Adidas ने गुरुग्राम के टेक हब से 50% कर्मचारियों की छंटनी की, कहा- हमारे लिए ‘मुश्किल फैसला’

जर्मनी की स्पोर्ट्सवियर और फुटवियर कंपनी Adidas ने गुरुग्राम स्थित अपने India Tech Hub में करीब 50% कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। इसका असर सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और डेटा इंजीनियर समेत कई कर्मचारियों पर पड़ा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस Tech Hub में करीब 700 कर्मचारी हैं। इनमें से करीब 300 से 350 लोगों की नौकरी जा सकती है। कंपनी ने मंगलवार, 15 सितंबर को टाउन हॉल मीटिंग में कर्मचारियों को इस फैसले की जानकारी दी।

कंपनी ने इसे बताया मुश्किल फैसला

Adidas ने इसे ‘मुश्किल फैसला’ बताया है। कंपनी का कहना है कि वह अपने काम करने के तरीके को आसान बनाना चाहती है। साथ ही, टेक्नोलॉजी टीम को कारोबार की बदलती जरूरतों के हिसाब से तैयार करना चाहती है।

कंपनी ने कहा कि संगठन के कुछ हिस्सों को सरल बनाया जाएगा। जरूरी क्षमताओं को मजबूत किया जाएगा। Adidas के मुताबिक, इससे तेजी से बदलते कारोबारी और टेक्नोलॉजी माहौल में कंपनी को लंबे समय के लिए मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

300 से 350 कर्मचारियों की नौकरी पर असर

Adidas ने India Tech Hub की शुरुआत 2021 में की थी। इसका मकसद टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अच्छी प्रतिभाओं को जोड़ना था। यहां काम करने वाले कर्मचारी Adidas के प्रोडक्ट्स से जुड़े टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स पर काम करते थे।

अब करीब पांच साल बाद इस हब के 300 से 350 कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटक गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों को दो ग्रुप में बांटा गया है। पहले ग्रुप को 15 सितंबर को ही एग्जिट लेटर दे दिया गया। दूसरा ग्रुप 15 दिसंबर तक कंपनी में रहेगा। इस दौरान ये कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियां दूसरे कर्मचारियों को सौंपेंगे।

प्रभावित कर्मचारियों को सपोर्ट देगी Adidas

Adidas ने प्रभावित कर्मचारियों के योगदान के लिए आभार जताया है। कंपनी ने कहा कि वह छंटनी से प्रभावित लोगों को सम्मान के साथ सपोर्ट करेगी।

कंपनी के मुताबिक, कर्मचारियों को उचित ट्रांजिशन सहायता भी दी जाएगी। हालांकि, इस सहायता की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।

टेक सेक्टर में छंटनी का दौर

Adidas में यह छंटनी ऐसे समय हुई है, जब टेक सेक्टर में नौकरियों में कटौती जारी है। कई बड़ी टेक कंपनियां अपने खर्च और संगठन के ढांचे में बदलाव कर रही हैं।

Oracle में भी छंटनी की एक नई लहर शुरू होने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, वहां प्रभावित कर्मचारियों को 14 सितंबर को बताया गया कि उनकी भूमिकाएं खत्म की जा रही हैं। Oracle की छंटनी भी कंपनी की व्यापक रिस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा बताई जा रही है।

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‘भारत में इंटरव्यू अमेरिका से ज्यादा कठिन, लेकिन सैलरी आधी’ टेक प्रोफेशनल का दावा, Reddit पोस्ट वायरल

भारत में टेक सेक्टर की नौकरी हासिल करना कई युवाओं के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होता। खासकर बड़ी टेक कंपनियों के इंटरव्यू में मुश्किल coding questions और कई दौर की technical screening उम्मीदवारों की अच्छी-खासी तैयारी करवा देती है। अब Reddit पर एक टेक प्रोफेशनल की पोस्ट ने इसी मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।

पोस्ट करने वाले यूजर का कहना है कि भारत में टेक जॉब इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन होते हैं, जबकि कई मामलों में मिलने वाली सैलरी काफी कम होती है। इस दावे के बाद Reddit पर टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव साझा करने शुरू कर दिए।

‘भारत में इंटरव्यू ज्यादा मुश्किल

टेक प्रोफेशनल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत में होने वाले इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में काफी कठिन हैं और इसके बदले मिलने वाला मुआवजा भी कम है। उसके मुताबिक अमेरिकी कंपनियां उम्मीदवार को परखते समय केवल coding skills पर निर्भर नहीं रहतीं। वहां practical experience, system design और behavioural skills को भी काफी महत्व दिया जाता है। इसके उलट भारत में कई कंपनियों के इंटरव्यू में कठिन algorithm और coding problems पर ज्यादा जोर दिया जाता है।

45 मिनट में दो Hard सवाल?

Reddit यूजर ने दावा किया कि भारत में कई कंपनियों के hiring process में उम्मीदवारों को कई coding rounds से गुजरना पड़ता है। उसने खास तौर पर दावा किया कि कुछ जगहों पर staff-level पदों के उम्मीदवारों से 45 मिनट में दो कठिन coding problems हल करने की उम्मीद की जाती है। यूजर के अनुसार, अमेरिका में senior candidates के लिए professional experience और system-design skills ज्यादा अहम हो सकती हैं, जबकि भारत में coding rounds का दबाव काफी ज्यादा दिखाई देता है।

क्या असली नौकरी और इंटरव्यू की तैयारी अलग-अलग चीजें हैं?

यही सवाल इस पूरी बहस के केंद्र में है। कई Reddit यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मुश्किल coding problems हल करने में माहिर होना और असल दुनिया में किसी product या system को बनाने की क्षमता दो अलग चीजें हैं। एक यूजर ने दावा किया कि उसने ऐसे भारतीय उम्मीदवारों को देखा है जो coding questions में शानदार प्रदर्शन करते थे, लेकिन अपने वास्तविक काम को समझाने या system design पर चर्चा करने में संघर्ष करते थे। वहीं कुछ विदेशी उम्मीदवार experience-based सवालों में ज्यादा सहज नजर आए।

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‘इंटरव्यू कभी-कभी इंटरव्यूअर का शो बन जाता है’

एक अन्य यूजर ने भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि कई बार इंटरव्यू उम्मीदवार की क्षमता परखने से ज्यादा इंटरव्यू लेने वाले की अपनी समझ और ‘स्मार्टनेस’ दिखाने का मंच बन जाता है। उसका कहना था कि भारत में कुछ इंटरव्यू जरूरत से ज्यादा कठिन और वास्तविक नौकरी की जिम्मेदारियों से दूर होते हैं। खासकर तब, जब इंटरव्यू में उम्मीदवार को सीमित समय में ऐसे सवाल दिए जाएं जिनका रोजमर्रा के काम से सीधा संबंध न हो।

कुछ लोगों ने कहा- ‘मुश्किल है तो खुद को अपस्किल करो’

हालांकि Reddit पर हर कोई भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया के खिलाफ नहीं था। कुछ यूजर्स ने तर्क दिया कि अगर कंपनियां कठिन सवाल पूछने के बावजूद पर्याप्त उम्मीदवार खोज पा रही हैं, तो इसका मतलब है कि बाजार उस मॉडल को स्वीकार कर रहा है। एक यूजर ने कहा कि उम्मीदवारों को शिकायत करने के बजाय अपनी skills बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में hiring bar कम होने की संभावना नहीं है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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नौकरी जाने का दर्द तब और बढ़ जाता है जब कर्मचारी को लगे कि उसे अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिला। ऐसा ही दावा एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने किया है, जिसने एक भारतीय IT कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी शुरू करने के सिर्फ छह महीने बाद अचानक बाहर किए जाने की बात कही है।इंजीनियर के मुताबिक कंपनी ने खराब प्रदर्शन को कारण बताया, लेकिन न तो कोई ठोस सबूत दिखाया गया और न ही पहले कोई चेतावनी या फीडबैक दिया गया। अब यह मामला Reddit पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां कई लोगों ने वर्कप्लेस में परफॉर्मेंस रिव्यू सिस्टम को लेकर सवाल उठाए हैं।

इंजीनियर ने मांगा जवाब

Reddit पोस्ट में इंजीनियर ने बताया कि उसे अचानक जानकारी दी गई कि उसका कॉन्ट्रैक्ट परफॉर्मेंस से जुड़ी चिंताओं के कारण खत्म किया जा रहा है। हालांकि, वह यह समझ नहीं पाया कि कंपनी ने यह फैसला किस आधार पर लिया। उसने सवाल उठाया कि रोजाना उसके साथ काम करने वाली क्लाइंट टीम से कोई फीडबैक क्यों नहीं लिया गया। इंजीनियर ने बताया कि सात लोगों की टीम में उसने पिछले 90 रिलीज किए गए स्टोरी पॉइंट्स में से 40 पर काम किया था।

बग्स और देरी के आरोपों पर भी जताई आपत्ति

इंजीनियर ने अपने ऊपर लगाए गए ज्यादा बग्स के आरोपों पर भी सफाई दी। उसका कहना था कि कई प्रोडक्शन इश्यू बाद में उसके पास इसलिए भेजे गए क्योंकि वे लाइव सिस्टम से जुड़े थे और उन्हें तुरंत ठीक करना जरूरी था। उसने यह भी बताया कि कुछ मिनट देर से होने वाली डेली स्टैंडअप मीटिंग को भी बाद में परफॉर्मेंस इश्यू के तौर पर देखा गया, जबकि टीम और मैनेजर को उसकी मेडिकल अपॉइंटमेंट की जानकारी पहले से थी।

AI ट्रेनिंग और ऑनलाइन स्टेटस मॉनिटरिंग पर भी सवाल

इंजीनियर ने कंपनी की कुछ नीतियों पर भी नाराजगी जताई। उसका कहना था कि अनिवार्य AI ट्रेनिंग सेशन उसके वास्तविक काम से ज्यादा जुड़े हुए नहीं थे। इसके अलावा, रिमोट कर्मचारियों से पूरे दिन Slack और Microsoft Teams पर एक्टिव स्टेटस बनाए रखने की उम्मीद को लेकर भी उसने सवाल उठाए। अपना अनुभव बताते हुए उसने लिखा कि सबसे ज्यादा निराशा इस बात से हुई कि उसे कोई चेतावनी, फीडबैक, पारदर्शिता या सुधार का मौका नहीं मिला।

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Reddit यूजर्स ने बताया अपना अनुभव

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इंजीनियर का समर्थन किया। कुछ लोगों ने कहा कि कंपनियों को नौकरी खत्म करने से पहले स्पष्ट फीडबैक और सुधार का अवसर देना चाहिए। एक यूजर ने लिखा कि ऐसी वर्क कल्चर में बदलाव की जरूरत है, जबकि कुछ अन्य लोगों ने कहा कि रिमोट कर्मचारियों के साथ कई जगह इसी तरह का व्यवहार देखने को मिलता है।

क्या परफॉर्मेंस रिव्यू सिस्टम में बदलाव की जरूरत है?

हालांकि कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि पूरी कहानी का सिर्फ एक पक्ष सामने आया है, लेकिन ज्यादातर लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि कर्मचारियों को किसी भी बड़े फैसले से पहले स्पष्ट संवाद, सही फीडबैक और अपनी स्थिति सुधारने का मौका मिलना चाहिए।

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