Kolkata Durga Puja: कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़, अबतक 17 लोगों की मौत, पीएम मोदी ने जताया दुख

Kolkata Durga Puja Stampede:  पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में बड़ा हादसा हो गया है। शनिवार शाम कोलकाता के उत्तरी हिस्से में स्थित चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में अचानक भगदड़ जैसे हालात बन गए। सप्तमी के मौके पर पूजा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पांडाल पहुंचे थे। भीड़ बढ़ने से वहां अफरा-तफरी मच गई।

न्यूज 18 के रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोलकाता के चोरबागान सर्बोजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की वजह से कम से कम 17 लोगों की मौत होने और 35 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक,  पंडाल का एक हिस्सा गिरने की भी जानकारी सामने आई है। वहीं ये घटना कैसे हुई और इसके पीछे की असली वजह क्या थी अभी इसकी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं इस हादसे पर पीएम मोदी ने भी दुख जताया है।

पुलिस ने क्या कहा

कोलकाता पुलिस ने कहा “आज शाम करीब 7:40 बजे, गिरीश पार्क पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले सरदा पार्क (चोर बागान) पूजा पंडाल के एग्जिट गेट पर भारी भीड़ और बारिश के कारण भगदड़ मच गई। पूजा पंडाल को अब दर्शकों के लिए बंद कर दिया गया है। सभी घायल लोगों को बचा लिया गया और इलाज के लिए MCH में शिफ्ट कर दिया गया है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, लगभग 35 लोगों को MCH में शिफ्ट किया गया है।”

पीएम मोदी ने जताया दुख

कोलकाता में भगदड़ की घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। पीएमओ की ओर से जारी पोस्ट में पीएम ने कहा गया, “कोलकाता में भगदड़ बहुत दुखद है। मेरी संवेदनाएं उन लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। घायल लोग जल्द से जल्द ठीक हों। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।”

 

सीएम अस्पताल पहुंचे

घटना में कई लोगों के घायल होने की खबर मिलने के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल घायलों का हाल जानने कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। वहीं, जानकारी मिलते ही पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। पूजा आयोजकों ने भी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और घायलों के इलाज के लिए जरूरी मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने में मदद की।

गर्मी की वजह से हुआ हादसा?

पुलिस के मुताबिक, कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में मची अफरा-तफरी के दौरान कम से कम 35 लोग घायल हो गए। सभी घायलों को इलाज के लिए कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया और हालात काबू में करने के लिए पंडाल को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेज गर्मी और ज्यादा भीड़ के कारण कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ गई थी। वहीं, भगदड़ की खबर फैलने से लोगों में डर और बढ़ गया। इसके बाद पुलिस, अधिकारियों और पूजा आयोजकों ने भीड़ को संभालने और घायलों की मदद करने के लिए जरूरी कदम उठाए।

ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट नकली थी? फ्रैक्चर केस में शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा, बंगाल सरकार ने जांच के दिए आदेश

Mamata Banerjee Leg Injury: पश्चिम बंगाल सरकार 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट के कथित झूठे दावों की फिर से जांच शुरू करेगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार (3 अक्टूबर) को यह बड़ी घोषणा की। इसी के साथ अधिकारी ने नंदीग्राम में 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट से जुड़े विवाद को फिर से हवा दी है। अधिकारी ने आरोप लगाया है कि बनर्जी ने चोट का नाटक किया था। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला दिया है।

राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अधिकारी ने आरोप लगाया कि बनर्जी ने चुनाव के दौरान अपनी चोट का नाटक किया था। अधिकारी ने बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस द्वारा जारी बनर्जी की मेडिकल रिपोर्ट दिखाते हुए कहा, “ममता बनर्जी ने 2021 में नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान पैर में चोट लगने का नाटक किया था। हमारे पास मेडिकल रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया है कि फ्रैक्चर या हड्डी खिसकने का कोई प्रमाण नहीं है। हम इस मामले की जांच शुरू करेंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “उनके झूठे आरोप से नंदीग्राम के लोगों का अपमान हुआ। 9 अक्टूबर के बाद आदर्श आचार संहिता हटने पर मैं इस बारे में और जानकारी सामने रखूंगा। मैं कल किए गए अपने दावों के समर्थन में आज यह बात कह रहा हूं।” नंदीग्राम में छह अक्टूबर को उपचुनाव होना है। जबकि इसके नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

