कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स का फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट! NSE को SEBI की हरी झंडी, अब इस सिग्नल का है इंतजार

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) को कॉर्पोरेट बॉन्ड इंडेक्स पर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट शुरू करने के लिए मार्केट रेगुलेटर SEBI से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिल गया है। हालांकि अभी इस प्रोडक्ट को लॉन्च करने के लिए RBI से अहम मंजूरी मिलनी बाकी है। यह ऐसे समय में हुआ है, जब एनएसई के शेयर अभी हाल ही में बीएसई पर लिस्ट हुए हैं। ₹22563 करोड़ के आईपीओ को 5 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिलने के बाद इसके ₹1785 के शेयर 24 सितंबर को 1% से कम प्रीमियम में ₹1800 पर लिस्ट हुए थे।

क्या बदलेगा कॉर्पोरेट बॉन्ड इंडेक्स के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स से

एनएसई के प्रस्तावित प्रोडक्ट से मार्केट को कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट के रिस्क को मैनेज करने के लिए एक एक्सचेंज-ट्रेडेड इंस्ट्रूमेंट मिलेगा और इससे देश के कॉर्पोरेट बॉन्ड डेरिवेटिव्स मार्केट के डेवलपमेंट को सपोर्ट मिलेगा। कॉर्पोरेट बॉन्ड इंडेक्स फ्यूचर्स से रिस्क मैनेजमेंट, पोर्टफोलियो हेजिंग और प्राइस डिस्कवरी के लिए एक और जरिया मिलेगा।

यह पहल देश के फिक्स्ड-इनकम मार्केट को मजबूत करने और मार्केट में हिस्सा लेने वालों के लिए उपलब्ध एक्सचेंज-ट्रेडेड रिस्क-मैनेजमेंट प्रोडक्ट्स की रेंज को बढ़ाने की एनएसई की कोशिशों का हिस्सा है। एनएसई के चीफ बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर श्रीराम कृष्णन का कहना है कि सेबी से मिली एनओसी देश के फिक्स्ड-इनकम मार्केट के लिए एक अहम पड़ाव है। उनका कहना है कि बेहतर डेरिवेटिव इकोसिस्टम से कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट मजबूत होगा।

NSE के शेयरों की क्या है स्थिति

एनएसई के शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹1785 के भाव पर जारी हुए थे। ₹1800 पर लिस्ट होने के बाद 24 सितंबर यानी लिस्टिंग के ही दिन यह ₹1878 की रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचा था। इस हाई से फिसलने के बाद एनएसई के शेयर आज 1 अक्टूबर 2026 को ₹1755 के भाव तक आ गए जोकि इसके शेयरों के लिए रिकॉर्ड निचला स्तर है। फिलहाल बीएसई पर यह 0.29% की गिरावट के साथ ₹1757.85 के भाव पर है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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Share Market New Rule: देश का पहला क्लियरिंग कॉरपोरेशन और एनएसई (NSE) की सब्सिडरी एनएसई क्लियरिंग लिमिटेड 17 अगस्त से सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) स्कीम के तहत कम समय वाले कॉन्ट्रैक्ट शुरू करेगा। इसके तहत महज तीन दिन के सेटलमेंट साइकिल के साथ स्टॉक-लेंडिंग ट्रांजैक्शन हो सकेगा। एनएसई क्लियरिंग ने इससे जुड़ा सर्कुलर 14 अगस्त को जारी किया जिसके मुताबिक नए कॉन्ट्रैक्ट R3 सीरीज के तहत शुरू किए जाएंगे और हर दिन उपलब्ध होंगे। ये कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ उन स्टॉक्स के लिए उपलब्ध होंगे जो इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग के लिए एलिजिबल हैं यानी कि जो F&O सेगमेंट का हिस्सा हैं।

क्या है नियम

नए स्ट्रक्चर के तहत ट्रांजैक्शन वाले दिन यानी T Day पर किए गए SLB ट्रांजैक्शन का पहला हिस्सा T+1 दिन पर यानी अगले दिन सेटल होगा, जबकि उससे जुड़ा रिवर्स हिस्सा T+3 दिन पर सेटल होगा इसमें सेटलमेंट की छुट्टियां शामिल नहीं होंगी। अभी के एसएलबी कॉन्ट्रैक्ट्स के उलट AGM (एनुअल जनरल मीटिंग) या EGM (एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग) होने पर R3 कॉन्ट्रैक्ट्स को समय से पहले बंद नहीं किया जाएगा। साथ ही कम समय वाले इन कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए रीपेमेंट, रिकॉल और रोलओवर की सुविधाएं नहीं मिलेगी। मार्केट खुले रहने के दौरान यानी मार्केट टाइमिंग्स में क्लियरिंग और सेटलमेंट, रिस्क मैनेजमेंट और कॉरपोरेट एक्शन से जुड़े बाकी सभी नियम वैसे ही रहेंगे जैसे मौजूदा एसएलबी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए हैं।

R3 सीरीज के आने से मार्केट पार्टिसिपेंट्स को सिक्योरिटीज लेंडिंग ट्रांजैक्शन के लिए कम होल्डिंग पीरियड मिलता है, जबकि SLB कॉन्ट्रैक्ट्स का समय ज्यादा होता है यानी कि अगर किसी ट्रेडर को किसी शेयर को शॉर्ट करने के लिए केवल कुछ दिनों के लिए शेयर चाहिए, तो R3 कॉन्ट्रैक्ट उसके लिए लंबी अवधि वाले SLB कॉन्ट्रैक्ट की तुलना में अधिक बेहतर हो सकता है। इससे ट्रेडर्स और निवेशकों को शॉर्ट-टर्म बॉरोइंग और लेंडिंग की जरूरतों को मैनेज करने में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी मिल सकती है। इस प्रकार R3 कम अवधि वाला नया SLBM कॉन्ट्रैक्ट है, जिसमें शेयर T+3 पर वापस होंगे।

क्या है SLBM?

सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग मैकेनिज्म (SLBM) एक ऐसा सिस्टम है जिसके तहत निवेशक अपनी सिक्योरिटीज जैसे कि शेयर को एक तय समय के लिए दूसरे मार्केट पार्टिसिपेंट्स को उधार दे सकता है। इसके बदले में उन्हें लेंडिंग फीस मिलती है। यह सिस्टम उन निवेशकों के लिए बहुत काम का है जो अपनी सिक्योरिटीज से अतिरिक्त कमाई करना चाहते हैं, और उन ट्रेडर्स के लिए भी जिन्हें शॉर्ट-सेलिंग को लेकर शेयर उधार लेने की जरूरत होती है। इसके तहत उधार लेने वाला सिक्योरिटीज का इस्तेमाल करने के बदले उधार देने वाले को लेंडिंग फीस देता है। एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ट्रांजैक्शन को मैच करने और कोलेटरल, सेटलमेंट व अन्य रिस्क को मैनेज करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर देते हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।