SIP Calculator: 40 साल तक जीरो सेविंग के बाद भी 60 तक बना सकते हैं 3 करोड़ का रिटायरमेंट फंड, ये है मंथली एसआईपी कैलकुलेशन

SIP Calculator: कई लोगों को सेविंग्स और इनवेस्टमेंट का ख्याल देर से आता है। फिर उन्हें लगता है कि इसके लिए समय उनके हाथ से निकल गया है। लेकिन, यह पूरा सच नहीं है। जल्द सेविंग्स और निवेश शुरू करने के कई फायदे हैं। लेकिन, देर से निवेश शुरू करने पर भी रिटायरमेंट के लिए अच्छा फंड बन सकता है।

40 की उम्र में भी रिटायरमेंट के लिए शुरू कर सकते हैं निवेश

अगर आपकी उम्र 40 हो गई है तो भी आप रिटायरमेंट फंड के लिए निवेश शुरू कर सकते हैं। लेकिन, आपको हर महीने ज्यादा इनवेस्ट करना होगा। अगर कोई व्यक्ति 40 साल की उम्र में रिटायरमेंट फंड के लिए निवेश शुरू करता है तो उसके पास इसके लिए 20 साल बचते हैं। यह समय ज्यादा नहीं है तो बहुत कम भी नहीं है।

रिटायरमेंट फंड के कैलकुलेशन में इनफ्लेशन को ध्यान में रखना होगा

आम तौर पर यह माना जाता है कि आपका रिटायरमेंट फंड आपके सालाना खर्च का 25 से 30 गुना होना चाहिए। मान लीजिए किसी व्यक्ति के परिवार का मंथली खर्च आज 30,000 रुपये है। अगर इनफ्लेशन 6 फीसदी मान लिया जाए तो यह 20 साल बाद 96,000 रुपये हो जाएगा। इसका 25 गुना करीब 2.9 करोड़ रुपये होगा।

मंथली 15000 रुपये सिप निवेश से 1.5 करोड़ का फंड बन सकता है

अगर आप हर महीने सिप से 15,000 रुपये इनवेस्ट करते हैं तो आप 20 साल में आप 36 लाख रुपये निवेश करेंगे। अगर आपके निवेश पर सालाना 10 फीसदी रिटर्न मिलता है तो 20 साल बाद आपका पैसा बढ़कर 1.15 करोड़ हो जाएगा। अगर सालाना रिटर्न 12 फीसदी मान लिया जाए तो यह पैसा करीब 1.5 करोड़ रुपये होगा। यह सिर्फ एक उदाहरण है। इक्विटी फंड में निवेश पर रिटर्न की गारंटी नहीं होती है।

3 करोड़ रुपये के फंड के लिए बढ़ाना होगा मंथली सिप अमाउंट 

अगर आप 2.9 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड चाहते हैं तो आपको हर महीने करीब 29,000 रुपये इनवेस्ट करना होगा। इस कैलकुलेशन में सालाना रिटर्न 12 फीसदी माना गया है। यह अमाउंट आपको ज्यादा लग सकता है। इसकी वजह यह है कि 40 साल के व्यक्ति पर परिवार सहित कई तरह की जिम्मेदारियां होती हैं। लेकिन, इसका एक दूसरा तरीका है।

हर साल सिप 10 फीसदी बढ़ाने से मिल सकती है काफी मदद  

अगर आप मंथली 15,000 रुपये के सिप को हर साल 10 फीसदी बढ़ाते हैं तो निवेश पर 12 फीसदी रिटर्न से आपके लिए करीब 3 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। आपको हर साल इनकम बढ़ने के साथ सिप का अमाउंट बढ़ाना होगा। आपको गैरजरूरी खर्चों में कटौती करनी होगी। जरूरत पड़ने पर आप रिटायरमेंट की उम्र 62 या 63 साल मान सकते हैं।

पीपीएफ में भी निवेश करने से रिटायरमें फंड बनाना होगा आसान

अगर आप नौकरी करते हैं तो ईपीएफ में रेगुलर कंट्रिब्यूशन से भी बड़ा फंड बनेगा। सबसे पहले आपको यह चेक कर लेना चाहिए कि इससे कितना बड़ा फंड बनेगा। दूसरा, आप पीपीएफ यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड में भी निवेश शुरू कर सकते हैं। पीपीएफ 15 साल में मैच्योर हो जाता है। दिसंबर तिमाही में पीपीएफ का इंटरेस्ट रेट 7.1 फीसदी है। सरकार हर तिमाही पीपीएफ सहित स्मॉल सेविंग्स स्कीम के इंटरेस्ट रेट की समीक्षा करती है।

NPS भी हालिया बदलाव के बाद सब्सक्राइबर्स के लिए काफी अट्रैक्टिव

NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम भी अब काफी अट्रैक्टिव हो गया है। हाल में पीएफआरडीए ने इसमें कई बदलाव किए हैं। अगर आपके एनपीएस में 12 लाख या इससे ज्यादा हैं तो आप 60 साल की उम्र में एकमुश्त 80 फीसदी पैसे निकाल सकते हैं। सिर्फ 20 फीसदी पैसे का इस्तेमाल एन्युटी के लिए होगा। दूसरा, सब्सक्राइबर्स 85 साल की उम्र तक इनवेस्टमेंट बनाए रख सकते हैं।

यह भी पढ़ें: 1 करोड़ रुपये हैं तो FD, म्यूचुअल फंड या इक्विटी में कहां लगाएं पैसा? उम्र के हिसाब से जानिए पूरा प्लान

हर महीने निवेश करने में इन बातों का रखना होगा खास ख्याल 

40 की उम्र में निवेश शुरू करने पर आपको ज्यादातर पैसा इंडेक्स या फ्लेक्सीकैप फंड जैसे डायवर्सिफायड इक्विटी फंड में लगाना होगा। आपको निवेश सिप के जरिए करना होगा। रिटायरमेंट नजदीक आने पर कई एक्सपर्ट्स पैसा इक्विटी फंड से निकालकर धीरे-धीरे हाइब्रिड या डेट फंड्स में लगाने की सलाह देते हैं। इससे अचानक बाजार में गिरावट आने पर आपके रिटायरमेंट फंड पर खराब असर नहीं पड़ेगा।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

