El Nino effect: अल नीनो बढ़ा सकता है भारत का फूड बिल! चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों ने दिए महंगाई के संकेत

El Nino effect: भारत में खाद्य कीमतों को लेकर आने वाले महीनों में दबाव बढ़ने की आशंका है। देश की रोजमर्रा की खपत वाली प्रमुख खाद्य वस्तुओं में चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों की कीमतों में अलग-अलग रफ्तार से बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में भारत El Nino की बढ़ती निगरानी के दौर में प्रवेश कर रहा है, जिससे अगर मौसम प्रतिकूल रहता है तो फसल उत्पादन और कमोडिटी सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, अभी ऐसा कोई सबूत नहीं है कि हाल में खाद्य कीमतों में आई तेजी सीधे El Nino की वजह से है। फिलहाल कीमतों की दिशा घरेलू उत्पादन, सरकारी नीतियों, भंडार और वैश्विक कमोडिटी बाजार जैसे कई कारकों पर निर्भर है।

सरकार ने El Nino को बताया जोखिम का कारण

केंद्र सरकार ने अपनी अगस्त 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट में El Nino को निगरानी योग्य कारक बताया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि लंबे समय तक El Nino की स्थिति रहने पर मानसून कमजोर या असमान हो सकता है। इसका असर फसल उत्पादन और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि El Nino और कृषि उत्पादन के बीच सीधा और एक-से-एक संबंध नहीं माना जा सकता।

सिंचाई, सरकारी खरीद, खाद्यान्न भंडार और जरूरत पड़ने पर आयात जैसे उपाय मौसम के झटकों का असर कम कर सकते हैं। भारत में किसी मौसम संबंधी घटना का असर केवल बारिश पर निर्भर नहीं करता। फसल की स्थिति, जलाशयों में पानी, सरकारी स्टॉक, खरीद व्यवस्था और आयात की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

चावल और दालों की कीमतों में भारी तेजी

सरकार के मूल्य निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, चावल की कीमत पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। 29 सितंबर को थोक चावल की कीमत करीब ₹4,185 प्रति क्विंटल थी, जो एक साल पहले के मुकाबले लगभग 8.5 फीसदी अधिक है। खुदरा बाजार में भी चावल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दालों में भी अलग-अलग किस्मों की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है।

अरहर या तूर दाल सितंबर के अंत में ₹125 प्रति किलो से अधिक पर बिक रही थी। अब इसकी कीमत करीब 8 फीसदी सालाना बढ़ी थी। उड़द की कीमत भी ऊपर रही। जबकि मूंग, मसूर और चना में साल-दर-साल अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इन मौजूदा कीमतों को सीधे El Nino का असर मानना सही नहीं होगा। असली जोखिम आने वाले महीनों में सामने आ सकता है, खासकर अगर बारिश का पैटर्न या फसल उत्पादन प्रभावित होता है।

खाद्य तेलों की कीमतें बनीं चुनौती

खाद्य तेल भारत के लिए अलग तरह की चुनौती हैं, क्योंकि देश कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर काफी निर्भर है। वैश्विक कीमतों के असर को कम करने के लिए सरकार ने हाल में आयात शुल्क में कटौती की है। 24 सितंबर से कच्चे सोयाबीन और कच्चे पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10% से घटाकर 5% की गई।

  • कच्चे सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी शून्य कर दी गई।
  • रिफाइंड सोयाबीन और पाम ऑयल पर ड्यूटी 32.5% से घटाकर 27.5% की गई।
  • रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी 22.5% कर दी गई।
  • सरकार के मुताबिक, कम आयात शुल्क से खाद्य तेलों की लैंडेड कॉस्ट घट सकती है, जिससे खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही घरेलू रिफाइनिंग को भी समर्थन मिल सकता है।
  • वित्त मंत्रालय की अगस्त रिपोर्ट में वैश्विक वेजिटेबल ऑयल कीमतों को महंगाई के संभावित जोखिमों में शामिल किया गया था। इसका एक कारण यह भी है कि पाम, सोयाबीन और रेपसीड जैसे तेलों का इस्तेमाल तेजी से बायोफ्यूल उत्पादन में हो रहा है।

