UCC Row In NDA: 2029 तक 21 राज्यों में UCC के अमित शाह के दावे को मिला JDU का चैलेंज! TDP और चिराग पासवान का भी सख्त रुख

UCC Row In NDA: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि 21 राज्यों की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेंगी। शाह ने कहा, “तीन तलाक को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। हमने कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू की है। मुझे विश्वास है कि BJP-NDA शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।”

शाह ने कहा कि सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के माध्यम से देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत किया है। साथ ही दावा किया कि कई राज्यों में एक साल में दोषसिद्धि दर में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन साल के भीतर न्याय दिलाने के लिए एक व्यवस्था स्थापित की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर शाह ने कहा कि आर्टिकल 370 और 35ए को बिना एक बूंद खून बहाए या एक गोली चलाए समाप्त किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच दशक से जारी नक्सलवाद को समाप्त किया है। देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 से अधिक शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

UCC पर NDA में हलचल, JDU ने किया विरोध

अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे। फिर उनकी पार्टी अपना रुख तय करेगी। झा ने इस विषय पर पीटीआई से कहा कि वह जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे और उसके बाद पार्टी यूसीसी के मुद्दे पर अपना रुख तय करेगी।

बिहार में लागू नहीं होने देंगे: श्याम रजक

इस बीच, बिहार में सत्तारूढ़ राजग के प्रमुख घटक JDU के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि पार्टी ने संसद में यूसीसी से जुड़े विधेयक का समर्थन किया था। लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।

बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन में सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी ने भले ही नागरिक संहिता से जुड़े विधेयक का संसद में समर्थन किया था। लेकिन वह इसे राज्य में लागू करने के पक्ष में नहीं है। JDU के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रजक ने दावा किया कि इस मुद्दे पर पार्टी का रुख सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।

JDU विधायक दल के नेता एवं बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने भी यूसीसी पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के प्रवक्ता बोलेंगे। उन्होंने कहा कि उनका पक्ष सुनने के बाद वह कुछ कहेंगे। JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूसीसी के मुद्दे पर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत करेंगे। बिहार में भारतीय जनता पार्टी नीत राजग सरकार में JDU दूसरा सबसे बड़ा घटक है। अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है।

चिराग ने भी जताया विरोध

बिहार में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि पहले ड्राफ्ट आए। इसमें सभी पक्षों के हित शामिल रहें। पासवान ने एक पोस्ट में लिखा, “भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है। हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएँ और रीति-रिवाज हैं। संविधान ने स्वयं इसे स्वीकार किया है। पांचवीं-छठी अनुसूची, आर्टिकल 371A व 371G, और अब तक की हर संहिता में अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट इसका प्रमाण है। मेरी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता- दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रारूप सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन हो, व्यापक विचार-विमर्श हो> तत्पश्चात अवलोकन उपरांत पार्टी अपना मत रखेगी।”

TDP का मिला समर्थन

लोकसभा में TDP के नेता लावू कृष्ण देवरायालु ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “हम इसका समर्थन करेंगे।” कृष्ण ने कहा, “अभी तो कोई चर्चा नहीं हो रही है। लेकिन जब भी हमें इसकी जरूरत महसूस होगी, हम इस पर विचार करेंगे। इसे अपनाने से पहले हम निश्चित रूप से अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को इसमें शामिल करेंगे।”

ओवैसी ने यूसीसी को लेकर शाह पर साधा निशाना

देश के 21 राज्यों में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकारों के 2029 से पहले यूसीसी लागू करने के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल मुसलमानों को निशाना बनाना चाहता है।नउन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और शाह संविधान के आर्टिकल 25 (जो धर्म की आजादी की गारंटी देता है) और आर्टिकल 14 (जो समानता के अधिकार की गारंटी देता है) का उल्लंघन करते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

ओवैसी ने कहा कि देश की आत्मा उसकी विविधता है। यूसीसी लागू करने का मतलब गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार द्वारा नियुक्त विधि आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला था कि यूसीसी न तो जरूरी है और न ही वांछनीय। गोवा में यूसीसी के अलग-अलग प्रावधानों का जिक्र करते हुए, उन्होंने पूछा कि क्या शाह और भाजपा पश्चिमी राज्य में भी उसी यूसीसी को लागू करेंगे, जैसा उत्तराखंड जैसे भाजपा-शासित राज्यों में लागू है।

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या एन. चंद्रबाबू नायडू, नीतीश कुमार और चिराग पासवान जैसे NDA नेता यूसीसी के प्रावधानों का समर्थन करेंगे। दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-चीन संबंधों में आए सुधार पर ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या बेहतर द्विपक्षीय संबंधों का मतलब यह है कि भारत ने भारत-चीन सीमा पर अपने गश्त करने के अधिकार खो दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को हथियार दिए थे।

‘सांप्रदायिक राजनीतिक के लिए कर रही यूसीसी का इस्तेमाल’