SBI Safe Schemes: बिना कोई रिस्क के बैंक FD से ज्यादा रिटर्न! बच्चे, बूढ़े और जवान तीनों के लिए ये है SBI की 3 बेस्ट स्कीम्स

SBI Safe Savings Schemes: देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), अपने ग्राहकों को एफडी के अलावा ऐसी कई स्मॉल सेविंग्स और सरकारी बचत योजनाएं पेश करता है, जहां आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और रिटर्न भी सामान्य बैंक एफडी की तुलना में ज्यादा मिलता है।

अगर आप शेयर बाजार के जोखिम से दूर रहकर गारंटीड और टैक्स-फ्री या टैक्स-एफिशिएंट रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो एसबीआई के जरिए मिलने वाली ये 3 सरकारी योजनाएं बेहतरीन विकल्प हैं। आइए जानते हैं इन 3 सबसे सेफ स्कीम्स की ब्याज दरों, शर्तों और मिलने वाले फायदों के बारे में।

1. सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SBI SCSS): वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे बड़ा सहारा

अगर आपकी उम्र 60 साल या उससे अधिक है, तो साधारण एफडी कराने के बजाय एसबीआई के जरिए सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम(SCSS) में निवेश करना एक बेहतरीन विकल्प है।

एफडी से ज्यादा ब्याज: जहां एसबीआई सामान्य 5-वर्षीय एफडी पर वरिष्ठ नागरिकों को करीब 7.05% ब्याज दर देता है, वहीं SCSS में 8.20% की गारंटीड ब्याज दर मिलती है।

तिमाही आय: इसमें जमा राशि पर हर 3 महीने (अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी) में ब्याज का भुगतान सीधे आपके एसबीआई बचत खाते में कर दिया जाता है।

अधिकतम निवेश: इस योजना में अधिकतम ₹30 लाख तक जमा किए जा सकते हैं। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत इसमें किए गए निवेश पर ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट भी मिलती है।

2. सुकन्या समृद्धि योजना (SBI SSY): बेटियों के भविष्य के लिए 100% टैक्स-फ्री रिटर्न

अगर आपके घर में 10 वर्ष से कम उम्र की बेटी है, तो एसबीआई शाखा या YONO ऐप के जरिए खोला गया सुकन्या समृद्धि अकाउंट बैंक एफडी के मुकाबले कहीं बेहतर रिटर्न देता है।

धमाकेदार रिटर्न: वर्तमान में इस योजना पर सरकार 8.20% सालाना की दर से चक्रवृद्धि ब्याज दे रही है।

EEE टैक्स स्टेटस: यह योजना Exempt-Exempt-Exempt (EEE) श्रेणी में आती है। इसका मतलब है कि इसमें जमा राशि, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी की पूरी रकम 100% टैक्स-फ्री होती है।

निवेश की सीमा: एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम ₹250 से लेकर अधिकतम ₹1.5 लाख तक जमा किए जा सकते हैं।

3. पब्लिक प्रोविडेंट फंड (SBI PPF): बिना किसी रिस्क के लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन

लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स या रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड(PPF) देश की सबसे पसंदीदा और सुरक्षित योजनाओं में से एक है।

सरकारी गारंटी और स्थिर रिटर्न: इसमें मिलने वाला 7.10% सालाना ब्याज (जो कि सालाना आधार पर कंपाउंड होता है) सामान्य 5 से 10 साल की बैंक एफडी (6.05% – 6.45%) से काफी बेहतर है।

टैक्स फ्री मैच्योरिटी: सुकन्या योजना की तरह PPF भी पूरी तरह से EEE कैटेगरी में आता है, यानी इस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट पूरी तरह से इनकम टैक्स से मुक्त होता है।

फ्लेक्सिबिलिटी: इसे 15 साल की लॉक-इन अवधि के बाद 5-5 साल के ब्लॉक में जितनी बार चाहें आगे बढ़ाया जा सकता है। इसमें न्यूनतम ₹500 से निवेश शुरू किया जा सकता है।

बच्चे, बूढ़े और जवान तीनों के लिए ये है SBI की 3 सबसे सेफ स्कीम्स

बच्चे, बूढ़े और जवान तीनों के लिए ये है SBI की 3 सबसे सेफ स्कीम्स

एसबीआई में कैसे करें इन स्कीम्स में अप्लाई?

इन तीनों ही योजनाओं में निवेश करना बेहद आसान है:

ऑनलाइन माध्यम: अगर आप SBI के इंटरनेट बैंकिंग या YONO SBI ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो बिना ब्रांच गए ‘E-Services / Govt Schemes’ सेक्शन में जाकर PPF या सुकन्या खाता खोल सकते हैं।

ऑफलाइन माध्यम: आप अपनी नजदीकी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) शाखा में आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और आवश्यक न्यूनतम राशि के साथ जाकर तुरंत खाता खुलवा सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Kalyan Jewellers Share Price: कमजोर बाजार में उछला शेयर, ब्रोकरेज बुलिश, मिलेगा 60% का रिटर्न

Kalyan Jewellers India Share Price: ज्वेलरी मेकिंग कंपनी कल्याण ज्वैलर्स इंडिया (Kalyan Jewellers India) के शेयरों में 2 फीसदी से ज़्यादा की बढ़त हुई और यह मिडकैप सेगमेंट में सबसे ज़्यादा बढ़त वाली कंपनी बन गई। ऐसा UBS की ओर से इस ज्वैलरी रिटेलर के लिए सकारात्मक नजरिए को दोहराने के बाद हुआ। ब्रोकरेज ने कहा कि कंपनी को मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में पिछले साल के हाई बेस के बावजूद मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।

