UCC Row In NDA: 2029 तक 21 राज्यों में UCC के अमित शाह के दावे को मिला JDU का चैलेंज! TDP और चिराग पासवान का भी सख्त रुख

UCC Row In NDA: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि 21 राज्यों की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेंगी। शाह ने कहा, “तीन तलाक को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। हमने कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू की है। मुझे विश्वास है कि BJP-NDA शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।”

शाह ने कहा कि सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के माध्यम से देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत किया है। साथ ही दावा किया कि कई राज्यों में एक साल में दोषसिद्धि दर में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन साल के भीतर न्याय दिलाने के लिए एक व्यवस्था स्थापित की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर शाह ने कहा कि आर्टिकल 370 और 35ए को बिना एक बूंद खून बहाए या एक गोली चलाए समाप्त किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच दशक से जारी नक्सलवाद को समाप्त किया है। देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 से अधिक शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

UCC पर NDA में हलचल, JDU ने किया विरोध

अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे। फिर उनकी पार्टी अपना रुख तय करेगी। झा ने इस विषय पर पीटीआई से कहा कि वह जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे और उसके बाद पार्टी यूसीसी के मुद्दे पर अपना रुख तय करेगी।

बिहार में लागू नहीं होने देंगे: श्याम रजक

इस बीच, बिहार में सत्तारूढ़ राजग के प्रमुख घटक JDU के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि पार्टी ने संसद में यूसीसी से जुड़े विधेयक का समर्थन किया था। लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।

बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन में सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी ने भले ही नागरिक संहिता से जुड़े विधेयक का संसद में समर्थन किया था। लेकिन वह इसे राज्य में लागू करने के पक्ष में नहीं है। JDU के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रजक ने दावा किया कि इस मुद्दे पर पार्टी का रुख सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।

JDU विधायक दल के नेता एवं बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने भी यूसीसी पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के प्रवक्ता बोलेंगे। उन्होंने कहा कि उनका पक्ष सुनने के बाद वह कुछ कहेंगे। JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूसीसी के मुद्दे पर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत करेंगे। बिहार में भारतीय जनता पार्टी नीत राजग सरकार में JDU दूसरा सबसे बड़ा घटक है। अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है।

चिराग ने भी जताया विरोध

बिहार में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि पहले ड्राफ्ट आए। इसमें सभी पक्षों के हित शामिल रहें। पासवान ने एक पोस्ट में लिखा, “भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है। हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएँ और रीति-रिवाज हैं। संविधान ने स्वयं इसे स्वीकार किया है। पांचवीं-छठी अनुसूची, आर्टिकल 371A व 371G, और अब तक की हर संहिता में अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट इसका प्रमाण है। मेरी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता- दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रारूप सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन हो, व्यापक विचार-विमर्श हो> तत्पश्चात अवलोकन उपरांत पार्टी अपना मत रखेगी।”

TDP का मिला समर्थन

लोकसभा में TDP के नेता लावू कृष्ण देवरायालु ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “हम इसका समर्थन करेंगे।” कृष्ण ने कहा, “अभी तो कोई चर्चा नहीं हो रही है। लेकिन जब भी हमें इसकी जरूरत महसूस होगी, हम इस पर विचार करेंगे। इसे अपनाने से पहले हम निश्चित रूप से अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को इसमें शामिल करेंगे।”

ओवैसी ने यूसीसी को लेकर शाह पर साधा निशाना

देश के 21 राज्यों में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकारों के 2029 से पहले यूसीसी लागू करने के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल मुसलमानों को निशाना बनाना चाहता है।नउन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और शाह संविधान के आर्टिकल 25 (जो धर्म की आजादी की गारंटी देता है) और आर्टिकल 14 (जो समानता के अधिकार की गारंटी देता है) का उल्लंघन करते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

ओवैसी ने कहा कि देश की आत्मा उसकी विविधता है। यूसीसी लागू करने का मतलब गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार द्वारा नियुक्त विधि आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला था कि यूसीसी न तो जरूरी है और न ही वांछनीय। गोवा में यूसीसी के अलग-अलग प्रावधानों का जिक्र करते हुए, उन्होंने पूछा कि क्या शाह और भाजपा पश्चिमी राज्य में भी उसी यूसीसी को लागू करेंगे, जैसा उत्तराखंड जैसे भाजपा-शासित राज्यों में लागू है।

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या एन. चंद्रबाबू नायडू, नीतीश कुमार और चिराग पासवान जैसे NDA नेता यूसीसी के प्रावधानों का समर्थन करेंगे। दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-चीन संबंधों में आए सुधार पर ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या बेहतर द्विपक्षीय संबंधों का मतलब यह है कि भारत ने भारत-चीन सीमा पर अपने गश्त करने के अधिकार खो दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को हथियार दिए थे।

‘सांप्रदायिक राजनीतिक के लिए कर रही यूसीसी का इस्तेमाल’

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा को लेकर सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस मुद्दे का इस्तेमाल सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के लिए कर रही है। माकपा ने कहा कि एकरूपता का मतलब हमेशा समानता नहीं होता और यूसीसी लागू करने की घोषणा से भाजपा का राजनीतिक इरादा स्पष्ट हो गया है।

माकपा ने आरोप लगाया कि BJP समान अधिकारों से जुड़े जटिल सवाल को सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के हथियार में बदल रही है। अगले लोकसभा चुनाव से पहले अपने हिंदुत्व वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है। वाम दल ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और छात्रों की समस्याओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने के बजाय भाजपा एक और विभाजनकारी अभियान चलाने को प्राथमिकता दे रही है।

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