मार्च, 2021 में लगी थी पैर में चोट

सीएम अधिकारी ने इससे पहले नंदीग्राम-2 विकासखंड के बिरुलिया बाजार में एक रैली को संबोधित करते हुए यह दावा किया था। यही वह स्थान है, जहां पांच साल पहले बनर्जी घायल हुई थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री बनर्जी को 10 मार्च, 2021 को चुनाव प्रचार के दौरान नंदीग्राम के बिरुलिया के रेयापाड़ा इलाके में बाएं पैर और कमर में चोट लगी थी। बनर्जी ने शुरुआत में कहा था कि कुछ अज्ञात लोगों ने जानबूझकर उन्हें उनकी कार के दरवाजे की ओर धक्का दिया, जिससे दरवाजा उनके बाएं पैर से जोर से टकराया और भारी भीड़ के बीच पैर चोटिल हो गया।

बाद में अस्पताल से जारी एक वीडियो संदेश में बनर्जी ने बताया था कि समर्थकों का अभिवादन करते समय भारी भीड़ उनकी कार के पास आ गई थी, जिससे उनका पैर दब गया और उन्हें चोट लगी। उन्हें आधिकारिक तौर पर बाएं टखने और पैर की हड्डियों में गंभीर चोट के साथ-साथ दाहिने कंधे, हाथ, गर्दन और कमर में चोट एवं दर्द की जानकारी दी गई थी। इसके बाद उन्हें कोलकाता लाया गया और राज्य संचालित एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

विस्तृत जांच के बाद बनर्जी को 12 मार्च को अस्पताल से छुट्टी दी गई। उस समय उनके बाएं पैर पर प्लास्टर था और उन्होंने बाद में व्हीलचेयर पर बैठकर चुनाव प्रचार जारी रखा। इन चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 294 में से 216 सीटें जीतकर बड़ी जीत दर्ज की थी। जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) 77 सीटों पर सिमट गई थी।

रिपोर्ट में क्या है?

अधिकारी द्वारा शेयर किए गए मेडिकल दस्तावेजों से पता चलता है कि 11 मार्च, 2021 के सीटी स्कैन में जांच किए गए क्षेत्रों में कथित तौर पर कोई फ्रैक्चर नहीं दिखा। हालांकि, केवल इन रिपोर्टों से यह साबित नहीं होता है कि बनर्जी की कुल चोटें बनावटी थीं। एसएसकेम (SSKM) अस्पताल की उस समय की रिपोर्टों में उनके बाएं टखने और पैर में चोटों के साथ-साथ कंधे, अग्रबाहु (forearm) और गर्दन में चोटों का भी जिक्र था।

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अधिकारी द्वारा घोषित नई जांच से 2021 की घटना से जुड़ी परिस्थितियों की और जांच होने की उम्मीद है। नंदीग्राम उपचुनाव से ठीक पहले यह विवाद फिर से उठ खड़ा हुआ है, जिससे 2021 के चुनाव का घटनाक्रम एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

कांग्रेस से गठबंधन खत्म होने के बाद तीसरा मोर्चा बनाने की तैयारी में DMK, कनिमोझी ने ममता बनर्जी से की मुलाकात

डीएमके ने कांग्रेस के साथ अपना गठबंधन टूटने के बाद अब INDIA bloc के प्रमुख घटक दलों के साथ मिलकर कांग्रेस-मुक्त तीसरा मोर्चा बनाने की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं। इसी सिलसिले में डीएमके की उप महासचिव व सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने कोलकाता में ममता बनर्जी से उनके कालीघाट आवास पर मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई, हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर बात हुई, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

TMC के एक नेता ने बताया, “कनिमोझी ने ममता बनर्जी के आवास पर उनके साथ बंद कमरे में बैठक की। इस दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई।”

बता दें कि यह बैठक कनिमोझी की मुंबई में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और दिल्ली में NCP (SP) प्रमुख शरद पवार के साथ बातचीत के कुछ दिनों बाद हो रही है।

