103 गुना भरा IPO, अब धांसू लिस्टिंग को तैयार यह SME, आपको मिला शेयर?

BenchMark Infotech Listing: इंटीग्रेटेड आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस कंपनी बेंचमार्क इंफोटेक के शेयर अब NSE SME पर लिस्ट होने वाले हैं। इसके आईपीओ को निवेशकों का धमाकेदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल 103 गुना से अधिक भरा था। अब ग्रे मार्केट से बात करें तो इसके शेयरों की लिस्टिंग को लेकर धमाकेदार संकेत मिल रहे हैं। इश्यू प्राइस के मुकाबले इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) ₹25 यानी 22.73% है। इस प्रकार ग्रे मार्केट से बेंचमार्क इंफोटेक के शेयरों की मजबूत लिस्टिंद के संकेत हैं। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। इसके शेयर 5 अक्टूबर को एनएसई एसएसई पर लिस्ट होंगे। आईपीओ के तहत निवेशकों को यह ₹110 के भाव पर जारी हुआ है और डीमैट खाते में 1 अक्टूबर को क्रेडिट हो चुका है।

BenchMark Infotech IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

बेंचमार्क इंफोटेक का ₹42 करोड़ का आईपीओ 25-29 सितंबर तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का धमाकेदार रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 103.12 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 88.62 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 136.92 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 96.90 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹37 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले 4.58 लाख शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹30.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों, ₹4.59 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹3.18 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

BenchMark Infotech के बारे में

बेंचमार्क इंफोटेक सर्विसेज एक इंटीग्रेटेड आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस कंपनी है। यह सरकारी विभागों, PSUs, इंस्टीट्यूशंस और प्राइवेट सेक्टर के क्लाइंट्स को एंड-टू-एंड टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस मुहैया कराती है। यह नेटवर्किंग, कम्युनिकेशन सिस्टम्स, स्ट्रक्चर्ड केबलिंग, फाइबर ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विलांस सिस्टम्स, ऑडियो-विजुअल सॉल्यूशंस, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड सॉल्यूशंस और एनुअल मेटेनेंस सर्विसेज पर काम करती है। इसके अलावा कंपनी ने एआई लैब सॉल्यूशंस को लेकर भी काम शुरू किया है, जिसके तहत यह एआई लैब के सेटअप का काम करती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 163% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹10.22 करोड़ और टोटल इनकम करीब 36% के सीएजीआर से ₹63.99 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹2.71 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹26.44 करोड़ पड़े थे।

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Vijay Kedia’s SMILE Theroy: विजय केडिया की स्माइल थ्योरी, खिलखिला उठेगी पोर्टफोलियो

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vijay Kedia’s SMILE Theroy: विजय केडिया की स्माइल थ्योरी, खिलखिला उठेगी पोर्टफोलियो

Vijay Kedia’s SMILE Theroy: दिग्गज निवेशक विजय केडिया स्टॉक मार्केट की दुनिया में जाना-माना नाम हैं और उनके कही बात रिटेल इंवेस्टर्स के लिए गोल्डेन टिप्स की तरह है। समय-समय पर खुदरा निवेशकों को खास टिप्स देते रहते हैं और ऐसी ही उनकी एक स्माइल थ्योरी है, जिससे आम लोगों को किस स्टॉक में पैसे लगाएं, इससे चुनने में काफी मदद मिल सकती है। स्माइल थ्योरी के जरिए स्टॉक्स को मल्टीबैगर बनने से पहले पकड़ा जा सकता है, जिससे पोर्टफोलियो भी खिलखिला उठेंगे।

क्या है Vijay Kedia की SMILE थ्योरी

S: स्मॉल इन साइज यानी कि ऐसी कंपनियों में निवेश, जोकि अभी छोटी हो यानी स्मॉल-कैप या माइक्रो-कैप।

M: मीडियम इन एक्सपीरिएंस यानी कि मैनेजमेंट के पास अच्छा-खास अनुभव होना चाहिए।

I: इंक्रीजिंग अर्निंग्स/लॉर्ज इन एस्पिरेशन यानी कि सपने बड़े होने चाहिए, तभी तो कंपनी आगे बढ़ेगी और इसकी कमाई बढ़ती रहनी चाहिए।

