Russia-Ukraine War Update: ‘यूक्रेन को अब नए राष्ट्रपति की जरूरत’: पुतिन को लेकर नरम पड़े ट्रंप के तेवर, जेलेंस्की पर भड़के

Russia-Ukraine War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर निशाना साधते हुए कहा है कि युद्धग्रस्त देश को ऐसे नए नेतृत्व की जरूरत है, जो समझौता करने में सक्षम हो। ट्रंप ने यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरियों पर किए जा रहे हमलों को रोकने की अपील भी की है। उनके इस बयान से वॉशिंगटन और कीव के बीच तनाव बढ़ने के संकेत मिले हैं। ट्रंप ने कहा है कि यूक्रेन को एक नया राष्ट्रपति चुनने का समय आ गया है क्योंकि वर्तमान राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस के साथ अपने देश के युद्ध को समाप्त करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए हैं।

ट्रंप ने शनिवार को व्हाइट हाउस में कहा, “मेरा सुझाव है कि वे (यूक्रेन के लोग) एक ऐसा नया नेता चुनें जो कोई समझौता कर सके। कुछ कारणों से वह (जेलेंस्की) ऐसा कभी नहीं करते।” ट्रंप ने यह दावा भी किया कि यदि वह 2022 में अमेरिका के राष्ट्रपति होते, तो यह युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता। उन्होंने कहा, “यूक्रेन और रूस के बीच यह युद्ध शुरू होने का कोई कारण नहीं था। यह अक्षमता के कारण शुरू हुआ।”

जेलेंस्की पर निशाना साधते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने (जेलेंस्की ने) अपने देश का 30 प्रतिशत हिस्सा गंवा दिया है और दोनों पक्षों को मिलाकर 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं तथा लाखों लोग मारे गए हैं। ट्रंप ने कहा, “यह एक ऐसा युद्ध है जो कभी शुरू ही नहीं होना चाहिए था। और मुझे लगता है कि अब समय आ गया है जब यूक्रेन को एक नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए।”

रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज ट्रंप

रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर यूक्रेन के हमले ट्रंप और जेलेंसी के संबंधों में एक नया तनाव पैदा कर रहे हैं। ट्रंप ने इन हमलों को रोकने की जरूरत पर जोर देते हुए यूक्रेनी नेतृत्व को समझौते की राह अपनाने का संदेश दिया है। ट्रंप की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब रूस से डीजल की वैश्विक बाजारों में आपूर्ति की अनुमति देने वाली एक व्यवस्था पर अमेरिका आगे बढ़ रहा है। ऐसे में रूस के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े फैसले और यूक्रेन की सैन्य रणनीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गए हैं।

जेलेंस्की के नेतृत्व पर उठाए सवाल

ट्रंप ने अपने बयान में केवल रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हमलों का विरोध नहीं किया। बल्कि जेलेंस्की के नेतृत्व को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने सुझाव दिया कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चाहिए, जो किसी समझौते तक पहुंच सके। इस बयान को अमेरिका और यूक्रेन के बीच युद्ध को लेकर रणनीतिक मतभेदों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ट्रंप की टिप्पणी के बाद यूक्रेन सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का डिटेल्स नहीं दिया गया है।

अमेरिका-यूक्रेन संबंधों पर क्या होगा असर?

ट्रंप का यह बयान रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी प्रशासन के रुख और यूक्रेन की सैन्य कार्रवाई के बीच तनाव को उजागर करता है। एक ओर ट्रंप यूक्रेन से हमले रोककर समझौते की दिशा में बढ़ने की अपील कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर रूस से डीजल की वैश्विक आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्था भी चर्चा में है। फिलहाल, इस बयान के बाद अमेरिका और यूक्रेन के संबंधों में आगे क्या बदलाव आएगा, यह दोनों देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं और आने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा।

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हूती मिसाइल ने रियाद एयरपोर्ट को बनाया निशाना, Air India Express और Akasa Air ने रद्द की उड़ानें

रियाद एयरपोर्ट के आसपास हुए धमाकों के बाद सऊदी अरब की राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालात को देखते हुए Air India Express और Akasa Air ने गुरुवार को रियाद से आने-जाने वाली अपनी उड़ानें रद्द कर दीं। इससे यात्रियों की यात्रा पर भी असर पड़ा है।

उड़ानें रद्द किए जाने के पीछे यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का एक दावा भी सामने आया है। हूती विद्रोहियों ने कहा है कि उन्होंने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया था।

