Sword Raas Video: एक हाथ से ड्राइव करती जीप, दूसरे हाथ से भांजती तलवार… क्षत्रिय राजपूत महिलाओं का ये तलवार रास हो गया वायरल

नवरात्रि में गरबा और डांडिया की रौनक तो आपने खूब देखी होगी, लेकिन गुजरात में उत्सव का एक ऐसा नजारा भी देखने को मिला, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। यहां महिलाएं हाथों में तलवार लेकर मैदान में उतरीं और अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया। राजकोट और जामनगर में राजपूत समाज की महिलाओं ने तलवार रास के जरिए वीरता और संस्कृति की अनूठी झलक पेश की। पारंपरिक पोशाक, हाथों में चमचमाती तलवारें और आत्मविश्वास से भरी महिलाओं का अंदाज इस आयोजन को खास बनाता है।

यह प्रदर्शन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को सहेजने की कोशिश भी है। खास बात यह है कि इस कला को सीखने के लिए महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है और नवरात्रि से पहले लंबे समय तक अभ्यास कराया जाता है।

गरबा के साथ दिखा वीरता और परंपरा का संगम

गुजरात में नवरात्रि का नाम आते ही गरबा और डांडिया की तस्वीर सामने आती है। हालांकि, राजकोट में होने वाला तलवार रास इस उत्सव को एक अलग पहचान देता है। यहां महिलाएं तलवारों के साथ पारंपरिक दांव-पेच और करतब दिखाती हैं। राजकोट पैलेस के ऐतिहासिक मैदान में क्षत्रिय समाज की महिलाएं इस प्रस्तुति के जरिए अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। आयोजकों से जुड़ी जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम पिछले करीब 18 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्राचीन गरबा और रास संस्कृति को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।

तलवार चलाना नहीं जानने वाली महिलाओं को भी मिलती है ट्रेनिंग

इस आयोजन की खास बात यह है कि इसमें भाग लेने के लिए पहले से तलवार चलाना आना जरूरी नहीं है। कार्यक्रम से जुड़ी एक महिला ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि संस्था में महिलाओं को बारीकी से प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब दूर-दूर से लोग इस अनोखी प्रस्तुति को देखने पहुंचते हैं, तो उन्हें गर्व महसूस होता है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं ने काफी मेहनत की है। प्रशिक्षण के दौरान उन महिलाओं को भी सिखाया जाता है, जिन्हें पहले तलवार चलाने का अनुभव नहीं होता।

डेढ़ महीने पहले से शुरू हो जाती है तैयारी

इस कार्यक्रम से करीब 15 वर्षों से जुड़ी एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि तलवार रास में क्षत्रिय समाज की महिलाएं विशेष रूप से हिस्सा लेती हैं। उनके मुताबिक, नवरात्रि शुरू होने से लगभग डेढ़ महीने पहले ही अभ्यास शुरू हो जाता है। पैलेस ग्राउंड में होने वाली इस प्रस्तुति में तलवार के अलग-अलग दांव और स्टंट दिखाए जाते हैं। लगातार अभ्यास के जरिए महिलाएं अपने प्रदर्शन को तैयार करती हैं।

परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश

राजकोट और जामनगर में महिलाओं का यह प्रदर्शन नवरात्रि के पारंपरिक उत्सव में एक अलग रंग जोड़ता है। जहां गरबा और डांडिया भक्ति और सामूहिक उल्लास का प्रतीक हैं, वहीं तलवार रास के जरिए महिलाएं अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक युद्ध-कला से जुड़ी परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास कर रही हैं।

Zoho में इस साल सैलरी हाइक नहीं करने का ऐलान कर इसके फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने मांगी माफी, खस्ता हालत की वजह भी बताई

Zoho में इस साल सैलरी हाइक नहीं करने का ऐलान कर इसके फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने मांगी माफी, खस्ता हालत की वजह भी बताई

नौकरी करने वाले लोगों के लिए सालाना सैलरी हाइक का इंतजार काफी अहम होता है। बढ़ती महंगाई के बीच वेतन में होने वाली बढ़ोतरी से घर का बजट संभालने में मदद मिलती है। लेकिन सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho के कर्मचारियों को इस साल निराशा का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने बताया है कि इस साल कर्मचारियों की सैलरी में सामान्य सालाना बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बढ़ते खर्च, सर्वर की महंगी कीमतें और वैश्विक कारोबारी अनिश्चितता जैसे कारण हैं। हालांकि, उन्होंने कर्मचारियों को यह भरोसा भी दिया है कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की पूरी कोशिश करेगी।

