SEBI ने अदाणी ग्रुप की पांच कंपनियों का केस ₹1.51 करोड़ में निपटाया, हिंडनबर्ग रिपोर्ट से जुड़ा था मामला

कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने अदाणी ग्रुप की पांच कंपनियों के खिलाफ चल रहे मामले को सेटल कर दिया है। इन कंपनियों ने कुल ₹1.51 करोड़ का भुगतान किया है। यह मामला अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के खुलासे से जुड़ा था। उसमें रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस (RPT) और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े सवाल उठाए गए थे।

SEBI ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट के आरोपों की जांच के दौरान इन मामलों की पड़ताल की थी। इसमें SEBI के Listing Obligations and Disclosure Requirements (LODR) नियमों, पुराने Listing Agreement और दूसरे लागू नियमों के संभावित उल्लंघन को देखा गया था।

इन पांच कंपनियों ने कितनी रकम दी?

सेटलमेंट के तहत Adani Enterprises ने ₹76.05 लाख दिए हैं। Adani Green Energy ने ₹45.50 लाख का भुगतान किया है। वहीं, Adani Total Gas, AWL Agri Business और Adani Energy Solutions ने ₹9.75 लाख-₹9.75 लाख दिए हैं।

इन पांचों रकम को जोड़ें तो कुल भुगतान करीब ₹1.51 करोड़ बैठता है।

Adani Enterprises पर क्या मामला था?

SEBI की कार्यवाही में Adani Enterprises पर अपनी एनुअल रिपोर्ट में कुछ रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस यानी ग्रुप कंपनियों के बीच लेनदेन की जानकारी नहीं देने का आरोप था। इसके अलावा कंपनी की ऑडिट और लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट्स ऐसी ऑडिट फर्मों ने साइन की थीं, जिनके पास वैध Peer Review Certificate नहीं था।

यह सर्टिफिकेट ऑडिट फर्म की क्वालिटी रिव्यू प्रक्रिया से जुड़ा प्रमाणपत्र है। SEBI ने इसी से जुड़े नियमों के संभावित उल्लंघन को भी कार्यवाही में शामिल किया था।

बाकी कंपनियों पर क्या आरोप थे?

Adani Total Gas, AWL Agri Business और Adani Green Energy के मामले में भी ऑडिट या लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट्स से जुड़ा मुद्दा था। इन रिपोर्ट्स पर ऐसी ऑडिट फर्म ने हस्ताक्षर किए थे, जिसके पास वैध सर्टिफिकेट नहीं था।

Adani Energy Solutions के मामले में जून 2015 की तिमाही की लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट को लेकर इसी तरह की आपत्ति थी।

कंपनियों ने आरोप स्वीकार नहीं किए

इन कंपनियों ने SEBI के साथ मामले को सेटल करने का रास्ता चुना। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनियों ने SEBI के जांच के नतीजों को स्वीकार कर लिया।

सेटलमेंट के तहत कंपनियों ने तथ्यों से जुड़े निष्कर्षों या कानूनी निष्कर्षों को न तो स्वीकार किया और न ही खारिज किया।

सितंबर में पूरा हुआ सेटलमेंट

SEBI की हाई पावर्ड एडवाइजरी कमेटी ने जून 2026 में संशोधित सेटलमेंट टर्म्स की सिफारिश की थी। इसके बाद अगस्त में SEBI के होलटाइम मेंबर्स के पैनल ने इन शर्तों को मंजूरी दी।

कंपनियों ने 5 सितंबर को SEBI को बताया कि सेटलमेंट की रकम जमा कर दी गई है। SEBI ने भी भुगतान मिलने की पुष्टि की। इसके बाद 22 सितंबर को SEBI ने इन मामलों को खत्म कर दिया।

क्या अब SEBI दोबारा कार्रवाई नहीं कर सकता?

