Delhi Circle Rates vs NCR: नोएडा-गुरुग्राम में 50% महंगे हुए प्रॉपर्टी रेट्स, लेकिन दिल्ली में 10 साल से नहीं बदले नियम!

Delhi Property: दिल्ली में जल्द ऊंची इमारतों का रास्ता खुल सकता है। सरकार फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) बढ़ाने पर विचार कर रही है। इससे एक प्लॉट पर पहले से ज्यादा निर्माण किया जा सकेगा। हालांकि, प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने वालों के लिए एक बड़ी समस्या अब भी बनी रह सकती है। दिल्ली के सर्किल रेट पिछले 10 साल से नहीं बदले हैं।

2014 से वहीं के वहीं हैं सर्किल रेट

दिल्ली की आठों प्रॉपर्टी कैटेगरी के सर्किल रेट 2014 से 2025 तक जस के तस बने हुए हैं। इस दौरान NCR में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ीं, लेकिन सरकारी तय न्यूनतम कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

  • कैटेगरी A: ₹7.74 लाख प्रति वर्ग मीटर
  • कैटेगरी B: ₹2.46 लाख प्रति वर्ग मीटर
  • कैटेगरी H: ₹23,280 प्रति वर्ग मीटर

इस वजह से कई इलाकों में बाजार कीमत और सरकारी सर्किल रेट के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।

नोएडा और गुरुग्राम में हुई बड़ी बढ़ोतरी

पड़ोसी शहरों में तस्वीर बिल्कुल अलग है। नोएडा में 2014 से 2025 के बीच सर्किल रेट औसतन 51.4% बढ़े हैं। सबसे ऊंची कैटेगरी में रेट ₹78,000 से बढ़कर ₹1.19 लाख प्रति वर्ग मीटर हो गया।

गुरुग्राम में बढ़ोतरी इससे भी ज्यादा रही। यहां औसतन 176.9% की बढ़ोतरी हुई। DLF Phase II और Phase IV में सर्किल रेट ₹72,000 से बढ़कर ₹2.17 लाख प्रति वर्ग मीटर हो गए, यानी करीब तीन गुना।

सर्किल रेट क्यों हैं अहम?

सर्किल रेट वह न्यूनतम कीमत होती है, जिस पर किसी प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। इसी के आधार पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस तय होती है।

अगर सर्किल रेट बाजार कीमत से काफी नीचे रह जाएं, तो लेनदेन की सही कीमत दर्ज नहीं हो पाती। इससे सरकारी प्रॉपर्टी वैल्यूएशन सिस्टम की पारदर्शिता भी प्रभावित होती है।

FAR बढ़ा तो क्या होगा?

सरकार अगर नए मास्टर प्लान के तहत FAR बढ़ाती है, तो एक प्लॉट पर ज्यादा बिल्ट-अप एरिया बनाया जा सकेगा। इससे कई इलाकों में रीडेवलपमेंट ज्यादा फायदेमंद हो सकता है और डेवलपर्स को बड़े प्रोजेक्ट बनाने का मौका मिलेगा।

लेकिन अगर सर्किल रेट नहीं बढ़े, तो ज्यादा निर्माण की अनुमति और पुराने सरकारी मूल्यांकन के बीच बड़ा अंतर बना रह सकता है। यही वजह है कि अब FAR के साथ-साथ सर्किल रेट में बदलाव की मांग भी तेज हो सकती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

DLF Q1 Results: रियल एस्टेट कंपनी मुनाफा बढ़ा, लेकिन रेवेन्यू घटकर आधा हुआ; शेयरों पर रहेगी नजर

DLF Q1 Results: रियल एस्टेट कंपनी DLF ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 4.1% बढ़कर ₹793.9 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹762.7 करोड़ था।

हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 52.9% घटकर ₹1,280.3 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹2,716.7 करोड़ था।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन रहा कमजोर

जून तिमाही में DLF का EBITDA 58.7% घटकर ₹150.3 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹364.2 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 13.4% से घटकर 11.7% पर आ गया।

इसके बावजूद कंपनी का ग्रॉस मार्जिन 51% रहा। तिमाही के दौरान DLF ने ₹1,317 करोड़ का ऑपरेटिंग कैश फ्लो बनाया। इससे कंपनी की नेट कैश पोजिशन बढ़कर ₹15,200 करोड़ हो गई।

लॉन्च में देरी से घटी बिक्री

जून तिमाही में DLF की नई सेल्स बुकिंग ₹657 करोड़ रही। DLF ने कहा कि कुछ प्रोजेक्ट्स के लॉन्च में देरी की वजह से यह आंकड़ा प्रभावित हुआ। कंपनी को उम्मीद है कि जरूरी मंजूरियां जल्द मिलेंगी और नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए जाएंगे।