Zoho कर्मचारियों को इस साल नहीं मिलेगा सालाना इंक्रीमेंट

श्रीधर वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए कंपनी की मौजूदा स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री का भविष्य फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है और AI के बढ़ते इस्तेमाल से कंपनियों का खर्च काफी बढ़ गया है। इसी दबाव के चलते Zoho ने इस साल कर्मचारियों की सामान्य वेतन वृद्धि रोकने का फैसला किया है। वेम्बू ने स्वीकार किया कि यह फैसला लेना आसान नहीं था। उन्होंने कर्मचारियों से माफी भी मांगी कि वह इस साल सैलरी हाइक को जारी नहीं रख सके।

AI के कारण चार गुना बढ़ी सर्वर की कीमतें

कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक डेटा सेंटर के लिए जरूरी सर्वर की बढ़ती लागत है। वेम्बू के मुताबिक, सर्वर की कीमतें चार गुना तक बढ़ गई हैं। इसके अलावा, AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने के कारण कंपनी के परिचालन खर्च में भी इजाफा हुआ है। इन बढ़ते खर्चों को नियंत्रित करने के लिए Zoho ने अपने मार्केटिंग बजट में कटौती की है। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने भी कारोबारी माहौल को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की कोशिश

सैलरी हाइक रोकने के फैसले के बीच कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि कंपनी फिलहाल बड़े पैमाने पर छंटनी से बचना चाहती है। वेम्बू ने कहा कि कंपनी कर्मचारियों की बड़े स्तर पर नौकरी जाने की स्थिति से बचने के लिए पूरी मेहनत करेगी।

हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सॉफ्टवेयर क्षेत्र में नौकरियों का भविष्य चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, Zoho ने पिछले 18 महीनों से अपने कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की है। इससे कंपनी में भर्ती की रफ्तार धीमी रहने का संकेत मिलता है।

अगले 3 से 5 साल Zoho के लिए अहम

वेम्बू ने बताया कि कंपनी इस समय खुद को नए कारोबारी माहौल के अनुरूप ढालने की प्रक्रिया में है। अगले तीन से पांच साल यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि कंपनी का बदलाव कितना सफल रहता है।

उन्होंने कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार भी जताया। उनके मुताबिक, ज्यादातर कर्मचारी कंपनी की स्थिति को समझ रहे हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब तकनीकी कंपनियां AI में निवेश बढ़ाने के साथ अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने की चुनौती का सामना कर रही हैं।

भूकंप के मलबे में फोटोशूट करवाने वाली ये मॉडल इंटरनेट पर हो गईं वायरल, कौन हैं ग्रेसी बोन?

BRICS Summit: 11 से 13 सितंबर तक पीएम मोदी की ‘डिप्लोमैटिक मैराथन’! पुतिन से शी जिनपिंग तक इस खास लिस्ट के सारे ताकतवर नाम जानिए

Brics Summit: भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान जबर्दस्त कूटनीतिक हलचल दिखने वाली है। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए दुनियाभर से 11 सदस्य देशों, 10 पार्टनर देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के शीर्ष नई दिल्ली पहुंच चुके हैं या पहुंच रहे हैं।

इस सम्मेलन के ग्लोबल एजेंडे के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 11 से 13 सितंबर के दौरान वैश्विक नेताओं के साथ बड़े पैमाने पर द्विपक्षीय मुलाकातें करेंगे। इस बीच पीएम मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए इस सम्मेलन में दुनिया भर की भलाई को ध्यान में रखते हुए सार्थक चर्चा होने की उम्मीद भी जताई है।

आइए जानते हैं ब्रिक्स सम्मेलन के संदर्भ में 11 से 13 सितंबर के बीच पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू की द्विपक्षीय बैठकों का पूरा शेड्यूल क्या है और किन दिग्गज नेताओं से मुलाकात होने वाली है-

11 सितंबर: बैठकों के पहले दिन का शेड्यूल

सम्मेलन के औपचारिक आगाज से एक दिन पहले ही 11 सितंबर से उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों का दौर शुरू हो रहा है

पुतिन के साथ बैठक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता।

पेजशिकियान के साथ बैठक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच मुलाकात।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख से मुलाकात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस की बैठक।

