनन, तैयार अंडों और स्पॉन को नदी में छोड़ने के साथ मछलियों की टैगिंग और उनकी निगरानी की। इस पूरी प्रक्रिया में नदी से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित पक्षों को भी शामिल किया गया।

मछलियों की हुई टैगिंग

इस अभियान के दौरान 3.85 लाख से ज्यादा छोटी और बड़ी हिल्सा मछलियों को नदी में छोड़ा गया। इसके अलावा, 40 लाख से अधिक निषेचित अंडे और करीब 9.4 लाख छोटे स्पॉन भी फरक्का बैराज के ऊपर नदी में छोड़े गए। मछलियों की टैगिंग और लगातार निगरानी से उनकी आवाजाही, जीवित रहने और एक जगह से दूसरी जगह जाने की जानकारी जुटाई गई। 2023 से 2025 के बीच निगरानी में हिल्सा की आवाजाही मिर्जापुर तक देखी गई, जिससे पता चला कि यह मछली धीरे-धीरे अपने पुराने इलाकों में वापस लौट रही है।

हिल्सा एक संवेदनशील प्रवासी मछली

विशेषज्ञों के मुताबिक, हिल्सा एक संवेदनशील प्रवासी मछली है और इसका नदी में दोबारा दिखना गंगा के पानी और उसके आसपास के वातावरण के बेहतर होने का संकेत माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, ICAR-CIFRI और NMCG की साझेदारी में वैज्ञानिक शोध, नदी संरक्षण, मैदानी स्तर पर किए गए काम और स्थानीय लोगों की भागीदारी को एक साथ जोड़ा गया। इस पहल से पता चलता है कि लगातार वैज्ञानिक प्रयास, संस्थाओं की जिम्मेदारी और मिलकर बनाई गई योजनाओं के जरिए नदी और उसके जलीय जीवन को बेहतर बनाने में सकारात्मक नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।

हिल्सा की गंगा में दोबारा वापसी से दूसरी स्थानीय और प्रवासी मछलियों को भी नदी में फिर से बसाने की उम्मीद बढ़ी है। संस्थान के मुताबिक, इससे यह बात भी सामने आती है कि नदियों को केवल पानी के इस्तेमाल और प्रबंधन के साधन के रूप में नहीं, बल्कि एक पूरे जीवित पर्यावरण के तौर पर बचाना और संभालना जरूरी है।

Kalanamak Rice: ₹40 से ₹150 पहुंचा कालानमक चावल का भाव! 5 गुना बढ़ा उत्पादन, ‘बुद्ध राइस’ ने किसानों की बल्ले-बल्ले कर दी

Kalanamak Rice: अपनी खास सुगंध और गुणों के लिए फेमस कालानमक चावल की खेती और इसकी बिक्री ने उत्तर प्रदेश के किसानों की किस्मत बदल दी है। हाल के वर्षों में कालानमक चावल के खेती के क्षेत्रफल और प्रोडक्शन दोनों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इससे किसानों की इनकम भी बढ़ी है। साल 2018 में जहां कालानमक चावल का बिक्री मूल्य ₹40 प्रति किलोग्राम था। वहीं, साल 2026 में यह बढ़कर ₹150 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। इसी का असर है कि सामान्य चावल की तुलना में इसकी खेती करने वाले किसानों के लाभ में तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान काला नमक चावल को लेकर अहम जानकारियां शेयर की हैं। उन्होंने बताया कि कीमतों में आए इस भारी उछाल और बेहतर वित्तीय लाभ की वजह से इस धान को उगाने वाले किसानों की संख्या में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। सिद्धार्थनगर जिले में साल 2018 में जहां सिर्फ 2915 किसान कालानमक धान की खेती करते थे। वहीं, 2024 तक यह संख्या बढ़कर 23000 पहुंच गई है। इसके साथ ही सिद्धार्थनगर में 2018 से 2025 के दौरान इसका उत्पादन 5 गुना से अधिक बढ़ा है।

केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली मदद के बारे में जानिए

कालानमक चावल की खेती करने वाले किसानों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों की ओर से वित्तीय, तकनीकी और मार्केटिंग से जुड़ी मदद दी जा रही है। पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) और राज्य सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) मार्जिन मनी योजना के तहत व्यक्तिगत सूक्ष्म इकाइयों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को कालानमक प्रसंस्करण और मिलिंग यूनिट्स बनाने पर 35 फीसदी (अधिकतम ₹10 लाख) तक क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी दी जाती है।

इसके अलावा सरकार कालानमक महोत्सव का आयोजन कर इस चावल के ब्रांड का प्रचार-प्रसार कर रही है। स्थानीय किसानों को आधुनिक प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात सहायता सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सिद्धार्थनगर में ओडीओपी योजना के तहत एक सामान्य सुविधा केंद्र की स्थापना की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने कालानमक चावल के प्रचार, उत्पादन और प्रसंस्करण के लिए विशेष प्रोजेक्ट फंडिंग भी निर्धारित की है।

6 नई उन्नत किस्में विकसित, उत्पादकता हुई लगभग दोगुनी

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तत्वावधान में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली कालानमक चावल की नई किस्मों के विकास और पारंपरिक किस्मों के संरक्षण में लगी हुई है। पारंपरिक किस्मों के अलावा कालानमक की छह नई और उन्नत किस्में जारी और अधिसूचित की गई हैं। इनमें कालानमक KN3, बौना कालानमक 101, बौना कालानमक 102, कालानमक किरण, पूसा नरेंद्र कालानमक 1 और पूसा सीआरडी कालानमक 2 शामिल हैं।

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नई बौनी और अधिक उपज देने वाली ये किस्में बेहद असरदार साबित हो रही हैं। जहां पारंपरिक किस्मों की औसत उपज 2.5 टन प्रति हेक्टेयर होती है, वहीं इन नई किस्मों की औसत उपज 4.5 टन प्रति हेक्टेयर तक मिलती है। बीज कार्यक्रम के तहत पिछले 5 वर्षों (2021-22 से 2025-26) के दौरान कुल 389.6 क्विंटल गुणवत्तापूर्ण कालानमक बीज का उत्पादन कर किसानों को बांटे गए हैं। हर साल 15-20 क्विंटल ब्रीडर बीज का उत्पादन भी किया जा रहा है।

‘बुद्ध राइस’ के नाम से वैश्विक पहचान, सिंगापुर से नेपाल तक निर्यात

सरकार कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के माध्यम से कालानमक चावल के निर्यात को लगातार बढ़ावा दे रही है। APEDA क्षेत्रीय किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़कर सिंगापुर और नेपाल जैसे देशों में निर्यात शिपमेंट की सुविधा प्रदान कर रहा है। जापान, थाईलैंड, वियतनाम, सिंगापुर और म्यांमार जैसे बौद्ध बहुल देशों के हाई प्राइज मार्केट को टारगेट करने के लिए कालानमक चावल को बुद्ध राइस (Buddha Rice) के रूप में ब्रांडेड किया जा रहा है।

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JSW Motors’ Chery iCar V23-based electric SUV to offer AWD

Chery iCar V23

JSW Motors’ third model, an electric SUV based on the Chery iCar V23, is expected to be sold with a dual-motor all-wheel drive powertrain in India, per our sources. This EV will be the first mass-market electric off-roader in India, and its closest rival will be the Mahindra Thar Roxx, which is ICE-powered, but also a 5-door off-road-focused SUV. We even reported previously that JSW’s iCar V23-based EV may be priced under Rs 20 lakh (ex-showroom).

JSW Motors’ iCar V23-based electric SUV: Powertrain

In global markets, the dual-motor AWD version of the iCar V23 packs an 81.76kWh NMC battery pack with an NEDC-certified range of 430km. Combined output is pegged at 211hp and 292Nm, which makes for a rather brisk 0-100kph time of 7.5 seconds (claimed). Top speed is rated at 140kph. The global-spec iCar V23 also supports up to 6.6kW AC and 104kW DC charging speeds.

