Vladimir Putin: यूरोप के साथ युद्ध पर पुतिन का बड़ा ऐलान, यूक्रेन से शांति वार्ता पर कही ये बात

Russia Europe Conflict & Ukraine Peace Talks: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप के साथ किसी भी तरह के सैन्य टकराव की आशंकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है। नाटो के कुछ यूरोपीय सदस्य देशों द्वारा रूस के हमले की चेतावनी दिए जाने के बाद पुतिन ने दोटूक कहा कि मॉस्को की यूरोपीय देशों से दुश्मनी बढ़ाने की कोई ‘मंशा’ नहीं है और रूस यूरोप के साथ किसी भी तरह के युद्ध की तैयारी नहीं कर रहा है।

सेंट पीटरसबर्ग में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने यूरोप की सैन्य तैयारियों और यूक्रेन के साथ रुकी हुई शांति वार्ता की संभावनाओं पर खुलकर बात की।

‘यूरोप से किसी टकराव की तैयारी नहीं’- पुतिन

यूरोपीय देशों द्वारा रूस से भावी हमले के दावों पर सवाल उठाते हुए पुतिन ने कहा, ‘यूरोप में कई लोग यह बात कर रहे हैं कि उन्हें रूस से हमले की आशंका है, इसलिए उनका मानना है कि उन्हें खुद युद्ध की तैयारी करनी चाहिए। मैं एक बार फिर जोर देकर कहना चाहता हूं कि हम यूरोप के साथ किसी भी तरह के संघर्ष की तैयारी नहीं कर रहे हैं।’

पुतिन ने नाटो के उन दावों की तीखी आलोचना की जिनमें कहा जा रहा है कि मॉस्को व्यापक संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है।

यूरोप में बढ़ता तनाव और नाटो के आरोप

पुतिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई यूरोपीय देशों ने रूस की ओर से संभावित तोड़फोड़, ड्रोन गतिविधियों और अन्य सीक्रेट हाइब्रिड ऑपरेशन्स पर गहरी चिंता जताई है।

हाल ही में जर्मनी ने मॉस्को पर लेइपज़िग एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले की योजना बनाने का आरोप लगाया था। वहीं, पोलैंड ने भी चेतावनी दी थी कि रूस यूक्रेन का समर्थन करने वाले देशों पर मिसाइलें और ड्रोन दाग सकता है।

वैसे क्रैमलिन ने बार-बार दोहराया है कि वह नाटो देशों के साथ सीधे टकराव की ओर नहीं बढ़ रहा है और उसने यूरोपीय संघ या नाटो सदस्यों में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ में अपनी संलिप्तता से साफ इनकार किया है।

यूक्रेन के साथ शांति वार्ता की टेबल पर वापसी संभव, लेकिन…

यूक्रेन के साथ शांति वार्ता फिर से शुरू करने के सवाल पर राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि वार्ता के प्रस्ताव अब भी टेबल पर मौजूद हैं, लेकिन रूस अपने अगले कदम सोच-समझकर उठाएगा। पुतिन ने संकेत दिया कि हाल ही में रूसी क्षेत्र में हुए यूक्रेनी हमलों के बाद मॉस्को अपनी रणनीति और स्थिति पर विचार कर रहा है।

पुतिन ने कहा, फिर से बातचीत शुरू करने के प्रस्ताव टेबल पर हैं और यह बिल्कुल संभव है लेकिन यूक्रेन द्वारा की गई हालिया हरकतों के बाद, हम अपने अगले कदमों पर गहराई से विचार करेंगे।’

“पुतिन शांति चाहते हैं, जेलेंस्की युद्ध बढ़ाना चाहते हैं!” रूस-यूक्रेन संघर्ष पर ट्रंप का बड़ा बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर निशाना साधा है। ट्रंप ने कहा कि पुतिन इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं, न कि इसे अगले 10 साल तक चलते हुए देखना चाहते हैं। बता दें कि ट्रंप ने यह दावा जेलेंस्की के साथ हुई बातचीत के बाद किया। ट्रंप ने कहा, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन युद्ध खत्म करना चाहते हैं, जबकि यूक्रेनी नेता संघर्ष को लंबा खींचना चाहते हैं।

ट्रंप ने कहा, “आज जेलेंस्की के साथ हमारी मीटिंग हुई, और उनके नजरिए से यह मीटिंग अच्छी नहीं रही। मुझे लगता है कि उन्होंने अपनी स्थिति का जरूरत से ज्यादा फायदा उठाने की कोशिश की। मैं शांति चाहता हूं, न कि 10 साल तक चलने वाली जंग या कोई खेल-तमाशा। हम शांति चाहते हैं! वह लड़ते रहना चाहते हैं, जबकि हम मौतों को रोकना चाहते हैं। पिछले हफ्ते 2,000 लोग मारे गए। राष्ट्रपति पुतिन इसे खत्म करना चाहते हैं, जबकि जेलेंस्की हमें 10 साल की लड़ाई में उलझाए रखना चाहते हैं। ऐसा नहीं होगा।”

इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि यूक्रेन के साथ युद्ध के कारण रूस ने दुर्भाग्य से अपने डीजल तेल उद्योग के कुछ हिस्सों पर से नियंत्रण खो दिया है।

ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर लिखा, “उनकी कई डीजल रिफाइनरियों को उड़ा दिया गया है और वे कम से कम कुछ समय के लिए तो बंद ही हैं। यूक्रेन के साथ चल रहे इस बेतुके और कभी न खत्म होने वाले युद्ध को खत्म किया जाना चाहिए। पूरी दुनिया को नुकसान हो रहा है क्योंकि हर महीने 25,000 लोग, जिनमें ज्यादातर सैनिक हैं, मारे जा रहे हैं। कितनी शर्म की बात है!”

