स्वीडन में अचानक चली गई नौकरी, फिर ज्योति ने उठाया ऐसा कदम, आज हर महीने कमा रही हैं 1 लाख रुपये

विदेश में जाकर करियर और नई पहचान बनाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। नए माहौल में खुद को ढालने के साथ नौकरी, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक पहचान बनाने की चुनौती भी रहती है। मुंबई की ज्योति वाकचौरे के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब वह पति के साथ स्वीडन पहुंचीं। शुरुआत में उन्होंने वहां नौकरी की, लेकिन अचानक नौकरी चले जाने से उनके सामने मुश्किल खड़ी हो गई। इस झटके के बाद उन्होंने पीछे हटने के बजाय खुद के लिए एक नई राह तलाशने का फैसला किया। धीरे-धीरे उन्होंने कंटेंट क्रिएशन शुरू किया और फिर इसी अनुभव को अपने बिजनेस में बदल दिया।

आज उनकी कहानी सोशल मीडिया, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है। विदेश में शुरू हुआ यह सफर कैसे एक नई पहचान और कमाई के रास्ते में बदला, यही उनकी कहानी को खास बनाता है।

पति की नौकरी के चलते पहुंचीं स्वीडन

ज्योति 2016 में अपने पति के साथ स्वीडन के गोथेनबर्ग चली गई थीं। उनके पति को वहां नौकरी मिली थी और ज्योति डिपेंडेंट वीजा पर स्वीडन पहुंचीं। नए देश में शुरुआत करना उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें वहां अपना करियर और पहचान दोनों नए सिरे से बनानी थी।

अचानक चली गई नौकरी

स्वीडन में रहते हुए ज्योति ने नौकरी शुरू की, लेकिन एक दिन उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से निकाल दिया गया। उनके लिए यह अनुभव काफी परेशान करने वाला था। उन्होंने इस घटना को अचानक, चौंकाने वाला और अनुचित बताया। हालांकि, उन्होंने इस झटके को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। धीरे-धीरे उन्होंने इसी मुश्किल को अपने लिए नई राह बनाने की प्रेरणा में बदल दिया।

YouTube से शुरू हुआ नया सफर

नौकरी के साथ ज्योति ने कंटेंट बनाना शुरू किया। उन्होंने 2018 में अपना YouTube चैनल लॉन्च किया। शुरुआत भले ही साइड हसल के तौर पर हुई, लेकिन धीरे-धीरे उनकी ऑनलाइन पहचान बढ़ने लगी। कंटेंट के जरिए उन्हें स्वीडन में नए लोगों से जुड़ने और अपना नेटवर्क बनाने का मौका मिला। यही नेटवर्क आगे चलकर उनके बिजनेस के लिए भी काफी काम आया।

महामारी में शुरू की अपनी कंपनी

साल 2020 में जब कोरोना महामारी के कारण दुनिया भर में कारोबार प्रभावित हो रहे थे, उसी दौरान ज्योति ने अपनी सोशल मीडिया मार्केटिंग कंपनी शुरू कर दी। शुरुआत में उन्होंने छोटे स्थानीय कारोबारों के साथ काम किया। समय के साथ उनका नेटवर्क बढ़ा और उन्हें स्वीडन के स्थानीय ग्राहकों से भी काम मिलने लगा।

अब हर महीने करीब ₹1 लाख की कमाई

कंटेंट क्रिएशन और सोशल मीडिया मार्केटिंग के सफर ने ज्योति को आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाया। मौजूदा समय में उनके बिजनेस से औसतन करीब 1 लाख रुपये प्रति महीने की कमाई होने की बात सामने आई है। उनकी कहानी खास इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने किसी बड़े ऑफिस या भारी निवेश के बिना अपना काम खड़ा किया।

कम खर्च में चल रहा है बिजनेस

ज्योति ने अपने बिजनेस के खर्चों को काफी सीमित रखा है। उनके मुताबिक, हर महीने करीब 15 हजार रुपये मुख्य रूप से ऐप्स और वीडियो एडिटिंग जैसे सॉफ्टवेयर पर खर्च होते हैं। वह ज्यादातर काम घर से करती हैं, इसलिए ऑफिस का किराया और उससे जुड़े दूसरे खर्च नहीं हैं। कम ऑपरेशनल कॉस्ट उनके बिजनेस को चलाने में मदद करती है।

भारत में निवेश, अब स्वीडन में भी कदम

ज्योति ने बताया कि उनके ज्यादातर निवेश अभी भारत में हैं और खासतौर पर प्रॉपर्टी में निवेश किया गया है। हालांकि, अब उन्होंने स्वीडन में भी निवेश करना शुरू कर दिया है। यानी विदेश में रहते हुए भी उन्होंने भारत से अपना आर्थिक जुड़ाव बनाए रखा है और धीरे-धीरे स्वीडन में भी अपनी वित्तीय मौजूदगी बढ़ा रही हैं।