कंपनी का कहना है कि मजबूत ब्रांड, ग्राहकों की लगातार मांग और आने वाले प्रोजेक्ट्स की पाइपलाइन के दम पर वह मध्यम अवधि के ग्रोथ लक्ष्य हासिल करने को लेकर आश्वस्त है।

रेंटल कारोबार बना मजबूत

DLF का करीब 5 करोड़ वर्ग फुट का रेंटल पोर्टफोलियो 95% ऑक्यूपेंसी के साथ मजबूत बना हुआ है। कंपनी का फोकस लंबे समय में अपने रेंटल बिजनेस को और बढ़ाने पर है।

चालू वित्त वर्ष में DLF करीब 15 लाख वर्ग फुट के तीन नए रिटेल प्रोजेक्ट शुरू करेगी। इनमें DLF Midtown Plaza (नई दिल्ली), DLF Summit Plaza (गुरुग्राम) और DLF Promenade (गोवा) शामिल हैं।

DCCDL का प्रदर्शन भी मजबूत

DLF की सहयोगी कंपनी DLF Cyber City Developers Limited (DCCDL) का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। जून तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹1,917 करोड़ रहा। EBITDA 9% बढ़कर ₹1,474 करोड़ और शुद्ध मुनाफा 21% बढ़कर ₹717 करोड़ हो गया।

DLF ने क्या कहा?

DLF का कहना है कि मजबूत लैंड बैंक, नए प्रोजेक्ट्स की बड़ी पाइपलाइन, मजबूत बैलेंस शीट और लगातार बढ़ता कैश फ्लो कंपनी को रियल एस्टेट सेक्टर की तेजी का फायदा उठाने में मदद करेगा। कंपनी का फोकस आगे भी लाभदायक और टिकाऊ ग्रोथ पर रहेगा।

DLF का शेयर सोमवार को 0.62% की बढ़त के साथ ₹663 पर बंद हुआ।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Housing Scheme: दिल्ली के पास अपना घर होने का सपना होगा सच! सिर्फ 2 लाख रुपये में मिल रहा है शानदार फ्लैट

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लोगों के लिए डासना गांव में किफायती फ्लैटों की योजना शुरू की है। इसके लिए रजिट्रेशन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ती प्रॉपर्टी की कीमतों के बीच यह योजना उन लोगों के लिए बड़ी राहत है, जो कम खर्च में अपना घर खरीदना चाहते हैं।

जीडीए की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस योजना के तहत एक घर की अनुमानित कीमत 4.49 लाख रुपये रखी गई है। पात्र लाभार्थियों को केंद्र सरकार की ओर से 1.50 लाख रुपये और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी। यानी कुल 2.50 लाख रुपये की सहायता के बाद लाभार्थी को अपनी जेब से सिर्फ करीब 1.99 लाख रुपये ही चुकाने होंगे। योजना के तहत घरों का आवंटन लॉटरी के जरिए किया जाएगा। लॉटरी की तारीख और अन्य जानकारी समय-समय पर जीडीए की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।

फ्लैट की कीमत कितनी है?

  • इस योजना के तहत एक फ्लैट की अनुमानित कीमत करीब 4.50 लाख रुपये रखी गई है। खास बात यह है कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी के बाद लाभार्थी को काफी कम रकम चुकानी पड़ेगी।
  • केंद्र सरकार की ओर से पात्र आवेदकों को 1.50 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी।

    उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।

  • इस तरह कुल 2.50 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद आवेदक को अपनी जेब से करीब 1.99 लाख रुपये यानी लगभग 2 लाख रुपये ही देने होंगे।

आवेदन से पहले जान लें जरूरी बातें

अगर आप इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो आवेदन की अंतिम तिथि और पात्रता की शर्तों का ध्यान रखना जरूरी है।

कौन कर सकता है आवेदन?