गौरतलब है कि कनिमोझी की इन मुलाकातों ने ऐसे समय में ध्यान खींचा है, जब DMK और कांग्रेस के बीच रिश्तों में खिंचाव की खबरें हैं। वहीं, विपक्षी INDIA ब्लॉक में शामिल कई क्षेत्रीय दलों के बीच भी अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं।

TMC और कांग्रेस में टकराव

बता दें कि TMC और कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में उनके रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। हाल ही में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव को लेकर भी दोनों पार्टियों के बीच टकराव देखने मिला है।

इस बीच, प्रदेश कांग्रेस ने दावा किया कि TMC ने अपने केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क कर नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने इस दावे को खारिज कर दिया है।

 

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West Bengal SIR: ‘क्या हम नए चुनाव कराने का निर्देश दे सकते हैं?’; बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल

West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले की सुनवाई के दौरान एक अहम कानूनी सवाल उठाए। शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या न्यायपालिका नए चुनाव का आदेश दे सकती है, जब ऐसे दावे किए जा रहे हों कि कई विधानसभा क्षेत्रों में हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर (victory margin) से ज्यादा थी। न्यूज 18 के मुताबिक, चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सदस्य की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर विचार-विमर्श किया।

TMC याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए, सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय ने 31 विधानसभा क्षेत्रों का ब्योरा पेश किया। इन क्षेत्रों में जीतने वाले BJP उम्मीदवारों की जीत का अंतर, SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए कुल वोटरों की संख्या से कम था। एक विधानसभा क्षेत्र (AC-145) में हार का अंतर सिर्फ 401 वोट था। जबकि 8,785 वोटर हटाए गए थे। एक और सीट पर SIR के तहत बहुत ज्यादा वोटर हटाए जाने के बावजूद उम्मीदवार 316 वोटों से हार गया।

नतीजों पर असर

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इतने बड़े पैमाने पर वोटर हटाने से चुनाव के नतीजों पर असर पड़ा। हजारों वैध नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया। सार्वजनिक डेटा की कमी: TMC के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विधानसभा-वार अपील डेटा का हिसाब लगाना मुश्किल है क्योंकि भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने ये आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

इन दलीलों के जवाब में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, “आप इस पर याचिका दायर कर सकते हैं, लेकिन क्या कोर्ट इस तरह नए चुनाव का आदेश दे सकता है?” चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या प्रभावित उम्मीदवारों ने उन 31 विधानसभा क्षेत्रों में जीते हुए उम्मीदवारों को चुनौती देने के लिए औपचारिक चुनाव याचिकाएं दायर की थीं। इस पर वकील ने जवाब दिया कि कुछ सीटों पर चुनाव याचिकाएं दायर की गई थीं, लेकिन सभी पर नहीं। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इस बात पर जोर दिया कि यह पता लगाना जरूरी है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के बाद कितने लोगों ने असल में अपील दायर की थी।

देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि अगर नाम हटाए जाने वाले किसी वोटर ने अपील दायर किए बिना इसे स्वीकार कर लिया, तो उनकी ओर से नतीजों को चुनौती देना केवल सैद्धांतिक बात रह जाती है। हालांकि, अगर 100 लोगों के नाम हटाए गए, जीत का अंतर 50 था। हटाए गए वोटरों में से 60 या 70 ने अपील दायर की जो अभी भी लंबित है, तो नाम हटाने की इस प्रक्रिया को चुनौती देना एक अहम और बहुत जरूरी मामला बन जाता है।

लंबित अपील का आंकड़ा मांगा

इससे एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग (ECI) को पश्चिम बंगाल में SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या नाम शामिल किए जाने को चुनौती देने वाली विभिन्न अपील पर अधिकारियों द्वारा निपटाए गए मामलों और लंबित मामलों का आंकड़ा पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इन मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना जरूरी है। पीठ ने निर्वाचन आयोग से यह बताने को कहा कि लंबित अपील के निपटारे की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि लोगों को यह जानकारी नहीं मिल रही है कि न्यायाधिकरणों के समक्ष कितनी अपील लंबित हैं या कितनी अपील का निपटारा हो चुका है, क्योंकि यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। बनर्जी ने कहा कि नगर निकाय और पंचायत चुनाव होने वाले हैं। इस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले को केवल 31 विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखेगा।

