कोलकाता चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल हादसा, 49 सेकंड के वीडियो में दिखा भगदड़ का भयानक मंजर!

कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। चोरेबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में 25 लोग घायल हैं, जिसमें से कुछ की हालत गंभीर भी बताई जा रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने इस हादसे के जांच के आदेश दिए हैं। जांच के दौरान हादसे के कारणों और उस समय की परिस्थितियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। इसी बीच इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।

अनाउंसमेंट बनी 19 मौतों की वजह!

सामने आई एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में अनाउंसर लोगों से बार-बार पंडाल से बाहर जाने वाले रास्ते का इस्तेमाल करने की अपील करता सुनाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि उस समय तेज बारिश हो रही थी, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने बारिश से बचने के लिए पंडाल के अंदर शरण ली थी। इसके बाद वहां भीड़ बढ़ गई और लोगों को बाहर निकलने के लिए रास्ते का इस्तेमाल करने की हिदायत दी जाने लगी। पंडाल के बाहर खड़े लोगों को अंदर मौजूद लोगों से अलग निर्देश दिए जा रहे थे। बाहर इंतजार कर रहे लोगों को पंडाल के पास आने से रोका जा रहा था और अनाउंसमेंट के जरिए बताया जा रहा था कि पंडाल का एक हिस्सा गिरने का खतरा है।

 

इसके बावजूद बारिश से बचने और पंडाल में एंट्री करने के लिए लोगों की कतार आगे बढ़ती रही और भीड़ का दबाव बढ़ गया। जहां बाहर खड़े लोग अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, वहीं पंडाल के अंदर मौजूद लोग बाहर निकलना चाहते थे। इस स्थिति के कारण वहां अफरा-तफरी मच गई और हालात खतरनाक हो गए।

49 सेकेंड के वीडियो में दिखा ये नजारा

करीब 49 सेकंड के एक अन्य वीडियो में देखा जा सकता कि एक संकरी गली में बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए हैं। गली की छत नीची है और चारों तरफ बैरिकेड्स लगे हुए हैं। वीडियो में महिलाएं और बच्चे मदद के लिए आवाज लगाते सुनाई दे रहे हैं। भीड़ इतनी ज्यादा है कि लोगों के पास हिलने-डुलने तक की जगह नहीं बची और कुछ लोग बैलेंस बनाए रखने के लिए दीवारों का सहारा लेते नजर आए। वहीं, एक दूसरे वीडियो में बारिश के बीच लोग छाते लेकर पंडाल की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं।

पुलिस कर रही जांच

पुलिस अब उस अनाउंसमेंट की जांच कर रही है, जिसमें पंडाल के गिरने का खतरा बताया गया था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, ये पता लगाया जा रहा कि यह घोषणा किसने की और इसके पीछे क्या वजह थी। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जुटाए हैं और चश्मदीदों के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं। अब तक मिली जानकारी से संकेत मिलता है कि पंडाल में भीड़ को संभालने के लिए किए गए इंतजामों में गंभीर कमियां थीं।

बता दें कि, शनिवार को सप्तमी के मौके पर पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो गई थी। दुर्गा पूजा के दस दिवसीय उत्सव में इस दिन का खास महत्व होने के कारण बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उस समय तेज बारिश हो रही थी और रोशनी भी कम थी। इसके अलावा, लोगों को पंडाल में प्रवेश करने के लिए करीब 90 मिनट तक कतार में इंतजार करना पड़ा, जिससे भीड़ की परेशानी और बढ़ गई।

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Kolkata Durga Puja Stampede: कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल में आखिर कैसे मची अफरा-तफरी? भगदड़ में अब तक 19 लोगों की मौत, 25 घायल