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा को लेकर सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस मुद्दे का इस्तेमाल सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के लिए कर रही है। माकपा ने कहा कि एकरूपता का मतलब हमेशा समानता नहीं होता और यूसीसी लागू करने की घोषणा से भाजपा का राजनीतिक इरादा स्पष्ट हो गया है।

माकपा ने आरोप लगाया कि BJP समान अधिकारों से जुड़े जटिल सवाल को सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के हथियार में बदल रही है। अगले लोकसभा चुनाव से पहले अपने हिंदुत्व वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है। वाम दल ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और छात्रों की समस्याओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने के बजाय भाजपा एक और विभाजनकारी अभियान चलाने को प्राथमिकता दे रही है।

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3 दिन, 15 मुलाकातें और बड़े फैसले… BRICS Summit में PM मोदी का रहा ‘पावर पैक्ड’ शेड्यूल, ग्लोबल साउथ पर दिया जोर

BRICS Summit 2026: दिल्ली के भारत मंडपम में हुए हाई-प्रोफाइल ब्रिक्स समिट का समापन रविवार को ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ के साथ हुआ, जो भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत थी। वहीं, इस समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शेड्यूल काफी व्यस्त रहा। प्रधानमंत्री ने कम से कम 15 देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के मसूद पेजेशकियन शामिल थे। इन बैठकों के जरिए पीएम मोदी ने भारत के अहम सहयोगियों और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखा।

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भी आयोजन किया, जिसमें उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच मजबूत संबंध बनाने और वैश्विक संस्थागत सुधारों की वकालत की। साथ ही, उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और विकासशील देशों को लाभ पहुंचाने के लिए कई पहल भी प्रस्तावित कीं।

पहला दिन: मोदी की पुतिन और पेजेश्कियान के साथ बैठक

11 सितंबर को, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब यूक्रेन युद्ध के कारण मॉस्को और पश्चिमी देशों के संबंध प्रभावित हो रहे थे। उन्होंने भारत-रूस संबंधों पर व्यापक चर्चा की, जिसमें 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने की रणनीतियां भी शामिल थीं। चर्चाओं में रक्षा, ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग पर भी बात हुई।

इसके कुछ घंटों बाद, उन्होंने भारत मंडपम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की; यह दो हफ्तों में उनकी दूसरी बैठक थी। प्रधानमंत्री ने भारत के इस रुख को दोहराया कि पश्चिम एशिया क्षेत्र के सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए। उन्होंने इस क्षेत्र में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। पेजेश्कियान ने भी इस संघर्ष के बीच भारत से बड़ी कूटनीतिक भूमिका निभाने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। गुटेरेस ने पीएम मोदी को ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता मिलने पर बधाई दी। दोनों नेताओं ने मल्टीपोलैरिटी (बहु-ध्रुवीयता) के महत्व और UN सुरक्षा परिषद सहित बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।

बैठकों के बाद PM मोदी ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया, जहां उन्होंने ग्लोबल इनोवेशन, व्यापार और आर्थिक सहयोग में इस समूह की बढ़ती मजबूती को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच भारत ने अपनी आर्थिक और व्यापारिक नीतियों का आधार मजबूती और इनोवेशन को बनाया है।

दूसरा दिन: सबकी नजरें शी-मोदी पर

प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत किया, जो सात साल बाद भारत की अपनी पहली यात्रा पर आएं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में सुधार के माहौल में हो रही है। शनिवार को ब्रिक्स समिट की भी औपचारिक शुरुआत हुई, जिसमें ग्लोबल गवर्नेंस, मल्टीलेटरलिज्म, आर्थिक सहयोग और ब्रिक्स समूह के विस्तार के बाद उसके भविष्य जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

ब्रिक्स समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि BRICS किसी देश या समूह के खिलाफ नहीं है। उन्होंने ऐसे समय में ज्यादा सहयोग की अपील की जब ‘ग्लोबल साउथ’ मुश्किल दौर से गुजर रहा है। उन्होंने ग्लोबल गवर्नेंस संस्थानों में सुधार के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी बात की।

प्रधानमंत्री ने शी के साथ एक अहम द्विपक्षीय बैठक भी की, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत सीमा सुरक्षा और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर चीन के साथ “अर्थपूर्ण बातचीत” के लिए तैयार है। शी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और चीन एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं और उन्होंने वैश्विक मंच पर दोनों देशों की बड़ी भूमिका की वकालत की। दोनों पक्षों ने फिर से कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए और मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए।

शी के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली, मलेशिया के अनवर इब्राहिम, यूएई के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और वियतनाम के ले मिन्ह हंग के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें कीं।

तीसरा दिन: ब्रिक्स समिट का समापन

ईरान और UAE के बीच तनाव के बावजूद ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ पर पूरी सहमति बनने के बाद, प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स समिट के समापन की औपचारिक घोषणा की। ब्रिक्स की ‘फैमिली फोटो’ में उनके साथ पुतिन और शी भी मौजूद थे। पीएम मोदी ने इसे ब्रिक्स परिवार की बढ़ती ताकत और वैश्विक प्रभाव का एक सशक्त उदाहरण बताया।