JSW Motors’ iCar V23-based electric SUV: Exterior and interior

Credit: @torqueculturee via Instagram

Test mules of JSW’s iCar V23-based EV have been spotted on Indian roads on several occasions, hinting at a very similar design to that of the global model. For reference, the global-spec iCar V23 measures 4,220mm in length, 1,915mm in width, and 1,845mm in height, with a wheelbase of 2,735mm. It also has an unladen ground clearance of 210mm.

Size-wise, then, the iCar V23 slots between the Maruti Jimny and Thar Roxx. Styling highlights for the iCar V23 include butch and boxy proportions, muscular bumpers, flared and squared-off fenders, 21-inch alloy wheels, circular LED headlamps, low-set rectangular tail-lamps, and a bootlid-mounted spare wheel.

Inside, the iCar V23 sports a minimalist dashboard layout, comprising a massive 15.4-inch infotainment touchscreen, a three-spoke steering wheel, and two rows of physical controls on the centre console. As for features, the global-spec iCar V23 packs wireless Apple CarPlay and Android Auto, a 540-degree camera, six drive modes, ADAS, powered and ventilated front seats, V2L functionality, a digital key, a 7-speaker sound system, and more.

El Nino Impact: अल नीनो के खतरे पर PMO में हाई लेवल मीटिंग, खेती-जॉब से खाने-पीने के सामान तक अंदर से निकल कर आईं ये 5 बातें जानिए

El Nino Update: देश में खरीफ सीजन पर और इकॉनमी के दूसरे सेक्टर्स पर अल नीनो के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अलर्ट मोड में आ गया है। PIB की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ पीके मिश्रा की अध्यक्षता में 7 जुलाई पीएमओ में एक हाई लेवल बैठक आयोजित की गई। इसमें कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक मामलों और उपभोक्ता मामलों सहित 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक का उद्देश्य अल नीनो की वजह से पैदा होने वाले हालात और मंत्रालयों की तैयारियों का डिटेल में एनालिसिस करना था। आइए आपको बताते हैं कि इस बैठक से निकल कर क्या खास बातें सामने आई हैं:-

1- मानसून का हाल और अल नीनो का अनुमान

बैठक की शुरुआत में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जून से लेकर 7 जुलाई तक देश में हुई बारिश का डिटेल पेश किया। मौसम विभाग के महानिदेशक ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून के आने में करीब 10 दिनों की देरी हुई। वैसे 7 जुलाई तक हुई बारिश के बाद पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर -12% रह गई है।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। जुलाई और अगस्त में कमजोर से मध्यम अल नीनो रहने की उम्मीद है। चूंकि मानसून सीजन की 30% से अधिक बारिश जुलाई में ही होती है इसलिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अल नीनो वर्ष का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उस साल सामान्य से कम या बहुत कम बारिश होगी।

2- कृषि और फसलों को लेकर सरकार की तैयारी

कृषि सचिव ने खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के किसी भी संभावित प्रभाव से निपटने की तैयारियों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर कंटिंजेंसी प्लान को अपडेट किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने जिलों में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए भारतीय कृषि में अल नीनो जोखिमों के प्रबंधन पर SOP जारी की है।

बारिश, जलाशयों में पानी, फसल की बुवाई, बाजार के रुझान और कीट/बीमारी की स्थिति की निगरानी के लिए राज्यों के साथ फसल मौसम निगरानी समूह की वीकली बैठकें बुलाई जा रही हैं। कमजोर राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज के लिए अभियान शुरू किए गए हैं।

3- खाद्य सामग्री और फर्टिलाइजर का बफर स्टॉक

देश में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर भी बैठक में मंथन हुआ। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने खुदरा कीमतों की स्थिति और चावल, गेहूं और दालों के पर्याप्त बफर स्टॉक की जानकारी साझा की। उर्वरक विभाग ने बताया कि रबी सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। दोनों विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे आवश्यक वस्तुओं और उर्वरकों की मैक्रो और माइक्रो दोनों स्तरों पर उपलब्धता की लगातार निगरानी करें।