ट्रंप के साथ बैठक से ‘बहुत कुछ बदल सकता है’- जेलेंस्की

ट्रंप से बातचीत के बाद, जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति उनसे न्यूयॉर्क में मिलने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इस बैठक से “बहुत कुछ बदल सकता है” और इससे “राजनयिक गति” मिलेगी।

जेलेंस्की ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के कीव दौरे के लिए ट्रंप का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों ने यूक्रेन के हालात पर विस्तार से चर्चा की।

जेलेंस्की ने आगे कहा, “शांति की कोशिश हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।” उन्होंने बताया कि तनाव कम करने और सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों को सुलझाने के लिए कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई है। इनमें ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और लोगों की जान की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।

उन्होंने यह भी बताया, “हम अमेरिकी टीम के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और बहुत गंभीर कदम उठाने के लिए तैयार हैं।”

जेलेंस्की ने ट्रंप का लिंडसे ग्राहम के समर्थन वाले बिल को कानून का रूप देने के लिए भी धन्यवाद किया। उन्होंने एक बार फिर कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि युद्ध का समाधान शांति के जरिए निकाला जाना चाहिए।

जेलेंस्की ने कहा, “यूक्रेन के साथ खड़े रहने वाले हर व्यक्ति का धन्यवाद। हमारी मदद करने वाले सभी लोगों का भी धन्यवाद।”

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रूस पर ट्रंप का शिकंजा, 100% टैरिफ वाले बिल पर किया साइन, जानें भारत और चीन पर कैसे पड़ेगा असर

Russia Sanctions Bill: भारत और चीन जैसे देशों के लिए एक बड़ी और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस बिल से उन्हें उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं।

Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 के तहत रूस के एनर्जी सेक्टर, सीनियर अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और उन टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिन्हें पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन टैंकरों को आमतौर पर ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है।

भारत-चीन पर कैसे पड़ेगा असर?

बुधवार को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने यह कानून 262-159 के अंतर से पास कर दिया। इससे पहले इस बिल को सीनेट से मंजूरी मिल चुकी थी। नए कानून के तहत रूस से तेल या गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े खरीदार देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत या चीन पर तुरंत 100% टैरिफ लगा दिया जाएगा। टैरिफ लगाना है या नहीं और अगर लगाना है तो किस दर पर, इसका फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे।

जानकारी के मुताबिक, इस कानून का मकसद एनर्जी एक्सपोर्ट से मॉस्को की कमाई कम करना और यूक्रेन युद्ध को लेकर उस पर दबाव बढ़ाना है।

कब लागू हो सकता है टैरिफ?

यह कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर लागू हो जाएगा। इसके तहत, उन देशों से आयातित सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाना जरूरी है, जो कानून बनने से पहले के 12 महीनों में कुल मात्रा के हिसाब से रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदार रहे हों। अगर किसी देश का रूसी गैस आयात, लागू अवधि के दौरान रूस के कुल निर्यात का 15 प्रतिशत से कम रहा हो और उसने उस आयात को कम करने के लिए “महत्वपूर्ण कदम” उठाए हों, तो उसे गैस से जुड़े शुल्कों से छूट मिलती है।

भारत ने रिश्तों पर असर पड़ने की चेतावनी दी

भारत ने वॉशिंगटन को पहले ही चेतावनी दे दी है कि नए कदमों से दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है। नई दिल्ली ने कहा है कि वह एनर्जी सिक्योरिटी के लिए प्रतिबद्ध है और मार्केट की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग सप्लायर्स से तेल खरीदना जारी रखेगी।

बता दें कि भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है। जबकि चीन भी एक बड़ा खरीदार है, इसलिए नए कानून के तहत दोनों देशों पर असर पड़ सकता है।

वहीं, इस कानून से ट्रंप को टैरिफ के बारे में बड़े फैसले लेने की छूट मिलती है और कुछ खास स्थितियों में छूट देने का भी प्रावधान है।

भारत के लिए यह कानून ऐसे समय में आया है, जब नई दिल्ली, रूस से तेल खरीदने को लेकर वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव और अपनी एनर्जी की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

शी जिनपिंग के दौरे से बढ़ सकती है टेंशन

सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप के इस कदम से ठीक पहले, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत के लिए वॉशिंगटन आने वाले हैं।

यह बैठक एक दशक में शी की पहली व्हाइट हाउस यात्रा होगी और इस साल दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने की दूसरी मुलाकात होगी। इससे पहले उनकी मुलाकात मई में बीजिंग में हुई थी।

इस बैठक में व्यापार एक अहम मुद्दा हो सकता है। इसके अलावा ताइवान को लेकर तनाव, ईरान युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर बनी अस्थायी शांति को आगे बढ़ाने की कोशिशों पर भी चर्चा हो सकती है।

गौरतलब है कि रूस पर लगाए गए नए प्रतिबंधों वाला कानून दोनों देशों के बीच दबाव का एक और मुद्दा बन सकता है, क्योंकि चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले दुनिया के सबसे बड़े देशों में शामिल है।