El Nino से क्या बदलेगा?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के अंत तक El Nino के बहुत मजबूत स्थिति में पहुंचने का अनुमान जताया गया है। El Nino प्रशांत क्षेत्र से काफी दूर तक बारिश और तापमान के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग होता है।

भारत के लिए सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि El Nino कितना मजबूत होगा। बल्कि यह है कि यह भारतीय मानसून, फसल चक्र और मौजूदा खाद्य-सप्लाई व्यवस्था के साथ किस तरह इंटरेक्ट करता है। WMO ने जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए पहले से मिलने वाले मौसम पूर्वानुमानों के महत्व पर भी जोर दिया है। संगठन की ताजा चेतावनी में गर्मी, बाढ़ और सूखे के साथ खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले व्यापक असर का उल्लेख किया गया है।

सरकार के पास कई विकल्प मौजूद

भारत के पास खाद्य आपूर्ति को संभालने के लिए कई नीतिगत विकल्प मौजूद हैं। सरकारी खरीद और खाद्यान्न भंडार प्रमुख वस्तुओं की कमी के दौरान कीमतों को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर आयात के जरिए घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाई जा सकती है। खाद्य तेलों पर हालिया आयात शुल्क कटौती इसका एक उदाहरण है कि सरकार व्यापार नीति के जरिए घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

RBI की भी रहेगी नजर

खाद्य कीमतों का असर देश की व्यापक महंगाई पर भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खपत वाली वस्तुओं की टोकरी में महंगाई का दबाव व्यापक हुआ है और करीब आधी वस्तुओं की कीमतें सालाना आधार पर 4% या उससे अधिक बढ़ रही हैं, जबकि मार्च में यह हिस्सा करीब एक-तिहाई था। इसी अवधि में अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में करीब 8% की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में RBI के लिए अहम सवाल यह होगा कि क्या मौसम से जुड़े बदलाव केवल कुछ खाद्य वस्तुओं तक सीमित रहते हैं या वे लगातार खाद्य महंगाई में बदलकर व्यापक कीमतों तक पहुंचते हैं।

अभी की तस्वीर क्या है?

फिलहाल भारत में खाद्य कीमतों की तस्वीर एकसमान तेजी वाली नहीं है। चावल और कुछ दालों की कीमतें पिछले साल की तुलना में ज्यादा हैं। जबकि खाद्य तेल वैश्विक सप्लाई और कीमतों से प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती जैसे कदम उठाए हैं। अब आने वाले कुछ महीने यह तय करने में अहम होंगे कि El Nino सिर्फ मौसम से जुड़ा जोखिम बना रहता है या भारत के खाद्य बिल और महंगाई पर इसका स्पष्ट असर दिखाई देने लगता है।

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Bengal SIR Dispute: बंगाल में अबतक SIR में कटे 93% वोटर्स की अपील मंजूर, बहाल हुआ तो मिलेगा वोटिंग का अधिकार, EC ने कहा- चुनाव नतीजों पर नहीं पड़ा असर

Bengal SIR Dispute: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन (SIR) के दौरान नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में अहम आंकड़े पेश किए हैं। आयोग के मुताबिक, अब तक जिन मामलों में अपील पर फैसला हुआ है, उनमें करीब 93 फीसदी लोगों ने अपनी अपील जीत ली है। उन्हें दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया गया है। चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में यह जानकारी दी है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के साथ दिए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल 1,26,194 मामलों का निपटारा 16 सितंबर तक किया गया था। इनमें से 1,13,943 लोग अपीलीय प्रक्रिया में यह साबित करने में सफल रहे कि वोटर लिस्ट से उनका नाम हटाने का फैसला सही नहीं था। वहीं, करीब 8,649 लोगों की अपील खारिज हुई और उनके नाम वोटर लिस्ट से बाहर ही रहेंगे।

24 अपीलीय ट्रिब्यूनल ने सुनीं अपीलें

वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए गए थे। इन पैनलों में हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और जजों को शामिल किया गया था। जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने का दावा खारिज कर दिया गया था, वे इन ट्रिब्यूनल के सामने अपील कर सकते थे। इन अपीलों की सुनवाई अप्रैल से शुरू हुई थी। हलफनामे में बताया गया कि अलग-अलग जिलों में कई मतदाताओं ने अपील दायर की। इस दौरान कई मामलों का निपटारा किया गया।

