3 दिन, 15 मुलाकातें और बड़े फैसले… BRICS Summit में PM मोदी का रहा ‘पावर पैक्ड’ शेड्यूल, ग्लोबल साउथ पर दिया जोर

BRICS Summit 2026: दिल्ली के भारत मंडपम में हुए हाई-प्रोफाइल ब्रिक्स समिट का समापन रविवार को ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ के साथ हुआ, जो भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत थी। वहीं, इस समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शेड्यूल काफी व्यस्त रहा। प्रधानमंत्री ने कम से कम 15 देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के मसूद पेजेशकियन शामिल थे। इन बैठकों के जरिए पीएम मोदी ने भारत के अहम सहयोगियों और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखा।

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भी आयोजन किया, जिसमें उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच मजबूत संबंध बनाने और वैश्विक संस्थागत सुधारों की वकालत की। साथ ही, उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और विकासशील देशों को लाभ पहुंचाने के लिए कई पहल भी प्रस्तावित कीं।

पहला दिन: मोदी की पुतिन और पेजेश्कियान के साथ बैठक

11 सितंबर को, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब यूक्रेन युद्ध के कारण मॉस्को और पश्चिमी देशों के संबंध प्रभावित हो रहे थे। उन्होंने भारत-रूस संबंधों पर व्यापक चर्चा की, जिसमें 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने की रणनीतियां भी शामिल थीं। चर्चाओं में रक्षा, ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग पर भी बात हुई।

इसके कुछ घंटों बाद, उन्होंने भारत मंडपम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की; यह दो हफ्तों में उनकी दूसरी बैठक थी। प्रधानमंत्री ने भारत के इस रुख को दोहराया कि पश्चिम एशिया क्षेत्र के सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए। उन्होंने इस क्षेत्र में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। पेजेश्कियान ने भी इस संघर्ष के बीच भारत से बड़ी कूटनीतिक भूमिका निभाने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। गुटेरेस ने पीएम मोदी को ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता मिलने पर बधाई दी। दोनों नेताओं ने मल्टीपोलैरिटी (बहु-ध्रुवीयता) के महत्व और UN सुरक्षा परिषद सहित बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।

बैठकों के बाद PM मोदी ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया, जहां उन्होंने ग्लोबल इनोवेशन, व्यापार और आर्थिक सहयोग में इस समूह की बढ़ती मजबूती को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच भारत ने अपनी आर्थिक और व्यापारिक नीतियों का आधार मजबूती और इनोवेशन को बनाया है।

दूसरा दिन: सबकी नजरें शी-मोदी पर

प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत किया, जो सात साल बाद भारत की अपनी पहली यात्रा पर आएं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में सुधार के माहौल में हो रही है। शनिवार को ब्रिक्स समिट की भी औपचारिक शुरुआत हुई, जिसमें ग्लोबल गवर्नेंस, मल्टीलेटरलिज्म, आर्थिक सहयोग और ब्रिक्स समूह के विस्तार के बाद उसके भविष्य जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

ब्रिक्स समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि BRICS किसी देश या समूह के खिलाफ नहीं है। उन्होंने ऐसे समय में ज्यादा सहयोग की अपील की जब ‘ग्लोबल साउथ’ मुश्किल दौर से गुजर रहा है। उन्होंने ग्लोबल गवर्नेंस संस्थानों में सुधार के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी बात की।

प्रधानमंत्री ने शी के साथ एक अहम द्विपक्षीय बैठक भी की, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत सीमा सुरक्षा और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर चीन के साथ “अर्थपूर्ण बातचीत” के लिए तैयार है। शी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और चीन एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं और उन्होंने वैश्विक मंच पर दोनों देशों की बड़ी भूमिका की वकालत की। दोनों पक्षों ने फिर से कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए और मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए।

शी के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली, मलेशिया के अनवर इब्राहिम, यूएई के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और वियतनाम के ले मिन्ह हंग के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें कीं।

तीसरा दिन: ब्रिक्स समिट का समापन

ईरान और UAE के बीच तनाव के बावजूद ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ पर पूरी सहमति बनने के बाद, प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स समिट के समापन की औपचारिक घोषणा की। ब्रिक्स की ‘फैमिली फोटो’ में उनके साथ पुतिन और शी भी मौजूद थे। पीएम मोदी ने इसे ब्रिक्स परिवार की बढ़ती ताकत और वैश्विक प्रभाव का एक सशक्त उदाहरण बताया।

