SBI Schemes: जीरो रिस्क के साथ FD से बेहतर रिटर्न! गिरते मार्केट के बीच SBI की ये स्कीम्स कराएंगी बढ़िया मुनाफा

SBI Mutual Fund Schemes: शेयर बाजार में जब गिरावट या मंदी का दौर चल रहा होता है, तब नए और पुराने दोनों तरह के निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि ऐसे समय में क्या करें? इस मौके का फायदा उठाकर आने वाले 1 से 2 सालों में अपना पैसा सुरक्षित तरीके से कैसे बढ़ाया जाए। अक्सर निवेशक गिरावट देखकर पैनिक में आ जाते हैं या फिर जल्दबाजी में बड़े रिटर्न के लालच में स्मॉलकैप जैसे जोखिम भरे फंड्स में एकमुश्त पैसा लगा बैठते हैं।

हालांकि, बाजार के दिग्गज और पोर्टफोलियो मैनेजर्स इस रणनीति से सख्त बचने की सलाह देते हैं। विशेषज्ञों का साफ मानना है कि जब मार्केट में करेक्शन चल रहा हो, तो 3 साल से कम (1-2 साल) की कम अवधि के लिए स्मॉलकैप फंड्स में बड़ा दांव लगाना खतरनाक हो सकता है।

‘दुनिया से मजबूत है भारत की इकोनॉमी!’ वैश्विक अनिश्चितता के बीच पूर्व ECB चीफ ट्रिसेट का बड़ा दावा

पोर्टफोलियो रणनीतिकार बताते हैं कि, ‘बाजार की अनिश्चितता के दौर में कम अवधि जैसे 1-2 साल के लिए केवल ज्यादा रिटर्न तलाशने से कहीं ज्यादा जरूरी ‘कैपिटल प्रोटेक्शन’ होता है। ऐसे समय में डायवर्सिफाइड एसेट एलोकेशन या हाइब्रिड फंड्स के जरिए चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ही वेल्थ प्रोटेक्शन और ग्रोथ का सबसे समझदारी भरा फॉर्मूला है।’

1 से 2 साल के नजरिए के लिए SBI Mutual Fund की 3 सबसे मुफीद स्कीम्स

अगर आपका नजरिया केवल अगले 12 से 24 महीनों का है और आप बाजार की रिकवरी का फायदा भी उठाना चाहते हैं, तो SBI की ये स्कीम्स सबसे बढ़िया साबित हो सकती हैं:

1. SBI Multi Asset Allocation Fund (जोखिम: कम से मध्यम)

यह फंड आपकी पूंजी को सिर्फ शेयर बाजार के भरोसे नहीं छोड़ता। यह पैसे को मुख्य रूप से इक्विटी, डेट (बॉन्ड/एफडी) और गोल्ड/सिल्वर में बांटकर निवेश करता है।

1-2 साल के लिए क्यों बेस्ट? इतिहास गवाह है कि जब शेयर बाजार में गिरावट या सुस्ती होती है, तब सोना और डेट एसेट्स पोर्टफोलियो को मजबूती देते हैं। 1-2 साल की अवधि में यह फंड बाजार की गिरावट के झटकों से पूरी सुरक्षा देते हुए आपको 10% से 12% तक का स्थिर और संतुलित रिटर्न देने की क्षमता रखता है।

2. SBI Equity Hybrid Fund (जोखिम: मध्यम)

यह एक कंजर्वेटिव हाइब्रिड मॉडल पर काम करता है, जहां कुल फंड का लगभग 65% से 80% हिस्सा इक्विटी में और बाकी 20% से 35% हिस्सा डेट प्रतिभूतियों (G-Secs, बॉन्ड्स) में लगाया जाता है।

बाजार के निचले स्तर पर होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका इक्विटी पोर्शन सस्ते वैल्युएशन पर मजबूत शेयर खरीद लेता है। जब अगले 1-2 साल में मार्केट रिकवर करेगा, तो इक्विटी हिस्सा तेजी से रिटर्न बढ़ाएगा और डेट हिस्सा गिरावट के समय पोर्टफोलियो को संभाल कर रखेगा।

