PhonePe Rural India Plan: फोनपे में निकलेंगी 20000 नौकरियां! भारत के गांव-देहात में विस्तार के लिए कंपनी का बड़ा प्लान

PhonePe Rural India Plan: डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म फोनपे ने गुरुवार को अगले साल भारत के छोटे शहरों और गांवों में अपने बुनियादी ढांचे को और गहराई तक पहुंचाने की योजना की घोषणा की। इसके तहत डिजिटल पेमेंट कंपनी अपने मर्चेंट नेटवर्क को बढ़ाने के लिए 20,000 ऑन-रोल सेल्स कर्मचारियों की भर्ती करेगी। कंपनी अगले 12 महीनों में 50 लाख से अधिक पेमेंट डिवाइस भी लगाएगी। इनमें स्मार्टस्पीकर और पीओएस डिवाइस शामिल होंगे। इनमें से करीब 50% डिवाइस ग्रामीण भारत में लगाए जाएंगे। इससे टियर-6 कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा और गहराई तक पहुंचेगी।

वॉलमार्ट के समर्थन वाली कंपनी फोनपे का यह कदम भारत के एनपीसीआई के उस फैसले के बाद आया है जिसमें चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क लगाने का फैसला किया गया है। इसका एक हिस्सा कम सेवा वाले इलाकों में छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल पेमेंट की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए रखा जाएगा। फोनपे ने कहा, “हाल ही में घोषित एमडीआर ढांचा कंपनी को लंबे समय का नजरिया रखने और मर्चेंट बढ़ाने में निवेचश करने की इजाजत देता है।” अगस्त तक, फोनपे के भुगतान नेटवर्क में 72 करोड़ से अधिक पंजीकृत यूजर और 5 करोड़ से ज्यादा मर्चेंट शामिल थे।

पिछले साल लागू किए गए नए श्रम संहिताएं भी कंपनी को प्रक्रियाओं को सरल बनाकर तेजी से भर्ती करने में सक्षम बना रही हैं। इससे बड़ी संख्या में ऑन-रोल कर्मचारियों को आसानी से कंपनी में शामिल करने में मदद मिल रही है। भारत ने दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में से एक तैयार किया है। इस यात्रा के अगले चरण में देश के हर हिस्से के छोटे कारोबारियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में भाग लेने में सक्षम बनाने वाले मर्चेंट पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश की जरूरत होगी।

फोनपे का प्रस्तावित विस्तार इसी अवसर को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। काफी बड़े फ्रंटलाइन ऑन-रोल कार्यबल की मदद से फोनपे छोटे कस्बों और गांवों में कारोबारियों तक पहुंच सकेगा, उन्हें डिजिटल भुगतान से जोड़ सकेगा, केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकेगा, पेमेंट डिवाइस लगा सकेगा और कारोबारियों को लगातार सहायता प्रदान कर सकेगा।

इस विस्तार से लाखों छोटे कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से और अधिक जोड़ने में भी मदद मिलेगी। डिजिटल रूप से सक्रिय और केवाईसी-अनुपालन वाला मर्चेंट नेटवर्क कारोबारी गतिविधियों को अधिक स्पष्ट रूप से सामने ला सकता है और पात्र कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय सेवाओं की व्यापक रेंज तक पहुंच उपलब्ध करा सकता है। इसमें ऋण देने वाली संस्थाओं द्वारा प्रदान किए जाने वाले कर्ज भी शामिल हैं।

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सिर्फ कैश में पेमेंट करें… UPI पर चार्ज का बड़ा असर दिल्ली के बाजारों में दिखना शुरू, लोकल ट्रेडर्स अब नकद पर देने लगे जोर

UPI पर 0.4% फीस से बवाल: दिल्ली के दुकानदारों ने कहा- अब कैश लाओ, UPI नहीं चलेगा

New Delhi, Sep 16 (PTI) – केंद्र सरकार के 2000 रुपये से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस लगाने के फैसले के बाद दिल्ली के बाजारों में कैश की वापसी शुरू हो गई है। ट्रेडर्स एसोसिएशनों ने साफ कह दिया है कि वे अब कैश पेमेंट को पुश करेंगे ताकि डिजिटल पेमेंट की एक्स्ट्रा कॉस्ट से बचा जा सके।

सरकार ने मंगलवार को बड़े डिजिटल मर्चेंट पेमेंट के लिए नया फ्रेमवर्क लाकर जनवरी 2020 से चली आ रही जीरो-MDR व्यवस्था खत्म कर दी है। इस चार्ज को 75,000 रुपये और उससे ऊपर के पेमेंट पर 300 रुपये पर कैप किया गया है।

दिल्ली के बाजारों में क्या हो रहा है?