शुरुआती कारोबार में यह स्टॉक 2.5 फीसदी बढ़कर 578 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जिससे इस साल अब तक इसमें लगभग 19 फीसदी की बढ़त हो चुकी है। इसकी तुलना में, निफ्टी 50 में इस साल अब तक 13.3 फीसदी की गिरावट आई है। कल्याण ज्वैलर्स का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 59,600 करोड़ रुपये था। बाजार में कमज़ोरी के बावजूद यह बढ़त देखने को मिली। हालांकि इसमें बाद में मुनाफावसूली देखने को मिली।

स्टॉक पर क्या है UBS की राय

UBS ने कल्याण ज्वैलर्स के लिए ‘बाय’ (खरीदने) की रेटिंग बनाए रखी है और इसका टारगेट प्राइस 900 रुपये प्रति शेयर तय किया है। इस टारगेट का मतलब है कि स्टॉक की पिछली क्लोजिंग कीमत से इसमें लगभग 60 फीसदी की बढ़ोतरी की संभावना है।

कंपनी के मैनेजमेंट के साथ बातचीत के आधार पर, UBS ने कहा कि कल्याण ज्वैलर्स के लिए फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में ग्रोथ की संभावना मजबूत है, भले ही कंपनी को ऊंचे बेस (high base) का सामना करना पड़ रहा हो। ब्रोकरेज के अनुसार, सोने की बढ़ी हुई कीमतों का डिमांड और औसत टिकट साइज़ (खरीद मूल्य) पर असर अलग-अलग कस्टमर सेगमेंट में अलग-अलग होता है। इस बीच, कल्याण ज्वैलर्स अपने स्टोर और नेटवर्क का तेजी से विस्तार जारी रखने की योजना बना रही है।

UBS ने कंपनी की गोल्ड सेविंग्स स्कीम पर भी ज़ोर दिया, जो ‘सेम-स्टोर ग्रोथ’ (मौजूदा स्टोर से होने वाली बिक्री में बढ़ोतरी) के बारे में बेहतर जानकारी देती हैं। ब्रोकरेज ने कहा कि गोल्ड एक्सचेंज एक्टिविटी के ऊंचे बने रहने की उम्मीद है, जबकि कंपनी इससे मार्जिन पर पड़ने वाले असर को मैनेज करने की योजना बना रही है।

नेटवर्क का विस्तार ग्रोथ का मुख्य कारण है

ताज़ा कमेंटरी UBS के इस महीने की शुरुआत वाले इन्वेस्टमेंट थीसिस को और मजबूत करती है, जब ब्रोकरेज ने कल्याण ज्वैलर्स पर ‘buy’ रेटिंग और 900 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ कवरेज शुरू किया था।

UBS ने ज्वैलर के पैन-इंडिया रिटेलर के तौर पर उभरने और तेज़ी से विस्तार में मदद करने वाले इसके ‘कैपिटल-लाइट’ फ्रैंचाइज़ी-ओन्ड, कंपनी-ऑपरेटेड (FOCO) मॉडल को मुख्य वजह बताया था। ब्रोकरेज के अनुसार, कल्याण ज्वैलर्स टाइटन की तुलना में लगभग दोगुनी रफ़्तार से स्टोर जोड़ रही है।

UBS के अनुसार, कंपनी के रेवेन्यू में FY22 और FY26 के बीच लगभग 35 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज की गई। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि नेटवर्क विस्तार जारी रहने से अगले पांच वर्षों में रेवेन्यू और कमाई में सालाना लगभग 23 प्रतिशत की कंपाउंड ग्रोथ होगी।

UBS ने यह भी तर्क दिया था कि FY22 और FY26 के बीच स्टॉक में छह गुना बढ़ोतरी के बावजूद इसमें और री-रेटिंग की गुंजाइश है। कवरेज शुरू करते समय, ब्रोकरेज का अनुमान था कि कल्याण ज्वैलर्स FY28 की कमाई के लगभग 30 गुना पर ट्रेड कर रही थी, जो टाइटन की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत कम (डिस्काउंट) था।

बाजार पर मैक्रो का ट्रिपल अटैक!क्या बचेगा निफ्टी का 52-हफ्ते का निचला स्तर? जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या दे रहा संकेत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

इन 5 सरकारी योजनाओं में करें निवेश, पैसा सुरक्षित रहेगा और ब्याज भी मिलेगा; समझिए पूरा कैलकुलेशन

Small Savings Schemes: पैसा निवेश करने के लिए हर किसी को शेयर बाजार का जोखिम पसंद नहीं होता। खासकर जब बात बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट या भविष्य के लिए जमा की गई रकम की हो।

ऐसे निवेशकों के लिए सरकार की कई स्मॉल सेविंग स्कीमें हैं। इनमें पैसा तय नियमों के तहत लगाया जाता है और ब्याज दर सरकार तय करती है। PPF, NSC, सुकन्या समृद्धि योजना और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम जैसी योजनाएं इसी कैटेगरी में आती हैं।

1. PPF

PPF यानी Public Provident Fund लंबे समय के निवेश के लिए है। इसका मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है। इसमें हर महीने ₹5,000 जमा करते हैं तो साल में ₹60,000 निवेश होगा। 15 साल में आपकी कुल जमा रकम ₹9 लाख होगी।

मौजूदा 7.1% ब्याज दर को मानें तो 15 साल बाद यह रकम मोटे तौर पर ₹16 लाख के आसपास हो सकती है। यानी करीब ₹7 लाख ब्याज से जुड़ सकते हैं। असल रकम जमा करने की तारीख और उस समय लागू ब्याज दर पर निर्भर करेगी। PPF की ब्याज दर सरकार समय-समय पर तय करती है।

2. सुकन्या समृद्धि योजना

अगर बेटी के भविष्य के लिए पैसा जमा करना है तो सुकन्या समृद्धि योजना एक विकल्प है। मौजूदा ब्याज दर 8.2% है। इसमें हर महीने ₹3,000 जमा करने पर सालाना ₹36,000 निवेश होगा। 15 साल में कुल जमा रकम ₹5.40 लाख होगी।