अन्य नेताओं के भारत से रवाना होने के दौरान, पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और मिस्र के अब्देल फतह अल-सिसी के साथ भी बैठकें कीं।

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ब्रिक्स का समापन, मोदी की नसीहत

नई दिल्ली। ब्रिक्स के 18वें सम्मेलन का रविवार को समापन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दूसरे सत्र में अपने अध्यक्षीय भाषण में दुनिया के देशों को नसीहत दी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी और दुर्लभ खनिजों को हथियार की तरह इस्तेमाल करना गलत है। मोदी ने कहा कि इससे दुनिया की तरक्की पर असर पड़ता है। मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में समावेशिता होनी चाहिए न कि किसी एक देश का एकाधिकार।

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार की सुबह ब्रिक्स के नेता की ग्रुप फोटो सेशन के बाद ओपन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया भर में तनाव बढ़ रहा है और आज की आपस में जुड़ी दुनिया में एक जगह के तनाव का असर हर देश पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावटों ने दिखाया है कि दुनिया के देश एक दूसरे से जुड़े हैं। एक जगह आया संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है।

मोदी ने ब्रिक्स देशों से आपसी सहयोग बढ़ाने और मजबूत सप्लाई चेन बनाने पर जोर दिया। इससे पहले भारत मंडपम में सदस्य देशों के नेताओं का ग्रुप फोटो सेशन हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के दोनों ओर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नजर आए। इसके बाद अपने भाषण में मोदी ने कहा, ‘ब्रिक्स अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। दुनिया को अब ब्रिक्स से सिर्फ विचार और वादे नहीं, बल्कि ठोस नतीजों की उम्मीद है। मुझे भरोसा है कि हम मिलकर इन उम्मीदों पर खरे उतरेंगे’।

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हुए फैसलों की जानकारी देते हुए मोदी ने कहा कि ‘ब्रिक्स कनेक्ट’ के जरिए लोगों को काम के लिए जरूरी स्किल सिखाने, रोजगार बढ़ाने और महिलाओं को ज्यादा काम के मौके देने पर काम किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि छोटे कारोबारों को मदद देने के लिए ‘ब्रिक्स एमएसएमई’ पोर्टल शुरू किया गया है। इससे छोटे कारोबारी नई जानकारी, पैसे और नए बाजार से जुड़ सकेंगे। उन्होंने बताया कि शहरों में आने जाने की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए भी ब्रिक्स देशों के बीच अनुभव साझा किए जाएंगे। उन्होंने सप्लाई चेन को और बेहतर बनाने के बारे में हुए विचार के बारे में बताया

प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स के अगले सम्मेलन की मेजबानी चीन को सौंपी और इसके लिए उसको शुभकामनाएं दीं। मोदी ने नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सभी नेताओं और उनकी टीमों की सराहना की। अंत में उन्होंने सभी को सुरक्षित और सुखद यात्रा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने समापन भाषण में कहा, ‘हम अब समापन की ओर बढ़ रहे हैं। 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, मैं आप सभी की सक्रिय भागीदारी और बहुमूल्य योगदान के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूं’। मोदी ने आगे कहा, ‘सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी ने सम्मेलन को सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सम्मेलन के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण विचारों और सुझावों ने ब्रिक्स के बीच सहयोग को व्यापकता और गहराई, दोनों प्रदान की हैं’।

कई देशों के साथ मोदी की दोपक्षीय वार्ता

नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कई देशों के नेताओं के साथ दोपक्षीय वार्ता की। ब्रिक्स सम्मेलन के समापन के बाद प्रधानमंत्री मोदी की दोपक्षीय वार्ताएं शुरू हुईं, जो शाम तक जारी रहीं। मोदी ने रविवार को फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर मार्कोस जूनियर के साथ दोपक्षीय बैठक की। उन्होंने कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम जोमार्ट टोकायेव के साथ भी दोपक्षीय बैठक की। इससे पहले शनिवार को उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा ईरान, मलेशिया, यूएई आदि देशों के नेताओं के साथ दोपक्षीय वार्ता की थी।

रविवार को प्रधानमंत्री मोदी की एक अहम दोपक्षीय वार्ता दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा से हुई। दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई। गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के शुरुआती पांच सदस्यों में से एक है। बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल अल सीसी से भी दोपक्षीय वार्ता की। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच इस मुलाकात क अहम माना जा रहा है। मोदी ने युगांडा, नाइजीरिया और बुरूंडी के नेताओं के साथ भी दोपक्षीय वार्ता की।

Traffic advisory: BRICS समिट के आखिरी दिन के लिए ट्रैफिक डायवर्जन का ऐलान! दिल्ली में आज ये रास्ते रहेंगे बंद,देखें- फूल एडवाइजरी

