Adidas ने गुरुग्राम के टेक हब से 50% कर्मचारियों की छंटनी की, कहा- हमारे लिए ‘मुश्किल फैसला’

जर्मनी की स्पोर्ट्सवियर और फुटवियर कंपनी Adidas ने गुरुग्राम स्थित अपने India Tech Hub में करीब 50% कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। इसका असर सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और डेटा इंजीनियर समेत कई कर्मचारियों पर पड़ा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस Tech Hub में करीब 700 कर्मचारी हैं। इनमें से करीब 300 से 350 लोगों की नौकरी जा सकती है। कंपनी ने मंगलवार, 15 सितंबर को टाउन हॉल मीटिंग में कर्मचारियों को इस फैसले की जानकारी दी।

कंपनी ने इसे बताया मुश्किल फैसला

Adidas ने इसे ‘मुश्किल फैसला’ बताया है। कंपनी का कहना है कि वह अपने काम करने के तरीके को आसान बनाना चाहती है। साथ ही, टेक्नोलॉजी टीम को कारोबार की बदलती जरूरतों के हिसाब से तैयार करना चाहती है।

कंपनी ने कहा कि संगठन के कुछ हिस्सों को सरल बनाया जाएगा। जरूरी क्षमताओं को मजबूत किया जाएगा। Adidas के मुताबिक, इससे तेजी से बदलते कारोबारी और टेक्नोलॉजी माहौल में कंपनी को लंबे समय के लिए मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

300 से 350 कर्मचारियों की नौकरी पर असर

Adidas ने India Tech Hub की शुरुआत 2021 में की थी। इसका मकसद टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अच्छी प्रतिभाओं को जोड़ना था। यहां काम करने वाले कर्मचारी Adidas के प्रोडक्ट्स से जुड़े टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स पर काम करते थे।

अब करीब पांच साल बाद इस हब के 300 से 350 कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटक गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों को दो ग्रुप में बांटा गया है। पहले ग्रुप को 15 सितंबर को ही एग्जिट लेटर दे दिया गया। दूसरा ग्रुप 15 दिसंबर तक कंपनी में रहेगा। इस दौरान ये कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियां दूसरे कर्मचारियों को सौंपेंगे।

प्रभावित कर्मचारियों को सपोर्ट देगी Adidas

Adidas ने प्रभावित कर्मचारियों के योगदान के लिए आभार जताया है। कंपनी ने कहा कि वह छंटनी से प्रभावित लोगों को सम्मान के साथ सपोर्ट करेगी।

कंपनी के मुताबिक, कर्मचारियों को उचित ट्रांजिशन सहायता भी दी जाएगी। हालांकि, इस सहायता की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।

टेक सेक्टर में छंटनी का दौर

Adidas में यह छंटनी ऐसे समय हुई है, जब टेक सेक्टर में नौकरियों में कटौती जारी है। कई बड़ी टेक कंपनियां अपने खर्च और संगठन के ढांचे में बदलाव कर रही हैं।

Oracle में भी छंटनी की एक नई लहर शुरू होने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, वहां प्रभावित कर्मचारियों को 14 सितंबर को बताया गया कि उनकी भूमिकाएं खत्म की जा रही हैं। Oracle की छंटनी भी कंपनी की व्यापक रिस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा बताई जा रही है।

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‘भारत में इंटरव्यू अमेरिका से ज्यादा कठिन, लेकिन सैलरी आधी’ टेक प्रोफेशनल का दावा, Reddit पोस्ट वायरल

भारत में टेक सेक्टर की नौकरी हासिल करना कई युवाओं के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होता। खासकर बड़ी टेक कंपनियों के इंटरव्यू में मुश्किल coding questions और कई दौर की technical screening उम्मीदवारों की अच्छी-खासी तैयारी करवा देती है। अब Reddit पर एक टेक प्रोफेशनल की पोस्ट ने इसी मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।

पोस्ट करने वाले यूजर का कहना है कि भारत में टेक जॉब इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन होते हैं, जबकि कई मामलों में मिलने वाली सैलरी काफी कम होती है। इस दावे के बाद Reddit पर टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव साझा करने शुरू कर दिए।

‘भारत में इंटरव्यू ज्यादा मुश्किल

टेक प्रोफेशनल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत में होने वाले इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में काफी कठिन हैं और इसके बदले मिलने वाला मुआवजा भी कम है। उसके मुताबिक अमेरिकी कंपनियां उम्मीदवार को परखते समय केवल coding skills पर निर्भर नहीं रहतीं। वहां practical experience, system design और behavioural skills को भी काफी महत्व दिया जाता है। इसके उलट भारत में कई कंपनियों के इंटरव्यू में कठिन algorithm और coding problems पर ज्यादा जोर दिया जाता है।

45 मिनट में दो Hard सवाल?