अगर मौजूदा ब्याज दर के आसपास रिटर्न बना रहता है, तो 21 साल की मैच्योरिटी अवधि में यह रकम करीब ₹17 लाख तक पहुंच सकती है। यहां ध्यान रखें कि सुकन्या की ब्याज दर भी समय-समय पर बदल सकती है। इसलिए इसे एक अनुमान के तौर पर देखें।

3. सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम

60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए SCSS यानी Senior Citizens Savings Scheme है। रिटायरमेंट के बाद नियमित ब्याज आय चाहने वालों के लिए यह विकल्प देखा जा सकता है।

मौजूदा ब्याज दर 8.2% है। ऐसे में अगर कोई ₹10 लाख जमा करता है तो सालाना ब्याज करीब ₹82,000 बैठेगा। ब्याज तिमाही आधार पर मिलता है, यानी करीब ₹20,500 हर तिमाही। 5 साल में कुल ब्याज करीब ₹4.10 लाख बनता है, अगर पूरी अवधि में यही दर बनी रहे।

4. नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट

NSC यानी National Savings Certificate उन लोगों के लिए है जो एक तय अवधि के लिए पैसा लगाकर ब्याज कमाना चाहते हैं। मौजूदा ब्याज दर 7.7% है और इसकी अवधि 5 साल है।

अगर आप ₹5 लाख NSC में लगाते हैं तो 5 साल बाद रकम करीब ₹7.23 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹2.23 लाख ब्याज से जुड़ेंगे। NSC का ब्याज सालाना कंपाउंड होता है।

5. किसान विकास पत्र

KVP यानी Kisan Vikas Patra में निवेश रकम तय अवधि में दोगुनी होती है। मौजूदा ब्याज दर 7.5% है और इस दर पर रकम 115 महीने यानी करीब 9 साल 7 महीने में दोगुनी होती है।

इस हिसाब से अगर आप ₹3 लाख KVP में लगाते हैं तो मैच्योरिटी पर रकम करीब ₹6 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹3 लाख का ब्याज मिलेगा। KVP में मैच्योरिटी अवधि उस समय लागू दर के आधार पर तय होती है।

किसके लिए कौन सी स्कीम?

अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का है तो PPF पर विचार किया जा सकता है। बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना देख सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद नियमित ब्याज आय चाहिए तो SCSS पर नजर डाल सकते हैं।

वहीं तय अवधि के लिए रकम लगानी है तो NSC या KVP जैसे विकल्प आजमाए जा सकते हैं। इन योजनाओं में बाजार के रोजाना उतार-चढ़ाव का असर सीधे आपके निवेश पर नहीं पड़ता।

Retirement Planning: ₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड कितने साल चलेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

नोट: इन सभी छोटी बचत योजनाओं की मौजूदा दरें जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के लिए लागू हैं।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद इन 5 स्कीमों में लगाएं पैसा, सुरक्षित निवेश के साथ नियमित आमदनी मिलेगी

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अब हर महीने घर का खर्च कैसे चलेगा? नौकरी में सैलरी आती थी, लेकिन रिटायरमेंट के बाद वही पैसा नहीं आता। ऐसे में जमा रकम को सिर्फ बैंक खाते में रखना समझदारी नहीं है। सही स्कीम में पैसा लगाकर इससे नियमित आमदनी भी बनाई जा सकती है और पूंजी को काफी हद तक सुरक्षित भी रखा जा सकता है।

1. Senior Citizens Savings Scheme (SCSS)

रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित निवेश के लिए सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम यानी SCSS काफी अच्छा विकल्प है। इसमें एकमुश्त रकम लगाई जाती है। ब्याज हर तिमाही मिलता है। मौजूदा ब्याज दर 8.2% सालाना है।

मान लीजिए आपने SCSS में ₹30 लाख लगाए। 8.2% की दर से सालाना ब्याज करीब ₹2.46 लाख होगा। यानी हर तिमाही करीब ₹61,500 की ब्याज आय बन सकती है। इससे नियमित घरेलू खर्च संभालने में मदद मिल सकती है।

2. Post Office Monthly Income Scheme

अगर रिटायरमेंट के बाद हर महीने पैसे की जरूरत है, तो पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम यानी MIS पर गौर कर सकते हैं। इसमें एकमुश्त रकम जमा की जाती है। ब्याज हर महीने मिलता है। मौजूदा ब्याज दर 7.4% सालाना है।

अगर आप पोस्ट ऑफिस MIS में ₹10 लाख निवेश करते हैं और 7.4% की ब्याज दर रहती है, तो सालाना ₹74,000 ब्याज मिलेगा। यानी हर महीने करीब ₹6,167 की नियमित आय बन सकती है।

3. Bank FD

Bank FD रिटायरमेंट के बाद निवेश का सबसे आसान विकल्प है। इसमें रिटर्न पहले से तय होता है। जरूरत के हिसाब से अलग-अलग अवधि की FD भी बनाई जा सकती है।

मान लीजिए किसी बैंक की FD पर 7% ब्याज मिल रहा है। अगर आप ₹10 लाख जमा करते हैं, तो एक साल में करीब ₹70,000 ब्याज मिलेगा। बैंक के विकल्प के आधार पर ब्याज मासिक, तिमाही या मैच्योरिटी पर लिया जा सकता है।

पूरी रकम एक ही FD में रखने के बजाय अलग-अलग अवधि की FD बनाना उपयोगी हो सकता है। इससे जरूरत पड़ने पर पूरी रकम तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

4. RBI Floating Rate Savings Bonds

सरकारी गारंटी वाले निवेश विकल्प तलाश रहे लोगों के लिए RBI Floating Rate Savings Bonds भी एक विकल्प है। इसमें ब्याज दर स्थिर नहीं रहती। यह समय के साथ बदल सकती है।

यह विकल्प उन लोगों के लिए ज्यादा बेहतर हो सकता है जिन्हें तुरंत पैसे की जरूरत नहीं है। निवेश से पहले इसकी अवधि और निकासी से जुड़े नियम जरूर समझने चाहिए।

5. Annuity Plan

रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन जैसी आय चाहिए, तो Annuity Plan पर भी विचार किया जा सकता है। इसमें एकमुश्त रकम लगाई जाती है। इसके बदले नियमित अंतराल पर रकम मिलती है। पेंशन की तरह।

मान लीजिए आपके पास रिटायरमेंट के बाद ₹20 लाख हैं। आप इसका कुछ हिस्सा एन्युटी में लगा सकते हैं। इसके बाद मिलने वाली नियमित रकम आपके दूसरे आय स्रोतों के साथ मिलकर खर्च संभालने में मदद कर सकती है। हालांकि, एन्युटी की शर्तें प्लान के हिसाब से अलग होती हैं।

₹30 लाख का फंड हो तो कैसे करें निवेश?

