Bitcoin 8 महीने के हाई पर पहुंचा, क्रिप्टो में आई इस तेजी की वजह क्या है?

Bitcoin Price: ग्लोबल रिस्क एसेट्स में सुधार का असर क्रिप्टोकरेंसी पर भी दिखा। यहीं वजह है कि बिटकॉइन की कीमत $87,000 के पार जाकर 8 महीने के हाई पर पहुंच गई। US स्पॉट बिटकॉइन ETF में नई खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग ने भी इस तेजी को बढ़ावा दिया। ब्लूमबर्ग के अनुसार, न्यूयॉर्क में बिटकॉइन की कीमत 7.7% बढ़कर $87,354 हो गई। पिछले हफ़्ते के निचले स्तर से इसकी कीमत में $10,000 से ज़्यादा का उछाल आया है। यह क्रिप्टोकरेंसी जनवरी के आखिर में देखे गए स्तरों के आसपास ट्रेड कर रही थी, हालांकि यह अक्टूबर में बने अपने रिकॉर्ड हाई से अभी भी लगभग एक-तिहाई नीचे है।

यह तेजी ग्लोबल स्टॉक और बॉन्ड में बढ़त के साथ आई। तेल की कम कीमतों और US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के बीच होने वाली प्रस्तावित समिट को लेकर उम्मीदों ने मार्केट के सेंटीमेंट को बेहतर बनाया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, छोटी क्रिप्टोकरेंसी में भी बढ़त देखी गई। डॉजकॉइन (Dogecoin) में 14% तक और XRP में लगभग 8% की बढ़ोतरी हुई।

इस तेज़ी के दौरान क्रिप्टो मार्केट में बड़े पैमाने पर पोजीशन लिक्विडेशन भी देखा गया।

ब्लूमबर्ग ने CoinGlass के डेटा का हवाला देते हुए बताया कि 24 घंटों में डिजिटल एसेट्स में लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन का लिक्विडेशन लगभग $1 बिलियन तक पहुंच गया, जो अगस्त के आखिर के बाद सबसे ज़्यादा स्तर है।

इस दौरान हुए लिक्विडेशन में शॉर्ट पोजीशन का हिस्सा लगभग $878 मिलियन था।

बिटकॉइन अब तक लगभग 44% ऊपर 

मुद्रेक्स (Mudrex) के बिजनेस हेड प्रतीक गुप्ता ने कहा कि फेडरल रिजर्व के रुख को अपेक्षाकृत नरम (dovish) माने जाने के बाद रिस्क के लिए बेहतर माहौल बना, जिससे इस तेज़ी को सपोर्ट मिला। साथ ही, तेल की गिरती कीमतों ने महंगाई को लेकर चिंताएं कम करने में मदद की। उन्होंने शॉर्ट कवरिंग को भी एक अतिरिक्त वजह बताया।

मुद्रेक्स के अनुसार, इस तिमाही में बिटकॉइन अब तक लगभग 44% ऊपर है। कंपनी ने कहा कि यह 2024 की चौथी तिमाही के बाद से इसकी सबसे मज़बूत तिमाही बढ़त होगी। फर्म ने यह भी बताया कि स्ट्रैटेजी (Strategy) ने 950 और बिटकॉइन जोड़े हैं, जिससे उनकी होल्डिंग 846,000 बिटकॉइन हो गई है।

ETF में आने वाले फंड (इनफ्लो) ने भी सपोर्ट का एक और ज़रिया दिया है।

गियोटस (Giottus) के CEO विक्रम सुब्बुराज ने कहा कि हफ़्ते की शुरुआत में भारी आउटफ्लो के बाद, US स्पॉट बिटकॉइन ETF में 18 सितंबर को $433 मिलियन और 21 सितंबर को $617.6 मिलियन का इनफ्लो दर्ज किया गया। CoinSwitch के मार्केट्स डेस्क ने कहा कि बिटकॉइन का $87,000 से ऊपर जाना $82,000 के लेवल को तोड़ने के बाद हुआ, जबकि लगभग $750 मिलियन की शॉर्ट पोजीशन लिक्विडेट हो गईं। उन्होंने फ्यूचर्स ओपन इंटरेस्ट में लगभग $2 बिलियन की बढ़ोतरी की ओर भी इशारा किया, जिससे पता चलता है कि कीमत में उछाल के साथ-साथ लेवरेज भी बढ़ा है।

हालांकि, लेवरेज में बढ़ोतरी का मतलब है कि इस उछाल का टिके रहना इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या स्पॉट डिमांड कीमतों को सपोर्ट करती रहती है। CoinSwitch ने कहा कि मजबूत अंडरलाइंग बाइंग महत्वपूर्ण होगी क्योंकि बढ़ी हुई पोजीशनिंग से कीमतों में तेज गिरावट का जोखिम भी बढ़ सकता है।

बिटकॉइन के लिए अहम लेवल क्या हैं?

WazirX के फाउंडर निश्चल शेट्टी ने कहा कि $86,000 से ऊपर जाने का मतलब है कि महीनों के दबाव के बाद मार्केट सेंटीमेंट में सुधार हुआ है। उन्होंने $80,000 से ऊपर रिकवरी, US एजेंसियों की लगातार रेगुलेटरी एक्टिविटी और तेल की कीमतों व ट्रेजरी यील्ड में नरमी को इस उछाल को सपोर्ट करने वाले कारकों के रूप में बताया।

शेट्टी ने इंस्टीट्यूशनल एक्टिविटी में नई तेजी पर भी जोर दिया। उनके डेटा के अनुसार, US स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगभग $617.6 मिलियन का डेली नेट इनफ्लो दर्ज किया गया, जो लगभग 7,610 बिटकॉइन के बराबर है, जबकि कुल ETF ट्रेडिंग वॉल्यूम लगभग $5.72 बिलियन था। US स्पॉट इथेरियम ETF में भी लगभग 55,640 ETH का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया।