अन्य नेताओं के भारत से रवाना होने के दौरान, पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और मिस्र के अब्देल फतह अल-सिसी के साथ भी बैठकें कीं।

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ब्रिक्स की साझा करेंसी नहीं आएगी:सदस्य देश अपनी करेंसी में लेनदेन करेंगे; आज PM मोदी की 4 वर्ल्ड लीडर्स के साथ बैठक

BRICS समिट का आज आखिरी दिन है। आज ओपन मीटिंग होगी, जिसमें सदस्य देशों के नेता और दूसरे आमंत्रित देशों के प्रमुख शामिल होंगे। बैठक में BRICS से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद PM मोदी 4 देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। समिट के पहले दिन भारत ने साफ कर दिया कि फिलहाल BRICS देशों की अपनी कोई साझा करेंसी बनाने का प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कहा कि BRICS में स्थानीय करेंसी में आपसी व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने पर चर्चा जरूर चल रही है। इसका मकसद देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना और लेन-देन की लागत कम करना है। BRICS देशों ने नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी BRICS देशों ने शनिवार को समिट के दौरान नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी। इसमें कई मुद्दों पर साझा बयान जारी किया गया। डेक्लरेशन में रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों पर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी। BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव है और ईरान, सऊदी अरब और UAE के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं। ब्रिक्स समिट में PM मोदी के बयान की 5 अहम बातें तनाव के बीच ईरान-UAE राष्ट्रपतियों ने बातचीत की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने BRICS समिट से इतर UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और कई क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के रुख अलग हैं। हालांकि, ईरान और UAE पिछले कुछ सालों से रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में यह मुलाकात तनाव के बीच दोनों देशों के बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत है। पश्चिमी देशों के लिए BRICS की बढ़ती चुनौती BRICS देश अब आपस में कारोबार करते समय डॉलर का इस्तेमाल कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे एक-दूसरे की अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही, अलग-अलग देशों के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एक पेमेंट सिस्टम या एक साझा करेंसी नहीं है। इस साल भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS समिट में भी अपनी करेंसी में कारोबार और आसान ऑनलाइन पेमेंट पर जोर दिया जाएगा। भारत चाहता है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और उनकी डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाए। इससे एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना आसान हो सकता है और हर बार डॉलर की जरूरत कम हो सकती है। एक बैंक की रिपोर्ट से निकला BRICS का नाम BRICS की शुरुआत किसी सरकार ने नहीं, बल्कि एक बैंक की रिपोर्ट से हुई थी। 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द इस्तेमाल किया। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बताया। तब BRIC कोई संगठन नहीं था। 2006 में चारों देश साथ आए और BRIC समूह बना। 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। पिछले साल ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी पूर्ण सदस्य बने। आज BRICS दुनिया के बड़े आर्थिक मंचों में शामिल है। इसके सदस्य देशों की ग्लोबल GDP में हिस्सेदारी 27% से ज्यादा है, जबकि यूरोपियन यूनियन की करीब 14% है। ———————- BRICS से जुड़ी यह खबरें भी पढ़ें… 1. BRICS के साझा बयान में पहलगाम हमले की निंदा: टेरर फंडिंग रोकने पर जोर; कहा- आतंकियों को पनाह देने वालों पर मिलकर एक्शन लेंगे रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें… 2. पुतिन का अमेरिका-यूरोप पर तंज:कमजोर देश खुद को G7 क्यों कहते हैं; मोदी बोले- ब्रिक्स देशों में दुनिया की 40% GDP प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स लीडर्स ने शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ग्लोबल ट्रेड पर बात की। पूरी खबर पढ़ें…

ब्रिक्स की इकोनॉमी अमेरिका से 3 गुना बड़ी:10 साल बाद भारत में साथ दिखेंगे मोदी-पुतिन-जिनपिंग; 20 देशों के नेता भी होंगे शामिल