4- पानी, बिजली और पशुओं के चारे पर फोकस

इस बैठक में पेयजल, सिंचाई और पशुपालन के मोर्चे पर भी मंत्रालयों ने अपनी रिपोर्ट पेश की। पेयजल और स्वच्छता विभाग ने बताया कि स्थिति स्थिर है लेकिन उन्हें संवेदनशील जिलों में माइक्रो लेवल पर प्लानिंग और निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

जल संसाधन विभाग ने बताया कि वर्तमान में भूजल और जलाशयों की स्थिति स्थिर है लेकिन पूरे सीजन इस पर लगातार नजर रखी जाएगी। पशुपालन और डेयरी विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का आकलन करें। इसके लिए चारा विकास योजनाएं बनाने और राज्यों के साथ नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। बिजली विभाग ने भी उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति साझा की।

5- रोजगार, स्वास्थ्य और राज्यों के साथ तालमेल

बैठक में स्वास्थ्य अलर्ट और रोजगार योजनाओं पर भी चर्चा की गई। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने बताया कि हीट वेव, हाई ह्यूमिडिटी और डेंगू के प्रकोप की निगरानी के लिए एडवाइजरी जारी हुई हैं। ग्रामीण विकास विभाग ने जानकारी दी कि 1 जुलाई से ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’ के तहत काम शुरू हो गया है और अब तक 1 करोड़ मानव दिवस रोजगार पैदा किया गया है।

PMO का सख्त निर्देश

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि स्थिति की लगातार निगरानी की जानी चाहिए। मंत्रालयों को कहा गया है कि वे राज्यों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर माइक्रो रणनीति के साथ काम करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कृषि और आर्थिक गतिविधियां अल नीनो से प्रभावित न हों।

‘अल नीनो’ का एनर्जी सिस्टम पर सबसे ज्यादा असर

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एक नए एनालिसिस के अनुसार, इस साल के अल नीनो का सबसे बड़ा ग्लोबल असर भारत के एनर्जी सिस्टम पर पड़ने वाला है। अल नीनो मौसम का एक ऐसा चक्र है जो बार-बार आता है। इससे दुनिया भर में तापमान बढ़ता है।

भारत के सामने दोहरी चुनौती

अल नीनो की वजह से हवा और बारिश कम होने से टरबाइन और हाइड्रोपावर से बिजली का उत्पादन घटेगा। जबकि तापमान बढ़ने से एयर कंडीशनिंग (AC) की मांग बढ़ेगी, जिसमें बहुत ज्यादा बिजली खर्च होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल भर कूलिंग अप्लायंसेज (ठंडा करने वाले उपकरण) के ज्यादा इस्तेमाल से बिजली की मांग 10 टेरावाट-घंटे (TWh) तक बढ़ सकती है, जो दिल्ली की सालाना बिजली खपत का एक-चौथाई हिस्सा है।

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यह एनालिसिस जुलाई 2026 से जून 2027 की अवधि के लिए भारत के पावर सेक्टर पर ला नीना से अल नीनो में बदलाव के असर को दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत को बिजली देने में सौर ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अब यह दिन के समय बिजली की 24 प्रतिशत मांग को पूरा करती है। सौर ऊर्जा उत्पादन पर अल नीनो का बहुत कम असर पड़ता है, जिसका मतलब है कि भारत द्वारा लगाया गया हर अतिरिक्त सोलर पैनल और बैटरी ग्रिड को ऐसे खराब मौसम का सामना करने के लिए तैयार करने में मदद करता है।”

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Totapuri Mango Price Crash: तोतापरी आम के दामों में भारी गिरावट की टेंशन! अब इसके लिए हाई लेवल कमेटी का ऐलान