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3 दिन, 15 मुलाकातें और बड़े फैसले… BRICS Summit में PM मोदी का रहा ‘पावर पैक्ड’ शेड्यूल, ग्लोबल साउथ पर दिया जोर

BRICS Summit 2026: दिल्ली के भारत मंडपम में हुए हाई-प्रोफाइल ब्रिक्स समिट का समापन रविवार को ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ के साथ हुआ, जो भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत थी। वहीं, इस समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शेड्यूल काफी व्यस्त रहा। प्रधानमंत्री ने कम से कम 15 देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के मसूद पेजेशकियन शामिल थे। इन बैठकों के जरिए पीएम मोदी ने भारत के अहम सहयोगियों और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखा।

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भी आयोजन किया, जिसमें उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच मजबूत संबंध बनाने और वैश्विक संस्थागत सुधारों की वकालत की। साथ ही, उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और विकासशील देशों को लाभ पहुंचाने के लिए कई पहल भी प्रस्तावित कीं।

पहला दिन: मोदी की पुतिन और पेजेश्कियान के साथ बैठक

11 सितंबर को, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब यूक्रेन युद्ध के कारण मॉस्को और पश्चिमी देशों के संबंध प्रभावित हो रहे थे। उन्होंने भारत-रूस संबंधों पर व्यापक चर्चा की, जिसमें 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने की रणनीतियां भी शामिल थीं। चर्चाओं में रक्षा, ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग पर भी बात हुई।

इसके कुछ घंटों बाद, उन्होंने भारत मंडपम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की; यह दो हफ्तों में उनकी दूसरी बैठक थी। प्रधानमंत्री ने भारत के इस रुख को दोहराया कि पश्चिम एशिया क्षेत्र के सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए। उन्होंने इस क्षेत्र में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। पेजेश्कियान ने भी इस संघर्ष के बीच भारत से बड़ी कूटनीतिक भूमिका निभाने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। गुटेरेस ने पीएम मोदी को ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता मिलने पर बधाई दी। दोनों नेताओं ने मल्टीपोलैरिटी (बहु-ध्रुवीयता) के महत्व और UN सुरक्षा परिषद सहित बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।

बैठकों के बाद PM मोदी ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया, जहां उन्होंने ग्लोबल इनोवेशन, व्यापार और आर्थिक सहयोग में इस समूह की बढ़ती मजबूती को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच भारत ने अपनी आर्थिक और व्यापारिक नीतियों का आधार मजबूती और इनोवेशन को बनाया है।

दूसरा दिन: सबकी नजरें शी-मोदी पर

प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत किया, जो सात साल बाद भारत की अपनी पहली यात्रा पर आएं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में सुधार के माहौल में हो रही है। शनिवार को ब्रिक्स समिट की भी औपचारिक शुरुआत हुई, जिसमें ग्लोबल गवर्नेंस, मल्टीलेटरलिज्म, आर्थिक सहयोग और ब्रिक्स समूह के विस्तार के बाद उसके भविष्य जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

ब्रिक्स समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि BRICS किसी देश या समूह के खिलाफ नहीं है। उन्होंने ऐसे समय में ज्यादा सहयोग की अपील की जब ‘ग्लोबल साउथ’ मुश्किल दौर से गुजर रहा है। उन्होंने ग्लोबल गवर्नेंस संस्थानों में सुधार के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी बात की।

प्रधानमंत्री ने शी के साथ एक अहम द्विपक्षीय बैठक भी की, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत सीमा सुरक्षा और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर चीन के साथ “अर्थपूर्ण बातचीत” के लिए तैयार है। शी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और चीन एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं और उन्होंने वैश्विक मंच पर दोनों देशों की बड़ी भूमिका की वकालत की। दोनों पक्षों ने फिर से कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए और मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए।

शी के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली, मलेशिया के अनवर इब्राहिम, यूएई के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और वियतनाम के ले मिन्ह हंग के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें कीं।

तीसरा दिन: ब्रिक्स समिट का समापन

ईरान और UAE के बीच तनाव के बावजूद ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ पर पूरी सहमति बनने के बाद, प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स समिट के समापन की औपचारिक घोषणा की। ब्रिक्स की ‘फैमिली फोटो’ में उनके साथ पुतिन और शी भी मौजूद थे। पीएम मोदी ने इसे ब्रिक्स परिवार की बढ़ती ताकत और वैश्विक प्रभाव का एक सशक्त उदाहरण बताया।

अन्य नेताओं के भारत से रवाना होने के दौरान, पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और मिस्र के अब्देल फतह अल-सिसी के साथ भी बैठकें कीं।

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भारत में आकर ब्रिक्स के मंच से गरजे पुतिन, बोले- वर्चस्व वापस पाने की नाकाम कोशिश कर रहे पुराने नेता, जानिए उनके निशाने पर कौन

Putin BRICS Speech: नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों और पारंपरिक आर्थिक महाशक्तियों पर करारा हमला बोला है। पुतिन ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस समय गहरे और बुनियादी बदलाव हो रहे हैं। 20वीं सदी के उत्तरार्ध में दुनिया के विकास की अगुवाई करने वाले तथाकथित पुराने नेता अब पीछे छूट रहे हैं और उनकी जगह आर्थिक गतिविधियों के नए केंद्र यानी विकास के नए इंजन ले रहे हैं। पुतिन ने पश्चिमी देशों पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ब्रिक्स के बढ़ते असर को देखकर उनके प्रतिस्पर्धी अपनी खोई हुई बढ़त वापस हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। पुतिन ने कहा कि उनकी इन कोशिशों की वजह से यह कंपीटिशन कई बार काफी अनुचित और गंदा रूप लेता नजर आ रहा है।