Reddit यूजर ने दावा किया कि भारत में कई कंपनियों के hiring process में उम्मीदवारों को कई coding rounds से गुजरना पड़ता है। उसने खास तौर पर दावा किया कि कुछ जगहों पर staff-level पदों के उम्मीदवारों से 45 मिनट में दो कठिन coding problems हल करने की उम्मीद की जाती है। यूजर के अनुसार, अमेरिका में senior candidates के लिए professional experience और system-design skills ज्यादा अहम हो सकती हैं, जबकि भारत में coding rounds का दबाव काफी ज्यादा दिखाई देता है।

क्या असली नौकरी और इंटरव्यू की तैयारी अलग-अलग चीजें हैं?

यही सवाल इस पूरी बहस के केंद्र में है। कई Reddit यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मुश्किल coding problems हल करने में माहिर होना और असल दुनिया में किसी product या system को बनाने की क्षमता दो अलग चीजें हैं। एक यूजर ने दावा किया कि उसने ऐसे भारतीय उम्मीदवारों को देखा है जो coding questions में शानदार प्रदर्शन करते थे, लेकिन अपने वास्तविक काम को समझाने या system design पर चर्चा करने में संघर्ष करते थे। वहीं कुछ विदेशी उम्मीदवार experience-based सवालों में ज्यादा सहज नजर आए।

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‘इंटरव्यू कभी-कभी इंटरव्यूअर का शो बन जाता है’

एक अन्य यूजर ने भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि कई बार इंटरव्यू उम्मीदवार की क्षमता परखने से ज्यादा इंटरव्यू लेने वाले की अपनी समझ और ‘स्मार्टनेस’ दिखाने का मंच बन जाता है। उसका कहना था कि भारत में कुछ इंटरव्यू जरूरत से ज्यादा कठिन और वास्तविक नौकरी की जिम्मेदारियों से दूर होते हैं। खासकर तब, जब इंटरव्यू में उम्मीदवार को सीमित समय में ऐसे सवाल दिए जाएं जिनका रोजमर्रा के काम से सीधा संबंध न हो।

कुछ लोगों ने कहा- ‘मुश्किल है तो खुद को अपस्किल करो’

हालांकि Reddit पर हर कोई भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया के खिलाफ नहीं था। कुछ यूजर्स ने तर्क दिया कि अगर कंपनियां कठिन सवाल पूछने के बावजूद पर्याप्त उम्मीदवार खोज पा रही हैं, तो इसका मतलब है कि बाजार उस मॉडल को स्वीकार कर रहा है। एक यूजर ने कहा कि उम्मीदवारों को शिकायत करने के बजाय अपनी skills बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में hiring bar कम होने की संभावना नहीं है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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15 बार रिजेक्ट होने के बाद भी नहीं मानी हार…फिर ऐसे मिली 1.1 करोड़ की जॉब, वायरल हो रही सफलता की कहानी

सोशल मीडिया पर कभी ना हार मानने वाली एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। लगातार 15 बार रिजेक्शन मिलने के बावजूद एक युवक ने अमेजन में नौकरी पाने की कोशिश नहीं छोड़ी। लगातार 15 बार रिजेक्शन मिलने के बावजूद एक युवक ने अमेजन में नौकरी पाने की कोशिश नहीं छोड़ी। भोपाल के लक्ष्मी नारायण कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने वाले इस युवक ने कंपनी में नौकरी के लिए बार-बार आवेदन किया। आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई और उसे अमेजन जर्मनी में काम करने का मौका मिल गया। कंपनी ने उसे करीब 1.1 करोड़ रुपये का सालाना पैकेज ऑफर किया है। उनकी यह कहानी अब सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा पोस्ट