आंध्र प्रदेश में तोतापरी आम की कीमतों में आई भारी गिरावट और इसके कारण किसानों के बीच पैदा हुए संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने इस समस्या के अध्ययन के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में आंध्र प्रदेश का दौरा किया था। इस दौरे के दौरान किसानों ने उनके सामने पिछले कुछ महीनों में तोतापरी आम की कीमतों में आई भारी गिरावट का मुद्दा उठाया था। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक किसानों ने बताया कि मुख्य रूप से प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए उगाए जाने वाले इस आम के दाम गिरने से उनकी इनकम पर बहुत बुरा असर पड़ा है। किसानों की इसी चिंता को देखते हुए कृषि मंत्री ने कमेटी गठन करने का आदेश जारी किया।

वैल्यू चेन की पूरी समीक्षा करेगी वैज्ञानिकों की कमेटी

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक वैज्ञानिकों और संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधियों को मिलाकर बनाई गई यह कमेटी तोतापरी आम की पूरी वैल्यू चेन की विस्तृत समीक्षा करेगी। इस समीक्षा के दायरे में नीचे दिए गए विषय शामिल होंगे-

तोतापरी आम की खेती

  • प्रोसेसिंग
  • मार्केटिंग
  • घरेलू व्यापार
  • निर्यात

इसके साथ ही यह पैनल किसानों की कमाई में सुधार करने और इस पूरे सेक्टर को एक टिकाऊ व मजबूत स्थिति में लाने के लिए जरूरी उपायों के सुझाव भी देगा।

डॉ टी दामोदरन संभालेंगे कमेटी की कमान

लखनऊ स्थित ICAR-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान से जारी आदेश के मुताबिक इस उच्च स्तरीय समिति की कमान डॉ टी दामोदरन (निदेशक, ICAR-CISH) को सौंपी गई है। वही इसके अध्यक्ष होंगे। कमेटी में इनके अलावा डॉ. एम शंकरण, प्रमुख, फल फसल प्रभाग, ICAR-IIHR, बेंगलुरु, डॉ. एच एस सिंह, प्रधान वैज्ञानिक, ICAR-CISH, डॉ. डी श्रीनिवास रेड्डी, प्रोफेसर, कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर (अनंतराजुपेटा), डॉ. वाईएसआर हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी, आंध्र प्रदेश के बागवानी निदेशक या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि शामिल होंगे।

10 दिनों के भीतर ग्राउंड जीरो पर जाएगी कमेटी

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमेटी को निर्देश दिया है कि वे अगले 10 दिनों के भीतर आंध्र प्रदेश के प्रमुख तोतापरी उत्पादक क्षेत्रों का दौरा करें। ग्राउंड लेवल की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए कमेटी को किसानों, प्रोसेसर्स, निर्यातकों, राज्य के बागवानी अधिकारियों और किसान उत्पादक संगठनों के साथ सीधा परामर्श करने के लिए कहा गया है।

सरकार को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

अपने फील्ड स्टडी और सभी पक्षों के साथ किए गए विचार-विमर्श के आधार पर यह कमेटी कृषि मंत्रालय को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट में कीमतों को स्थिर करने, वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने, प्रोसेसिंग व एक्सपोर्ट क्षमता को मजबूत करने के लिए अहम सिफारिशें शामिल होंगी। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिलकर की जाने वाली संयुक्त कार्रवाई के लिए FPOs, प्रोसेसर्स और निर्यातकों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने का रोडमैप भी सुझाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने साफ तौर पर कहा है कि तोतापरी उत्पादकों की आय और उनकी आजीविका की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कमेटी की रिपोर्ट और निष्कर्षों के आधार पर किसानों की मदद करने, वैल्यू एडिशन को बढ़ाने और इस सेक्टर में निर्यात व निवेश के अवसरों का विस्तार करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। आपको बता दें कि आंध्र प्रदेश में इस समय तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की सरकार है। टीडीपी केंद्र और राज्य दोनों ही जगहों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की एक बेहद महत्वपूर्ण सहयोगी पार्टी है।