ZebPay में ट्रेड के हेड हरीश जी वतनानी ने कहा कि बिटकॉइन की रिकवरी CLARITY एक्ट के लिए झटके और फेडरल रिजर्व के रेट फैसले को लेकर अनिश्चितता के दौर के बाद हुई। उन्होंने कहा कि मार्केट ने शुरू में नेगेटिव प्रतिक्रिया दी, लेकिन इन दो घटनाओं को लेकर अनिश्चितता खत्म होने के बाद यह स्थिर हो गया।

वतनानी ने कहा, “स्पॉट बिटकॉइन ETF में नए इनफ्लो, शॉर्ट कवरिंग और बेहतर होते व्यापक रिस्क सेंटीमेंट ने इस मूवमेंट को और सपोर्ट किया है।” यह उछाल ऑल्टकॉइन्स तक भी फैल गया है।

CoinDCX में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और ग्रोथ व क्रिप्टो बिजनेस हेड मिनल ठुकराल ने कहा कि बिटकॉइन कुछ ही घंटों में लगभग $82,000 से बढ़कर $85,000 से ऊपर पहुंच गया, और इस मूवमेंट को शुरू में US स्पॉट बिटकॉइन ETF इनफ्लो और तेल व इक्विटी मार्केट में बेहतर होते सेंटीमेंट से सपोर्ट मिला। थुकराल ने कहा कि इसके बाद रैली एक ऐसे ज़ोन में पहुंच गई जहां बहुत ज़्यादा ‘शॉर्ट’ पोजीशन थीं। एक घंटे में 300 मिलियन डॉलर से ज़्यादा की शॉर्ट पोजीशन बंद (लिक्विडेट) हो गईं, जिससे कीमतें बढ़ने पर ट्रेडर्स को बिटकॉइन वापस खरीदना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि SUI और NEAR में 20% से ज़्यादा की बढ़त हुई, जबकि RENDER और AVAX में लगभग 17% से 18% की बढ़ोतरी देखी गई।

तेज़ी से हुई इस रिकवरी के बावजूद, एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी कि इस बदलाव को व्यापक मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेडर्स कच्चे तेल की कीमतों और US ट्रेजरी यील्ड के ऊँचे स्तर को लेकर चिंतित बने हुए हैं, जबकि फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का असर रिस्क वाले एसेट्स पर पड़ना जारी रह सकता है।

इन्वेस्टर्स के लिए, सुब्बुराज ने कहा कि ब्रेकआउट के बाद $82,000-$82,800 का दायरा नज़र रखने के लिए एक अहम सपोर्ट ज़ोन होगा। थुकराल ने कहा कि जो इन्वेस्टर्स लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, वे कई बार में खरीदारी करने पर विचार कर सकते हैं, जबकि एक्टिव ट्रेडर्स को इस तेज़ी के बाद पोजीशन साइज़, कोलेटरल और लिक्विडेशन लेवल पर बारीकी से ध्यान देना चाहिए।

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US नागरिकों को निशाना बनाने वाले फर्जी कॉल सेंटर का ED ने किया भंडाफोड़, पटियाला-पुणे में रात तक चल रहा था पूरा नेटवर्क

(रिपोर्ट- शंकर आनंद) 

केंद्रीय जांच एजेंसी ED यानी प्रवर्तन निदेशालय के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत पटियाला, चंडीगढ़ और पुणे में तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान US नागरिकों को निशाना बनाकर ठगी और जबरन वसूली करने वाले संगठित फर्जी कॉल सेंटर नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस मामले में ईडी की तफ्तीश में सामने आया है कि ये कॉल सेंटर कॉरपोरेट कंपनियों की तरह संचालित किए जा रहे थे। इनमें बाकायदा कंप्यूटर, हेडसेट, डायलर और VoIP सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोप है कि नेटवर्क के मास्टरमाइंड गुजरात के अहमदाबाद से इन कॉल सेंटरों को रिमोट तरीके से नियंत्रित कर रहे थे।

पटियाला के दो कॉल सेंटरों में 194 कर्मचारी

ED के मुताबिक, पटियाला के अर्बन एस्टेट फेज-II में DM Web Solutions के नाम से चल रहे दो कॉल सेंटरों में कुल 194 लोग काम कर रहे थे। इन कॉल सेंटरों का संचालन और नियंत्रण अहमदाबाद के हर्षिल रावल और रवि रामी तथा उनके सहयोगियों के हाथ में था। वहीं, पुणे के हिंजवड़ी फेज-II स्थित Gera’s Imperial Complex में चल रहे कॉल सेंटर में 22 लोग काम कर रहे थे। इसे अहमदाबाद के विपुल कोटाडिया और उसके सहयोगियों द्वारा संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर से युवाओं की भर्ती

जांच में पता चला कि कॉल सेंटरों में काम करने वाले कई कर्मचारियों की पहचान स्थानीय नेटवर्क के जरिए की गई थी। इनमें बड़ी संख्या में नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्यों से आए लोग शामिल थे। ईडी के मुताबिक, इनमें से ज्यादातर कर्मचारी निम्न आय वर्ग और बेरोजगार पृष्ठभूमि से थे। उन्हें करीब 30 हजार से 50 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था। इसके अलावा पीड़ितों से सफलतापूर्वक रकम वसूलने पर इंसेंटिव भी दिया जाता था।

ऐसे चलता था US नागरिकों को ठगने का पूरा खेल

जांच में फर्जी कॉल सेंटर के काम करने का पूरा तरीका सामने आया है। सबसे पहले मास्टरमाइंड कथित तौर पर अमेरिकी नागरिकों का डेटा हासिल करते थे। इसके बाद सिस्टम के जरिए बड़े पैमाने पर स्पैम ई-मेल या कंप्यूटर पर पॉप-अप अलर्ट भेजे जाते थे। इन फर्जी अलर्ट में पीड़ितों को बताया जाता था कि उनके कंप्यूटर में वायरस है, बैंक अकाउंट खतरे में है या उनकी पहचान और कानूनी स्थिति से जुड़ी कोई गंभीर समस्या है। इसके साथ एक फर्जी टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर दिया जाता था। पीड़ित जब उस नंबर पर फोन करता था तो कॉल सेंटर में उसे अलग-अलग स्तर के कर्मचारियों के पास भेजा जाता था।