BRICS Summit traffic advisory: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन रविवार (13 सितंबर) के लिए एक डिटेल्स एडवाइजरी जारी की है। इसमें 22 स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन किए जाने और 35 से अधिक सड़कों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित किए जाने की घोषणा की है। प्रगति मैदान स्थित ‘भारत मंडपम’ में आयोजित तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन रविवार को ये पाबंदियां सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक लागू रहेंगी।

इस बीच, 13 सितंबर 2026 को होने वाली NDA/CDS परीक्षा को लेकर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने परीक्षार्थियों और एग्जाम सेंटरों से जुड़े अधिकारियों के लिए विशेष ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने उम्मीदवारों से समय से घर से निकलने और अपने परीक्षा केंद्र का रास्ता पहले से जांच लेने की अपील की है।

आज इन रास्तों से बचें, पूरे दिन रहेंगे बंद!

मध्य और दक्षिण दिल्ली की कई प्रमुख सड़कें इससे प्रभावित होंगी। इनमें सरदार पटेल मार्ग, मदर टेरेसा क्रिसेंट, तीन मूर्ति मार्ग, अकबर रोड, 30 जनवरी मार्ग, राजेश पायलट मार्ग, सुब्रमण्यम भारती मार्ग, मथुरा रोड, मोतीलाल नेहरू मार्ग, डॉ. जाकिर हुसैन मार्ग, ब्रिगेडियर होशियार सिंह मार्ग, अफ्रीका एवेन्यू रोड, सत्य मार्ग, शांति पथ, जनपथ, अशोक रोड, बाराखंभा रोड, टॉल्स्टॉय मार्ग, रणजीत सिंह फ्लाईओवर, नीति रूट, पंचशील रूट, कमाल अतातुर्क रूट, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम रोड, प्रेस एन्क्लेव रोड, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग, जोसेफ ब्रोज टीटो रूट और लाला लाजपत राय रूट शामिल हैं।

डॉ. दिनेश नंदिनी डालमिया चौक पर मथुरा रोड और तिलक मार्ग पर ट्रैफिक कंट्रोल किया जाएगा। पूर्वी और दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले वाहनों को बहादुर शाह जफर मार्ग और इंद्रप्रस्थ रूट से भेजा जाएगा। जबकि नई दिल्ली और कनॉट प्लेस की ओर जाने वाले वाहनों को सिकंदरा रोड से भेजा जाएगा। राम चरण अग्रवाल चौक से डब्ल्यू-पॉइंट की ओर कमर्शियल गाड़ियों की आवाजाही की अनुमति नहीं होगी। ऐसे वाहनों को उनके मंजिल के अनुसार इंद्रप्रस्थ मार्ग, दीनदयाल उपाध्याय रूट या बहादुर शाह जफर मार्ग की ओर मोड़ा जाएगा।

कनॉट प्लेस, पटेल चौक और राम मनोहर लोहिया (RLM) अस्पताल के आसपास भी ट्रैफिक संबंधी पाबंदियां लागू रहेंगी। कनॉट प्लेस के आउटर सर्किल से कस्तूरबा गांधी रूट और जनपथ के रास्ते सी-हेक्सागन की ओर आने वाले वाहनों को वैकल्पिक रूट्स से भेजा जाएगा। दक्षिण दिल्ली में लोधी रोड के आसपास कई स्थानों पर पाबंदियां लगाई जाएंगी। इनमें लोधी रोड के अमृता शेरगिल मार्ग, मैक्स मूलर मार्ग, महर्षि रमण मार्ग और आर्कबिशप मकारियस मार्ग के साथ बने चौराहे शामिल हैं।

मथुरा रोड से भारत मंडपम की ओर आने वाले वाहनों को लोधी और ओबेरॉय फ्लाईओवर के नीचे निर्धारित स्थानों से मोड़ा जाएगा। वाहनों को लोधी रोड, नीला गुंबद और अन्य संपर्क मार्गों की ओर भेजा जाएगा, जबकि ओबेरॉय होटल और गोल्फ लिंक जाने वाले वाहनों को निर्धारित स्थान तक जाने की अनुमति होगी।

एजवाइजरी में दिल्ली रेलवे स्टेशन का भी जिक्र

एडवाइजरी में नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों के लिए वैकल्पिक रूट्स भी बताए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस ने एयरपोर्ट जाने के लिए मेट्रो का इस्तेमाल करने की विशेष रूप से सलाह दी है। मेट्रो के सभी स्टेशन पर सेवाएं पूरी तरह चालू रहेंगी। जबकि VVIP की आवाजाही के दौरान बसों के मार्ग बदले जा सकते हैं। टैक्सी और ऑटोरिक्शा को निर्धारित स्थानों को छोड़कर सड़क किनारे खड़ा करने की अनुमति नहीं होगी।