कमला नगर से ऐलान:

कमला नगर मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा, “हमने सरकार के डिजिटल पेमेंट के पुश को सपोर्ट किया था, लेकिन अब अगर हम पर ही चार्ज लगेगा तो हम कैश ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देंगे। हम पहले से ही ट्रांजैक्शन चार्ज और 18% GST दे रहे हैं। अब अगर UPI पर भी MDR चार्ज किया तो हम कैश प्रमोट करेंगे। UPI आया था तो हमने सपोर्ट किया था, अब चार्ज लगेगा तो सपोर्ट नहीं करेंगे। हम ट्रांजैक्शन चार्ज क्यों दें?”

उन्होंने दुकानदारों से कैश पेमेंट को बढ़ावा देने की अपील की और कहा कि अगर अभी ये चार्ज मान लिया तो भविष्य में रेट और बढ़ सकता है। उन्होंने ये भी माना कि “हम डिजिटल पेमेंट के आदी हो चुके हैं। बाजार जाते वक्त कभी-कभी कैश भी नहीं रखते। अब वापस कैश पर जाना मुश्किल होगा।”

खान मार्केट और नई दिल्ली ट्रेडर्स का विरोध:

नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव अमित गुप्ता ने PTI से कहा, “UPI को ट्रेडर्स और ग्राहकों के लिए पेमेंट आसान बनाने के लिए लाया गया था। अगर अब 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त चार्ज व्यापारियों को देना पड़ा तो कई लोग कैश को प्राथमिकता देंगे। हमें डिजिटल पेमेंट से कोई दिक्कत नहीं, लेकिन अतिरिक्त लागत व्यापारियों पर नहीं थोपनी चाहिए।”

खान मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने कहा, “हम पहले से ही क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर MDR का विरोध कर रहे थे और अब UPI पर भी चार्ज देना होगा। अगर हमसे UPI पर चार्ज लिया गया तो हम कैश पेमेंट को बढ़ावा देंगे।” उन्होंने कहा कि व्यापारी अब बड़े पेमेंट के लिए चेक और दूसरे बैंकिंग चैनल पर भी विचार करेंगे।

छोटे दुकानदारों का दर्द:

कमला नगर के रिटेल दुकानदार रजत जैन ने कहा कि ये चार्ज रिटेलर्स के लिए मुश्किल होगा, खासकर दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास जहां स्टूडेंट्स 10-20 रुपये की भी खरीदारी करते हैं। “हम उनसे एक पैसा भी एक्स्ट्रा नहीं मांग सकते, लेकिन हम GST और अब UPI का चार्ज भी दें। कस्टमर से कैश मांगो तो वो कहता है UPI से करूंगा। सारा बोझ हम पर है।”

सदर बाजार बड़ी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि ये कदम 2000 रुपये से ऊपर बड़ी संख्या में UPI ट्रांजैक्शन करने वाले छोटे, मध्यम और थोक व्यापारियों की लागत बढ़ा देगा। एक ट्रांजैक्शन पर छोटा चार्ज भी महीने-दर-महीने बड़ा खर्च बन जाएगा।

ग्राहक कपिल अरोड़ा ने कहा, “अगर व्यापारियों को ज्यादा चार्ज देना पड़ा तो वो हमसे ही वसूलेंगे। इस तरह न सिर्फ व्यापारी बल्कि ग्राहक भी परेशान होंगे।”

नए नियम में क्या है राहत?