पुराने नेतृत्व की जगह ले रहे विकास के नए इंजन

अपने संबोधन में रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि दुनिया की अर्थव्यवस्था में शक्ति का संतुलन तेजी से बदल रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि पारंपरिक आर्थिक ताकतों के पास आज भी मजबूत बुनियादी ढांचा, तकनीकी बढ़त, वैज्ञानिक लाभ और वैज्ञानिक संस्थान मौजूद हैं लेकिन इसके बावजूद आर्थिक बदलाव को रोका नहीं जा सकता। पुतिन ने कहा कि जो देश पहले आर्थिक विकास की अगुवाई करते थे अब उनकी जगह नए उभरते हुए केंद्र ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने और मजबूत अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध बनाने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच कारोबारी संबंधों और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

G7 को पछाड़ ब्रिक्स ने बनाई बढ़त: वैश्विक GDP में 40% हिस्सेदारी

ब्रिक्स देशों की बढ़ती आर्थिक ताकत का आंकड़ा पेश करते हुए पुतिन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान दुनिया की कुल आर्थिक वृद्धि में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान ब्रिक्स देशों का रहा है जबकि इस दौरान G7 देशों की हिस्सेदारी सिर्फ 18 फीसदी रही। पुतिन ने बताया कि वैश्विक जीडीपी में अब ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। ये आंकड़ा दुनिया के आर्थिक मंच पर ब्रिक्स के बढ़ते वजन को दिखाता है।

‘प्रतिस्पर्धा की बात करने वाले पश्चिमी देश अपना रहे भद्दे तरीके’

पश्चिमी देशों की नीतियों और प्रतिस्पर्धा पर प्रहार करते हुए पुतिन ने कहा कि पश्चिमी प्रतिस्पर्धी ब्रिक्स के उभार पर नजर बनाए हुए हैं और अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त वापस पाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें बताया जाता रहा है कि प्रतिस्पर्धा पवित्र है, लेकिन हमारे पश्चिमी प्रतिस्पर्धी अपनी बढ़त वापस पाने के लिए सब कुछ कर रहे हैं और कई बार यह बहुत ही भद्दा और अनुचित रूप ले लेता है।

रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मॉस्को अभी 30000 से ज्यादा प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी देश रूस और उसके सहयोगियों पर लगातार आर्थिक दबाव बना रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने भारत से उभरती हुई टेक्नोलॉजी दिग्गज कंपनियों का भी उल्लेख किया।

ईरान और ब्राजील ने भी उठाई आर्थिक दबाव के खिलाफ आवाज

इस मंच से ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने भी अपने विचार रखे। मसूद पेजेशकियान ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सप्लाय चेन में रुकावटों और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक हथियारों के इस्तेमाल पर चिंता जताई। वहीं ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने कहा कि 1960 के दशक से अब तक दुनिया की जीडीपी में निम्न और मध्यम आय वाले देशों की हिस्सेदारी 20% से बढ़कर 50% से अधिक हो गई है।

ब्रिक्स का निर्यात बढ़कर 6 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा: पीयूष गोयल

फोरम में भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि ब्रिक्स का निर्यात 2003 के 900 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में लगभग 6 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। इसके साथ ही वैश्विक निर्यात में ब्रिक्स की हिस्सेदारी करीब दोगुनी होकर 24 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। बिजनेस फोरम के दौरान ग्लोबल वैल्यू चेन को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं, कृषि व कृषि-प्रौद्योगिकी, सेवा व्यापार, महिला आधारित उद्यमों और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यह बैठक शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले आयोजित की गई।

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पीएम मोदी ने पुतिन को गिफ्ट किया तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद, जानिए क्या है ये और कौन थे इसे लिखने वाले संत तिरुवल्लुवर?

PM Modi & Putin Meeting: 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत आए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान भारतीय संस्कृति और साहित्य की अनूठी झलक देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन को तमिल साहित्य के महान और कालजयी ग्रंथ तिरुक्कुरल (Thirukkural) का विशेष रूप से तैयार किया गया रूसी अनुवाद भेंट किया। भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने वाले इस तोहफे के बाद एक बार फिर महान तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल और इसके रचयिता संत तिरुवल्लुवर की चर्चा पूरी दुनिया में शुरू हो गई है।

क्या है तिरुक्कुरल ग्रंथ?