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24 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने अपीलीय न्यायाधिकरणों को निर्देश दिया था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ तत्काल सुनवाई की जरूरत साबित करने वाले मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए। करीब 60 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल एवं पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था।

Asish Banerjee: बीरभूम में TMC दफ्तर में मृत पाए गए पश्चिम बंगाल के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी, फंदे से लटका मिला शव

Asish Banerjee Found Dead: पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी का शव बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक कार्यालय में रविवार (16 अगस्त) सुबह फंदे से लटका मिला। पुलिस सूत्रों ने बताया कि रामपुरहाट में बनर्जी के आवास के पास स्थित पार्टी कार्यालय से एक कथित ‘सुसाइड नोट’ भी बरामद हुआ है।

उन्होंने बताया कि तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक बनर्जी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल, बंगाल के आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं।

ममता बनर्जी की कार पर पत्थरों-जूतों और कीचड़ से हमला, चोर-चोर के लगे नारे

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को रविवार को उत्तर 24 परगना जिले में विरोध का सामना करना पड़ा। वह एक मृत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनकी कार को घेर लिया और ‘चोर’ के नारे लगाए। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी कार पर कीचड़ भी फेंका। यह घटना बिजपुर में हुई। बताया गया कि प्रदर्शनकारियों का एक समूह ममता बनर्जी की गाड़ी के आसपास जमा हो गया, जब वह मृत पार्टी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं।

ममता बनर्जी ने लगाया ये आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में कुछ असामाजिक तत्वों ने उनकी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके। उन्होंने कहा कि कार पर हमला इतना जोरदार था कि अगर उसकी खिड़कियां खुली होतीं तो उनके सिर में गंभीर चोट लग सकती थी। ममता बनर्जी ने कहा, “हम सब मारे जा सकते थे। यह सब पुलिस के सामने हुआ। मैंने अपने जीवन में ऐसा कुछ कभी नहीं देखा। आखिर यह सब क्या हो रहा है?” उन्होंने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाया। ममता बनर्जी ने कहा कि पुलिस बीजेपी को सुरक्षा दे रही है, जबकि उनकी कार पर हमला पुलिस के सामने ही हुआ।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस की मौजूदगी में उनकी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके। उन्होंने कहा कि हमला इतना जोरदार था कि अगर कार की खिड़कियां खुली होतीं तो उनके सिर में गंभीर चोट लग सकती थी। ममता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, “हम सब मारे जा सकते थे। यह सब पुलिस के सामने हुआ। मैंने ऐसा कुछ कभी नहीं देखा। आखिर यह सब क्या हो रहा है? पुलिस बीजेपी को सुरक्षा दे रही है।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि उनकी कार पर पत्थर, जूते और कीचड़ फेंके गए। ममता बनर्जी ने इसे एक साजिश बताया। उन्होंने कहा, “मैंने पुलिस को पहले ही बताया था कि मैं यहां आ रही हूं। इसके बावजूद पुलिस ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए। पूरे पश्चिम बंगाल पर गुंडों का कब्जा है।” वहीं, प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि ममता बनर्जी शांत इलाके में “अशांति फैलाने” आई थीं। प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ नारे भी लगाए गए। यह विरोध एक मृत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यकर्ता के घर जाने के दौरान हुआ। बताया गया है कि कार्यकर्ता की मौत हलीशहर पुलिस की हिरासत में तबीयत बिगड़ने के बाद हुई थी। हालांकि, इस मामले से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।

Koel Mallick Resign: ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका, अब TMC सांसद एवं बंगाली अभिनेत्री कोएल मलिक ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा

Koel Mallick Resign: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया है। हालांकि, इस्तीफे के पीछे की वजह को लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। कोएल मलिक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों की संख्या घटकर 9 रह गई है। इससे पहले भी पार्टी के कुछ सांसद विभिन्न कारणों से सदन की सदस्यता छोड़ चुके हैं।

कोयल मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में उनके इस फैसले को राजनीतिक हलकों में अहम माना जा रहा है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक इस इस्तीफे पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है कि पार्टी उनकी जगह किसे राज्यसभा भेजेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी इस मुद्दे पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर सकती है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि राज्यसभा सचिवालय इस्तीफा स्वीकार करने के बाद आगे की प्रक्रिया कब पूरी करता है। कोएल मलिक का असली नाम रुक्मिणी मल्लिक है। वह कई बंगाली फिल्मों में काम कर चुकी हैं। खास बात यह है कि वह इसी साल अप्रैल में सांसद बनी थीं।

मदन मित्रा ने भी छो़ड़ा साथ

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले विधायक मदन मित्रा बुधवार को नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में शामिल हो गए। विधायक ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी थी। कामरहाटी से विधायक मित्रा ने घोषणा की है कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सभी राष्ट्रीय और संगठनात्मक समितियों से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से भी तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।

इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो बीते कुछ महीने से अभूतपूर्व बगावत का सामना कर रहा है। उन्होंने घोषणा की है कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में अब कोई संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे। हालांकि, वह तृणमूल कांग्रेस के विधायक बने रहेंगे। पिछले कुछ महीनों से ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व को लगातार चुनौती दी है।

मित्रा ने कहा कि गुट बदलने से पहले उन्होंने अपने फैसले के बारे में ममता बनर्जी को सूचित कर दिया था। मित्रा ने यह भी घोषणा की है कि वह 21 जुलाई को ऋतब्रत बनर्जी गुट द्वारा आयोजित किए जा रहे शहीद दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। बागी नेताओं ने एक समानांतर संगठनात्मक ढांचे की घोषणा की है। पार्टी मुख्यालय पर अपना नियंत्रण होने का दावा किया है। जबकि ममता बनर्जी गुट ने इन दावों को खारिज कर दिया है।

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मित्रा के इस कदम को लेकर अटकलें मंगलवार रात से ही तेज हो गई थीं, जब उन्होंने बागी विधायक संदीपन साहा के आवास का दौरा किया था। मित्रा ने इस बात को खारिज किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के कारण उन्होंने गुट बदला। उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा और तृणमूल कांग्रेस के पतन के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।

बागी गुट ने TMC चेयरपर्सन पद से हटाया पर उससे पहले ही ममता बनर्जी चल चुकी थीं अपनी चाल! इनसाइड स्टोरी अब सामने आई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद अब ममता बनर्जी अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को गंवाने के खतरे से जूझ रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी फाउंडर ममता बनर्जी के लिए स्थितियां और विकट तब हो गईं जब पार्टी के बागी खेमे ने उन्हें चेयरपर्सन के पद से ही हटा दिया। एक बारगी ऐसा लगा कि क्या अब टीएमसी ममता बनर्जी के हाथों से पूरी तरह फिसल गई। पर अब एक नई जानकारी सामने आ रही है।

ममता बनर्जी के खेमे ने एक बड़ा खुलासा किया है। कोलकाता में बागी गुट द्वारा एक बैठक में पार्टी संस्थापक और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाए जाने के ठीक एक दिन बाद ममता बनर्जी की ओर से एक बड़ा जवाबी दांव चला गया है।

सामने आई इनसाइड स्टोरी के मुताबिक बागी गुट द्वारा उन्हें पद से हटाए जाने से पहले ही ममता बनर्जी अपनी चाल चल चुकी थीं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की एक नई पुनर्गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची तैयार कर भारतीय चुनाव आयोग को सौंप दी थी। इसमें खुद ममता बनर्जी को ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का चेयरपर्सन बताया गया है।

बागी गुट के कदम से पहले ही ममता ने सुरक्षित किया दावा

न्यूज एजेंसी पीटीआई और दूसरी रिपोर्टों के मुताबिक जब बागी नेता पार्टी के भीतर संगठनात्मक तख्तापलट की तैयारी कर रहे थे ठीक उसी समय ममता बनर्जी ने 1998 में अपने द्वारा स्थापित की गई पार्टी के तंत्र पर अपना नियंत्रण सुरक्षित करने के लिए कदम उठा दिया था। ममता बनर्जी के करीबी नेताओं ने बताया कि शनिवार को ही पार्टी के नए नेतृत्व ढांचे और 24 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति को अंतिम रूप दे दिया गया था।

