3 लाख की नौकरी, रिजेक्शन और ताना… 5 साल में इस लड़के ने कैसे हासिल किया 29 लाख का पैकेज?

कभी नौकरी के लिए दर-दर भटकने वाला एक इंजीनियर आज लाखों रुपये के पैकेज पर काम कर रहा है। 2019 में B.Tech करने के बाद इस युवक के पास न अच्छी नौकरी थी और न ही करियर को लेकर कोई स्पष्ट दिशा। कई बार रिजेक्शन और मुश्किलों का सामना करने के बावजूद उसने कोशिश जारी रखी। Reddit के r/Indian_flex पर शेयर की गई उसकी कहानी बताती है कि करियर की शुरुआत भले ही कमजोर हो, लेकिन आगे की राह बदली जा सकती है।

इंजीनियरिंग के बाद भी नहीं थी नौकरी की तैयारी

युवक ने बताया कि कॉलेज के दौरान उसका पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था। इंजीनियरिंग उसके लिए पसंद का करियर नहीं था। वह गेमिंग में काफी दिलचस्पी रखता था और दोस्तों के साथ वक्त बिताने में ज्यादा सहज महसूस करता था।

2019 में B.Tech पूरी करने के बाद उसका प्लेसमेंट नहीं हुआ। परिवार की उम्मीदें अलग थीं। पिता चाहते थे कि वह IT सेक्टर में अच्छी नौकरी हासिल करे। नौकरी नहीं मिलने की वजह से घर में तनाव बढ़ने लगा और युवक ने बेंगलुरु जाने का फैसला किया।

बेंगलुरु में भी नहीं बदली तस्वीर

नौकरी की तलाश में बेंगलुरु पहुंचने के बाद भी उसके सामने सबसे बड़ी परेशानी स्किल की कमी थी। कुछ दोस्तों के साथ रहते हुए शुरुआती दिन किसी नए कॉलेज लाइफ जैसे ही गुजरते रहे। इसी बीच एक रेफरेंस के जरिए उसे यूरोप बेस्ड स्टार्टअप में करीब ₹12,000 महीने की नौकरी मिली। लेकिन काम में जरूरी तकनीकी पकड़ नहीं होने के कारण वह वहां ज्यादा समय नहीं टिक पाया। करीब 20 दिन बाद उसकी नौकरी चली गई।

कोविड ने और बढ़ाई परेशानी

नौकरी जाने के कुछ ही समय बाद कोरोना महामारी आ गई। लॉकडाउन के कारण हालात और मुश्किल हो गए। आखिरकार जून 2020 में वह घर लौट आया। उस समय परिवार को लगता था कि वह नौकरी कर रहा है, जबकि वह कई महीनों से बेरोजगार था। माता-पिता के सवालों से बचने के लिए उसे अपनी नौकरी और सैलरी को लेकर झूठ तक बोलना पड़ा। करीब नौ महीने बाद आखिरकार उसे एक सर्विस बेस्ड कंपनी में नौकरी मिल गई। पैकेज था सिर्फ ₹3.37 LPA, लेकिन उसके लिए यह नौकरी किसी बड़ी राहत से कम नहीं थी।

यहीं से लौटा आत्मविश्वास

कम सैलरी के बावजूद इस नौकरी ने उसके अंदर एक बड़ा बदलाव किया। प्रोजेक्ट में उसका प्रदर्शन अच्छा रहा और वह टीम के प्रमुख परफॉर्मर्स में शामिल होने लगा। यहीं उसे महसूस हुआ कि शायद उसमें उतनी कमी नहीं है, जितना वह खुद समझता था। इसके बाद उसने बेहतर अवसरों के लिए इंटरव्यू देना शुरू किया।

कई बार ऑफर मिला, लेकिन किस्मत ने रोका

2022 में उसने ₹7.72 LPA के एक अवसर के लिए इंटरव्यू के सभी जरूरी राउंड पार कर लिए, लेकिन HR राउंड में कुल अनुभव से जुड़ी शर्त के कारण चयन नहीं हो पाया।