तिरुक्कुरल (तमिल में इसका अर्थ पवित्र दोहे या संक्षेप में ‘कुरल’ है) तमिल साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण और असरदार मानी जाने वाली कालजयी रचना है। इस महान ग्रंथ का तमिल संस्कृति, जीवनशैली और दर्शन पर गहरा प्रभाव रहा है। यह ग्रंथ कुल 1330 संक्षिप्त दोहों (कुरल) का एक अद्वितीय संग्रह है। ये दोहे जीवन के अलग-अलग पहलुओं जैसे कि नैतिकता, सुशासन, प्रेम, अर्थ और आध्यात्मिकता पर कालातीत विजडम यानी कि ज्ञान देते हैं। इसके दोहे बहुत ही संक्षिप्त, सटीक और काव्यात्मक रूप में लिखे गए हैं। इस वजह से इन्हें आसानी से याद रखा जा सकता है और जीवन में उतारा जा सकता है।

तीन प्रमुख खंडों में विभाजित है ग्रंथ की संरचना

तिरुक्कुरल को मुख्य रूप से तीन प्रमुख भागों या पुस्तकों में विभाजित किया गया है। इन्हें अराम’, ‘पोरुल’ और ‘इन्बम’ कहा जाता है।

अराम (Aram – धर्म/सद्गुण): इस खंड में धार्मिकता, सत्य, कृतज्ञता और करुणा जैसे मानवीय मूल्यों और सद्गुणों पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह हर परिस्थिति में नैतिक मूल्यों का पालन करने और धर्म परायण जीवन जीने के महत्व पर जोर देता है।

पोरुल (Porul – अर्थ/धन और शासन): यह भाग सांसारिक मामलों, शासन कला, अर्थव्यवस्था और मित्रता के बारे में प्रैक्टिकल इनसाइट है। इसमें धन प्रबंधन, कुशल प्रशासन और अच्छे संग के महत्व के बारे में बताया गया है।

इन्बम (Inbam – काम/प्रेम): यह खंड मानवीय भावनाओं, प्रेम और पारिवारिक जीवन की जटिलताओं और सुंदरता की गहराई में ले जाता है।

कौन थे संत तिरुवल्लुवर?

संत तिरुवल्लुवर को तमिल संस्कृति और इतिहास के सबसे प्रमुख और आदरणीय साहित्यिक शख्सियतों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि संत तिरुवल्लुवर ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर पांचवीं शताब्दी के बीच तमिल साहित्य के स्वर्ण काल यानी संगम काल के दौरान थे। उनका जन्म मायलापुर (मौजूदा चेन्नई का हिस्सा) के एक साधारण परिवार में हुआ था। तिरुवल्लुवर को सिर्फ एक कवि ही नहीं, बल्कि एक महान दार्शनिक और संत के रूप में भी जाना जाता है। उनके द्वारा लिखा गया ‘तिरुक्कुरल’ आज भी दुनिया भर के लोगों को सही जीवन जीने और सुशासन का मार्ग दिखाता है।

आपको बता दें कि पीएम मोदी अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देते हैं। इससे पहले भी वह विश्व नेताओं को भगवद्गीता, उपनिषद और तमिल ग्रंथ भेंट कर चुके हैं। ऐसे में पुतिन को उनकी यह भेंट दोनों देशों के बीच न सिर्फ रणनीतिक और आर्थिक बल्कि गहरे सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों की ओर भी इशारा करती है।

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Brics Summit: भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान जबर्दस्त कूटनीतिक हलचल दिखने वाली है। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए दुनियाभर से 11 सदस्य देशों, 10 पार्टनर देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के शीर्ष नई दिल्ली पहुंच चुके हैं या पहुंच रहे हैं।

इस सम्मेलन के ग्लोबल एजेंडे के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 11 से 13 सितंबर के दौरान वैश्विक नेताओं के साथ बड़े पैमाने पर द्विपक्षीय मुलाकातें करेंगे। इस बीच पीएम मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए इस सम्मेलन में दुनिया भर की भलाई को ध्यान में रखते हुए सार्थक चर्चा होने की उम्मीद भी जताई है।

आइए जानते हैं ब्रिक्स सम्मेलन के संदर्भ में 11 से 13 सितंबर के बीच पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू की द्विपक्षीय बैठकों का पूरा शेड्यूल क्या है और किन दिग्गज नेताओं से मुलाकात होने वाली है-

11 सितंबर: बैठकों के पहले दिन का शेड्यूल

सम्मेलन के औपचारिक आगाज से एक दिन पहले ही 11 सितंबर से उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों का दौर शुरू हो रहा है

पुतिन के साथ बैठक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता।

पेजशिकियान के साथ बैठक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच मुलाकात।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख से मुलाकात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस की बैठक।

12 सितंबर: शी जिनपिंग समेत दिग्गज नेताओं से मुलाकात

12 सितंबर को ब्रिक्स सम्मेलन के मेन सेशन के साथ-साथ पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू कई राष्ट्रप्रमुखों से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय चर्चा करेंगे-

इथियोपिया: पीएम नरेंद्र मोदी की इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ बैठक।

मलेशिया: पीएम मोदी की मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ बातचीत।

यूएई (अबू धाबी): पीएम मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की मुलाकात।

वियतनाम: पीएम मोदी की वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ बैठक।

ईरान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की औपचारिक मुलाकात।

चीन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक।

13 सितंबर: आखिरी दिन की कूटनीतिक मैराथन

सम्मेलन के अंतिम दिन यानी 13 सितंबर को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक नेताओं के साथ बैक-टू-बैक बैठकों का दौर जारी रहेगा-

कजाकिस्तान: पीएम मोदी की कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव के साथ बैठक।

फिलिपिंस: पीएम मोदी और फिलिपिंस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर की मुलाकात।

मिस्र: पीएम मोदी की मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी के साथ चर्चा।

दक्षिण अफ्रीका: पीएम मोदी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति मातामेला सिरिल रामाफोसा की बैठक।