Opener से Banker और फिर Closer

इस फर्जीवाड़े को तीन चरणों में अंजाम दिया जाता था, उसे हम इस तरह से समझ सकते हैं:-

  • पहला चरण:- Opener/Dialler.. शुरुआत में Opener पीड़ित से बात करता था। वह खुद को Amazon, Microsoft, PayPal जैसी कंपनियों के टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी के तौर पर पेश कर सकता था। उसका मकसद पीड़ित का भरोसा हासिल करना और उसकी चिंता का स्तर समझना होता था।
  • दूसरा चरण- Banker: इसके बाद Banker की भूमिका आती थी। वह कथित तौर पर पीड़ित के बैंक अकाउंट, उपलब्ध रकम और चल-अचल संपत्तियों के बारे में जानकारी हासिल करता था, ताकि पैसे वसूलने का तरीका तय किया जा सके।
  • तीसरा चरण- Closer:- इसके बाद कॉल Closer को ट्रांसफर की जाती थी। Closer पीड़ित पर दबाव बनाने के लिए खुद को अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसी, बैंक के फ्रॉड डिविजन या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पेश करता था। पीड़ित को तत्काल भुगतान नहीं करने पर कानूनी या आर्थिक नुकसान की धमकी दी जाती थी।

Gift Card, कैश और गोल्ड के जरिए वसूली

ED की जांच में सामने आया कि पीड़ितों से रकम हासिल करने के लिए पारंपरिक बैंकिंग चैनल के बजाय अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था। पीड़ितों को Apple और Google Play जैसे गिफ्ट कार्ड खरीदने, कैश भेजने या सोना खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था। कुछ मामलों में अमेरिका में मौजूद कूरियर के जरिए पीड़ितों से कैश या गोल्ड कलेक्ट करने की व्यवस्था भी की जाती थी। इसके बाद रकम को क्रिप्टोकरेंसी, हवाला और अन्य माध्यमों के जरिए भारत सहित दूसरे देशों में ट्रांसफर कर कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी।

Cloud के जरिए रिमोट कंट्रोल

ED के अनुसार, पटियाला और पुणे के कॉल सेंटरों में लगे कंप्यूटरों को मास्टरमाइंड Cloud के जरिए रिमोट तरीके से नियंत्रित करते थे। टारगेट का नाम और संपर्क विवरण भी कर्मचारियों को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाता था। कॉल-ब्लास्ट की शुरुआती प्रक्रिया भी मास्टरमाइंड द्वारा नियंत्रित सिस्टम और IT सपोर्ट टीम के जरिए संचालित की जाती थी। इसके बाद Opener, Banker और Closer की पूरी प्रक्रिया के जरिए पीड़ित से रकम वसूलने का काम होता था।

गुजरात के अहमदाबाद से होता था रकम का प्रोसेसिंग और लेयरिंग

जांच में सामने आया कि कथित तौर पर हर्षिल रावल और रवि रामी पीड़ितों से हासिल रकम के आगे के ट्रांसफर और प्रोसेसिंग की व्यवस्था करते थे। ED के मुताबिक, अपराध से हासिल रकम को विभिन्न माध्यमों से भारतीय मुद्रा में बदला जाता था। इसके बाद इस पैसे का इस्तेमाल चल-अचल संपत्तियां खरीदने में किया जाता था या रकम को क्रिप्टो/बिटकॉइन के रूप में रखा जाता था। कुछ रकम देश के बाहर भी रखे जाने की जानकारी जांच में सामने आई है।

Digital Evidence से सामने आई पूरी चेन

ED की तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं। इन साक्ष्यों से कथित तौर पर हवाला ऑपरेटरों, अंगड़िया फर्मों और अमेरिका में पीड़ितों से वसूली गई रकम के कलेक्शन में शामिल लोगों की भूमिका सामने आई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, डिजिटल एविडेंस से भारत के अलग-अलग हिस्सों में संचालित फर्जी कॉल सेंटरों के बीच एक संगठित नेटवर्क की जानकारी मिली है।

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फेड चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई पर चेताया, बोले- 2% इंफ्लेशन का लक्ष्य हासिल करना जरूरी

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि महंगाई अभी इतनी नहीं घटी है कि फेड निश्चिंत हो सके। जब तक महंगाई के 2% लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ने का भरोसा नहीं होता, तब तक फेड को काम करना होगा।

यह मई में फेड चेयर बनने के बाद वार्श का पहला बड़ा भाषण था। उन्होंने शुक्रवार को अमेरिका के व्योमिंग में जैक्सन होल में फेड के सालाना सम्मेलन में यह बात कही। वार्श ने कहा कि 2% का महंगाई लक्ष्य तय है। फेड इसी लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करेगा। उनके मुताबिक, कीमतों में स्थिरता लाना फेड की जिम्मेदारी है।

महंगाई में अभी बड़ा सुधार नहीं

वार्श ने कहा कि गर्मियों में PCE और CPI के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि महंगाई की मूल स्थिति में बड़ा सुधार आ गया है। उन्होंने कहा कि महंगाई अभी भी 2% से ऊपर है। इसलिए फिलहाल फेड का मुख्य फोकस कीमतों पर होना चाहिए।

ब्याज दर है फेड का बड़ा हथियार

वार्श के मुताबिक, मौजूदा वित्तीय स्थितियां अभी बहुत सख्त नहीं हैं। ऐसे में ब्याज दर फेड का सबसे अहम हथियार है। उन्होंने कहा कि महंगाई अपने आप 2% तक नहीं आएगी। इसे स्थिर करना फेड की जिम्मेदारी है।