Kolkata Durga Puja Stampede: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। शनिवार, 17 अक्टूबर की शाम उत्तर कोलकाता में स्थित चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में बारिश के बीच अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ मच गई। इसमें कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 25 अन्य लोग घायल हो गए। गिरिश पार्क थाना क्षेत्र स्थित सरदा पार्क (चोरबागान) दुर्गा पूजा पंडाल के एग्जिट गेट पर अचानक भगदड़ मच गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घायलों को तत्काल बचाकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज किया जा रहा है।

शाम करीब 7:40 बजे हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक, यह घटना 17 अक्टूबर की शाम करीब 7:40 बजे हुई। उस समय दुर्गा पूजा पंडाल में दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे। पंडाल के एग्जिट गेट पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इसी दौरान अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। बताया जा रहा है कि बाहर निकलने के रास्ते पर बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से हालात बिगड़े। हालांकि, भगदड़ के पीछे की परिस्थितियों और घटना के सटीक कारणों को लेकर डिटेल्स जानकारी का इंतजार है।

कैसे मची भगदड़?

घटना का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उत्तर कोलकाता के चोरबागान में सामुदायिक दुर्गा पूजा के आयोजकों की एक घोषणा के बाद श्रद्धालुओं के बीच अचानक भीड़ बढ़ गई, जिससे यह दुखद हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि घटना की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा, “घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार पूजा आयोजकों द्वारा लाउडस्पीकर पर की गई एक घोषणा के कारण यह घटना हुई।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि चोरबागान दुर्गा पूजा आयोजित करने वाले क्लब के पदाधिकारियों, निजी सुरक्षा कर्मियों और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि मृतकों में से दो के परिजनों के अनुसार पंडाल परिसर में निजी सुरक्षा कर्मियों द्वारा सीटी बजाए जाने के कारण पंडाल में एंट्री के लिए इंतजार कर रहे लोगों में अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, बारिश शुरू होते ही पंडाल के बाहर इंतजार कर रही भीड़ अचानक आगे बढ़ी। इस दौरान कुछ लोग सड़क पर गिर गए, जिससे भगदड़ मच गई। प्रशासन ने घटना के बाद भीड़भाड़ वाले कई दुर्गा पूजा आयोजनों को अस्थायी रूप से अपने पंडाल बंद करने की सलाह दी है। कोलकाता में दुर्गा पूजा के लिए करीब 3,500 पंडाल लगाए गए हैं।

सीएम ने कहा कि यह घटना कुछ हद तक बारिश के कारण हुई। पूजा समिति द्वारा अंदर की गई व्यवस्थाओं में भी कुछ कमियां थीं। कोलकाता पुलिस CCTV फुटेज की जांच कर रही है। जो भी लापरवाही का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। अधिकारी ने कहा कि हम कलकत्ता हाई कोर्ट के एक मौजूदा जज की अध्यक्षता में एक जांच समिति (फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी) बनाएंगे। फिर सरकार उसकी सिफारिशों के आधार पर कार्रवाई करेगी।

अमित शाह पहुंचे कोलकाता

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार शाम को कोलकाता पहुंचे थे। उनका रविवार को दुर्गा पूजा पंडालों का दौरा करने का कार्यक्रम था। उन्होंने कहा कि भगदड़ की घटना के मद्देनजर वह अपने निर्धारित कार्यक्रम स्थगित कर रहे हैं। आज वह हादसे में घायल लोगों से मुलाकात करेंगे। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि चोरबागान पूजा पंडाल में भगदड़ जैसी स्थिति की खबर सुनकर उन्हें गहरा सदमा लगा है।

सीएम अधिकारी और राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने भी सरकारी अस्पताल का दौरा किया। चोरबागान दुर्गा पूजा हाल के वर्षों में काफी लोकप्रिय हुई है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। यह पूजा चित्तरंजन एवेन्यू से सटी एक संकरी सड़क पर आयोजित की जाती है।

हादसे के बाद बंद किया गया पूजा पंडाल

भगदड़ की घटना के बाद प्रशासन ने सरदा पार्क (चोरबागान) दुर्गा पूजा पंडाल को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया। मौके पर पुलिस और इमरजेंसी टीमें तैनात रहीं। अधिकारी घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाने और स्थिति का आकलन करने में लगे हैं।

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भारी भीड़ बनी हादसे की वजह?