सोमवार दोपहर को ही इस सूची को चुनाव आयोग के पास जमा कर दिया गया था। यह सब तब हुआ जब कोलकाता में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले असंतुष्ट खेमे ने अपना विशेष सत्र भी आयोजित नहीं किया था।

ममता खेमे के एक वरिष्ठ नेता ने पीटीआई को बताया कि जब बागी खेमा अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने की तैयारियां कर रहा था, तब ममता बनर्जी ने पहले ही पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप दे दिया था और टीएमसी की चेयरपर्सन के रूप में यह सूची चुनाव आयोग को भेज दी थी।

ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग भेजी गई लिस्ट में कौन-कौन?

चुनाव आयोग को सौंपे गए आधिकारिक दस्तावेज पर खुद ममता बनर्जी के हस्ताक्षर हैं। इस नई सूची में निम्नलिखित नेताओं को प्रमुख पदाधिकारी बनाया गया है-

चेयरपर्सन: ममता बनर्जी

उपाध्यक्ष: सुब्रत बख्शी

राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा नेता: अभिषेक बनर्जी

संयुक्त सचिव और राज्यसभा नेता: डेरेक ओ’ब्रायन

संयुक्त सचिव: डोला सेन

कोषाध्यक्ष: सुभाशीष चक्रवर्ती

ममता के करीबी नेताओं ने बताया कि चुनाव आयोग को भेजी गई इस नई कमेटी का ढांचा पुराने संगठनात्मक प्रबंधों से बिल्कुल अलग है। इस लिस्ट से असंतुष्ट और बागी खेमे से जुड़े कई नेताओं की छुट्टी कर दी गई है। यहां तक कि इस महीने की शुरुआत में गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति का हिस्सा रहे अरूप बिस्वास को भी इस संशोधित सूची से बाहर कर दिया गया है।

दूसरी तरफ बागी गुट ने अरूप रॉय को चुना नया चेयरपर्सन

दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने सोमवार को कोलकाता में हुए विशेष सत्र के बाद पार्टी में संगठनात्मक विभाजन को और गहरा कर दिया। बागी खेमे ने घोषणा की कि उन्होंने ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटा दिया है और उनकी जगह वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन चुना है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की। बागी खेमे का दावा है कि यह विशेष सत्र तृणमूल कांग्रेस के संविधान के अनुसार ही बुलाया गया था और इस सत्र में लिए गए सभी फैसलों की जानकारी औपचारिक रूप से चुनाव आयोग को दी जाएगी।

ममता खेमे का पलटवार- यह सिर्फ एक कॉमेडी शो और सर्कस है

ममता बनर्जी खेमे ने बागियों के इस पूरे सत्र और अभ्यास को पूरी तरह से अमान्य और खारिज कर दिया है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि असंतुष्ट नेताओं के पास न तो ऐसा सत्र बुलाने का कोई अधिकार था और न ही पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को बदलने का कोई जनादेश था।

कुणाल घोष ने स्पष्ट रूप से कहा कि, ‘यह एक कॉमेडी शो है। एक व्यक्ति जिसे टीएमसी से निष्कासित किया जा चुका है, वह विशेष सत्र आयोजित कर रहा है। यह मामला कोर्ट में है और हमें विश्वास है कि न्याय होगा। हम इस तरह के हास्यास्पद व्यवहार को कोई महत्व नहीं देते हैं। टीएमसी का मतलब ही ममता बनर्जी है, बाकी सब एक सर्कस है।’

कई बड़े नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी

पार्टी के भीतर बगावत पर कड़ा रुख अपनाते हुए ममता बनर्जी खेमे की अनुशासन समिति ने कई वरिष्ठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, अरूप रॉय, जावेद खान, रथिन घोष, बिप्लव मित्रा, स्नेहाशीष चक्रवर्ती और सबीना यास्मिन के नाम शामिल हैं। इन सभी नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।

ममता बनर्जी के लिए आगे क्या? लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई के आसार