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर गंतव्य मालवीय की कहानी तेजी से वायरल हो रही है। पोस्ट के मुताबिक, गंतव्य मालवीय ने कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई नहीं की थी, लेकिन इंजीनियरिंग के दौरान ही उन्होंने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने प्रोग्रामिंग और डेटा स्ट्रक्चर-एल्गोरिदम जैसी जरूरी स्किल्स सीखीं। इसके साथ ही उन्होंने मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट पर भी काम किया। अपनी जानकारी को मजबूत करने के लिए उन्होंने अलग-अलग प्रोजेक्ट और इंटर्नशिप के जरिए प्रैक्टिकल अनुभव हासिल किया।

लगातार करते रहे प्रयास

गंतव्य मालवीय अमेजन की नौकरी पाने के लिए लगातार कंपनी के करियर पेज पर नजर रखते थे और अपनी योग्यता के मुताबिक अलग-अलग पदों के लिए आवेदन करते रहे। शुरुआत में उन्हें 15 बार निराशा हाथ लगी, लेकिन उन्होंने कोशिश जारी रखी। आखिरकार उन्हें अमेजन जर्मनी में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर के पद के लिए चुना गया। LNCT के अनुसार, उन्हें करीब 1.10 करोड़ रुपये का पैकेज मिला। मालवीय अगस्त 2023 से अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे हैं। उनके लिए यह नौकरी करियर की एक नई शुरुआत साबित हुई।

नई नौकरी की ज्वांइन

X पर हाल ही में एक पोस्ट में मालवीय ने बताया कि वह Amazon छोड़कर Taxfix में शामिल होने जा रहे हैं। उन्होंने इसे अपने करियर का अगला कदम बताया। मालवीय ने पोस्ट के साथ एक तस्वीर भी शेयर की, जिसमें वह कंपनी के लोगो वाला सिपर पकड़े नजर आए। तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा, “नई शुरुआत।”गंतव्य मालवीय की कहानी कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। नौकरी के लिए कई बार असफल होने के बावजूद उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी और आखिरकार जर्मनी में टेक सेक्टर में अच्छा अवसर हासिल किया। उनकी कहानी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने उनके जज्बे और लगातार मेहनत करने की तारीफ की। यूजर्स का कहना है कि सफलता देर से मिले, लेकिन अगर कोशिश जारी रहे तो लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

लोगों ने किया रिएक्ट

एक यूजर ने मालवीय की कहानी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “₹1.1 करोड़ का पैकेज शानदार है, लेकिन इससे भी बड़ी सीख उनकी पूरी प्रक्रिया से मिलती है। उन्होंने समय रहते तैयारी शुरू की, जरूरी स्किल्स पर काम किया, इंटर्नशिप की और अलग-अलग जगहों पर लगातार आवेदन करते रहे। 15 बार रिजेक्शन मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार उन्हें मौका मिल गया।” वहीं, एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “15 रिजेक्शन के बाद आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “15 बार रिजेक्शन के बाद भी Amazon Germany में अपनी जगह बनाना वाकई उनकी लगन को दिखाता है।”

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

पटना से मैक्सिको तक का सफर, बिहार में जन्मे IIT ग्रेजुएट 4 बिजनेस शुरू करने के लिए छोड़ी Uber की नौकरी

बिहार में जन्मे एक एंटरप्रेन्योर की कहानी इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई है। उनकी कहानी उनके जीजाजी ने X (पहले ट्विटर) पर शेयर की है। इस कहानी में IIT दिल्ली से पढ़ाई और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में 10 साल के करियर के बाद मेक्सिको में चार बिजनेस चलाने तक का सफर शामिल है।

पटना के रहने वाले 33 साल के विजीत सुमन ने Uber में अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने के बाद फ़ूड, वेलनेस, सॉफ़्टवेयर और फ़्रॉड प्रिवेंशन (धोखाधड़ी रोकने) के क्षेत्र में बिजनेस शुरू किए। हाल ही में उनके जीजाजी राहुल राज ने X पर उनकी उपलब्धियों के बारे में पोस्ट किया, जिससे उनका यह अनोखा करियर सफर वायरल हो गया और लोगों का ध्यान इस ओर गया।

IIT दिल्ली से लेकर टेक्नोलॉजी सेक्टर में 10 साल का सफर

टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपना करियर शुरू करने से पहले सुमन ने IIT दिल्ली से टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी की पढ़ाई की थी। उन्होंने पेमेंट और फ़्रॉड प्रिवेंशन के क्षेत्र में 10 साल से ज़्यादा समय तक काम किया और कंपनियों को अरबों डॉलर से जुड़े फाइनेंशियल क्राइम से निपटने में मदद की। उनके प्रोफेशनल सफर में ऐसी कंपनियों में काम करना भी शामिल है, जिन्हें बाद में दूसरी कंपनियों ने खरीद लिया था, जैसे Falabella द्वारा Linio और Uber द्वारा Cornershop का अधिग्रहण।

लेकिन कॉर्पोरेट दुनिया में कई साल बिताने के बाद, सुमन ने एक अलग रास्ता चुनने का फ़ैसला किया। उन्होंने एंटरप्रेन्योरशिप की दुनिया में पहला कदम तब रखा जब वे टेक सेक्टर में काम कर रहे थे।

इसकी शुरुआत मैक्सिको में भारतीय खाने से हुई

2023 में, सुमन और उनके बिज़नेस पार्टनर अर्पित खुराना ने मैक्सिको सिटी में ‘अरोमा करी’ (Aroma Curry) शुरू किया। यह आइडिया विदेश में रहने वाले भारतीयों की एक आम समस्या से आया: घर जैसा स्वाद वाला खाना मिलना। न तो सुमन और न ही खुराना को रेस्टोरेंट चलाने का कोई अनुभव था, लेकिन जल्द ही उनके बिज़नेस को शादियों और दूसरे इवेंट्स में कैटरिंग के लिए रिक्वेस्ट मिलने लगीं।

जो एक रेस्टोरेंट के तौर पर शुरू हुआ था, वह आगे चलकर कई बिज़नेस में से पहला बिज़नेस बन गया। 2024 तक, सुमन ने पूरी तरह से एंटरप्रेन्योरशिप पर ध्यान देने के लिए उबर (Uber) छोड़ दिया। वे एक बिज़नेस से चार बिज़नेस तक पहुंचे।

कॉर्पोरेट दुनिया छोड़ने के बाद, सुमन ने मैक्सिको सिटी में ‘संतुलन’ (Santulan) नाम का एक योग स्टूडियो शुरू किया।

शुरुआत में यह स्टूडियो एक छोटा सा वेंचर था, लेकिन जल्द ही कस्टमर्स ने पिलेट्स रिफॉर्मर क्लास की मांग की। बिज़नेस का विस्तार हुआ और सुमन के अनुसार, दो साल के भीतर यह मैक्सिको सिटी के सबसे ज़्यादा रेटिंग वाले स्टूडियो में से एक बन गया। उनकी तीसरी कंपनी एक और समस्या के समाधान के तौर पर शुरू हुई, जिसका सामना उन्हें स्टूडियो चलाते समय करना पड़ा था।

बिज़नेस को मैनेज करने के लिए सही सॉफ़्टवेयर न मिलने पर, सुमन ने अपना खुद का सॉफ़्टवेयर बनाया। बाद में दूसरे स्टूडियो मालिकों ने भी इस सिस्टम में दिलचस्पी दिखाई, जिससे ‘क्लासियस’ (Klasius) बना – यह स्टूडियो मैनेजमेंट पर केंद्रित एक सॉफ़्टवेयर बिज़नेस है।

अपने चौथे वेंचर के साथ वे उस फील्ड में वापस लौटे जिसे वे सबसे अच्छी तरह जानते थे।

सुमन और उनके तीन दोस्तों ने ‘फोर्टिफाई’ (Fortify) नाम का एक प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया, जो धोखाधड़ी रोकने पर केंद्रित था। एंटरप्रेन्योर के अनुसार, कंपनी अब मेक्सिको की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक के साथ पायलट प्रोग्राम चला रही है। इस तरह सुमन अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ — इंडियन फ़ूड, वेलनेस, सॉफ़्टवेयर और फ़ाइनेंशियल टेक्नोलॉजी — में चार बिज़नेस चला रहे थे।

300 मेहमानों वाली शादी एक टर्निंग पॉइंट साबित हुई

इस सफ़र के सबसे यादगार पलों में से एक तब आया जब ‘अरोमा करी’ (Aroma Curry) ने 300 से ज़्यादा मेहमानों वाली एक शादी में कैटरिंग की। उस स्तर पर यह टीम का पहला बड़ा इवेंट था। कैटरिंग के इस सफल काम से बिज़नेस का कॉन्फिडेंस काफ़ी बढ़ा, खासकर तब जब मेहमानों ने टीम से कहा कि खाने ने उन्हें दिल्ली की याद दिला दी।

भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर शुरू किए गए बिज़नेस के लिए, लोगों की इस प्रतिक्रिया ने ‘अरोमा करी’ को शुरू करने के मूल मकसद को और मज़बूत किया। फिर उनके जीजाजी ने उनके बारे में पोस्ट किया। जब सुमन के जीजा राहुल राज ने X पर उनकी कहानी शेयर की, तो यह बहुत से लोगों तक पहुंची।

इस पोस्ट में बताया गया कि कैसे वे IIT दिल्ली के पूर्व छात्र और टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल से मैक्सिको में कई बिज़नेस चलाने वाले एंटरप्रेन्योर बने। सुमन के अनुसार, इस पोस्ट ने तेज़ी से लोगों का ध्यान खींचा और इसे 1,00,000 से ज़्यादा बार देखा गया। उन्होंने बताया कि इस अचानक मिली चर्चा की वजह से उन्हें ऐसे लोगों के मैसेज भी मिले जिनसे उन्होंने कॉलेज के बाद से बात नहीं की थी। इस अप्रत्याशित वायरल मोमेंट ने परिवार के एक सदस्य की पोस्ट को उनके अनोखे करियर सफ़र के बारे में एक बड़ी चर्चा में बदल दिया।

Gold Silver Price Today: सोना ₹800 उछला, ₹1.47 लाख के पार पहुंचा दाम; चांदी सपाट रही

Gold Silver Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार को सोने की कीमत ₹800 बढ़कर ₹1,47,700 प्रति 10 ग्राम पहुंच गई। मजबूत घरेलू मांग और वैश्विक बाजार में तेजी की वजह से सोने में यह उछाल देखने को मिला। इससे पहले सोमवार को सोना ₹1,46,900 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

वहीं, चांदी की कीमत ₹2,21,500 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। कारोबारियों के मुताबिक हालिया गिरावट के बाद चांदी में खरीदारी सीमित रही। वहीं, सोने में लगातार अच्छी मांग बनी हुई है।

सोने की कीमत क्यों बढ़ी?

HDFC Securities के कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरू होने की उम्मीद से भू-राजनीतिक तनाव कुछ कम हुआ है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई और निवेशकों का रुझान फिर से सोने की ओर बढ़ा।

उन्होंने कहा कि चीन में मजबूत फिजिकल डिमांड और दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी भी सोने की कीमतों को सहारा दे रही है।

ग्लोबल मार्केट में भी तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 1.25% बढ़कर 4,057.89 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 4,082 डॉलर प्रति औंस के इंट्राडे हाई तक भी गया।

Kotak Securities की कमोडिटी रिसर्च की कायनात चैनवाला ने कहा कि पिछले हफ्ते 4,000 डॉलर से नीचे फिसलने के बाद सोने ने अब फिर से तेजी पकड़ ली है।

चांदी ने भी दिखाई मजबूती

वैश्विक बाजार में स्पॉट सिल्वर 4% से ज्यादा बढ़कर 58.80 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई।

Mirae Asset ShareKhan के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह का कहना है कि अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। वहीं, चीन की ओर से टेक सेक्टर को समर्थन देने के लिए किए जा रहे बड़े निवेश से इंडस्ट्रियल मेटल्स, खासकर चांदी, को भी मजबूती मिली है।

MCX गोल्ड पर एक्सपर्ट की राय

LKP Securities के वीपी (रिसर्च- कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी ने कहा कि हालिया गिरावट के बाद सोने में फिर से मजबूत रिकवरी देखने को मिली है। MCX पर सोना करीब ₹1,500 यानी 1% चढ़कर ₹1,42,800 के आसपास पहुंच गया। वहीं, COMEX Gold भी 4,070 डॉलर प्रति औंस के करीब कारोबार कर रहा है और 4,000 डॉलर के अहम स्तर से ऊपर बना हुआ है।

उनके मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव की वजह से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग फिर बढ़ी है। इसी का फायदा सोने को मिल रहा है। हाल की गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव भी काफी हद तक कम हो गया है।

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और फेडरल रिजर्व के सतर्क रुख के बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता निवेशकों को फिर से सोने की ओर खींच रही है। उनका अनुमान है कि अगले कुछ कारोबारी सत्रों में MCX Gold ₹1,41,000 से ₹1,45,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर सकता है।