इस योजना का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा, जो सरकार द्वारा तय की गई सभी शर्तों को पूरा करते हों।

  • आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए।
  • आवेदक उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले का निवासी होना चाहिए।
  • 20 जुलाई तक आवेदन किया जा सकता है।
  • आवेदक की उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
  • आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम पर देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए।
  • परिवार की आय आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) की निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए।
  • अगर कोई व्यक्ति इन शर्तों को पूरा किए बिना आवेदन करता है, तो उसका आवेदन रद्द किया जा सकता है।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज सही होने चाहिए, ताकि प्रक्रिया में कोई परेशानी न आए।

  • आधार कार्ड
  • पैन कार्ड
  • तहसीलदार या सक्षम अधिकारी द्वारा जारी नया आय प्रमाण पत्र
  • गाजियाबाद का निवास प्रमाण पत्र
  • नोटरी से सत्यापित शपथ पत्र, जिसमें यह घोषणा हो कि आवेदक या उसके परिवार के नाम पर देश में कहीं भी कोई पक्का मकान नहीं है।

Housing Sales: ज्यादा घर, कम खरीदार? जानिए क्या बता रहा हाउसिंग सेल्स का लेटेस्ट डेटा

Housing Sales: देश के टॉप-7 शहरों में अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान घरों की बिक्री में सालाना आधार पर 6% की गिरावट दर्ज की गई। ANAROCK Research की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और सप्लाई चेन की दिक्कतों की वजह से खरीदारों ने घर खरीदने का फैसला टाल दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 में करीब 90,715 घर बिके, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह संख्या 96,285 थी। वहीं, जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के मुकाबले बिक्री में 11% की गिरावट आई।

मुंबई और बेंगलुरु सबसे आगे

मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) और बेंगलुरु देश के सबसे बड़े हाउसिंग मार्केट बने रहे। दोनों शहरों की हिस्सेदारी कुल बिक्री में करीब 48% रही।

MMR में करीब 28,710 और बेंगलुरु में 15,285 घरों की बिक्री हुई। सात बड़े शहरों में सिर्फ कोलकाता (10%), हैदराबाद (2%) और बेंगलुरु (1%) में बिक्री बढ़ी। वहीं, पुणे में सबसे ज्यादा 15% की गिरावट दर्ज की गई।

बिक्री घटी, लेकिन नए प्रोजेक्ट बढ़े

घरों की बिक्री धीमी रहने के बावजूद बिल्डर्स ने नए प्रोजेक्ट लॉन्च करना जारी रखा। रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 में करीब 1.06 लाख नए घर लॉन्च हुए। यह पिछले साल के मुकाबले 7% ज्यादा है। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में लॉन्च 16% घटे।

MMR और बेंगलुरु ने मिलकर कुल नए लॉन्च का 53% हिस्सा जोड़ा। हैदराबाद में नए प्रोजेक्ट्स 53%, बेंगलुरु में 41% और MMR में 23% बढ़े।

महंगे घरों की मांग ज्यादा

रिपोर्ट के मुताबिक, अब खरीदारों का रुझान महंगे घरों की ओर बढ़ रहा है। 80 लाख से 1.5 करोड़ रुपये कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 27% रही। 1.5 करोड़ से 2.5 करोड़ रुपये वाले घरों की हिस्सेदारी 25% और 2.5 करोड़ रुपये से ऊपर के लग्जरी घरों की हिस्सेदारी 22% रही।

वहीं, 40 लाख से 80 लाख रुपये वाले मिड-इनकम सेगमेंट की हिस्सेदारी 19% रही। सबसे सस्ते यानी अफोर्डेबल हाउसिंग की हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 6% रह गई।

खरीदार क्यों हो रहे हैं सतर्क?

ANAROCK Group के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित हुई और खरीदारों का भरोसा कमजोर पड़ा। इसके अलावा, IT और ITeS सेक्टर में AI के बढ़ते असर को लेकर भी अनिश्चितता है। इसी वजह से कई लोगों ने फिलहाल घर खरीदने का फैसला टाल दिया।

उन्होंने कहा कि नए प्रोजेक्ट्स में बढ़ोतरी की वजह उन जमीनों पर लॉन्च हुए प्रोजेक्ट्स हैं, जिन्हें बड़े लिस्टेड डेवलपर्स ने 2025 में खरीदा था। हालांकि, तिमाही आधार पर डेवलपर्स ने भी सतर्क रुख अपनाया।

घरों की कीमतें अब भी बढ़ रहीं

रिपोर्ट के मुताबिक, सात बड़े शहरों में औसत रिहायशी संपत्ति की कीमतें सालाना आधार पर 7% बढ़ीं। हालांकि, तिमाही आधार पर बढ़ोतरी सिर्फ 1% रही, जिससे कीमतों की रफ्तार कुछ धीमी होती दिखी।

सबसे ज्यादा 13% की बढ़ोतरी NCR में हुई। इसके बाद बेंगलुरु में औसत कीमतें 8% बढ़ीं।

बिना बिके घरों का स्टॉक बढ़ा

जून 2026 के अंत तक सात बड़े शहरों में बिना बिके घरों की संख्या बढ़कर 6.16 लाख से ज्यादा हो गई। यह पिछले साल की तुलना में 10% अधिक है।

