क्या होती है JP Morgan SDE-2 की सैलरी? इंजीनियर ने शेयर किया अपना पूरा पैकेज

बेंगलुरु में काम करने वाली एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी सैलरी डिटेल सोशल मीडिया पर शेयर कर इंटरनेट पर हलचल मचा दी। JP Morgan में Associate (SDE-2) पद पर काम करने वाली इस टेकी ने अपनी पूरी सैलरी स्ट्रक्चर सार्वजनिक कर दी, जिसके बाद कई इंजीनियरिंग छात्रों और फ्रेशर्स के बीच चर्चा शुरू हो गई।

उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में बताया कि कई छात्रों और नए ग्रेजुएट्स ने उनसे कंपनी में मिलने वाले पैकेज को लेकर सवाल पूछे थे। इन्हीं सवालों का जवाब देने के लिए उन्होंने अपने ऑफर लेटर का पूरा ब्रेकडाउन शेयर किया।

₹32 लाख फिक्स सैलरी, कुल पैकेज ₹35.2 लाख सालाना

टेकी के शेयर किए गए ऑफर ब्रेकडाउन के मुताबिक, उन्होंने JP Morgan Chase में बेंगलुरु लोकेशन पर Associate (SDE-2) के तौर पर जॉइन किया है।

उनके पैकेज में:

32 लाख रुपये सालाना फिक्स सैलरी

10 प्रतिशत परफॉर्मेंस बोनस

कुल अनुमानित पैकेज करीब 35.2 लाख रुपये प्रति वर्ष शामिल है।

उन्होंने बताया कि इस ऑफर में न तो कोई जॉइनिंग बोनस मिला और न ही रिलॉकेशन अलाउंस या स्टॉक बोनस दिया गया। कंपनी की ओर से मिलने वाले फायदे सामान्य JP Morgan कर्मचारियों वाले बेनिफिट्स हैं।

फ्रेशर्स के सवालों के बाद शेयर किया ऑफर लेटर

टेकी ने बताया कि उन्होंने अपनी सैलरी पहले से बताने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उनकी पिछली JP Morgan जॉइनिंग पोस्ट के बाद कई छात्रों और फ्रेशर्स ने उनसे पैकेज को लेकर जानकारी मांगी थी। उन्होंने लिखा कि लोग जानना चाहते थे कि Associate (SDE-2) जैसी भूमिका में वास्तविक ऑफर कितना होता है। इसी वजह से उन्होंने बिना किसी अनुमान के अपनी वास्तविक सैलरी डिटेल साझा की।

पहली जॉइनिंग पोस्ट के बाद भी मिली थी काफी चर्चा

इस टेकी की JP Morgan ऑफिस में पहले दिन की तस्वीर वाली पोस्ट भी सोशल मीडिया पर काफी पसंद की गई थी। हालांकि, सैलरी ब्रेकडाउन वाली पोस्ट ने उससे कहीं ज्यादा ध्यान खींचा। पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने पैकेज देखकर हैरानी जताई और उन्हें शुभकामनाएं दीं। कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इतनी सैलरी के बाद उन्हें सोशल मीडिया से होने वाली कमाई की जरूरत नहीं होगी।

लोगों ने कहा- छात्रों के लिए मददगार है ऐसी जानकारी

कई यूजर्स ने सैलरी की जानकारी सार्वजनिक करने के फैसले की तारीफ की। उनका कहना था कि असली ऑफर और पैकेज की जानकारी मिलने से छात्रों और नए इंजीनियरों को प्लेसमेंट की तैयारी में मदद मिलती है। एक यूजर ने कहा कि ऐसी वास्तविक सैलरी डिटेल्स अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय युवाओं को सही उम्मीदें तय करने में मदद करती हैं।

कई लोगों का मानना था कि कंपनियों के पैकेज को लेकर अक्सर भ्रम रहता है, ऐसे में वास्तविक अनुभव साझा करना नए उम्मीदवारों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

कुछ लोगों ने सैलरी सार्वजनिक करने पर जताई चिंता

हालांकि, हर कोई इस कदम से सहमत नहीं था। कुछ यूजर्स ने सोशल मीडिया पर इतनी निजी जानकारी शेयर करने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी।एक यूजर ने कहा कि अब उनकी पूरी टीम को उनकी सैलरी के बारे में पता चल सकता है, जिससे भविष्य में परेशानी हो सकती है। वहीं, एक अन्य यूजर ने सलाह दी कि कंपनियों में काम करने वाले लोगों को अपनी कमाई से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने से पहले इसके संभावित प्रभावों के बारे में सोचना चाहिए।

सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

JP Morgan टेकी की यह पोस्ट सिर्फ सैलरी चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया क्या युवाओं के लिए वेतन की जानकारी सार्वजनिक करना फायदेमंद है या निजी रखना बेहतर?

