Gold Price Today: नवरात्र में सोना ₹1400 सस्ता हुआ, चांदी भी फिसली; जानिए आगे कैसी रहेगी चाल

Gold Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को गिरावट आई। दिल्ली में सोना 1,400 रुपये सस्ता हो गया। अब 10 ग्राम सोने का भाव 1.53 लाख रुपये रह गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी और रुपये में मजबूती से सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा।

ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के मुताबिक, 24 कैरेट वाले सोने का भाव शुक्रवार को 1,54,400 रुपये प्रति 10 ग्राम था। सोमवार को यह घटकर 1,53,000 रुपये पर आ गया।

चांदी भी सस्ती हुई। इसकी कीमत 2,000 रुपये गिरकर 2,26,500 रुपये प्रति किलो रह गई। शुक्रवार को यह 2,28,500 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।

रुपये की मजबूती से सोने को झटका

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से कमजोर संकेत मिले। इसके अलावा, रुपये में मजबूती ने भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ाया।

सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 96 पैसे मजबूत होकर 95.75 पर बंद हुआ। छह महीने से ज्यादा समय में रुपये की यह एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त थी। इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को संभालने के लिए कई कदम उठाए थे।

गांधी के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने की मांग फिलहाल मिली-जुली है। कीमतें बढ़ने के बाद खरीदारी कमजोर पड़ी है। हालांकि, चीन में छुट्टियों के बाद सोने की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरा सोना

विदेशी बाजार में भी सोने की कीमत नीचे आई। हाजिर सोना 17.36 डॉलर यानी 0.41% गिरकर 4,176.88 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी भी मामूली गिरावट के साथ 60.66 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म Lemonn के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,179 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बावजूद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 18 महीने के ऊंचे स्तर के करीब बना हुआ है। इससे सोने की कीमतों में तेजी पर दबाव पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि रूस से ऊर्जा की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री रास्तों पर जोखिम के कारण तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।

आगे कैसी रहेगी सोने की चाल?

निवेश प्लेटफॉर्म Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज के मुताबिक, फिलहाल सोने का आउटलुक चांदी के मुकाबले मजबूत दिख रहा है। वहीं, चांदी की धीमी बढ़त को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

आने वाले दिनों में बाजार की नजर अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और रुपये की चाल पर रहेगी। अमेरिका के महंगाई के आंकड़े भी अहम होंगे। इनसे ब्याज दरों को लेकर संकेत मिल सकते हैं। इसके आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में आगे की दिशा तय हो सकती है।

Home Loan EMI Calculator: 20 साल का होम लोन 5 साल पहले चुकाया तो बच जाएंगे ₹12 लाख, समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

HCL Tech Q2 results: आईटी कंपनी का मुनाफा 11% उछला, रेवेन्यू गाइडेंस बढ़ाया; ₹12 के डिविडेंड का ऐलान

HCL Tech Q2 results: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी HCL टेक्नोलॉजीज ने 12 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट तिमाही आधार पर 11% बढ़कर 5,132 करोड़ रुपये हो गया।

इससे पिछली तिमाही यानी अप्रैल-जून में कंपनी ने 4,626 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। सालाना आधार पर नेट प्रॉफिट में 21.2% की बढ़ोतरी हुई। प्रॉफिट का आंकड़ा CNBC-TV18 पोल के ₹4,963 करोड़ के अनुमान से ज्यादा है।

कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 3% बढ़कर 35,620 करोड़ रुपये रहा। पहली तिमाही में यह 34,579 करोड़ रुपये था। वहीं, सालाना आधार पर रेवेन्यू में 11.5% की बढ़ोतरी हुई।

ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार

HCL टेक्नोलॉजीज का ऑपरेटिंग मार्जिन दूसरी तिमाही में बढ़कर 18.2% हो गया। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 131 बेसिस पॉइंट और सालाना आधार पर 71 बेसिस पॉइंट का सुधार हुआ।