ऐसा नहीं है। सेटलमेंट ऑर्डर में SEBI ने अपने अधिकार सुरक्षित रखे हैं। अगर सेटलमेंट के दौरान कंपनियों की ओर से दी गई कोई जानकारी बाद में गलत पाई जाती है, सेटलमेंट की शर्तों का उल्लंघन होता है या रकम तय करने में कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो SEBI आगे कार्रवाई कर सकता है।

ऐसी स्थिति में SEBI पुरानी कार्यवाही को फिर से शुरू कर सकता है या नया एक्शन शुरू कर सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

CAS पर SEBI के कंसल्टेशन पेपर में रखे गए ये अहम प्रस्ताव, 3 अक्टूबर तक सभी पक्षों के देनी है अपनी राय

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने एक्सपायरी के दिन CAS को लेकर कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। सेबी ने वायदा एक्सपायरी को CAS से डीलिंक करने या ब्लेंडेंड VWAP से सेटलमेंट का प्रस्ताव दिया है। साथ ही मार्केट टाइमिंग और ऑर्डर कैंसिलेशन पर लगाम से जुड़े प्रस्तावों पर भी राय मांगी गई है। CAS पर SEBI का कंसल्टेशन पेपर में कहा गया है कि इंडेक्स और स्टॉक्स वायदा सेटलमेंट के तरीके में बदलाव की समीक्षा की जाएगी। इसमें मार्केट की टाइमिंग को लेकर भी प्रस्ताव दिए गए हैं। SEBI ने अलग-अलग सात प्रस्ताव दिए हैं। इन पर तीन अक्तूबर तक सभी पक्षों से राय मांगी गई है।

पहला प्रस्ताव: ब्लेंडेड VWAP

सेबी के प्रस्ताव में कहा गया है कि एक्सपायरी के दिन VWAP और CAS दोनों का इस्तेमाल होना चाहिए। 30 मिनट के VWAP के साथ 10 मिनट के CAS से सेटलमेंट हो सकता है। CTS और CAS का अलग से कोई वेटेज ना हो।

दूसरा प्रस्ताव: पुराना VWAP सिस्टम

दूसरे प्रस्ताव में कहा गया है कि एक्सपायरी के दिन सेटलमेंट CAS से ना हो। एक्सपायरी के दिन 30 मिनट के VWAP से सेटलमेंट हो। कम से कम एक साल बाद फिर से समीक्षा हो। SEBI चाहता है कि लॉन्ग टर्म में ब्लेंडेड VWAP से सेटलमेंट हो।

तीसरा प्रस्ताव: इंडिकेटिव भाव ना दिखे

CAS के दौरान इंडेक्स का इंडिकेटिव भाव ना दिखाया जाए। इंडिकेटिव भाव से सट्टेबाजी बढ़ने का खतरा है। इंडेक्स में शामिल शेयरों के इंडिकेटिव भाव दिखाए जाते रहें।

चौथा प्रस्ताव: मार्केट टाइमिंग में बदलाव

इसके लिए पहला ऑप्शन यह है कि सभी शेयरों में पहले की तरह 3:30 तक ट्रेडिंग हो। 3:31 से 3:40 तक CAS चले। CAS वाले शेयरों में वायदा ट्रेडिंग 3:45 तक चले।

मार्केट टाइमिंग में बदलाव के लिए दूसरा ऑप्शन यह है कि CAS वाले शेयरों में 3:15 और नॉन CAS में 3:30 तक सामान्य ट्रेडिंग हो। 3:15 से 3:25 तक 10 मिनट का CAS हो। CAS वाले शेयरों में वायदा ट्रेडिंग 3:30 तक चले।

छठा प्रस्ताव: कैंसिलेशन पर लगाम

सेबी का अगला प्रस्ताव है कि CAS में +-1% के ऑर्डर कैंसिल नहीं किए जा सकेंगे। हालांकि +-1% के ऑफर में सुधार से जुड़े बदलाव हो सकेंगे। CAS के दौरान +-1% का प्राइस बैंड कायम रहे।

सातवां प्रस्ताव: अनएक्जीक्यूटेड आइसबर्ग ऑर्डर

अनएक्जीक्यूटेड आइसबर्ग ऑर्डर CAS में लाए जाएं। अभी अनएक्जीक्यूटेड आइसबर्ग ऑर्डर CAS में नहीं आते। सामान्य लिमिट ऑर्डर के तौर पर CAS में लाएं जाएं। पूरी पेंडिंग क्वॉंटिटी CAS के दौरान डिस्क्लोज हो।