स्वीडन ने बदली उनकी सोच और जिंदगी

ज्योति के मुताबिक, स्वीडन में रहने का असर सिर्फ उनके करियर पर नहीं पड़ा, बल्कि उनके व्यक्तित्व में भी बदलाव आया। वह खुद को अब पहले से ज्यादा शांत, दयालु, समय की पाबंद और आत्मनिर्भर मानती हैं। लंबे समय तक स्वीडन में रहने के बाद वह वहां के जीवन और संस्कृति के साथ काफी सहज हो चुकी हैं।

बेटी का जन्म बनी सबसे खूबसूरत याद

स्वीडन में बिताए समय की उनकी सबसे खास यादों में बेटी का जन्म शामिल है। उन्होंने इसे अपनी जिंदगी के बेहद खूबसूरत और यादगार पलों में से एक बताया। यह व्यक्तिगत अनुभव उनके लिए स्वीडन को सिर्फ एक रहने की जगह से कहीं ज्यादा खास बनाता है।

नौकरी छूटने से मिली नई पहचान

ज्योति की कहानी इस बात की मिसाल है कि जिंदगी में आया कोई बड़ा झटका हमेशा अंत नहीं होता। नौकरी जाने के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय कंटेंट क्रिएशन और उद्यमिता की राह चुनी। पति की नौकरी के लिए विदेश पहुंची ज्योति ने धीरे-धीरे वहां अपनी खुद की पहचान बनाई। आज उनका सफर नौकरी छूटने से लेकर अपना बिजनेस खड़ा करने और आत्मनिर्भर बनने तक पहुंच चुका है।

‘अब और नहीं झेल सकता’, टॉक्सिक मैनेजर से परेशान ऑस्ट्रेलिया में भारतीय ने छोड़ी नौकरी, वायरल हो रहा पोस्ट

बेहतर नौकरी, अच्छी कमाई और बेहतर जीवन की तलाश में कई भारतीय विदेश जाकर काम करना पसंद करते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि विदेश में काम के साथ परिवार के लिए भी समय मिलेगा, लेकिन कई बार ज्यादा काम के दबाव से निजी जिंदगी प्रभावित होने लगती है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले एक भारतीय युवक की स्टोरी काफी वायरल हो रही है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय अंकुर सचदेवा के लिए नौकरी और पर्सनल लाइफ के बीच बैलेंस बनाना मुश्किल हो गया। एक बड़े ऑस्ट्रेलियाई बैंक में नौकरी शुरू करने के बाद उन्हें ऑफिस के समय के बाद भी लगातार फोन आते थे और जरूरी काम के नाम पर बार-बार काम करना पड़ता था। मैनेजर के दबाव के कारण उनके पास परिवार के साथ समय बिताने के लिए बहुत कम समय बचता था।

लगातार काम के दबाव के बाद अंकुर सचदेवा ने अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया। इसके बाद उन्हें एक नई नौकरी मिली, जहां अब वह मैनेजर के पद पर काम कर रहे हैं। फिलहाल वह ऑस्ट्रेलियाई सरकार के लिए काम कर रहे हैं।

इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा, “मैं वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए ऑस्ट्रेलिया आया था… लेकिन अब मैं इसे और नहीं झेल सकता।” उन्होंने कैप्शन में आगे लिखा, “मैंने आखिरकार अपने टॉक्सिक भारतीय मैनेजर की वजह से इस्तीफा दे दिया।” वीडियो के अंत में उन्होंने बताया कि अब वह एक नई कंपनी में मैनेजर के तौर पर काम कर रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए, सचदेवा ने अपने पिछले वर्कप्लेस के अनुभव को शेयर किया। उन्होंने कहा, “मेरे मैनेजर मेरी जिंदगी मुश्किल बना देते थे।”

अपना काम भी करवाते थे मैनेजर

सचदेवा के मुताबिक, उनके मैनेजर ऑफिस का समय खत्म होने के बाद भी उनसे संपर्क करते थे और तुरंत काम पूरा करने के लिए कहते थे। उन्होंने बताया, “वह मुझे ऑफिस टाइम के बाद भी कॉल करते थे और कहते थे, ‘यह अर्जेंट है, तुम्हें इसे आज ही खत्म करना है।’ वह मुझसे अपना काम भी करवाते थे और लगभग हर काम को ‘अर्जेंट’ बताते थे, इस उम्मीद के साथ कि उसे उसी दिन पूरा किया जाए।” उन्होंने बताया कि ज्यादा काम के कारण उनकी निजी जिंदगी प्रभावित होने लगी थी। नौकरी छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन उनका नवजात बच्चा भी था और वह परिवार को ज्यादा समय देना चाहते थे। काम की बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण वह परिवार के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पा रहे थे।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार के लिए कर रहे काम