बुरुंडी: पीएम मोदी की बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्ट नदाहिशिमिये के साथ बातचीत।

नाइजीरिया: पीएम मोदी और नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति सेनेटर कासिम शेट्टिमा की मुलाकात।

युगांडा: पीएम मोदी की युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो के साथ द्विपक्षीय बैठक।

11 से 13 सितंबर तक चलने वाली इन मैराथन मुलाकातों के जरिए भारत फूड और एनर्जी सिक्योरिटी, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, व्यापार, प्रौद्योगिकी और ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार जैसे मुद्दों पर दुनिया के प्रमुख देशों के साथ आपसी सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी में है।

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BRICS सम्मेलन के लिए पहुंच गए पुतिन, इस बीच 11-13 सितंबर की ट्रैफिक एडवाइजरी जानिए, दिल्ली में क्या-क्या बंद रहेगा?

BRICS updates: भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार तड़के दिल्ली पहुंच गए हैं। दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन के लिए ग्लोबल लीडर्स का आना शुरू हो चुका है। इस हाई प्रोफाइल आयोजन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और ट्रैफिक पुलिस ने शहर भर में कड़े सुरक्षा इंतजाम और व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए हैं।

राष्ट्रपति पुतिन का तीन दिवसीय भारत दौरा और सम्मेलन का शेड्यूल

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत किया। फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस से बाहर किसी ब्रिक्स सम्मेलन में पुतिन की यह पहली व्यक्तिगत उपस्थिति है।

आइए अब आपको ब्रिक्स सम्मेलन के तहत 11 से 13 सितंबर तक का पूरा शेड्यूल बताते हैं।

11 सितंबर (शुक्रवार): राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। इसमें रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स पर चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों नेता ‘इनोप्रोम’ (INNOPROM) प्रदर्शनी में भाग लेंगे। इसके अलावा पुतिन ब्रिक्स बिजनेस फोरम के पूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे।

12 सितंबर (शनिवार): दोपहर 2:35 बजे से ‘समावेशी वैश्विक शासन और मल्टीलैटरिज्म को मजबूत करने’ पर क्लोज डोर सेशन के साथ मुख्य सम्मेलन की शुरुआत होगी। इसके बाद भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी, फैमिली फोटो, वृक्षारोपण और रात 7:30 बजे पीएम मोदी द्वारा आयोजित गाला डिनर होगा।

13 सितंबर (रविवार): सुबह 10:50 बजे से उद्घाटन सत्र शुरू होगा। इसका विषय Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability रखा गया है। सम्मेलन का समापन ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration) के साथ होगा।

इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, यूएई (अबू धाबी) के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नहयान, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग समेत कई देशों के राष्ट्रप्रमुख और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस भाग ले रहे हैं।

ट्रैफिक एडवाइजरी: किन रास्तों पर रहेगा असर और कौन सी सड़कें रहेंगी बंद?

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सम्मेलन के दौरान पूरी दिल्ली बंद नहीं रहेगी, लेकिन वीवीआईपी काफिले की आवाजाही के समय अस्थायी रूप से यातायात रोका जा सकता है। शहर में 35 से अधिक प्रमुख सड़कों और 22 डायवर्जन पॉइंट्स पर पाबंदियां लागू की गई हैं। मथुरा रोड, सरदार पटेल मार्ग, शांति पथ, जनपथ, अशोका रोड, बाराखंबा रोड, टॉलस्टॉय मार्ग, अफ्रीका एवेन्यू रोड, नीति मार्ग, पंचशील मार्ग और एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर ट्रैफिक रेगुलेशन की पाबंदियां देखने को मिलेंगी। नोएडा से मध्य दिल्ली, पूर्वी दिल्ली से मध्य दिल्ली, तथा द्वारका व पश्चिमी दिल्ली से धौला कुआं, हवाई अड्डे व दक्षिणी दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को अधिक समय लग सकता है।

दिल्ली में क्या खुला रहेगा और क्या रहेगा बंद?

न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने स्पष्ट किया है कि कनॉट प्लेस मार्केट 11 से 13 सितंबर के दौरान पूरी तरह खुला रहेगा। लोग नियमित समय पर खरीदारी और खान-पान के लिए जा सकते हैं, हालांकि उन्हें ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर स्थित दिल्ली मेट्रो म्यूजियम 11 से 13 सितंबर तक बंद रहेगा। 14 सितंबर को सोमवार की साप्ताहिक छुट्टी होने के कारण यह अब 15 सितंबर को खुलेगा। मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी। हालांकि, सुरक्षा कारणों से कुछ स्टेशनों या प्रवेश-निकास द्वारों पर अस्थायी पाबंदियां लगाई जा सकती हैं।

डीटीसी और सिटी बसें चलती रहेंगी, लेकिन प्रभावित इलाकों से गुजरने वाले रूटों में बदलाव किया जा सकता है। ऑटो, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब सेवाएं चालू रहेंगी, लेकिन प्रतिबंधित या नियंत्रित क्षेत्रों में पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ पॉइंट बनाने की अनुमति नहीं होगी। दूध, दवाइयों और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति को छूट दी जाएगी। हालांकि, भारी वाहनों और ट्रकों के प्रवेश के समय और रास्तों पर विशेष प्रतिबंध लागू रहेंगे।