बेंगलुरु में बिना बिके घरों का स्टॉक 34% बढ़ा। वहीं, NCR ऐसा इकलौता बड़ा बाजार रहा, जहां इन्वेंट्री लगभग स्थिर रही।

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यूपी में घर खरीदार सावधान! UP RERA का बड़ा एक्शन, 76 रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को नोटिस, 15 दिन में जवाब नहीं तो लग सकता है भारी जुर्माना

उत्तर प्रदेश में घर खरीदारों के हितों की रक्षा और रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी ऑथोरिटी ने एक बड़ा कदम उठाया है। यूपी रेरा ने राज्य के ऐसे 76 रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की पहचान की है, जिनके प्रमोटर्स ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अपनी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट ऑथोरिटी के वेब पोर्टल पर अब तक अपलोड नहीं की है। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए यूपी रेरा ने इन सभी डिफॉल्टर प्रमोटर्स को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

15 दिन का मिला अल्टीमेटम, वरना लगेगा भारी जुर्माना

पीटीआई के मुताबिक यूपी रेरा ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी डिफॉल्टर प्रमोटर्स को निर्देश दिया है कि वे 15 दिनों के भीतर प्रासंगिक वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित विलंब शुल्क के साथ अपनी लंबित ऑडिट रिपोर्ट को पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड कर दें। अगर प्रमोटर्स इस समय सीमा के भीतर ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उन्हें प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत का 5 प्रतिशत तक भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।

क्या हैं यूपी रेरा के कड़े नियम और पेनाल्टी?

आधिकारिक बयान के मुताबिक हर वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद रियल एस्टेट प्रमोटर्स के लिए प्रोजेक्ट के खातों का ऑडिट कराना और वित्तीय वर्ष बंद होने के छह महीने के भीतर यूपी रेरा की वेबसाइट पर वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट अपलोड करना पूरी तरह अनिवार्य है। जो प्रमोटर्स तय समय पर वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने में विफल रहते हैं, उन्हें संबंधित वित्तीय वर्ष के लिए 25,000 रुपये का विलंब शुल्क देना होगा। रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट की धारा 4 और इससे जुड़े नियमों व विनियमों का उल्लंघन करने पर प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत का 5 फीसदी तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

स्वतंत्र ऑडिटर से जांच कराना जरूरी, पारदर्शिता पर जोर

यूपी रेरा के नियमों के मुताबिक, प्रोजेक्ट के खातों का ऑडिट प्रमोटर द्वारा नियुक्त किसी स्वतंत्र बाहरी ऑडिटर से ही कराया जाना चाहिए। वह ऑडिटर प्रमोटर की कंपनी, समूह या किसी भी संबद्ध संस्था से जुड़ा हुआ नहीं होना चाहिए। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि स्वतंत्र जांच, वित्तीय रिपोर्टिंग की सटीकता और पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। ऑथोरिटी ने वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट जमा न करने को एक गंभीर चूक बताया है। रेरा का कहना है कि यह रेरा अधिनियम के उन प्रावधानों के खिलाफ है जो प्रमोटर्स के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।

घर खरीदारों को कैसे होगा इससे फायदा?

यूपी रेरा के अनुसार, यह ऑडिट रिपोर्ट केवल एक कागजी या प्रक्रियात्मक आवश्यकता नहीं है बल्कि यह आवंटियों के हितों की रक्षा करने का एक बेहद महत्वपूर्ण जरिया है। इस रिपोर्ट के जरिए ऑथोरिटी को प्रोजेक्ट्स की समीक्षा और मूल्यांकन करने में मदद मिलती है। इसके जरिए घर खरीदारों और आम जनता को ऑथोरिटी की वेबसाइट पर प्रोजेक्ट से जुड़ी सत्यापित और सटीक जानकारी उपलब्ध हो पाती है। इससे घर खरीदार खुद अपने प्रोजेक्ट की प्रगति और प्रमोटर द्वारा नियमों के पालन की निगरानी कर सकते हैं।

यूपी रेरा चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने कहा कि रेरा के तहत समय पर वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट जमा करना हर प्रमोटर की एक बुनियादी जिम्मेदारी है। स्वतंत्र ऑडिट और सटीक रिपोर्टिंग से पारदर्शिता बढ़ती है और घर खरीदारों का भरोसा मजबूत होता है। यूपी रेरा इन प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना जारी रखेगा ताकि आवंटियों के हितों की रक्षा की जा सके और राज्य का रियल एस्टेट सेक्टर अधिक जवाबदेह और भरोसेमंद बन सके।