जेलेंस्की बोले- अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में ट्रम्प से मुलाकात होगी:रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून के लिए अमेरिका का शुक्रिया किया; संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेंगे

यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रविवार को बताया कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से बात की है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने तय किया है कि वे अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मुलाकात करेंगे। जेलेंस्की ने X पर पोस्ट कर लिखा कि रूस के साथ साढ़े चार साल से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए यह मुलाकात बहुत अहम है और इससे बहुत कुछ बदल सकता है। रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से युद्ध जारी है। रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन रविवार को मॉस्को और आसपास के इलाकों में यूक्रेन ने 1600 से ज्यादा ड्रोन से हमला किया। इनमें करीब 450 ड्रोन मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। जेलेंस्की ने कहा कि तनाव कम करने पर काम किया जाएगा इस मुलाकात में युद्ध का तनाव कम करने के साथ-साथ ऊर्जा, भोजन और आम लोगों की सुरक्षा जैसे जरूरी मुद्दों पर विचार किया जाएगा। जेलेंस्की ने बताया कि अमेरिका और यूक्रेन की टीमें मिलकर काम कर रही हैं और अब वे हालात सुधारने के लिए कुछ बड़े और गंभीर कदम उठाने को पूरी तरह तैयार हैं। 2022 से जारी रूस-यूक्रेन जंग रूस और यूक्रेन के बीच जंग फरवरी 2022 में शुरू हुई। रूस ने यूक्रेन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया और तभी से दोनों देशों के बीच लड़ाई जारी है। रूस के पास यूक्रेन के करीब 20% इलाके पर कब्जा है। इस युद्ध में हजारों नागरिकों और सैनिकों की मौत हुई है, जबकि लाखों यूक्रेनियन अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। जून 2023 तक करीब 80 लाख लोग यूक्रेन छोड़कर दूसरे देशों में चले गए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प युद्ध खत्म कराने के लिए रूस और यूक्रेन के नेताओं के साथ बातचीत कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलास्का में मुलाकात की थी। यह करीब 80 साल में किसी रूसी नेता की पहली अलास्का यात्रा थी। डोनबास को लेकर रूस और यूक्रेन के बीच फंसा है मामला रूस पूरे डोनबास पर कब्जा चाहता है, लेकिन यूक्रेन अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते में यह सबसे बड़ी अड़चनों में से एक बना हुआ है। रूस डोनबास को बेहद अहम मानता है और इन्हें छोड़ना नहीं चाहता। पुतिन पहले ही कह चुके हैं कि शांति समझौते के लिए यूक्रेन को रूस के कब्जे वाले इलाकों पर अपना दावा छोड़ना होगा। साथ ही उसे इन इलाकों को रूस का हिस्सा मानना होगा। —————- यह खबर भी पढ़ें… रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए:दुनिया में गेहूं-मक्का महंगा होने का खतरा; रूस का अनाज निर्यात 71% घटा रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। पूरी खबर पढ़ें…

जेलेंस्की बोले- अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में ट्रम्प से मुलाकात होगी:रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून के लिए अमेरिका का शुक्रिया किया; संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेंगे

यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रविवार को बताया कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से बात की है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने तय किया है कि वे अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मुलाकात करेंगे। जेलेंस्की ने X पर पोस्ट कर लिखा कि रूस के साथ साढ़े चार साल से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए यह मुलाकात बहुत अहम है और इससे बहुत कुछ बदल सकता है। रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से युद्ध जारी है। रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन रविवार को मॉस्को और आसपास के इलाकों में यूक्रेन ने 1600 से ज्यादा ड्रोन से हमला किया। इनमें करीब 450 ड्रोन मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। जेलेंस्की ने कहा कि तनाव कम करने पर काम किया जाएगा इस मुलाकात में युद्ध का तनाव कम करने के साथ-साथ ऊर्जा, भोजन और आम लोगों की सुरक्षा जैसे जरूरी मुद्दों पर विचार किया जाएगा। जेलेंस्की ने बताया कि अमेरिका और यूक्रेन की टीमें मिलकर काम कर रही हैं और अब वे हालात सुधारने के लिए कुछ बड़े और गंभीर कदम उठाने को पूरी तरह तैयार हैं। 2022 से जारी रूस-यूक्रेन जंग रूस और यूक्रेन के बीच जंग फरवरी 2022 में शुरू हुई। रूस ने यूक्रेन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया और तभी से दोनों देशों के बीच लड़ाई जारी है। रूस के पास यूक्रेन के करीब 20% इलाके पर कब्जा है। इस युद्ध में हजारों नागरिकों और सैनिकों की मौत हुई है, जबकि लाखों यूक्रेनियन अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। जून 2023 तक करीब 80 लाख लोग यूक्रेन छोड़कर दूसरे देशों में चले गए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प युद्ध खत्म कराने के लिए रूस और यूक्रेन के नेताओं के साथ बातचीत कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलास्का में मुलाकात की थी। यह करीब 80 साल में किसी रूसी नेता की पहली अलास्का यात्रा थी। डोनबास को लेकर रूस और यूक्रेन के बीच फंसा है मामला रूस पूरे डोनबास पर कब्जा चाहता है, लेकिन यूक्रेन अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते में यह सबसे बड़ी अड़चनों में से एक बना हुआ है। रूस डोनबास को बेहद अहम मानता है और इन्हें छोड़ना नहीं चाहता। पुतिन पहले ही कह चुके हैं कि शांति समझौते के लिए यूक्रेन को रूस के कब्जे वाले इलाकों पर अपना दावा छोड़ना होगा। साथ ही उसे इन इलाकों को रूस का हिस्सा मानना होगा। —————- यह खबर भी पढ़ें… रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए:दुनिया में गेहूं-मक्का महंगा होने का खतरा; रूस का अनाज निर्यात 71% घटा रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। पूरी खबर पढ़ें…

रूस पर ट्रंप का शिकंजा, 100% टैरिफ वाले बिल पर किया साइन, जानें भारत और चीन पर कैसे पड़ेगा असर

Russia Sanctions Bill: भारत और चीन जैसे देशों के लिए एक बड़ी और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस बिल से उन्हें उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं।

Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 के तहत रूस के एनर्जी सेक्टर, सीनियर अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और उन टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिन्हें पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन टैंकरों को आमतौर पर ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है।

भारत-चीन पर कैसे पड़ेगा असर?

बुधवार को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने यह कानून 262-159 के अंतर से पास कर दिया। इससे पहले इस बिल को सीनेट से मंजूरी मिल चुकी थी। नए कानून के तहत रूस से तेल या गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े खरीदार देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत या चीन पर तुरंत 100% टैरिफ लगा दिया जाएगा। टैरिफ लगाना है या नहीं और अगर लगाना है तो किस दर पर, इसका फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे।

जानकारी के मुताबिक, इस कानून का मकसद एनर्जी एक्सपोर्ट से मॉस्को की कमाई कम करना और यूक्रेन युद्ध को लेकर उस पर दबाव बढ़ाना है।

कब लागू हो सकता है टैरिफ?

यह कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर लागू हो जाएगा। इसके तहत, उन देशों से आयातित सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाना जरूरी है, जो कानून बनने से पहले के 12 महीनों में कुल मात्रा के हिसाब से रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदार रहे हों। अगर किसी देश का रूसी गैस आयात, लागू अवधि के दौरान रूस के कुल निर्यात का 15 प्रतिशत से कम रहा हो और उसने उस आयात को कम करने के लिए “महत्वपूर्ण कदम” उठाए हों, तो उसे गैस से जुड़े शुल्कों से छूट मिलती है।

भारत ने रिश्तों पर असर पड़ने की चेतावनी दी

भारत ने वॉशिंगटन को पहले ही चेतावनी दे दी है कि नए कदमों से दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है। नई दिल्ली ने कहा है कि वह एनर्जी सिक्योरिटी के लिए प्रतिबद्ध है और मार्केट की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग सप्लायर्स से तेल खरीदना जारी रखेगी।

बता दें कि भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है। जबकि चीन भी एक बड़ा खरीदार है, इसलिए नए कानून के तहत दोनों देशों पर असर पड़ सकता है।