शुरुआती जानकारी के अनुसार, पंडाल के एग्जिट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा होना भगदड़ की प्रमुख वजह रही। भीड़ के अचानक बढ़े दबाव के कारण लोग अफरा-तफरी में फंस गए। हालांकि, घटना के सटीक कारणों और सुरक्षा इंतजामों की भूमिका को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने आनी बाकी है। फिलहाल प्रशासन का ध्यान घायलों को उपचार उपलब्ध कराने, भीड़ को नियंत्रित करने और घटना से संबंधित तथ्यों को जुटाने पर है। इस हादसे ने दुर्गा पूजा जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ मैनेजमेंट और सुरक्षित निकास व्यवस्था की अहमियत को एक बार फिर सामने ला दिया है।

Volvo India holds back on PHEVs amid high taxes, uncertain demand

Volvo India holds back on PHEVs amid high taxes, uncertain demand
Volvo India holds back on PHEVs amid high taxes, uncertain demand

Volvo is currently not considering plug-in-hybrid vehicles (PHEVs) in its India portfolio anytime soon, as it sees the current tax structure and uncertain customer interest as hurdles to their introduction. “The regulations are not conducive to plug-in hybrids,” Jyoti Malhotra, MD of Volvo Car India, told our sister publication Autocar Professional on the sidelines of the recent EX90 launch. He also added that Volvo’s India plans remain focused on mild hybrids and EVs for now. 

  1. GST on PHEVs is 40 percent, making them less competitive than BEVs with 5 percent GST
  2. Volvo’s India strategy focuses on mild hybrids and BEVs for the foreseeable future
  3. PHEVs could be introduced if customer demand, economics support their future viability

India’s tax structure makes PHEVs less competitive

In India, PHEVs attract a 40 percent GST rate (plus applicable cesses bringing total taxes even higher, up to 43 percent). In contrast, pure battery EVs (BEVs) face a 5 percent GST rate and no compensation cess. 

Malhotra said current tax treatment favours BEVs and makes PHEVs less competitive. PHEVs combine an internal combustion engine (ICE) with an electric drivetrain comprising an electric motor and a rechargeable battery that can be charged externally. This dual-powertrain setup adds to the vehicle’s cost. The higher tax burden further affects the final price, making PHEVs less competitive against conventional ICE models and battery electric vehicles (BEVs). 

Higher costs, customer willingness to pay remain key hurdles

Beyond taxation, customer willingness to pay remains a key factor in Volvo’s assessment. Malhotra said PHEVs would be more expensive than conventional ICE vehicles because they combine two powertrains and face a higher tax burden. “Are our customers ready to pay that cost is something we are watching very closely,” he added.

He also believes incentives under the third phase of Corporate Average Fuel Economy (CAFE) norms, slated to go into effect from April 2027, would not by themselves change the commercial case or the final purchase price. “I don’t think CAFE will bring much change to that. It is basically the tax structure,” he said.

Volvo’s India strategy remains focused on EVs, mild hybrids

Malhotra maintained that Volvo’s broader direction remained towards battery electric vehicles, even as the company adjusted the pace of its transition to reflect conditions in individual markets. “Our end goal is still the same, globally as well as in India, that we want to become an electric car company,” he said.

In India, Volvo offers mild-hybrid SUVs alongside BEVs, with electric cars accounting for nearly one in four vehicles it sells. The BEV portfolio includes EX30, EC40 and EX90 models, while the ICE models include the XC60 and XC90 SUVs, which come in a mild-hybrid avatar. Internationally, though, Volvo offers the XC60 and XC90 as PHEVs as well.