BRICS समिट शनिवार से नई दिल्ली में शुरू होने जा रहा है। भारत में होने वाले BRICS समिट में 10 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आएंगे। तीनों नेता इससे पहले 2016 में गोवा में हुए BRICS समिट में एक साथ शामिल हुए थे। समिट में BRICS के 11 सदस्य देशों के अलावा 10 पार्टनर देशों के नेता भी शामिल होंगे। BRICS की ताकत को सिर्फ सदस्य देशों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी आबादी और अर्थव्यवस्था से भी समझा जा सकता है। 11 सदस्य देशों में दुनिया की करीब 49.5% आबादी रहती है। यानी दुनिया के लगभग हर दो में से एक व्यक्ति BRICS देशों में रहता है। अर्थव्यवस्था की बात करें तो PPP यानी खरीदने की क्षमता के आधार पर BRICS देशों की कुल अर्थव्यवस्था दुनिया की करीब 39% है। यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था के मुकाबले करीब 3 गुना है। PM मोदी 4 वर्ल्ड लीडर्स से मिलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को कई विदेशी नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। जिनपिंग का गलवान हिंसा के बाद पहला भारत दौरा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत में पहली आमने-सामने की बैठक होगी। गलवान के बाद करीब 4 साल तक LAC पर दोनों देशों के बीच तनाव रहा। अब भारत और चीन LAC से लेकर कारोबार तक 6 बड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं। इनमें सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा है। दोनों देश सीमा विवाद पर एक विशेषज्ञ समूह बनाने पर सहमत हुए हैं। इसके अलावा सीमा पर 2 अतिरिक्त सैन्य संपर्क केंद्र और पूर्वी व मध्य सेक्टर में 2 सैन्य हॉटलाइन बनाने पर भी सहमति बनी है। अब इन फैसलों को दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिलनी है। दूसरा बड़ा मुद्दा दोनों देशों के बीच कारोबार है। 2025-26 में भारत ने चीन से करीब 11.4 लाख करोड़ रुपए का सामान आयात किया। इससे भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 8.6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रहा। पश्चिमी देशों के लिए BRICS की बढ़ती चुनौती BRICS देश अब आपस में कारोबार करते समय डॉलर का इस्तेमाल कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे एक-दूसरे की अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही, अलग-अलग देशों के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एक पेमेंट सिस्टम या एक साझा करेंसी नहीं है। इस साल भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS समिट में भी अपनी करेंसी में कारोबार और आसान ऑनलाइन पेमेंट पर जोर दिया जाएगा। भारत चाहता है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और उनकी डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाए। इससे एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना आसान हो सकता है और हर बार डॉलर की जरूरत कम हो सकती है। ब्रिक्स तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं का संगठन BRICS 11 देशों का ऐसा समूह है, जिसमें दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं। BRICS का मकसद सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाना है। शुरुआत में इसमें 4 देश थे और इसे BRIC कहा जाता था। BRIC नाम 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने दिया था। बाद में दूसरे देश जुड़ते गए और इसका नाम BRICS हो गया। भारत 2026 में BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है। एक बैंक की रिपोर्ट से निकला BRICS का नाम BRICS की शुरुआत किसी सरकार ने नहीं, बल्कि एक बैंक की रिपोर्ट से हुई थी। 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द इस्तेमाल किया। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बताया था। तब BRIC कोई संगठन नहीं था। लेकिन बाद में ये चारों देश एक साथ आने लगे। 2006 में BRIC समूह बना और 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद BRIC का नाम BRICS हो गया। पिछले साल ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी इसके पूर्ण सदस्य बने। इसके साथ BRICS का दायरा और बढ़ गया। आज BRICS दुनिया के बड़े आर्थिक मंचों में शामिल है। इसके सदस्य देशों की ग्लोबल GDP में हिस्सेदारी 27% से ज्यादा है, जबकि यूरोपियन यूनियन की करीब 14% है। पाकिस्तान के चाहने के बावजूद BRICS में नहीं मिली एंट्री BRICS के विस्तार के बाद कई देशों ने इसमें शामिल होने की कोशिश की। इनमें पाकिस्तान और तुर्किये भी थे। पाकिस्तान ने 2023 में सदस्यता के लिए आधिकारिक आवेदन किया था। उसे चीन और रूस का समर्थन भी मिला, लेकिन अब तक BRICS में उसकी एंट्री नहीं हो पाई है। तुर्किये ने भी सदस्यता की कोशिश की, लेकिन उसे भी सफलता नहीं मिली। इससे सवाल उठा कि दोनों देशों की एंट्री क्यों अटकी। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत पाकिस्तान और तुर्की को BRICS में शामिल करने के पक्ष में नहीं था। नए सदस्य को शामिल करने के लिए सभी मौजूदा सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। यानी किसी एक देश की आपत्ति से सदस्यता रुक सकती है। हालांकि, भारत ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान की सदस्यता रोकने की बात नहीं कही है। ——————- यह खबर भी पढ़ें… BRICS में पुतिन का अमेरिका-यूरोप पर तंज: कमजोर देश खुद को G7 क्यों कहते हैं; मोदी बोले- ब्रिक्स देशों में दुनिया की 40% GDP प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स लीडर्स ने शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ग्लोबल ट्रेड पर बात की। पूरी खबर पढ़ें…