L: लो डेट यानी कि कंपनी पर कर्ज का भारी-भरकम बोझ नहीं होना चाहिए।

E: एक्स्ट्रा-लॉर्ज मार्केट पोटेंशियल यानी कि कंपनी जिस सेगमेंट या कैटेगरी में है, वह काफी बड़ा होना चाहिए, तभी तो कंपनी को आगे बढ़ने का स्कोप मिलेगा।

एक उदाहरण से समझें

मान लीजिए कोई कंपनी आज ₹500 करोड़ की है मतलब कि S।

उसके मैनेजमेंट के पास 10-15 साल का अनुभव है यानी कि M।

प्रमोटर कंपनी का आक्रामक तरीके से विस्तार कर रहा है और कंपनी की कमाई भी बढ़ रही है यानी कि I।

कंपनी का कर्ज भी कंट्रोल में है यानी कि L।

कंपनी जिस सेक्टर में है, उसका पोटेंशियल ₹50 हजार करोड़ है यानी कि ₹500 करोड़ की कंपनी के सामने ₹50 हजार करोड़ का मार्केट है यानी कि E।

क्या है Vijay Kedia के पोर्टफोलियो में

विजय केडिया ने स्टॉक मार्केट में 19 साल की उम्र से निवेश शुरू किया था। वह निवेशकों को लंबे समय तक के लिए निवेश की सलाह देते हैं और अपने पोर्टफोलियो इंवेस्टमेंट के लिए स्माइल थ्योरी पर निर्भर रहते हैं। उनके पोर्टफोलियो की बात करें तो कंपनी की लेटेस्ट एक्सचेंज फाइलिंग के हिसाब से उनके पास ₹1,319.2 करोड़ के 23 स्टॉक्स हैं, जिनमें अतुल ऑटो, महिंद्रा रिजॉर्ट्स, सियाराम सिल्क मिल्स, सुदर्शन केमिकल, वैभव ग्लोबल, तेजस नेटवर्क्स और यथार्थ हॉस्पिटल हैं।

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विजय केडिया कैसे चुनते हैं 10x रिटर्न देने वाले शेयर? जानिए उनकी सुपरहिट ‘R.I.S.E.’ स्ट्रेटेजी

Vijay Kedia Multibagger Strategy: शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक और ‘सुपरस्टार इनवेस्टर’ विजय केडिया ने दलाल स्ट्रीट पर मल्टीबैगर शेयर ढूंढने का अपना सीक्रेट फॉर्मूला शेयर किया है। बाजार की भीड़ किसी शेयर के पीछे भागे, उससे पहले 10x या उससे ज्यादा रिटर्न देने वाले स्टॉक्स की पहचान करने के लिए वे एक खास ‘R.I.S.E.’ रणनीति का इस्तेमाल करते हैं।

विजय केडिया का मानना है कि मल्टीबैगर रिटर्न पाने का असली जरिया अगले 15-20 सालों के लंबे समय वाले मेगा-थीम्स पर सही समय पर दांव लगाना है। जानिए विजय केडिया की यह R.I.S.E. स्ट्रेटेजी क्या है और वे शेयर चुनते समय किस ‘गोल्डन रूल’ को फॉलो करते हैं।

क्या है विजय केडिया का ‘R.I.S.E.’ फॉर्मूला?

केडिया के अनुसार, निवेशकों को ऐसे सेक्टर्स और कंपनियों की तलाश करनी चाहिए जिनमें अगले एक-दो दशक तक लगातार ग्रोथ की क्षमता हो। R.I.S.E. का हर अक्षर एक बड़े और भविष्य के मेगा-थीम को दर्शाता है:

1. R – Renewable Energy & Energy Transition (अक्षय ऊर्जा और एनर्जी ट्रांजिशन)

दुनिया तेजी से पारंपरिक ईंधन से ग्रीन एनर्जी की तरफ शिफ्ट हो रही है। इसमें विंड एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, न्यूक्लियर पावर और बैटरी टेक्नोलॉजी/एनर्जी स्टोरेज आते है। विजय केडिया का मानना है कि इस थीम के पास अगले 15 से 20 साल का लंबा रनवे है, जहां कंपनियों के लिए ग्रोथ की अपार संभावनाएं हैं।