इस बीच, हूतियों के खिलाफ लड़ रहे सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने राजधानी की ओर दागी गई दो मिसाइलों को रोक दिया है। हालांकि, हूती विद्रोहियों की ओर से किए गए इस दावे की तत्काल स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

Air India Express ने रियाद की उड़ानें रोकीं

रियाद में बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच Air India Express ने 10 अक्टूबर तक रियाद से आने-जाने वाली अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं। एयरलाइन ने इसके पीछे क्षेत्र में तेजी से बदलती स्थिति को वजह बताया है।

एयरलाइन ने कहा कि उड़ानें रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को मुफ़्त में यात्रा की तारीख बदलने (रीशेड्यूलिंग) या बुकिंग रद्द करने पर पूरा रिफंड पाने का विकल्प दिया जाएगा।

बता दें कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब सुरक्षा से जुड़ी ताजा घटना के बाद किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ान सेवाओं में फिर से रुकावट आई है।

आकासा एयर ने कोच्चि-रियाद सेवाएं रद्द कीं

आकासा एयर ने 8 अक्टूबर को होने वाली अपनी QP 523 कोच्चि-रियाद और QP 524 रियाद-कोच्चि फ्लाइट्स भी रद्द कर दीं।

एयरलाइन ने कहा कि फ्लाइट रद्द होने से प्रभावित यात्री या तो पूरा रिफंड ले सकते हैं या बिना किसी अतिरिक्त खर्च के अपनी यात्रा का समय बदल सकते हैं।

आकासा एयर ने कहा कि वह स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और आगे किसी भी बदलाव के बारे में यात्रियों को जानकारी देगी। उसने यह भी कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा और भलाई उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

रियाद एयरपोर्ट ने यात्रियों को फ्लाइट का स्टेटस चेक करने की सलाह दी

किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने यात्रियों से कहा है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी एयरलाइन से संपर्क करें और अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक कर लें।

यह सलाह गुरुवार को रियाद में कई धमाकों की आवाज सुनाई देने और एयरपोर्ट के पास एक बड़े धमाके की खबर के बाद जारी की गई। एक चश्मदीद ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि फ्लाइट्स रोक दी गईं और यात्रियों से एयरपोर्ट से बाहर निकलने को कहा गया।

एयरपोर्ट ने ‘X’ पर एक बयान में कहा: “हम यात्रियों को बताना चाहते हैं कि एयरपोर्ट आने से पहले वे सीधे अपनी एयरलाइन से संपर्क करें और अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक कर लें।”

हूतियों ने बैलिस्टिक मिसाइल हमले का दावा किया

हूती मिलिट्री के प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि उनके ग्रुप ने दोपहर के समय किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया और दावा किया कि मिसाइल “अपने निशाने पर लगी”।

हालांकि, सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसकी सेना ने रियाद की ओर दागी गई दो मिसाइलों को रोक दिया। वहीं, सऊदी अधिकारियों ने तुरंत इस बात की पुष्टि नहीं की कि हूती मिसाइल एयरपोर्ट से टकराई है।

यह ताजा घटना इस हफ्ते सऊदी एयरपोर्ट्स पर हुए हूती हमलों की कड़ी में एक और घटना है। सऊदी अधिकारियों ने बताया कि किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई और 36 अन्य घायल हो गए।

रियाद एयरपोर्ट पर पहले से ही उड़ानें प्रभावित

ताजा हमले ने किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहले से चल रही दिक्कतों को और बढ़ा दिया है। ‘द नेशनल’ के मुताबिक, गुरुवार को दर्जनों उड़ानों पर असर पड़ा। एक समय पर 58 उड़ानें देर से चलीं और 11 उड़ानें रद्द कर दी गईं।

इस स्थिति ने सऊदी एयरस्पेस से गुजरने वाली इंटरनेशनल एयरलाइंस के लिए भी बड़ी चिंताएं पैदा कर दी हैं, क्योंकि हूती और सऊदी-नेतृत्व वाली सेनाओं के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है।

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Russia-Ukraine War: मंगलवार को रूस के दक्षिणी तट के पास उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक ऑयल टैंकर में भीषण आग लगने से ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं। बताया जा रहा है कि इस जहाज पर यूक्रेन के नेवल ड्रोन से हमला हुआ था, जिससे रिसॉर्ट शहर सोची के कुछ हिस्सों के ऊपर काले धुएं का गुबार छा गया। वहीं, रूस के ट्रांसपोर्ट मंत्रालय ने बताया कि लाइबेरिया के झंडे वाले इस टैंकर पर काला सागर (Black Sea) में हमला हुआ और पानी पर कच्चा तेल जल रहा था।