खबर का असर

इस खबर के चलते BSE और एंजेल वन के शेयरों में तेजी आई है। इन पर SEBI के कंसल्टेशन पेपर का पॉजिटिव असर संभव है। दोनों शेयरों में CAS के बाद तेज गिरावट आई थी। SEBI के प्रस्तावों में पुराने VWAP पर लौटने का प्रस्ताव शामिल है। BSE और एंजेल वन दोनों में निचले स्तरों से अच्छा रिवर्सल दिखा है। हालांकि बीएसई का शेयर अभी लाल निशान में दिख रहा है। 1.15 बजे के आसपास यह शेयर 16.30 रुपए यानी 0.48 फीसदी की कमजोरी के साथ 3365 के स्तर पर दिख रहा था। आज का इसका दिन का हाई 3,452.70 रुपए है। वहीं, एंजेल वन का शेयर 2.90 रुपए यानी 0.95 फीसदी की गिरावट के साथ 302 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का हाई 310 रुपए है।

 

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Stock in Focus: ₹1050 करोड़ की डील पर शेयर बनेगा रॉकेट! पांच महीने में दिया था 264% रिटर्न

Indiabulls Share Price: इंडियाबुल्स ने फिनटेक क्लाउड प्राइवेट लिमिटेड में 70% हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक डील की है। इस सौदे के जरिए इंडियाबुल्स की एनबीएफसी फिनटेक टेक्नोलॉजी स्पेस में एंट्री हो रही है। कंपनी ने इसकी जानकारी 11 सितंबर की रात एक्सचेंज फाइलिंग में दी थी और अब इसका असर 15 सितंबर को स्टॉक मार्केट खुलने पर इसके शेयरों पर दिख सकता है। चूंकि गणेश चतुर्थी के मौके पर आज 14 सितंबर को स्टॉक मार्केट में कारोबार बंद है तो इस वजह इस बार का वीकेंड लंबा हो गया और शनिवार, रविवार, सोमवार की छुट्टियों के बाद अब यह मंगलवार 15 सितंबर को खुलेगा। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 11 सितंबर को बीएसई पर यह 5% के अपर सर्किट ₹25.89 पर बंद हुआ था।

Indiabulls और Fintech Cloud के बीच क्या हुई है डील

इंडियाबुल्स ने फिनटेक क्लाउड प्राइवेट लिमिटेड के साथ ₹1050 करोड़ की डील की है, जिसके तहत यह फिनटेक क्लाउड में 70% हिस्सेदारी हासिल करेगी। फिनटेक क्लाउड एक फिनटेक कंपनी है जोकि लोन ऑर्गेनाइजेशन और सर्विसिंग के लिए NBFCs (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज) को टेक सॉल्यूशंस मुहैया कराती है। साल 2021 में बनी फिनटेक क्लाउड को वित्त वर्ष 2025 तक कोई रेवेन्यू नहीं मिला था और फिर वित्त वर्ष 2026 में इसे ₹133.77 करोड़ का रेवेन्यू और ₹30.31 करोड़ का मुनाफा मिला था।

सौदे के तहत इंडियाबुल्स ₹1500 करोड़ का पेमेंट कैश में नहीं करेगी बल्कि इसके बदले एनसीएलटी-अप्रूव्ड मर्जर स्कीम के तहत फिनटेक क्लाउड के शेयरहोल्डर्स को इंडियाबुल्स के 21 करोड़ तक नए शेयर दिए जाएंगे। अभी इस सौदे को स्टॉक एक्सचेंजों, मार्केट रेगुलेटर सेबी और शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लेनी है और इसके 9-12 महीने में होने की उम्मीद है। हालांकि सौदे के तहत इंडियाबुल्स अभी तुरंत फिनटेक क्लाउड के बोर्ड में मेजॉरिटी डायरेक्टर्स नियुक्त करेगी।

एक साल में कैसी रही इंडियाबुल्स के शेयरों की चाल

इंडियाबुल्स के शेयरों ने कम समय में ही निवेशकों की ताबड़तोड़ कमाई कराई है। 25 फरवरी 2026 को बीएसई पर यह महज ₹8.93 के भाव में मिल रहा था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 5 महीने में ही यह 263.94% ऊपर चढ़कर 14 जुलाई 2026 को ₹32.50 पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस प्रकार महज पांच महीने में ही निवेशकों की पूंजी 3 गुना से अधिक बढ़ गई।

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NSE IPO पर आई सबसे बड़ी खबर! तगड़ी डिमांड, फिर भी क्यों घटा आईपीओ का साइज? जानिए क्या है माजरा