Malhotra said that mix also left the company well placed on CAFE compliance, allowing its powertrain decisions to be guided by market demand. Plug-in hybrids remain an option if customer demand and the economics support their introduction. “It’s not that we will bring it, but we can bring it if all things fall in place,” he added.

With inputs from Mugdha Mishra and Dipan Sur

तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

CJP Abhijeet Dipke TN CM Vijay

CJP Abhijeet Dipke Tamil Nadu CM Vijay: देश में सरकारी स्कूलों की बदहाली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का 'स्कूल ठीक करो' आंदोलन अब एक देशव्यापी जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। इसी बीच, तमिलनाडु सरकार द्वारा छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर लगाए गए प्रतिबंध के आदेश को वापस लेने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने तीखा हमला बोला है। एक इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने तमिलनाडु सरकार, पश्चिम बंगाल में एक छात्र के पिता की हत्या, सुप्रीम कोर्ट के एफआईआर वापसी के निर्देश और 'पीएम केयर्स फंड' जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी बात बेबाकी से रखी।   

अगर डर लग रहा है तो स्कूल ठीक करो

हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की सरकार ने शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन को एक विवादास्पद आदेश जारी किया था, जिसके तहत छात्रों को CJP और वामपंथी दलों द्वारा आयोजित 'स्कूल ठीक करो' जैसे आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, भारी जन-विरोध के बाद सरकार ने यह आदेश वापस ले लिया है। ALSO READ: तमिलनाडु की विजय सरकार का यू-टर्न, CJP और लेफ्ट के प्रदर्शन में जाने से छात्रों को रोकने वाला आदेश वापस

 

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि ऐसा आदेश आना ही गलत था। आंदोलन करना और अपनी बात रखना नागरिकों का मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकार (Fundamental Right) है। ऐसे आदेश दिखाते हैं कि सरकारें जनता और छात्रों से डर रही हैं। अगर आपको डर है कि लोग वीडियो बना लेंगे या बदनामी होगी, तो स्कूलों की हालत सुधार दीजिए! लोग रोकने के बजाय आपकी तारीफ में वीडियो बनाएंगे। ALSO READ: आखिर क्‍यों CM विजय थलापति ने वापस लिया स्‍टूडेंट को कॉकरोचों से दूर रखने वाला आदेश, क्‍या है वजह?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी धोखा दे रही सरकार?

दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन और जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुई एफआईआर (FIR) के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सभी मुकदमों का ब्योरा मांगा था ताकि उन्हें निरस्त (Quash) किया जा सके। इस पर दीपके ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले सरकारें सुप्रीम कोर्ट के कंधों पर बंदूक रखकर यह बहाना बनाती थीं कि अदालत की वजह से केस वापस नहीं लिए जा सकते। लेकिन अब जब सुप्रीम कोर्ट खुद केस खत्म करने को तैयार है, तब भी सरकारें डेटा जमा नहीं कर रही हैं। यह देश के युवाओं के साथ सीधी धोखाधड़ी है।  

PM CARES में 8000 करोड़ की FD क्यों? शिक्षा नीति पर उठाया सवाल

CJP नेता अभिजीत दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर 'PM CARES Fund' में जमा पड़ी विशाल धनराशि पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने बताया कि एक तरफ देश के गरीब बच्चे बिना पीने के पानी, टूटी बेंचेस और जर्जर क्लासरूम में पढ़ने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ PM CARES Fund में लगभग 8,000 करोड़ रुपए बिना किसी इस्तेमाल के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में पड़े हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह पैसा किसी नेता के रिटायरमेंट के लिए बचाकर रखा गया है? जब देश के बच्चे एक अच्छे स्कूल और सड़कों के लिए रो रहे हैं, तो इस पैसे का इस्तेमाल देश में हाई-टेक मॉडल स्कूल बनाने के लिए क्यों नहीं किया जा रहा?

