ऑफिस भी, ट्रैवल भी! बिना ज्यादा छुट्टियों के ऐसे बनाएं घूमने का प्लान

क्या 9 से 5 की जॉब करते हुए भी बार-बार घूमा जा सकता है? इसका जवाब है—हां। सही प्लानिंग, छुट्टियों का समझदारी से इस्तेमाल और बजट मैनेजमेंट (budget management) के साथ नौकरी छोड़े बिना भी ट्रैवल का सपना पूरा किया जा सकता है। आइए जानते हैं कुछ आसान टिप्स, जिनकी मदद से आप काम और घूमने के बीच बेहतरीन बैलेंस बना सकते हैं:

 

ट्रिप (trip) की प्लानिंग पहले से करें

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अगर आप नौकरी के साथ घूमना चाहते हैं, तो पहले से प्लान बनाना सबसे जरूरी है। ट्रैवल की तारीख, बजट, होटल और फ्लाइट (flights) की बुकिंग समय रहते कर लें। इससे खर्च कम होता है और ऑफिस से छुट्टी लेने में भी आसानी रहती है।

 

 

छुट्टियों (holidays) और वीकेंड (weekends) का सही इस्तेमाल करें

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सिर्फ लंबी छुट्टियों का इंतजार करने की बजाय, सरकारी छुट्टियों और वीकेंड को जोड़कर ट्रिप प्लान करें। इससे कम छुट्टियों में भी 4 से 10 दिन तक का अच्छा ब्रेक मिल सकता है और नई जगहों को आराम से घूमने का मौका मिलता है।

 

 

हर महीने ट्रैवल फंड (travel fund) बनाएं

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ट्रैवल के लिए अलग से बचत करना अच्छी आदत है। हर महीने अपनी सैलरी का थोड़ा हिस्सा ट्रैवल फंड में रखें और गैर-जरूरी खर्चों को कम करें। इससे ट्रिप का खर्च एक साथ उठाने का दबाव नहीं पड़ता और बिना स्ट्रेस के ट्रैवलिंग की जा सकती है।

 

 

 

रिमोट वर्क (remote work) का फायदा उठाएं

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अगर आपकी कंपनी वर्क फ्रॉम होम (work-from-home) या वर्क फ्रॉम एनीवेयर (work from anywhere) की सुविधा देती है, तो इसका पूरा लाभ लें। कुछ दिन किसी नई जगह से काम करते हुए बाकी समय वहां घूम सकते हैं। इससे काम और ट्रैवल दोनों साथ-साथ चलते हैं।

 

 

 

एक्स्ट्रा इनकम (extra income) और स्मार्ट बजटिंग अपनाएं

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अगर पॉसिबल हो, तो फ्रीलांसिंग (freelancing), कंटेंट क्रिएशन (content creation) या किसी दूसरे पार्ट-टाइम काम से एक्स्ट्रा कमाई करें। यह पैसा ट्रैवल के खर्च में मदद कर सकता है। हालांकि, एक्स्ट्रा कमाई जरूरी नहीं है—सही बजट प्लानिंग और रेगुलर सेविंग से भी साल में एक या दो अच्छी ट्रिप आसानी से की जा सकती हैं।

यूपी में 10 हजार युवाओं की होगी भर्ती, प्रोजेक्ट गंगा से गांव में होगी 20 हजार से एक लाख तक की इनकम, जानिए पूरी स्कीम

Project Ganga Scheme Explained: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने और गांवों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक बड़ी पहल की है। राज्य सरकार एक महत्वाकांक्षी योजना प्रोजेक्ट गंगा लेकर आ रही है। सरकार का दावा है कि प्रोजेक्ट गंगा उत्तर प्रदेश के ग्रामीण डिजिटल भविष्य की आधारशिला बनने जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की 57000 ग्राम पंचायतों, गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक हाई-स्पीड फाइबर ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाकर डिजिटल असमानता को पूरी तरह खत्म करना है।

इस परियोजना के जरिए गांवों को शहरों जैसी आधुनिक डिजिटल सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, ई-गवर्नेस, स्मार्ट कृषि, डिजिटल भुगतान और रोजगार के नए अवसरों का द्वार खुलेगा। अब ग्रामीणों को सरकारी सेवाओं, बैंकिंग और विभिन्न प्रमाणपत्रों के लिए शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इस योजना के तहत 8 से 10 हजार युवाओं की भर्ती की जाएगी। इनकी मासिक आमदनी 1 लाख रुपये तक हो सकती है।