NSE IPO Latest News: ‘नेशनल स्टॉक एक्सचेंज’ (NSE) के आईपीओ का इंतजार कर रहे निवेशकों के लिए एक बेहद बड़ी खबर आई है। NSE ने मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास अपना अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) जमा कर दिया है।

हालांकि, इस बार आईपीओ से जुड़ा एक बड़ा ट्विस्ट सामने आया है। कंपनी के इस मेगा आईपीओ का कुल साइज घटकर लगभग ₹23,000 करोड़ रह गया है, जबकि पहले इसके ₹30,000 करोड़ के आसपास रहने का अनुमान था।

आइए समझते हैं कि आईपीओ का साइज क्यों घटा, कौन-कौन से बड़े निवेशक अपने शेयर बेच रहे हैं और इसका बाजार पर क्या असर होगा।

क्यों घटा NSE के IPO का साइज?

एनएससी का यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि एनएसई खुद कोई नए शेयर जारी नहीं कर रही है और आईपीओ से मिलने वाला पूरा पैसा उन मौजूदा शेयरधारकों के पास जाएगा जो अपने शेयर बेच रहे हैं।

जून में दाखिल किए गए ओरिजिनल DRHP में 14.89 करोड़ शेयर यानी NSE की कुल इक्विटी का लगभग 6% बेचने का प्रस्ताव था। लेकिन नए ड्राफ्ट के मुताबिक, कुछ प्रमुख सरकारी बीमा कंपनियों और वैश्विक वित्तीय दिग्गज मॉर्गन स्टेनली ने आईपीओ के जरिए बेचे जाने वाले अपने शेयरों की संख्या कम कर दी है।

किन-किन दिग्गजों ने घटाया अपना स्टेक सेल?

सूत्रों के मुताबिक, जिन प्रमुख संस्थागत निवेशकों ने बेचे जाने वाले शेयरों की संख्या घटाई है, उनमें ये प्रमुख कंपनियां शामिल हैं:

सरकारी बीमा कंपनियां:

GIC Re (General Insurance Corp): पहले 1.066 करोड़ शेयर बेचने का प्रस्ताव था।

New India Assurance: पहले 1.05 करोड़ शेयर बेचने की योजना थी।

National Insurance Company: पहले 60 लाख शेयर।

United India Insurance: पहले 60 लाख शेयर।

(शुरुआती ड्राफ्ट में ये चारों कंपनियां मिलकर कुल 3.37 करोड़ शेयर बेचने वाली थीं, जिसमें अब कटौती की गई है।)

मॉर्गन स्टेनली: मॉर्गन स्टेनली से जुड़ी संस्था MS Strategic (Mauritius) Ltd ने भी अपनी हिस्सेदारी बिक्री कम की है। मूल प्रॉस्पेक्टस में यह संस्था 1.60 करोड़ शेयर बेचने वाली थी।

संस्थागत निवेशकों में बंपर क्रेज

भले ही मौजूदा शेयरधारकों ने बेचे जाने वाले शेयरों की संख्या कम कर दी हो, लेकिन NSE के आईपीओ को लेकर बाजार में गजब का उत्साह है। सूत्रों का कहना है कि एंकर और संस्थागत निवेशकों की ओर से लगभग ₹85,000 करोड़ की डिमांड आ चुकी है। इससे यह साफ पता चलता है कि बड़े डोमेस्टिक और विदेशी निवेशकों (FIIs) के बीच भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज में हिस्सेदारी खरीदने की जबरदस्त होड़ मची हुई है।

एक दशक लंबे इंतजार के बाद ऐतिहासिक कदम

यह कदम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की लिस्टिंग की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक मील का पत्थर है। एनएसई ने लगभग 10 साल पहले पहली बार आईपीओ की प्रक्रिया शुरू की थी, जो कई तरह की विनियामक और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण रुकी हुई थी। UDRHP दाखिल होना यह संकेत देता है कि अब जल्द ही यह मेगा आईपीओ दलाल स्ट्रीट पर दस्तक देने वाला है।

क्या हो सकता है प्राइस बैंड, कब से खुलेगा और क्या चल रहा GMP?

