Salary Management: सैलरी आते ही पैसा खत्म हो जाता है? ये 5 खास फॉर्मूले करेंगे आपकी मदद

Salary Management: हर महीने सैलरी आती है और कुछ ही दिनों में अकाउंट खाली होने लगता है। EMI, किराया, राशन, बच्चों के खर्च, शॉपिंग और बाहर खाने जैसे खर्च मिलकर बजट बिगाड़ देते हैं। महीने के आखिर में बचत के नाम पर कुछ नहीं बचता।

इससे बचने का एक आसान तरीका है सैलरी को मिलते ही 5 अलग-अलग हिस्सों में बांटना। हर हिस्से का एक तय काम होता है। इससे आपको पहले से पता रहता है कि कितना पैसा खर्च करना है और कितना बचाना है।

सैलरी को 5 हिस्सों में कैसे बांटें

इस फॉर्मूले में सैलरी का 50% जरूरी खर्च के लिए रखा जाता है। 20% निवेश, 10% इमरजेंसी फंड, 10% निजी खर्च और 10% बड़े लक्ष्यों के लिए रखा जा सकता है। इसे तीन 30, 50 और 60 हजार अलग-अलग सैलरी के उदाहरण से समझिए।

खर्च का हिस्सा₹30,000 सैलरी₹50,000 सैलरी₹60,000 सैलरी
जरूरी खर्च के लिए 50%₹15,000₹25,000₹30,000
निवेश के लिए 20%₹6,000₹10,000₹12,000
इमरजेंसी फंड 10%₹3,000₹5,000₹6,000
निजी खर्च 10%₹3,000₹5,000₹6,000
बड़े लक्ष्य के लिए 10%₹3,000₹5,000₹6,000
कुल₹30,000₹50,000₹60,000

यह कोई सख्त नियम नहीं है। आप अपनी सैलरी, EMI और परिवार की जरूरत के हिसाब से इन हिस्सों में बदलाव कर सकते हैं।

1. जरूरी खर्च के लिए 50%

सबसे पहले जरूरी खर्च का हिस्सा अलग करना चाहिए। इसमें घर का किराया, EMI, राशन, बिजली-पानी का बिल, बच्चों की फीस और रोजमर्रा की जरूरी चीजें शामिल हो सकती हैं।

अगर आपकी सैलरी ₹50,000 है तो इस हिस्से में करीब ₹25,000 रखे जा सकते हैं। कोशिश करें कि जरूरी खर्च लगातार इससे ऊपर न जाएं। अगर ऐसा हो रहा है तो बजट में कटौती की गुंजाइश तलाशनी चाहिए।

2. निवेश के लिए 20%

दूसरा हिस्सा भविष्य के लिए है। ₹50,000 की सैलरी में इसका मतलब ₹10,000 हर महीने निवेश करना है।

इस पैसे को आपके लक्ष्य और जोखिम के हिसाब से अलग-अलग निवेश विकल्पों में लगाया जा सकता है। मसलन, लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए SIP, जबकि PPF या VPF जैसे विकल्प भी आपकी जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि निवेश सैलरी आने के बाद हो। महीने के आखिर में जो पैसा बचे, उससे निवेश करने की आदत अक्सर काम नहीं करती।

3. इमरजेंसी के लिए 10%

अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग पैसा होना बहुत जरूरी है। इसके लिए सैलरी का 10% अलग रखा जा सकता है। ₹50,000 की सैलरी में यह रकम ₹5,000 महीने होगी। मेडिकल इमरजेंसी, नौकरी जाने या अचानक किसी बड़े जरूरी खर्च के समय ये पैसा काम आ सकता है।

जब तक पर्याप्त इमरजेंसी फंड तैयार न हो जाए, इस रकम को दूसरे खर्चों में इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

4. निजी खर्च के लिए 10%

बजट बनाने का मतलब यह नहीं है कि हर महीने सिर्फ बिल और निवेश ही किया जाए। घूमने-फिरने, मनोरंजन और अपनी पसंद के खर्च के लिए भी पैसा अलग रखना जरूरी है।

₹50,000 की सैलरी में ₹5,000 इस हिस्से में रखे जा सकते हैं। इससे बाहर खाना, फिल्म, छोटी-मोटी शॉपिंग या घूमने जैसे खर्च किए जा सकते हैं।

इसका फायदा यह है कि आपको हर छोटे खर्च के बाद यह नहीं सोचना पड़ेगा कि बजट बिगड़ गया। बस तय सीमा के अंदर खर्च करना होगा।

5. बड़े लक्ष्यों के लिए 10%

पांचवां हिस्सा उन लक्ष्यों के लिए रखें जिन्हें आप आने वाले कुछ सालों में पूरा करना चाहते हैं। इसमें गाड़ी खरीदना, घर का डाउन पेमेंट, बच्चों की पढ़ाई, शादी या कोई बड़ा पर्सनल गोल शामिल हो सकता है।