2. I – Infrastructure (इंफ्रास्ट्रक्चर और केपेक्स)

देश में बुनियादी ढांचे का विकास और कंपनियों द्वारा किया जाने वाला बड़ा पूंजीगत खर्च। टर्नअराउंड कंपनियां, जो अपने बुरे दौर से निकलकर नए केपेक्स के दम पर मजबूत वापसी कर रही हैं। भारत जैसे तेजी से बढ़ते देश में इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग ही देश की आर्थिक वृद्धि की रीढ़ बनते हैं।

3. S – Security (साइबर सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र)

साइबर थ्रेट्स के बढ़ते दौर में डिजिटल और राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुकी है। साइबर सिक्योरिटी कंपनियां और डिफेंस यानी रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियां। वैश्विक तनावों और डिजिटलाइजेशन के चलते सरकारों और कॉरपोरेट्स का सिक्योरिटी बजट हर साल तेजी से बढ़ रहा है।

4. E – Emerging Tech (उभरती हुई टेक्नोलॉजी)

आने वाला दौर पूरी तरह नई तकनीकों के नियंत्रण में होगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर्स। ये ऐसे सेक्टर्स हैं जो पुराने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह से बदलकर रख रहे हैं। जो कंपनियां इनमें शुरुआती बढ़त बनाएंगी, वे भविष्य की दिग्गज बनेंगी।

अब जानिए विजय केडिया का ‘गोल्डन रूल’

अक्सर रिटेल निवेशक किसी अच्छे सेक्टर की कंपनी को किसी भी कीमत पर खरीद लेते हैं। इस पर चेतावनी देते हुए विजय केडिया ने एक महत्वपूर्ण गोल्डन रूल दिया है:

‘Buying a good sector at ANY price is a recipe for bad returns.’ यानी किसी भी अच्छे सेक्टर के शेयर को किसी भी भाव पर खरीद लेना खराब रिटर्न की गारंटी है।विजय केडिया के अनुसार शेयर चुनते समय हमेशा इस 3-स्टेप हायरार्की को फॉलो करना चाहिए:

1. सही सेक्टर की पहचान

2. कंपनी की गुणवत्ता और बैलेंस शीट

3. सही वैल्यूएशन और अनुशासन

इसका मतलब साफ है कि अगर सेक्टर बहुत शानदार है, लेकिन कंपनी पर भारी कर्ज है या उसकी बैलेंस शीट खराब है, तो वह मल्टीबैगर नहीं बनेगी। और अगर सेक्टर व कंपनी दोनों अच्छे हैं, लेकिन आपने शेयर बहुत महंगे वैल्यूएशन पर खरीद लिया है, तो भी आपको बाजार में अच्छा रिटर्न नहीं मिलेगा।

रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए टेकअवे

विजय केडिया का यह R.I.S.E. फॉर्मूला रिटेल निवेशकों को किसी भी फैंसी या ट्रेंडिंग शेयर में बिना सोचे-समझे पैसा लगाने से रोकता है। शेयर बाजार में लंबी अवधि में बड़ा पैसा बनाने के लिए सेक्टर की ग्रोथ के साथ-साथ कंपनी के फंडामेंटल्स और सही एंट्री प्राइस का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है। 

Upcoming IPO: विजय केडिया का है तगड़ा निवेश! एंकर राउंड में मधुसूदन केला ने भी लगाया बड़ा दांव, 31 अगस्त से खुलेगा ये आईपीओ

Vijay Kedia Backed Asuthosh Fibre IPO: शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक विजय केडिया के निवेश वाली कंपनी आशुतोष फाइबर का आईपीओ दांव लगाने के लिए खुलने जा रहा है। पब्लिक सब्सक्रिप्शन खुलने से ठीक पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों के जरिए ₹16.04 करोड़ जुटा लिए हैं।

एंकर बुक में मधुसूदन केला के मेंटरशिप वाले सिंगुलैरिटी AMC समेत कई बड़े फंड्स ने हिस्सा लिया है। आइए आपको बताते हैं इस आईपीओ की प्राइस बैंड, महत्वपूर्ण तारीखें और कैसी है कंपनी की सेहत।

एंकर बुक: इन 5 बड़े निवेशकों ने लगाए पैसे

28 अगस्त को कंपनी ने एंकर निवेशकों को अपर प्राइस बैंड पर 17.43 लाख शेयर आवंटित किए:

  1. Nine Alps Corporate Advisors: ₹6 करोड़ के निवेश से 6.52 लाख शेयर खरीदे।
  2. Singularity Equity Fund II: ₹3.45 करोड़ के निवेश से 3.75 लाख शेयर खरीदे।
  3. Nav Capital Emerging Star Fund: ₹3.45 करोड़ के निवेश से 3.75 लाख शेयर खरीदे।
  4. Aarth AIF Growth Fund: ₹2.11 करोड़ के निवेश से 2.3 लाख शेयर खरीदे।
  5. Vira Bharat Opportunities Fund: ₹1 करोड़ के निवेश से 1.09 लाख शेयर खरीदे।

Asuthosh Fibre IPO की सभी जरूरी डिटेल्स

गुजरात बेस्ड टेक्निकल टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स बनाने वाली यह कंपनी फ्रेश इश्यू के जरिए बाजार से कुल ₹56.34 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इसमें कोई भी ऑफर फॉर सेल (OFS) कंपोनेंट नहीं है।

  • IPO खुलने की तारीख: 31 अगस्त
  • IPO बंद होने की तारीख: 2 सितंबर
  • प्राइस बैंड: ₹87 से ₹92 प्रति शेयर
  • अलॉटमेंट: 3 सितंबर
  • लिस्टिंग: 7 सितंबर

आईपीओ के पैसों का क्या करेगी कंपनी?

आशुतोष फाइबर जुटाए गए फंड का इस्तेमाल अपनी क्षमता बढ़ाने और कर्ज कम करने में करेगी। ₹25.5 करोड़ नए उपकरण और मशीनरी की खरीद के लिए। ₹20 करोड़ कंपनी का पुराना कर्ज चुकाने के लिए और बाकी रकम सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए करेगी।

विजय केडिया की कितनी है हिस्सेदारी?

ऑफर से पहले कंपनी के प्रमोटर्स के पास 59.79% हिस्सेदारी है। बाकी हिस्सेदारी पब्लिक शेयरधारकों के पास है, जिसमें शेयर बाजार के जाने-माने निवेशक विजय केडिया की 6.57% हिस्सेदारी शामिल है। इस आईपीओ के मर्चेंट बैंकर के रूप में Mefcom Capital Markets को नियुक्त किया गया है।

अब जानिए कैसी है कंपनी की वित्तीय सेहत

टेक्सटाइल यार्न और फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र से जुड़ी इस कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में शानदार प्रदर्शन किया है। मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी का मुनाफा 88.5% बढ़कर ₹16.04 करोड़ हो गया, जो इससे पिछले साल (FY25) में ₹8.5 करोड़ था। कंपनी का कुल रेवेन्यू 2.9% की मामूली बढ़त के साथ ₹117.37 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹114 करोड़ था।

क्या है ग्रे मार्केट का हाल?

आईपीओ वॉच के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 29 अगस्त 2026 को आशुतोष फाइबर आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹37 प्रति शेयर दर्ज किया गया है। यह इसके अपर प्राइस बैंड ₹92 के मुकाबले 40.22% के तगड़े प्रीमियम का संकेत दे रहा है।

इससे पहले 28 अगस्त को भी जीएमपी ₹37 ही था, जबकि 27 अगस्त को यह ₹15 (16.30%) और 26 अगस्त को ₹13 (14.13%) पर बना हुआ था। लगातार बढ़ते और मजबूत जीएमपी ट्रेंड से स्पष्ट है कि प्राइमरी मार्केट में इस आईपीओ को लेकर निवेशकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रही है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

DLF Q1 Results: रियल एस्टेट कंपनी मुनाफा बढ़ा, लेकिन रेवेन्यू घटकर आधा हुआ; शेयरों पर रहेगी नजर

DLF Q1 Results: रियल एस्टेट कंपनी DLF ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 4.1% बढ़कर ₹793.9 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹762.7 करोड़ था।

हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 52.9% घटकर ₹1,280.3 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹2,716.7 करोड़ था।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन रहा कमजोर

जून तिमाही में DLF का EBITDA 58.7% घटकर ₹150.3 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹364.2 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 13.4% से घटकर 11.7% पर आ गया।

इसके बावजूद कंपनी का ग्रॉस मार्जिन 51% रहा। तिमाही के दौरान DLF ने ₹1,317 करोड़ का ऑपरेटिंग कैश फ्लो बनाया। इससे कंपनी की नेट कैश पोजिशन बढ़कर ₹15,200 करोड़ हो गई।