बाजार सूत्रों के अनुसार एनएसई आईपीओ का अनुमानित प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर रहने की उम्मीद है। यह आईपीओ 18 सितंबर 2026 से खुलने और 22 सितंबर को बंद होने की संभावना जताई जा रही है। ग्रे मार्केट में इसे लेकर बाजार का माहौल गरम है। अनऑफिशियल ग्रे मार्केट में इसका GMP फिलहाल ₹225 से ₹250 के प्रीमियम के आसपास ट्रेड कर रहा है। वैसे बीते कुछ दिनों में इसमें थोड़ी गिरावट देखने को मिली है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FY27 में SBI में 12000 तक कर्मचारियों की हो सकती है ​हायरिंग, खुलेंगी 250 नई ब्रांच

सार्वजनिक क्षेत्र का भारतीय स्टेट बैंक (SBI) चालू वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 11,000 से 12,000 कर्मचारियों की भर्ती करने वाला है। साथ ही लगभग 250 नई ब्रांच खोलने का भी प्लान है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एक बातचीत में SBI के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने कहा कि बैंक चालू वित्त वर्ष में क्लर्क और अधिकारी स्तर पर करीब 11,000 से 12,000 नियुक्तियां करेगा। रिटायरमेंट और उभरती जरूरतों के आधार पर नियुक्तियों की संख्या कुछ कम या ज्यादा हो सकती है, लेकिन उम्मीद है कि वित्त वर्ष के अंत तक करीब 12,000 लोगों की भर्ती हो जाएगी।

पिछले साल बैंक ने बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की थीं, जिसमें 1,500 विशेषज्ञ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) अधिकारी भी शामिल हैं। इस साल आईटी क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में भर्तियों की जरूरत नहीं है। मार्च 2026 तक SBI के कर्मचारियों की संख्या 2.45 लाख से अधिक थी। बैंक की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में SBI ने कुल 25,633 कर्मचारियों की नियुक्ति की थी। अधिकारी स्तर पर 4,640, एसोसिएट लेवल पर 19,340 और कॉन्ट्रैक्चुअल स्टाफ के तौर पर 1,653 लोगों को हायर किया गया था।

शेट्टी ने कहा कि बड़ा ब्रांच नेटवर्क होने के बावजूद देश के कई हिस्सों में अब भी SBI के लिए विस्तार की गुंजाइश है। नई कॉलोनियों के विकसित होने के साथ-साथ व्यावसायिक रूप से सक्रिय जिलों में भी बैंक अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है। मौजूदा वित्त वर्ष में 200 से 250 नई ब्रांच खोलने की योजना है।

NSE IPO में कितनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO में शेयरों की बिक्री के बारे में शेट्टी ने कहा कि SBI और उसकी सब्सिडियरी SBI कैपिटल मार्केट्स मिलकर NSE में अपनी करीब एक प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं। NSE 0.65 प्रतिशत और NSE कैपिटल मार्केट्स 0.35 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है। अन्य शेयरधारकों के भी हिस्सेदारी बेचने की स्थिति में SBI समूह की ओर से बिक्री 1 प्रतिशत से कम भी रह सकती है। वर्तमान में SBI के पास NSE में 3.23 प्रतिशत और SBI कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

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NSE 30,000 करोड़ रुपये का IPO ला रहा है। बीते सप्ताह इसे कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI की मंजूरी मिल गई। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। इसका लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा है। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है।

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को अपना IPO लाने के लिए के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI की मंजूरी मिल गई है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। इसका लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा है। NSE के बोर्ड ने इस साल फरवरी में IPO लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। पब्लिक इश्यू का ड्राफ्ट जून 2026 में SEBI के पास जमा किया था। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका IPO लगभग 10 सालों से पेंडिंग है।

NSE ने सबसे पहले दिसंबर 2016 में अपना IPO प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। उस वक्त इरादा OFS के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने का था। लेकिन नियामकीय खामियों और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के चलते सेबी ने मंजूरी लंबे समय तक रोक दी थी। लेकिन अब रास्ता साफ है। आइए जानते हैं NSE IPO के बारे में अब तक क्या पता चला है…

साइज और नेचर

NSE IPO करीब 30,000 करोड़ रुपये का है। यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। इसलिए शेयर बिक्री से मिला पैसा, OFS में शेयर बेचने वालों के पास जाएगा। NSE को कुछ नहीं मिलेगा।