₹50,000 की सैलरी में इसके लिए ₹5,000 महीने अलग किए जा सकते हैं। जैसे-जैसे सैलरी बढ़े, इस हिस्से को भी बढ़ाया जा सकता है। इमरजेंसी फंड बनने के बाद उस हिस्से को भी निवेश किया जा सकता है।

फॉर्मूले में अपने हिसाब से करें बदलाव

50:20:10:10:10 का यह फॉर्मूला हर व्यक्ति के लिए बिल्कुल एक जैसा नहीं हो सकता। अगर आपकी EMI ज्यादा है तो जरूरी खर्च का हिस्सा बढ़ सकता है। वहीं, कर्ज कम है और आय ज्यादा है तो निवेश का हिस्सा 20% से ऊपर भी रखा जा सकता है।

आखिर में मकसद सिर्फ सैलरी को 5 हिस्सों में बांटना नहीं है। मकसद यह है कि सैलरी आते ही हर रुपये को एक काम दे दिया जाए, ताकि महीने के अंत में यह सवाल न उठे कि पैसा आखिर गया कहां।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Viral Post: 6 अंकों की सैलरी के बाद भी खर्च करने में डरता है ये युवक! 26 साल के प्रोफेशनल ने शेयर किया पोस्ट

आज के समय में कई लोगों को ऐसा लगता है कि 6 अंकों वाली सैलरी मिलने के बाद आर्थिक परेशानियां खत्म हो जाती हैं। लेकिन 26 साल के एक युवक ने सोशल मीडिया पर बताया कि अच्छी कमाई होने के बावजूद हर महीने खर्च और बचत के बीच बैलेंस बनाना आसान नहीं है। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक पोस्ट में एक प्रोफेशनल ने अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर दिलचस्प अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि करीब 82 लाख रुपए सालाना कमाने के बावजूद कई बार ये तय करना मुश्किल हो जाता है कि मनोरंजन, घूमने-फिरने या महंगे कपड़ों जैसी चीजों पर पैसा खर्च किया जाए या नहीं। युवक का ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा हैय़

उसकी पोस्ट के बाद कई लोगों ने कहा कि बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों की वजह से अच्छी सैलरी वाले लोगों को भी अपने पैसों का सही तरीके से हिसाब रखना पड़ता है।

युवक ने शेयर किया पोस्ट

रेडिट पर शेयर किए गए पोस्ट में यूजर ने लिखा, “मुझे पता है कि मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी है और पैसों को लेकर कोई बड़ी परेशानी नहीं है, लेकिन एक चीज को लेकर मैं अब भी असमंजस में रहता हूं। कॉन्सर्ट या थिएटर के टिकट, किसी खास मौके पर बाहर घूमने जाना या अच्छे कपड़े खरीदने जैसी छोटी-बड़ी चीजों पर खर्च करने का फैसला मेरे लिए आसान नहीं होता। कई बार समझ नहीं आता कि इन चीजों पर कितना और कब खर्च करना सही रहेगा।”

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कितनी है सैलरी

26 साल के इस यूजर ने बताया कि उनकी सालाना आय करीब 95,000 डॉलर है। रिटायरमेंट फंड, हेल्थकेयर और इंश्योरेंस जैसी कटौतियों के बाद उनके पास हर महीने लगभग 3,000 डॉलर बचते हैं। यूजर ने पोस्ट में लिखा, “मैं चाहता हूं कि इन खर्चों के लिए मेरा बजट थोड़ा बड़ा हो, ताकि मैं कभी-कभी अच्छे ड्रेस शूज़ जैसी चीजें भी खरीद सकूं। लेकिन ज्यादातर महीनों में मैं इस कैटेगरी के लिए तय रकम का 90 से 110 प्रतिशत तक खर्च कर देता हूं।”

यूजर की पोस्ट पर लोगों ने किया कमेंट

इस पोस्ट पर कई लोगों ने अपनी राय भी शेयर की। एक यूजर ने लिखा, “बजट बनाना खर्चों का अंदाजा लगाने के लिए अच्छा तरीका है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात समझदारी से खर्च करना है। हर स्थिति को बजट में शामिल नहीं किया जा सकता, इसलिए किसी भी खरीदारी से पहले यह जरूर सोचें कि उसकी कीमत वाकई उचित है या नहीं।” वहीं एक अन्य यूजर ने कहा, “जब मैं ऐसी स्थिति में होता हूं, तो मैं उस चीज के लिए कुछ महीनों तक बचत करने का फैसला करता हूं जिसे खरीदना चाहता हूं। अगर चाहूं तो अपने बजट में बदलाव कर सकता हूं, लेकिन मैं ऐसा नहीं करता। इसलिए मेरे लिए सबसे अच्छा तरीका धैर्य रखना और इंतजार करना है।”