3. SBI Arbitrage Opportunities Fund (जोखिम: बेहद कम / एफडी जैसा सुरक्षित)

यह फंड शेयर बाजार की तेजी या मंदी पर बिल्कुल निर्भर नहीं रहता। यह कैश मार्केट और डेरिवेटिव्स मार्केट के बीच कीमतों के अंतर का फायदा उठाकर जोखिम-रहित रिटर्न निकालता है।

अगर आपका मुख्य लक्ष्य जीरो-रिस्क है और आप बैंक एफडी (FD) से बेहतर और टैक्स-इफिशिएंट रिटर्न चाहते हैं, तो यह फंड सबसे सुरक्षित जरिया है। 1 से 2 साल की अवधि में इसमें पैसा डूबने का खतरा न के बराबर होता है।

अगर आप थोड़ा रिस्क ले सकते हैं तो ‘STP’ रूट से बनाएं रणनीति

अगर आप बाजार की गिरावट का फायदा उठाकर 1-2 साल में आने वाली तेजी का लाभ उठाना चाहते हैं, तो एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय STP का तरीका अपनाएं। सबसे पहले अपना पूरा पैसा SBI Arbitrage Fund या SBI Liquid Fund में एकमुश्त जमा करें। वहां से हर महीने एक निश्चित राशि (STP के जरिए) SBI Flexicap Fund या SBI Bluechip Fund में ट्रांसफर होने दें। इससे अगले 12 से 18 महीनों में आपको बाजार की हर गिरावट में ‘कॉस्ट एवरेजिंग’ का बड़ा फायदा मिलेगा।

इन स्कीम्स में 1-2 साल के लिए पैसा लगाने से बचें!

SBI Small Cap Fund: स्मॉलकैप कंपनियों में गिरावट के समय बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है। इनमें रिकवरी आने में 3 से 5 साल तक का समय लग सकता है।

SBI Contra Fund & SBI Focused Equity Fund: ये फंड्स खास रणनीतियों पर काम करते हैं और इन्हें अपना प्रदर्शन दिखाने के लिए कम से कम 5 से 7 साल का लंबा समय चाहिए होता है।

कुल मिलाकर 1 से 2 साल के शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म के लिए SBI Multi Asset Allocation Fund या STP के जरिए SBI Flexicap Fund सबसे स्मार्ट और सुरक्षित विकल्प साबित होंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Mutual Fund vs EPF vs PPF vs NPS: इमरजेंसी में पैसों की जरूरत? जानिए किस निवेश से पैसा सबसे जल्दी निकलता है

Mutual Fund vs EPF vs PPF vs NPS: जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो सिर्फ रिटर्न मायने नहीं रखता। यह भी उतना ही जरूरी है कि पैसा आपके बैंक खाते में कितनी जल्दी पहुंचे। किसी निवेश में रकम अगले कारोबारी दिन मिल सकती है। कुछ योजनाओं में कई दिन या हफ्ते भी लग सकते हैं। ऐसे में अगर आप रिटायरमेंट के लिए निवेश कर रहे हैं, तो हर स्कीम का विड्रॉल टाइमलाइन जानना जरूरी है।

आनंद राठी वेल्थ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर जसमीत सिंह के मुताबिक, हर निवेश का मकसद अलग होता है। लिक्विड और शॉर्ट ड्यूरेशन डेट म्यूचुअल फंड सबसे ज्यादा लिक्विड माने जाते हैं, जबकि EPF, PPF और NPS को लंबे समय के निवेश के लिए बनाया गया है।

सबसे पहले एक नजर में विड्रॉल टाइमलाइन

निवेश विकल्प
पैसा मिलने का समय

लिक्विड/ओवरनाइट म्यूचुअल फंड
अगले कारोबारी दिन

इक्विटी म्यूचुअल फंड1-3 कारोबारी दिन
NPST+2
EPF3-5 दिन (ऑनलाइन), अधिकतम 20 दिन
PPFआमतौर पर कुछ कारोबारी दिन