मंत्रालय ने कहा कि आग इतनी भीषण थी कि फायरफाइटर्स तुरंत उस पर काबू नहीं पा सके, लेकिन जहाज पर मौजूद सभी 23 क्रू मेंबर्स (जो भारतीय नागरिक थे) को सुरक्षित बचा लिया गया।

सोची से आए वीडियो और तस्वीरों में समुद्र में तेज लपटें उठती और आसमान में घना काला धुआं फैलता दिखाई दिया। एहतियात के तौर पर अधिकारियों ने समुद्र तटों और तटीय इलाकों के कुछ हिस्सों में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी।

बीच बंद, लोगों को घर के अंदर रहने को कहा गया

सिरियस फेडरल टेरिटरी के प्रमुख दिमित्री प्लिशकिन ने टैंकर में आग लगने की पुष्टि की और स्थानीय बीच को कुछ समय के लिए बंद करने का ऐलान किया।

प्लिशकिन ने कहा, “ब्लैक सी में एक टैंकर में आग लग गई। लोगों की सुरक्षा के लिए सिरियस के बीच कुछ समय के लिए बंद रहेंगे। पानी और हवा की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।” उन्होंने यह भी बताया कि अधिकारी रूस की हाइड्रोमेटियोरोलॉजिकल सर्विस के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

अधिकारियों के हालात पर नजर रखने के दौरान लोगों को घर के अंदर रहने और खिड़कियां बंद रखने की सलाह भी दी गई।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन ब्लैक सी और उसके आस-पास युद्ध से जुड़े एनर्जी फैसिलिटीज और कमर्शियल शिपिंग को निशाना बना रहे हैं।

बता दें कि हाल ही में रूस ने रोमानिया के तट के पास यूक्रेनी सामान ले जा रहे अनाज के जहाजों पर हमला किया है, जबकि यूक्रेन ने रूस के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है। यूक्रेन का कहना है कि ये हमले यूक्रेनी शहरों पर मॉस्को के लगातार हमलों का जवाब हैं।

दोनों पक्षों ने आने वाले दिनों में अपने हमलों को और तेज करने के संकेत दिए हैं।

रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर भी हमले तेज कर दिए हैं, जिनमें दिन के समय ड्रोन हमले और अहम पुलों पर हमले शामिल हैं, जिससे यूक्रेन की राजधानी में भारी व्यवधान पैदा हुआ है।

इससे पहले भी दक्षिणी रूस में तेल सुविधाओं पर यूक्रेन के पिछले हमलों के कारण तेल का रिसाव हुआ है, समुद्र तट बंद करने पड़े हैं और पर्यावरण से जुड़ी अन्य चिंताएं पैदा हुई हैं।

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Smit Machchhar: जिस पायलट ने आसमान में टाली तबाही, उसे नेतन्याहू का आया खास न्योता; कैप्टन स्मित संग PM मोदी भी होंगे साथ!

Captain Smit Machchhar: फ्लाईदुबई विमान में हुए हाई-स्टेक्स मिड-एयर हमले के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर से खास बातचीत की। इस दौरान नेतन्याहू ने संकट की घड़ी में कैप्टन मच्छर के अदम्य साहस और सूझबूझ की जमकर सराहना की। उन्होंने कैप्टन मच्छर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का औपचारिक न्योता भी दिया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से शनिवार (3 अक्तूबर) रात फोन पर बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया कि हमले से पहले को-पायलट ने प्रार्थना करने की इच्छा जताई थी। उसका सम्मान करते हुए वह दूसरी ओर मुड़ गए थे।

मच्छार ने बताया कि कुछ मिनट बाद उन्हें सिर के पीछे जोरदार प्रहार महसूस हुआ और इसके बाद उन पर लगातार हमले किए गए। नेतन्याहू ने उनसे कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों में उनके साहस और संयम बनाए रखने की क्षमता से वह हैरान हैं। उन्होंने कहा, “आपने इतनी सारी जानें बचाईं… आपने दुनिया की आत्मा को बचाया।”

उन्होंने कहा, “मैं आपको और मेरे प्रिय मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हमारे अगले स्वतंत्रता दिवस पर जश्न की मशाल जलाने के लिए आमंत्रित करना चाहता हूं। आप भारत और इज़राइल के बहादुर लोगों के सच्चे हीरो हैं। आप पूरी दुनिया के हीरो हैं। मैं आपके जल्द और पूरी तरह से ठीक होने की कामना करता हूं।”

