राहुल गांधी ने राजस्थान के कोटा में जब स्टेज पर एंट्री ली तो जो माहौल था वो किसी इंटरनेशनल पॉप सिंगर के कंसर्ट जैसा लग रहा था। लाइट्स, कैमरा, मोबाइल के फ्लैशेस और लाखों स्टूडेंट की भीड़ और उनका शोर। स्टूडेंट जिन्हें आजकल जेन-जी कहा जाता है। कोटा में नीट और यूपीएससी की तैयारी कर रहे जेन-जी राहुल को सुनने के लिए बेताब थे। यह शोर बता रहा था कि वे देश के एजुकेशन सिस्टम में बदलाव की जरूरत है।
हाफ स्लीव शर्ट और पतलून में राहुल गांधी ने स्टेज पर आते ही यह साफ कर दिया कि यह कोई राजनीतिक रेली नहीं है। यह आपके लिए हैं, यह उन नौजवानों को लिए है जो अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा— आज की शाम मेरे मुंह से बीजेपी, कांग्रेस और राजनीति जैसा एक भी शब्द नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि मैं कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक यात्राएं करता हुआ लगातार हमारे एजुकेशन सिस्टम के बारे में सोच रहा हूं, स्टूडेंट से बात कर रहा हूं। हमारा सिस्टम छात्रों के साथ न्याय नहीं करता।
हमारे सिस्टम की गलती है : इसके बाद उन्होंने एक नीट छात्रा स्नेहा का सुसाइड नोट दिखाया, कहा कि स्नेहा डॉक्टर बनना चाहती थी, इनके पिता पैरेलाइज्ड हैं, कर्ज लिया था। लेकिन नीट पेपर लीक हो गया और उसने आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि स्नेहा की गलती नहीं थी, उसके पिता की गलती नहीं थी, आपकी नहीं थी। यह हमारे एजुकेशन सिस्टम की गलती है। मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर काम करे। हम देखें कि हमारे सिस्टम में कहां गलती है और उसे सुधारे मिलकर। यह रेली सिर्फ इस बारे में है।
राहुल के साथ छात्रों की गूंज : राहुल गांधी ने देश के एजुकेशन सिस्टम के खिलाफ कोटा में आवाज उठाई और स्टूडेंट के साथ ही उनके परिजनों से बात कर के इसकी खामियां गिनाई और बताया कि कहां सुधार की जरूरत है। आम आदमी अपने बच्चों के लिए कर्ज लेकर डॉक्टर बनाने के लिए नीट एक्जाम में शामिल करता है और एक पेपर लीक उनके पूरे भविष्य और परिवार को बर्बाद कर देता है। इस पूरे अभियान में कोटा में नीट, यूपीएससी और अन्य परीक्षाओं की तैयारी करने वाले स्टूडेंट ने राहुल के साथ अपनी आवाज मिलाई।
कोटा जाने से पहले क्या लिखा राहुल ने : बता दें कि राजस्थान के कोटा रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कोटा के लिए निकल चुका हूं पर दिल में दो नाम गूंज रहे हैं उमेश और रिया। सीकर में उमेश और देहरादून में रिया दोनों ने दोबारा नीट की परीक्षा के दबाव में अपनी जिंदगी खत्म कर ली। उन्होंने आगे कहा कि 22 और 23 साल के बच्चे, जिन्हें सपनों के खुले आसमान में उड़ना था वो इस अन्यायी व्यवस्था से हार गए।
5 साल में कितनी आत्महत्याएं : मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2021 से लेकर वर्ष 2026 के बीच NEET से जुड़े कम से कम 93 छात्र आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट बताती है कि साल 2025 में ऐसे मामलों की संख्या सबसे ज्यादा रही, जब कम से कम 32 छात्रों ने अपनी जान गंवाई। साल 2026 में अब तक 14 मामले सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से 5 मामले 12 मई 2026 को परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद दर्ज किए गए। हालांकि ये आंकड़े मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं।
कहां-कहां हुई आत्महत्याएं : रिपोर्ट्स के अनुसार NEET 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देश के अलग-अलग राज्यों से कई छात्रों की मौत के मामले सामने आए। 14 मई को गोवा, 15 मई को उत्तर प्रदेश और दिल्ली, 16 मई को राजस्थान तथा 24 मई को कर्नाटक से ऐसे मामले रिपोर्ट किए गए। इसके बाद जून में भी कई घटनाएं सामने आईं। 4 जून को राजस्थान के दौसा निवासी अजीत मीणा की मौत की खबर आई। 13 जून को दिल्ली के पालम इलाके में रहने वाली 17 वर्षीय रेनू की मौत का मामला सामने आया था। 15 जून को राजस्थान के सीकर और 16 जून को उत्तराखंड के देहरादून से भी NEET अभ्यर्थियों की मौत की खबर सामने आई हैं।
हर साल 24 लाख बच्चे देते हैं नीट : नीट (NEET UG) परीक्षा में हर साल लगभग 22 लाख से 24 लाख के बीच छात्र बैठते हैं। उदाहरण के लिए, परीक्षा के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कुल 22,79,743 छात्रों ने पंजीकरण कराया था और 22 लाख से अधिक उम्मीदवार परीक्षा में उपस्थित हुए थे।
कितनी खर्च होता है नीट की तैयारी में : नीट (NEET) की 1 साल की फीस आपके द्वारा चुने गए माध्यम (ऑनलाइन/ऑफलाइन कोचिंग) और संस्थान पर निर्भर करती है। आमतौर पर 1 साल के कोर्स की फीस 50,000 से 2,50,000 के बीच होती है।
ऑनलाइन कोचिंग: यह सबसे सस्ता विकल्प है, जिसकी फीस करीब 4,000 से 1,00,000 प्रति वर्ष तक होती है।
ऑफलाइन कोचिंग (रेगुलर): किसी सामान्य कोचिंग सेंटर या ब्रांच में पढ़ने का खर्च 50,000 से 1,50,000 तक होता है।
प्रमुख कोचिंग संस्थान (जैसे कोटा या आकाश): बड़े संस्थानों में फीस 1,00,000 से 2,50,000 के बीच हो सकती है (हॉस्टल का खर्च अलग से)।
सरकार के लिए बड़ा वेक-अप कॉल : कोटा में राहुल गांधी और 'जेन-जी' (Gen-Z) का यह साथ सिर्फ एक राजनीतिक संवाद नहीं, बल्कि देश की जर्जर होती शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ युवाओं का एक कड़ा आक्रोश है। नीट (NEET) पेपर लीक जैसी घटनाओं ने आज की पीढ़ी के भरोसे को झकझोर कर रख दिया है। युवाओं ने नेताओं के साथ मिलकर जिस तरह शिक्षा तंत्र की कमियों का 'पोस्टमार्टम' किया है, उसने यह साफ कर दिया है कि अब देश का युवा चुप बैठने वाला नहीं है। सरकार और प्रशासन के लिए यह एक बड़ा वेक-अप कॉल है—अगर समय रहते इस पूरे सिस्टम को पारदर्शी और सुरक्षित नहीं बनाया गया, तो देश के भविष्य (युवाओं) का यह असंतोष एक बड़े आंदोलन की शक्ल ले सकता है।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल
