Bitcoin 8 महीने के हाई पर पहुंचा, क्रिप्टो में आई इस तेजी की वजह क्या है?

Bitcoin Price: ग्लोबल रिस्क एसेट्स में सुधार का असर क्रिप्टोकरेंसी पर भी दिखा। यहीं वजह है कि बिटकॉइन की कीमत $87,000 के पार जाकर 8 महीने के हाई पर पहुंच गई। US स्पॉट बिटकॉइन ETF में नई खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग ने भी इस तेजी को बढ़ावा दिया। ब्लूमबर्ग के अनुसार, न्यूयॉर्क में बिटकॉइन की कीमत 7.7% बढ़कर $87,354 हो गई। पिछले हफ़्ते के निचले स्तर से इसकी कीमत में $10,000 से ज़्यादा का उछाल आया है। यह क्रिप्टोकरेंसी जनवरी के आखिर में देखे गए स्तरों के आसपास ट्रेड कर रही थी, हालांकि यह अक्टूबर में बने अपने रिकॉर्ड हाई से अभी भी लगभग एक-तिहाई नीचे है।

यह तेजी ग्लोबल स्टॉक और बॉन्ड में बढ़त के साथ आई। तेल की कम कीमतों और US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के बीच होने वाली प्रस्तावित समिट को लेकर उम्मीदों ने मार्केट के सेंटीमेंट को बेहतर बनाया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, छोटी क्रिप्टोकरेंसी में भी बढ़त देखी गई। डॉजकॉइन (Dogecoin) में 14% तक और XRP में लगभग 8% की बढ़ोतरी हुई।

इस तेज़ी के दौरान क्रिप्टो मार्केट में बड़े पैमाने पर पोजीशन लिक्विडेशन भी देखा गया।

ब्लूमबर्ग ने CoinGlass के डेटा का हवाला देते हुए बताया कि 24 घंटों में डिजिटल एसेट्स में लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन का लिक्विडेशन लगभग $1 बिलियन तक पहुंच गया, जो अगस्त के आखिर के बाद सबसे ज़्यादा स्तर है।

इस दौरान हुए लिक्विडेशन में शॉर्ट पोजीशन का हिस्सा लगभग $878 मिलियन था।

बिटकॉइन अब तक लगभग 44% ऊपर 

मुद्रेक्स (Mudrex) के बिजनेस हेड प्रतीक गुप्ता ने कहा कि फेडरल रिजर्व के रुख को अपेक्षाकृत नरम (dovish) माने जाने के बाद रिस्क के लिए बेहतर माहौल बना, जिससे इस तेज़ी को सपोर्ट मिला। साथ ही, तेल की गिरती कीमतों ने महंगाई को लेकर चिंताएं कम करने में मदद की। उन्होंने शॉर्ट कवरिंग को भी एक अतिरिक्त वजह बताया।

मुद्रेक्स के अनुसार, इस तिमाही में बिटकॉइन अब तक लगभग 44% ऊपर है। कंपनी ने कहा कि यह 2024 की चौथी तिमाही के बाद से इसकी सबसे मज़बूत तिमाही बढ़त होगी। फर्म ने यह भी बताया कि स्ट्रैटेजी (Strategy) ने 950 और बिटकॉइन जोड़े हैं, जिससे उनकी होल्डिंग 846,000 बिटकॉइन हो गई है।

ETF में आने वाले फंड (इनफ्लो) ने भी सपोर्ट का एक और ज़रिया दिया है।

गियोटस (Giottus) के CEO विक्रम सुब्बुराज ने कहा कि हफ़्ते की शुरुआत में भारी आउटफ्लो के बाद, US स्पॉट बिटकॉइन ETF में 18 सितंबर को $433 मिलियन और 21 सितंबर को $617.6 मिलियन का इनफ्लो दर्ज किया गया। CoinSwitch के मार्केट्स डेस्क ने कहा कि बिटकॉइन का $87,000 से ऊपर जाना $82,000 के लेवल को तोड़ने के बाद हुआ, जबकि लगभग $750 मिलियन की शॉर्ट पोजीशन लिक्विडेट हो गईं। उन्होंने फ्यूचर्स ओपन इंटरेस्ट में लगभग $2 बिलियन की बढ़ोतरी की ओर भी इशारा किया, जिससे पता चलता है कि कीमत में उछाल के साथ-साथ लेवरेज भी बढ़ा है।

हालांकि, लेवरेज में बढ़ोतरी का मतलब है कि इस उछाल का टिके रहना इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या स्पॉट डिमांड कीमतों को सपोर्ट करती रहती है। CoinSwitch ने कहा कि मजबूत अंडरलाइंग बाइंग महत्वपूर्ण होगी क्योंकि बढ़ी हुई पोजीशनिंग से कीमतों में तेज गिरावट का जोखिम भी बढ़ सकता है।

बिटकॉइन के लिए अहम लेवल क्या हैं?