प्रोजेक्ट गंगा की प्रमुख विशेषताएं और बड़े माइलस्टोन

प्रोजेक्ट गंगा के सभी प्रमुख माइलस्टोन पूरे कर लिए गए हैं और सरकार व पार्टनर्स ने इसकी तैयारियों को तेज कर दिया है। इस योजना की मुख्य बातें यहां नीचे दी गई हैं-

10 हजार युवाओं को रोजगार: डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर के रूप में 8000 से 10000 युवाओं की भर्ती की जाएगी। युवाओं को अपने ही गांव में डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित करने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

₹20 हजार से ₹1 लाख तक की इनकम: शुरुआत में डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम करने वाले युवाओं की मासिक आय करीब 20000 रुपये होगी। जैसे-जैसे ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी यह आमदनी बढ़कर 1 लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकती है।

महिलाओं की 50% भागीदारी: महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए गंगा प्रोजेक्ट के अंतर्गत बनने वाले डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की सुनिश्चित की गई है। इससे ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

ब्याज मुक्त लोन: अपने गांव या घर में इंटरनेट उद्यम शुरू करने के लिए सरकार मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत युवाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त लोन उपलब्ध करा रही है।

पहले चरण में 21 जिले शामिल, नेपाल सीमा को प्राथमिकता

यह परियोजना चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तर प्रदेश में लागू की जाएगी। योजना के पहले चरण में राज्य के 21 जिलों को शामिल किया गया है। इसमें नेपाल सीमा से सटे श्रावस्ती, बहराइच और बलरामपुर जैसे सीमावर्ती जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी। अगले 2 से 3 वर्षों में इस परियोजना का विस्तार पूरे उत्तर प्रदेश में कर दिया जाएगा। इस योजना से प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों और करीब 20 लाख परिवारों को सीधे तौर पर डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से पूरे प्रदेश में 1 लाख से अधिक रोजगार सृजन की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।

गांवों में रुकगा पलायन, मिलेंगे फ्रीलांसिंग और रिमोट वर्क के अवसर

हाई-स्पीड इंटरनेट और फ्री वाई-फाई की उपलब्धता से ग्रामीण यूपी में डिजिटल क्रांति आएगी। इससे युवाओं को बड़े फायदे मिलेंगे। गांवों में ही ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी होने से युवाओं को फ्रीलांसिंग, रिमोट वर्क, ऑनलाइन वोकेशनल ट्रेनिंग और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं मिलेंगी। हाई-स्पीड इंटरनेट की मदद से अब गांवों के युवाओं को कोडिंग सीखने, फ्रीलांसिंग करने या अपना खुद का टेक-स्टार्टअप शुरू करने के लिए दिल्ली या नोएडा जैसे बड़े शहरों में पलायन नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आसानी से जोड़ने के लिए सरकार बेहद किफायती दरों पर इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराएगी।

साइबर सिक्योरिटी और स्मार्ट कनेक्टिविटी पर विशेष फोकस

इस प्रोजेक्ट का टारगेट सिर्फ इंटरनेट पहुंचाना ही नहीं है बल्कि गांवों को भविष्य की डिजिटल तकनीकों के लिए तैयार करना है। योजना के तहत सीसीटीवी आधारित सुरक्षा समाधान, साइबर सिक्योरिटी सेवाएं और विभिन्न संस्थानों की डिजिटल कनेक्टिविटी को बेहद मजबूत किया जाएगा। साइबर सुरक्षा, सीसीटीवी और स्मार्ट कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि ग्रामीण डेटा और परिसर पूरी तरह सुरक्षित रहें।

हिंदुजा समूह की कंपनी है नॉलेज पार्टनर

इस विशाल और महत्वाकांक्षी डिजिटल परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने मजबूत साझेदारी की है। दिग्गज हिंदुजा समूह की ब्रॉडबैंड इकाई वनओटीटी इंटरटेनमेंट लिमिटेड इस पूरे प्रोजेक्ट में नॉलेज पार्टनर और इम्प्लीमेंटेशन एनैबलर के रूप में शामिल है।

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45000 की नौकरी छोड़ दिल्ली की स्नेहा ने सीखी स्पेनिश, एक लैंग्वेज ने ऐसी बदली जिंदगी कि अब बिना जॉब भी स्विट्जरलैंड में बिता रहीं लाइफ!