नेतन्याहू ने आगे कहा, “आम तौर पर यह सम्मान इज़राइली नागरिकों को ही दिया जाता है। लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में इजरायल के सभी नागरिक आपका स्वागत करेंगे। इसलिए हमें उम्मीद है कि आप जल्द ही इजरायल आएंगे… मैं आपको यहां फिर से देखने के लिए उत्सुक हूं। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए मुझे लगता है कि यह यात्रा यादगार और ऐतिहासिक होगी।”

कॉकपिट में अचानक हुआ हमला

कैप्टन स्मित मच्छार ने नेतन्याहू को उस खौफनाक घटना के बारे में बताया, जब फ्लाईदुबई की उड़ान सामान्य रूप से आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान उनके को-पायलट ने प्रार्थना करने की अनुमति मांगी। मच्छार ने बताया कि स्थानीय क्रू सदस्यों के लिए यह सामान्य बात थी, इसलिए उन्होंने पेशेवर रवैया अपनाते हुए अपना ध्यान उड़ान पर बनाए रखा। लेकिन करीब चार-पांच मिनट बाद उनके सिर के पीछे जोरदार हमला हुआ।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद विमान में कोई गंभीर तकनीकी खराबी हुई है। लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि कॉकपिट के अंदर ही उन पर हमला किया जा रहा है। हमले के बाद उनकी आंखों के सामने धुंध छाने लगी और वह बुरी तरह भ्रमित हो गए। इसी दौरान विमान तेजी से नीचे की ओर जाने लगा। कॉकपिट के फर्श पर पड़े होने के बावजूद उन पर लगातार वार किए जाते रहे।

‘अगर दरवाजा नहीं खोलता तो मेरी मौत हो जाती’

कैप्टन मच्छर ने बताया कि उस वक्त उन्हें एहसास हुआ कि विमान को बचाने का एकमात्र रास्ता कॉकपिट का दरवाजा खोलना था। उन्होंने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और दरवाजे की तरफ बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “मेरे अंदर बस एक आखिरी लड़ाई बाकी थी। आप इसे निजी लड़ाई कहें या लोगों के लिए लड़ाई। लेकिन मैंने सोचा कि अगर मैंने ऐसा नहीं किया तो मैं मर जाऊंगा। इसके बाद मैंने अपनी पूरी ताकत लगाई और दरवाजे की तरफ गया और उसे खोल दिया।”

नेतन्याहू ने पूछा- सुरक्षित कॉकपिट का दरवाजा कैसे खोला?

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार से पूछा कि आखिर इतनी गंभीर स्थिति में उन्होंने कॉकपिट का सुरक्षित दरवाजा कैसे खोला? इस पर मच्छार ने कॉकपिट डोर की पूरी कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि बाहर से कॉकपिट में एंट्री के लिए सिक्योरिटी कोड की जरूरत होती है।

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स्मित ने बताया कि विमान के अंदर मौजूद क्रू को उस समय प्रवेश करने से रोका गया था। हालांकि, कॉकपिट के अंदर की तरफ से दरवाजा एक सामान्य मैनुअल टर्न-नॉब के जरिए खोला जा सकता है। इसी व्यवस्था का फायदा उठाते हुए कैप्टन मच्छार ने अपनी जान जोखिम में डालकर दरवाजा खोला और विमान को एक संभावित बड़ी त्रासदी से बचाने की कोशिश की।

यह बातचीत फ्लाईदुबई विमान में हुई उस भयावह घटना के बाद हुई है, जिसमें कॉकपिट के भीतर हिंसा के बावजूद कैप्टन मच्छार ने कंट्रोल बनाए रखा और विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिए आखिरी क्षण तक संघर्ष किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कैप्टन स्मित मच्छार के लिए ‘अशोक चक्र’ की मांग की है।

पंजाब बॉर्डर पर घुसपैठ से भड़का भारत! नई दिल्ली में पाकिस्तानी राजनयिक तलब, ‘नागरिक’ वाले दावे को किया खारिज

भारत ने पंजाब में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास अवैध घुसपैठ की लगातार कोशिशों को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार (3 अक्टूबर) को पाकिस्तान के प्रभारी राजनयिक यानी चार्ज डी अफेयर्स (Pakistani Chargé d’Affaires) को तलब कर घुसपैठ को बढ़ावा देने पर आपत्ति जताई। यह कार्रवाई पंजाब के तरनतारन जिले में BSF जवानों द्वारा दो संदिग्ध पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराए जाने के एक दिन बाद हुई है। पंजाब के अधिकारियों ने बताया था कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शुक्रवार को बीएसएफ की कार्रवाई में दो संदिग्ध पाकिस्तानी घुसपैठिये मारे गए थे।