पश्चिम बंगाल में स्कूल की बदहाली का वीडियो बनाया तो हेट क्राइम का शिकार हुए अब्दुल के पिता

पश्चिम बंगाल के बांकुरा में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना पर दीपके बेहद भावुक और आक्रोशित नजर आए। 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत अपने पुराने सरकारी स्कूल का वीडियो बनाने और बदहाली उजागर करने के कारण अब्दुल हफीज के परिवार पर प्राणघातक हमला हुआ, जिसमें उनके पिता की जान चली गई।  

  • हेट क्राइम का आरोप : पुलिस रिपोर्ट्स में पकड़े गए आरोपियों का संबंध राजनीतिक पृष्ठभूमि से बताया गया है। दीपके ने इसे साफ तौर पर 'हेट क्राइम' करार दिया।
  • मुआवजा नहीं, स्कूल चाहिए : अब्दुल के जज्बे को सलाम करते हुए दीपके ने कहा कि पिता को खोने के बाद भी उस लड़के ने कोई आर्थिक मुआवजा (Compensation) नहीं मांगा। उसकी एक ही मांग है कि उसके गांव में एक वर्ल्ड क्लास स्कूल बने और उसका नाम उसके दिवंगत पिता के नाम पर रखा जाए। इससे बड़ा देशभक्त कोई नहीं हो सकता।  

गांधी के विचारों को कोई नहीं मार सकता

आंदोलन पर उठे हिंसा और अराजकता के सवालों पर जवाब देते हुए दीपके ने कहा कि आज जब महात्मा गांधी का परिवार खुद इस मुहिम के साथ खड़ा है, तो इससे बड़ा देशभक्ति का कोई प्रमाण पत्र नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन नेपाल या बांग्लादेश जैसी हिंसक घटनाओं पर आधारित नहीं, बल्कि महात्मा गांधी, मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला के अहिंसक और शांतिपूर्ण रास्तों पर चलता है। जिस विचारधारा ने गांधी की हत्या की थी, वे आज भी उनके विचारों को खत्म करना चाहते हैं, लेकिन भारत की आत्मा गांधी के सिद्धांतों में ही बसती है।

Adobe ने कम CGPA के चलते किया रिजेक्ट, Microsoft ने ₹90 लाख के पैकेज पर दी नौकरी; JIIT ग्रेजुएट की कहानी वायरल

इंजीनियरिंग कॉलेज में अच्छा CGPA अक्सर नौकरी की पहली सीढ़ी माना जाता है। कई कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के दौरान छात्रों के लिए न्यूनतम अंक की शर्त रखती हैं, ऐसे में कम CGPA वाले छात्रों के लिए शुरुआत में मौके सीमित हो जाते हैं। लेकिन नमन बंसल की कहानी इस सोच को थोड़ा अलग नजरिए से देखने पर मजबूर करती है। JIIT नोएडा से B.Tech करने वाले नमन का CGPA करीब 6 बताया जाता है और इसी वजह से वह कॉलेज में किसी कैंपस प्लेसमेंट में शामिल नहीं हो सके। इसके बावजूद उन्होंने अपनी Programming Skills को मजबूत किया और Competitive Programming में भी पहचान बनाई।

शुरुआत में उन्हें कई जगहों से रिजेक्शन मिला, लेकिन एक-एक अवसर उनके करियर को आगे बढ़ाता गया। MakeMyTrip और DE Shaw के बाद उन्होंने Adobe में काम किया और फिर Microsoft तक पहुंचे। सोशल मीडिया पोस्ट में उनकी मौजूदा सालाना Compensation करीब ₹90 लाख बताई गई है।