OFS में कौन बेचेगा शेयर

एक्सचेंज के मौजूदा शेयरधारक 14.89 करोड़ शेयर यानि लगभग 6% हिस्से को बिक्री के लिए रखेंगे। OFS में टेमासेक होल्डिंग्स पीटीई., LIC, SBI और SBI कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड शेयर बेच सकते हैं। SBI अपनी 0.65% हिस्सेदारी बेच सकता है। SBI कैपिटल मार्केट्स अपनी 0.35% हिस्सेदारी बेच सकती है। एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री कर सकती है।

शेयर बेचने वाले अन्य प्रमुख शेयरधारकों में कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड, टेमासेक की सब्सिडियरी अरांदा इनवेस्टमेंट्स (मॉरिशस) प्राइवेट लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शामिल हैं।

ओपनिंग और लिस्टिंग की संभावित तारीख

इश्यू के 15 सितंबर को खुलने और 24 या 25 सितंबर को शेयर बाजार में लिस्ट होने की संभावना है। शेयर BSE पर लिस्ट होंगे।

नए सप्ताह में तय हो सकता है प्राइस बैंड

कहा जा रहा है कि NSE अगले सप्ताह IPO के लिए प्राइस बैंड, लॉट साइज और अन्य डिटेल्स की घोषणा कर सकता है।

कैसे होगा देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO

भारत में अभी तक सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू Hyundai Motor India का रहा है। यह अक्टूबर 2024 में आया था और इसका साइज 27,858.75 करोड़ रुपये या 294.97 करोड़ डॉलर रहा था। अब NSE का 30,000 करोड़ रुपये का IPO आ रहा है। हालांकि, सबसे बड़े IPO के तमगे को लेकर इसकी टक्कर जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड से है। जियो लगभग 37,700 करोड़ रुपये का IPO लाने की तैयारी में है। लेकिन इसके आने का समय अभी घोषित नहीं हुआ है।

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IPO के बाद टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में हो सकती है NSE की एंट्री

यह IPO NSE को बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में शामिल कर सकता है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि IPO से NSE का मार्केट कैप 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

NSE के प्रमुख शेयरहोल्डर

NSE के शेयरधारकों में घरेलू वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, विदेशी निवेशक और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक है। जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के पास भी हिस्सेदारी है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी सब्सिडियरी SBI कैपिटल मार्केट्स की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 7.5 प्रतिशत है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) की एक्सचेंज में 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है। SHCIL में 50 प्रतिशत से ज्यादा ओनरशिप IFCI के पास है। विदेशी निवेशकों में टेमासेक की सब्सिडियरी अरांदा इन्वेस्टमेंट्स और कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) की भी NSE में अच्छी खासी हिस्सेदारी है।

IPO के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंक किए गए थे शॉर्टलिस्ट

NSE ने मार्च 2026 की शुरुआत में IPO पर काम करने के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया था। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, JM फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, HSBC सिक्योरिटीज, मॉर्गन स्टेनली भी शामिल हैं। इस मेगा इश्यू के लिए करीब 7 से 9 लॉ फर्म्स को भी शॉर्टलिस्ट किया गया, जिनमें सिरिल अमरचंद मंगलदास, Trilegal, और अमेरिका की Latham and Watkins भी शामिल हैं।

NSE की वित्तीय सेहत

NSE के लगभग 1.8 लाख शेयरहोल्डर हैं। अप्रैल-जून 2026 के दौरान एक्सचेंज का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये हो गया। कुल आय 9 प्रतिशत बढ़कर 5,252 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष 2025-26 में NSE का शुद्ध मुनाफा 15 प्रतिशत घटकर 10,302 करोड़ रुपये रह गया। कुल आय भी कम होकर 18,713 करोड़ रुपये पर आ गई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE के आईपीओ को सेबी की हरी झंडी, जानें किस तारीख को लिस्ट होंगे शेयर

NSE के आईपीओ के लिए रास्ता साफ हो गया है। इसे सेबी की हरी झंडी मिल गई है। मार्केट रेगुलेटर ने 4 सितंबर को एनएसई को ऑब्जर्वेशन लेटर इश्यू कर दिया। इस इश्यू का इनवेस्टर्स को लंबे समय से इंतजार रहा है। यह अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा।

जून में फाइल किया था DRHP

NSE ने सेबी के पास 17 जून, 2026 को ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल किया था। करीब एक दशक पहले एनएसई ने आईपीओ पेश करने की कोशिश की थी। लेकिन, रेगुलेटरी मसलों की वजह से इश्यू को मंजूरी नहीं मिल सकी थी। अब ऑब्जर्वेशन लेटर मिल जाने के बाद एनएसई का आईपीओ अंतिम चरण में प्रवेश कर गया है।

