नौकरी छोड़े महीनों बीते, लेकिन अटका रहा वेतन; कोलकाता प्रोफेशनल ने साझा किया दर्द

कोलकाता के एक प्रोफेशनल की LinkedIn पोस्ट ने इन दिनों नौकरी, वेतन भुगतान और कर्मचारी अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पूर्व कर्मचारी ने दावा किया है कि संगठन छोड़ने के लगभग एक साल बाद भी उसकी करीब ₹10,000 की बकाया सैलरी का भुगतान नहीं किया गया। उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक छोटी रकम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सम्मान और भरोसे से जुड़ा है, जिसकी उम्मीद हर कर्मचारी अपने काम के बदले करता है। पोस्ट में उन्होंने बताया कि कई बार संपर्क करने और इंतजार करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

इसके बाद उन्होंने अपनी बात सार्वजनिक रूप से साझा करने का फैसला किया। इस मामले ने सोशल मीडिया पर कर्मचारियों के अधिकारों, कंपनियों की जिम्मेदारी और बेहतर वर्क कल्चर को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

अक्टूबर 2025 में छोड़ी थी नौकरी

पूर्व कर्मचारी के मुताबिक, उसने Go Future Digital Team में अप्रैल 2025 से अक्टूबर 2025 तक काम किया था। उसने 13 अक्टूबर 2025 को इस्तीफा दिया और 15 अक्टूबर उसका आखिरी कार्यदिवस था। उसका दावा है कि अक्टूबर के बाकी दिनों की सैलरी को लेकर उसने ज्यादा उम्मीद नहीं रखी, लेकिन करीब ₹10,000 की राशि अब तक लंबित है।

बार-बार संपर्क के बावजूद नहीं हुआ भुगतान

LinkedIn पोस्ट में कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसने कंपनी के मालिक Ayon Chatterjjee से कई बार संपर्क कर बकाया राशि का भुगतान करने की कोशिश की। उसके अनुसार, हर बार उसे कुछ और समय इंतजार करने को कहा गया और जल्द भुगतान का भरोसा दिलाया गया, लेकिन रकम कभी जारी नहीं हुई।

एक हफ्ते चुप रहो, पेमेंट हो जाएगा’ वाले मैसेज का दावा

कर्मचारी ने अपनी पोस्ट के साथ कुछ बातचीत के स्क्रीनशॉट भी साझा किए, जिनमें उसने कंपनी प्रतिनिधि के साथ भुगतान को लेकर हुई बातचीत का दावा किया। एक स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर जवाब दिया गया कि सात दिन तक कॉल और मैसेज न करने पर भुगतान कर दिया जाएगा। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

पब्लिक पोस्ट करने की बताई वजह

पूर्व कर्मचारी ने कहा कि शुरुआत के करियर में ऐसा अनुभव काफी निराशाजनक रहा। उसने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि अन्य नौकरी तलाशने वालों को सतर्क करना है। उसने कर्मचारियों को सलाह दी कि वे जॉइन करने से पहले कंपनी की भुगतान व्यवस्था समझें और सभी जरूरी दस्तावेज व रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

सोशल मीडिया पर लोगों ने जताया समर्थन

पोस्ट वायरल होने के बाद कई LinkedIn यूजर्स ने कर्मचारी के समर्थन में प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने कहा कि किसी भी कर्मचारी की मेहनत की कमाई समय पर मिलनी चाहिए। वहीं कुछ यूजर्स ने अपने अनुभव भी साझा किए और दावा किया कि उन्हें भी वेतन भुगतान से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

वर्क कल्चर और कर्मचारियों के अधिकारों पर फिर चर्चा

इस मामले ने एक बार फिर नौकरी की दुनिया में वेतन भुगतान, कर्मचारियों के सम्मान और कंपनियों की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को सामने ला दिया है। हालांकि, LinkedIn पोस्ट में किए गए आरोपों और कमेंट्स की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