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इमरजेंसी और मेडिकल सेवाओं से जुड़े वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्हें दिल्ली में बिना किसी बाधा के आने-जाने दिया जाएगा। आवश्यक सेवाओं और जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े कार्यों पर कोई रोक नहीं होगी। ट्रैफिक पुलिस ने हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अंतरराज्यीय बस टर्मिनलों (ISBT) की ओर जाने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने और निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से जाने की सलाह दी है।

Gala Dinner: PM मोदी के गाला डिनर में नहीं शामिल हुए जिनपिंग, सामने आई ये बड़ी वजह

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेशी मेहमानों के लिए आयोजित भव्य गाला डिनर से एक बड़ी खबर सामने आई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस हाई-प्रोफाइल डिनर में शामिल नहीं हुए।

उनके अलावा अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद भी सम्मेलन के बाद वापस अपने देश रवाना हो जाने के कारण इस डिनर में मौजूद नहीं थे।

क्यों गायब रहे शी जिनपिंग? सामने आई यह वजह

चीनी राष्ट्रपति के डिनर में शामिल न होने का सटीक और आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक शी जिनपिंग सम्मेलन के व्यस्त शेड्यूल के बाद आराम करने के लिए सीधे अपने होटल चले गए थे।

गौरतलब है कि शी जिनपिंग शनिवार दोपहर को ही नई दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने दिन में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सत्रों में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक भी की थी।

पुतिन से लेकर कई दिग्गजों की रही मौजूदगी

शी जिनपिंग भले ही डिनर में मौजूद नहीं रहे, लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने पीएम मोदी द्वारा आयोजित इस शाही भोज में शिरकत की। इस डिनर में केंद्र सरकार के कई दिग्गज मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए:

केंद्रीय मंत्री: अमित शाह, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, अश्विनी वैष्णव और शिवराज सिंह चौहान।

मुख्यमंत्री व नेता: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला।

ये सभी केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री संसद भवन से दो बसों में सवार होकर डिनर के वेन्यू यानी भारत मंडपम पहुंचे थे।

डिनर के मेन्यू में क्या था खास?

विदेशी और देसी मेहमानों के लिए परोसे गए भोजन में भारतीय व्यंजनों का खास स्वाद देखने को मिला:

मेन कोर्स: खांडवी मिल-फॉय, खुंब गलोटी, पनीर लबाबदार, गुच्ची मार्मिक, गाजर-बीन्स पोरियल और मिलेट्स (बाजरा) पुलाव।

डेजर्ट (मीठा): पुरानी दिल्ली की फ्रूट क्रीम के साथ गरमा-गरम जलेबी और शहतूत फिरनी परोसी गई।

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BRICS Summit 2026: ‘हम साथ मिलकर काम करें’, भारत आए शी जिनपिंग ने PM मोदी से कही ये बड़ी बात

पूरी दुनिया की नजर इस समय राजधानी दिल्ली पर है। शनिवार 12 सितंबर को दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट की शुरुआत हो गई है। वहीं समिट के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने भारत और चीन के रिश्तों को बेहतर बनाने पर चर्चा की। भारत की ओर से साफ किया गया कि दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें विवाद में बदलने से बचना चाहिए। इस बैठक को दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं। वहीं, राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं और शेयर विकास हासिल कर सकते हैं।

साथ मिलकर काम करने पर जोर

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि मौजूदा मुश्किल अंतरराष्ट्रीय माहौल में भारत और चीन की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दोनों देश दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में शामिल हैं और ग्लोबल साउथ के अहम सदस्य हैं। ऐसे में दोनों को अपने लोगों के हित और पूरी मानवता के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करना चाहिए। शी ने कहा कि BRICS के मंच के जरिए भारत और चीन को बेहतर और मजबूत सहयोग को आगे बढ़ाना चाहिए। साथ ही दोनों देशों को समानता और व्यवस्थित बहुध्रुवीय दुनिया के साथ ऐसे आर्थिक वैश्वीकरण का समर्थन करना चाहिए, जिसमें सभी देशों को साथ लेकर चला जाए और सभी को फायदा मिले। इससे दुनिया में शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

सात साल बाद भारत आए शी जिनपिंग

वहीं दोनों नेताओं ने मुलाकात के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता दोनों देशों के बीच रिश्तों को लगातार मजबूत और बेहतर बनाने के लिए जरूरी आधार है।” बता दें कि, करीब सात साल बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, राजधानी दिल्ली पहुंचे हैं। इससे पहले वह 2019 में भारत आए थे और उस दौरान तमिलनाडु के महाबलीपुरम गए थे। इसके बाद गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के कारण भारत और चीन के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था।

बेहतर हो रहे  भारत-चीन के  रिश्तों 

पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली मुलाकात के बाद भारत-चीन रिश्तों में हो रही लगातार प्रगति का स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों को अपने रिश्तों को लंबे समय और रणनीतिक नजरिए से देखना चाहिए। नेताओं ने कहा कि आपसी मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर दिया कि भारत और चीन के रिश्ते आपसी सम्मान, एक-दूसरे की संवेदनशीलता को समझने और दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ने चाहिए।