कॉलेज में एक भी प्लेसमेंट का मौका नहीं मिला

X पर Vikas Alwys की शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, नमन ने JIIT नोएडा से B.Tech किया और उनका CGPA करीब 6 रहा। कम स्कोर के चलते वह कॉलेज के दौरान किसी भी कैंपस प्लेसमेंट में शामिल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने नौकरी के लिए अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया। खास तौर पर उनकी Programming Skills और Competitive Programming में उपलब्धियां चर्चा में रहीं। उन्होंने Codeforces पर Candidate Master रैंक भी हासिल की थी।

Adobe से मिला रिजेक्शन, फिर MakeMyTrip में मिली एंट्री

नौकरी की शुरुआत में नमन को कई जगहों से निराशा मिली। उन्होंने Adobe में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया था। बताया गया कि उन्होंने शुरुआती Technical Rounds अच्छे से पूरे किए, लेकिन कम CGPA की वजह से HR राउंड में उनका चयन नहीं हुआ। इसके बाद एक Referral के जरिए उन्हें MakeMyTrip में इंटर्नशिप मिली। यह अनुभव आगे उनके करियर में काफी काम आया।

MakeMyTrip के बाद DE Shaw और फिर Adobe

MakeMyTrip का अनुभव रिज्यूमे में जुड़ने के बाद नमन को DE Shaw में Full-Time Opportunity मिली। इसके बाद उनकी प्रोफाइल और मजबूत हुई। दिलचस्प बात यह रही कि जिस Adobe ने कभी कम CGPA के कारण उन्हें इंटर्नशिप नहीं दी थी, उसी कंपनी ने बाद में उन्हें Member of Technical Staff के पद पर नियुक्त किया।

अब Microsoft में SDE-2

Adobe में करीब दो साल काम करने के बाद नमन के Microsoft पहुंचने का दावा किया गया है। पोस्ट के अनुसार, वह फिलहाल Microsoft में SDE-2 के तौर पर काम कर रहे हैं और उनकी सालाना Compensation करीब ₹90 लाख है। हालांकि, यह सैलरी आंकड़ा सोशल मीडिया पोस्ट में किया गया दावा है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने बताई बड़ी सीख

नमन की कहानी वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। लोगों का कहना है कि कम CGPA करियर की शुरुआत में कुछ अवसरों को रोक सकता है, लेकिन इससे किसी व्यक्ति की पूरी क्षमता तय नहीं होती। कई यूजर्स ने उनकी Coding Skills और लगातार मेहनत की तारीफ की। एक कमेंट में कहा गया कि CGPA उनकी कमजोरी थी, लेकिन Coding उनकी ताकत बन गई। उनकी कहानी से यही सीख मिलती है कि कमजोर अकादमिक रिकॉर्ड के बावजूद मजबूत Skills, Practical Experience और लगातार प्रयास करियर में बड़े मौके दिला सकते हैं।

क्या होती है JP Morgan SDE-2 की सैलरी? इंजीनियर ने शेयर किया अपना पूरा पैकेज

बेंगलुरु में काम करने वाली एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी सैलरी डिटेल सोशल मीडिया पर शेयर कर इंटरनेट पर हलचल मचा दी। JP Morgan में Associate (SDE-2) पद पर काम करने वाली इस टेकी ने अपनी पूरी सैलरी स्ट्रक्चर सार्वजनिक कर दी, जिसके बाद कई इंजीनियरिंग छात्रों और फ्रेशर्स के बीच चर्चा शुरू हो गई।

उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में बताया कि कई छात्रों और नए ग्रेजुएट्स ने उनसे कंपनी में मिलने वाले पैकेज को लेकर सवाल पूछे थे। इन्हीं सवालों का जवाब देने के लिए उन्होंने अपने ऑफर लेटर का पूरा ब्रेकडाउन शेयर किया।

₹32 लाख फिक्स सैलरी, कुल पैकेज ₹35.2 लाख सालाना

टेकी के शेयर किए गए ऑफर ब्रेकडाउन के मुताबिक, उन्होंने JP Morgan Chase में बेंगलुरु लोकेशन पर Associate (SDE-2) के तौर पर जॉइन किया है।