रेलवे की चादर से बना कुर्ता पहन बाजार पहुंचा बुजुर्ग, वायरल वीडियो ने मचाई हलचल

Video: वीकेंड पर ऑफिस बुलाया तो महिला ने रख दी ऐसी शर्त, सुनकर मैनेजर भी रह गया शांत

आज के दौर में वर्क-लाइफ बैलेंस सिर्फ एक कॉरपोरेट शब्द नहीं, बल्कि कर्मचारियों के लिए एक बड़ी जरूरत बन चुका है। देर तक काम करना, वीकेंड पर लगातार काम और बिना अतिरिक्त भुगतान के ओवरटाइम जैसे मुद्दे अक्सर चर्चा में रहते हैं। सोशल मीडिया पर भी कर्मचारी खुलकर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं, जिससे कार्यस्थल की संस्कृति पर लगातार बहस छिड़ी हुई है। इसी बीच एक वीडियो ने इंटरनेट यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वीडियो में एक महिला कर्मचारी अपने अधिकारों और तय कार्य समय को लेकर जिस आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखती है, उसने हजारों लोगों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी।

किसी ने इसे कर्मचारियों के लिए प्रेरणादायक बताया, तो किसी ने इसे भारतीय वर्क कल्चर की वास्तविक तस्वीर कहा। यही वजह है कि ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर खुलकर अपनी राय दे रहे हैं।

हर बार मदद की, लेकिन इसे नियम मत बनाइए

वीडियो में मैनेजर कर्मचारी अफरीन को फोन कर पूछता है कि वो ऑफिस क्यों नहीं पहुंची, जबकि पूरी टीम उसका इंतजार कर रही है। जवाब में अफरीन कहती हैं कि शनिवार उनका ऑफ है। जब मैनेजर याद दिलाता है कि वो पिछले दो महीनों से हर शनिवार आ रही थीं, तो अफरीन समझाती हैं कि वह सिर्फ टीम की मदद के लिए कभी-कभी शनिवार को ऑफिस आती थीं, लेकिन यह उनकी नियमित ड्यूटी नहीं थी।

अब मुफ्त में काम नहीं करूंगी

बातचीत के दौरान मैनेजर टीम पर बढ़ते काम का दबाव बताता है, लेकिन अफरीन दो टूक कहती हैं कि टीम पर दबाव होना उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है। वो कहती हैं कि अगर शनिवार को काम चाहिए तो ओवरटाइम का भुगतान किया जाए। उनका ये जवाब “मैंने सिर्फ मुफ्त में काम करना बंद किया है” सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया।

सोमवार तक टली बहस

जब अफरीन ओवरटाइम की बात करती हैं, तो मैनेजर कहता है कि इस मुद्दे पर सोमवार को बात होगी और कॉल समाप्त कर देता है। वीडियो के कैप्शन में अफरीन ने लिखा कि अगर आज आवाज नहीं उठातीं तो “बस इस वीकेंड” वाला सिलसिला शायद सालों तक चलता रहता।

असल घटना नहीं, लेकिन लोगों को लगी अपनी कहानी

अफरीन आमतौर पर स्क्रिप्टेड वीडियो बनाती हैं और ये वीडियो भी उसी का हिस्सा है। हालांकि, इसकी कहानी ने हजारों लोगों को अपनी नौकरी के अनुभव याद दिला दिए। कई यूजर्स ने कहा कि भारतीय दफ्तरों में कर्मचारियों से अक्सर वीकेंड और ऑफिस समय के बाद भी बिना अतिरिक्त भुगतान के काम कराया जाता है।

लोगों ने साझा किए अपने अनुभव

वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा कि वीकेंड पर काम तो लिया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं मिलता। दूसरे ने कहा कि उन्होंने भी कई सप्ताह तक शनिवार को काम किया, लेकिन कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिला। वहीं एक अन्य यूजर ने दावा किया कि कई देशों में तय कार्य समय का सम्मान किया जाता है और अतिरिक्त काम के बदले भुगतान या बोनस दिया जाता है। कुछ लोगों ने ये भी कहा कि चाहे वीडियो स्क्रिप्टेड हो, लेकिन इसमें दिखाई गई स्थिति भारतीय वर्क कल्चर की सच्चाई से काफी मेल खाती है।