भारत में आकर ब्रिक्स के मंच से गरजे पुतिन, बोले- वर्चस्व वापस पाने की नाकाम कोशिश कर रहे पुराने नेता, जानिए उनके निशाने पर कौन

Putin BRICS Speech: नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों और पारंपरिक आर्थिक महाशक्तियों पर करारा हमला बोला है। पुतिन ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस समय गहरे और बुनियादी बदलाव हो रहे हैं। 20वीं सदी के उत्तरार्ध में दुनिया के विकास की अगुवाई करने वाले तथाकथित पुराने नेता अब पीछे छूट रहे हैं और उनकी जगह आर्थिक गतिविधियों के नए केंद्र यानी विकास के नए इंजन ले रहे हैं। पुतिन ने पश्चिमी देशों पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ब्रिक्स के बढ़ते असर को देखकर उनके प्रतिस्पर्धी अपनी खोई हुई बढ़त वापस हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। पुतिन ने कहा कि उनकी इन कोशिशों की वजह से यह कंपीटिशन कई बार काफी अनुचित और गंदा रूप लेता नजर आ रहा है।

पुराने नेतृत्व की जगह ले रहे विकास के नए इंजन

अपने संबोधन में रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि दुनिया की अर्थव्यवस्था में शक्ति का संतुलन तेजी से बदल रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि पारंपरिक आर्थिक ताकतों के पास आज भी मजबूत बुनियादी ढांचा, तकनीकी बढ़त, वैज्ञानिक लाभ और वैज्ञानिक संस्थान मौजूद हैं लेकिन इसके बावजूद आर्थिक बदलाव को रोका नहीं जा सकता। पुतिन ने कहा कि जो देश पहले आर्थिक विकास की अगुवाई करते थे अब उनकी जगह नए उभरते हुए केंद्र ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने और मजबूत अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध बनाने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच कारोबारी संबंधों और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

G7 को पछाड़ ब्रिक्स ने बनाई बढ़त: वैश्विक GDP में 40% हिस्सेदारी

ब्रिक्स देशों की बढ़ती आर्थिक ताकत का आंकड़ा पेश करते हुए पुतिन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान दुनिया की कुल आर्थिक वृद्धि में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान ब्रिक्स देशों का रहा है जबकि इस दौरान G7 देशों की हिस्सेदारी सिर्फ 18 फीसदी रही। पुतिन ने बताया कि वैश्विक जीडीपी में अब ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। ये आंकड़ा दुनिया के आर्थिक मंच पर ब्रिक्स के बढ़ते वजन को दिखाता है।

‘प्रतिस्पर्धा की बात करने वाले पश्चिमी देश अपना रहे भद्दे तरीके’

पश्चिमी देशों की नीतियों और प्रतिस्पर्धा पर प्रहार करते हुए पुतिन ने कहा कि पश्चिमी प्रतिस्पर्धी ब्रिक्स के उभार पर नजर बनाए हुए हैं और अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त वापस पाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें बताया जाता रहा है कि प्रतिस्पर्धा पवित्र है, लेकिन हमारे पश्चिमी प्रतिस्पर्धी अपनी बढ़त वापस पाने के लिए सब कुछ कर रहे हैं और कई बार यह बहुत ही भद्दा और अनुचित रूप ले लेता है।

रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मॉस्को अभी 30000 से ज्यादा प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी देश रूस और उसके सहयोगियों पर लगातार आर्थिक दबाव बना रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने भारत से उभरती हुई टेक्नोलॉजी दिग्गज कंपनियों का भी उल्लेख किया।

ईरान और ब्राजील ने भी उठाई आर्थिक दबाव के खिलाफ आवाज

इस मंच से ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने भी अपने विचार रखे। मसूद पेजेशकियान ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सप्लाय चेन में रुकावटों और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक हथियारों के इस्तेमाल पर चिंता जताई। वहीं ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने कहा कि 1960 के दशक से अब तक दुनिया की जीडीपी में निम्न और मध्यम आय वाले देशों की हिस्सेदारी 20% से बढ़कर 50% से अधिक हो गई है।

ब्रिक्स का निर्यात बढ़कर 6 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा: पीयूष गोयल

फोरम में भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि ब्रिक्स का निर्यात 2003 के 900 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में लगभग 6 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। इसके साथ ही वैश्विक निर्यात में ब्रिक्स की हिस्सेदारी करीब दोगुनी होकर 24 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। बिजनेस फोरम के दौरान ग्लोबल वैल्यू चेन को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं, कृषि व कृषि-प्रौद्योगिकी, सेवा व्यापार, महिला आधारित उद्यमों और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यह बैठक शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले आयोजित की गई।

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BRICS Summit 2026: दिल्ली में आज से 18वें BRICS समिट की शुरुआत हो गई है। ऐसे में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स (BRICS) बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में विदेशों से आएं प्रतिनिधियों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा, “ब्रिक्स बिजनेस फोरम में आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है। इस साल हम ब्रिक्स के 20 साल मना रहे हैं। जब 2006 में यह ग्रुप शुरू हुआ था, तब इसमें सिर्फ चार देश थे। आज, ब्रिक्स के सदस्यों और पार्टनर देशों को मिलाकर हमारा परिवार 21 देशों का है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आज BRICS के देश दुनिया की 50 प्रतिशत जनसंख्या, 40 प्रतिशत GDP और 25 प्रतिशत से अधिक ट्रेड को प्रदर्शित करते हैं। इतना ही नहीं, इन वर्षों में जहां ग्लोबल GDP करीब ढाई गुना हुई है, वहीं BRICS देशों की कंबाइन GDP करीब साढ़े चार गुना हुई है।

BRICS देश ग्लोबल इनोवेशन और सॉल्यूशन का अहम केंद्र बन रहे

उन्होंने कहा, BRICS देश ग्लोबल इनोवेशन और सॉल्यूशन के लिए अहम केंद्र के तौर पर भी बन रहे हैं। हमारे देशों में इनोवेशन के लिए नई संभावनाएं आकार ले रही हैं, जिनमें जमीनी स्तर की पहलों से लेकर अत्याधुनिक तकनीकें तक शामिल हैं। ब्रिक्स का बढ़ता दायरा, रफ्तार और उम्मीदें हम सबके बीच साफ तौर पर दिखाई देती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में आयोजित यह फोरम अब तक का सबसे बड़ा ब्रिक्स बिजनेस फोरम है।

BRICS की थीम पर PM मोदी का जोर

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आगे कहा कि “भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय ‘मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण’ है। पिछले 12 वर्षों में, भारत ने इस मंत्र को अपनी आर्थिक और व्यापारिक नीतियों का आधार बनाया है। उन्होंने कहा, मजबूती (resilience) के मामले में, भारत ने ऊर्जा से लेकर टेक्नोलॉजी तक के क्षेत्रों में सप्लाई चेन को अधिक विविध और भरोसेमंद बनाया है। इसी मजबूती का नतीजा है कि आज वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत विकास और स्थिरता का भरोसा देता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी पर जोर

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स (BRICS) बिजनेस फोरम में इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, हम तेजी से अपनी सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और हवाई अड्डों का विस्तार कर रहे हैं। साथ ही, हम जहाज निर्माण, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, महत्वपूर्ण खनिजों और बायोटेक्नोलॉजी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में नई क्षमताएं विकसित कर रहे हैं।”

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