वहीं, इस कानून से ट्रंप को टैरिफ के बारे में बड़े फैसले लेने की छूट मिलती है और कुछ खास स्थितियों में छूट देने का भी प्रावधान है।

भारत के लिए यह कानून ऐसे समय में आया है, जब नई दिल्ली, रूस से तेल खरीदने को लेकर वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव और अपनी एनर्जी की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

शी जिनपिंग के दौरे से बढ़ सकती है टेंशन

सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप के इस कदम से ठीक पहले, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत के लिए वॉशिंगटन आने वाले हैं।

यह बैठक एक दशक में शी की पहली व्हाइट हाउस यात्रा होगी और इस साल दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने की दूसरी मुलाकात होगी। इससे पहले उनकी मुलाकात मई में बीजिंग में हुई थी।

इस बैठक में व्यापार एक अहम मुद्दा हो सकता है। इसके अलावा ताइवान को लेकर तनाव, ईरान युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर बनी अस्थायी शांति को आगे बढ़ाने की कोशिशों पर भी चर्चा हो सकती है।

गौरतलब है कि रूस पर लगाए गए नए प्रतिबंधों वाला कानून दोनों देशों के बीच दबाव का एक और मुद्दा बन सकता है, क्योंकि चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले दुनिया के सबसे बड़े देशों में शामिल है।

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रूस पर नए प्रतिबंधों वाले बिल पर ट्रंप जल्द लगाएंगे मुहर, जानें भारत पर क्या होगा इसका असर?

Russia Sanctions Bill: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस पर नए और कड़े प्रतिबंध लगाने वाले बिल पर जल्द हस्ताक्षर करने वाले हैं। इस बिल के तहत ट्रंप को भारत समेत उन देशों पर 100% तक टैरिफ (शुल्क) लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं।

अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा इस कानून को मंजूरी दिए जाने के बाद, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने गुरुवार को ANI को बताया, “राष्ट्रपति इस बिल पर दस्तखत करने की योजना बना रहे हैं।”

बता दें कि Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 नाम के इस बिल को अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 262-159 वोटों से पास कर दिया है। यह बिल पहले ही अमेरिकी सीनेट से मंजूर हो चुका है और अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर का इंतजार है।

भारत ने द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ने की चेतावनी दी

यह घटनाक्रम तब हुआ जब विदेश मंत्रालय ने कहा कि वॉशिंगटन को बता दिया गया है कि रूसी तेल की खरीद से जुड़े टैरिफ का असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।

नई दिल्ली ने कहा कि वह ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए “पूरी तरह प्रतिबद्ध” है और बाजार की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग विक्रेताओं से सप्लाई लेना जारी रखेगी।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “भारत ने भी अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अपना इरादा साफ कर दिया है।”

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए रूसी कच्चा तेल खरीदता रहा है।

बता दें कि प्रस्तावित बिल के तहत ट्रंप को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की बड़ी शक्ति मिल सकती है। भारत और चीन ऐसे देशों में शामिल हैं, जिन पर यह टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, इस बिल में भारत पर 100% टैरिफ अपने आप लगाने का प्रावधान नहीं है।

ट्रेड बातचीत पर नया दबाव

इस कदम से भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड बातचीत भी मुश्किल में पड़ सकती है। अमेरिका, भारतीय सामान के एक्सपोर्ट के लिए सबसे बड़ी जगह है। अप्रैल-अगस्त के दौरान अमेरिका को होने वाला भारतीय सामान का एक्सपोर्ट बढ़कर 42.79 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 40.39 अरब डॉलर था।

रॉयटर्स के सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियों ने सितंबर और अक्टूबर के लिए रूसी क्रूड का इंतजाम पहले ही कर लिया है।

भारतीय रिफाइनरियां वॉशिंगटन के साथ बातचीत करना चाहते हैं, जिसमें संभावित छूट या कोटा शामिल हो सकता है। उनका कहना है कि रूसी सप्लाई में कटौती से लागत बढ़ सकती है, खासकर ऐसे समय में जब ग्लोबल ऑयल मार्केट पहले से ही दबाव में है।

वहीं, भारत-अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता अभी भी बिना किसी नतीजे के चल रही है और दोनों पक्ष समझौते तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

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