11 सितंबर को प्राइस बैंड का ऐलान 

एनएसई इस महीने के आखिर में आईपीओ लॉन्च कर सकता है। एक्सचेंज के शेयर BSE पर लिस्ट होंगे। बाजार के सूत्रों ने बताया है कि आरएचपी फाइलिंग 8 सितंबर यानी मंगलवार को हो सकती है। प्राइस बैंड का ऐलान 11 सितंबर को हो सकता है। एक हफ्ते बाद इश्यू बाजार में आ सकता है। शेयरों की लिस्टिंग 25 सितंबर को हो सकती है।

यह इश्यू पूरी तरह से OFS होगा

सूत्रों ने बताया कि अभी एनएसई की तरफ से इश्यू से जुड़े अहम डेट्स का ऐलान नहीं किया गया है। इस बारे में अभी एक्सचेंज मर्चेंट बैंकर्स से चर्चा कर रहा है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि इस इश्यू में एक्सचेंज नए शेयर इश्यू नहीं करेगा।

आईपीओ में 14.89 करोड़ शेयर बिकेंगे

एक्सचेंज के आईपीओ में 14.89 करोड़ शेयरों की बिक्री होगी, जो एनएसई के पेड-अप कैपिटल का करीब 6 फीसदी है। चूंकि, एक्सचेंज इस इश्यू में नए शेयर इश्यू नहीं करेगा, जिससे उसे आईपीओ से कोई पैसा नहीं मिलेगा। अनलिस्टेड मार्केट में एनएसई की वैल्यूएशन के आधार पर यह आईपीओ करीब 30,000 करोड़ रुपये का हो सकता है।

देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा 

यह अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इससे पहले ह्युंडई मोटर इंडिया ने 2024 में 27,870 करोड़ का आईपीओ पेश किया था, जो देश का सबसे बड़ा आईपीओ था। एनएसई के आईपीओ से यह रिकॉर्ड टूट जाएगा। हालांकि, एनएसई ने अभी आईपीओ के फाइनल साइज का ऐलान नहीं किया है।

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एसबीआई ग्रुप बेच रहा सबसे ज्यादा शेयर 

इस आईपीओ में सबसे ज्यादा शेयर एसबीआई ग्रुप बेच रहा है। एनएसई का मुकाबला बीएसई से है। बीएसई न सिर्फ भारत बल्कि एशिया का सबसे पुराना एक्सचेंज है। लेकिन, कैश और डेरिवेटिव के ट्रेडिंग वॉल्यूम के मामले में यह एनएसई से काफी पीछे है। BSE का शेयर 4 सितंबर को 3.17 फीसदी गिरकर 3,411 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर इस साल करीब 30 फीसदी चढ़ा है।

Mahanadi Coalfields IPO: एक और सरकारी कंपनी ने जमा किया ड्राफ्ट, कोल इंडिया बेचेगी 10% हिस्सा

सरकारी कंपनी कोल इंडिया के 100 प्रतिशत मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी, महानदी कोलफील्ड्स ने IPO के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा किया है। इस इश्यू में केवल ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा, जिसमें कोल इंडिया अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी या 66.18 करोड़ शेयरों को बिक्री के लिए रखेगी। IPO में नए शेयर जारी नहीं होंगे, लिहाजा महानदी कोलफील्ड्स को इस ऑफरिंग से कोई पैसा नहीं मिलेगा। शेयरों को बेचने से होने वाली पूरी कमाई कोल इंडिया के पास जाएगी।

महानदी कोलफील्ड्स मुख्य रूप से ओडिशा में काम करती है और इसने वित्त वर्ष 2026 में भारत के कुल घरेलू कोयला उत्पादन में 21 प्रतिशत का योगदान दिया। कोल इंडिया के उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 28.4 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारत के कुल कोयला उत्पादन में कोल इंडिया का योगदान लगभग 74 प्रतिशत था।

महानदी कोलफील्ड्स के शेयरों को BSE और NSE दोनों पर लिस्ट करने का प्रस्ताव है। SBI कैपिटल मार्केट्स, एक्सिस कैपिटल, BOB कैपिटल मार्केट्स, IDBI कैपिटल मार्केट्स एंड सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल सर्विसेज को इस इश्यू के लिए बुक-रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है। महानदी कोलफील्ड्स का वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध मुनाफा 1.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 10,678 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 2.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 30,550 करोड़ रुपये हो गया।

