Gold Price Today: नवरात्र में सोना ₹1400 सस्ता हुआ, चांदी भी फिसली; जानिए आगे कैसी रहेगी चाल

Gold Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को गिरावट आई। दिल्ली में सोना 1,400 रुपये सस्ता हो गया। अब 10 ग्राम सोने का भाव 1.53 लाख रुपये रह गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी और रुपये में मजबूती से सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा।

ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के मुताबिक, 24 कैरेट वाले सोने का भाव शुक्रवार को 1,54,400 रुपये प्रति 10 ग्राम था। सोमवार को यह घटकर 1,53,000 रुपये पर आ गया।

चांदी भी सस्ती हुई। इसकी कीमत 2,000 रुपये गिरकर 2,26,500 रुपये प्रति किलो रह गई। शुक्रवार को यह 2,28,500 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।

रुपये की मजबूती से सोने को झटका

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से कमजोर संकेत मिले। इसके अलावा, रुपये में मजबूती ने भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ाया।

सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 96 पैसे मजबूत होकर 95.75 पर बंद हुआ। छह महीने से ज्यादा समय में रुपये की यह एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त थी। इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को संभालने के लिए कई कदम उठाए थे।

गांधी के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने की मांग फिलहाल मिली-जुली है। कीमतें बढ़ने के बाद खरीदारी कमजोर पड़ी है। हालांकि, चीन में छुट्टियों के बाद सोने की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरा सोना

विदेशी बाजार में भी सोने की कीमत नीचे आई। हाजिर सोना 17.36 डॉलर यानी 0.41% गिरकर 4,176.88 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी भी मामूली गिरावट के साथ 60.66 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म Lemonn के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,179 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बावजूद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 18 महीने के ऊंचे स्तर के करीब बना हुआ है। इससे सोने की कीमतों में तेजी पर दबाव पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि रूस से ऊर्जा की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री रास्तों पर जोखिम के कारण तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।

आगे कैसी रहेगी सोने की चाल?

निवेश प्लेटफॉर्म Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज के मुताबिक, फिलहाल सोने का आउटलुक चांदी के मुकाबले मजबूत दिख रहा है। वहीं, चांदी की धीमी बढ़त को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

आने वाले दिनों में बाजार की नजर अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और रुपये की चाल पर रहेगी। अमेरिका के महंगाई के आंकड़े भी अहम होंगे। इनसे ब्याज दरों को लेकर संकेत मिल सकते हैं। इसके आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में आगे की दिशा तय हो सकती है।

Home Loan EMI Calculator: 20 साल का होम लोन 5 साल पहले चुकाया तो बच जाएंगे ₹12 लाख, समझिए पूरा कैलकुलेशन

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Personal Loan EMI: ₹5 लाख का लोन जल्दी चुकाने से ₹69000 का ब्याज बचेगा, समझिए पूरा कैलकुलेशन

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन लेना काफी आसान है, लेकिन उसका ब्याज जेब पर भारी पड़ सकता है। खासकर तब, जब लोन की अवधि लंबी हो। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर आपके पास पैसा आ जाए तो लोन को जल्दी खत्म करना कितना फायदेमंद है?

इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपने 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया है। ब्याज दर 12% सालाना है और लोन की अवधि 5 साल यानी 60 महीने है।

5 साल तक चलाया तो कितना ब्याज देंगे?

5 लाख रुपये के इस लोन पर 12% ब्याज के हिसाब से आपकी EMI करीब 11,122 रुपये बनेगी। आप 60 महीने तक यह EMI चुकाते हैं तो बैंक को कुल करीब 6.67 लाख रुपये देने होंगे।

यानी 5 लाख रुपये की मूल रकम के ऊपर करीब 1.67 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में चला जाएगा।

3 साल में लोन खत्म किया तो क्या होगा?

अब मान लीजिए आप इसी 5 लाख रुपये के लोन को 5 साल की जगह 3 साल में खत्म करने का फैसला करते हैं। इस स्थिति में आपकी EMI बढ़कर करीब 16,607 रुपये हो जाएगी

हालांकि, लोन की अवधि कम होने से कुल ब्याज काफी घट जाएगा। 36 महीने में आप बैंक को करीब 5.98 लाख रुपये चुकाएंगे। इसमें ब्याज करीब 97,858 रुपये होगा। यानी 5 साल की जगह 3 साल में लोन खत्म करने पर करीब 69,476 रुपये का ब्याज बच सकता है।

लोन की अवधिEMIकुल ब्याज
5 सालकरीब ₹11,122करीब ₹1.67 लाख
3 सालकरीब ₹16,607करीब ₹97,858
ब्याज में बचत—करीब ₹69,476