ब्याज दर बढ़ाने पर बंटी राय

अब बड़ा सवाल ब्याज दरों को लेकर है। अर्थशास्त्रियों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि महंगाई को काबू करने के लिए आने वाले महीनों में दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं।

जुलाई की बैठक में फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था। हालांकि, कई अधिकारियों ने दर बढ़ाने का समर्थन किया था। बैठक के मिनट्स में भी संकेत मिले थे कि अगर महंगाई कम नहीं हुई तो फेड को नीति और सख्त करनी पड़ सकती है।

पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर हुई थी आलोचना

जुलाई की बैठक के बाद वार्श की प्रेस कॉन्फ्रेंस की आलोचना भी हुई थी। आलोचकों का कहना था कि वह दरें स्थिर रखने की वजह साफ तरीके से नहीं बता पाए।

उसके बाद निवेशकों ने लंबी अवधि वाले अमेरिकी बॉन्ड बेचने शुरू किए। इससे उनकी यील्ड करीब दो दशक के उच्च स्तर तक पहुंच गई। इसे फेड के 2% महंगाई लक्ष्य को लेकर निवेशकों के भरोसे में कमी के संकेत के तौर पर देखा गया।

अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत

हालांकि, जुलाई की बैठक के बाद कुछ आंकड़ों से अर्थव्यवस्था में कमजोरी के संकेत मिले हैं। जुलाई में रिटेल बिक्री एक साल से ज्यादा समय में सबसे ज्यादा गिरी। कोर महंगाई भी सीमित रही। कंपनियों ने जुलाई में उम्मीद के उलट नौकरियां घटाईं। इससे पहले के दो महीनों के रोजगार आंकड़ों में भी कटौती की गई।

इन आंकड़ों के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद कम हुई है। शुक्रवार सुबह फेडरल फंड्स फ्यूचर्स के मुताबिक, सितंबर में दर बढ़ने की संभावना करीब 36% थी। जुलाई के अंत में यह 70% से ज्यादा थी।

बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर में किसने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया? जानिए वक्त के साथ तस्वीर कैसे बदली

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर में किसने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया? जानिए वक्त के साथ तस्वीर कैसे बदली

बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर ने पिछले कुछ महीनों में काफी उतार-चढ़ाव देखा है। तीनों ने अलग-अलग समय में अलग रिटर्न दिया है। कुछ अवधि में बिटकॉइन आगे रहा। वहीं लंबी अवधि में सिल्वर ने भी शानदार प्रदर्शन किया।

कम अवधि में बिटकॉइन आगे

1 महीने और 6 महीने के रिटर्न में बिटकॉइन सबसे आगे रहा। 1 महीने में इसका रिटर्न 17.23% रहा। 6 महीने में यह बढ़कर 22.26% हो गया। गोल्ड ने भी लगातार बढ़त दिखाई। हालांकि, शॉर्ट टर्म में बिटकॉइन की तेजी ज्यादा रही।

3 साल में सिल्वर ने मारी बाजी

3 साल की अवधि में तस्वीर बदल जाती है। यहां सिल्वर सबसे आगे रहा। इसका सालाना औसत रिटर्न 48.97% रहा। इसी अवधि में बिटकॉइन ने 47.46% और गोल्ड ने 41.06% का सालाना औसत रिटर्न दिया। यानी लंबी अवधि में सिल्वर ने बिटकॉइन और गोल्ड दोनों को पीछे छोड़ दिया।

₹10,000 की SIP का क्या हुआ?

एक साल की अवधि में अगर हर महीने ₹10,000 की SIP बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर में की जाती, तो तीनों में निवेश का नतीजा अलग होता। इससे पता चलता है कि नियमित निवेश करने पर अलग-अलग एसेट ने कैसा प्रदर्शन किया। यहां SIP का मतलब हर महीने एक तय रकम निवेश करना है। इससे बाजार के अलग-अलग भाव पर निवेश होता रहता है।

बिटकॉइन ने 3 साल में भी शानदार कमाई की

CoinDCX की ग्रोथ और क्रिप्टो बिजनेस हेड मीनल ठुकराल के मुताबिक, बिटकॉइन का लंबी अवधि का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है।

उनके मुताबिक, 24 अगस्त 2023 को लगाए गए $26,162 बढ़कर $77,472 हो गए। यानी निवेश पर 244% से ज्यादा रिटर्न मिला। रकम करीब 3.44 गुना हो गई। हालांकि, इस दौरान बिटकॉइन में कई बड़ी गिरावट भी आईं। इसलिए सिर्फ तेजी देखकर निवेश करना सही नहीं है। लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखना अहम रहा।

बिटकॉइन का सफर काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा

बिटकॉइन ने 7 अक्टूबर 2025 को $1,25,752 का ऑल टाइम हाई बनाया था। 2026 में यह 15 जनवरी को $96,931 तक पहुंचा। इसके बाद कीमत में गिरावट आई। 1 जुलाई को बिटकॉइन $58,562 तक फिसल गया।

अगस्त के पहले हफ्ते में यह करीब $62,000 से $65,000 के स्तर पर था। 26 अगस्त तक बिटकॉइन करीब $80,000 से $80,300 के बीच कारोबार कर रहा था।

गोल्ड में भी तेज उतार-चढ़ाव

गोल्ड जनवरी 2026 में $5,500 प्रति औंस तक पहुंचा था। जुलाई में इसकी कीमत $4,000 प्रति औंस से नीचे आ गई। इसके बाद गोल्ड में फिर तेजी आई। 26 अगस्त तक यह $4,630 प्रति औंस के ऊपर कारोबार कर रहा था। कमजोर डॉलर और अमेरिका की वित्तीय स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता ने गोल्ड को सपोर्ट दिया है।

सिल्वर भी तेजी से पलटा

सिल्वर जनवरी में करीब $120 प्रति औंस पर था। जुलाई में यह गिरकर $55 से $60 के दायरे में आ गया। इसके बाद सिल्वर में तेजी लौटी। 26 अगस्त तक इसकी कीमत करीब $63 से $70 प्रति औंस के बीच थी। सिल्वर की तेजी को गोल्ड की मजबूती से भी सपोर्ट मिला।

निवेश से पहले क्या समझें?