अधिकारियों ने बताया था कि यह घटना दोपहर में तरनतारन जिले में हुई। आपको बता दें कि पंजाब की पाकिस्तान के साथ 553 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है। पंजाब के तरनतारन में भिखीविंड के पुलिस उपाधीक्षक अतुल सोनी ने बताया था कि जानकारी के अनुसार, तीन घुसपैठिए भारतीय क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन बाद में उनमें से एक पाकिस्तान की ओर लौट गया। सोनी ने बताया था कि बीएसएफ जवानों की वापस लौटने की चेतावनी के बावजूद दो अन्य लोग भारतीय सीमा की ओर बढ़ते रहे। हालांकि, पीटीआई के मुताबिक, सोनी ने बताया था कि दोनों घुसपैठियों की पहचान अभी नहीं हुई है।

घुसपैठिए जवानों को लगातार उकसा रहे थे

अधिकारियों ने कहा कि बीएसएफ के एक संतरी के अनुसार, दोनों घुसपैठिए लगातार उकसा रहे थे। भारतीय क्षेत्र में घुसने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इसके बाद बीएसएफ जवानों ने गोलीबारी की, जिसमें दोनों घुसपैठिए मारे गए। उन्होंने बताया कि बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया। भारत ने पाकिस्तान को बताया कि कुल तीन लोग भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे और BSF की बार-बार चेतावनी के बावजूद सीमा बाड़ की ओर बढ़ते रहे। भारतीय सुरक्षा बलों ने इसे तत्काल सुरक्षा खतरा मानते हुए कार्रवाई की।

भारत ने घुसपैठ और ड्रग तस्करी का मुद्दा उठाया

न्यूज 18 के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह घटना पाकिस्तान से सक्रिय हथियारबंद ड्रग सिंडिकेट्स द्वारा सीमा पार आवाजाही के कथित दोहराए जा रहे पैटर्न को सामने लाती है। भारत ने पाकिस्तान से घुसपैठ, ड्रग तस्करी और इसमें पाकिस्तानी सीमा सुरक्षा बलों की कथित संलिप्तता के मामलों की जांच करने को कहा। भारत ने पाकिस्तान से अंतरराष्ट्रीय सीमा की पवित्रता का सम्मान करने और दोनों देशों के बीच लागू समझौतों का सख्ती से पालन करने की भी अपील की।

पाक के ‘नागरिक’ वाले दावे को भारत ने बताया बेबुनियाद

पाकिस्तान ने दावा किया था कि मारे गए दोनों लोग आम नागरिक थे। उसने कहा कि वे गलती से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में चले गए थे। भारत ने पाकिस्तान के इस दावे को बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण बताया। इसके बाद भी इस्लामाबाद यह मानने को तैयार नहीं है कि वे घुसपैठिये थे। MEA ने पाकिस्तान से अपनी तरफ से अवैध आवाजाही रोकने के लिए अपने सुरक्षा बलों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को आगे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है। भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामलों में पाकिस्तान को घुसपैठ और तस्करी की गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

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Russia Ukraine War: क्या भारत कराएगा रूस-यूक्रेन युद्ध का अंत? कीव ने कहा- नई दिल्ली का सीजफायर प्लान सबसे व्यापक

Russia Ukraine War Latest News: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को खत्म कराने की दिशा में भारत ने एक अहम कूटनीतिक पहल की है। यूक्रेन ने भारत के सीजफायर प्रस्ताव को अब तक मिले सभी प्रस्तावों में सबसे व्यापक बताया है। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के मुताबिक, कीव को भारत के अलावा तुर्की, मिस्र और अमेरिका से भी सीजफायर के प्रस्ताव मिले हैं। यूक्रेन रूस के साथ अलग-अलग फॉर्मेट में सीजफायर पर विचार करने के लिए तैयार है।

RBC-Ukraine की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी विदेश मंत्री ने कीव में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि भारत का प्रस्ताव इन सभी पहलों में ‘सबसे व्यापक’ है। उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म कराने की प्रक्रिया में भूमिका निभाने की इच्छा स्पष्ट रूप से जताई है।

भारत के प्रस्ताव में क्या है?