लेकिन EMI बढ़ाना हर किसी के लिए सही नहीं

यहां एक बात समझना जरूरी है। लोन जल्दी खत्म करने का मतलब है कि आपको हर महीने ज्यादा रकम EMI में लगानी होगी। इसलिए फैसला सिर्फ ब्याज बचत देखकर नहीं करना चाहिए।

अगर आपकी आमदनी स्थिर है और 16-17 हजार रुपये की EMI आसानी से संभाल सकते हैं, तो छोटी अवधि वाला लोन ब्याज के लिहाज से बेहतर हो सकता है। वहीं, अगर ज्यादा EMI से आपका बाकी खर्च या इमरजेंसी फंड प्रभावित होता है, तो जल्दबाजी ठीक नहीं होगी।

दूसरे चार्ज का ध्यान रखना भी जरूरी

अगर आप पर्सनल लोन को समय से पहले बंद करना चाहते हैं, तो बैंक या NBFC के प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्जेज भी जरूर देख लें। इन चार्ज की वजह से वास्तविक बचत अलग हो सकती है।

इस उदाहरण में 12% ब्याज दर और बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के हिसाब से 5 लाख रुपये का लोन 5 साल की जगह 3 साल में खत्म करने पर करीब 69 हजार रुपये का ब्याज बचता है। यानी सिर्फ लोन जल्दी खत्म करने से ही आपकी जेब में अच्छी-खासी रकम बच सकती है।

Home loan EMI : RBI ने 0.25% बढ़ाया रेपो रेट, जानें आपके होम लोन पर क्या होगा इसका असर

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

RBI Minutes: अब लोन महंगा होने का खतरा, महंगाई बढ़ी तो बढ़ सकता है रेपो रेट

RBI Minutes: RBI की अगस्त बैठक के मिनट्स से साफ संकेत मिले हैं कि फिलहाल ब्याज दरों में और राहत की उम्मीद कम है। केंद्रीय बैंक का पूरा फोकस अब महंगाई पर है। अगर कीमतों का दबाव और बढ़ा, तो इस साल रेपो रेट बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

5 अगस्त को हुई MPC बैठक में RBI ने लगातार चौथी बार रेपो रेट को 5.25% पर ही रखा था। वहीं SDF 5% और MSF 5.5% पर बरकरार रहे। नीति का रुख भी ‘Neutral’ ही रखा गया।

गवर्नर ने क्या कहा?

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी मजबूत बनी हुई है। उनका अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में महंगाई औसतन करीब 5% रह सकती है।

उन्होंने कहा कि अभी महंगाई का बड़ा कारण सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें हैं। अच्छी बात यह है कि यह पूरे बाजार में नहीं फैली है। कोर महंगाई भी अभी ज्यादा नहीं है।

उनका मानना है कि तीसरी तिमाही के बाद महंगाई कुछ कम हो सकती है। इसलिए अभी ब्याज दरों में बदलाव की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर महंगाई हर सेक्टर में फैलने लगी, तो RBI सख्ती कर सकता है।

डिप्टी गवर्नर का रुख ज्यादा सख्त

RBI की डिप्टी गवर्नर पूणम गुप्ता ने साफ कहा कि अभी ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश नहीं दिखती।

उन्होंने यह भी कहा कि साल के दौरान रेपो रेट बढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती है। हालांकि फिलहाल उनका सुझाव यही है कि कुछ समय और इंतजार किया जाए।

दूसरे सदस्यों की क्या राय रही?

MPC सदस्य इंद्रनील भट्टाचार्य ने भी जल्दबाजी से बचने की बात कही। उनका कहना है कि आने वाले महीनों में मानसून और महंगाई की तस्वीर ज्यादा साफ होगी।

उन्होंने कहा कि अभी दरों को स्थिर रखना RBI के लिए आगे फैसला लेने की लचीलापन बनाए रखता है। इसका मतलब यह नहीं कि दरें लंबे समय तक नहीं बदलेंगी।

RBI किन बातों से चिंतित है?

बैठक के मिनट्स में कई ऐसे जोखिम गिनाए गए हैं, जो महंगाई बढ़ा सकते हैं।

  • मानसून का असमान रहना
  • एल नीनो का असर
  • पश्चिम एशिया में तनाव
  • होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिम

MPC सदस्यों का मानना है कि इन वजहों से आने वाले महीनों में महंगाई पर नजर रखना पहले से ज्यादा जरूरी होगा।

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Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन समय से पहले चुकाना सही है या नहीं? समझिए कब होगा फायदा

Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन लेते समय ज्यादातर लोग सिर्फ EMI देखते हैं। लेकिन कुछ महीने बाद जब बोनस मिलता है या बचत बढ़ती है, तो मन में सवाल आता है कि क्या लोन समय से पहले चुका देना चाहिए?

