Mutual Funds: सोने ने दिया 9% रिटर्न, फिर भी निवेशकों ने इन फंड्स में लगाए ₹1.40 लाख करोड़

Mutual Funds: जुलाई 2026 में सोने ने करीब 9% का रिटर्न दिया। इसके बावजूद भारतीय निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा मनी मार्केट फंड्स पर जताया। Vallum Capital की अगस्त 2026 की Monthly Macro Grid Chartbook के मुताबिक, जुलाई में इन फंड्स में 1.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया। दिलचस्प बात यह है कि जून में इसी कैटेगरी से 65,530 करोड़ रुपये निकल गए थे।

सिर्फ मनी मार्केट फंड ही नहीं, फिक्स्ड इनकम फंड्स में भी वापसी देखने को मिली। जुलाई में इनमें 5,947 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि जून में 53,006 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। दूसरी तरफ, सोने की कीमत बढ़ने के बावजूद प्रेशियस मेटल फंड्स में निवेश घटकर 4,084 करोड़ रुपये रह गया, जो जून में 8,680 करोड़ रुपये था।

SIP में लगातार बढ़ रहा निवेश

सुरक्षित निवेश की तरफ झुकाव का मतलब यह नहीं था कि निवेशकों ने शेयर बाजार से दूरी बना ली। Franklin Templeton India की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में SIP योगदान 12% बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं SIP खातों की संख्या भी 12.5% बढ़कर 10.63 करोड़ हो गई।

हालांकि, औसत मासिक SIP योगदान में मामूली गिरावट आई। यह 3,012 रुपये से घटकर 3,007 रुपये रह गया।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

जुलाई में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर रिकॉर्ड 85.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इस दौरान इक्विटी फंड्स का AUM 15.3% बढ़कर 38.40 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं पैसिव फंड्स का AUM सालाना आधार पर 24% से ज्यादा बढ़ा।

सबसे ज्यादा पैसा कहां गया?

इक्विटी फंड्स के भीतर भी निवेशकों की पसंद साफ नजर आई। स्मॉलकैप फंड्स में जुलाई के दौरान 7,768 करोड़ रुपये आए, जबकि मिडकैप फंड्स में 6,192 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। Vallum Capital के मुताबिक, जुलाई में माइक्रोकैप शेयर 4.6% और स्मॉलकैप शेयर 2.8% चढ़े।

निवेशकों ने क्यों सुरक्षित विकल्प चुने?

डेटा बताता है कि जुलाई में निवेशकों ने सिर्फ सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली एसेट क्लास का पीछा नहीं किया। एक तरफ SIP और इक्विटी में निवेश जारी रहा, तो दूसरी तरफ बड़ी रकम मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड्स में गई। इससे साफ है कि निवेशक बेहतर रिटर्न के साथ-साथ लिक्विडिटी और कम जोखिम वाले विकल्पों को भी प्राथमिकता दे रहे थे।

Vallum Capital का कहना है कि जुलाई में सोने की तेजी की बड़ी वजह अमेरिका की उम्मीद से कमजोर जॉब्स रिपोर्ट रही। इससे फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कुछ कमजोर पड़ी। साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने भी सोने की कीमतों को सहारा दिया।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

इन 10 म्यूचुअल फंडों ने SIP के निवेशकों को बीते 5 साल में दिए सबसे ज्यादा रिटर्न, देखें पूरी लिस्ट

शेयरों की तरह जोरदार रिटर्न के लिए म्यूचु्अल फंड की सही स्कीम का चुनाव जरूरी है। कुछ फंडों का रिटर्न हमेशा कैटेगरी के औसत रिटर्न से काफी ज्यादा होता है। एनालिसिस के नतीजे बताते हैं कि कुछ फंडों ने सिप के निवेशकों को सालाना 20 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिए हैं। खास बात यह है कि स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स रिटर्न देने में सबसे आगे हैं।

बीते पांच सालों में स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स का जलवा

सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले 10 फंडों में 9 फंड स्मॉलकैप और मिडकैप कैटेगरी के हैं। इनमें 4 स्मॉलकैप स्कीम हैं। पांच मिडकैप स्कीम हैं। SBI Children Fund सिर्फ एक अपवाद है, जो फ्लेक्सीकैप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करता है।

इससे यह संकेत मिलता है कि बीते 5 सालों में जिन निवेशकों ने ज्यादा रिस्क लिया, उन्हें ज्यादा रिटर्न मिला। इस दौरान स्मॉलकैप कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा। स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों ने सिप के निवेशकों को लार्जकैप फंडों के मुकाबले ज्यादा रिटर्न दिए।

एक्टिव लार्जकैप फंड्स की चमक पड़ी फीकी

सिप इनवेस्टर्स को सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंडों में एक भी एक्टिवली मैनेज्ड लार्जकैप फंड शामिल नहीं है। पिछले पांच सालों में लार्जकैप स्कीम में सबसे अच्छा प्रदर्शन Invesco India Largecap Fund का रहा है। इसका सालाना सिप रिटर्न 14.27 फीसदी रहा है। यह 64 लार्जकैप फंड्स में 10वें नंबर पर है। लार्जकैप कैटेगरी में टॉप 9 पोजीशन पर इंडेक्स फंड और ईटीएफ रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि लार्जकैप कैटेगरी में पैसिव फंड्स एक्टिव फंड मैनेजर्स को चुनौती दे रहे हैं।

जोरदार रिटर्न देने वाले फंड्स में उतार-चढ़ाव भी ज्यादा

बीते पांच सालों में स्मॉलकैप और मिडकैप रिटर्न देने में सबसे आगे रहे हैं। लेकिन, म्यूचुअल फंड्स की इन दोनों कैटेगरी में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखा है। उनका शानदार प्रदर्शन फेवरेबल मार्केट साइकिल में दिखा है। इस ट्रेंड के अगले पांच सालों में रिपीट होने की गारंटी नहीं है।

top 10 fund

रिस्क लेने की कपैसिटी के आधार पर फंड का सेलेक्शन्

एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी फंड के पिछले रिटर्न को देखकर निवेश का फैसला ठीक नहीं है। इनवेस्टर को यह देखने की जरूरत है कि वह कितना रिस्क ले सकता है। किसी फंड का लंबी अवधि में लगातार अच्छा प्रदर्शन कुछ सालों में बेहतर प्रदर्शन के मुकाबले ज्यादा मायने रखता है।