RBI Minutes: अब लोन महंगा होने का खतरा, महंगाई बढ़ी तो बढ़ सकता है रेपो रेट

RBI Minutes: RBI की अगस्त बैठक के मिनट्स से साफ संकेत मिले हैं कि फिलहाल ब्याज दरों में और राहत की उम्मीद कम है। केंद्रीय बैंक का पूरा फोकस अब महंगाई पर है। अगर कीमतों का दबाव और बढ़ा, तो इस साल रेपो रेट बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

5 अगस्त को हुई MPC बैठक में RBI ने लगातार चौथी बार रेपो रेट को 5.25% पर ही रखा था। वहीं SDF 5% और MSF 5.5% पर बरकरार रहे। नीति का रुख भी ‘Neutral’ ही रखा गया।

गवर्नर ने क्या कहा?

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी मजबूत बनी हुई है। उनका अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में महंगाई औसतन करीब 5% रह सकती है।

उन्होंने कहा कि अभी महंगाई का बड़ा कारण सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें हैं। अच्छी बात यह है कि यह पूरे बाजार में नहीं फैली है। कोर महंगाई भी अभी ज्यादा नहीं है।

उनका मानना है कि तीसरी तिमाही के बाद महंगाई कुछ कम हो सकती है। इसलिए अभी ब्याज दरों में बदलाव की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर महंगाई हर सेक्टर में फैलने लगी, तो RBI सख्ती कर सकता है।

डिप्टी गवर्नर का रुख ज्यादा सख्त

RBI की डिप्टी गवर्नर पूणम गुप्ता ने साफ कहा कि अभी ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश नहीं दिखती।

उन्होंने यह भी कहा कि साल के दौरान रेपो रेट बढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती है। हालांकि फिलहाल उनका सुझाव यही है कि कुछ समय और इंतजार किया जाए।

दूसरे सदस्यों की क्या राय रही?

MPC सदस्य इंद्रनील भट्टाचार्य ने भी जल्दबाजी से बचने की बात कही। उनका कहना है कि आने वाले महीनों में मानसून और महंगाई की तस्वीर ज्यादा साफ होगी।

उन्होंने कहा कि अभी दरों को स्थिर रखना RBI के लिए आगे फैसला लेने की लचीलापन बनाए रखता है। इसका मतलब यह नहीं कि दरें लंबे समय तक नहीं बदलेंगी।

RBI किन बातों से चिंतित है?

बैठक के मिनट्स में कई ऐसे जोखिम गिनाए गए हैं, जो महंगाई बढ़ा सकते हैं।

  • मानसून का असमान रहना
  • एल नीनो का असर
  • पश्चिम एशिया में तनाव
  • होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिम

MPC सदस्यों का मानना है कि इन वजहों से आने वाले महीनों में महंगाई पर नजर रखना पहले से ज्यादा जरूरी होगा।

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Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन समय से पहले चुकाना सही है या नहीं? समझिए कब होगा फायदा

Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन लेते समय ज्यादातर लोग सिर्फ EMI देखते हैं। लेकिन कुछ महीने बाद जब बोनस मिलता है या बचत बढ़ती है, तो मन में सवाल आता है कि क्या लोन समय से पहले चुका देना चाहिए?

इसका जवाब हर किसी के लिए एक जैसा नहीं है। कई बार प्रीपेमेंट से लाखों रुपये का ब्याज बच जाता है। लेकिन कई बार फायदा बहुत कम होता है। इसलिए फैसला लेने से पहले कुछ बातें समझना जरूरी है।

सबसे ज्यादा फायदा कब होता है?

पर्सनल लोन की EMI में शुरुआत में ब्याज का हिस्सा ज्यादा होता है। धीरे-धीरे ब्याज कम होता जाता है और मूलधन (Principal) का हिस्सा बढ़ता जाता है।

यानी अगर आप लोन की शुरुआत में प्रीपेमेंट करते हैं, तो ज्यादा ब्याज बचा सकते हैं। अगर आखिरी साल में लोन चुकाते हैं, तो बचत बहुत कम होती है।

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 15% सालाना ब्याज पर लिया है। इस पर EMI करीब ₹11,895 बनेगी। पूरे 5 साल में कुल भुगतान करीब ₹7.14 लाख होगा यानी सिर्फ ब्याज के तौर पर करीब ₹2.14 लाख चुकाने होंगे।

अब मान लीजिए आपने 12 महीने बाद ₹2 लाख का प्रीपेमेंट कर दिया। ऐसी स्थिति में आपकी बची हुई ब्याज की रकम में हजारों रुपये की कमी आ सकती है। अगर बैंक प्रीपेमेंट चार्ज कम लेता है, तो यह फैसला काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

ब्याज दर ज्यादा है तो सोचिए जरूर

पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर 10% से 24% तक हो सकती है। यह होम लोन से काफी ज्यादा होती है। अगर आपका लोन 14%, 15% या 16% पर चल रहा है, तो जल्दी चुकाने से अच्छी बचत हो सकती है। लेकिन अगर किसी कंपनी स्कीम या ऑफर के तहत आपको कम ब्याज पर लोन मिला है, तो पहले हिसाब जरूर लगाएं।

प्रीपेमेंट चार्ज जरूर देखें

ज्यादातर बैंक और NBFC लोन समय से पहले बंद करने पर 2% से 5% तक फोरक्लोजर या प्रीपेमेंट चार्ज लेते हैं। कई बैंक पहले 6 या 12 महीने तक प्रीपेमेंट की अनुमति भी नहीं देते। इसलिए पहले यह देखें कि ब्याज में जितनी बचत होगी, वह चार्ज से ज्यादा है या नहीं।

पूरी बचत लोन में मत लगा दीजिए

मान लीजिए आपके पास ₹3 लाख की बचत है और आपने पूरी रकम लोन चुकाने में लगा दी। एक महीने बाद अगर मेडिकल इमरजेंसी में ₹2 लाख की जरूरत पड़ जाए, तो फिर आपको नया लोन या क्रेडिट कार्ड लेना पड़ सकता है। इसलिए लोन चुकाने के बाद भी कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च जितनी रकम इमरजेंसी फंड के रूप में जरूर बचाकर रखें।

होम लोन लेना है तो पहले पर्सनल लोन खत्म करें

अगर आने वाले समय में आप होम लोन लेने वाले हैं, तो पर्सनल लोन पहले बंद करना फायदेमंद हो सकता है। इससे आपकी Debt-to-Income (DTI) Ratio बेहतर होती है। बैंक आपकी कुल EMI देखते हैं। EMI कम होगी तो नए लोन की मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

कब प्रीपेमेंट करने की जरूरत नहीं?

अगर आपका लोन आखिरी साल में पहुंच चुका है, तो जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। तब तक ज्यादातर ब्याज चुकाया जा चुका होता है। इसी तरह अगर आपके पास ऐसा निवेश का मौका है, जहां 15% रिटर्न मिलने की संभावना है और आपका लोन 11% पर है, तो पहले निवेश करना ज्यादा समझदारी हो सकती है। हालांकि, इसमें जोखिम का भी ध्यान रखें।

आपका फैसला क्या होना चाहिए?

पर्सनल लोन का प्रीपेमेंट तब सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है, जब लोन शुरुआती दौर में हो, ब्याज दर ज्यादा हो और प्रीपेमेंट चार्ज कम हो। लेकिन सिर्फ कर्ज खत्म करने के लिए अपनी पूरी बचत खर्च करना सही नहीं है। पहले हिसाब लगाइए, फिर फैसला लीजिए। कई बार थोड़ा इंतजार करना भी आपके लिए ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

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