
अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश का उभरता हुआ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इकोसिस्टम आने वाले 2 से 5 सालों में शेयर बाजार के कुल मार्केट कैप में 50 अरब से 100 अरब डॉलर (लगभग 4 से 8 लाख करोड़ रुपये) तक की भारी-भरकम बढ़ोतरी कर सकता है। निजी एआई कंपनियों के संभावित आईपीओ देश की इकोनॉमी और शेयर बाजार का नक्शा बदलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
निवेश बैंक के अनुमान के अनुसार मध्यम और अंतिम चरण की करीब 70 निजी एआई कंपनियों में से 25 से 50% इस अवधि में शेयर बाजार में लिस्ट हो सकती हैं। इन कंपनियों का औसत मूल्यांकन मौजूदा अनुमानित मूल्य से करीब चार गुना रहने की संभावना है। गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के एआई स्टार्टअप्स में निजी इक्विटी निवेश 2024 के बाद से तीन गुना हो गया है।
66% हिस्सेदारी इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी मददगार कंपनियों की
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि संभावित एआई आईपीओ में 66% हिस्सेदारी इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी मददगार कंपनियों की हो सकती है। एआई का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों की
हिस्सेदारी 31% और मुख्य एआई डेवलपर्स की 3% रहने का अनुमान है। इन आईपीओ से भारत के शेयर बाजार में एआई क्षेत्र की विविधता बढ़ेगी। डेटा सेंटर, एंटरप्राइज एआई सेवाओं, क्लाउड, डाटा प्रबंधन, हेल्थकेयर एआई, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और कंप्यूटर विजन जैसी गतिविधियों से जुड़ी कंपनियों को भी सार्वजनिक बाजार से पूंजी जुटाने का अवसर मिल सकता है।
84 कंपनियों की पहचान
गोल्डमैन सैक्स ने 84 निजी कंपनियों को प्राइवेट एआई कंटेंडर्स के रूप में चिन्हित किया है। इनका संयुक्त अनुमानित मौजूदा मूल्य 55 अरब डॉलर है। इन कंपनियों ने 2025 से भारत में एआई से जुड़े कुल निजी निवेश का करीब 40% हासिल किया है।
भारत में क्यों IPO लाना चाहती है AI कंपनियां
निजी निवेश में भारी उछाल : भारत के एआई स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों में पिछले कुछ वर्षों में निजी निवेशकों का भरोसा तेजी से बढ़ा है। 2024 के बाद से इन कंपनियों में फंडिंग कई गुना बढ़ चुकी है। जब शुरुआती और विकास चरण के निवेशकों को कंपनियों में अच्छा मुनाफा दिख जाता है, तो वे अपनी पूंजी निकालने और मुनाफा वसूलने के लिए आईपीओ का रास्ता चुनते हैं।
भारी पूंजी की आवश्यकता : एआई तकनीक पर काम करना बेहद खर्चीला होता है। इसके लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर स्थापित करने, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने, क्लाउड स्टोरेज खरीदने और महंगे रिसर्च एंड डेवलपमेंट की जरूरत होती है। अपने कारोबार को बड़े स्तर पर फैलाने और भारी-भरकम खर्चों को पूरा करने के लिए जनता से पैसा जुटाना सबसे अच्छा विकल्प होता है।
भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का मजबूत उत्साह : भारत का शेयर बाजार इस समय दुनिया के सबसे मजबूत और सक्रिय बाजारों में से एक है। खुदरा निवेशकों और संस्थागत निवेशकों दोनों की ओर से शेयर बाजार में भारी पैसा आ रहा है। तकनीक आधारित कंपनियों को भारतीय बाजारों में वैल्यूएशन भी काफी अच्छा मिल रहा है, जो इन कंपनियों को आईपीओ लाने के लिए आकर्षित कर रहा है।
तकनीकी और एआई क्रांति की तेज मांग : भारत में जिस तरह से डिजिटलीकरण (UPI, आधार, क्लाउड सेवाएं) और सरकारी नीतियां डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दे रही हैं, उससे हर सेक्टर में एआई की मांग तेजी से बढ़ रही है। चाहे वह हेल्थकेयर हो, बैंकिंग, ऑटोमेशन या डेटा मैनेजमेंट—कंपनियां इस बढ़ते बाजार का फायदा उठाने के लिए तेजी से विस्तार कर रही हैं।
वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा और विश्वसनीयता : शेयर बाजार में लिस्ट होने से कंपनियों की बाजार में साख और पारदर्शिता बढ़ जाती है। इससे उन्हें वैश्विक स्तर पर बड़ी कंपनियों के साथ मुकाबला करने, विदेशी ग्राहकों का भरोसा जीतने और बड़े कॉर्पोरेट साझेदारियां करने में आसानी होती है।