WazirX के फाउंडर निश्चल शेट्टी ने कहा कि $86,000 से ऊपर जाने का मतलब है कि महीनों के दबाव के बाद मार्केट सेंटीमेंट में सुधार हुआ है। उन्होंने $80,000 से ऊपर रिकवरी, US एजेंसियों की लगातार रेगुलेटरी एक्टिविटी और तेल की कीमतों व ट्रेजरी यील्ड में नरमी को इस उछाल को सपोर्ट करने वाले कारकों के रूप में बताया।

शेट्टी ने इंस्टीट्यूशनल एक्टिविटी में नई तेजी पर भी जोर दिया। उनके डेटा के अनुसार, US स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगभग $617.6 मिलियन का डेली नेट इनफ्लो दर्ज किया गया, जो लगभग 7,610 बिटकॉइन के बराबर है, जबकि कुल ETF ट्रेडिंग वॉल्यूम लगभग $5.72 बिलियन था। US स्पॉट इथेरियम ETF में भी लगभग 55,640 ETH का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया।

ZebPay में ट्रेड के हेड हरीश जी वतनानी ने कहा कि बिटकॉइन की रिकवरी CLARITY एक्ट के लिए झटके और फेडरल रिजर्व के रेट फैसले को लेकर अनिश्चितता के दौर के बाद हुई। उन्होंने कहा कि मार्केट ने शुरू में नेगेटिव प्रतिक्रिया दी, लेकिन इन दो घटनाओं को लेकर अनिश्चितता खत्म होने के बाद यह स्थिर हो गया।

वतनानी ने कहा, “स्पॉट बिटकॉइन ETF में नए इनफ्लो, शॉर्ट कवरिंग और बेहतर होते व्यापक रिस्क सेंटीमेंट ने इस मूवमेंट को और सपोर्ट किया है।” यह उछाल ऑल्टकॉइन्स तक भी फैल गया है।

CoinDCX में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और ग्रोथ व क्रिप्टो बिजनेस हेड मिनल ठुकराल ने कहा कि बिटकॉइन कुछ ही घंटों में लगभग $82,000 से बढ़कर $85,000 से ऊपर पहुंच गया, और इस मूवमेंट को शुरू में US स्पॉट बिटकॉइन ETF इनफ्लो और तेल व इक्विटी मार्केट में बेहतर होते सेंटीमेंट से सपोर्ट मिला। थुकराल ने कहा कि इसके बाद रैली एक ऐसे ज़ोन में पहुंच गई जहां बहुत ज़्यादा ‘शॉर्ट’ पोजीशन थीं। एक घंटे में 300 मिलियन डॉलर से ज़्यादा की शॉर्ट पोजीशन बंद (लिक्विडेट) हो गईं, जिससे कीमतें बढ़ने पर ट्रेडर्स को बिटकॉइन वापस खरीदना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि SUI और NEAR में 20% से ज़्यादा की बढ़त हुई, जबकि RENDER और AVAX में लगभग 17% से 18% की बढ़ोतरी देखी गई।

तेज़ी से हुई इस रिकवरी के बावजूद, एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी कि इस बदलाव को व्यापक मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेडर्स कच्चे तेल की कीमतों और US ट्रेजरी यील्ड के ऊँचे स्तर को लेकर चिंतित बने हुए हैं, जबकि फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का असर रिस्क वाले एसेट्स पर पड़ना जारी रह सकता है।

इन्वेस्टर्स के लिए, सुब्बुराज ने कहा कि ब्रेकआउट के बाद $82,000-$82,800 का दायरा नज़र रखने के लिए एक अहम सपोर्ट ज़ोन होगा। थुकराल ने कहा कि जो इन्वेस्टर्स लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, वे कई बार में खरीदारी करने पर विचार कर सकते हैं, जबकि एक्टिव ट्रेडर्स को इस तेज़ी के बाद पोजीशन साइज़, कोलेटरल और लिक्विडेशन लेवल पर बारीकी से ध्यान देना चाहिए।

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Bitcoin Price Today: बिटकॉइन एक साल में 45% क्रैश हुआ, एक्सपर्ट्स बोले – अभी दूर रहने में ही भलाई