सचदेवा ने कहा, “मैं एक ऐसे दौर में पहुंच गया था, जहां मैं मुश्किल से अपने परिवार के साथ समय बिता पाता था। मैं खासकर अपने नवजात बच्चे के लिए उसके साथ रहना चाहता था।” उन्होंने कहा, “जॉब मार्केट बहुत अच्छा नहीं था, इसलिए मुझे ज्यादा इंटरव्यू कॉल नहीं आ रहे थे। खुशकिस्मती से, आखिरकार मुझे एक कॉल आया और किस्मत से मेरा चयन हो गया। इसके अलावा, यह एक बहुत अच्छी पोस्ट थी, जिससे यह मौका मेरे लिए और भी खास बन गया।” नई नौकरी में चयन होने के बाद सचदेवा ने अपनी पुरानी नौकरी छोड़ दी और अब ऑस्ट्रेलियाई सरकार के लिए काम कर रहे हैं।

यूजर्स ने क्या कहा

उनकी कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने ऑफिस के बाद काम के दबाव पर बात की, तो कुछ ने पूछा कि मैनेजर बनने के बाद सचदेवा अपनी टीम के साथ कैसा व्यवहार करेंगे। एक यूजर ने लिखा, “भाई, सिर्फ ऑस्ट्रेलिया में ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोप में भी यही हाल है। भारत में तो यह पहले से ही हो रहा था और अब भारतीयों ने विदेशों में भी ऐसा करना शुरू कर दिया है।” एक और यूजर ने कहा, “और अब शायद तुम्हारे जूनियर भी ऐसा ही करेंगे। मजाक कर रहा हूँ! तुम्हें शुभकामनाएं। अपनी टीम के लिए एक अच्छा और सपोर्टिव माहौल बनाओ।” दूसरे यूजर ने कहा, “ध्यान रखना कि तुम दूसरे लोगों के साथ ऐसा न करो। इस चेन को तोड़ने वाले बनो। बधाई हो।”

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दुबई का नाम सुनते ही लोगों के मन में आलीशान इमारतें, शानदार लाइफस्टाइल और बड़े करियर के सपने आने लगते हैं। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक ऐसी दुनिया भी है, जहां कई लोग अपने परिवार से दूर रहकर रोज नई चुनौतियों का सामना करते हैं। विदेश में सफलता हासिल करने की राह हमेशा आसान नहीं होती। अकेले रहना, हर जिम्मेदारी खुद संभालना और अपनों की यादों के साथ आगे बढ़ना कई बार भावनात्मक रूप से मुश्किल हो जाता है। दुबई में रहने वाली 23 वर्षीय भारतीय युवती अनुष्का शर्मा ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी जिंदगी का ऐसा ही अनुभव साझा किया।

उन्होंने बताया कि अच्छी सैलरी और बेहतर अवसरों के साथ विदेश की जिंदगी में कई अनदेखी कीमतें भी चुकानी पड़ती हैं। उनकी कहानी ने उन हजारों लोगों की भावनाओं को सामने ला दिया है, जो सपनों के लिए घर से दूर रहते हैं।

बीमारी से लेकर मुश्किल दिनों तक

उन्होंने कहा कि घर से दूर रहने वालों के लिए सबसे मुश्किल पल तब आते हैं, जब वो बीमार पड़ते हैं या किसी परेशानी का सामना करते हैं। थकाऊ काम के बाद भी खुद ही हर जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है, जिससे कई बार अकेलापन और मानसिक दबाव महसूस होता है।

सपनों की कीमत होती है

अनुष्का ने अपने संदेश में कहा कि आरामदायक जिंदगी छोड़कर विदेश में मेहनत करना आसान नहीं होता, लेकिन परिवार के बेहतर भविष्य और आर्थिक आजादी के लिए किए गए ये त्याग भविष्य में बड़ी उपलब्धि बन सकते हैं।

दुबई ड्रीम के पीछे की अनकही हकीकत

उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि विदेश में सफलता सिर्फ पैसों से नहीं मापी जाती, बल्कि इसके पीछे कई भावनात्मक बलिदान भी होते हैं। परिवार से दूरी और अकेले संघर्ष करने की कहानी उन हजारों भारतीयों की भी है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में अपने घर से दूर रह रहे हैं।

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