जानें क्यों Gen Z की पहली पसंद बन रहे हैं दुनिया के ये 10 शहर! जहां लाइफ, करियर और मस्ती का मिलेगा पूरा पैकेज

आज की जेन जी जनरेशन अपने रहने के लिए ऐसी जगह पसंद करती है, जहां काम और पढ़ाई के साथ घूमने-फिरने, एंटरटेनमेंट और सोशल लाइफ का भी अच्छा बैलेंस हो। उनके लिए किसी शहर की पहचान सिर्फ बड़ी इमारतों या अच्छे जॉब ऑप्शन से नहीं होती, बल्कि वहां का कल्चर, नाइटलाइफ, खाने-पीने की जगहें और रोज की जिंदगी भी काफी मायने रखती है।

इसी वजह से दुनिया के कुछ शहर जेन जी के बीच तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं। यहां किफायती लाइफस्टाइल, आसानी से घूमने की सुविधा और क्वालिटी ऑफ लाइफ जैसी कई चीजें युवाओं को अट्रैक्ट करती हैं। ‘टाइम आउट’ ने भी इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जेन जी के लिए दुनिया के बेहतरीन शहरों की एक स्पेशल लिस्ट तैयार की है।

1. टोक्यो, जापान

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टोक्यो इस लिस्ट में पहले नंबर पर है। यहां सर्वे में शामिल सभी यूथ ने रोज खुश रहने की बात कही। शहर की तेज और आसान पब्लिक ट्रांसपोर्ट, देर रात तक चलने वाली नाइटलाइफ, म्यूजिक बार और कई जगहों पर मुफ्त म्यूजियम एंट्री जैसी फैसिलिटी यूथ को काफी पसंद आती हैं। यहां काम, मनोरंजन और घूमने के लिए बहुत सारे ऑप्शन मिलते हैं।

2. वेलेंसिया, स्पेन

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समुद्र के किनारे बसा वेलेंसिया अपने खूबसूरत मौसम और आरामदायक माहौल के लिए जाना जाता है। यहां रहने का खर्च कई बड़े यूरोपीय शहरों की तुलना में कम है। समुद्र तट, आउटडोर एक्टिविटीज और अच्छे लोगों की वजह से यहां की लाइफस्टाइल काफी सुकून भरी है। घर से काम करने वाले यूथ के लिए यह अच्छा शहर माना जाता है।

3. बैंकॉक, थाईलैंड

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बैंकॉक अपनी चहल-पहल, स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड और शानदार नाइटलाइफ के लिए यूथ के बीच काफी पॉपुलर है। यहां कम बजट में खाने, घूमने और एंटरटेनमेंट के कई ऑप्शन मिल जाते हैं। शहर का माहौल काफी एनर्जेटिक है, इसलिए यहां रहने वाले युवा काम के साथ घूमने और दोस्तों के साथ समय बिताने का मजा भी ले सकते हैं।

4. कोपेनहेगन, डेनमार्क

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कोपेनहेगन को अच्छी लाइफ क्वालिटी और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए पसंद किया जाता है। यहां साइकिल से घूमना काफी आसान है और शहर में हरियाली भी खूब देखने को मिलती है। साफ-सुथरा माहौल और पर्यावरण को लेकर जागरूक लाइफस्टाइल इसे उन युवाओं के लिए खास बनाती है, जो करियर के साथ अपनी सेहत और प्राइवेट लाइफ पर भी ध्यान देना चाहते हैं।

5. पोर्टो, पुर्तगाल

पोर्टो अपनी खूबसूरत पुरानी इमारतों, समुद्र तटों और मिलनसार लोगों के लिए जाना जाता है। यहां कम्युनिटी का माहौल काफी अच्छा है, जिससे नए लोगों के लिए घुलना-मिलना आसान हो जाता है। बाहर खाना-पीना भी कई दूसरे यूरोपीय शहरों की तुलना में कम खर्चीला है। शहर की संस्कृति और शांत माहौल युवाओं को काफी अट्रैक्ट करता है।

6. बर्लिन, जर्मनी

बर्लिन को युवा और क्रिएटिव लोगों का शहर कहा जा सकता है। यहां की नाइटलाइफ, आर्ट सीन, म्यूजिक और बड़े पार्क युवाओं को खूब पसंद आते हैं। शहर में मनोरंजन के कई बजट-फ्रेंडली ऑप्शन हैं। साथ ही स्टार्टअप और क्रिएटिव इंडस्ट्री में काम करने वालों के लिए भी यहां अच्छे मौके मिलते हैं।

7. न्यूयॉर्क, अमेरिका

न्यूयॉर्क अपनी तेज रफ्तार जिंदगी और हर समय एक्टिव रहने वाले माहौल के लिए मशहूर है। शहर में पैदल घूमना आसान है और यहां हर तरह के म्यूजियम, थिएटर, रेस्टोरेंट और कल्चरल इवेंट मिल जाते हैं। नौकरी और करियर के बहुत सारे मौके होने के कारण यह युवाओं को अट्रैक्ट करता है, लेकिन यहां रहना काफी महंगा हो सकता है।

8. शंघाई, चीन

शंघाई आधुनिक इमारतों, शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित माहौल के लिए जाना जाता है। यहां टेक्नोलॉजी और बिजनेस से जुड़े करियर के कई मौके मिलते हैं। नए लोगों के लिए भी शहर में कई तरह की फैसिलिटीज हैं। यही वजह है कि करियर पर फोकस करने वाले युवा इसे एक अच्छा ऑप्शन मानते हैं।

9. एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड

एडिनबर्ग अपनी पुरानी बिल्डिंग, इतिहास और खूबसूरत हरियाली के लिए खास है। यहां सुरक्षा अच्छी है और शहर में पैदल घूमना भी आसान है। इसके अलावा यहां की अनोखी नाइटलाइफ युवाओं को अट्रैक्ट करती है। काम और आराम के बीच अच्छा बैलेंस बनाने के लिए भी यह शहर पसंद किया जाता है।

10. मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया

मेलबर्न अपनी क्रिएटिविटी, कला और खाने-पीने के लिए मशहूर है। यहां अच्छे रेस्टोरेंट के साथ इंडी थिएटर, लाइव कॉमेडी और म्यूजिक जैसे एंटरटेनमेंट के कई ऑप्शन मिलते हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में कम बजट में खाने-पीने की जगहें भी मिल जाती हैं। यही वजह है कि करियर की शुरुआत करने वाले युवा प्रोफेशनल्स के लिए मेलबर्न अट्रैक्टिव सिटी है।

नौकरी के बीच भी जिंदगी और घूमने का मजा! यही है नई जनरेशन का लाइफ फॉर्मूला

आज के यंग प्रोफेशनल्स सिर्फ पैसे कमाने पर ही नहीं, बल्कि बेहतर लाइफस्टाइल और मानसिक सुकून पर भी ध्यान दे रहे हैं। यही वजह है कि ‘माइक्रो-रिटायरमेंट’ तेजी से पॉपुलर हो रहा है। इसमें लोग नौकरी छोड़े बिना कुछ महीनों या एक साल का प्लान करके ब्रेक लेकर घूमते हैं, नई स्किल्स सीखते हैं या अपने शौक पूरे करते हैं।

 

माइक्रो-रिटायरमेंट

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माइक्रो-रिटायरमेंट का मतलब नौकरी छोड़ देना नहीं, बल्कि कुछ समय के लिए अपनी मर्जी से काम से ब्रेक लेना है। यह ब्रेक कुछ महीनों से लेकर एक साल तक का हो सकता है। इस दौरान लोग घूमने-फिरने, नई चीजें सीखने, परिवार के साथ समय बिताने या अपने अधूरे सपने पूरे करने पर ध्यान देते हैं। जब उन्हें लगता है कि वे फिर से तैयार हैं, तो वे अपने करियर में वापसी कर लेते हैं।

 

 

बढ़ता ट्रेंड

आज के युवाओं के लिए सिर्फ अच्छी सैलरी ही सब कुछ नहीं है। वे अपनी मानसिक शांति, अच्छी हेल्थ और जिंदगी के एक्सपीरियंस को भी उतना ही इम्पोर्टेंस देते हैं। लगातार काम करने से होने वाली थकान और स्ट्रेस से बचने के लिए कई लोग माइक्रो-रिटायरमेंट का रास्ता चुन रहे हैं। उनका मानना है कि जिंदगी का आनंद लेने के लिए रिटायरमेंट तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

 

 

 

फाइनेंशियल प्लान

अगर आप माइक्रो-रिटायरमेंट लेना चाहते हैं, तो सबसे पहले पैसों की अच्छी प्लानिंग करना जरूरी है। ब्रेक के दौरान नौकरी से इनकम नहीं होगी, इसलिए पहले से सेविंग होना, इमरजेंसी फंड तैयार रखना और बिना कारण के कर्ज से बचना जरूरी है। अच्छी तैयारी होने पर आप बिना पैसों की चिंता के अपने ब्रेक का मजा ले सकते हैं।

 

 

ब्रेक आइडियाज

माइक्रो-रिटायरमेंट के समय का सही इस्तेमाल करना भी जरूरी है। इस दौरान आप नई जगहों की ट्रिप कर सकते हैं, कोई नई भाषा या स्किल सीख सकते हैं, फिटनेस पर ध्यान दे सकते हैं, अपना छोटा बिजनेस आइडिया आजमा सकते हैं या परिवार और दोस्तों के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं।

 

बेनिफिट्स ऑफ माइक्रो-रिटायरमेंट

कुछ समय तक काम से दूर रहने से मन और शरीर दोनों को आराम मिलता है। इस ब्रेक में लोग नई जगहों पर घूमते हैं, नई स्किल्स सीखते हैं और खुद को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। कई लोगों का कहना है कि इस तरह का ब्रेक लेने के बाद वे अपने काम पर और बेहतर तरीके से फोकस के साथ वापस लौटते हैं।

 

 

माइक्रो-रिटायरमेंट से पहले ध्यान रखें

माइक्रो-रिटायरमेंट सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन यह हर किसी के लिए आसान नहीं होता। अगर परिवार की जिम्मेदारियां ज्यादा हैं या फाइनेंशियल कंडीशन मजबूत नहीं है, तो लंबा ब्रेक लेना मुश्किल हो सकता है। इसलिए ऐसा फैसला करने से पहले अपनी सेविंग, जिम्मेदारियों और आगे की करियर प्लानिंग को ध्यान में रखना जरूरी है। सही तैयारी के साथ लिया गया माइक्रो-रिटायरमेंट ही परफेक्ट हो सकता है।