Bengal SIR Dispute: बंगाल में अबतक SIR में कटे 93% वोटर्स की अपील मंजूर, बहाल हुआ तो मिलेगा वोटिंग का अधिकार, EC ने कहा- चुनाव नतीजों पर नहीं पड़ा असर

Bengal SIR Dispute: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन (SIR) के दौरान नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में अहम आंकड़े पेश किए हैं। आयोग के मुताबिक, अब तक जिन मामलों में अपील पर फैसला हुआ है, उनमें करीब 93 फीसदी लोगों ने अपनी अपील जीत ली है। उन्हें दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया गया है। चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में यह जानकारी दी है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के साथ दिए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल 1,26,194 मामलों का निपटारा 16 सितंबर तक किया गया था। इनमें से 1,13,943 लोग अपीलीय प्रक्रिया में यह साबित करने में सफल रहे कि वोटर लिस्ट से उनका नाम हटाने का फैसला सही नहीं था। वहीं, करीब 8,649 लोगों की अपील खारिज हुई और उनके नाम वोटर लिस्ट से बाहर ही रहेंगे।

24 अपीलीय ट्रिब्यूनल ने सुनीं अपीलें

वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए गए थे। इन पैनलों में हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और जजों को शामिल किया गया था। जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने का दावा खारिज कर दिया गया था, वे इन ट्रिब्यूनल के सामने अपील कर सकते थे। इन अपीलों की सुनवाई अप्रैल से शुरू हुई थी। हलफनामे में बताया गया कि अलग-अलग जिलों में कई मतदाताओं ने अपील दायर की। इस दौरान कई मामलों का निपटारा किया गया।

10 सितंबर और 16 सितंबर के आंकड़ों में अंतर

चुनाव आयोग के हलफनामे में एक दिलचस्प अंतर भी सामने आया है। मुख्य हलफनामे में कहा गया है कि 16 सितंबर तक 1,26,194 मामलों का निपटारा हो चुका था। वहीं, 24 ट्रिब्यूनल द्वारा 10 सितंबर तक 1,22,592 मामलों के निपटारे की जानकारी दी गई है। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि अभी निपटाए गए मामलों की संख्या कुल मामलों की तुलना में काफी कम है, इसलिए इसे अंतिम परिणाम का प्रतिनिधि आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती चरण में उन मामलों का निपटारा पहले हुआ जिनमें मतदाताओं के पास अपने दावे के समर्थन में दस्तावेजी सबूत मौजूद थे। इसलिए अभी के आंकड़ों में नाम दोबारा शामिल किए जाने का अनुपात अधिक दिखाई दे सकता है।

TMC के 31 सीटों वाले दावे पर EC का जवाब

चुनाव आयोग ने यह हलफनामा तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उसके सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के उस दावे के जवाब में दाखिल किया है, जिसमें कहा गया था कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के कारण पार्टी को विधानसभा की 31 सीटों पर नुकसान हुआ। आयोग ने ओ’ब्रायन पर अदालत को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने उन्हीं आंकड़ों के दूसरे पक्ष को नजरअंदाज किया, जिनका इस्तेमाल अपने दावे के समर्थन में किया गया था।

EC ने कहा कि 21 विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले अभी विचाराधीन हैं, जिनकी संख्या संबंधित सीटों पर जीत के अंतर से अधिक है। आयोग के मुताबिक, इन सीटों में जीतने वाले उम्मीदवारों में TMC के उम्मीदवार भी शामिल हैं। आयोग ने अपने हलफनामे में तर्क दिया कि यदि ओ’ब्रायन द्वारा अपनाए गए तर्क और कसौटी को ही लागू किया जाए, तो TMC को उन विधानसभा सीटों के चुनाव परिणामों को भी चुनौती देनी होगी, जहां उसकी अपनी पार्टी के उम्मीदवार जीत चुके हैं।

अभी फाइनल तस्वीर साफ नहीं

चुनाव आयोग के मुताबिक, अपीलों के मौजूदा आंकड़े पूरी प्रक्रिया का फाइनल रिजल्ट नहीं बताते हैं। अभी सभी मामलों का निपटारा नहीं हुआ है। कई अपीलों पर फैसला होना बाकी है। इसलिए फिलहाल 93 फीसदी अपीलों के पक्ष में फैसला आने का आंकड़ा शुरुआती तस्वीर देता है। जबकि SIR के तहत वोटर लिस्ट से हटाए गए सभी नामों और लंबित अपीलों का फाइनल आंकड़ा सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

अब तक की बड़ी बातें

  • सफलता की दर: जिन मामलों का निपटारा हुआ है, उनमें से 1,13,943 लोग ट्रिब्यूनल को यह समझाने में सफल रहे कि EC द्वारा उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर करने का फैसला गलत था।
  • चुनाव नतीजों पर असर नहीं: चुनाव आयोग का कहना है कि इन नामों को हटाए जाने से विधानसभा चुनाव के अंतिम नतीजों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
  • अपील की प्रक्रिया: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद 24 अपीलीय न्यायाधिकरणों का गठन किया गया था, जिसमें पूर्व चीफ जस्टिस और अन्य जजों की पीठ ने अप्रैल से इन अपीलों की सुनवाई शुरू की थी।
  • TMC के दावों का खंडन: आयोग ने TMC सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के उस दावे को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि इनकी वजह से उन्हें 31 सीटों का नुकसान हुआ। चुनाव आयोग ने कहा कि यह तर्क पूरी तरह से काल्पनिक और गुमराह करने वाला है।