नोएडा मुख्यालय वाली इस कंपनी का एडवांस्ड AI से रेवेन्यू 219 मिलियन डॉलर रहा। इसमें तिमाही आधार पर 28.4% और सालाना आधार पर 78% की बढ़ोतरी हुई।

FY27 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस बढ़ाया

HCLTech ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया है। कंपनी ने इसे पहले के 1-4% से बढ़ाकर 2.5-4% कर दिया है। यानी कंपनी ने अनुमान की निचली सीमा बढ़ाई है। हालांकि, पूरे वित्त वर्ष के लिए ऑपरेटिंग मार्जिन का अनुमान 17.5-18.5% पर बरकरार रखा गया है।

दूसरी तिमाही में कंपनी को नए सौदों से 3.24 अरब डॉलर का कारोबार मिला। इसमें मर्सिडीज-बेंज से मिला 1.14 अरब डॉलर का बड़ा AI सौदा भी शामिल है।

CEO ने क्या कहा?

HCLTech के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर सी विजयकुमार ने कहा कि कंपनी ने दूसरी तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया है। नई बुकिंग सालाना आधार पर 27% बढ़कर 3.3 अरब डॉलर रही। इसके साथ ही पहली छमाही की बुकिंग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

उन्होंने बताया कि कंपनी का EBIT मार्जिन पिछली तिमाही के मुकाबले 131 बेसिस पॉइंट बढ़कर 18.2% हो गया। सर्विसेज बिजनेस में तिमाही आधार पर 3% की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान अलग-अलग सेक्टर और भौगोलिक क्षेत्रों में कारोबार बढ़ा। कंपनी का कुल रेवेन्यू तिमाही आधार पर 2.3% बढ़ा।

विजयकुमार के मुताबिक, कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर एडवांस्ड AI से रेवेन्यू तिमाही आधार पर 28.4% और सालाना आधार पर 78% बढ़ा। उन्होंने कहा कि कंपनी के AI प्रोडक्ट और सेवाओं को ग्राहकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इससे कंपनी को भविष्य में ग्रोथ की उम्मीद है।

Anthropic के साथ AI पार्टनरशिप

HCLTech ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic के साथ ग्लोबल प्रीमियर पार्टनरशिप का भी ऐलान किया है। इसका मकसद दुनिया भर की कंपनियों में एजेंटिक AI को अपनाने की रफ्तार बढ़ाना है। इस साझेदारी में सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी और गवर्नेंस पर खास ध्यान दिया जाएगा।

HCLTech की चेयरपर्सन रोशनी नादर मल्होत्रा ने कहा कि एडवांस्ड AI से रेवेन्यू में तेजी कंपनी की रणनीति को सही साबित करती है। उनके मुताबिक, रणनीतिक साझेदारियों और AI टेक्नोलॉजी में निवेश के दम पर कंपनी दुनिया भर की कंपनियों और सरकारों के लिए भरोसेमंद टेक्नोलॉजी पार्टनर बनने की स्थिति में है।

कर्मचारियों की संख्या बढ़ी

30 सितंबर 2026 तक HCLTech में कुल 2,30,339 कर्मचारी थे। सितंबर तिमाही के दौरान कंपनी ने 6,450 नए कर्मचारियों को जोड़ा। इनमें 6,136 फ्रेशर्स शामिल थे। वहीं, पिछले 12 महीनों के दौरान कर्मचारियों के कंपनी छोड़ने की दर (एट्रिशन रेट) 12.8% रही। इससे पिछली तिमाही में यह दर 12.7% थी।

हर शेयर पर 12 रुपये का अंतरिम डिविडेंड

HCLTech ने 2 रुपये फेस वैल्यू वाले हर इक्विटी शेयर पर 12 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है।

12 अक्टूबर को HCL टेक्नोलॉजीज के शेयर 0.5% की बढ़त के साथ 1,223 रुपये पर बंद हुए। कंपनी ने बाजार बंद होने के बाद तिमाही नतीजों का ऐलान किया।

Rupee vs Dollar: रुपये को संभालने के लिए RBI के 5 बड़े कदम, क्या अब गिरावट पर लगेगी लगाम?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rupee vs Dollar: रुपये को संभालने के लिए RBI के 5 बड़े कदम, क्या अब गिरावट पर लगेगी लगाम?

Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। इसे संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने करेंसी में सट्टेबाजी पर लगाम लगाई है। वहीं, तेल कंपनियों को सीधे डॉलर देने का फैसला भी किया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन कदमों से रुपये की गिरावट रुक जाएगी?

साल 2026 की शुरुआत से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 7 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। शुक्रवार को यह गिरकर 96.96 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इसके बाद RBI ने तुरंत कदम उठाए।

आखिर RBI ने क्या किया है? इन फैसलों से रुपये को कैसे मदद मिलेगी? और क्या रुपया 97 प्रति डॉलर के पार जाने से बच सकता है? आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।

RBI ने क्या 5 कदम उठाए हैं?

RBI ने रुपये पर दबाव कम करने के लिए पांच बड़े फैसले लिए हैं।

  • पहला, 12 अक्टूबर से सरकारी तेल कंपनियों को सीधे डॉलर देने की व्यवस्था शुरू की गई है। इसके लिए एक खास विंडो बनाई गई है।
  • दूसरा, करेंसी में होने वाले कुछ सौदों के नियम सख्त कर दिए गए हैं। जिन सौदों के पीछे विदेशी मुद्रा की वास्तविक जरूरत नहीं है, उनकी सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी गई है।
  • तीसरा, बैंकों को कुछ बड़े करेंसी सौदों के लिए RBI के पास अतिरिक्त पैसा रखना होगा। इस व्यवस्था को फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (FERR) कहा जाता है।
  • चौथा, 16 अक्टूबर से बैंकों को हर दिन अपने तय कैश रिजर्व रेशियो (CRR) का कम से कम 99 फीसदी बनाए रखना होगा। अभी तक यह सीमा 90 फीसदी थी।
  • पांचवां, RBI ने 13 अक्टूबर को 25,000 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड बेचने का फैसला किया है। इससे बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त पैसा बाहर निकालने में मदद मिलेगी।

इन फैसलों के साथ RBI की कोशिश है कि बाजार में डॉलर की मांग घटे। साथ ही, रुपये के कमजोर होने पर दांव लगाने वालों के लिए ऐसा करना महंगा हो जाए।

FCNR स्कीम से कितनी राहत मिली थी?

इससे पहले RBI ने जून में विदेशों में रहने वाले भारतीयों से डॉलर जुटाने के लिए एक खास स्कीम शुरू की थी। इसके तहत करीब 143 अरब डॉलर जुटाए गए। इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 100 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई।

लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं चली। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से रुपये पर दबाव बना रहा। नोमुरा का अनुमान है कि सितंबर की शुरुआत में यह स्कीम बंद होने के बाद विदेशी मुद्रा भंडार करीब 43 अरब डॉलर घट गया।

एमके ग्लोबल का कहना है कि इस स्कीम से बाजार में रुपये की उपलब्धता बढ़ गई थी। इससे ट्रेडर्स के लिए रुपये में गिरावट पर दांव लगाना सस्ता हो गया। इसके अलावा, FCNR डिपॉजिट से मिला पैसा हमेशा के लिए बैंकों के पास नहीं रहेगा। उन्हें आगे चलकर यह रकम ब्याज के साथ लौटानी होगी।

chart np rbi

तेल कंपनियों को सीधे डॉलर मिलेंगे

भारत की सरकारी तेल कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर चाहिए। अभी वे बाजार से डॉलर खरीदती हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है। अब ये कंपनियां तय बैंकों के जरिए सीधे RBI से डॉलर ले सकेंगी। इससे उन्हें खुले बाजार से कम डॉलर खरीदने पड़ेंगे।

अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस व्यवस्था से हर महीने 9 अरब से 11 अरब डॉलर की मांग खुले बाजार से हट सकती है। इससे रुपये को कुछ राहत मिल सकती है।

करेंसी में सट्टेबाजी करना होगा मुश्किल

RBI ने कुछ ऐसे सौदों की सीमा घटा दी है, जिनके पीछे विदेशी मुद्रा की वास्तविक जरूरत नहीं होती। पहले ऐसे सौदों की सीमा 10 करोड़ डॉलर थी। अब इसे घटाकर 50 लाख डॉलर कर दिया गया है।

इसका मतलब है कि बड़े सौदे करने वालों को अब यह बताना होगा कि उन्हें वास्तव में विदेशी मुद्रा की जरूरत क्यों है। इससे रुपये की गिरावट पर बड़े दांव लगाना मुश्किल हो सकता है।

डॉलर से जुड़े सौदे महंगे होंगे

RBI ने बैंकों के लिए एक और नियम बनाया है। अब कुछ बड़े विदेशी मुद्रा सौदों पर बैंकों को 20 फीसदी रकम अतिरिक्त रिजर्व के तौर पर रखनी होगी। यह नियम 20 लाख डॉलर से ज्यादा के तय दायरे वाले सौदों पर लागू होगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी बैंक का ऐसा सौदा 100 करोड़ रुपये का है, तो उसे 20 करोड़ रुपये अलग रखने होंगे।

एमके ग्लोबल का अनुमान है कि इससे करेंसी की हेजिंग करीब 1.3 से 1.5 फीसदी महंगी हो सकती है। हेजिंग का मतलब है कि कंपनियां रुपये और डॉलर की कीमत में होने वाले बदलाव से अपने नुकसान को कम करने की कोशिश करती हैं। एमके के मुताबिक, इस फैसले से बैंकिंग सिस्टम में 45,000 करोड़ से 50,000 करोड़ रुपये तक की नकदी भी कम हो सकती है।

बैंकों के लिए पैसा जुटाना महंगा हो सकता है

अब बैंकों को हर दिन अपने तय CRR का कम से कम 99 फीसदी बनाए रखना होगा। पहले उन्हें 90 फीसदी रकम रखना जरूरी था। इसका मतलब है कि बैंकों को अपने पैसे का इस्तेमाल करने की आजादी कुछ कम मिलेगी। रुपये उधार लेकर करेंसी में सट्टेबाजी करने वालों के लिए भी लागत बढ़ सकती है।

इसके अलावा, RBI 25,000 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड बेचेगा। इससे बाजार में मौजूद अतिरिक्त पैसा वापस खींचने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, RBI डॉलर की मांग घटाना चाहता है। साथ ही, वह रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी को महंगा बनाना चाहता है।

Can RBI stop rupee from slipping past 97 against the dollar? Central bank's new moves explained

RBI ने अभी ये कदम क्यों उठाए?

RBI के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली है कच्चे तेल की महंगी कीमतें। दूसरी है विदेशी निवेशकों का पैसा निकालना। भारत अपनी जरूरत का काफी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। जब तेल महंगा होता है, तो भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है।

दूसरी तरफ, विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और बेहतर रिटर्न मिलने से निवेशकों का पैसा अमेरिकी बाजारों की ओर जा रहा है। इसका असर भारत में डॉलर की उपलब्धता पर पड़ता है। जब डॉलर की मांग बढ़ती है और उपलब्धता कम होती है, तो रुपये पर दबाव बढ़ जाता है।

8 अक्टूबर को भारत और अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड का अंतर घटकर करीब 194 बेसिस पॉइंट रह गया था। यह करीब 22 साल का निचला स्तर था।

क्या रुपये को मजबूती मिलेगी?