मान लीजिए रिटायरमेंट के बाद आपके पास ₹30 लाख हैं। पूरी रकम एक ही स्कीम में लगाने के बजाय इसे अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से बांटा जा सकता है।

निवेश विकल्परकम
उदाहरण के तौर पर सालाना ब्याज/आय

SCSS₹15 लाख₹1,23,000
Post Office MIS₹5 लाख₹37,000
Bank FD₹5 लाख₹35,000*
नकदी₹5 लाखजरूरत के अनुसार

*FD में 7% ब्याज की उदाहरण दर मानकर।

इस उदाहरण में SCSS से करीब ₹30,750 प्रति तिमाही और MIS से करीब ₹3,083 प्रति महीने की आय बन सकती है। FD से सालाना करीब ₹35,000 ब्याज मिल सकता है। इसके अलावा ₹5 लाख अलग रखने से अचानक आने वाले बड़े खर्च के लिए पैसा उपलब्ध रहेगा।

रिटायरमेंट में सिर्फ ज्यादा ब्याज देखना सही नहीं

रिटायरमेंट के बाद निवेश का लक्ष्य केवल ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं होना चाहिए। पैसा कितना सुरक्षित है, नियमित आय कितनी मिलेगी और जरूरत पड़ने पर रकम कितनी आसानी से निकाली जा सकती है, यह भी देखना जरूरी है।

इसलिए रिटायरमेंट फंड को अलग-अलग विकल्पों में बांटना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। एक हिस्सा नियमित आय के लिए, एक हिस्सा सुरक्षित निवेश के लिए और कुछ रकम आपात जरूरतों के लिए रखी जा सकती है। साथ ही ब्याज से होने वाली आय पर टैक्स का असर भी जरूर देखना चाहिए।

SIP Returns: 2 साल से आपकी SIP का रिटर्न भी दिखा रहा जीरो? इसे आगे कंटीन्यू रखने वालों को कितना फायदा हुआ वो कैलकुलेशन देख लीजिए

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Tax-Saving Mutual Fund: टैक्स बचाने वाला इकलौता म्यूचुअल फंड प्लान, तो सबसे कम लॉक-इन वाला ऑप्शन भी

Tax-Saving Mutual Fund: इक्विटी मार्केट में निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल किया जा सकता है और जो निवेशक कंजर्वेटिव हैं, वे म्यूचु्अल फंड्स के जरिए अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी मार्केट का एक्सपोजर रखते हैं। हालांकि इसमें एक खामी ये है कि इसमें जो पैसे लगाते हैं, उस पर कोई टैक्स डिडक्शन नहीं मिलता है, सिवाय एक विकल्प में। यहां उसी एक म्यूचुअल फंड ऑप्शन यानी ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) के बारे में बताया जा रहा है, जिसमें निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं और ऐसा भी नहीं है कि टैक्स बेनेफिट्स मिल रहा है, तो रिटर्न म्यूचुअल फंड्स के बाकी विकल्पों की तुलना में फीका रहेगा, बल्कि महंगाई को बीट करते हुए तगड़ा रिटर्न भी हासिल किया जा सकता है। इसके अलावा एक और खास बात ये है कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत पुरानी टैक्स रिजीम में जितने भी तरीके हैं टैक्स बचाने के, उसमें सबसे कम लॉक-इन भी इसी का है।

ELSS में निवेश के क्या हैं टैक्स बेनेफिट्स

ईएलएसएस म्यूचुअल फंड्स में निवेश पर पुरानी टैक्स रिजीम में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत एक वित्त वर्ष में ₹1.50 लाख तक के निवेश पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

एक साल से अधिक होल्डिंग को रिडीम करने पर यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) में से ₹1 लाख से अधिक जितना मुनाफा है, उस पर 10% की दर से तो एक साल से कम वाली होल्डिंग को रिडीम करने पर यानी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर 20% की दर से टैक्स देना होगा।

ईएलएसएस की यूनिट्स के रिडेम्प्शन पर कोई TDS (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) नहीं है।

टैक्स बेनेफिट्स के अलावा और क्या है खासियतें

ईएलएसएस इकलौता ऐसा म्यूचुअल फंड प्लान हैं, जिसमें टैक्स बेनेफिट्स मिलता है।

एक और खास बात ये है कि सेक्शन 80सी के तहत जिन-जिन विकल्पों में जितने भी निवेश प्लान हैं, उनमें सबसे कम लॉक-इन पीरियड इसी का है जैसे कि पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन है तो टैक्स-सेविंग्स एफडी का लॉक-इन पांच साल है लेकिन ईएलएसएस के मामले में तीन ही साल है।

ईएलएसएस में लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद यूनिट्स बेचने पर कोई एग्जिट लोड नहीं लगेगा।

इसमें चाहें तो एकमुश्त निवेश कर सकते हैं या एसआईपी (SIP) यानी एक नियमित समय अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा करके भी लंबे समय में अच्छा फंड तैयार कर सकते हैं।

कैसा है रिटर्न के मामले में

ईएलएसएस में रिटर्न भी तगड़ा मिलता है। सिर्फ तीन साल के ही आंकड़ों को लेकर बात करें तो मोतीलाल ओसवाल ईएलएसएस टैक्स फंड डायरेक्ट ग्रोथ में सालाना 23.84%, आईटीआई ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 19.45%, व्हाइटओक कैपिटल ईएलएसएस टैक्स फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.63%, एचएसबीसी ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.34% और जेएम ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.27% की रफ्तार से बढ़ा है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SCSS vs Post Office MIS: रिटायरमेंट के बाद कौन-सी स्कीम से होगी ज्यादा रेगुलर इनकम? समझिए पाई-पाई का कैलकुलेशन!