बहुत से लोग मानते हैं कि फाइनेंशियल सिक्योरिटी पाने का एकमात्र तरीका एक स्टेबल नौकरी है। लेकिन एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर का कहना है कि वह बिना किसी रेगुलर कॉर्पोरेट नौकरी के, दुनिया के सबसे महंगे देशों में से एक, स्विट्जरलैंड में छह महीने बिता पाईं।

एक इंस्टाग्राम वीडियो में, स्नेह गौर ने बताया कि कैसे उन्होंने फिक्स्ड सैलरी वाली नौकरी छोड़कर कमाई के अलग-अलग जरीये बनाए, जिससे उन्हें अपनी शर्तों पर जीने और काम करने की आजादी मिली। उनकी कहानी ने अब ऑनलाइन चर्चा छेड़ दी है।

गौर ने बताया कि उनके सफर की शुरुआत तब हुई जब वह एक कॉर्पोरेट नौकरी कर रही थीं और महीने के लगभग 45,000 रुपये कमा रही थीं। उस समय, उनका मानना ​​था कि सफलता का मतलब है डिग्री हासिल करना, अच्छी नौकरी पाना और प्रमोशन पाना।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता था कि सफलता का मतलब यही है – डिग्री लेना, सैलरी पाना, नौकरी करना और अगला प्रमोशन पाना।” लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि वह कुछ अलग करना चाहती थीं। अपनी मर्जी से रहने की जगह चुनने, घूमने-फिरने और उन चीजों पर काम करने की आजादी जो मुझे सच में पसंद थीं।” एक ही रास्ते पर चलने के बजाय, उन्होंने स्पैनिश सीखने का फैसला किया।

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गौर के मुताबिक, उस एक स्किल ने नए मौके खोले। इससे उन्हें स्पेन जाने, अलग-अलग देशों के लोगों से मिलने और इंटरनेशनल अनुभव पाने में मदद मिली। बाद में, उन्होंने उस जानकारी को एक बिजनेस में बदल दिया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले उन्होंने स्पैनिश सिखाना शुरू किया, और फिर स्पेन ट्रैवल गाइड, डिजिटल प्रोडक्ट्स, ऑनलाइन एंटरप्रेन्योर और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम और ब्रांड कोलैबोरेशन जैसे काम शुरू किए।

गौर ने बताया कि कमाई के कई जरिया होने का मतलब था कि अब उन्हें कंपनी की सैलरी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता था। उन्होंने कहा, “जब मैं स्विट्ज़रलैंड गई, तो मैं कंपनी की सैलरी पर निर्भर नहीं थी क्योंकि मेरा लैपटॉप और मेरी रिमोट टीम ही काफी थी।”

स्नेहा ने बताया कि “कभी-कभी आपकी जिंदगी बदलने वाली चीज सिर्फ प्रमोशन नहीं, बल्कि कोई स्किल होती है।” अपनी पोस्ट के कैप्शन में गौर ने लिखा, “कोई नौकरी नहीं। कंपनी से कोई सैलरी नहीं। फिर भी हर सुबह स्विट्जरलैंड में आंख खुली। सच तो यह है कि स्पेन में रहते हुए ही मैंने कुछ ऐसा बनाया जिससे मुझे जहां चाहूं वहां रहने की आजादी मिली। न कोई ऑफिस, न कोई बॉस, न किसी की इजाजत की जरूरत। आजादी का यही वो रूप है जिसे पाने की कोशिश करना सही है।”

इस पोस्ट पर लोगों ने खूब प्रतिक्रिया दी और कई यूजर्स उनकी यात्रा के बारे में और जानना चाहते थे। एक यूजर ने लिखा, “कृपया मुझे बताएं।” एक और ने पूछा, “एक सीधा सा सवाल है कि आप किस वीजा पर 6 महीने तक रहीं? स्पेन का सामान्य रेजिडेंट परमिट तो सिर्फ 3 महीने की इजाजत देता है, या फिर आपने स्पेन की नागरिकता ले ली थी?” एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “इसके लिए कैसे अप्लाई करें?” वहीं कई अन्य लोगों ने हार्ट और फायर इमोजी के साथ प्रतिक्रिया दी।