NPS में T+2 में प्रोसेस हो सकता है विड्रॉल

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का विड्रॉल टाइमलाइन सबसे साफ माना जाता है। PFRDA ने सितंबर 2022 में एग्जिट विड्रॉल का समय T+4 से घटाकर T+2 कर दिया था। इसका मतलब है कि जरूरी मंजूरी मिलने के बाद विड्रॉल दो कारोबारी दिनों के भीतर प्रोसेस हो सकता है। हालांकि, रिटायरमेंट पर एन्युटी खरीदने जैसी प्रक्रिया होने पर पूरा पैसा तुरंत खाते में नहीं आता।

आंशिक निकासी के लिए भी नियम तय हैं। NPS में अपनी जमा राशि का अधिकतम 25% तक आंशिक विड्रॉल किया जा सकता है। इसके लिए तय शर्तें पूरी करनी होती हैं।

PPF में तय T+1 या T+2 नियम नहीं

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में कोई तय T+1 या T+2 भुगतान नियम नहीं है। निकासी की अनुमति मिलने के बाद बैंक या पोस्ट ऑफिस में आवेदन देना होता है। इसके बाद रकम संबंधित संस्था की प्रोसेसिंग के अनुसार खाते में आती है।

बैंक वाले PPF खातों में आमतौर पर कुछ कारोबारी दिनों में पैसा मिल जाता है। हालांकि, समय बैंक, ब्रांच और ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन पर निर्भर करता है। जसमीत सिंह के मुताबिक, PPF में पांच वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद ही साल में एक बार आंशिक निकासी की जा सकती है।

EPF में 3-5 दिन में भी मिल सकता है पैसा

EPF में 2026 के बाद प्रक्रिया पहले से तेज हुई है। नए Employees’ Provident Funds Scheme, 2026 के तहत पूरी तरह सही क्लेम का निपटारा 20 दिनों के भीतर करना होगा। अगर बिना वजह देरी होती है, तो संबंधित अधिकारी पर 12% सालाना पेनल ब्याज भी लगाया जा सकता है।

साथ ही, ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग के तहत कई ऑनलाइन क्लेम लगभग 3 दिन में भी निपटाए जा रहे हैं। हालांकि, आधार-UAN लिंकिंग, नियोक्ता की जानकारी या दूसरे वेरिफिकेशन की वजह से समय 2-3 हफ्ते तक भी जा सकता है।

म्यूचुअल फंड सबसे तेज विकल्पों में शामिल

अगर सिर्फ जल्दी पैसा निकालना प्राथमिकता है, तो ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड सबसे आसान विकल्पों में गिने जाते हैं। AMFI के मुताबिक, कारोबारी दिनों में रिडेम्प्शन करने पर आमतौर पर पैसा 1 से 3 कारोबारी दिनों में मिल जाता है। लिक्विड और ओवरनाइट फंड में यह अगले कारोबारी दिन भी आ सकता है।

इक्विटी फंड में आमतौर पर लिक्विड फंड की तुलना में थोड़ा ज्यादा समय लगता है।

किस स्कीम में सबसे ज्यादा पाबंदियां हैं?

स्कीमनिकासी की स्थिति
म्यूचुअल फंडसबसे आसान
EPFतय उद्देश्यों के लिए
PPFसीमित निकासी
NPS Tier-1सबसे ज्यादा नियम

NPS Tier-1 में निकासी सिर्फ तय परिस्थितियों में होती है। वहीं PPF और EPF में भी आंशिक निकासी के अपने नियम हैं।

निवेशकों के लिए सबसे जरूरी सीख

सबसे जल्दी पैसा देने वाला विकल्प हमेशा सबसे अच्छा रिटायरमेंट निवेश नहीं होता। म्यूचुअल फंड लिक्विड हैं, लेकिन बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़े रहते हैं। PPF सरकार की गारंटी वाली सुरक्षा देता है, जबकि NPS पूरी तरह रिटायरमेंट को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

जसमीत सिंह की सलाह है कि कम से कम 6 महीने के खर्च ऐसी जगह रखें, जहां जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा मिल सके। इससे PPF, EPF या NPS जैसे लंबे समय के निवेश को बीच में तोड़ने की नौबत नहीं आएगी।

मिडिल क्लास को अमीर बनने से रोकती हैं 5 आदतें, कहीं आप भी तो नहीं करते ये गलतियां?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।