उनके पैकेज में:

32 लाख रुपये सालाना फिक्स सैलरी

10 प्रतिशत परफॉर्मेंस बोनस

कुल अनुमानित पैकेज करीब 35.2 लाख रुपये प्रति वर्ष शामिल है।

उन्होंने बताया कि इस ऑफर में न तो कोई जॉइनिंग बोनस मिला और न ही रिलॉकेशन अलाउंस या स्टॉक बोनस दिया गया। कंपनी की ओर से मिलने वाले फायदे सामान्य JP Morgan कर्मचारियों वाले बेनिफिट्स हैं।

फ्रेशर्स के सवालों के बाद शेयर किया ऑफर लेटर

टेकी ने बताया कि उन्होंने अपनी सैलरी पहले से बताने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उनकी पिछली JP Morgan जॉइनिंग पोस्ट के बाद कई छात्रों और फ्रेशर्स ने उनसे पैकेज को लेकर जानकारी मांगी थी। उन्होंने लिखा कि लोग जानना चाहते थे कि Associate (SDE-2) जैसी भूमिका में वास्तविक ऑफर कितना होता है। इसी वजह से उन्होंने बिना किसी अनुमान के अपनी वास्तविक सैलरी डिटेल साझा की।

पहली जॉइनिंग पोस्ट के बाद भी मिली थी काफी चर्चा

इस टेकी की JP Morgan ऑफिस में पहले दिन की तस्वीर वाली पोस्ट भी सोशल मीडिया पर काफी पसंद की गई थी। हालांकि, सैलरी ब्रेकडाउन वाली पोस्ट ने उससे कहीं ज्यादा ध्यान खींचा। पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने पैकेज देखकर हैरानी जताई और उन्हें शुभकामनाएं दीं। कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इतनी सैलरी के बाद उन्हें सोशल मीडिया से होने वाली कमाई की जरूरत नहीं होगी।

लोगों ने कहा- छात्रों के लिए मददगार है ऐसी जानकारी

कई यूजर्स ने सैलरी की जानकारी सार्वजनिक करने के फैसले की तारीफ की। उनका कहना था कि असली ऑफर और पैकेज की जानकारी मिलने से छात्रों और नए इंजीनियरों को प्लेसमेंट की तैयारी में मदद मिलती है। एक यूजर ने कहा कि ऐसी वास्तविक सैलरी डिटेल्स अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय युवाओं को सही उम्मीदें तय करने में मदद करती हैं।

कई लोगों का मानना था कि कंपनियों के पैकेज को लेकर अक्सर भ्रम रहता है, ऐसे में वास्तविक अनुभव साझा करना नए उम्मीदवारों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

कुछ लोगों ने सैलरी सार्वजनिक करने पर जताई चिंता

हालांकि, हर कोई इस कदम से सहमत नहीं था। कुछ यूजर्स ने सोशल मीडिया पर इतनी निजी जानकारी शेयर करने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी।एक यूजर ने कहा कि अब उनकी पूरी टीम को उनकी सैलरी के बारे में पता चल सकता है, जिससे भविष्य में परेशानी हो सकती है। वहीं, एक अन्य यूजर ने सलाह दी कि कंपनियों में काम करने वाले लोगों को अपनी कमाई से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने से पहले इसके संभावित प्रभावों के बारे में सोचना चाहिए।

सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

JP Morgan टेकी की यह पोस्ट सिर्फ सैलरी चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया क्या युवाओं के लिए वेतन की जानकारी सार्वजनिक करना फायदेमंद है या निजी रखना बेहतर?