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AI के दौर में नौकरी गई तो क्या करें? 15 दिन में नई जॉब पाने वाले इंजीनियर ने बताए टिप्स

AI के बढ़ते प्रभाव और कंपनियों में लगातार हो रही छंटनी ने नौकरीपेशा लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर टेक सेक्टर में बदलते हालात के बीच कर्मचारियों के लिए हर दिन नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे माहौल में एक भारतीय टेक प्रोफेशनल की कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर खूब चर्चा बटोर रही है। नौकरी जाने के बाद जहां कई लोग लंबे समय तक नए अवसर की तलाश में संघर्ष करते हैं, वहीं इस शख्स ने मुश्किल वक्त में हार मानने के बजाय तेजी से कदम उठाए। उसने अपने अनुभव, नेटवर्क और लगातार कोशिशों के दम पर कुछ ही दिनों में नई नौकरी हासिल कर ली।

उसकी पोस्ट अब हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। कई यूजर्स इसे मौजूदा जॉब मार्केट की सच्चाई और सही रणनीति का उदाहरण बता रहे हैं। यह कहानी बताती है कि बदलते दौर में सिर्फ स्किल्स ही नहीं, बल्कि नेटवर्किंग, तैयारी और धैर्य भी सफलता की बड़ी कुंजी बन चुके हैं।

घबराने के बजाय अपनाई नई रणनीति

नौकरी जाने के बाद उसने समय बर्बाद नहीं किया और तुरंत नए अवसरों की तलाश शुरू कर दी। उसने LinkedIn पर रिक्रूटर्स से संपर्क किया, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा उसे अपने नेटवर्क और दोस्तों से मिला। उसने अपने परिचितों से अलग-अलग कंपनियों में रेफरल दिलाने के लिए मदद मांगी।

15 दिनों में बदली तस्वीर, मिले कई ऑफर

लगातार कोशिशों का नतीजा यह रहा कि उसे पांच कंपनियों में इंटरव्यू के मौके मिले। इनमें से दो कंपनियों ने मना कर दिया, लेकिन तीन कंपनियों ने उसे जॉब ऑफर दे दिए। आखिरकार उसने नोएडा की एक HCM डोमेन वाली प्रोडक्ट कंपनी का ऑफर स्वीकार किया और पुणे की दो स्टार्टअप कंपनियों के प्रस्ताव ठुकरा दिए।

लेऑफ के बावजूद नहीं मिला सेवरेंस

टेक प्रोफेशनल ने बताया कि पुरानी कंपनी ने उसे 31 जुलाई तक पेरोल पर रखा था, लेकिन प्रोबेशन पीरियड में होने के कारण उसे सेवरेंस पैकेज नहीं मिला। इसके बावजूद उसने इस मुश्किल दौर को हार मानने की बजाय नई शुरुआत का मौका बनाया।

नौकरी मिल गई, लेकिन तैयारी नहीं रुकेगी

अपने अनुभव से सीख लेते हुए उसने अन्य प्रोफेशनल्स को सलाह दी कि नौकरी मिलने के बाद भी तैयारी बंद नहीं करनी चाहिए। उसका कहना है कि मौजूदा जॉब मार्केट काफी चुनौतीपूर्ण है और भविष्य में प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है। इसलिए वह नई नौकरी मिलने के बाद भी DSA और सिस्टम डिजाइन जैसी स्किल्स पर काम जारी रखेगा।

Reddit पर लोगों ने की हिम्मत की तारीफ

इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने उसकी मेहनत और सही समय पर नेटवर्किंग करने की रणनीति की सराहना की। कुछ लोगों ने कहा कि लेऑफ के बाद जल्दी नौकरी मिलना आत्मविश्वास बढ़ाता है, वहीं कई यूजर्स ने इसे आज के अनिश्चित जॉब मार्केट में तैयारी की जरूरत का उदाहरण बताया।

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IT Stocks: चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने आईटी कंपनियों की रेटिंग-टारगेट घटाए, कहा- रिकवरी में लग सकता है वक्त

IT Stocks: ब्रोकरेज फर्म Choice Institutional Equities का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) भारतीय आईटी सेक्टर के लिए एक और कमजोर तिमाही साबित हो सकती है। ब्रोकरेज के मुताबिक, मांग में सुधार नहीं दिख रहा। उल्टा हालात और बिगड़े हैं। इससे साफ है कि जिस रिकवरी की उम्मीद थी, वह अब और आगे खिसक गई है।

