ट्रेन की एक ही सीट पर आ गए 2 यात्री, दोनों के पास था कंफर्म टिकट फिर TTE जितेंद्र मिश्रा ने सुलझाया मामला और गफलत की वजह भी बताई

आमतौर पर ट्रेन में सीट पर किसका अधिकार है यह तय करने के लिए एक कन्फर्म रेलवे टिकट काफी होता है। लेकिन तब क्या होता है जब दो यात्री एक ही बर्थ पर अपना दावा ठोकते हैं, जबकि उनमें से किसी के पास भी ‘रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन’ (RAC) वाला टिकट नहीं होता? एक वायरल वीडियो में ऐसी ही एक अजीब स्थिति सामने आई है।

वीडियो में दो यात्री कोच S7 की सीट नंबर 57 पर अपना दावा कर रहे हैं और दोनों के पास कन्फर्म रिजर्वेशन है। यह विवाद तब तक चलता रहता है जब तक कि ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (TTE) उनके टिकटों की जांच करके यह नहीं बताते कि असल में क्या गड़बड़ी हुई है।

टिकट पर दो यात्रियों को एक ही सीट कैसे मिल गई?

वीडियो में रेलवे के TTE जितेंद्र मिश्रा बताते हैं कि यह उलझन टिकट बुकिंग के दौरान मिलने वाली ‘ऑटो-अपग्रेड’ सुविधा की वजह से हुई। वीडियो में एक बुजुर्ग यात्री ने टिकट बुक करते समय ‘ऑटो-अपग्रेडेशन’ का विकल्प चुना था। इस सुविधा के तहत अगर नियम के अनुसार जगह उपलब्ध हो तो भारतीय रेलवे यात्री को एक उच्च श्रेणी (higher class) में अपग्रेड कर सकती है।

इसके बाद उस यात्री का टिकट अपग्रेड हो गया। हालांकि दूसरे यात्री को इस बदलाव के बारे में पता नहीं था और वह S7 स्लीपर कोच में सीट नंबर 57 पर अपना दावा करता रहा। नतीजतन शुरुआत में दोनों यात्रियों को लगा कि उसी सीट पर उनका ही अधिकार है। कोई भी अपनी बर्थ छोड़ने को तैयार नहीं था, जिसके बाद TTE को मामले की असलियत का पता लगाना पड़ा।

TTE ने सुलझाया मामला

मिश्रा ने स्थिति की जांच की और बताया कि बुजुर्ग यात्री का टिकट एक उच्च श्रेणी में अपग्रेड कर दिया गया था। इसका मतलब यह था कि अब उन्हें अपनी पुरानी स्लीपर कोच वाली बर्थ पर रहने की जरूरत नहीं थी। TTE ने स्पष्ट किया कि बुजुर्ग यात्री को अब अपग्रेड किए गए कोच में यात्रा करनी होगी, जबकि दूसरा यात्री S7 कोच में सीट नंबर 57 पर अपनी यात्रा कर सकता है।

मिश्रा ने ऐसी स्थिति का सामना करने वाले यात्रियों को एक आसान सुझाव भी दिया- बर्थ को लेकर बहस करने से पहले टिकट की ‘पैसेंजर नेम रिकॉर्ड’ (PNR) डिटेल चेक कर लें।

भारतीय रेलवे की ‘ऑटो-अपग्रेडेशन’ सुविधा क्या है?

भारतीय रेलवे ‘ऑटो-अपग्रेडेशन’ का विकल्प देता है। इसके तहत नियमों और उपलब्धता के आधार पर योग्य यात्रियों को उच्च श्रेणी (higher class) में सीट मिल सकती है। उदाहरण के लिए स्लीपर क्लास में बुक किए गए यात्री को AC 3-टियर में अपग्रेड किया जा सकता है, जबकि AC 3-टियर में यात्रा कर रहे किसी योग्य यात्री को AC 2-टियर में अपग्रेड मिल सकता है। रेलवे के नियमों और उपलब्धता के अनुसार अन्य श्रेणियों में भी इस तरह का अपग्रेड संभव है।

यात्रियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस विकल्प को चुनने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें अपग्रेड मिलेगा ही। यह केवल उन्हें इस सुविधा के तहत अपग्रेड पाने का पात्र (eligible) बनाता है। अपग्रेड होने पर रिजर्वेशन से जुड़ी कोच और बर्थ की डिटेल बदल सकती है। इसलिए यात्रियों को केवल अपनी शुरुआती बुकिंग के समय की कोच या सीट की जानकारी पर भरोसा करने के बजाय अपने टिकट की लेटेस्ट जानकारी चेक कर लेनी चाहिए।

यात्री सीट को लेकर होने वाले विवाद से कैसे बच सकते हैं?

यह घटना ट्रेन से यात्रा करने वाले सभी लोगों के लिए एक सबक है, खासकर छुट्टियों के व्यस्त समय में जब रिजर्वेशन और बर्थ की उपलब्धता को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। अगर कोई और आपकी कन्फर्म सीट पर अपना दावा करता है, तो यात्री ये कदम उठा सकते हैं-

लेटेस्ट PNR स्टेटस चेक करें- अपने मौजूदा रिजर्वेशन की डिटेल देखें, जिसमें कोच, बर्थ और यात्रा की श्रेणी (class) शामिल हो।

अपग्रेड चेक करें- अगर आपने बुकिंग के समय ‘ऑटो-अपग्रेडेशन’ का विकल्प चुना था तो देखें कि क्या आपका टिकट किसी दूसरी श्रेणी में अपग्रेड हुआ है।

टिकट की डिटेल मिलाएं- पक्का करें कि आपके लेटेस्ट रिजर्वेशन में दिए गए कोच और बर्थ नंबर, उस सीट से मेल खाते हैं जिस पर आप अपना दावा कर रहे हैं।

TTE से मदद लें- अगर दो यात्री एक ही बर्थ पर अपना दावा करते हैं तो बहस बढ़ाने के बजाय रेलवे स्टाफ (TTE) से रिकॉर्ड चेक करने के लिए कहें।

वायरल वीडियो पर यात्रियों ने किए कमेंट

इस वीडियो ने ऑनलाइन काफी ध्यान खींचा है। लोग बुकिंग से जुड़े इस अजीबोगरीब भ्रम और TTE द्वारा स्थिति को संभालने के तरीके पर चर्चा कर रहे हैं। कई यूजर्स ने रेलवे अपग्रेड से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए हैं। एक यूजर ने कमेंट किया और अपना एक्सपीरिएंस बताया कि उसने AC 3-टियर में बुक किया गया टिकट पहले AC 2-टियर में अपग्रेड कर दिया गया था, जबकि AC 2-टियर में बुक किया गया टिकट AC 1-टियर में शिफ्ट कर दिया गया था।