कोलकाता के एक राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव आयोग किस संगठनात्मक ढांचे को वैध और असली टीएमसी के रूप में मान्यता देगा। दोनों गुटों द्वारा किए जा रहे परस्पर विरोधी दावों ने टीएमसी के भीतर संकट को एक नया मोड़ दे दिया है, जहां दोनों धड़े अब पार्टी की विधायी और संगठनात्मक दोनों शाखाओं पर अपना दावा ठोक रहे हैं।

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ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि यह विवाद चुनाव आयोग के सामने लड़ा जाएगा और अंततः अदालतों तक भी पहुंच सकता है। इससे एक बात तो साफ है कि ममता बनर्जी द्वारा 1998 में स्थापित की गई इस पार्टी पर नियंत्रण के लिए एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई का मंच तैयार हो गया है।

ममता बनर्जी के हाथों से फिसली TMC की कमान, तृणमूल के बागी 58 विधायकों ने अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना

TMC Crisis Update: पश्चिम बंगाल विधानसभा 2026 में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी सबसे बड़े संकट से जूझ रही हैं। ममता बनर्जी का अब पार्टी पर कंट्रोल भी खत्म हो गया है। तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की कोशिश में विपक्ष के नेता रीताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुन लिया है। यह पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है। इस कदम से संकेत मिलता है कि विधानसभा से शुरू हुई और बाद में संसद तक फैली बगावत अब TMC के संगठनात्मक गढ़ तक पहुंच गई है।

बागी विधायकों, पार्षदों और अन्य नेताओं की मौजूदगी में एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और विधायक फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। जबकि रीताब्रता बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव बनाया गया। इस नए ढांचे के जरिए बागी गुट ने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद से प्रभावी रूप से हटा दिया है।

रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां अंसारी को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बैठक के बाद रीताब्रता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, “तृणमूल कांग्रेस नेताओं और सदस्यों के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से अरूप रॉय को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया।” बागी गुट के नेता ने इस प्रक्रिया को वैध ठहराने की कोशिश करते हुए कहा कि पूरी कार्यवाही पार्टी के संविधान के अनुसार की गई है।

विशेष सत्र का डिटेल्स निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। बागी गुट के सूत्रों के अनुसार, रीताब्रता बनर्जी ने न्यू टाउन के एक होटल में बैठक की, जिसमें कोलकाता नगर निगम के लगभग 60 विधायक और 70 पार्षद मौजूद थे। उन्होंने इन फैसलों का समर्थन किया।

संगठनात्मक ढांचे का गठन शुरू

उन्होंने कहा, “यह असली या नकली होने का सवाल नहीं है। हम ही तृणमूल कांग्रेस हैं और आज के विशेष सत्र की कार्यवाही की जानकारी निर्वाचन आयोग को देंगे।” बनर्जी ने कहा, “हमने पार्टी के नियमों के अनुसार काम किया है और यह विशेष सत्र आहूत किया है। क्या सही है और क्या गलत, इसका फैसला निर्वाचन आयोग करेगा।” उन्होंने बताया कि नवगठित नेतृत्व जल्द ही विभिन्न स्तरों पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का गठन शुरू करेगा। बनर्जी ने कहा, “हम जल्द ही जिला समितियों, प्रदेश इकाई और प्रवक्ताओं के एक पैनल का गठन करेंगे।”

440 करोड़ रुपये के लेन-देन पर भी रोक

इस बीच, पुलिस ने बागी विधायकों की शिकायत पर पार्टी के तीन बैंक खातों में मौजूद करीब 440 करोड़ रुपये के लेन-देन पर भी रोक लगा दी है। ये शिकायतें वित्तपोषण के स्रोत को लेकर की गई थीं। हालांकि, बनर्जी ने ममता के प्रति नरम रुख अपनाते हुए कहा कि यदि वह चाहें तो बागी गुट की मुख्य सलाहकार बन सकती हैं। उन्होंने कहा, “यदि ममता बनर्जी मुख्य सलाहकार बनना चाहें, तो उनका स्वागत है।”

ममता गुट का बयान

ममता बनर्जी के खेमे ने हालांकि इस पूरी कवायद को सिरे से खारिज कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने कहा कि बागियों को पार्टी संविधान के तहत ऐसा कोई सत्र बुलाने या संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, “तृणमूल और ममता बनर्जी एक-दूसरे के पूरक हैं। बागियों के पास ऐसा करने की कोई शक्ति नहीं है।”