सरकार ने कहा है कि UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक कमाने वाले छोटे मर्चेंट्स को छूट रहेगी। सरकार के मुताबिक इससे 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन कवर हो जाएंगे।

नया MDR ग्राहकों से नहीं वसूला जा सकता

  • व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर, जो UPI वॉल्यूम का 37% और वैल्यू का 70% है, चार्ज से बाहर रहेगा
  • रेलवे, टेलीकॉम, फ्यूल जैसे एसेंशियल सेक्टर्स पर फ्लैट 5 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन फीस
  • कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन पर 0.02% रेट

 

YES Bank Share Price : सिटी की बुलिश रिपोर्ट ने भरा जोश, 5% भागा शेयर, जानिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

YES Bank Share Price :बुधवार, 16 सितंबर को YES बैंक के शेयरों में लगभग 5% की तेजी आई। स्टॉक में यह तेजी कुछ खास यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)लागू होने के बाद देखने को मिला। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है नए MDR फ्रेमवर्क से बैंकों और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल दूसरी कंपनियों को कमाई का एक नया ज़रिया मिलेगा। फिलहाल 1.40 बजे के आसपास यह शेयर 0.27 रुपए यानी 1.17% की बढ़त के साथ 23.36 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का हाई 24.10 रुपए और दिन का लो 23.29 रुपए है।

15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए नियमों के तहत ₹2,000 से ज़्यादा के UPI पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांज़ैक्शन पर 0.4% तक MDR लगेगा,जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। यह चार्ज मर्चेंट को देना होगा, जबकि ग्राहक बिना किसी ट्रांज़ैक्शन फ़ीस के UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे।

YES बैंक के नोट में दिए गए अनुमानों के मुताबिक नया फ़्रेमवर्क मर्चेंट पेमेंट के लिए UPI के पहले वाले ज़ीरो-MDR मॉडल से अलग है और इससे सालाना लगभग ₹16,000-17,000 करोड़ का रेवेन्यू पूल बनने की उम्मीद है।

YES बैंक को इससे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद

एक्पर्ट्स का कहना है कि MDR के नए नियमों से बैंकिंग सिस्टम को फायदा मिलेगा। इस बारे में सिटी ने एक रिपोर्ट निकाली है। सिटी के मुताबिक MDR चार्जेज का सबसे बड़ा बेनिफिशियरी यस बैंक हो सकता है। सिटी के मुताबिक इन नए नियमें से यस बैंक कर पूर्व मुनाफे में 6-12% का उछाल संभव है। वहीं, PPOP में 5–10% की बढ़त का अनुमान है। सिटी का कहना है कि यह चार्ज नेटवर्क विस्तार के लिए लिया जा रहा है। MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। इससे UPI इकोसिस्टम में 16000–17,000 करोड़ रेवेन्यू जुड़ने का अनुमान है। यह UPI नेटवर्क पर काम करने वाले बैंकों और पेमेंट ऐप्स के लिए बड़ा स्ट्रक्चरल बूस्ट होगा। इसका 60% हिस्सा बैंकिंग सिस्टम की जेब में जाएगा। 25% हिस्सा UPI ऐप प्रोवाइडेर्स को मिलेगा। वहीं, 15% हिस्सा नॉन-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर को मिलेगा।

स्टॉक पर टेक्निकल एक्सपर्ट की राय

एक्सिस सिक्योरिटीज में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च (हेड ऑफ़ रिसर्च) राजेश पलविया ने कहा कि शुक्रवार को हुई जबरदस्त खरीदारी और भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम के कारण, यस बैंक ने ₹23 के अपने छह हफ्ते के सप्लाई बैरियर को मज़बूती से पार किया और ₹24 के आसपास बंद हुआ,जो बाज़ार में मज़बूत भागीदारी का संकेत है। ₹21.85 के अहम 200-डे सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) सपोर्ट लेवल से मज़बूत उछाल के बाद इस तेज़ी को और गति मिली, जिससे स्टॉक अपने 20, 50 और 100 डे SMA के स्तरों को फिर से हासिल करने में कामयाब रहा।