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एक महीने में भेजे 500 रिज्यूमे, नहीं आया एक भी कॉल, फ्रेशर्स की मुश्किलें आईं सामने

भारत में इंजीनियरिंग करने के बाद अच्छी नौकरी पाना आज कई युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी परेशानी को दिखाती है बेंगलुरु के एक बीटेक ग्रेजुएट की कहानी, जिसने नौकरी की तलाश में एक महीने के भीतर 500 से ज्यादा आवेदन भेजे, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उसे एक भी इंटरव्यू कॉल नहीं मिला। इस युवा इंजीनियर ने लिंक्डइन, अलग-अलग जॉब पोर्टल और कंपनियों की करियर वेबसाइटों पर लगातार प्रयास किया, लेकिन हर जगह से निराशा हाथ लगी।

उसका कहना है कि वो किसी बड़ी सैलरी या नामी कंपनी की तलाश में नहीं है, बल्कि सिर्फ एक ऐसा मौका चाहता है जहां वह काम सीख सके और अपने करियर की शुरुआत कर सके। उसकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर हजारों फ्रेशर्स की परेशानियों को उजागर कर दिया है।

बड़ी सैलरी नहीं, बस शुरुआत का एक मौका चाहिए

युवा इंजीनियर ने कहा कि उसका लक्ष्य किसी बड़ी कंपनी में भारी पैकेज हासिल करना नहीं है। वह सिर्फ ऐसा अवसर चाहता है जहां वह काम सीख सके, इंडस्ट्री का अनुभव हासिल कर सके और अपने करियर की मजबूत शुरुआत कर सके।

उसने लिखा कि वह किसी भी अच्छे टेक रोल, यहां तक कि शुरुआती दौर के स्टार्टअप में भी काम करने के लिए तैयार है, जहां उसे सीखने और योगदान देने का मौका मिले।

जब ऑनलाइन आवेदन भी बेअसर हुए तो रेडिट से मांगी मदद

लगातार कोशिशों के बाद जब कोई रास्ता नजर नहीं आया, तो इंजीनियर ने रेडिट पर अपनी परेशानी साझा की। उसने नौकरी देने वालों, स्टार्टअप फाउंडर्स और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से मदद की अपील की।

उसकी पोस्ट का शीर्षक था  “एक महीने में 500+ नौकरियों के लिए आवेदन किया, लेकिन एक भी इंटरव्यू नहीं मिला।”

पोस्ट वायरल होते ही कई फ्रेशर्स ने अपनी-अपनी परेशानियां साझा करनी शुरू कर दीं।

फ्रेशर्स की सबसे बड़ी चुनौती

कई यूजर्स ने कहा कि आज के समय में सिर्फ ऑनलाइन आवेदन करना काफी नहीं रह गया है। एक यूजर ने सलाह दी कि उम्मीदवारों को सीधे कंपनी के फाउंडर्स, एचआर या कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश करनी चाहिए।

हालांकि, कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने भी ऐसा करके देखा, लेकिन 100 से ज्यादा एचआर को मैसेज करने के बाद भी उन्हें इंटरव्यू का मौका नहीं मिला।

स्किल्स हैं, फिर भी दरवाजे बंद हैं

एक कमेंट में एक टेक उम्मीदवार ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उसके पास इंटर्नशिप अनुभव और कई आधुनिक टेक्नोलॉजी की जानकारी होने के बावजूद नौकरी पाना मुश्किल हो रहा है। उसने बताया कि वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एजेंट ऑर्केस्ट्रेशन, ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर, लैंगचेन और लैंगग्राफ जैसी तकनीकों पर काम कर चुका है, फिर भी कंपनियों तक पहुंच बनाना चुनौती बनी हुई है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने कहा कि मौजूदा जॉब मार्केट में फ्रेशर्स के लिए प्रतिस्पर्धा बेहद बढ़ गई है, जबकि कुछ ने उम्मीदवारों को नेटवर्किंग और सीधे संपर्क जैसे तरीकों पर ध्यान देने की सलाह दी।

वहीं कुछ लोगों ने उम्मीद भी दिखाई। एक यूजर ने बताया कि उसे एक जॉब प्लेटफॉर्म के जरिए इंटरव्यू मिला और पूरी प्रक्रिया में करीब एक महीना लगा।

नौकरी बाजार की नई हकीकत

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिर्फ डिग्री और तकनीकी ज्ञान आज के जॉब मार्केट में पर्याप्त हैं? बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट नौकरी की तलाश में हैं, लेकिन कंपनियां अनुभव, प्रोजेक्ट्स और नेटवर्किंग को भी तेजी से महत्व दे रही हैं।

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