10 सितंबर और 16 सितंबर के आंकड़ों में अंतर

चुनाव आयोग के हलफनामे में एक दिलचस्प अंतर भी सामने आया है। मुख्य हलफनामे में कहा गया है कि 16 सितंबर तक 1,26,194 मामलों का निपटारा हो चुका था। वहीं, 24 ट्रिब्यूनल द्वारा 10 सितंबर तक 1,22,592 मामलों के निपटारे की जानकारी दी गई है। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि अभी निपटाए गए मामलों की संख्या कुल मामलों की तुलना में काफी कम है, इसलिए इसे अंतिम परिणाम का प्रतिनिधि आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती चरण में उन मामलों का निपटारा पहले हुआ जिनमें मतदाताओं के पास अपने दावे के समर्थन में दस्तावेजी सबूत मौजूद थे। इसलिए अभी के आंकड़ों में नाम दोबारा शामिल किए जाने का अनुपात अधिक दिखाई दे सकता है।

TMC के 31 सीटों वाले दावे पर EC का जवाब

चुनाव आयोग ने यह हलफनामा तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उसके सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के उस दावे के जवाब में दाखिल किया है, जिसमें कहा गया था कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के कारण पार्टी को विधानसभा की 31 सीटों पर नुकसान हुआ। आयोग ने ओ’ब्रायन पर अदालत को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने उन्हीं आंकड़ों के दूसरे पक्ष को नजरअंदाज किया, जिनका इस्तेमाल अपने दावे के समर्थन में किया गया था।

EC ने कहा कि 21 विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले अभी विचाराधीन हैं, जिनकी संख्या संबंधित सीटों पर जीत के अंतर से अधिक है। आयोग के मुताबिक, इन सीटों में जीतने वाले उम्मीदवारों में TMC के उम्मीदवार भी शामिल हैं। आयोग ने अपने हलफनामे में तर्क दिया कि यदि ओ’ब्रायन द्वारा अपनाए गए तर्क और कसौटी को ही लागू किया जाए, तो TMC को उन विधानसभा सीटों के चुनाव परिणामों को भी चुनौती देनी होगी, जहां उसकी अपनी पार्टी के उम्मीदवार जीत चुके हैं।

अभी फाइनल तस्वीर साफ नहीं

चुनाव आयोग के मुताबिक, अपीलों के मौजूदा आंकड़े पूरी प्रक्रिया का फाइनल रिजल्ट नहीं बताते हैं। अभी सभी मामलों का निपटारा नहीं हुआ है। कई अपीलों पर फैसला होना बाकी है। इसलिए फिलहाल 93 फीसदी अपीलों के पक्ष में फैसला आने का आंकड़ा शुरुआती तस्वीर देता है। जबकि SIR के तहत वोटर लिस्ट से हटाए गए सभी नामों और लंबित अपीलों का फाइनल आंकड़ा सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

अब तक की बड़ी बातें

  • सफलता की दर: जिन मामलों का निपटारा हुआ है, उनमें से 1,13,943 लोग ट्रिब्यूनल को यह समझाने में सफल रहे कि EC द्वारा उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर करने का फैसला गलत था।
  • चुनाव नतीजों पर असर नहीं: चुनाव आयोग का कहना है कि इन नामों को हटाए जाने से विधानसभा चुनाव के अंतिम नतीजों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
  • अपील की प्रक्रिया: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद 24 अपीलीय न्यायाधिकरणों का गठन किया गया था, जिसमें पूर्व चीफ जस्टिस और अन्य जजों की पीठ ने अप्रैल से इन अपीलों की सुनवाई शुरू की थी।
  • TMC के दावों का खंडन: आयोग ने TMC सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के उस दावे को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि इनकी वजह से उन्हें 31 सीटों का नुकसान हुआ। चुनाव आयोग ने कहा कि यह तर्क पूरी तरह से काल्पनिक और गुमराह करने वाला है।