Senior Citizens Savings Scheme vs Post Office MIS: रिटायरमेंट के बाद हर किसी की सबसे बड़ी प्राथमिकता एक सुरक्षित और तय रेगुलर इनकम की होती है। ऐसे में डाकघर की दो सबसे लोकप्रिय सरकारी योजनाएं सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम (SCSS) और पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) निवेशकों की पहली पसंद बनती हैं।

दोनों ही स्कीम्स पूरी तरह से सरकारी गारंटी के साथ सुरक्षित हैं, लेकिन दोनों की ब्याज दरें, निवेश की सीमा, भुगतान का तरीका और टैक्स नियम काफी अलग हैं। आइए जानते हैं कि आपके रिटायरमेंट के लिए कौन-सी स्कीम ज्यादा बेहतर रहेगी।

कौन कर सकता है निवेश?

SCSS: यह स्कीम मुख्य रूप से 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए है। हालांकि, VRS लेने वाले या सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी कुछ शर्तों के साथ 60 साल से पहले भी खाता खुलवा सकते हैं।

Post Office MIS: इस योजना में उम्र की कोई पाबंदी नहीं है। सीनियर सिटीजन के अलावा 18 साल से अधिक का कोई भी भारतीय नागरिक इसमें खाता खुलवा सकता है।

ब्याज दरें और पे-आउट का तरीका

SCSS: जुलाई से सितंबर 2026 तिमाही के लिए SCSS में 8.2% सालाना का ब्याज मिल रहा है। इस योजना में ब्याज का भुगतान हर तीन महीने अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी के पहले कार्यदिवस पर होता है।

Post Office MIS: POMIS में 7.4% सालाना का ब्याज दिया जा रहा है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें ब्याज का भुगतान हर महीने सीधे आपके बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते में होता है, जो घरेलू खर्च चलाने के लिए बेहद सुविधाजनक है।

अधिकतम कितना कर सकते हैं निवेश?

SCSS: इसमें एक व्यक्ति अधिकतम ₹30 लाख तक निवेश कर सकता है।

Post Office MIS: सिंगल अकाउंट में अधिकतम ₹9 लाख और जॉइंट अकाउंट में अधिकतम ₹15 लाख तक जमा किए जा सकते हैं।

कैलकुलेशन: किसमें कितना मिलेगा रिटर्न?

आइए गणित के जरिए समझते हैं कि अधिकतम निवेश पर आपको किस स्कीम से कितनी कमाई होगी:

केस 1: SCSS (₹30 लाख का निवेश @ 8.2%)

  • कुल निवेश: ₹30,000,000
  • सालाना ब्याज: ₹2,46,000
  • हर 3 महीने की कमाई: ₹61,500
  • मंथली एवरेज: लगभग ₹20,500 प्रति माह

केस 2: Post Office MIS – जॉइंट अकाउंट (₹15 लाख का निवेश @ 7.4%)

  • कुल निवेश: ₹1,500,000
  • सालाना ब्याज: ₹1,11,000
  • हर महीने की कमाई: ₹9,250

केस 3: Post Office MIS – सिंगल अकाउंट (₹9 लाख का निवेश @ 7.4%)

  • कुल निवेश: ₹9,000,000
  • सालाना ब्याज: ₹66,600
  • हर महीने की कमाई: ₹5,550

लॉक-इन पीरियड और टैक्स के नियम

दोनों ही योजनाओं का मैच्योरिटी पीरियड 5 साल का होता है। हालांकि, कुछ कटौतियों और शर्तों के साथ समय से पहले निकासी की जा सकती है। दोनों ही स्कीम्स से मिलने वाला ब्याज निवेशक की टैक्स स्लैब के अनुसार पूरी तरह से टैक्सेबल होता है। तय सीमा से अधिक ब्याज होने पर बैंक/डाकघर द्वारा TDS भी काटा जा सकता है। (SCSS में सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट का लाभ शुरुआती निवेश पर मिलता है)।

आपके लिए कौन-सी स्कीम है बेस्ट?

SCSS चुनें: अगर आपके पास रिटायरमेंट कॉर्पस बड़ा है, आपकी उम्र 60 साल से ऊपर है और आप ज्यादा रिटर्न (8.2%) के साथ हर 3 महीने में एक बड़ी रकम पाना चाहते हैं।

Post Office MIS चुनें: अगर आपको हर महीने रसोई और घर के रेगुलर खर्चों के लिए तय मंथली इनकम की जरूरत है।

स्मार्ट स्ट्रेटेजी: एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रिटायरमेंट के बाद दोनों का कॉम्बिनेशन सबसे बेस्ट होता है। आप अपने फंड का बड़ा हिस्सा SCSS में डालकर ज्यादा रिटर्न हासिल कर सकते हैं और एक हिस्सा MIS में लगाकर हर महीने का कैश-फ्लो मेंटेन रख सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Retirement Planning: हर महीने चाहिए ₹25,000 की पेंशन? जानें कितना बड़ा होना चाहिए रिटायरमेंट फंड

Retirement Planning Corpus Calculator: रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम बनी रहे, यह हर नौकरीपेशा व्यक्ति की सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। अगर आप भी अपने रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹25,000 यानी सालाना ₹3 लाख की पेंशन पाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको कितना बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाना होगा, आइए समझते हैं इसका आसान गणित।

वित्तीय सलाहकारों के मुताबिक, रिटायरमेंट फंड की गणना करते समय आपकी मौजूदा उम्र, रिटायरमेंट की उम्र, अनुमानित लाइफ एक्सपेक्टेंसी और महंगाई दर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