लॉन्च में देरी से घटी बिक्री

जून तिमाही में DLF की नई सेल्स बुकिंग ₹657 करोड़ रही। DLF ने कहा कि कुछ प्रोजेक्ट्स के लॉन्च में देरी की वजह से यह आंकड़ा प्रभावित हुआ। कंपनी को उम्मीद है कि जरूरी मंजूरियां जल्द मिलेंगी और नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए जाएंगे।

कंपनी का कहना है कि मजबूत ब्रांड, ग्राहकों की लगातार मांग और आने वाले प्रोजेक्ट्स की पाइपलाइन के दम पर वह मध्यम अवधि के ग्रोथ लक्ष्य हासिल करने को लेकर आश्वस्त है।

रेंटल कारोबार बना मजबूत

DLF का करीब 5 करोड़ वर्ग फुट का रेंटल पोर्टफोलियो 95% ऑक्यूपेंसी के साथ मजबूत बना हुआ है। कंपनी का फोकस लंबे समय में अपने रेंटल बिजनेस को और बढ़ाने पर है।

चालू वित्त वर्ष में DLF करीब 15 लाख वर्ग फुट के तीन नए रिटेल प्रोजेक्ट शुरू करेगी। इनमें DLF Midtown Plaza (नई दिल्ली), DLF Summit Plaza (गुरुग्राम) और DLF Promenade (गोवा) शामिल हैं।

DCCDL का प्रदर्शन भी मजबूत

DLF की सहयोगी कंपनी DLF Cyber City Developers Limited (DCCDL) का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। जून तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹1,917 करोड़ रहा। EBITDA 9% बढ़कर ₹1,474 करोड़ और शुद्ध मुनाफा 21% बढ़कर ₹717 करोड़ हो गया।

DLF ने क्या कहा?

DLF का कहना है कि मजबूत लैंड बैंक, नए प्रोजेक्ट्स की बड़ी पाइपलाइन, मजबूत बैलेंस शीट और लगातार बढ़ता कैश फ्लो कंपनी को रियल एस्टेट सेक्टर की तेजी का फायदा उठाने में मदद करेगा। कंपनी का फोकस आगे भी लाभदायक और टिकाऊ ग्रोथ पर रहेगा।

DLF का शेयर सोमवार को 0.62% की बढ़त के साथ ₹663 पर बंद हुआ।

Vijay Kedia : ₹80 का शेयर बना ₹16400, विजय केडिया ने बताया मल्टीबैगर स्टॉक का सीक्रेट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vijay Kedia : ₹80 का शेयर बना ₹16400, विजय केडिया ने बताया मल्टीबैगर स्टॉक का सीक्रेट

Vijay Kedia Investment Tips: कई निवेशक हमेशा सिर्फ मल्टीबैगर स्टॉक खोजने की कोशिश करते हैं। इसके चक्कर में कई बार ऐसे शेयरों में भी पैसे लगा बैठते हैं, जहां भारी नुकसान हो जाता है। दिग्गज निवेशक विजय केडिया का कहना है कि बड़ी कमाई करने का राज अगला मल्टीबैगर शेयर ढूंढने में नहीं, बल्कि अच्छे बिजनेस में लंबे समय तक टिके रहने में है।

उन्होंने कहा, “जब लोग 10, 20 या 50 गुना रिटर्न देने वाले शेयरों की बात करते हैं, तो मैं कभी यह सोचकर शेयर नहीं खरीदता कि यह मल्टीबैगर बनेगा। मुझे पहले से ये पता नहीं होता।”

टॉर्च की रोशनी जैसा है निवेश

केडिया निवेश की तुलना रात में टॉर्च लेकर चलने से करते हैं। उनका कहना है, ‘टॉर्च सिर्फ 25 मीटर आगे तक रास्ता दिखाती है। आप पहले उतना चलते हैं, फिर अगले 25 मीटर दिखाई देते हैं। निवेश भी बिल्कुल ऐसा ही है।’

उनके मुताबिक, निवेश से पहले वह सिर्फ एक सवाल पूछते हैं, ‘क्या मैं इस कंपनी के शेयर को अगले 10 साल तक अपने पास रख सकता हूं?’