 

बैठक के दौरान भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर भी चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बॉर्डर से जुड़े मुद्दे का ऐसा समाधान निकालने पर सहमति जताई, जो दोनों देशों के लिए उचित हो और आपसी बातचीत से स्वीकार किया जा सके। दोनों नेताओं ने सीमा से जुड़े मामलों को बातचीत और समझदारी के साथ सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत-चीन सीमा को लेकर को लेकर भी हुई बात

भारत-चीन सीमा को लेकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बातचीत हुई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने सीमा विवाद का ऐसा समाधान निकालने की इच्छा जताई, जो सही, व्यावहारिक और दोनों देशों को स्वीकार हो। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन में SCO समिट के दौरान हुई थी। अब एक बार फिर हुई इस बैठक को भारत-चीन रिश्तों में सुधार और सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

BRICS Summit में PM मोदी का बड़ा प्रस्ताव, बोले- एकता को ठोस नतीजों में बदलने का समय

BRICS Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स समिट 2026 को संबोधित करते हुए कहा, “भारत में आप सभी का स्वागत और अभिनंदन करते हुए मुझे अत्यंत खुशी हो रही है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता, पीपल सेंट्रिक और ह्यूमैनिटी फर्स्ट अप्रोच पर आधारित है। उन्होंने कहा, लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता हमारी प्राथमिकताएं रही हैं। इन प्राथमिकताओं के साथ हमने ब्रिक्स सहयोग को सामान्य जन से जोड़ने पर विशेष बल दिया है। इसी सोच के साथ 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया। लगभग 30 शहरों में आपकी टीमों का स्वागत करने का हमें अवसर मिला। पीएम मोदी ने कहा, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल बनाने में सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए मैं आप सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।

‘BRICS अब कमिंग ऑफ एज के दौर में’

प्रधानमंत्री कहा, “इस वर्ष का ब्रिक्स समिट एक ऐतिहासिक पड़ाव है। हम ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ बना रहे हैं। मानव जीवन में 20 वर्ष की आयु, मैच्योरिटी और रिस्पॉन्सिबिलिटी के नए चरण का आरंभ करती है। यह वो अवस्था होती है जब सपनों के साथ जिम्मेदारियां जुड़ती हैं। सामर्थ्य को नई दिशा मिलती है। आज ब्रिक्स भी अपने ‘कमिंग ऑफ एज’ के क्षण में है।

उन्होंने कहा, पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हम एक-दूसरे के दर्शकों का सम्मान करते हैं और कर्तव्यनिष्ठ से आगे बढ़ते हैं। हम किसी के विरुद्ध नहीं बल्कि सभी को साथ लेकर चलने की सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं। अब समय है कि हम ब्रिक्स में हमारी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलें।

पीएम मोदी ने समिट में लीडर्स को संबोधित करते हुए आगे कहा, अगले 20 वर्षों के लिए हमें एक नए और एम्बिशियस एजेंडा पर काम करना होगा। इसकी शुरूआत हमें अपने खुद के वर्किंग सिस्टम से करनी होगी। ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बदलती है। किंतु इसकी वजह से हमारी संस्थागत गति नहीं रुकनी चाहिए। मैं ब्रिक्स ‘कंटिन्यूटी एंड इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म’ यानी ‘निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र’ का प्रस्ताव रखता हूं। इसके तहत ट्रोइका (Troika) के माध्यम से सभी पहलों और परिणामों का फॉलोअप हो सकेगा।”

ग्लोबल रिफॉर्म की दिशा भी तय करनी होगी-PM मोदी

उन्हों आगे कहा, “ब्रिक्स को मजबूत करते हुए हमें ग्लोबल रिफॉर्म की दिशा भी तय करनी होगी। ग्लोबल गवर्नेंस का वर्तमान स्ट्रक्चर पिरामिड की तरह दिखाई देता है। इसके ऊपरी भाग में पावर और डिसीजन मेकिंग केंद्रित है और निचले भाग में वो देश हैं जो इन निर्णयों से प्रभावित तो होते हैं लेकिन उन्हें आकार नहीं दे पाते। ग्लोबल साउथ आज वैश्विक संकटों की फ्रंट रॉ में है लेकिन डिसीजन मेकिंग की बैक रो में है।”

नाविकों की सुरक्षा पर PM मोदी ने दिया जोर

BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “समुद्र में काम करने वाले नाविक (Seafarers) वैश्विक व्यापार में बहुत बड़ा योगदान देते हैं, लेकिन मुश्किल समय में उन्हें मदद की जरूरत होती है। मेरा प्रस्ताव है कि हम एक ‘सीफेयरर इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क’ बना सकते हैं। इसके जरिए मुश्किल हालात में नाविकों को अलर्ट भेजने, मेडिकल मदद देने, उनके परिवारों को जानकारी देने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने जैसे कामों में सहायता दी जा सकती है।”