डेली,वीकली और मंथली RSI रीडिंग का बुलिश ज़ोन में मज़बूती से बने रहना स्टॉक में व्यापक तेज़ी को और पुख्ता करता है,जो सभी अहम टाइमफ्रेम में लगातार तेज़ी बने का संकेत है। इस स्टॉक में 23 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ 27-30 रुपए के शॉर्ट टर्म टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

India Net Zero Portal: क्लाइमेट चेंज पर भारत का बड़ा एक्शन, अब नेट जीरो टारगेट्स की होगी सार्वजनिक निगरानी! जानें कैसे काम करेगा नया पोर्टल

India Net Zero Portal: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने विश्व ओजोन दिवस 2026 के मौके पर मुंबई में भारत का नेट जीरो पोर्टल और राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) डैशबोर्ड लॉन्च किया है। ये दोनों डिजिटल इनिशिएटिव्स देश में लिए जा रहे क्लाइमेट एक्शंस में ट्रांसपेरेंसी, कोऑर्डिनेशन के साथ इसे एविंडेस आधारित बनाने में खास भूमिका निभाएंगी।

आपको बता दें कि नेट जीरो पोर्टल अलग अलग संस्थाओं की ओर से वॉलेंट्री लिए गए नेट जीरो संकल्पों को दर्ज करने के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान देगा। इसके अलावा NAPCC डैशबोर्ड जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय मिशनों की प्रगति की निगरानी करेगा।

नेट जीरो पोर्टल बताएगा कि क्लाइेट ऐक्शन में कितना हो रहा काम

नेट जीरो पोर्टल विभिन्न क्षेत्रों की भारतीय संस्थाओं द्वारा स्वैच्छिक पंजीकरण और नेट जीरो प्रतिबद्धताओं के डिस्क्लोजर के लिए एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसपर मौजूद संस्थाएं अपने ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन की जानकारी दे सकती हैं, अपने नेट जीरो टारगेट्स का ऐलान करने के अलावा एनुअल रिपोर्ट अपडेट्स भी दे सकती हैं।

कंपनियों को अपने सीधे (Scope 1) और अप्रत्यक्ष (Scope 2) उत्सर्जन का ब्योरा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। वहीं सप्लाई चेन से जुड़े (Scope 3) उत्सर्जन की जानकारी देना पूरी तरह से उनकी मर्जी पर निर्भर होगा। कंपनियां इस पोर्टल पर यह भी बता सकती हैं कि वे नेट जीरो का लक्ष्य कैसे हासिल करेंगी। इसमें साफ-सुथरी ऊर्जा को अपनाना, ऊर्जा की बचत, नई तकनीकों का इस्तेमाल और कार्बन हटाने जैसे उपाय शामिल हैं।

जो भी कंपनियां अपने नेट जीरो लक्ष्य सफलतापूर्वक घोषित करेंगी, उन्हें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से आधिकारिक तौर पर एकनॉलेजमेंट दिया जाएगा।

सबके लिए उपलब्ध रहेगा डेटा

कंपनियों की इन घोषणाओं को आम जनता भी देख सकेगी। इससे देश में जलवायु सुधार के लिए हो रहे कामों का एक बड़ा और पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार होगा। इस पोर्टल को [https://netzeroindia.moef.gov.in/](https://netzeroindia.moef.gov.in/) पर एक्सेस किया जा सकता है।

NAPCC डैशबोर्ड: एक ही जगह दिखेगा सरकारी मिशनों का पूरा रिपोर्ट कार्ड

राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना यानी NAPCC डैशबोर्ड के जरिए सरकार के अलग-अलग जलवायु मिशनों की प्रगति को एक जगह ट्रैक किया जा सकेगा। यह डैशबोर्ड जलवायु परिवर्तन से जुड़े राष्ट्रीय मिशनों के आंकड़ों को एक साथ लाएगा जिससे संबंधित मंत्रालयों और विभागों को उनकी प्रगति पर निगरानी रखना आसान हो जाएगा। इस डैशबोर्ड से अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। साथ ही यह समझने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में कितना काम हुआ है और कहां सुधार की जरूरत है. यह पहल भारत के घरेलू प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए जलवायु वादों से जोड़ने में भी मदद करेगी। इस डैशबोर्ड को  (https://napccindia.moef.gov.in/](https://napccindia.moef.gov.in/) पर देखा जा सकता है।