एक निवेश की कहानी

केडिया ने अपने एक सफल निवेश का उदाहरण भी दिया। उन्होंने 2005 में करीब ₹80 के भाव पर एक कंपनी के शेयर खरीदे। अगले कई सालों में शेयर कभी ₹250 पहुंचा, फिर ₹50-60 तक गिर गया। इसके बाद यह ₹600, ₹1,000 और ₹1,500 तक गया और फिर गिरा।

कोविड-19 के दौरान भी शेयर करीब ₹4,200 से गिरकर ₹1,700 तक आ गया। लेकिन उन्होंने अपने शेयर नहीं बेचे।

सिर्फ डिविडेंड से निकल गई लागत

केडिया के मुताबिक, 16 साल में कंपनी ने करीब ₹250 प्रति शेयर का कुल डिविडेंड दिया। यानी उन्हें खरीद कीमत से तीन गुना ज्यादा डिविडेंड मिल चुका था। उन्होंने कहा, “एक तरह से मेरे शेयर मुफ्त हो गए थे।”

बाद में कंपनी ने 1:1 बोनस शेयर भी दिया। बोनस को शामिल करने के बाद केडिया ने करीब ₹16,400 प्रति शेयर के एडजस्टेड भाव पर अपना निवेश बेचा। यह उनके सबसे सफल निवेशों में शामिल रहा।

50-60% गिरावट भी झेली

केडिया का कहना है कि असली चुनौती मल्टीबैगर ढूंढना नहीं, बल्कि 50-60% की गिरावट के दौरान भी निवेश बनाए रखना है। उनके मुताबिक, “यही सबसे बड़ी समस्या है। ज्यादातर निवेशक गिरावट देखकर घबरा जाते हैं।”

ट्रेन यात्रा से समझाया निवेश

केडिया ने निवेश की तुलना मुंबई से अहमदाबाद जाने वाली ट्रेन से की। उन्होंने कहा, “अगर ट्रेन मुंबई से देर से निकले या दादर स्टेशन पर ज्यादा देर रुक जाए, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता। मेरी नजर मंजिल पर होती है, हर स्टेशन पर नहीं।”

उनका कहना है कि शेयर अगर 50% भी गिर जाए, लेकिन बिजनेस पर भरोसा कायम हो, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बल्कि जब शेयर फिर से खरीद कीमत तक लौटता है, तो उनका भरोसा और मजबूत हो जाता है।

केडिया के मुताबिक, मल्टीबैगर बनने का राज पहले से उसकी पहचान करना नहीं है, बल्कि सही बिजनेस में इतना लंबा टिके रहना है कि कंपाउंडिंग अपना कमाल दिखा सके।

Ather Energy Q1 Results: घाटे में बड़ी कमी, रेवेन्यू 88% उछला; 1 साल में 223% चढ़ा स्टॉक

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में हुआ है भारी नुकसान? तब भी क्यों जरूरी है ITR फाइल करना, जानें टैक्स छूट का यह सीक्रेट फॉर्मूला

ITR Filing Rules: क्या शेयर बाजार में मुनाफे की बजाय नुकसान होने पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना चाहिए? अक्सर देखा जाता है कि जिन निवेशकों को किसी फाइनेंशियल ईयर के दौरान इक्विटी या म्यूचुअल फंड में घाटा होता है, वे मान लेते हैं कि उन्हें ITR फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। खासकर तब, जब उनकी कोई अन्य टैक्स योग्य आय न हो।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स की मानें तो घाटे वाले साल में आईटीआर फाइल न करना लंबे समय में आपको बहुत भारी पड़ सकता है। अगर आप तय समय सीमा के भीतर अपना रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आप अपने इस कैपिटल लॉस को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड का अधिकार खो देते हैं।

इसका सीधा असर यह होगा कि भविष्य में जब आपको प्रॉफिट होगा, तब आप इस घाटे को उस मुनाफे से एडजस्ट नहीं कर पाएंगे और आपको ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नुकसान के बावजूद आईटीआर भरना क्यों फायदेमंद है।

लॉस कैरी फॉरवर्ड करने का क्या है नियम?