छात्रों, मरीजों और आम यात्रियों के लिए सलाह

ट्रैफिक पुलिस ने यूपीएससी (UPSC), एनडीए (NDA), सीडीएस (CDS) और अन्य परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को अपने परीक्षा केंद्रों के रास्ते पहले से जांचने, एडमिट कार्ड और पहचान पत्र साथ रखने तथा पर्याप्त समय पहले घर से निकलने की सलाह दी है। अस्पताल जाने वाले मरीजों को भी अतिरिक्त समय लेकर चलने की सलाह दी गई है। किसी भी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में तुरंत नजदीकी ट्रैफिक पुलिसकर्मी से संपर्क करने को कहा गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर ‘दिल्ली बंद’ से जुड़ी फर्जी अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करने की अपील की है।

BRICS Summit 2026: दिल्ली में मौजूद रहेंगे दुनिया के ये ताकतवर नेता, ब्रिक्स सम्मेलन के लिए कौन-कौन आ रहा, ये रही पूरी लिस्ट

BRICS Summit 2026: दुनिया भर में बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच, भारत शनिवार से शुरू हो रहे दो दिन के ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का इस्तेमाल इस समूह को आर्थिक विकास के एक सहयोगी इंजन के तौर पर पेश करने के लिए कर रहा है। साथ ही, भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की विकास से जुड़ी मुख्य प्राथमिकताओं—खासकर खाद्य, ऊर्जा और सप्लाई चेन की सुरक्षा—की वकालत भी कर रहा है।

बता दें कि नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन की तैयारियां पूरी हो रही हैं, और चीन ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इसमें शामिल होने की पुष्टि भी कर दी है। करीब सात साल बाद यह उनकी भारत यात्रा होगी।

इस अहम बैठक में शामिल होने वाले अन्य शीर्ष नेताओं में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो शामिल हैं।

भारत के शीर्ष अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की मुख्य विकास प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए ब्रिक्स (BRICS) समूह को एक अहम और पूरक मंच के तौर पर आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार विवादों और भू-राजनीतिक बदलावों से पैदा हो रही आर्थिक चुनौतियों के बीच, हम खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता और मजबूत सप्लाई चेन से जुड़ी अहम कमजोरियों को दूर करने पर ध्यान दे रहे हैं।

BRICS Summit के बीच ग्लोबल इकोनॉमी के सामने बड़ी चुनौतियां

बता दें कि नई दिल्ली में यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी) और ट्रंप प्रशासन की व्यापार व टैरिफ नीतियों के बुरे असर का सामना कर रही है।

समिट शुरू होने में बस दो दिन बचे हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि ग्रुप के सदस्य देश किसी साझा बयान पर सहमत हो पाए हैं या नहीं, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच मतभेद बने हुए हैं। यह ग्रुप आम सहमति के आधार पर काम करता है।

BRICS में शुरू में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका शामिल थे। 2024 में इसका विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल किया गया, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल होगा।

पिछले साल बेलारूस, बोलीविया, कज़ाकिस्तान, क्यूबा, ​​मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम BRICS के पार्टनर देश बने।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS का बढ़ता दबदबा

ध्यान दे कि BRICS एक प्रभावशाली ग्रुप के तौर पर उभरा है, क्योंकि यह दुनिया की 11 बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है। ये देश दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत GDP और लगभग 26 प्रतिशत व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भारत की BRICS की अध्यक्षता चार मुख्य स्तंभों— मजबूती (resilience), इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी पर आधारित है।

अधिकारियों ने बताया कि मजबूती वाले हिस्से के तहत, भारत स्वास्थ्य, कृषि, भोजन, ऊर्जा, आपदा जोखिम कम करने और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सामूहिक सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।

उन्होंने कहा कि व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और हाई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी समिट के एजेंडे में अहम होगा।

भारत की BRICS अध्यक्षता का थीम क्या है?

भारत की BRICS अध्यक्षता का थीम है: ‘मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण’। यह थीम लोगों पर केंद्रित उस नजरिए को दिखाता है जो “मानवता सबसे पहले” की भावना पर आधारित है।

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इन मुद्दों के अलावा BRICS देशों के नेता आपसी प्राथमिकताओं पर सहयोग मजबूत करने को लेकर भी चर्चा करेंगे। साथ ही, वे दुनिया और अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े ऐसे मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे, जो सभी देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इस साल भारत की अध्यक्षता में BRICS को मजबूत करने के लिए देश के 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और बड़े स्तर की चर्चाएं आयोजित की गई हैं। इनका मकसद BRICS की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। यह साझेदारी तीन मुख्य क्षेत्रों पर आधारित है—राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय, तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच आपसी संपर्क।

भारत चौथी बार संभाल रहा BRICS की कमान

भारत BRICS का संस्थापक सदस्य है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में BRICS की अध्यक्षता कर चुका है। 1 जनवरी 2026 को भारत ने चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली है।

बंद कमरे की बैठक से लेकर फैमिली फोटो तक, ऐसा रहेगा पहला दिन

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, शिखर सम्मेलन की शुरुआत शनिवार को दोपहर 2:35 बजे BRICS सदस्य देशों के लिए ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ (Inclusive Global Governance and Strengthening Multilateralism) विषय पर एक बंद कमरे में होने वाले सत्र (closed-door session) के साथ होगी।