Nepal-China Border Floods: नेपाल-चीन बॉर्डर पर अचानक आई बाढ़ में अब तक 160 लोगों की मौत, 133 भारतीय समेत 750 से अधिक लापता

Nepal-China Border Floods Update: तिब्बत की सीमा के पास मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार (27 अगस्त) सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। अचानक आई बाढ़ में करीब 160 लोगों की मौत हो गई तथा 133 भारतीय नागरिक समेत 750 से अधिक लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई। कई महत्वपूर्ण पुल बह गए। कम से कम एक दर्जन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट तबाह हो गईं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया। उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी।

अधिकारियों ने बताया कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए। नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानें खिसकने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी के जरिए त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आ गई। इसके बाद बाढ़ का पानी नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों में फैल गया तथा राजधानी काठमांडू से लगभग 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।

500 लोग लापता

नेपाल सरकार ने कहा कि करीब 500 लोग लापता हैं। जबकि चीन के सरकारी सीजीटीएन न्यूज चैनल ने बताया कि सीमा के चीनी हिस्से में तीन लोगों की मौत हुई और 265 लोग लापता हैं। प्रभावित इलाकों के वीडियो में कीचड़, चट्टानों और मलबे से भरा पानी तेज रफ्तार से सीमावर्ती क्षेत्र में बहता दिखाई दिया। तेज बहाव को इमारतों और वाहनों की ओर बढ़ते देख लोग भागते नजर आए।

सामने आए खौफनाक वीडियो

एक वीडियो में चार मंजिला इमारत को तेज बहाव में बहते देखा गया। जबकि एक अन्य वीडियो में रसुवा में एक कार बाढ़ के तेज पानी में बहती नजर आई। एक और वीडियो में पानी के जबरदस्त दबाव से एक लंबा पुल दो हिस्सों में टूटता दिखाई दिया। एक अन्य वीडियो में तेज बहाव के कारण पुल ढहते और बहते नजर आए। धादिंग जिले के एक वीडियो में बाढ़ का पानी एक पुल से टकराया, जिसके बाद वह ढहकर बह गया। एक अन्य वीडियो में कीचड़ भरा पानी तेजी से एक पुल को अपनी चपेट में लेता और करीब 30 सेकंड में उसे बहाकर ले जाता नजर आया।

133 भारतीय लापता

अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 100 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का इलाज काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि लापता हुए करीब 500 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं। इनमें से कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं। गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं, जो एक आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं। बाद में नेपाल सरकार ने कहा कि इस आव्रजन केंद्र के कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

तमिलनाडु के अधिकारियों ने बताया कि लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं। भारतीयों और अप्रवासी भारतीयों के अलावा लापता हुए बाकी पर्यटक दो दर्जन से ज्यादा देशों से हैं, जिनमें अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड शामिल हैं। इसके अलावा, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग जगहों पर 80 सुरक्षाकर्मी लापता हो गए हैं, जिनमें नेपाल सेना के 44 जवान भी शामिल हैं।

भारत ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से फोन पर बात की। उन्हें हालात से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय मदद का भरोसा दिलाया। नई दिल्ली ने पड़ोसी देश को राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए।

X पर एक पोस्ट में कहा गया है कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। भारतीय दूतावास ने X पर एक और पोस्ट में कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के शीघ्र बचाव और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। साथ ही, नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बचाव और राहत कार्यों को और मजबूत किया जा रहा है।

टोल-फ्री नंबर जारी

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री आपातकालीन नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर 0086 185 1428 4905 जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश और केरलम समेत कई अन्य भारतीय राज्यों ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि नेपाल में फंसे लोगों में उनके राज्य के निवासी भी हो सकते हैं।

19 पुल बह गए

‘काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क बह गई। सरकार ने बाद में बताया कि बुधवार को अचानक आई बाढ़ में 19 पुल बह गए। हालात का जायजा लेने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री शाह की अध्यक्षता में हुई एक आपात बैठक के बाद प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया।

खोज और बचाव अभियान जारी

सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, शाह ने जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई। साथ ही इन दुखद घटनाओं में घायल हुए लोगों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों को हर जरूरी मदद देने का निर्देश दिया। नेपाल सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए।