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‘खराब प्रदर्शन’ कहकर निकाला, अब कंपनी को देना पड़ा ₹19 लाख का हर्जाना

सिंगापुर में नौकरी से जुड़े एक मामले ने कंपनियों की प्रोबेशन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला कर्मचारी को खराब प्रदर्शन का आरोप लगाकर नौकरी से हटा दिया गया था, लेकिन बाद में Employment Claims Tribunal ने कंपनी के फैसले को अनुचित माना। ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर कर्मचारी को प्रदर्शन के मानकों की सही जानकारी नहीं दी गई थी, तो उसे उन्हीं आधारों पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

इस फैसले के बाद महिला को S$30,000 (करीब ₹19 लाख) का मुआवजा देने का आदेश दिया गया। यह मामला अब कंपनियों के लिए भी एक सीख बन गया है कि कर्मचारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन स्पष्ट नियमों और सही प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए।

6 महीने के प्रोबेशन के बाद लिया गया था फैसला

महिला ने अप्रैल 2025 में कंपनी जॉइन की थी और उसे छह महीने के प्रोबेशन पर रखा गया था। प्रोबेशन खत्म होने से पहले कंपनी ने उसे बताया कि उसका रोजगार आगे जारी नहीं रखा जाएगा, क्योंकि उसका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं था। हालांकि, महिला ने इस फैसले को चुनौती दी और दावा किया कि उसे कभी भी उसके काम को लेकर कोई मौखिक या लिखित चेतावनी नहीं दी गई थी।

महिला ने उठाए कई सवाल

कर्मचारी ने ट्रिब्यूनल में कहा कि कंपनी ने जिन प्रदर्शन मानकों के आधार पर उसे अयोग्य बताया, उनके बारे में उसे कभी स्पष्ट जानकारी ही नहीं दी गई थी।

उसने यह भी आरोप लगाया कि एक प्रोजेक्ट में व्हिसलब्लोअर की भूमिका निभाने के कारण उसके साथ गलत व्यवहार किया गया। इसके अलावा, उसने भाषा को लेकर भेदभाव का भी आरोप लगाया और कहा कि कोरियन भाषा न जानने की वजह से उसे निशाना बनाया गया।

कोर्ट ने कहा- बताए बिना नहीं थोप सकते प्रदर्शन के नियम

ट्रिब्यूनल के मजिस्ट्रेट जोएल टैन ने कहा कि किसी कर्मचारी को ऐसे मानकों पर नहीं परखा जा सकता, जिनके बारे में उसे पहले बताया ही न गया हो। उन्होंने कहा कि अगर कंपनी ने अपने प्रदर्शन मानकों को स्पष्ट नहीं किया है, तो बाद में उन्हीं नियमों को आधार बनाकर कर्मचारी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

कंपनी की प्रोबेशन प्रक्रिया में मिली कमी

मजिस्ट्रेट ने माना कि कर्मचारी के काम में सुधार की गुंजाइश हो सकती थी, लेकिन कंपनी ने यह साबित नहीं किया कि उसे किन स्पष्ट मानकों पर आंका गया था। उन्होंने कहा कि यह मामला गंभीर लापरवाही या बड़ी गलती का नहीं था, बल्कि अस्पष्ट अपेक्षाओं के आधार पर कर्मचारी का मूल्यांकन किया गया।

भेदभाव और व्हिसलब्लोअर के आरोप हुए खारिज

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने महिला के उन आरोपों को सही नहीं माना, जिनमें उसने कहा था कि भाषा की वजह से उसके साथ भेदभाव हुआ और व्हिसलब्लोअर बनने के कारण कंपनी ने उसके खिलाफ कार्रवाई की।

कंपनियों के लिए बड़ा सबक

इस फैसले से कंपनियों को संदेश मिला है कि कर्मचारियों को नौकरी से हटाने से पहले प्रदर्शन के नियम, अपेक्षाएं और सुधार के मौके स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है। ट्रिब्यूनल ने महिला को तीन महीने की सैलरी के बराबर S$34,500 का दावा योग्य माना, लेकिन कानूनी सीमा के कारण अधिकतम S$30,000 का मुआवजा दिया गया।

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