सरकार की इस पहल का सीधा मकसद टेक्नोलॉजी के जरिए कामकाज में पारदर्शिता लाना और देश को कम-कार्बन वाले भविष्य की ओर ले जाना है, ताकि इस बदलाव में हर किसी की भागीदारी तय की जा सके।

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UP Smart Schools: एक ओर यूपी के 14,429 सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाने का ऐलान, दूसरी ओर नोएडा के स्कूल की CJP ऑडिट पर बवाल

UP smart schools: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद के तहत 14,429 सरकारी प्राइमरी स्कूलों को ‘स्मार्ट स्कूलों’ के तौर पर विकसित करने के लिए 300 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। यह फैसला लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। इस योजना के तहत, राज्य के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चुने गए स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास शुरू की जाएंगी। इन स्कूलों के छात्रों को स्मार्ट क्लास, ICT लैब, डिजिटल किताबें और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा मिलेगी। टेक्नोलॉजी-आधारित लर्निंग सिस्टम के तहत शिक्षक टैबलेट का भी इस्तेमाल करेंगे।

300 करोड़ रुपये मंज़ूर

योगी सरकार ने इस पहल के लिए 300 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। स्मार्ट क्लास लगाने के लिए ‘श्री ट्रॉन इंडिया लिमिटेड’ को लागू करने वाली एजेंसी के तौर पर चुना है। इंस्टॉलेशन का काम कॉम्पिटिटिव टेंडरिंग (प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया) के जरिए किया जाएगा। प्रस्तावित दर 2,07,910 रुपये प्रति स्कूल तय की गई है, जिसमें सैनिटेशन चार्ज और GST शामिल हैं। अगर टेंडर प्रक्रिया में दर कम आती है, तो सरकार 300 करोड़ रुपये की सीमा के भीतर बची हुई रकम का इस्तेमाल और स्कूलों को कवर करने के लिए कर सकती है।

1,129 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा

राज्य में पहले से ही 32,000 से ज़्यादा स्कूलों में स्मार्ट क्लास चल रही हैं। 15,000 से ज्यादा स्कूलों में ICT लैब की सुविधा भी है। जबकि 1,129 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा दी गई है। सरकार ने उत्तर प्रदेश में 2.61 लाख से अधिक शिक्षकों को टैबलेट भी उपलब्ध कराए हैं। उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में स्मार्ट क्लास 2021 में शुरू हुई थीं। जबकि इनका औपचारिक संचालन 2022-23 शैक्षणिक सत्र से शुरू हुआ।

नई स्मार्ट स्कूल योजना सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की पहुंच को और बढ़ाएगी। सरकार छात्रों की संख्या और एनरोलमेंट के आधार पर चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास और ICT लैब सुविधाओं का विस्तार करेगी। इस पहल का मकसद सरकारी स्कूलों के बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है।

CJP ने नोएडा में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मंगलवार को नोएडा में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर दिया। इसके तहत संगठन ने युवाओं से अपने आसपास के स्कूलों का निरीक्षण करने और शिक्षण सुविधाओं की जमीनी हकीकत का आकलन करने की अपील की। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा कि 15 अगस्त से जारी इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को अपने क्षेत्र में स्कूलों की स्थिति और वहां दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता की जांच करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

दास ने पत्रकारों से कहा, “आज हम ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत एक स्कूल का ऑडिट करने के लिए नोएडा आए हैं। हम देखना चाहते हैं कि यहां बच्चे किन परिस्थितियों में पढ़ रहे हैं। चूंकि, नोएडा उत्तर प्रदेश के बेहतर जिलों में से एक है, इसलिए उम्मीद की जाती है कि यहां के स्कूलों की स्थिति अच्छी होगी।” उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत सामने लाने के लिए उत्तर प्रदेश के युवाओं को भी आगे आकर अपने आसपास के स्कूलों में दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए।