ममता के वफादार नेताओं ने संकेत दिया है कि यह मामला अब पार्टी की वैधता को लेकर कानूनी लड़ाई में बदल सकता है। एक वफादार नेता ने बताया कि पार्टी की अनुशासन समिति जल्द ही बागी गतिविधियों में शामिल होने के लिए अरूप रॉय, फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास सहित अन्य नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करेगी।

यह विशेष सत्र पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी में उत्पन्न अभूतपूर्व संकट के बीच आयोजित किया गया। कुछ ही दिन पहले पार्टी के 80 विधायकों में से 58 ने विपक्ष के नेता पद के लिए रीताब्रता बनर्जी के दावे का समर्थन किया था। साथ ही पार्टी नेतृत्व की पसंद को खारिज कर दिया था। बागी गुट का दावा है कि इसके बाद उनकी संख्या और बढ़ गई है।

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हाल में पार्टी को संसद में एक और झटका तब लगा जब उसके 28 में से 20 लोकसभा सदस्य तृणमूल संसदीय दल से अलग हो गए और उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया। साथ ही BJP के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन देने की घोषणा की है।

ममता बनर्जी के साथ साये की तरह रहने वाले पुलिस वालों को हटाया, क्या है इनसाइड स्टोरी?

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे राजनीतिक संकट के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने उनके पुराने सुरक्षा अधिकारियों (PSO) को हटाकर नई टीम तैनात की, लेकिन ममता बनर्जी ने नए सुरक्षाकर्मियों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

टीएमसी के मुताबिक, ममता बनर्जी के साथ करीब 20 साल से जुड़े सुरक्षा अधिकारी अचानक हटा दिए गए हैं। इसके बाद उनके कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर फिलहाल कोई आधिकारिक सरकारी सुरक्षा तैनात नहीं है। पार्टी का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दो निजी गार्ड लगाए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी के पांच पीएसओ उस समय से उनके साथ थे जब वह केंद्र सरकार में रेल मंत्री थीं। बाद में 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद इन अधिकारियों को राज्य पुलिस व्यवस्था में शामिल कर लिया गया था। हाल ही में उन्हें उनकी मूल यूनिट में वापस भेजने के निर्देश दिए गए, जबकि कोलकाता पुलिस ने उनकी जगह तीन नए सुरक्षाकर्मी भेजे। ममता ने इन नए अधिकारियों को स्वीकार नहीं किया।

मामला तब चर्चा में आया जब टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ममता बनर्जी के पुराने सुरक्षा अधिकारी हटा दिए गए हैं और उनके घर के बाहर कोई सुरक्षा तैनात नहीं है। उन्होंने कहा कि वह पूरी रात अपने वाहन के साथ घर के बाहर मौजूद रहेंगे, ताकि कोई अनधिकृत व्यक्ति परिसर में प्रवेश न कर सके।

टीएमसी ने इस कदम को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह ममता बनर्जी को अलग-थलग करने और उनकी सुरक्षा को खतरे में डालने की सोची-समझी कोशिश है।

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि किसी पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा राजनीति का नहीं, बल्कि सरकार की संस्थागत जिम्मेदारी का विषय है।

वहीं टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि इतने वरिष्ठ नेता को बिना जानकारी दिए लंबे समय से जुड़े सुरक्षाकर्मियों को हटाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु से पुराने सुरक्षा इंतजाम बहाल करने और ममता के दो पुराने पीएसओ को वापस लाने की मांग की।

टीएमसी का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा समर्थित नई सत्ता व्यवस्था आने के बाद से ममता बनर्जी के आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे कम की गई है। पहले हरिश चटर्जी स्ट्रीट पर लगे बैरिकेड हटाए गए और अब उनके पुराने सुरक्षाकर्मियों को भी हटा दिया गया है।

इसके अलावा, ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर की सुरक्षा भी सरकार बदलने के बाद वापस ले ली गई थी।

फिलहाल इस मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन टीएमसी इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताकर भाजपा और राज्य प्रशासन पर लगातार निशाना साध रही है।