इसका जवाब हर किसी के लिए एक जैसा नहीं है। कई बार प्रीपेमेंट से लाखों रुपये का ब्याज बच जाता है। लेकिन कई बार फायदा बहुत कम होता है। इसलिए फैसला लेने से पहले कुछ बातें समझना जरूरी है।

सबसे ज्यादा फायदा कब होता है?

पर्सनल लोन की EMI में शुरुआत में ब्याज का हिस्सा ज्यादा होता है। धीरे-धीरे ब्याज कम होता जाता है और मूलधन (Principal) का हिस्सा बढ़ता जाता है।

यानी अगर आप लोन की शुरुआत में प्रीपेमेंट करते हैं, तो ज्यादा ब्याज बचा सकते हैं। अगर आखिरी साल में लोन चुकाते हैं, तो बचत बहुत कम होती है।

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 15% सालाना ब्याज पर लिया है। इस पर EMI करीब ₹11,895 बनेगी। पूरे 5 साल में कुल भुगतान करीब ₹7.14 लाख होगा यानी सिर्फ ब्याज के तौर पर करीब ₹2.14 लाख चुकाने होंगे।

अब मान लीजिए आपने 12 महीने बाद ₹2 लाख का प्रीपेमेंट कर दिया। ऐसी स्थिति में आपकी बची हुई ब्याज की रकम में हजारों रुपये की कमी आ सकती है। अगर बैंक प्रीपेमेंट चार्ज कम लेता है, तो यह फैसला काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

ब्याज दर ज्यादा है तो सोचिए जरूर

पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर 10% से 24% तक हो सकती है। यह होम लोन से काफी ज्यादा होती है। अगर आपका लोन 14%, 15% या 16% पर चल रहा है, तो जल्दी चुकाने से अच्छी बचत हो सकती है। लेकिन अगर किसी कंपनी स्कीम या ऑफर के तहत आपको कम ब्याज पर लोन मिला है, तो पहले हिसाब जरूर लगाएं।

प्रीपेमेंट चार्ज जरूर देखें

ज्यादातर बैंक और NBFC लोन समय से पहले बंद करने पर 2% से 5% तक फोरक्लोजर या प्रीपेमेंट चार्ज लेते हैं। कई बैंक पहले 6 या 12 महीने तक प्रीपेमेंट की अनुमति भी नहीं देते। इसलिए पहले यह देखें कि ब्याज में जितनी बचत होगी, वह चार्ज से ज्यादा है या नहीं।

पूरी बचत लोन में मत लगा दीजिए

मान लीजिए आपके पास ₹3 लाख की बचत है और आपने पूरी रकम लोन चुकाने में लगा दी। एक महीने बाद अगर मेडिकल इमरजेंसी में ₹2 लाख की जरूरत पड़ जाए, तो फिर आपको नया लोन या क्रेडिट कार्ड लेना पड़ सकता है। इसलिए लोन चुकाने के बाद भी कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च जितनी रकम इमरजेंसी फंड के रूप में जरूर बचाकर रखें।

होम लोन लेना है तो पहले पर्सनल लोन खत्म करें

अगर आने वाले समय में आप होम लोन लेने वाले हैं, तो पर्सनल लोन पहले बंद करना फायदेमंद हो सकता है। इससे आपकी Debt-to-Income (DTI) Ratio बेहतर होती है। बैंक आपकी कुल EMI देखते हैं। EMI कम होगी तो नए लोन की मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

कब प्रीपेमेंट करने की जरूरत नहीं?

अगर आपका लोन आखिरी साल में पहुंच चुका है, तो जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। तब तक ज्यादातर ब्याज चुकाया जा चुका होता है। इसी तरह अगर आपके पास ऐसा निवेश का मौका है, जहां 15% रिटर्न मिलने की संभावना है और आपका लोन 11% पर है, तो पहले निवेश करना ज्यादा समझदारी हो सकती है। हालांकि, इसमें जोखिम का भी ध्यान रखें।

आपका फैसला क्या होना चाहिए?

पर्सनल लोन का प्रीपेमेंट तब सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है, जब लोन शुरुआती दौर में हो, ब्याज दर ज्यादा हो और प्रीपेमेंट चार्ज कम हो। लेकिन सिर्फ कर्ज खत्म करने के लिए अपनी पूरी बचत खर्च करना सही नहीं है। पहले हिसाब लगाइए, फिर फैसला लीजिए। कई बार थोड़ा इंतजार करना भी आपके लिए ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

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