Bitcoin Price Today: क्रिप्टो बाजार में सोमवार को दबाव देखने को मिला। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन करीब 1.63% टूटकर 63,500 डॉलर के आसपास पहुंच गई। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। निवेशकों को डर है कि अगर महंगाई फिर बढ़ी, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकता है।

एक साल में 45% क्रैश हुआ

बिटकॉइन की कीमत में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले 6 महीने में यह 30.05% गिर चुका है। वहीं, 1 साल में बिटकॉइन 45.44% टूटा है। हालांकि, पिछले 5 साल में इसने 87.77% का रिटर्न जरूर दिया है। लेकिन, इसके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए यह बेहद कम है।

बिटकॉइन की कीमत गिरने की 5 बड़ी वजह

1. अमेरिका-ईरान तनाव : बिटकॉइन की गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। दोनों देशों के बीच हालात बिगड़ने से दुनियाभर के बाजारों में डर का माहौल है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। वे क्रिप्टो से पैसा निकालकर सोना और डॉलर जैसी सुरक्षित जगहों पर लगाने लगते हैं। इसका असर बिटकॉइन पर भी साफ दिखा।

2. कच्चा तेल महंगा : तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया। महंगा तेल मतलब महंगाई बढ़ने का खतरा। अगर महंगाई बढ़ती है, तो ब्याज दरें भी लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। यही डर क्रिप्टो बाजार पर भारी पड़ रहा है।

3. फेड की ब्याज दर : निवेशकों को लग रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरें कम नहीं करेगा। कुछ लोगों को तो यह भी उम्मीद है कि साल के आखिर में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। ऊंची ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर बिटकॉइन जैसी जोखिम वाली एसेट्स के लिए अच्छा नहीं माना जाता।

4. अहम स्तर पार न कर पाना : बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर के बीच का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद कई ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। बिकवाली बढ़ी और कीमत 63,500 डॉलर के करीब पहुंच गई। तकनीकी चार्ट भी फिलहाल कमजोरी का संकेत दे रहे हैं।

5. खरीद से ज्यादा बिकवाली : एक अच्छी बात यह है कि स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगातार पैसा आ रहा है। इसका मतलब बड़े निवेशकों की दिलचस्पी अभी खत्म नहीं हुई है। लेकिन दूसरी तरफ, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। इसलिए खरीदारी का असर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा और बिटकॉइन दबाव में बना हुआ है।

बिटकॉइन के लिए अहम लेवल क्या हैं?

Delta Exchange की रिसर्च एनालिस्ट रिया सहगल का कहना है कि कि बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद मुनाफावसूली बढ़ी और कीमत नीचे आ गई।

उनके मुताबिक, अगर बिटकॉइन 63,000 डॉलर के नीचे जाता है, तो यह 62,300 से 61,800 डॉलर तक फिसल सकता है। अब बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यही चीजें आगे बिटकॉइन की दिशा तय कर सकती हैं।

क्या अब बिकवाली थम रही है?

Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत का कहना है कि गिरावट के बीच कुछ अच्छे संकेत भी मिल रहे हैं। Glassnode के ऑन-चेन डेटा से पता चलता है कि लंबे समय से बिटकॉइन होल्ड करने वाले निवेशकों की बिकवाली अब कम होने लगी है। इसका मतलब है कि घबराहट में होने वाली बड़ी बिकवाली शायद अपने आखिरी दौर में है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में स्पॉट बिटकॉइन ETF में करीब 290 मिलियन डॉलर का शुद्ध निवेश आया है। इससे बाजार को सहारा मिला है। हालांकि, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। यही वजह है कि बिटकॉइन अभी भी अपने 50 महीने के मूविंग एवरेज यानी करीब 65,900 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है।

निवेशकों के लिए क्या सलाह है?

Pi42 के को-फाउंडर और सीईओ अविनाश शेखर का कहना है कि ETF में लगातार पैसा आना अच्छी बात है। इससे पता चलता है कि बड़े निवेशकों का भरोसा अभी भी बना हुआ है। उनके मुताबिक, बाजार इस समय एक हेल्दी कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहा है। यानी आगे की तेजी से पहले यह सामान्य ठहराव हो सकता है।

वहीं, Giottus के सीईओ विक्रम सुब्बुराज का कहना है कि छोटी अवधि की तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि जब तक बिटकॉइन 65,000 डॉलर के ऊपर टिक नहीं जाता और ETF में लगातार मजबूत निवेश नहीं आता, तब तक थोड़ा-थोड़ा निवेश करना और ज्यादा जोखिम लेने से बचना बेहतर रणनीति होगी।

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