सिबिहा के मुताबिक, यूक्रेन ऊर्जा क्षेत्र और काला सागर (Black Sea) दोनों में एक साथ सीजफायर चाहता है। उनका कहना है कि सिर्फ एक क्षेत्र में सीजफायर पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन ऊर्जा और काला सागर में सीजफायर के लिए तैयार है। लेकिन दोनों को एक साथ शामिल किया जाना चाहिए। इसमें सभी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के साथ-साथ बंदरगाहों से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले रोकना भी शामिल होगा।

तुर्की-मिस्र और अमेरिका के प्रस्ताव भी मेज पर

यूक्रेन के सामने भारत के अलावा तीन अन्य कूटनीतिक पहल भी हैं। सिबिहा के अनुसार, तुर्की और मिस्र ने काला सागर में अनाज और कृषि क्षेत्र से जुड़े सीजफायर का जॉइंट प्रस्ताव दिया है। वहीं अमेरिका ने ऊर्जा क्षेत्र में सीजफायर का एक फ्रेमवर्क पेश किया है। यह मुद्दा पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान भी चर्चा में आया था।यूक्रेन का कहना है कि वह संपर्क रेखा (Line of Contact) पर बिना किसी शर्त के सीजफायर समेत अलग-अलग फॉर्मेट पर विचार करने के लिए तैयार है।

काला सागर में फिर शुरू हो सकती है बातचीत

रूस और यूक्रेन के बीच काला सागर में सीजफायर को लेकर नए दौर की बातचीत की तैयारी भी चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, तुर्की और संयुक्त राष्ट्र इस दिशा में नए प्रयास कर रहे हैं। काला सागर में सीजफायर का एक अहम उद्देश्य अनाज की आपूर्ति को सुरक्षित रखना है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर पहले भी दबाव पड़ा है। दोनों देशों से होने वाला अनाज निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण है।

पुतिन भी कर चुके हैं PM मोदी की तारीफ

भारत की पहल पर यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की तारीफ की थी। वाल्दाई फोरम में पुतिन ने कहा था कि पीएम मोदी उन विश्व नेताओं में शामिल हैं, जो रूस के साथ अच्छे और मैत्रीपूर्ण संबंध होने के बावजूद लगातार यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने की जरूरत का मुद्दा उठाते हैं।

पुतिन ने कहा कि रूस प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों और संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के समर्थन के लिए आभारी है। उन्होंने PM मोदी के विचारों को बहुत अच्छे विचार बताते हुए कहा कि भारत के प्रधानमंत्री संघर्ष को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करना चाहते हैं।

भारत लगातार बातचीत और शांति पर दे रहा जोर

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई मौकों पर कहा है कि भारत का रुख मानवीय और शांति-केंद्रित है। अब यूक्रेन द्वारा भारत के सीजफायर प्रस्ताव को ‘सबसे व्यापक’ बताया जाना भारतीय कूटनीतिक भूमिका के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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Russia-Ukraine War : मॉस्को की ओर यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले, रूस का दावा- 1,600 से ज्यादा ड्रोन मार गिराए

Russia-Ukraine War : मॉस्को की ओर यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले, रूस का दावा- 1,600 से ज्यादा ड्रोन मार गिराए

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यूक्रेन ने मॉस्को की ओर अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक को अंजाम दिया है। रूस ने दावा किया है कि शनिवार से अब तक उसने 1,600 से ज्यादा यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए हैं, जिनमें करीब 450 ड्रोन मॉस्को की दिशा में बढ़ रहे थे। रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को में ड्रोन हमला हुआ है। मॉस्को की एक ऑइल रिफाइनरी को ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा है। हमले के बाद यहां आग लग गई। इस हमले के दौरान मॉस्को क्षेत्र में दो लोगों की मौत की भी जानकारी सामने आई है।

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मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने इसे क्षेत्र पर हुए सबसे बड़े यूक्रेनी ड्रोन हमलों में से एक बताया। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, हमलों के बाद मॉस्को के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

 

मॉस्को की तेल रिफाइनरी तक पहुंचे ड्रोन

 

रिपोर्ट के मुताबिक, कई ड्रोन मॉस्को ऑयल रिफाइनरी तक पहुंचने में सफल रहे। रॉयटर्स के प्रत्यक्षदर्शियों ने रिफाइनरी परिसर से धमाकों और धुएं के गुबार की जानकारी दी। हालांकि, संयंत्र को हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी है। यूक्रेन की ओर से इस हमले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

 

