नौकरी के बीच भी जिंदगी और घूमने का मजा! यही है नई जनरेशन का लाइफ फॉर्मूला

आज के यंग प्रोफेशनल्स सिर्फ पैसे कमाने पर ही नहीं, बल्कि बेहतर लाइफस्टाइल और मानसिक सुकून पर भी ध्यान दे रहे हैं। यही वजह है कि ‘माइक्रो-रिटायरमेंट’ तेजी से पॉपुलर हो रहा है। इसमें लोग नौकरी छोड़े बिना कुछ महीनों या एक साल का प्लान करके ब्रेक लेकर घूमते हैं, नई स्किल्स सीखते हैं या अपने शौक पूरे करते हैं।

 

माइक्रो-रिटायरमेंट

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माइक्रो-रिटायरमेंट का मतलब नौकरी छोड़ देना नहीं, बल्कि कुछ समय के लिए अपनी मर्जी से काम से ब्रेक लेना है। यह ब्रेक कुछ महीनों से लेकर एक साल तक का हो सकता है। इस दौरान लोग घूमने-फिरने, नई चीजें सीखने, परिवार के साथ समय बिताने या अपने अधूरे सपने पूरे करने पर ध्यान देते हैं। जब उन्हें लगता है कि वे फिर से तैयार हैं, तो वे अपने करियर में वापसी कर लेते हैं।

 

 

बढ़ता ट्रेंड

आज के युवाओं के लिए सिर्फ अच्छी सैलरी ही सब कुछ नहीं है। वे अपनी मानसिक शांति, अच्छी हेल्थ और जिंदगी के एक्सपीरियंस को भी उतना ही इम्पोर्टेंस देते हैं। लगातार काम करने से होने वाली थकान और स्ट्रेस से बचने के लिए कई लोग माइक्रो-रिटायरमेंट का रास्ता चुन रहे हैं। उनका मानना है कि जिंदगी का आनंद लेने के लिए रिटायरमेंट तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

 

 

 

फाइनेंशियल प्लान

अगर आप माइक्रो-रिटायरमेंट लेना चाहते हैं, तो सबसे पहले पैसों की अच्छी प्लानिंग करना जरूरी है। ब्रेक के दौरान नौकरी से इनकम नहीं होगी, इसलिए पहले से सेविंग होना, इमरजेंसी फंड तैयार रखना और बिना कारण के कर्ज से बचना जरूरी है। अच्छी तैयारी होने पर आप बिना पैसों की चिंता के अपने ब्रेक का मजा ले सकते हैं।

 

 

ब्रेक आइडियाज

माइक्रो-रिटायरमेंट के समय का सही इस्तेमाल करना भी जरूरी है। इस दौरान आप नई जगहों की ट्रिप कर सकते हैं, कोई नई भाषा या स्किल सीख सकते हैं, फिटनेस पर ध्यान दे सकते हैं, अपना छोटा बिजनेस आइडिया आजमा सकते हैं या परिवार और दोस्तों के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं।

 

बेनिफिट्स ऑफ माइक्रो-रिटायरमेंट

कुछ समय तक काम से दूर रहने से मन और शरीर दोनों को आराम मिलता है। इस ब्रेक में लोग नई जगहों पर घूमते हैं, नई स्किल्स सीखते हैं और खुद को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। कई लोगों का कहना है कि इस तरह का ब्रेक लेने के बाद वे अपने काम पर और बेहतर तरीके से फोकस के साथ वापस लौटते हैं।

 

 

माइक्रो-रिटायरमेंट से पहले ध्यान रखें

माइक्रो-रिटायरमेंट सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन यह हर किसी के लिए आसान नहीं होता। अगर परिवार की जिम्मेदारियां ज्यादा हैं या फाइनेंशियल कंडीशन मजबूत नहीं है, तो लंबा ब्रेक लेना मुश्किल हो सकता है। इसलिए ऐसा फैसला करने से पहले अपनी सेविंग, जिम्मेदारियों और आगे की करियर प्लानिंग को ध्यान में रखना जरूरी है। सही तैयारी के साथ लिया गया माइक्रो-रिटायरमेंट ही परफेक्ट हो सकता है।