बिटकॉइन, गोल्ड और सिल्वर का प्रदर्शन हर अवधि में अलग रहा है। छोटी अवधि में बिटकॉइन आगे रहा। वहीं 3 साल में सिल्वर ने सबसे ज्यादा सालाना औसत रिटर्न दिया।

इसलिए सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। बिटकॉइन और सिल्वर में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है। निवेश से पहले जोखिम और अपने निवेश के लक्ष्य को जरूर देखना चाहिए।

Gold Price Today: रक्षाबंधन पर सोना ₹3300 सस्ता हुआ, चांदी का ₹5000 गिरा भाव

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Q1 Results: टाटा ग्रुप की कंपनी का मुनाफा 32% बढ़ा, शेयरों पर रहेगी नजर

Q1 Results: टाटा ग्रुप की एग्री-इनपुट कंपनी Rallis India ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का प्रदर्शन इस बार उम्मीद से बेहतर रहा। मुनाफा और रेवेन्यू, दोनों में बढ़ोतरी हुई है।

कंपनी का शुद्ध मुनाफा 31.6% बढ़कर ₹125 करोड़ हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹95 करोड़ था।

रेवेन्यू और EBITDA दोनों बढ़े

जून तिमाही में Rallis India का रेवेन्यू 6.8% बढ़कर ₹1,022 करोड़ रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह कम था। वहीं, EBITDA 23.3% बढ़कर ₹185 करोड़ पहुंच गया।

कंपनी का EBITDA मार्जिन 15.7% से बढ़कर 18.1% हो गया। इसका मतलब है कि कंपनी पहले के मुकाबले ज्यादा मुनाफे के साथ कारोबार कर रही है। बेहतर प्राइसिंग, लागत पर नियंत्रण और प्रोडक्ट मिक्स में सुधार से मार्जिन मजबूत हुआ।

Crop Care बिजनेस ने दिखाई मजबूती

Rallis India के Crop Care कारोबार का रेवेन्यू 7% बढ़कर ₹697 करोड़ पहुंच गया। इस कारोबार में रिटेल यानी B2C बिजनेस 19% बढ़ा। हालांकि, B2B कारोबार में 19% की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद कुल कारोबार बढ़त में रहा।

तिमाही के दौरान कंपनी ने फसल सुरक्षा से जुड़े Balwan, Prodim Ultra और Kengen नाम के तीन नए प्रोडक्ट लॉन्च किए। कंपनी ने फील्ड प्रोग्राम्स पर भी जोर दिया। साथ ही इन्वेंट्री मैनेजमेंट में सुधार किया। इसका फायदा कारोबार पर साफ दिखाई दिया।

Seeds कारोबार में भी अच्छी ग्रोथ

Rallis India का Seeds कारोबार भी मजबूत रहा। इस सेगमेंट का रेवेन्यू 6% बढ़कर ₹325 करोड़ पहुंच गया। प्री-सीजन डिमांड और सही समय पर प्रोडक्ट प्लेसमेंट का फायदा कंपनी को मिला।

तिमाही के दौरान कंपनी ने कपास, धान और बाजरा कैटेगरी में 9 नए प्रोडक्ट लॉन्च किए। इनमें उत्तर भारत के लिए दो नए कॉटन हाइब्रिड भी शामिल हैं। इसके अलावा Dhaanya ब्रांड के तहत हर्बीसाइड-टॉलरेंट डायरेक्ट-सीडेड राइस भी बाजार में उतारा गया।

कंपनी ने क्या कहा?

Rallis India के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला ने कहा कि कंपनी ने मजबूत रणनीति और बेहतर परिचालन की बदौलत अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि मुनाफे में सुधार के साथ-साथ नए प्रोडक्ट्स पर भी लगातार निवेश किया जा रहा है।

उनके मुताबिक, कंपनी आगे भी भारतीय किसानों के लिए नए और बेहतर कृषि समाधान विकसित करने पर फोकस बनाए रखेगी। साथ ही सभी कारोबारों में अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को और मजबूत करेगी।

नतीजों से पहले सोमवार को Rallis India का शेयर 2.6% की बढ़त के साथ ₹240 पर बंद हुआ।

Bitcoin Price Today: बिटकॉइन एक साल में 45% क्रैश हुआ, एक्सपर्ट्स बोले – अभी दूर रहने में ही भलाई

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Bitcoin Price Today: बिटकॉइन एक साल में 45% क्रैश हुआ, एक्सपर्ट्स बोले – अभी दूर रहने में ही भलाई

Bitcoin Price Today: क्रिप्टो बाजार में सोमवार को दबाव देखने को मिला। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन करीब 1.63% टूटकर 63,500 डॉलर के आसपास पहुंच गई। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। निवेशकों को डर है कि अगर महंगाई फिर बढ़ी, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकता है।

एक साल में 45% क्रैश हुआ

बिटकॉइन की कीमत में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले 6 महीने में यह 30.05% गिर चुका है। वहीं, 1 साल में बिटकॉइन 45.44% टूटा है। हालांकि, पिछले 5 साल में इसने 87.77% का रिटर्न जरूर दिया है। लेकिन, इसके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए यह बेहद कम है।

बिटकॉइन की कीमत गिरने की 5 बड़ी वजह

1. अमेरिका-ईरान तनाव : बिटकॉइन की गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। दोनों देशों के बीच हालात बिगड़ने से दुनियाभर के बाजारों में डर का माहौल है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। वे क्रिप्टो से पैसा निकालकर सोना और डॉलर जैसी सुरक्षित जगहों पर लगाने लगते हैं। इसका असर बिटकॉइन पर भी साफ दिखा।

2. कच्चा तेल महंगा : तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया। महंगा तेल मतलब महंगाई बढ़ने का खतरा। अगर महंगाई बढ़ती है, तो ब्याज दरें भी लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। यही डर क्रिप्टो बाजार पर भारी पड़ रहा है।

3. फेड की ब्याज दर : निवेशकों को लग रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरें कम नहीं करेगा। कुछ लोगों को तो यह भी उम्मीद है कि साल के आखिर में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। ऊंची ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर बिटकॉइन जैसी जोखिम वाली एसेट्स के लिए अच्छा नहीं माना जाता।

4. अहम स्तर पार न कर पाना : बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर के बीच का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद कई ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। बिकवाली बढ़ी और कीमत 63,500 डॉलर के करीब पहुंच गई। तकनीकी चार्ट भी फिलहाल कमजोरी का संकेत दे रहे हैं।

5. खरीद से ज्यादा बिकवाली : एक अच्छी बात यह है कि स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगातार पैसा आ रहा है। इसका मतलब बड़े निवेशकों की दिलचस्पी अभी खत्म नहीं हुई है। लेकिन दूसरी तरफ, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। इसलिए खरीदारी का असर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा और बिटकॉइन दबाव में बना हुआ है।

बिटकॉइन के लिए अहम लेवल क्या हैं?

Delta Exchange की रिसर्च एनालिस्ट रिया सहगल का कहना है कि कि बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद मुनाफावसूली बढ़ी और कीमत नीचे आ गई।

उनके मुताबिक, अगर बिटकॉइन 63,000 डॉलर के नीचे जाता है, तो यह 62,300 से 61,800 डॉलर तक फिसल सकता है। अब बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यही चीजें आगे बिटकॉइन की दिशा तय कर सकती हैं।

क्या अब बिकवाली थम रही है?

Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत का कहना है कि गिरावट के बीच कुछ अच्छे संकेत भी मिल रहे हैं। Glassnode के ऑन-चेन डेटा से पता चलता है कि लंबे समय से बिटकॉइन होल्ड करने वाले निवेशकों की बिकवाली अब कम होने लगी है। इसका मतलब है कि घबराहट में होने वाली बड़ी बिकवाली शायद अपने आखिरी दौर में है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में स्पॉट बिटकॉइन ETF में करीब 290 मिलियन डॉलर का शुद्ध निवेश आया है। इससे बाजार को सहारा मिला है। हालांकि, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। यही वजह है कि बिटकॉइन अभी भी अपने 50 महीने के मूविंग एवरेज यानी करीब 65,900 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है।

निवेशकों के लिए क्या सलाह है?

Pi42 के को-फाउंडर और सीईओ अविनाश शेखर का कहना है कि ETF में लगातार पैसा आना अच्छी बात है। इससे पता चलता है कि बड़े निवेशकों का भरोसा अभी भी बना हुआ है। उनके मुताबिक, बाजार इस समय एक हेल्दी कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहा है। यानी आगे की तेजी से पहले यह सामान्य ठहराव हो सकता है।

वहीं, Giottus के सीईओ विक्रम सुब्बुराज का कहना है कि छोटी अवधि की तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि जब तक बिटकॉइन 65,000 डॉलर के ऊपर टिक नहीं जाता और ETF में लगातार मजबूत निवेश नहीं आता, तब तक थोड़ा-थोड़ा निवेश करना और ज्यादा जोखिम लेने से बचना बेहतर रणनीति होगी।

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रूस-ईरान ने क्रिप्टो में ₹9.92 लाख करोड़ का व्यापार किया:दुनिया के बैंकिंग सिस्टम से अलग नेटवर्क बनाया; ड्रोन, तेल और हथियार खरीदे