12 सितंबर: शी जिनपिंग समेत दिग्गज नेताओं से मुलाकात

12 सितंबर को ब्रिक्स सम्मेलन के मेन सेशन के साथ-साथ पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू कई राष्ट्रप्रमुखों से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय चर्चा करेंगे-

इथियोपिया: पीएम नरेंद्र मोदी की इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ बैठक।

मलेशिया: पीएम मोदी की मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ बातचीत।

यूएई (अबू धाबी): पीएम मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की मुलाकात।

वियतनाम: पीएम मोदी की वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ बैठक।

ईरान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की औपचारिक मुलाकात।

चीन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक।

13 सितंबर: आखिरी दिन की कूटनीतिक मैराथन

सम्मेलन के अंतिम दिन यानी 13 सितंबर को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक नेताओं के साथ बैक-टू-बैक बैठकों का दौर जारी रहेगा-

कजाकिस्तान: पीएम मोदी की कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव के साथ बैठक।

फिलिपिंस: पीएम मोदी और फिलिपिंस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर की मुलाकात।

मिस्र: पीएम मोदी की मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी के साथ चर्चा।

दक्षिण अफ्रीका: पीएम मोदी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति मातामेला सिरिल रामाफोसा की बैठक।

बुरुंडी: पीएम मोदी की बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्ट नदाहिशिमिये के साथ बातचीत।

नाइजीरिया: पीएम मोदी और नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति सेनेटर कासिम शेट्टिमा की मुलाकात।

युगांडा: पीएम मोदी की युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो के साथ द्विपक्षीय बैठक।

11 से 13 सितंबर तक चलने वाली इन मैराथन मुलाकातों के जरिए भारत फूड और एनर्जी सिक्योरिटी, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, व्यापार, प्रौद्योगिकी और ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार जैसे मुद्दों पर दुनिया के प्रमुख देशों के साथ आपसी सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी में है।

अमेरिका कर रहा है DMK के वादे की नकल! श्रीधर वेम्बू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैश स्कीम पर क्या बोले?

अमेरिका कर रहा है DMK के वादे की नकल! श्रीधर वेम्बू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैश स्कीम पर क्या बोले?

जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अमेरिकी एडल्ट्स को $5000 देने के वादे की तुलना तमिलनाडु की चुनावी राजनीति से कर दी है। वेम्बू ने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति असल में भारत के तमिलनाडु की पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की नकल कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने लिखा कि हमने इसका आविष्कार तमिलनाडु में किया और इसे पूरे भारत में फैलाया। राष्ट्रपति ट्रंप DMK की नकल कर रहे हैं।

क्या है डोनाल्ड ट्रंप का $5000 ट्रम्प डिविडेंड वादा?

श्रीधर वेम्बू का यह कमेंट डोनाल्ड ट्रंप के उस चुनावी वादे के बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर अपना कंट्रोल बनाए रखती है, तो वह हर अमेरिकी एडल्ट को $5000 भेजेंगे। ट्रंप के वादे को ट्रंप डिविडेंड नाम दिया गया है।

1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की लागत और भारी घाटा

ट्रंप के इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत होगी और इससे 1 ट्रिलियन डॉलर (1 खरब डॉलर) से अधिक का खर्च आ सकता है। यह स्थिति तब है जब अमेरिका पहले से ही लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर के एनुअल बजट घाटे का सामना कर रहा है और उसका नेशनल कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुका है। ट्रंप ने सुझाव दिया है कि टैरिफ से मिलने वाले रेवेन्यू की मदद से अमेरिकी लोगों को ये पैसा दिया जाएगा। वैसे रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने जितने का वादा कर दिया है वो टैरिफ से आने वाले रेवेन्यू से भी ज्यादा बैठ रहा है।

इस पर ‘कमिटी फॉर ए रिस्पॉन्सिबल फेडरल बजट’ के सीनियर पॉलिसी डायरेक्टर मार्क गोल्डवेन ने कहा कि ट्रंप कांग्रेस की मंजूरी के बिना यह भुगतान नहीं कर सकते। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब सरकार पहले से ही बड़े बजट घाटे में चल रही है तो ऐसे में डिविडेंड शब्द का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।