‘मुसाफिर कैफे’ जैसा जीवन चाहते हैं! नौकरी छोड़ने से पहले इन 5 बातों को न करें नजरअंदाज

आपने भी कभी सोचा है कि शहर की भागदौड़ छोड़कर पहाड़ों में सुकून से जिंदगी बिताई जाए! सुबह उठते ही सामने खूबसूरत पहाड़ हों, हाथ में गर्म कॉफी हो और न ट्रैफिक की टेंशन, न ऑफिस की मीटिंग। नेटफ्लिक्स की मुसाफिर कैफे देखने के बाद यह सपना कई लोगों का अपना सपना भी बन गया है। लेकिन पहाड़ों की जिंदगी सिर्फ खूबसूरत नजारों तक नहीं होती। वहां नई शुरुआत करने से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेना बहुत जरूरी है, ताकि बाद में आपका सपना मुश्किल में न बदल जाए:

 

असलियत को समझें (Reality Check)

4,400+ Woman Using A Laptop In The Mountain Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock

पहाड़ों में रहना बहुत अच्छा लगता है, लेकिन वहां रोजमर्रा की जिंदगी भी होती है। अगर आप कैफे, होमस्टे (homestay) या कोई छोटा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो उसमें भी खूब मेहनत करनी पड़ती है। छुट्टियां (vacation) मनाने और हमेशा वहीं रहने में बहुत फर्क होता है। इसलिए फैसला लेने से पहले कुछ दिन वहां रहकर माहौल को जरूर समझें।

 

 

पैसों की सही योजना बनाएं (Financial Planning)

Swiss Traditional House In Rural Switzerland Stock Photo, Picture and Royalty Free Image. Image 12060831.नौकरी छोड़ने से पहले अपनी बचत जरूर देखें। नया काम शुरू होने में समय लग सकता है और शुरुआत में कमाई भी कम हो सकती है। ऐसे में किराया, बिजली, स्टाफ, सामान और दूसरे खर्च चलते रहते हैं। इसलिए कम से कम 6 महीने से 1 साल तक का खर्च पहले से बचाकर रखें।

लोगों से अपनापन बनाएं (Local Community)

Inside a legacy mountain house with snowy views of Wyoming's Grand Tetons

अगर पहाड़ों में बसना चाहते हैं, तो सिर्फ घर लेना काफी नहीं है। वहां रहने वाले लोगों से अच्छे रिश्ते बनाना भी जरूरी है। उनकी संस्कृति को समझें, लोकल लोगों के साथ काम करें। इससे नई जगह पर बसना आसान हो जाता है।

पहाड़ों की जिंदगी को अपनाएं (Mountain Lifestyle)

पहाड़ों में हर सुविधा शहर जैसी नहीं मिलती। कई जगह इंटरनेट धीमा हो सकता है, अस्पताल दूर हो सकते हैं और बारिश या बर्फबारी में आने-जाने में भी दिक्कत हो सकती है। इसलिए वहां की लाइफस्टाइल को अपनाने के लिए पहले से तैयार रहें।

 

अपनी स्किल्स का इस्तेमाल करें (Keep Your Skills)

नौकरी छोड़ने का मतलब यह नहीं कि पुरानी स्किल्स बेकार हो जाएंगी। अगर आप राइटिंग, डिजाइनिंग, आईटी, डिजिटल मार्केटिंग या किसी और फील्ड में काम करते हैं, तो पहाड़ों से भी ऑनलाइन काम कर सकते हैं। इससे नई शुरुआत के दौरान आपकी कमाई भी बनी रहेगी और स्ट्रेस भी कम होगा।

 