मार्च और अप्रैल में ये 2 सब्सिडियरी हुई थीं लिस्ट

कोल इंडिया की वर्तमान में 8 सहायक कंपनियां- ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, MCL, और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDIL) हैं।

इससे पहले भारत कोकिंग कोल लिमिटेड जनवरी 2026 में स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हुई थी। इसका पब्लिक इश्यू 1,068.78 करोड़ रुपये का था। सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड मार्च, 2026 में NSE और BSE पर लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,841.45 करोड़ रुपये का था।

2030 तक CIL की सभी सहायक कंपनियां लिस्ट कराने का है प्लान

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने कोयला मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि 2030 तक कोल इंडिया लिमिटेड की सभी सहायक कंपनियां स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हो जाएं। इस कदम का उद्देश्य निगरानी को सुव्यवस्थित करना, पारदर्शिता बढ़ाना और संपत्तियों के मोनेटाइजेशन के जरिए वैल्यू अनलॉक करना है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio Platforms IPO: सेबी ने जियो के आईपीओ को मंजूरी दी, 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे

Jio Platforms IPO: रिलायंस ग्रुप की टेलीकॉम कंपनी Jio Platforms की शेयर बाजार में एंट्री अब और करीब आ गई है। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने कंपनी के IPO प्लान को मंजूरी दे दी है। Jio Platforms ने 19 जून को DRHP दाखिल किया था। अब IPO की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

यह IPO भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है। कंपनी इस इश्यू में 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी। इससे करीब 2.93% हिस्सेदारी कम होगी। IPO से मिलने वाली रकम में से करीब ₹27,500 करोड़ लोन चुकाने में लगाए जाएंगे।

Jio Platforms में किसकी कितनी हिस्सेदारी?

Jio Platforms में Reliance Industries यानी RIL सबसे बड़ी शेयरधारक है। उसके पास 66.43% हिस्सेदारी है। Meta Platforms के पास 9.98% और Google के पास 7.73% हिस्सेदारी है।

सऊदी अरब के पब्लिक इनवेस्टमेंट फंड के पास 2.31% हिस्सेदारी है। KKR के पास भी 2.31% और Vista Equity Partners के पास 2.31% हिस्सेदारी है। Silver Lake के पास 1.88% हिस्सेदारी है।

इसके अलावा Mubadala के पास 1.85%, General Atlantic Singapore के पास 1.34%, Abu Dhabi Investment Authority के पास 1.16% और TPG Capital के पास 0.93% हिस्सेदारी है।

जून तिमाही में रेवेन्यू 12% बढ़ा

Jio Platforms का कारोबार भी अच्छी रफ्तार से बढ़ रहा है। जून तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 12% बढ़कर ₹45,961 करोड़ रहा।

ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹39,173 करोड़ रहा। EBITDA 15% बढ़कर ₹20,865 करोड़ पहुंच गया। EBITDA मार्जिन भी 52% से बढ़कर 53% हो गया। कंपनी का मुनाफा 9.2% बढ़कर ₹7,764 करोड़ रहा।

53.33 करोड़ पहुंचा सब्सक्राइबर बेस

जून तिमाही के अंत में Jio Platforms का सब्सक्राइबर बेस 53.33 करोड़ हो गया। पिछली तिमाही में यह 52.44 करोड़ था। एक साल पहले यह 49.81 करोड़ था।

कंपनी के 5G सब्सक्राइबर की संख्या 28.5 करोड़ पहुंच गई। डेटा इस्तेमाल भी बढ़ा है। जून तिमाही में कुल डेटा ट्रैफिक सालाना आधार पर 26.9% बढ़कर 69.4 अरब GB रहा। प्रति व्यक्ति औसत मासिक डेटा इस्तेमाल 43.7 GB रहा।

इन कंपनियों के IPO को भी मंजूरी

SEBI ने Bharat PET, Sadbhav Futuretech, MK Sons Fine Jewels, Pushp Brand India और Paras Healthcare के IPO को भी मंजूरी दी है।

इसके अलावा Paramotor Digital Technology के प्री फाइलिंग प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है।

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