ब्रोकरेज का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अब भी बनी हुई है। कंपनियां नए फैसले लेने में समय लगा रही हैं। AI की वजह से प्रोडक्टिविटी बढ़ी है, लेकिन इसका असर रेवेन्यू पर दबाव के रूप में दिख रहा है। वहीं, भू-राजनीतिक तनाव भी बना हुआ है। इन सब वजहों से कंपनियां गैरजरूरी (Discretionary) खर्च कम कर रही हैं। इसका असर पूरे आईटी सेक्टर की ग्रोथ पर पड़ रहा है।

लार्जकैप और मिडकैप पर अनुमान

ब्रोकरेज का मानना है कि बड़ी आईटी कंपनियों की कॉन्स्टेंट करेंसी (CC) ग्रोथ तिमाही आधार पर सपाट रह सकती है। कुछ कंपनियों में हल्की गिरावट भी देखने को मिल सकती है।

वहीं, मिडकैप आईटी कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। इसकी वजह नए डील्स का शुरू होना और बाजार हिस्सेदारी बढ़ना है।

कमाई के अनुमान में कटौती

Choice Institutional Equities का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही की ग्रोथ पूरे साल के गाइडेंस के हिसाब से कमजोर दिख रही है। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में कई कंपनियां अपने गाइडेंस में बदलाव कर सकती हैं। कमाई के अनुमान भी घटाए जा सकते हैं।

इसी वजह से ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए पूरे आईटी सेक्टर की कमाई के अनुमान में 0.1% से 16.7% तक की कटौती की है। साथ ही, कई कंपनियों के टारगेट प्राइस और वैल्यूएशन में भी 0% से 21.6% तक की कमी की गई है। इसकी वजह कमजोर मांग, AI की वजह से रेवेन्यू पर दबाव और बढ़ता एग्जीक्यूशन रिस्क है।

क्या अब आईटी शेयरों में खरीदारी का मौका है?

ब्रोकरेज का मानना है कि आईटी शेयरों में पहले ही अच्छी-खासी गिरावट आ चुकी है। इसलिए अब नीचे जाने की गुंजाइश सीमित दिखती है। हालांकि, सेक्टर में दोबारा तेज तेजी तभी आएगी, जब मांग में सुधार दिखे। कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ तेज हो। साथ ही, GenAI से सिर्फ लागत घटाने के बजाय कमाई बढ़ने के भी साफ संकेत मिलें।

HCLTech : चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने HCLTech की रेटिंग ‘Add’ से बढ़ाकर ‘Buy’ कर दी है। हालांकि, टारगेट प्राइस 1,500 रुपये से घटाकर 1,410 रुपये कर दिया गया है।

Mphasis : इसकी रेटिंग ‘Buy’ से घटाकर ‘Add’ कर दी गई है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 2,520 रुपये रखा गया है।

Persistent Systems : ब्रोकरेज ने Persistent Systems की रेटिंग घटाकर ‘Add’ कर दी है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 5,010 रुपये तय किया गया है।

Tech Mahindra : महिंद्रा ग्रुप की आईटी कंपनी की रेटिंग भी घटाकर ‘Add’ कर दी गई है। ब्रोकरेज ने शेयर का नया टारगेट प्राइस 1,600 रुपये रखा है।

Zensar Technologies : ब्रोकरेज ने Zensar Technologies की रेटिंग भी ‘Add’ कर दी है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 560 रुपये तय किया गया है।

TCS : चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने टाटा ग्रुप की आईटी TCS पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, टारगेट प्राइस घटाकर 2,625 रुपये कर दिया गया है।

Infosys : इस आईटी कंपनी पर भी ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी गई है। ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस घटाकर 1,360 रुपये कर दिया है।

Happiest Minds : इस पर ब्रोकिंग फर्म ने ‘Buy’ रेटिंग कायम रखी है। कंपनी का नया टारगेट प्राइस 440 रुपये कर दिया गया है।

Coforge : चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने Coforge पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। कंपनी का टारगेट प्राइस 1,900 रुपये पर कायम रखा गया है।

Wipro : ब्रोकरेज ने Wipro पर ‘Add’ रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, टारगेट प्राइस घटाकर 185 रुपये कर दिया गया है।

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