रूस, ईरान और उत्तर कोरिया ने दुनिया की बैंकिंग व्यवस्था से अलग क्रिप्टो के जरिए एक समानांतर भुगतान सिस्टम खड़ा कर लिया है। क्रिप्टो लेनदेन पर नजर रखने वाली संस्था चेनालिसिस के मुताबिक, 2025 में इन्होंने क्रिप्टो के जरिए ₹9.92 लाख करोड़ का लेनदेन किया है। यह 2024 के मुकाबले 8 गुना ज्यादा है। ये देश इस रकम का इस्तेमाल सिर्फ ट्रेड या बचत के लिए नहीं, बल्कि ड्रोन, हथियारों के पुर्जे, सैन्य तकनीक व तेल के भुगतान में कर रहे हैं। रूस ने अपनी क्रिप्टो करेंसी तैयरा की रूस ने रूबल से जुड़ा ए75 टोकन तैयार किया। इसमें रूस में रूबल देकर विदेश में क्रिप्टो से बदला जा सकता है। मई तक इसमें 11.4 लाख करोड़ के लेनदेन हो चुके हैं। नेटवर्क में 41 हजार से ज्यादा खाते व 2.5 लाख ट्रांसफर दर्ज हुए। ईरान ने घरेलू एक्सचेंजों को तेल बिक्री और विदेशी भुगतान की वैकल्पिक पाइपलाइन बना लिया। रिवोल्यूशनरी गार्ड क्रिप्टो से तेल का पैसा लेते हैं और उसे डिजिटल वॉलेट में दूसरे देशों में भेजते हैं। विशेषज्ञ क्रिप्टो को रूस-ईरान के लिए प्रतिबंधों के समानांतर चलने वाली स्थायी वित्तीय व्यवस्था बता रहे हैं। कोरिया: क्रिप्टो चोरी से ₹20 हजार करोड़ जुटा हथियार खरीदे उत्तर कोरिया ने क्रिप्टो चोरी को कमाई और हथियार कार्यक्रम का जरिया बना लिया है। 2025 में उसके हैकरों ने 20 हजार करोड़ चुराए। सबसे बड़ी वारदात 21 फरवरी को हुई, जब लाजारस समूह ने बायबिट से 14,310 करोड़ उड़ाए। एफबीआई ने इसे ‘ट्रेडरेटर’ नेटवर्क से जोड़ा। 2016 से उ. कोरिया 263 घटनाओं में 6.75 अरब डॉलर की क्रिप्टो चुरा चुका है। इसे वह मिसाइल व सैन्य उपकरण खरीदने में लगा रहा है। ईरान: सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज का सुप्रीम लीडर के घराने से संबंध ईरान का सबसे बड़ा क्रिप्टो एक्सचेंज नोबाइटेक्स। देश के करीब 70% डिजिटल मुद्रा लेनदेन संभालता है और इसके 1.1 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। चीनी नेटवर्क रोज ₹4,200 करोड़ रुपए सफेद कर रहे चीन से जुड़े मनी-लॉन्ड्रिंग नेटवर्क अब ‘लॉन्ड्रिंग-एज-ए-सर्विस’ मॉडल पर काम कर रहे हैं। चेनालिसिस के मुताबिक, चीनी नेटवर्क ₹4,200 करोड़ रोजाना ब्लैक मनी को व्हाइट में बदल रहे हैं। 2025 में इन्होंने ₹1.54 लाख करोड़ को व्हाइट में बदला। ये नेटवर्क प्रतिबंधित देशों के भुगतान और आतंकी फंडिंग की रकम को एक साथ प्रोसेस करते हैं। क्रिप्टो कंपनियों में फर्जी नौकरी; ₹26,700 करोड़ जुटाए फर्जी पहचान, एआई से बने दस्तावेज और डीपफेक इंटरव्यू के जरिए चीन, उत्तर कोरिया व ईरान जैसे देशों के ऑपरेटिव्स ने 40 देशों की क्रिप्टो व तकनीकी कंपनियों में रिमोट नौकरियां हासिल कीं। इस नेटवर्क ने दो वर्षों में ₹26,700 करोड़ जुटाए। कई मामलों में स्थानीय मददगारों ने ‘फर्म’ चलाए, ताकि कर्मचारी उसी देश में काम करता दिखाई दे। —————————————- ये खबर भी पढ़ें… क्रिप्टो मार्केट वैल्यू एक महीने में ₹100 लाख करोड़ घटी:30% कम होकर ₹261 लाख करोड़ पर आई; बिटकॉइन ₹1.10 करोड़ से ₹76 लाख पहुंचा ग्लोबल क्रिप्टो मार्केट की वैल्यू 3 ट्रिलियन डॉलर से नीचे आ गई है। कॉइनमार्केटकैप के अनुसार अक्टूबर में ये 4.28 ट्रिलियन डॉलर थी, जो अब घटकर 2.95 ट्रिलियन डॉलर पर आ गई है। रुपए में वैल्यू करीब 379 लाख करोड़ से करीब 100 लाख करोड़ घटकर 261 लाख करोड़ हो गई है। यानी, करीब एक महीने में वैल्यू में 30% से ज्यादा की गिरावट आई है। पूरी खबर पढ़ें…

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Asian Market Today: एशियाई बाजारों में बढ़त, माइक्रोन की मजबूत कमाई के बाद कोस्पी 5% उछला, निक्केई 1% ऊपर

Asian Market Today: US चिपमेकर माइक्रोन की अच्छी कमाई के बाद गुरुवार को एशियाई स्टॉक मार्केट में मोटे तौर पर बढ़त देखी गई। जापान का निक्केई 225 1.28% बढ़ा, जबकि टॉपिक्स 0.76% बढ़ा। साउथ कोरिया का कोस्पी 5% से ज़्यादा उछला, जबकि कोस्डैक 1.32% चढ़ा। हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स ने कम ओपनिंग का संकेत दिया।

गिफ्ट निफ्टी 24,114 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 62 पॉइंट्स का प्रीमियम था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए पॉजिटिव शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट बुधवार को मिला-जुला रहा, जिसमें नैस्डैक और S&P 500 मेगाकैप टेक स्टॉक्स में बिकवाली के कारण नीचे बंद हुए।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 182.06 पॉइंट्स या 0.35% बढ़कर 51,848.90 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 7.24 पॉइंट्स या 0.10% गिरकर 7,358.22 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 110.40 पॉइंट्स या 0.43% गिरकर 25,476.64 पर बंद हुआ।

एनवीडिया का स्टॉक प्राइस 0.54% गिरा, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 2.27% गिरे, माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 0.37% गिरा, एप्पल का स्टॉक 0.38% गिरा, टेस्ला का स्टॉक 1.61% गिरा, और स्पेसएक्स का शेयर 1.13% गिरा।

US-ईरान शांति वार्ता

जबकि होर्मुज स्ट्रेट में ट्रैफिक नॉर्मल होने की ओर बढ़ रहा है, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने बंद कमरे में हुई मीटिंग में रिपब्लिकन कांग्रेसियों को उनके ईरान युद्ध को रोकने के लिए वोट की इजाज़त देने के लिए फटकार लगाई है। US सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट मार्को रुबियो का कहना है कि अगले हफ़्ते स्विट्जरलैंड में ईरान के साथ बातचीत तय है।

माइक्रोन टेक्नोलॉजी Q3 की कमाई

माइक्रोन टेक्नोलॉजी Q3 की कमाई और Q4 के अनुमान ने वॉल स्ट्रीट के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया, जिससे इसके शेयर आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में 15% बढ़ गए। माइक्रोन ने Q3 में $41.46 बिलियन का रेवेन्यू बताया, जो $35.85 बिलियन के अनुमान से ज़्यादा है। कंपनी ने $25.11 प्रति शेयर का एडजस्टेड प्रॉफ़िट बताया, जबकि अनुमान $20.78 प्रति शेयर था।

इसे Q4 में प्रति शेयर $31 की एडजस्टेड कमाई की उम्मीद है, जो $1 ज़्यादा या कम हो सकती है, जबकि अनुमान $25.84 प्रति शेयर था। कंपनी को चौथी तिमाही में लगभग $10 बिलियन के कैपिटल खर्च की उम्मीद है, जबकि एनालिस्ट्स को $8.89 बिलियन की उम्मीद थी।