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नेपाल सेना के एक बयान के अनुसार, रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मैलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया। बयान में कहा गया कि आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस सेना का एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भेजा गया है। प्रधानमंत्री शाह ने बाढ़ प्रभावित देश में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए हरसंभव मानवीय सहायता की पेशकश करने और एकजुटता व्यक्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का देर शाम आभार व्यक्त किया।

West Bengal SIR: ‘क्या हम नए चुनाव कराने का निर्देश दे सकते हैं?’; बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल

West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले की सुनवाई के दौरान एक अहम कानूनी सवाल उठाए। शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या न्यायपालिका नए चुनाव का आदेश दे सकती है, जब ऐसे दावे किए जा रहे हों कि कई विधानसभा क्षेत्रों में हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर (victory margin) से ज्यादा थी। न्यूज 18 के मुताबिक, चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सदस्य की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर विचार-विमर्श किया।

TMC याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए, सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय ने 31 विधानसभा क्षेत्रों का ब्योरा पेश किया। इन क्षेत्रों में जीतने वाले BJP उम्मीदवारों की जीत का अंतर, SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए कुल वोटरों की संख्या से कम था। एक विधानसभा क्षेत्र (AC-145) में हार का अंतर सिर्फ 401 वोट था। जबकि 8,785 वोटर हटाए गए थे। एक और सीट पर SIR के तहत बहुत ज्यादा वोटर हटाए जाने के बावजूद उम्मीदवार 316 वोटों से हार गया।

नतीजों पर असर

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इतने बड़े पैमाने पर वोटर हटाने से चुनाव के नतीजों पर असर पड़ा। हजारों वैध नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया। सार्वजनिक डेटा की कमी: TMC के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विधानसभा-वार अपील डेटा का हिसाब लगाना मुश्किल है क्योंकि भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने ये आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

इन दलीलों के जवाब में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, “आप इस पर याचिका दायर कर सकते हैं, लेकिन क्या कोर्ट इस तरह नए चुनाव का आदेश दे सकता है?” चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या प्रभावित उम्मीदवारों ने उन 31 विधानसभा क्षेत्रों में जीते हुए उम्मीदवारों को चुनौती देने के लिए औपचारिक चुनाव याचिकाएं दायर की थीं। इस पर वकील ने जवाब दिया कि कुछ सीटों पर चुनाव याचिकाएं दायर की गई थीं, लेकिन सभी पर नहीं। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इस बात पर जोर दिया कि यह पता लगाना जरूरी है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के बाद कितने लोगों ने असल में अपील दायर की थी।

देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि अगर नाम हटाए जाने वाले किसी वोटर ने अपील दायर किए बिना इसे स्वीकार कर लिया, तो उनकी ओर से नतीजों को चुनौती देना केवल सैद्धांतिक बात रह जाती है। हालांकि, अगर 100 लोगों के नाम हटाए गए, जीत का अंतर 50 था। हटाए गए वोटरों में से 60 या 70 ने अपील दायर की जो अभी भी लंबित है, तो नाम हटाने की इस प्रक्रिया को चुनौती देना एक अहम और बहुत जरूरी मामला बन जाता है।

लंबित अपील का आंकड़ा मांगा

इससे एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग (ECI) को पश्चिम बंगाल में SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या नाम शामिल किए जाने को चुनौती देने वाली विभिन्न अपील पर अधिकारियों द्वारा निपटाए गए मामलों और लंबित मामलों का आंकड़ा पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इन मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना जरूरी है। पीठ ने निर्वाचन आयोग से यह बताने को कहा कि लंबित अपील के निपटारे की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि लोगों को यह जानकारी नहीं मिल रही है कि न्यायाधिकरणों के समक्ष कितनी अपील लंबित हैं या कितनी अपील का निपटारा हो चुका है, क्योंकि यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। बनर्जी ने कहा कि नगर निकाय और पंचायत चुनाव होने वाले हैं। इस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले को केवल 31 विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखेगा।

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24 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने अपीलीय न्यायाधिकरणों को निर्देश दिया था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ तत्काल सुनवाई की जरूरत साबित करने वाले मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए। करीब 60 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल एवं पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था।