आपको बता दें कि श्रीधर वेम्बू द्वारा DMK का जिक्र तमिलनाडु के दशकों पुराने राजनीतिक इतिहास को ध्यान में रखकर किया गया है। तमिलनाडु में वेलफेयर स्कीम्स को चुनावी राजनीति के साथ जोड़ने का इतिहास काफी पुराना है। यहां 1950 और 1960 के दशक में मद्रास राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में के कामराज ने मुफ्त शिक्षा का विस्तार किया और स्कूली बच्चों के लिए मिड डे मील स्कीम शुरू की थी।

1967 के विधानसभा चुनाव में DMK के संस्थापक सीएन अन्नादुरई ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए रियायती दरों पर चावल देने का वादा किया था। DMK ने यह चुनाव जीता और इस योजना को लागू किया। बाद में फाइनेंशियल दिक्कतों की वजह से इसे सीमित करना पड़ा। 2006 के चुनाव में एम करुणानिधि की अगुवाई वाली DMK ने मुफ्त कलर टीवी, रियायती चावल, गैस चूल्हे और अन्य लाभ देने का वादा किया। इसी तरह 2011 के चुनाव में ये कंपीटिशन और तेज हो गया। तब DMK और AIADMK दोनों ने मिक्सर, ग्राइंडर, पंखे और लैपटॉप जैसे घरेलू सामान देने के वादे किए।

तमिलनाडु से निकलकर पूरे भारत में फैला यह मॉडल

तमिलनाडु से शुरू हुआ यह मॉडल बाद में देश के दूसरे हिस्सों में भी फैल गया। आम आदमी पार्टी ने 2015 में दिल्ली चुनाव प्रचार में मुख्य रूप से सब्सिडी वाली बिजली और मुफ्त पानी का वादा किया था। इसके बाद से भारत भर के राजनीतिक दलों ने मुफ्त बिजली, लोन माफी, मुफ्त सार्वजनिक परिवहन, कैश स्कीम, लैपटॉप और दूसरे डायरेक्ट फायदे देने शुरू कर दिए.

ट्रंप के पुराने वादे: DOGE डिविडेंड और टैरिफ रिफंड

ऐसा नहीं है कि ट्रंप कोई पहली बार कुछ इस तरह का वादा कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने एलन मस्क के डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) द्वारा की गई बचत को जनता में बांटने के लिए DOGE डिविडेंड का प्रचार किया था। इसके अलावा उन्होंने टैरिफ रिफंड का विचार भी पेश किया था। इसमें सुझाव दिया गया था कि इंपोर्ट फी से मिलने वाले रेवेन्यू को अंततः जनता को लौटाया जा सकता है।

Boomer को लेकर शशि थरूर ने अपने बेटे को दिया ऐसा ज्ञान कि मामला वायरल हो गया

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर अपने मजाकिया अंदाज से लोगों का ध्यान खींचा है। इस बार उन्होंने अपने बेटे ईशान थरूर की सोशल मीडिया पोस्ट पर हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया। ईशान थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए कहा कि छोटे बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना चाहिए। उन्होंने जोहो (Zoho) के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू की उस राय का समर्थन किया, जिसमें छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही गई थी।

ईशान ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैं मानता हूं कि छोटे बच्चों को सोशल मीडिया पर नहीं होना चाहिए। लेकिन उससे पहले भारत में व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने वाले ‘बूमर्स’ पर रोक लगाने की जरूरत है।” इस पर शशि थरूर ने मजेदार अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत की परिस्थितियां पश्चिमी देशों से अलग हैं। इसलिए यहां लगभग हर पीढ़ी को “बेबी बूमर” कहा जा सकता है। उन्होंने मजाक में अपने बेटे से कहा कि इस हिसाब से उसकी पीढ़ी भी इससे अलग नहीं है।

क्या है ‘बूमर’

बूमर’ शब्द, ‘बेबी बूमर’ का छोटा रूप है। आम तौर पर इसका इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है, जिनका जन्म दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1946 से 1964 के बीच हुआ था। हालांकि, भारत में यह शब्द अक्सर ऐसे बुजुर्गों या पुराने विचारों वाले लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो बिना मांगे सलाह देते हैं या पारंपरिक सोच रखते हैं। जोहो (Zoho) के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात उस समय कही थी, जब वह फ्रांस की संसद में पारित एक विधेयक पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। इस विधेयक में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया था।