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इससे पहले, दास ने X पर एक पोस्ट में कहा था कि वह अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए श्रमिकों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कथित तौर पर प्रताड़ित किए गए और अनुचित तरीके से जेल में डाले गए लोगों के परिजन और मित्रों से मुलाकात करेंगे। दास ने कहा था कि संविधान उचित वेतन की मांग करने और अमानवीय रूप से लंबी पाली के खिलाफ प्रदर्शन करने के अधिकार की रक्षा करता है।

MDR Charges Row: 96% मर्चेंट पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई शुल्क! वित्त मंत्रालय ने बताया- UPI ट्रांजैक्शन पर कहां लगेगा चार्ज और कहां नहीं लगेगा?

UPI Charges Row: सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से बड़े व्यापारी भुगतान के लिए UPI लेनदेन पर नई शुल्क व्यवस्था लागू करने की घोषणा कर दी है। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर व्यापारियों से 0.4 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। जबकि 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। हालांकि, भुगतान करने वाले ग्राहकों को यह शुल्क नहीं देना होगा। सरकार का कहना है कि इसका बोझ दुकानदार या व्यापारी को उठाना पड़ेगा।

दो व्यक्तियों के बीच होने वाले पीयर-टू-पीयर (P2M) यूपीआई भुगतान पर किसी भी राशि के लिए कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)शुल्क नहीं लगेगा। इसके अलावा 2,000 रुपये तक के छोटे व्यापारी लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे। ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MCR) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले किसी व्यापारी से लिया जाता है।

96% मर्चेंट पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई शुल्क!

सरकार के मुताबिक, व्यक्तियों से व्यापारियों को होने वाले कुल पी2एम लेनदेन की मात्रा में 2,000 रुपये से कम राशि वाले लेनदेन 95 प्रतिशत से भी अधिक हैं। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा, “96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी रकम की परवाह किए बिना शुल्क से मुक्त रहेंगे। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और छोटे व्यापारियों के लिए Zero-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा।”

मंत्रालय के मुताबिक, इसका मतलब है कि लगभग 96 प्रतिशत Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। MDR केवल निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक मूल्य वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, “यह शुल्क केवल 2,000 रुपये से अधिक के पी2एम लेनदेन पर ही 0.4 प्रतिशत की दर से लागू होगा।”

यहां लगेगा 5 रुपये का शुल्क

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और खेती के कच्चे माल जैसे जरूरी और कम मार्जिन वाले सेक्टर में 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर पांच रुपये का एक समान शुल्क लगेगा। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण सेवाओं की लागत को विश्वसनीय बनाए रखना है। इन कैटेगरी की हिस्सेदारी पी2एम लेनदेन की मात्रा में करीब 17 प्रतिशत है। जबकि लेनदेन के मूल्य में लगभग 46 प्रतिशत है।

यही समान शुल्क व्यवस्था सरकारी उपयोगिता बिलों (बिजली, पानी और पाइप वाली गैस) के भुगतान तथा स्कूल फीस और विश्वविद्यालय शुल्क जैसे शैक्षणिक भुगतान पर भी लागू होगी। हालांकि 2,000 रुपये तक के ऐसे भुगतान इस शुल्क से मुक्त रहेंगे।

अधिकतम सीमा ₹300 होगी

म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और शेयर ब्रोकर एवं डीलर के जरिए किए गए पेमेंट पर 0.02% का MDR लगाया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। सरकार ने कहा है कि UPI ऐप प्रोवाइडर्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए चार्ज लगाने की इजाजत नहीं होगी। बैंकों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि मर्चेंट इस नई फीस का बोझ ग्राहकों पर न डालें। इसके अलावा, पर्सनल UPI ट्रांजैक्शन के लिए मुफ्त ट्रांजैक्शन की संख्या पर कोई मासिक कोटा या सीमा नहीं होगी।

छोटे व्यापारियों को राहत!