ऑफिस भी, ट्रैवल भी! बिना ज्यादा छुट्टियों के ऐसे बनाएं घूमने का प्लान

क्या 9 से 5 की जॉब करते हुए भी बार-बार घूमा जा सकता है? इसका जवाब है—हां। सही प्लानिंग, छुट्टियों का समझदारी से इस्तेमाल और बजट मैनेजमेंट (budget management) के साथ नौकरी छोड़े बिना भी ट्रैवल का सपना पूरा किया जा सकता है। आइए जानते हैं कुछ आसान टिप्स, जिनकी मदद से आप काम और घूमने के बीच बेहतरीन बैलेंस बना सकते हैं:

 

ट्रिप (trip) की प्लानिंग पहले से करें

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अगर आप नौकरी के साथ घूमना चाहते हैं, तो पहले से प्लान बनाना सबसे जरूरी है। ट्रैवल की तारीख, बजट, होटल और फ्लाइट (flights) की बुकिंग समय रहते कर लें। इससे खर्च कम होता है और ऑफिस से छुट्टी लेने में भी आसानी रहती है।

 

 

छुट्टियों (holidays) और वीकेंड (weekends) का सही इस्तेमाल करें

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सिर्फ लंबी छुट्टियों का इंतजार करने की बजाय, सरकारी छुट्टियों और वीकेंड को जोड़कर ट्रिप प्लान करें। इससे कम छुट्टियों में भी 4 से 10 दिन तक का अच्छा ब्रेक मिल सकता है और नई जगहों को आराम से घूमने का मौका मिलता है।

 

 

हर महीने ट्रैवल फंड (travel fund) बनाएं

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ट्रैवल के लिए अलग से बचत करना अच्छी आदत है। हर महीने अपनी सैलरी का थोड़ा हिस्सा ट्रैवल फंड में रखें और गैर-जरूरी खर्चों को कम करें। इससे ट्रिप का खर्च एक साथ उठाने का दबाव नहीं पड़ता और बिना स्ट्रेस के ट्रैवलिंग की जा सकती है।

 

 

 

रिमोट वर्क (remote work) का फायदा उठाएं

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अगर आपकी कंपनी वर्क फ्रॉम होम (work-from-home) या वर्क फ्रॉम एनीवेयर (work from anywhere) की सुविधा देती है, तो इसका पूरा लाभ लें। कुछ दिन किसी नई जगह से काम करते हुए बाकी समय वहां घूम सकते हैं। इससे काम और ट्रैवल दोनों साथ-साथ चलते हैं।

 

 

 

एक्स्ट्रा इनकम (extra income) और स्मार्ट बजटिंग अपनाएं

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अगर पॉसिबल हो, तो फ्रीलांसिंग (freelancing), कंटेंट क्रिएशन (content creation) या किसी दूसरे पार्ट-टाइम काम से एक्स्ट्रा कमाई करें। यह पैसा ट्रैवल के खर्च में मदद कर सकता है। हालांकि, एक्स्ट्रा कमाई जरूरी नहीं है—सही बजट प्लानिंग और रेगुलर सेविंग से भी साल में एक या दो अच्छी ट्रिप आसानी से की जा सकती हैं।

अब होटल की जरूरत नहीं पड़ेगी चलता-फिरता घर है ये ट्रैवलिंग वैन, घर जैसे सफर का ले पूरा मजा!

ट्रैवलिंग वैन आज के समय में घूमने का एक बहुत ही आरामदायक और पॉपुलर तरीका बन चुकी है। इसमें सफर के साथ-साथ रहने, खाने और आराम करने की पूरी सुविधा मिलती है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन ऑप्शन है जो रोड ट्रिप और एडवेंचर पसंद करते हैं। ट्रैवलिंग वैन को जरूरत और बजट के हिसाब से अलग-अलग तरह से डिजाइन किया जाता है। आइए जानते हैं ट्रैवलिंग वैन के बारे में, जो आज के समय में घूमने का एक बहुत ही आरामदायक और नया तरीका बन चुकी है:

ट्रैवलिंग वैन क्या होती है

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ट्रैवलिंग वैन एक ऐसी गाड़ी होती है जिसे ट्रैवल करने और उसी में रहने दोनों के लिए डिजाइन किया जाता है। इसमें आप चलते-फिरते सफर भी करते हैं और उसी में सोने, खाने और आराम करने की फैसिलिटी मिलती है, इसलिए इसे “मोबाइल होम” भी कहा जाता है। यह लंबे रोड ट्रिप, फैमिली ट्रिप और एडवेंचर ट्रैवल के लिए एक बहुत ही आरामदायक ऑप्शन माना जाता है क्योंकि इसमें होटल की जरूरत नहीं पड़ती। भारत में इसे “ट्रैवलिंग वैन” या “हाउस ऑन व्हील्स” भी कहा जाता है। यह कॉन्सेप्ट पहले यूरोप और अमेरिका में काफी पॉपुलर था, लेकिन अब भारत में भी धीरे-धीरे इसका ट्रेंड बढ़ रहा है और लोग इसे लग्जरी रोड ट्रिप के लिए पसंद करने लगे हैं।

ट्रैवलिंग वैन की जरूरत

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ट्रैवलिंग वैन अलग-अलग प्रकार की होती हैं, जो जरूरत और बजट के हिसाब से बनाई जाती हैं। इनमें बेसिक कैम्पर वैन होती है जिसमें सिर्फ जरूरी फैसिलिटी जैसे बेड और छोटा किचन होता है, जबकि लग्जरी मोटरहोम पूरी तरह एक चलता-फिरता घर होता है जिसमें बेडरूम, किचन, बाथरूम, एसी और टीवी जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। वहीं ऑफ-रोड कैम्पर वैन पहाड़ों और खराब रास्तों के लिए बनाई जाती है, और पॉप-अप रूफ वैन में छत ऊपर उठ जाती है जिससे अंदर खड़े होकर आराम किया जा सकता है। इसके अलावा मिनी कैम्पर वैन भी होती है जो छोटी होती है और कम लोगों के लिए उपयोग की जाती है।

कैसे बनाई जाती है

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ट्रैवलिंग वैन आमतौर पर बड़ी वैन या बस को पूरी तरह मॉडिफाई करके बनाई जाती है। पहले गाड़ी के अंदर का पूरा हिस्सा खाली किया जाता है, फिर उसमें मजबूत लेकिन हल्के मटेरियल जैसे लकड़ी, फाइबर, एल्युमिनियम और प्लास्टिक पैनल्स का इस्तेमाल करके नया इंटीरियर बनाया जाता है। इसके साथ इलेक्ट्रिकल सिस्टम, बैटरी बैकअप, सोलर पैनल, पानी की पाइपलाइन और वेंटिलेशन सिस्टम भी फिट किया जाता है ताकि यह पूरी तरह एक चलता-फिरता घर बन सके।

ट्रैवलिंग वैन का डिजाइन

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इसका डिजाइन बहुत स्मार्ट तरीके से किया जाता है ताकि कम जगह में ज्यादा फैसिलिटी मिल सकें। आगे ड्राइविंग केबिन होता है, बीच में मल्टीपर्पज़ एरिया होता है जिसे सोफा या बेड में बदला जा सकता है, और पीछे किचन या स्टोरेज बनाया जाता है। दीवारों और छत में इंसुलेशन लगाया जाता है ताकि गर्मी, ठंड और बारिश का असर अंदर न आए और सफर आरामदायक बना रहे।

किचन सेटअप

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किचन को बहुत कॉम्पैक्ट लेकिन पूरी तरह फंक्शनल बनाया जाता है। इसमें छोटा गैस स्टोव या इंडक्शन प्लेट, सिंक, मिनी फ्रिज, स्टोरेज कैबिनेट और कभी-कभी माइक्रोवेव या कॉफी मशीन भी होती है। किचन को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि सफर के दौरान भी सेफ तरीके से खाना बनाया जा सके और गैस या इलेक्ट्रिक सिस्टम से कोई खतरा न हो।

सोने और आराम की सुविधा

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ट्रैवलिंग वैन में आरामदायक बेड या कन्वर्टिबल सोफा होता है जिसे जरूरत के अनुसार बदला जा सकता है। इसके अलावा वेंटिलेशन के लिए खिड़कियां, फैन या एसी लगाया जाता है। कुछ लग्जरी वैन में टीवी, म्यूजिक सिस्टम और छोटे स्टोरेज कैबिनेट भी होते हैं ताकि सफर और भी आरामदायक बन सके।