ग्लोबल साउथ बने Rule-Shaper: PM मोदी

प्रधानमंत्री ने अंत में कहा, “तीसरी बात जो मैं रखना चाहता हूं, वह नियम बनाने से जुड़ी है। भविष्य के वैश्विक नियम तय करने में समान भागीदारी सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। AI, साइबरस्पेस, बाहरी अंतरिक्ष, बायोटेक्नोलॉजी और अहम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र भविष्य के अवसरों के साथ भविष्य के नियम भी तय कर रहे हैं। हमें ‘ग्लोबल साउथ’ को ‘नियम मानने वाले’ (rule-taker) से ‘नियम बनाने वाले’ (rule-shaper) बनाने के प्रयास करने होंगे। BRICS के जरिए, हम ग्लोबल साउथ के देशों के युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत के कौशल, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी विशेषज्ञता प्रदान कर सकते हैं।”

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भारत में आकर ब्रिक्स के मंच से गरजे पुतिन, बोले- वर्चस्व वापस पाने की नाकाम कोशिश कर रहे पुराने नेता, जानिए उनके निशाने पर कौन

Putin BRICS Speech: नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों और पारंपरिक आर्थिक महाशक्तियों पर करारा हमला बोला है। पुतिन ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस समय गहरे और बुनियादी बदलाव हो रहे हैं। 20वीं सदी के उत्तरार्ध में दुनिया के विकास की अगुवाई करने वाले तथाकथित पुराने नेता अब पीछे छूट रहे हैं और उनकी जगह आर्थिक गतिविधियों के नए केंद्र यानी विकास के नए इंजन ले रहे हैं। पुतिन ने पश्चिमी देशों पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ब्रिक्स के बढ़ते असर को देखकर उनके प्रतिस्पर्धी अपनी खोई हुई बढ़त वापस हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। पुतिन ने कहा कि उनकी इन कोशिशों की वजह से यह कंपीटिशन कई बार काफी अनुचित और गंदा रूप लेता नजर आ रहा है।

पुराने नेतृत्व की जगह ले रहे विकास के नए इंजन

अपने संबोधन में रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि दुनिया की अर्थव्यवस्था में शक्ति का संतुलन तेजी से बदल रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि पारंपरिक आर्थिक ताकतों के पास आज भी मजबूत बुनियादी ढांचा, तकनीकी बढ़त, वैज्ञानिक लाभ और वैज्ञानिक संस्थान मौजूद हैं लेकिन इसके बावजूद आर्थिक बदलाव को रोका नहीं जा सकता। पुतिन ने कहा कि जो देश पहले आर्थिक विकास की अगुवाई करते थे अब उनकी जगह नए उभरते हुए केंद्र ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने और मजबूत अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध बनाने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच कारोबारी संबंधों और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

G7 को पछाड़ ब्रिक्स ने बनाई बढ़त: वैश्विक GDP में 40% हिस्सेदारी

ब्रिक्स देशों की बढ़ती आर्थिक ताकत का आंकड़ा पेश करते हुए पुतिन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान दुनिया की कुल आर्थिक वृद्धि में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान ब्रिक्स देशों का रहा है जबकि इस दौरान G7 देशों की हिस्सेदारी सिर्फ 18 फीसदी रही। पुतिन ने बताया कि वैश्विक जीडीपी में अब ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। ये आंकड़ा दुनिया के आर्थिक मंच पर ब्रिक्स के बढ़ते वजन को दिखाता है।

‘प्रतिस्पर्धा की बात करने वाले पश्चिमी देश अपना रहे भद्दे तरीके’

पश्चिमी देशों की नीतियों और प्रतिस्पर्धा पर प्रहार करते हुए पुतिन ने कहा कि पश्चिमी प्रतिस्पर्धी ब्रिक्स के उभार पर नजर बनाए हुए हैं और अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त वापस पाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें बताया जाता रहा है कि प्रतिस्पर्धा पवित्र है, लेकिन हमारे पश्चिमी प्रतिस्पर्धी अपनी बढ़त वापस पाने के लिए सब कुछ कर रहे हैं और कई बार यह बहुत ही भद्दा और अनुचित रूप ले लेता है।

रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मॉस्को अभी 30000 से ज्यादा प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी देश रूस और उसके सहयोगियों पर लगातार आर्थिक दबाव बना रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने भारत से उभरती हुई टेक्नोलॉजी दिग्गज कंपनियों का भी उल्लेख किया।

ईरान और ब्राजील ने भी उठाई आर्थिक दबाव के खिलाफ आवाज

इस मंच से ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने भी अपने विचार रखे। मसूद पेजेशकियान ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सप्लाय चेन में रुकावटों और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक हथियारों के इस्तेमाल पर चिंता जताई। वहीं ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने कहा कि 1960 के दशक से अब तक दुनिया की जीडीपी में निम्न और मध्यम आय वाले देशों की हिस्सेदारी 20% से बढ़कर 50% से अधिक हो गई है।