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नुकसान के बावजूद समय पर आईटीआर भरने से आपको अपने नुकसान को भविष्य के मुनाफे से एडजस्ट करने की कानूनी अनुमति मिलती है। एनए शाह एसोसिएट्स के टैक्स पार्टनर गोपाल बोहरा बताते हैं कि भले ही किसी टैक्सपेयर की कोई टैक्स देनदारी न बन रही हो और सिर्फ इक्विटी या म्यूचुअल फंड से कैपिटल लॉस हुआ हो, तब भी ड्यू डेट पर या उससे पहले आईटीआर फाइल करना बेहद फायदेमंद है।

Vijay Kedia का मार्केट में कमाई का मंत्र: दिग्गज इन्वेस्टर ने समझाया मोटा पैसा बनाने का ‘एक लाइन’ का ये फॉर्मूला

समय पर आईटीआर दाखिल करने से आप इस नुकसान को अगले 8 सालों तक कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं। भविष्य के सालों में जब भी आपको शेयरों या म्यूचुअल फंड से कमाई होगी, तो आप इस पुराने घाटे को उस मुनाफे से घटाकर अपनी टैक्स देनदारी को काफी कम या शून्य कर सकते हैं।

क्या इक्विटी, डेट म्यूचुअल फंड और गोल्ड ETF के नियम अलग हैं?

कई निवेशकों को लगता है कि यह नियम सिर्फ शेयरों के लिए है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि निवेश का माध्यम कोई भी हो, नियम सभी के लिए बिल्कुल एक समान हैं। चाहे आपका नुकसान इक्विटी शेयर्स से हुआ हो, इक्विटी म्यूचुअल फंड से हो, डेट म्यूचुअल फंड से हो या फिर गोल्ड ईटीएफ से, अगर आप इस अन-एडजस्टेड लॉस को आगे ले जाना चाहते हैं, तो आपको तय तारीख के भीतर ही आईटीआर भरना होगा। नियत तारीख चूकने पर घाटे को आगे ले जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।

इक्विटी के घाटे को क्या दूसरे एसेट्स के मुनाफे से एडजस्ट कर सकते हैं?

हां, नियमों के दायरे में रहकर आप इक्विटी के घाटे को दूसरे कैपिटल एसेट्स से हुए मुनाफे के खिलाफ एडजस्ट कर सकते हैं और अपना टैक्स बचा सकते हैं:

शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस(STCL): अगर आपको शेयरों से शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस हुआ है, तो इसे आप शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह के कैपिटल गेन्स से एडजस्ट कर सकते हैं। फिर चाहे वह मुनाफा शेयरों से हो, प्रॉपर्टी बेचने से हो, गोल्ड से हो या डेट म्यूचुअल फंड से।

लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस(LTCL): अगर आपको शेयरों में लंबी अवधि में घाटा हुआ है, तो नियम कड़े हैं। इसे केवल और केवल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के खिलाफ ही एडजस्ट किया जा सकता है।

निवेशकों को कौन सा ITR फॉर्म चुनना चाहिए?

सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी कमाई या नुकसान के स्रोत क्या हैं:

ITR-2: जो निवेशक शेयरों, म्यूचुअल फंड या अन्य कैपिटल एसेट्स से होने वाले केवल कैपिटल गेन्स या कैपिटल लॉस को रिपोर्ट कर रहे हैं, उन्हें आमतौर पर ITR-2 फॉर्म भरना होता है।

ITR-3: लेकिन, अगर आप शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेड करते हैं, जिसे टैक्स की भाषा में बिजनेस इनकम माना जाता है, तो आपको ITR-3 फॉर्म चुनना चाहिए।

कैपिटल लॉस रिपोर्ट करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

टैक्सपेयर्स को हमेशा यह याद रखना चाहिए कि केवल वही नुकसान आगे ले जाए जा सकते हैं जो समय सीमा के भीतर फाइल किए गए रिटर्न में दिखाए गए हों। इसके अलावा, अपने कॉन्ट्रैक्ट नोट्स, ब्रोकर स्टेटमेंट्स और कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट्स जैसे सभी जरूरी दस्तावेजों को संभालकर रखें, क्योंकि टैक्स अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर ये सबूत के तौर पर काम आते हैं।

गोपाल बोहरा सलाह देते हैं कि आईटीआर दाखिल करने से पहले निवेशकों को अपने AIS और TIS में दर्ज ट्रांजैक्शन का मिलान अपने ब्रोकर की रिपोर्ट से जरूर कर लेना चाहिए। आईटीआर में शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म नुकसान का सही खुलासा सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में टैक्स छूट का लाभ लेने में कोई रुकावट न आए।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।