यूपीआई क्यूआर कोड के जरिएहर महीने एक लाख रुपये तक पाने वाले छोटे व्यापारी नई व्यवस्था के तहत शून्य एमडीआर का लाभ लेते रहेंगे। यदि कोई व्यापारी लगातार तीन महीने तक एक लाख रुपये से अधिक का मासिक लेनदेन करता है, तो उसे सामान्य पी2एम कैटेगरी में रखा जाएगा। सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था से केवल करीब चार प्रतिशत व्यापारी लेनदेन ही प्रभावित होंगे। इसकी वजह है कि अधिकांश लेनदेन या तो 2,000 रुपये की सीमा से कम हैं या पी2एम छूट के दायरे में आते हैं।

ऑटोपे पर कोई MDR नहीं

नया MDR नियम सिर्फ उन UPI ​​पेमेंट पर लागू होगा जो सीधे यूजर के बैंक अकाउंट से मर्चेंट के अकाउंट में किए जाते हैं। RuPay क्रेडिट कार्ड या पहले से मंजूर ‘क्रेडिट लाइन’ का इस्तेमाल करके UPI से किए गए पेमेंट के लिए अलग नियम होंगे। वहीं, यूटिलिटी बिल, OTT सब्सक्रिप्शन और रेगुलर इन्वेस्टमेंट के लिए ऑटोमेटेड बार-बार होने वाले पेमेंट जैसे UPI मैंडेट या ‘ऑटोपे पर कोई MDR नहीं लगेगा।

2020 से लागू है MDR चार्ज

MDR चार्ज व्यवस्था जनवरी, 2020 से लागू थी। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना था। हालांकि, बैंक और फिनटेक कंपनियां इसे टिकाऊ नहीं बताते हुए शुल्क फिर से लागू करने की लंबे समय से मांग कर रही थीं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) भी पहले सरकार से इस नीति की समीक्षा करने का आग्रह कर चुके हैं।

MDR सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं

वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि MDR को टैक्स या सरकार/NPCI द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क नहीं समझना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, यह राशि पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल विभिन्न पक्षों, जैसे बैंकों और पेमेंट ऐप प्रोवाइडर्स के बीच वितरित की जाती है। मंत्रालय ने कहा कि इसका उद्देश्य UPI सिस्टम के संचालन और उसके लगातार विस्तार को समर्थन देना है।

UPI को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने की कोशिश

मंत्रालय के मुताबिक, यह व्यवस्था Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत ‘यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी’ में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लाई गई है। इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम की स्थिरता और विस्तार सुनिश्चित करना है। साथ ही आम लोगों और छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क से बचाना है।

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UPI ट्रांजैक्शन पर कहां लगेगा चार्ज और कहां नहीं लगेगा?  

  • 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर कोई एमडीआर नहीं लगाया जाएगा।
  • 2,000 रुपये से अधिक के ग्राहक-से-व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा।
  • 3,000 रुपये की खरीदारी पर 0.4 प्रतिशत की दर से व्यापारी द्वारा जमाकर्ता बैंक को 12 रुपये का शुल्क देना होगा।
  • यह कमीशन बैंकों सहित पूरे पेमेंट इकोसिस्टम के पार्टनर्स के बीच बांटा जाएगा।
  • लेनदेन मूल्य की परवाह किए बिना व्यक्तियों के बीच होने वाले (पी2पी) लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
  • ₹75,000 और उससे ज्यादा के बड़े पेमेंट के लिए MDR की सीमा हर ट्रांजैक्शन पर अधिक से अधिक ₹300 तय की जाएगी।
  • टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसे जरूरी सेक्टर के लिए हर ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ़्लैट MDR लागू होगा।
  • म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकर को किए जाने वाले भुगतान पर अधिकतम 300 रुपये की सीमा के साथ 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा।
  • प्रति माह एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए सभी लेनदेन पर अनिवार्य रूप से शून्य एमडीआर की सुविधा मिलेगी।
  • UPI ऐप सेवाओं पर स्टेज फीस या किसी भी तरह के छिपे हुए शुल्क लगाने पर रोक होगी।
  • बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी यूपीआई भुगतान के लिए उपभोक्ताओं पर एमडीआर शुल्क का बोझ न डालें।
  • व्यक्तियों के लिए मुफ्त यूपीआई लेनदेन पर कोई मासिक कोटा, मात्रा की सीमा नहीं होगी।
  • बैंकों और NPCI की ओर से लागू की गई रोजाना ट्रांज़ैक्शन की सीमाएं कैटेगरी के आधार पर ₹1 लाख से ₹5 लाख के दायरे में रहेंगी।
  • कुल एमडीआर कलेक्शन के पांच प्रतिशत योगदान के साथ छोटे व्यापारियों द्वारा यूपीआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कोष स्थापित किया जाएगा।
  • एमडीआर लागू होने से केवल चार प्रतिशत मर्चेंट लेनदेन ही प्रभावित होंगे।
  • नया एमडीआर ढांचा 15 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होगा।