इस सत्र के बाद, नेता ‘भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी’ (Bharat Innovates Exhibition) का दौरा करेंगे, जिसका उद्घाटन शाम 4:25 बजे होना है। शाम 5:05 बजे, नेता ‘भारत मंडपम’ – जो शिखर सम्मेलन का स्थल है – के लॉन में एक ‘फैमिली फोटो’ (सामूहिक तस्वीर) के लिए इकट्ठा होंगे, जिसके बाद संयुक्त रूप से वृक्षारोपण समारोह होगा। पहले दिन के कार्यक्रमों का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शाम 7:30 बजे आयोजित एक भव्य रात्रिभोज (gala dinner) के साथ होगा।

रविवार को BRICS के सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आमंत्रित देशों के नेता सुबह 9:55 बजे से भारत मंडपम पहुंचना शुरू करेंगे। इसके बाद सुबह 10:35 बजे आधिकारिक ग्रुप फोटो ली जाएगी।

विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, ‘रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी: शेपिंग द फ्यूचर फॉर इंक्लूसिव ग्लोबल ग्रोथ’ (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना) विषय पर उद्घाटन सत्र सुबह 10:50 बजे शुरू होगा।

यह शिखर सम्मेलन ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration) जारी होने के साथ संपन्न होगा।

दक्षिण अफ्रीका की एंट्री से BRIC बना BRICS

2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में औपचारिक रूप से गठित BRIC ने अपना पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित किया था।

2010 में UNGA के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान दक्षिण अफ्रीका को शामिल करने पर सहमति बनने के बाद यह समूह BRICS बन गया, और दक्षिण अफ्रीका ने 2011 में सान्या में हुए अपने पहले शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया।

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‘युद्ध का हर दिन इंसानियत को पीछे धकेलता है’; पीएम मोदी ने पुतिन से लड़ाई खत्म करने की अपील की

PM Modi Putin Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन और मध्य पूर्व में जारी संघर्षों के बीच “लगातार युद्ध” की जगह “युद्ध खत्म करने” की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, इन संघर्षों का वैश्विक भू-राजनीति पर भी बड़ा असर पड़ रहा है।

बता दें कि अला-आर्चा स्टेट रेजिडेंस में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से गले मिलकर एक-दूसरे का स्वागत किया। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, पुतिन ने अक्साकल मीटिंग रूम में मोदी का स्वागत किया। इस दौरान उनके साथ वरिष्ठ रूसी अधिकारियों और मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था।

पुतिन ने दी मुझे यूक्रेन के बारे में जानकारी दी- पीएम मोदी

बैठक के दौरान, मोदी ने कहा कि पुतिन ने उन्हें यूक्रेन के हालात के बारे में जानकारी दी और शांति की कोशिशों के लिए भारत का समर्थन दोहराया।

मोदी ने कहा, “आपने मुझे यूक्रेन के हालात के बारे में जानकारी दी। भारत शांति की सभी कोशिशों का समर्थन करता है। युद्ध में बीता हर दिन इंसानियत को पीछे धकेलता है। वहीं, शांति की ओर एक कदम उम्मीद जगाता है। हमें कभी न खत्म होने वाले युद्ध से युद्ध के अंत की ओर बढ़ना होगा, जो इंसानियत के हित में है। सभी मुद्दों को जल्द सुलझाया जाना चाहिए।”

मोदी ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के मजबूत होने पर भी जोर दिया और कहा कि राष्ट्रीय हित दोनों देशों के लिए “सबसे बड़ी प्राथमिकता” है।

पुतिन से मिलकर खुशी हुई

मोदी ने कहा, “मुझे पुतिन से मिलकर बहुत खुशी हुई। पिछले साल पुतिन का भारत दौरा बहुत सफल रहा था। आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिली है।”

भारत और रूस के बीच व्यापार का कुल मूल्य 2% से ज्यादा बढ़ा

इस बीच, पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग में सकारात्मक रुझान दिख रहे हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार का कुल मूल्य 2% से ज्यादा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि मोदी के व्यक्तिगत ध्यान की वजह से दोनों देशों के संबंध और मजबूत हो रहे हैं।

रूसी राष्ट्रपति ने पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ते संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि 2025 में भारत और रूस के बीच पर्यटकों की आवाजाही में 16% की बढ़ोतरी हुई।

यह बैठक भारत के लिए एक अहम मोड़ पर हो रही है, क्योंकि अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई में रुकावट आ रही है और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है। ये बातचीत और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि एक तरफ नई दिल्ली रूसी कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर रहते हुए अपनी ऊर्जा सप्लाई सुरक्षित करना चाहती है, तो दूसरी तरफ मॉस्को अपने तेल निर्यात से होने वाली कमाई को सुरक्षित रखना चाहता है।

यूक्रेन युद्ध पर भारत ने फिर साफ किया रुख

बता दें कि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद से ही भारत ने इस मामले में सावधानी भरा रुख अपनाया है। नई दिल्ली ने बार-बार शांति और संघर्ष खत्म करने की अपील की है, लेकिन क्रेमलिन की सीधे तौर पर आलोचना करने से परहेज किया है।

गौरतलब है कि रूस भारत का एक अहम साझेदार बना हुआ है, खासकर ऊर्जा और रक्षा के क्षेत्र में। वित्त वर्ष 2026 में दोनों देशों के बीच करीब 60 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। अब दोनों देशों की नजर इस दशक के अंत तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर है।

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