4% रूल (Rule of 25) से समझिए फंड का गणित

फाइनेंशियल प्लानिंग में 4% रूल का काफी इस्तेमाल किया जाता है। इस नियम के अनुसार, रिटायरमेंट के समय आपके पास जितना फंड होता है, उसका 4% आप पहले साल निकालते हैं और आगे महंगाई के हिसाब से इसे एडजस्ट करते हैं।

सालाना पेंशन की जरूरत: ₹25,000 × 12 महीने = ₹3,00,000

4% रूल के हिसाब से जरूरी कॉर्पस: ₹3,00,000 ÷ 4% (यानी सालाना पेंशन का 25 गुना) = ₹75 लाख

अगर आप आज ही रिटायर हो रहे हैं और बिना महंगाई दर के प्रभाव के सुरक्षित निवेश (जैसे- SWP, SCSS या एन्युटी) से रिटर्न चाहते हैं, तो आपको कम से कम ₹75 लाख से ₹80 लाख का रिटायरमेंट कॉर्पस चाहिए होगा।

महंगाई को जोड़ेंगे तो कितना होगा फंड?

अगर आपकी उम्र अभी 30 साल है और आप 60 साल की उम्र में रिटायर होना चाहते हैं यानी रिटायरमेंट में 30 साल बाकी हैं, तो 6% की औसत महंगाई दर के हिसाब से आज के ₹25,000 की वैल्यू 30 साल बाद काफी बदल जाएगी:

30 साल बाद ₹25,000 की वैल्यू: लगभग ₹1,43,000 प्रति महीने हो जाएगी।

महंगाई एडजस्टेड रिटायरमेंट फंड: 30 साल बाद ₹1.43 लाख प्रति महीने की पेंशन पाने के लिए आपको लगभग ₹3.5 करोड़ से ₹4 करोड़ का फंड तैयार करना होगा।

₹25,000 पेंशन के लिए हर महीने कितनी SIP करनी होगी?

अगर आप 60 साल की उम्र में ₹75 लाख से ₹1 करोड़ का फंड बनाना चाहते हैं, तो आपको अपनी मौजूदा उम्र के हिसाब से म्यूचुअल फंड SIP में निवेश शुरू करना होगा (12% औसत सालाना रिटर्न के अनुमान पर):

अगर आपकी उम्र 25 साल है (35 साल बाकी): आपको हर महीने केवल ₹1,200 से ₹1,500 की SIP से शुरुआत करनी होगी।

अगर आपकी उम्र 35 साल है (25 साल बाकी): आपको हर महीने लगभग ₹4,500 से ₹5,000 की SIP करनी होगी।

अगर आपकी उम्र 45 साल है (15 साल बाकी): आपको हर महीने लगभग ₹16,000 से ₹18,000 की SIP करनी होगी।

रिटायरमेंट के बाद ₹25,000 पेंशन पाने के विकल्प

सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP): म्यूचुअल फंड के बैलेंस/हाइब्रिड फंड में अपनी एकमुश्त राशि जमा करके आप हर महीने निश्चित ₹25,000 निकाल सकते हैं, जबकि बचा हुआ पैसा फंड में ग्रो करता रहता है।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): एनपीएस मैच्योरिटी पर 40% राशि से एन्युटी प्लान खरीदकर आप आजीवन हर महीने निश्चित पेंशन हासिल कर सकते हैं।

सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS): 60 साल की उम्र के बाद सरकार की इस स्कीम में एकमुश्त निवेश कर सुरक्षित तिमाही ब्याज के रूप में पेंशन पा सकते हैं।

कुल मिलाकर रिटायरमेंट प्लानिंग में देरी करना सबसे महंगा पड़ता है। आप जितनी कम उम्र में निवेश शुरू करेंगे, कम्पाउंडिंग के जादू से उतना ही कम मासिक निवेश करके बड़ा रिटायरमेंट फंड आसानी से बना पाएंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Retirement Planning: क्या सिर्फ पोस्ट ऑफिस स्कीम के भरोसे आपका रिटायरमेंट सुरक्षित होगा? 8.2% रिटर्न देने वाली योजना की लिमिटेशन भी जानिए

Retirement Planning:  जीवन के पड़ाव में रिटायरमेंट एक ऐसा समय होता है जब पहली बार नियमित वेतन आना बंद हो जाता है। इसके बाद सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि वर्षों की अपनी जमा-पूंजी और बचत को अगले 20 या 30 सालों तक सुरक्षित और प्रभावी ढंग से कैसे चलाया जाए। ऐसी स्थिति में अगर पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाएं सेवानिवृत्त लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं है। पोस्ट ऑफिस की योजनाएं पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा समर्थित हैं और इनमें निवेश करने के बाद निवेशकों को रोजाना शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर नजर रखने की जरूरत नहीं पड़ती है।

हालांकि, रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब सिर्फ पैसों को सुरक्षित जगह पर रखना भर नहीं होता है। बावजूद इसके कि सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले निवेशकों के लिए पोस्ट ऑफिस योजनाएं एक महत्वपूर्ण विकल्प बनी हुई हैं, लेकिन वे तब सबसे अच्छा काम करती हैं जब वे एक बड़ी और व्यापक फाइनेंशियल प्लानिंग की जाए। अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा वहां लगाने से पहले, यह समझना भी बेहद जरूरी है कि आप अपनी बचत का कैसा इस्तेमाल चाहते हैं।

क्या सिर्फ सुरक्षित होना काफी है?