पानी की व्यवस्था

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इसमें साफ पानी के लिए फ्रेश वाटर टैंक लगाया जाता है जो आमतौर पर गाड़ी के नीचे या पीछे फिट किया जाता है। यह पाइपलाइन के जरिए किचन, सिंक और कभी-कभी बाथरूम से जुड़ा होता है। पानी का प्रेशर बनाए रखने के लिए पंप सिस्टम भी लगाया जाता है ताकि उपयोग में कोई परेशानी न हो।

वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम

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इस्तेमाल किए गए पानी और वेस्ट के लिए ग्रे वाटर और ब्लैक वाटर टैंक लगाए जाते हैं। ये टैंक पूरी तरह सील और सेफ होते हैं और गाड़ी के नीचे फिट किए जाते हैं। इन्हें समय-समय पर खाली करना पड़ता है जो तय किए गए डिस्पोजल पॉइंट या कैंपिंग साइट पर किया जाता है, ताकि सफर साफ और इको-फ्रेंडली रहे।

खर्च कितना आता है

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ट्रैवलिंग वैन का खर्च उसकी डिजाइन, साइज और लग्जरी सुविधाओं पर निर्भर करता है। बेसिक वैन लगभग ₹5 लाख से ₹15 लाख में बन सकती है, मिड-रेंज वैन ₹15 लाख से ₹40 लाख तक जाती है, जबकि हाई-एंड लग्जरी RV का खर्च ₹50 लाख से ₹1 करोड़ या उससे भी ज्यादा हो सकता है। इसमें सोलर सिस्टम, एसी और लग्जरी इंटीरियर जोड़ने से खर्च और बढ़ जाता है।

ट्रैवलिंग वैन और टेंट लगाना

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ट्रैवलिंग वैन के साथ आप कही भी टेंट लगा सकते है, वैन के अंदर जगह सीमित होती है और बाहर खुली हवा में बैठने, खाने या आराम करने के लिए एक्स्ट्रा स्पेस मिल जाता है। यह खासकर नेचर ट्रिप, जंगल, पहाड़ या झील किनारे कैंपिंग में बहुत उपयोगी होता है। टेंट लगाने से आप दिन में आउटडोर एंजॉय कर सकते हैं और रात में जरूरत पड़ने पर उसमें सो भी सकते हैं, जिससे जर्नी और भी एडवेंचर बन जाती है।

ऐसे लगाएं टेंट

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ट्रैवलिंग वैन के साथ टेंट लगाना बहुत आसान होता है। सबसे पहले एक सेफ और सपाट जगह चुनी जाती है, फिर वैन के पीछे या साइड में टेंट खोलकर उसकी बेस शीट (ग्राउंड कवर) बिछाई जाती है। इसके बाद टेंट की रॉड्स या पोल्स को जोड़कर उसका फ्रेम बनाया जाता है। फिर रस्सियों और पेग्स की मदद से टेंट को कसकर बांधा जाता है। अंत में वैन के साथ टेंट का कनेक्शन सही तरीके से सेट किया जाता है ताकि अंदर-बाहर आसानी से आना-जाना हो सके।

ट्रैवलिंग वैन का बहुत फायदा होता है, इसमें होटल बुकिंग की जरूरत नहीं होती और आप अपनी मर्जी से कहीं भी रुक सकते हैं। यह फैमिली ट्रिप, एडवेंचर रोड ट्रिप, नेचर ट्रैवल और लंबी ट्रिप के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन है। यह सफर को सिर्फ ट्रिप नहीं बल्कि एक यादगार एक्सपीरियंस बना देती है जहां आराम, आज़ादी और रोमांच तीनों एक साथ मिलते हैं। तो आप भी अपनी अगली ट्रिप के लिए ट्रैवलिंग वैन का इस्तेमाल करके एक यादगार सफर का एक्सपीरियंस कर सकते हैं।