RBI के इन फैसलों से बाजार में डॉलर की मांग कम हो सकती है। इससे रुपये में अचानक होने वाली बड़ी गिरावट को रोकने में मदद मिल सकती है।

इन उपायों के बाद शुरुआती कारोबार में रुपये में करीब 1 फीसदी की तेजी आई। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को रुपया 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 95.77 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था।

हालांकि, सिर्फ एक दिन की तेजी से यह नहीं कहा जा सकता कि रुपये की गिरावट रुक गई है। आगे रुपये की चाल कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों के रुख और बाजार में डॉलर की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।

कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?

RBI के फैसलों से उन कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है, जो विदेशों से सामान खरीदती हैं। इनमें मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चा माल आयात करने वाली कंपनियां शामिल हैं। ऐसी कंपनियां डॉलर की कीमत में होने वाले बदलाव से बचने के लिए हेजिंग करती हैं।

लेकिन अगर हेजिंग महंगी हो जाती है, तो उन्हें इसके लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा। कुछ कंपनियां हेजिंग कम कर सकती हैं। कुछ छोटी अवधि के सौदे कर सकती हैं। इससे फिलहाल फॉरवर्ड मार्केट में डॉलर की मांग घट सकती है।

Indian rupee breaks 69 vs dollar for first time; down over 8% in 2018- Moneycontrol.com

आगे RBI के सामने क्या चुनौती है?

RBI के कदम रुपये को कुछ समय के लिए राहत दे सकते हैं। लेकिन रुपये की कमजोरी की असली वजहें अभी बनी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहीं, विदेशी निवेशक पैसा निकालते रहे और भारत को निर्यात से कम डॉलर मिले, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है।

एमके का अनुमान है कि अगर कच्चे तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल बनी रहती है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का चालू खाता घाटा GDP के 1.6 से 1.7 फीसदी तक पहुंच सकता है। चालू खाता घाटा तब होता है, जब देश के विदेशी लेनदेन में कमाई के मुकाबले खर्च ज्यादा होता है। ऐसे में डॉलर की जरूरत बढ़ सकती है।

क्या RBI रुपये को $95 तक ला पाएगा?

RBI के नए कदम रुपये को कुछ समय के लिए 95 प्रति डॉलर के आसपास संभालने में मदद कर सकते हैं। लेकिन यह कहना मुश्किल है कि रुपया लंबे समय तक इसी स्तर पर बना रहेगा।

एमके के मुताबिक, RBI की नेट शॉर्ट फॉरेन एक्सचेंज फॉरवर्ड पोजिशन 200 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई है। आसान भाषा में कहें तो केंद्रीय बैंक के ऐसे सौदे बड़ी मात्रा में हैं, जिनका निपटारा भविष्य में करना होगा। कुछ सौदों को आगे बढ़ाया जा सकता है या दूसरे सौदों से उनका असर संतुलित किया जा सकता है।

इसलिए सिर्फ करेंसी बाजार पर पाबंदियां लगाने से रुपये को लंबे समय तक संभालना मुश्किल होगा। इसके लिए डॉलर की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनना भी जरूरी है।

आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

अगर रुपये की गिरावट धीमी पड़ती है, तो विदेशों से आने वाले सामान की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे आयातित महंगाई को काबू में रखने में मदद मिलेगी। कच्चे तेल की कीमतें पहले से ऊंची हैं। ऐसे में रुपया ज्यादा कमजोर होने पर तेल आयात का खर्च और बढ़ सकता है। इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों और दूसरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

आखिर में, अर्थव्यवस्था पर इन फैसलों का कितना असर होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि RBI को ये पाबंदियां कितने समय तक जारी रखनी पड़ती हैं। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतें घटती हैं या नहीं और विदेशी निवेशकों का रुख बदलता है या नहीं, यह भी अहम होगा।

September CPI : सितंबर में रिटेल महंगाई 23 महीने के हाई पर आई, खाने-पीने की चीजों ने दिया सबसे तगड़ा झटका