अधिकांश सेवानिवृत्त लोग असाधारण रिटर्न पाने के पीछे नहीं भागते हैं। वे आमतौर पर यह भरोसा चाहते हैं कि जब भी उन्हें जरूरत हो उनकी बचत सुरक्षित और उपलब्ध रहे। इस मामले में पोस्ट ऑफिस की योजनाएं बेहतरीन साबित होती हैं। सरकार समर्थित होने की वजह से इनमें एक तय अवधि के लिए मिलने वाला रिटर्न पहले से पता होता है। जो लोग बाजार के जोखिमों से डरते हैं, उनके लिए यह निश्चितता काफी राहत देने वाली होती है। लेकिन रिटायरमेंट सिर्फ पैसे की रक्षा करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के बारे में भी है कि आपका पैसा समय के साथ आपके लिए काम करता रहे।

विभिन्न जरूरतें और पोस्ट ऑफिस की प्रमुख योजनाएं

हर पोस्ट ऑफिस निवेश योजना एक ही उद्देश्य को पूरा नहीं करती है। कुछ स्कीम नियमित इनकम देने के लिए बनाई गई हैं, जबकि अन्य लंबी अवधि की बचत के लिए बेहतर हैं।

सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम: 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए यह एक सुरक्षित 5-वर्षीय सरकारी जमा योजना है। इस पर वर्तमान में 8.2 प्रतिशत प्रति वर्ष की उच्च ब्याज दर के साथ तिमाही भुगतान मिलता है। इस खाते में न्यूनतम 1000 रुपये के मल्टिपल में ही जमा किया जा सकता है और अधिकतम निवेश की सीमा 30 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकती।

पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS): यह भी 5 साल की एक निवेश योजना है जिसमें एकल (Single) या संयुक्त (Joint) खाता खोला जा सकता है। यह 7.4 प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज दर पर गारंटीकृत मासिक आय प्रदान करती है।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): इंडिया पोस्ट आम जनता के लिए कोई एक्सक्लूसिव रिटायरमेंट पेंशन तो खुद नहीं देता, लेकिन यह एनपीएस जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं के लिए ऑथराइज डिस्ट्रिब्यूटर के रूप में काम करता है। 18 से 70 वर्ष की आयु के नागरिकों के लिए यह एक स्वैच्छिक, बाजार से जुड़ी योजना है। इसमें काम करने के दौरान नियमित योगदान दिया जाता है और 60 वर्ष की आयु पर जमा राशि का एक हिस्सा कर-मुक्त निकाला जा सकता है, जबकि शेष राशि से मासिक एन्युटी (खरीदी जाती है।

अटल पेंशन योजना (APY): 18 से 40 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को टारगेटेट यह एक गारंटीकृत पेंशन योजना है। इसमें अंशदान के स्तर के आधार पर 60 वर्ष की आयु से 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की निश्चित मासिक पेंशन मिलती है।

बेहतर विकल्प का चुनाव केवल ब्याज दर पर निर्भर नहीं करता बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने मासिक खर्चों को कैसे पूरा करने की योजना बनाते हैं।

पूरा फंड एक जगह न लॉक करें: लिक्विडिटी का रखें ध्यान

सुरक्षित महसूस होने वाले प्रॉडक्ट्स में अपनी पूरी रिटायरमेंट पूंजी निवेश कर देना लुभावना लग सकता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद जिंदगी में योजना के मुताबिक सब कुछ चलना मुश्किल होता है। कोई मेडिकल इमरजेंसी, घर की मरम्मत या परिवार के किसी सदस्य की अचानक आर्थिक मदद करने जैसी स्थितियों में तुरंत कैश (नकद) की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में अगर आपका एक-एक रुपया तय अवधि वाले फिक्स्ड-टेन्योर निवेशों में बंधा होगा, तो कम समय में पैसे का इंतजाम करना काफी कठिन हो सकता है।

महंगाई दर पर ध्यान देना है बेहद जरूरी

सेवानिवृत्ति के बाद आपके खर्चे साल-दर-साल एक समान नहीं रहते हैं। स्वास्थ्य सेवा का खर्च, बिजली के बिल और दैनिक घरेलू सामान समय के साथ महंगे होते जाते हैं। अगर आपकी पूरी रिटायरमेंट पूंजी दशकों तक केवल फिक्स्ड रिटर्न ही कमाती है, तो समय के साथ आपकी पर्चेजिंग पावर धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। यही वजह है कि कई रिटायर्ड लोग अपनी बचत का कम से कम एक हिस्सा ऐसे निवेशों में रखते हैं जो जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर लंबी अवधि में महंगाई को मात देने वाला बेहतर ग्रोथ दे सकें।

आपकी रिटायरमेंट आय का स्रोत तय करेगा सही रणनीति

जिस व्यक्ति को पर्याप्त पेंशन मिल रही है, उसका निवेश का तरीका उस व्यक्ति से अलग हो सकता है जो पूरी तरह से अपनी बचत पर ही निर्भर है। अगर आपकी पेंशन, किराया या अन्य निवेश पहले से ही अधिकतर मासिक खर्चों को कवर कर रहे हैं तो पोस्ट ऑफिस की योजनाएं आपके पोर्टफोलियो का सिर्फ एक हिस्सा बन सकती हैं। लेकिन अगर आपकी जमा पूंजी ही आपकी आय का प्राथमिक जरिया है तो सही प्रॉडक्ट्स का मिश्रण चुनना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

सिर्फ ब्याज दरों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय, यह अनुमान लगाकर शुरुआत करें कि आपको वास्तव में हर महीने कितने पैसे की आवश्यकता होगी। पोस्ट ऑफिस बचत योजनाएं भारत में सबसे भरोसेमंद रिटायरमेंट निवेशों में से एक हैं और जीवन के उस मोड़ पर स्थिरता प्रदान करती हैं जब वित्तीय निश्चितता का मूल्य सबसे अधिक होता है। फिर भी उन्हें आपके पूरे रिटायरमेंट कॉर्पस का एकमात्र ठिकाना नहीं बनना चाहिए। एक अच्छी तरह से नियोजित रिटायरमेंट में आमतौर पर भरोसेमंद आय, आसानी से उपलब्ध बचत (लिक्विडिटी) और बढ़ते खर्चों के साथ तालमेल बिठाने वाले निवेश का सही संतुलन शामिल होता है।

SIP vs Lumpsum: ₹2000 की SIP या ₹2 लाख का लंपसम? आपके बच्चे के लिए कौन-सा निवेश बेस्ट रहेगा, पूरा कैलकुलेशन समझिए

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।