बाद में उसे Big4 कंपनी में ₹8.75 LPA का ऑफर मिला। नौकरी शुरू करने के कुछ ही समय बाद उसने ₹16.5 LPA का इंटरव्यू भी क्लियर किया, लेकिन करियर के शुरुआती गैप की वजह से HR राउंड में फिर रिजेक्शन हो गया।

यह उसके लिए बेहद निराशाजनक दौर था, क्योंकि तकनीकी और इंटरव्यू प्रक्रिया पार करने के बावजूद अंतिम चरण में मौका हाथ से निकल गया।

शादी से पहले बदली कमाई की तस्वीर

कुछ समय बाद उसकी शादी तय हुई। शादी से करीब 20 दिन पहले उसे एक नई कंपनी से ऑफर मिला और पैकेज बढ़कर ₹15.8 LPA हो गया। इसके बाद भी उसने ग्रोथ की तलाश जारी रखी। करीब एक साल बाद उसने फिर स्विच करने का फैसला किया और एक Big4 कंपनी से शुरुआत में ₹25.3 LPA का ऑफर मिला।

My Career Journey from Unemployed to Good Pay with heartbreaks

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नेगोशिएशन के बाद पहुंचा ₹29.05 LPA

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। दूसरी तरफ से काउंटर ऑफर मिलने के बाद पैकेज में और बदलाव हुआ। बातचीत के बाद Big4 कंपनी का ऑफर बढ़कर ₹29.05 LPA हो गया, जिसमें वैरिएबल और जॉइनिंग बोनस शामिल था। यानी जिस शख्स ने अपने करियर की शुरुआत ₹12 हजार महीने की नौकरी और फिर ₹3.37 LPA के पैकेज से की थी, वह कुछ वर्षों में करीब 29 लाख रुपये के पैकेज तक पहुंच गया।

‘मैं एक्सपर्ट नहीं, लेकिन कोशिश करता हूं’

युवक ने अपनी कहानी में खुद को प्रोग्रामिंग का बहुत बड़ा एक्सपर्ट नहीं बताया। उसका कहना है कि वह चीजों को समझने, काम पूरा करने और लगातार प्रयास करने पर भरोसा करता है। उसकी कहानी की खास बात यही है कि करियर में कई बार दरवाजे बंद हुए, लेकिन उसने कोशिश करना नहीं छोड़ा। नौकरी छूटने से लेकर रिजेक्शन और कम पैकेज तक, हर मुश्किल के बाद उसने अगला मौका तलाशा।

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Adobe ने कम CGPA के चलते किया रिजेक्ट, Microsoft ने ₹90 लाख के पैकेज पर दी नौकरी; JIIT ग्रेजुएट की कहानी वायरल

इंजीनियरिंग कॉलेज में अच्छा CGPA अक्सर नौकरी की पहली सीढ़ी माना जाता है। कई कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के दौरान छात्रों के लिए न्यूनतम अंक की शर्त रखती हैं, ऐसे में कम CGPA वाले छात्रों के लिए शुरुआत में मौके सीमित हो जाते हैं। लेकिन नमन बंसल की कहानी इस सोच को थोड़ा अलग नजरिए से देखने पर मजबूर करती है। JIIT नोएडा से B.Tech करने वाले नमन का CGPA करीब 6 बताया जाता है और इसी वजह से वह कॉलेज में किसी कैंपस प्लेसमेंट में शामिल नहीं हो सके। इसके बावजूद उन्होंने अपनी Programming Skills को मजबूत किया और Competitive Programming में भी पहचान बनाई।

शुरुआत में उन्हें कई जगहों से रिजेक्शन मिला, लेकिन एक-एक अवसर उनके करियर को आगे बढ़ाता गया। MakeMyTrip और DE Shaw के बाद उन्होंने Adobe में काम किया और फिर Microsoft तक पहुंचे। सोशल मीडिया पोस्ट में उनकी मौजूदा सालाना Compensation करीब ₹90 लाख बताई गई है।