मॉस्को की इस रिफाइनरी ने वर्ष 2024 में करीब 11.6 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया था। इससे लगभग 2.9 मिलियन टन पेट्रोल और 3.2 मिलियन टन डीजल का उत्पादन हुआ था।

 

यूक्रेन के हमलों से पहले भी रूस की रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने की खबरें सामने आती रही हैं। इन हमलों को रूस के कुछ हिस्सों में ईंधन की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी से भी जोड़ा गया है।

 

रूस के संसदीय चुनाव के बीच हुआ हमला

 

यह ड्रोन हमला रूस में संसदीय चुनाव के अंतिम दिन हुआ। मॉस्को के मेयर सोबयानिन ने दावा किया कि ड्रोन अभियान का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को बाधित करना था। हालांकि, इस दावे पर यूक्रेन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। मॉस्को क्षेत्र के रामेंस्कोये में हमलों के बाद 21 मंजिला एक अपार्टमेंट बिल्डिंग से करीब 400 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें लगभग 70 बच्चे शामिल थे।

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यूक्रेन में रूसी ड्रोन हमले में चार की मौत

 

इसी बीच यूक्रेन में भी रूसी ड्रोन हमले में चार लोगों की मौत हुई है। कीव क्षेत्र में हुए रातभर के हमले में तीन बच्चों समेत चार लोगों की जान चली गई। आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, एक ड्रोन के निजी मकान से टकराने के बाद एक महिला और उसके तीन साल के दो बच्चों की मौत हो गई। एक अन्य हमले में घायल हुई लड़की ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस तरह रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के बीच दोनों देशों में ड्रोन हमलों का सिलसिला लगातार जारी है।

रूस पर ट्रंप का शिकंजा, 100% टैरिफ वाले बिल पर किया साइन, जानें भारत और चीन पर कैसे पड़ेगा असर

Russia Sanctions Bill: भारत और चीन जैसे देशों के लिए एक बड़ी और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस बिल से उन्हें उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं।

Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 के तहत रूस के एनर्जी सेक्टर, सीनियर अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और उन टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिन्हें पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन टैंकरों को आमतौर पर ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है।

भारत-चीन पर कैसे पड़ेगा असर?

बुधवार को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने यह कानून 262-159 के अंतर से पास कर दिया। इससे पहले इस बिल को सीनेट से मंजूरी मिल चुकी थी। नए कानून के तहत रूस से तेल या गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े खरीदार देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत या चीन पर तुरंत 100% टैरिफ लगा दिया जाएगा। टैरिफ लगाना है या नहीं और अगर लगाना है तो किस दर पर, इसका फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे।

जानकारी के मुताबिक, इस कानून का मकसद एनर्जी एक्सपोर्ट से मॉस्को की कमाई कम करना और यूक्रेन युद्ध को लेकर उस पर दबाव बढ़ाना है।

कब लागू हो सकता है टैरिफ?

यह कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर लागू हो जाएगा। इसके तहत, उन देशों से आयातित सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाना जरूरी है, जो कानून बनने से पहले के 12 महीनों में कुल मात्रा के हिसाब से रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदार रहे हों। अगर किसी देश का रूसी गैस आयात, लागू अवधि के दौरान रूस के कुल निर्यात का 15 प्रतिशत से कम रहा हो और उसने उस आयात को कम करने के लिए “महत्वपूर्ण कदम” उठाए हों, तो उसे गैस से जुड़े शुल्कों से छूट मिलती है।

भारत ने रिश्तों पर असर पड़ने की चेतावनी दी

भारत ने वॉशिंगटन को पहले ही चेतावनी दे दी है कि नए कदमों से दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है। नई दिल्ली ने कहा है कि वह एनर्जी सिक्योरिटी के लिए प्रतिबद्ध है और मार्केट की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग सप्लायर्स से तेल खरीदना जारी रखेगी।

बता दें कि भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है। जबकि चीन भी एक बड़ा खरीदार है, इसलिए नए कानून के तहत दोनों देशों पर असर पड़ सकता है।

वहीं, इस कानून से ट्रंप को टैरिफ के बारे में बड़े फैसले लेने की छूट मिलती है और कुछ खास स्थितियों में छूट देने का भी प्रावधान है।

भारत के लिए यह कानून ऐसे समय में आया है, जब नई दिल्ली, रूस से तेल खरीदने को लेकर वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव और अपनी एनर्जी की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

शी जिनपिंग के दौरे से बढ़ सकती है टेंशन

सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप के इस कदम से ठीक पहले, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत के लिए वॉशिंगटन आने वाले हैं।