बिटकॉइन की कीमतें

बिटकॉइन की कीमतें वापस $60,000 से नीचे आ गईं। टोकन 5.4% तक गिरकर $59,023 पर आ गया, जो अक्टूबर 2024 के बाद सबसे कम है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, CoinGlass के इकट्ठा किए गए डेटा के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में क्रिप्टो लॉन्ग पोजीशन में लगभग $800 मिलियन लिक्विडेट किए गए हैं। डेरिबिट के डेटा से पता चलता है कि यह गिरावट शुक्रवार को बिटकॉइन ऑप्शंस में लगभग $10 बिलियन की तिमाही एक्सपायरी से पहले हुई है।

आज सोने का रेट

US डॉलर में तेज़ी और US फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी की संभावना के बीच, सोने की कीमतों में गिरावट जारी रही, जो एक दिन पहले सात महीने से ज़्यादा के निचले स्तर के पास रही। स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.4% गिरकर $3,985.89 प्रति औंस हो गई, जबकि अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% गिरकर $4,001.60 पर आ गया। स्पॉट सिल्वर की कीमतें 0.2% गिरकर $57.33 प्रति औंस हो गईं।

US ट्रेजरी यील्ड

तेल की कीमतें चार महीने के सबसे निचले स्तर पर आने से US ट्रेजरी यील्ड गिर गई। 2-साल के नोट की यील्ड 4.137% पर आ गई, जो 17 जून के बाद सबसे कम है। बेंचमार्क US 10-साल के नोट पर यील्ड 4.398% पर पहुंच गई, जो 11 मई के बाद सबसे कम है। तीस-साल के ट्रेजरी यील्ड 4.849% पर आ गए, जो 8 अप्रैल के बाद सबसे कम है।

कच्चे तेल की कीमतें

US-ईरान के बीच शुरुआती शांति समझौते के बाद, होर्मुज स्ट्रेट से फंसे हुए टैंकरों के निकलने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही, जिससे सप्लाई की चिंता कम हुई। अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.54% गिरकर $73.34 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.38% गिरकर $70.07 प्रति बैरल पर आ गया।

डॉलर

US डॉलर मजबूत हुआ है और लगभग एक साल में अपनी सबसे तेज मासिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले करेंसी को मापता है, रातों-रात 101.8 के 13 महीने के पीक पर पहुंचने के बाद 101.6 के आसपास स्थिर है। यूरो लगभग $1.1353 था, और स्टर्लिंग सात महीने के सबसे निचले स्तर $1.314 पर था। 161.73 येन पर, डॉलर चार दशकों से कुछ ज़्यादा समय में अपने सबसे ऊंचे स्तर से बस थोड़ा ही दूर था।

 

BitCoin Crash: 8 ही महीने में 50% टूटा बिटकॉइन, इन 4 वजहों से क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार

BitCoin Crash: क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार अब भी मचा हुआ है। मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो बिटकॉइन रिकॉर्ड हाई से करीब 50% नीचे आ चुका है। बाकी भी क्रिप्टो की हालत अच्छी नहीं है और अधिकतर क्रिप्टो अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। बिटकॉइन की बात करें तो 7 अक्टूबर 2025 को $1.26 लाख के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के करीब आठ महीने में यह करीब 50% टूटकर $64 हजार के नीचे आ गया। सिर्फ यही नहीं, इस महीने तो यह $60 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी नीचे की तरफ तोड़ दिया था जो इसके लिए पिछले डेढ़ साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

BitCoin Crash: इन 4 वजहों से मचा हाहाकार

अमेरिकी नीतियों के सपोर्ट से बदलकर झटका देने वाले में बदलाव

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की क्रिप्टो समर्थक नीतियों ने बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसीज की चमक बढ़ा दी थी और संस्थागत निवेशकों ने जमकर पैसा डाला। हालांकि टैरिफ वार और अमेरिका की ईरान से जंग ने निवेशकों को डरा दिया और वे क्रिप्टो जैसे रिस्की एसेट्स से पैसे निकालकर सेफ एसेट्स में पैसे डालने लगे।

बिटकॉइन के सबसे बड़े निवेशकों में शुमार माइकल का बेयरेश रुझान

माइकल सायलर (Michael Saylor) ने साल 2020 में अपनी कंपनी स्ट्रैटेजी की नकदी का बड़ा हिस्सा बिटकॉइन में निवेश करना शुरू किया और स्ट्रैटेजी ने इसके बाद लगातार बिटकॉइन खरीदना जारी रखा और यह दुनिया के सबसे बड़े कॉरपोरेट बिटकॉइन होल्डर कंपनियों में शामिल हो गई। हालांकि ‘स्ट्रैटेजी’ ने साल 2022 के बाद से पहली बार अपनी होल्डिंग का कुछ हिस्सा बेचा तो हड़कंप मच गया। कुछ हफ्ते पहले उन्होंने $25 लाख के 32 बिटकॉइन बेचे तो बिटकॉइन टूटकर $72 हजार के नीचे आ गया था। इससे पहले स्ट्रैटेजी ने साल 2022 में 704 बिटकॉइन %$18 हजार के भाव पर बेचे थे।

SpaceX का जादू

हाल ही में स्पेसएक्स ने दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया था। एआई पर इसकी आक्रामक स्ट्रैटेजी ने निवेशकों को आकर्षित किया और इसके चलते अनुमान लगाया जा रहा है कि क्रिप्टो मार्केट का भी कुछ पैसा इसमें आया। स्पेसएक्स ने दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क (Elon Musk) को और अमीर बनाया और दुनिया के पहले और इकलौते ट्रिलेनियर बन गए।

BitCoin ETF से ताबड़तोड़ निकासी

पिछले महीने बिटकॉइन ईटीएफ से $200 करोड़ से अधिक यानी करीब ₹16 हजार करोड़ की निकासी ने क्रिप्टो मार्केट पर दबाव डाला।

SpaceX ने Elon Musk को बनाया ट्रिलेनियर, लेकिन अब लटकी यह तलवार

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि क्रिप्टो मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।