कॉलेज में एक भी प्लेसमेंट का मौका नहीं मिला

X पर Vikas Alwys की शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, नमन ने JIIT नोएडा से B.Tech किया और उनका CGPA करीब 6 रहा। कम स्कोर के चलते वह कॉलेज के दौरान किसी भी कैंपस प्लेसमेंट में शामिल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने नौकरी के लिए अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया। खास तौर पर उनकी Programming Skills और Competitive Programming में उपलब्धियां चर्चा में रहीं। उन्होंने Codeforces पर Candidate Master रैंक भी हासिल की थी।

Adobe से मिला रिजेक्शन, फिर MakeMyTrip में मिली एंट्री

नौकरी की शुरुआत में नमन को कई जगहों से निराशा मिली। उन्होंने Adobe में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया था। बताया गया कि उन्होंने शुरुआती Technical Rounds अच्छे से पूरे किए, लेकिन कम CGPA की वजह से HR राउंड में उनका चयन नहीं हुआ। इसके बाद एक Referral के जरिए उन्हें MakeMyTrip में इंटर्नशिप मिली। यह अनुभव आगे उनके करियर में काफी काम आया।

MakeMyTrip के बाद DE Shaw और फिर Adobe

MakeMyTrip का अनुभव रिज्यूमे में जुड़ने के बाद नमन को DE Shaw में Full-Time Opportunity मिली। इसके बाद उनकी प्रोफाइल और मजबूत हुई। दिलचस्प बात यह रही कि जिस Adobe ने कभी कम CGPA के कारण उन्हें इंटर्नशिप नहीं दी थी, उसी कंपनी ने बाद में उन्हें Member of Technical Staff के पद पर नियुक्त किया।

अब Microsoft में SDE-2

Adobe में करीब दो साल काम करने के बाद नमन के Microsoft पहुंचने का दावा किया गया है। पोस्ट के अनुसार, वह फिलहाल Microsoft में SDE-2 के तौर पर काम कर रहे हैं और उनकी सालाना Compensation करीब ₹90 लाख है। हालांकि, यह सैलरी आंकड़ा सोशल मीडिया पोस्ट में किया गया दावा है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने बताई बड़ी सीख

नमन की कहानी वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। लोगों का कहना है कि कम CGPA करियर की शुरुआत में कुछ अवसरों को रोक सकता है, लेकिन इससे किसी व्यक्ति की पूरी क्षमता तय नहीं होती। कई यूजर्स ने उनकी Coding Skills और लगातार मेहनत की तारीफ की। एक कमेंट में कहा गया कि CGPA उनकी कमजोरी थी, लेकिन Coding उनकी ताकत बन गई। उनकी कहानी से यही सीख मिलती है कि कमजोर अकादमिक रिकॉर्ड के बावजूद मजबूत Skills, Practical Experience और लगातार प्रयास करियर में बड़े मौके दिला सकते हैं।

16 साल की उम्र में क्रेक किया AIIMS एग्जाम, 22 साल की उम्र में बना IAS अधिकारी, नहीं भरा मन तो 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की खड़ी कर दी कंपनी

लाखों भारतीय छात्रों के लिए, AIIMS में दाखिला लेना या UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करना जीवन भर का सपना होता है। ज़्यादातर छात्र इनमें से किसी एक लक्ष्य को पाने के लिए सालों तक तैयारी करते हैं। रोमन सैनी ने 23 साल की उम्र तक ये दोनों ही मुकाम हासिल कर लिए थे।

लेकिन भारत की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी नौकरियों में से एक को चुनने के बजाय, उन्होंने एक ऐसा फैसला किया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। उन्होंने एक एजुकेशन स्टार्टअप बनाने के लिए IAS की नौकरी छोड़ दी। यह कदम आगे चलकर एक ऐसी कंपनी में बदल गया जिसकी कीमत आज 2,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा है।

राजस्थान के जयपुर में एक मध्यम-वर्गीय परिवार में जन्मे सैनी ने कम उम्र से ही पढ़ाई-लिखाई में अपनी काबिलियत दिखाई थी। 2008 में, उन्होंने सिर्फ़ 16 साल की उम्र में AIIMS की प्रवेश परीक्षा पास कर ली। उस समय, AIIMS की अपनी मेडिकल प्रवेश परीक्षा होती थी। 2020 में इसे नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) में मिला दिया गया।

उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई के लिए AIIMS नई दिल्ली में दाखिला लिया और 21 साल की उम्र तक अपना MBBS पूरा कर लिया। ग्रेजुएशन के बाद, उन्होंने उसी संस्थान में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर काम किया। मेडिकल के क्षेत्र में उनका करियर आगे बढ़ सकता था, लेकिन सैनी एक और चुनौती लेने के लिए तैयार थे।

उन्होंने देश की सबसे मुश्किल प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक, UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई। 22 साल की उम्र में, उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में परीक्षा पास कर ली और शानदार ऑल इंडिया रैंक (AIR) 18 हासिल की। ​​वे इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) के 2014 बैच में शामिल हुए और उन्हें मध्य प्रदेश कैडर मिला।

कई उम्मीदवारों के लिए, IAS अफ़सर बनना ही आख़िरी मंज़िल होती है। लेकिन सैनी के लिए, यह बस एक और पड़ाव था। लगभग एक साल तक नौकरी करने के बाद, उन्होंने सिविल सर्विस छोड़ने और एक अलग लक्ष्य की ओर काम करने का फ़ैसला किया: पूरे भारत में छात्रों तक अच्छी क्वालिटी की शिक्षा पहुँचाना।

2015 में, उन्होंने इंजीनियर से यूट्यूबर बने गौरव मुंजाल और हेमेष सिंह के साथ मिलकर ‘अनएकेडमी’ (Unacademy) की शुरुआत की। सोच सीधी-सी थी: कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम की तैयारी करने वाले छात्र कोचिंग क्लास पर लाखों रुपये खर्च किए बिना टॉप एजुकेटर्स से सीख सकें।

यह वेंचर एक YouTube चैनल के तौर पर शुरू हुआ था, जिस पर मुफ़्त एजुकेशनल वीडियो मिलते थे। जैसे-जैसे ज़्यादा छात्र इस प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करने लगे, यह एक पूरी तरह से ऑनलाइन लर्निंग कंपनी बन गई, जिसमें UPSC, IIT-JEE, NEET और कई दूसरे कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम के लिए लाइव क्लास, रिकॉर्डेड लेक्चर, मॉक टेस्ट और कोर्स उपलब्ध थे।

जल्द ही अनएकेडमी एडटेक सेक्टर में भारत के सबसे बड़े नामों में से एक बन गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑनलाइन लर्निंग के दौर में इसने बड़े इन्वेस्टर्स को आकर्षित किया और इसकी वैल्यूएशन लगभग 28,700 करोड़ रुपये (3.44 बिलियन डॉलर) तक पहुँच गई थी। 2026 के मध्य तक, इसकी वैल्यूएशन लगभग 2,055 करोड़ रुपये है और कंपनी को upGrad द्वारा खरीदा जा रहा है।

सैनी का सफ़र हाल ही में X (पहले Twitter) पर फिर से चर्चा में आया, जहाँ लोगों ने न सिर्फ़ उनकी उपलब्धियों की तारीफ़ की, बल्कि उस हिम्मत की भी सराहना की जिसके तहत उन्होंने अपना रास्ता बदला, जबकि कई लोग सुरक्षित करियर में बने रहना पसंद करते।

एक यूज़र ने कमेंट किया, “अद्भुत कहानी। कभी-कभी रिस्क लेना फायदेमंद होता है।” एक और ने कहा, “यह इस बात का सबूत है कि सफलता का मतलब सिर्फ़ एक ही रास्ते पर चलना नहीं, बल्कि अपना रास्ता खुद बनाना है। रोमन सैनी के लिए बहुत सम्मान।”एक ने लिखा, “डॉक्टर, IAS, एंटरप्रेन्योर। हर पड़ाव पर खुद को नए सिरे से ढालने की हिम्मत बहुत कम लोगों में होती है।