UPI MDR Fees: ₹2000 से ऊपर के पेमेंट पर 0.40% MDR लगेगा, हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 की लिमिट रहेगी

UPI MDR Fees: 15 सितंबर को UPI Steering Committee की बैठक हुई। इसमें ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 40 बेसिस पॉइंट (bps) MDR तय किया गया है। इसकी अधिकतम सीमा हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 होगी। यह ₹75000 से ऊपर के हर पेमेंट पर लागू होगी। मतलब कि ₹75000 से अधिक के हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 का MDR फिक्स रहेगा।

ये MDR चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होगा। MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वो कमीशन है, जो डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए मर्चेंट बैंक को देता है।

40 bps MDR का मतलब क्या है?

एक बेसिस पॉइंट यानी 1 प्रतिशत का सौवां हिस्सा। इसलिए 40 bps का मतलब 0.40% है। इसे सीधे उदाहरण से समझिए। ₹100 के पेमेंट पर MDR 40 पैसे होगा। वहीं ₹10,000 के UPI पेमेंट पर यह रकम ₹40 होगी।

हालांकि, यह चार्ज ग्राहक को नहीं देना होगा। MDR का भुगतान मर्चेंट की तरफ से किया जाता है।

₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं

सरकार की अधिसूचना में साफ किया गया है कि ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक कोई चार्ज नहीं लगा सकते।

RuPay से डेबिट कार्ड पेमेंट पर भी कोई चार्ज नहीं लगाया जा सकता। NPCI यानी नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया UPI के साथ-साथ घरेलू कार्ड नेटवर्क RuPay को भी चलाता है।

UPI से सालाना ₹16,000 करोड़ तक रेवेन्यू

करीब 40 bps MDR लागू होने पर UPI इकोसिस्टम में सालाना ₹16,000 करोड़ तक का रेवेन्यू पैदा होने का अनुमान है।

UPI पेमेंट में कई पार्टनर शामिल होते हैं। इसलिए MDR से मिलने वाली रकम भी अलग-अलग हिस्सेदारों में बांटी जाएगी। इसमें ग्राहक का बैंक, पैसा पाने वाला बैंक, PSP बैंक और मर्चेंट का पेमेंट एग्रीगेटर शामिल हैं। NPCI को भी हर ट्रांजैक्शन पर स्विचिंग फीस मिलती है।

PhonePe और Google Pay को कैसे फायदा होगा?

PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे UPI ऐप सीधे UPI नेटवर्क से अकेले नहीं जुड़ते। ये बैंकों के साथ पार्टनरशिप करते हैं।

इन पार्टनर बैंकों को PSP बैंक कहा जाता है। UPI नेटवर्क को चलाने में इनकी बड़ी भूमिका होती है। इसलिए कार्ड पेमेंट इकोसिस्टम के मुकाबले PSP बैंकों को MDR में ज्यादा हिस्सा मिलने की संभावना है।

कौन से बैंक बड़े PSP हैं?

UPI इकोसिस्टम में कई बैंक PSP के तौर पर काम करते हैं। इनमें Yes Bank, Axis Bank, ICICI Bank, HDFC Bank और SBI बड़े PSP बैंकों में शामिल हैं।

नए MDR सिस्टम से UPI से जुड़े बैंकों और दूसरे इकोसिस्टम पार्टनर्स के लिए कमाई का एक नया जरिया बनेगा। वहीं ग्राहकों के लिए ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं होगा।

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