ब्रिक्स का निर्यात बढ़कर 6 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा: पीयूष गोयल

फोरम में भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि ब्रिक्स का निर्यात 2003 के 900 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में लगभग 6 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। इसके साथ ही वैश्विक निर्यात में ब्रिक्स की हिस्सेदारी करीब दोगुनी होकर 24 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। बिजनेस फोरम के दौरान ग्लोबल वैल्यू चेन को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं, कृषि व कृषि-प्रौद्योगिकी, सेवा व्यापार, महिला आधारित उद्यमों और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यह बैठक शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले आयोजित की गई।

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पीएम मोदी ने पुतिन को गिफ्ट किया तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद, जानिए क्या है ये और कौन थे इसे लिखने वाले संत तिरुवल्लुवर?

PM Modi & Putin Meeting: 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत आए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान भारतीय संस्कृति और साहित्य की अनूठी झलक देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन को तमिल साहित्य के महान और कालजयी ग्रंथ तिरुक्कुरल (Thirukkural) का विशेष रूप से तैयार किया गया रूसी अनुवाद भेंट किया। भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने वाले इस तोहफे के बाद एक बार फिर महान तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल और इसके रचयिता संत तिरुवल्लुवर की चर्चा पूरी दुनिया में शुरू हो गई है।

क्या है तिरुक्कुरल ग्रंथ?

तिरुक्कुरल (तमिल में इसका अर्थ पवित्र दोहे या संक्षेप में ‘कुरल’ है) तमिल साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण और असरदार मानी जाने वाली कालजयी रचना है। इस महान ग्रंथ का तमिल संस्कृति, जीवनशैली और दर्शन पर गहरा प्रभाव रहा है। यह ग्रंथ कुल 1330 संक्षिप्त दोहों (कुरल) का एक अद्वितीय संग्रह है। ये दोहे जीवन के अलग-अलग पहलुओं जैसे कि नैतिकता, सुशासन, प्रेम, अर्थ और आध्यात्मिकता पर कालातीत विजडम यानी कि ज्ञान देते हैं। इसके दोहे बहुत ही संक्षिप्त, सटीक और काव्यात्मक रूप में लिखे गए हैं। इस वजह से इन्हें आसानी से याद रखा जा सकता है और जीवन में उतारा जा सकता है।

तीन प्रमुख खंडों में विभाजित है ग्रंथ की संरचना

तिरुक्कुरल को मुख्य रूप से तीन प्रमुख भागों या पुस्तकों में विभाजित किया गया है। इन्हें अराम’, ‘पोरुल’ और ‘इन्बम’ कहा जाता है।

अराम (Aram – धर्म/सद्गुण): इस खंड में धार्मिकता, सत्य, कृतज्ञता और करुणा जैसे मानवीय मूल्यों और सद्गुणों पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह हर परिस्थिति में नैतिक मूल्यों का पालन करने और धर्म परायण जीवन जीने के महत्व पर जोर देता है।

पोरुल (Porul – अर्थ/धन और शासन): यह भाग सांसारिक मामलों, शासन कला, अर्थव्यवस्था और मित्रता के बारे में प्रैक्टिकल इनसाइट है। इसमें धन प्रबंधन, कुशल प्रशासन और अच्छे संग के महत्व के बारे में बताया गया है।

इन्बम (Inbam – काम/प्रेम): यह खंड मानवीय भावनाओं, प्रेम और पारिवारिक जीवन की जटिलताओं और सुंदरता की गहराई में ले जाता है।

कौन थे संत तिरुवल्लुवर?

संत तिरुवल्लुवर को तमिल संस्कृति और इतिहास के सबसे प्रमुख और आदरणीय साहित्यिक शख्सियतों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि संत तिरुवल्लुवर ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर पांचवीं शताब्दी के बीच तमिल साहित्य के स्वर्ण काल यानी संगम काल के दौरान थे। उनका जन्म मायलापुर (मौजूदा चेन्नई का हिस्सा) के एक साधारण परिवार में हुआ था। तिरुवल्लुवर को सिर्फ एक कवि ही नहीं, बल्कि एक महान दार्शनिक और संत के रूप में भी जाना जाता है। उनके द्वारा लिखा गया ‘तिरुक्कुरल’ आज भी दुनिया भर के लोगों को सही जीवन जीने और सुशासन का मार्ग दिखाता है।

आपको बता दें कि पीएम मोदी अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देते हैं। इससे पहले भी वह विश्व नेताओं को भगवद्गीता, उपनिषद और तमिल ग्रंथ भेंट कर चुके हैं। ऐसे में पुतिन को उनकी यह भेंट दोनों देशों के बीच न सिर्फ रणनीतिक और आर्थिक बल्कि गहरे सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों की ओर भी इशारा करती है।

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