Viral Post: ‘दिन में सॉफ्टवेयर डेवलपर, रात में Uber चलाता है युवक’ सोशल मीडिया पर वायरल हुए पोस्ट

ओवरटाइम से दूरी, HR तक सीधी शिकायत… Gen Z की नई वर्किंग स्टाइल पर इंटरनेट पर छिड़ी बहस

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर entrepreneur और content creator Sheetal Rijhwani की एक पोस्ट ने अचानक ऑनलाइन बड़ी चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने अपने पोस्ट में Gen Z कर्मचारियों के काम करने के तरीके को लेकर कुछ ऐसे दावे किए, जिन्होंने इंटरनेट पर नई बहस को जन्म दे दिया है। इस पोस्ट के सामने आते ही लोग दो अलग-अलग खेमों में बंट गए हैं  एक तरफ वो लोग हैं जो मानते हैं कि Gen Z वाकई में पुराने टॉक्सिक वर्क कल्चर को बदल रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स इसे जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया मामला मान रहे हैं।

इस चर्चा ने काम के घंटों, ऑफिस अनुशासन और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसे मुद्दों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। खास बात यह है कि यह बहस सिर्फ एक पोस्ट तक सीमित नहीं रही, बल्कि अलग-अलग पीढ़ियों के नजरिए को भी सामने लेकर आई है।

Gen Z का नया स्टाइल?

पोस्ट के अनुसार, कुछ Gen Z कर्मचारी ऑफिस में एक अलग ग्रुप बनाकर काम करते हैं। ये लोग तय समय पर ऑफिस छोड़ देते हैं, बिना जरूरत देर तक रुककर मैनेजर को खुश करने की कोशिश नहीं करते और वीकेंड पर वर्क कॉल्स भी अवॉइड करते हैं।

ऑफिस की गलत चीजों पर सीधा सवाल

दावा यह भी है कि अगर कोई मैनेजर गलत व्यवहार करता है, तो ये कर्मचारी सीधे HR तक शिकायत पहुंचाते हैं। बताया गया कि HR भी कई मामलों में कर्मचारियों का साथ देता है और मुद्दों को गंभीरता से लेता है।

AC बंद हुआ तो लिया बड़ा फैसला

पोस्ट का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह था, जिसमें कहा गया कि ऑफिस की AC खराब होने पर Gen Z ग्रुप ने काम रोक दिया और पास के कैफे से काम करने का फैसला किया, जब तक समस्या ठीक नहीं हुई।

मिलेनियल्स झेल लेते हैं, हम नहीं

एक मजेदार मोड़ तब आया जब कहा गया कि मिलेनियल्स अक्सर ऐसी परिस्थितियों को सह लेते हैं, जबकि Gen Z इसे चैलेंज करते हैं। इसी बात पर पोस्ट में “Emotional damage” जैसा कैजुअल कमेंट भी किया गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस पोस्ट पर अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों ने अपनी राय दी। कुछ ने कहा कि Gen Z सच में टॉक्सिक वर्क कल्चर को तोड़ रहा है, जबकि कुछ ने इसे जरूरत से ज्यादा सख्त रिएक्शन बताया।

नई और पुरानी सोच की टक्कर

कमेंट सेक्शन में Gen X और अन्य यूजर्स ने बताया कि नौकरी का माहौल समय के साथ बदलता रहा है जहां पहले लोग लंबे समय तक नौकरी में टिके रहते थे, वहीं अब कॉन्ट्रैक्ट और फ्लेक्सिबल वर्क कल्चर बढ़ रहा है। कई लोगों ने माना कि अब “ओवरवर्क = डेडिकेशन” वाली सोच पर सवाल उठना जरूरी है।