सरकार को शेयर बाजार की परवाह नहीं

एक समय था, जब भाजपा की सरकार शेयर बाजार को भारत की अर्थव्यवस्था का आईना बताती थी। दावा किया जाता था कि दुनिया भर में शेयर बाजार कमजोर हो रहे हैं पर भारत में बाजार के तेजी बनी हुई है। नोटबंदी से लेकर जीएसटी और कोराना महामारी के बाद भी शेयर बाजार में तेजी बनी रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सितंबर 2024 में 85 हजार से ऊपर चला गया था और दावा किया जा रहा था कि यह दो साल में एक लाख की सीमा पार कर जाएगा। इस प्रचार के कारण करोड़ों लोगों ने सीधे शेयर बाजार में निवेश शुरू किया। करोड़ों लोगों ने म्युचुअल फंड और एसआईपी के जरिए निवेश शुरू किया।

इसकी वजह से आज स्थिति यह है कि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार मूल्य अगर चार सौ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है तो उसमें बड़ी हिस्सेदारी यानी बड़ा निवेश आम मध्य वर्गीय लोगों और निम्न मध्यवर्ग के लोगों का है। लेकिन अब सरकार ने शेयर बाजार की परवाह छोड़ दी है। दो साल में शेयर बाजार 85 हजार से गिर कर 72 हजार पर आ गया है। पिछले एक साल में निवेशकों के 17 लाख करोड़ रुपए शेयर बाजार में डूबे हैं। विदेशी निवेशकों ने एक साल में ढाई लाख करोड़ रुपए निकाले हैं। भारत में महंगाई और ब्याज दर बढ़ने के डर से तो ईरान व अमेरिका युद्ध के खतरे के कारण या भारत में शेयर बाजार में होने मैनिपुलेशन के जरिए कीमत बढ़ाने के कारण विदेशी निवेशक पैसे निकाल रहे हैं और बाजार गिर रहा है। लेकिन इतने बड़ा घटनाक्रम पर सरकार की ओर से किसी ने एक लाइन का बयान नहीं दिया है। लगातार आठ हफ्ते से बाजार गिर रहा है।

Tax-Saving Mutual Fund: टैक्स बचाने वाला इकलौता म्यूचुअल फंड प्लान, तो सबसे कम लॉक-इन वाला ऑप्शन भी

Tax-Saving Mutual Fund: इक्विटी मार्केट में निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल किया जा सकता है और जो निवेशक कंजर्वेटिव हैं, वे म्यूचु्अल फंड्स के जरिए अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी मार्केट का एक्सपोजर रखते हैं। हालांकि इसमें एक खामी ये है कि इसमें जो पैसे लगाते हैं, उस पर कोई टैक्स डिडक्शन नहीं मिलता है, सिवाय एक विकल्प में। यहां उसी एक म्यूचुअल फंड ऑप्शन यानी ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) के बारे में बताया जा रहा है, जिसमें निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं और ऐसा भी नहीं है कि टैक्स बेनेफिट्स मिल रहा है, तो रिटर्न म्यूचुअल फंड्स के बाकी विकल्पों की तुलना में फीका रहेगा, बल्कि महंगाई को बीट करते हुए तगड़ा रिटर्न भी हासिल किया जा सकता है। इसके अलावा एक और खास बात ये है कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत पुरानी टैक्स रिजीम में जितने भी तरीके हैं टैक्स बचाने के, उसमें सबसे कम लॉक-इन भी इसी का है।

ELSS में निवेश के क्या हैं टैक्स बेनेफिट्स

ईएलएसएस म्यूचुअल फंड्स में निवेश पर पुरानी टैक्स रिजीम में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत एक वित्त वर्ष में ₹1.50 लाख तक के निवेश पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

एक साल से अधिक होल्डिंग को रिडीम करने पर यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) में से ₹1 लाख से अधिक जितना मुनाफा है, उस पर 10% की दर से तो एक साल से कम वाली होल्डिंग को रिडीम करने पर यानी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर 20% की दर से टैक्स देना होगा।

ईएलएसएस की यूनिट्स के रिडेम्प्शन पर कोई TDS (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) नहीं है।

टैक्स बेनेफिट्स के अलावा और क्या है खासियतें

ईएलएसएस इकलौता ऐसा म्यूचुअल फंड प्लान हैं, जिसमें टैक्स बेनेफिट्स मिलता है।

एक और खास बात ये है कि सेक्शन 80सी के तहत जिन-जिन विकल्पों में जितने भी निवेश प्लान हैं, उनमें सबसे कम लॉक-इन पीरियड इसी का है जैसे कि पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन है तो टैक्स-सेविंग्स एफडी का लॉक-इन पांच साल है लेकिन ईएलएसएस के मामले में तीन ही साल है।

ईएलएसएस में लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद यूनिट्स बेचने पर कोई एग्जिट लोड नहीं लगेगा।

इसमें चाहें तो एकमुश्त निवेश कर सकते हैं या एसआईपी (SIP) यानी एक नियमित समय अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा करके भी लंबे समय में अच्छा फंड तैयार कर सकते हैं।

कैसा है रिटर्न के मामले में

ईएलएसएस में रिटर्न भी तगड़ा मिलता है। सिर्फ तीन साल के ही आंकड़ों को लेकर बात करें तो मोतीलाल ओसवाल ईएलएसएस टैक्स फंड डायरेक्ट ग्रोथ में सालाना 23.84%, आईटीआई ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 19.45%, व्हाइटओक कैपिटल ईएलएसएस टैक्स फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.63%, एचएसबीसी ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.34% और जेएम ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.27% की रफ्तार से बढ़ा है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।