यह बैठक एक दशक में शी की पहली व्हाइट हाउस यात्रा होगी और इस साल दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने की दूसरी मुलाकात होगी। इससे पहले उनकी मुलाकात मई में बीजिंग में हुई थी।

इस बैठक में व्यापार एक अहम मुद्दा हो सकता है। इसके अलावा ताइवान को लेकर तनाव, ईरान युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर बनी अस्थायी शांति को आगे बढ़ाने की कोशिशों पर भी चर्चा हो सकती है।

गौरतलब है कि रूस पर लगाए गए नए प्रतिबंधों वाला कानून दोनों देशों के बीच दबाव का एक और मुद्दा बन सकता है, क्योंकि चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले दुनिया के सबसे बड़े देशों में शामिल है।

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‘युद्ध का हर दिन इंसानियत को पीछे धकेलता है’; पीएम मोदी ने पुतिन से लड़ाई खत्म करने की अपील की

PM Modi Putin Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन और मध्य पूर्व में जारी संघर्षों के बीच “लगातार युद्ध” की जगह “युद्ध खत्म करने” की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, इन संघर्षों का वैश्विक भू-राजनीति पर भी बड़ा असर पड़ रहा है।

बता दें कि अला-आर्चा स्टेट रेजिडेंस में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से गले मिलकर एक-दूसरे का स्वागत किया। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, पुतिन ने अक्साकल मीटिंग रूम में मोदी का स्वागत किया। इस दौरान उनके साथ वरिष्ठ रूसी अधिकारियों और मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था।

पुतिन ने दी मुझे यूक्रेन के बारे में जानकारी दी- पीएम मोदी

बैठक के दौरान, मोदी ने कहा कि पुतिन ने उन्हें यूक्रेन के हालात के बारे में जानकारी दी और शांति की कोशिशों के लिए भारत का समर्थन दोहराया।

मोदी ने कहा, “आपने मुझे यूक्रेन के हालात के बारे में जानकारी दी। भारत शांति की सभी कोशिशों का समर्थन करता है। युद्ध में बीता हर दिन इंसानियत को पीछे धकेलता है। वहीं, शांति की ओर एक कदम उम्मीद जगाता है। हमें कभी न खत्म होने वाले युद्ध से युद्ध के अंत की ओर बढ़ना होगा, जो इंसानियत के हित में है। सभी मुद्दों को जल्द सुलझाया जाना चाहिए।”

मोदी ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के मजबूत होने पर भी जोर दिया और कहा कि राष्ट्रीय हित दोनों देशों के लिए “सबसे बड़ी प्राथमिकता” है।

पुतिन से मिलकर खुशी हुई

मोदी ने कहा, “मुझे पुतिन से मिलकर बहुत खुशी हुई। पिछले साल पुतिन का भारत दौरा बहुत सफल रहा था। आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिली है।”

भारत और रूस के बीच व्यापार का कुल मूल्य 2% से ज्यादा बढ़ा

इस बीच, पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग में सकारात्मक रुझान दिख रहे हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार का कुल मूल्य 2% से ज्यादा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि मोदी के व्यक्तिगत ध्यान की वजह से दोनों देशों के संबंध और मजबूत हो रहे हैं।

रूसी राष्ट्रपति ने पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ते संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि 2025 में भारत और रूस के बीच पर्यटकों की आवाजाही में 16% की बढ़ोतरी हुई।

यह बैठक भारत के लिए एक अहम मोड़ पर हो रही है, क्योंकि अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई में रुकावट आ रही है और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है। ये बातचीत और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि एक तरफ नई दिल्ली रूसी कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर रहते हुए अपनी ऊर्जा सप्लाई सुरक्षित करना चाहती है, तो दूसरी तरफ मॉस्को अपने तेल निर्यात से होने वाली कमाई को सुरक्षित रखना चाहता है।

यूक्रेन युद्ध पर भारत ने फिर साफ किया रुख

बता दें कि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद से ही भारत ने इस मामले में सावधानी भरा रुख अपनाया है। नई दिल्ली ने बार-बार शांति और संघर्ष खत्म करने की अपील की है, लेकिन क्रेमलिन की सीधे तौर पर आलोचना करने से परहेज किया है।

गौरतलब है कि रूस भारत का एक अहम साझेदार बना हुआ है, खासकर ऊर्जा और रक्षा के क्षेत्र में। वित्त वर्ष 2026 में दोनों देशों के बीच करीब 60 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। अब दोनों देशों की नजर इस दशक के अंत तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर है।

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