फ्रांस के संसद ने दी मंजूरी

इस सप्ताह फ्रांस की संसद के दोनों सदनों ने इस कानून को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने वाला यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया। नए कानून के तहत स्कूल परिसर में छात्रों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। जोहो (Zoho) के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि इससे छोटे बच्चों को मोबाइल स्क्रीन से बाहर निकलकर नई चीजें सीखने और वास्तविक दुनिया से जुड़ने का मौका मिलेगा।

उन्होंने कहा, “भारत में भी छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगनी चाहिए। मेरा मानना है कि बच्चों को मोबाइल पर समय बिताने के बजाय किताबें पढ़नी चाहिए, धूप में बाहर खेलना चाहिए और सोशल मीडिया से दूर रहना चाहिए।” हालांकि, वेम्बू के इस सुझाव पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने उनके विचार का समर्थन किया, जबकि कई लोगों का कहना था कि सरकार को लोगों की निजी जिंदगी और उनके फैसलों में जरूरत से ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए।

‘जोहो का नाम लिया और 90% कम हो गई कीमत’ Zoho के को-फाउंडर ने शेयर किया किस्सा

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस की कीमत को लेकर जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू का एक दावा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। जोहो के को-फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने दावा किया कि एक भारतीय कस्टमर को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस रिन्यूअल की कीमत में 90 परसेंट की कमी मिली, जब उसने सॉफ्टवेयर की बड़ी कंपनी को बताया कि वह जोहो के ऑफिस-सूट प्रोडक्ट्स को देख रही है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की गई अपनी पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने बताया कि, संबंधित ग्राहक पहले से जोहो के कुछ प्रोडक्ट्स इस्तेमाल कर रहा था। उनके अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने लाइसेंस रिन्यूअल साइकिल के दौरान कीमत में तेजी से बढ़ोतरी की थी। इसके बाद ग्राहक ने कंपनी को बताया कि वह जोहो के ऑफिस सॉफ्टवेयर को अपनाने पर विचार कर रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई पोस्ट

श्रीधर वेम्बू ने कस्टमर के हवाले से कहा, “माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस का एक बड़ा लाइसेंस रिन्यूअल आया और उन्होंने कीमत में भारी बढ़ोतरी कर दी। हमने उन्हें बताया कि हम जोहो ऑफिस सूट देख रहे हैं और उन्होंने कीमत में 90 परसेंट की कमी कर दी।” उन्होंने आगे कहा कि कस्टमर ने बाद में कंपनी के पैसे बचाने में मदद करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, “भले ही हमारा ऑफिस सूट खरीदा न हो।” श्रीधर वेम्बू ने अपनी पोस्ट में ग्राहक की पहचान, माइक्रोसॉफ्ट के अनुबंध का आकार या छूट किन शर्तों पर दी गई, इसकी कोई जानकारी शेयर नहीं की।

उन्होंने सुझाव दिया कि जिन संस्थानों या कंपनियों का माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस नवीनीकरण होने वाला है, वे बातचीत के दौरान जोहो को एक संभावित ऑप्शन के रूप में सामने रख सकते हैं। श्रीधर वेम्बू ने ये एग्जांपल तकनीकी क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर अपनी बात रखते हुए शेयर किया। वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए मॉडलों को लेकर चर्चा कर रहे थे और उनका कहना था कि चीन के ओपन-सोर्स एआई मॉडल्स से बढ़ते मुकाबले के कारण बड़ी टेक कंपनियों को भी अपनी रणनीति और पेशकश में अधिक आक्रामक बदलाव करने पड़ रहे हैं।

श्रीधर वेम्बू ने कहा कि, सॉफ्टवेयर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को मिलता है। उनके अनुसार, जब बाजार में कई मजबूत विकल्प मौजूद होते हैं, तो बड़ी कंपनियां मनमाने तरीके से कीमतें तय नहीं कर पातीं और ग्राहकों को बेहतर दाम व विकल्प मिलते हैं। उसी पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े एंटीट्रस्ट मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि साल 2000 में एक संघीय अदालत ने कंपनी को मोनोपॉली से जुड़े मामले में दोषी माना था।

वेम्बू के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर और क्लाउड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहना जरूरी है, क्योंकि इससे बाजार संतुलित रहता है और ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिलते हैं। श्रीधर वेम्बू ने दावा किया कि माइक्रोसॉफ्ट लंबे समय से अपने ग्राहकों से अधिक कीमत वसूलती रही है।