59 की उम्र में करियर ने लिया यू-टर्न! नौकरी छूटने के बाद ये महिला पहुंचीं अंटार्कटिका

59 साल की उम्र में जब मे ली अंटार्कटिका पहुंचीं, तो उनकी नई नौकरी में टेक्नोलॉजी या ऑफिस का काम नहीं, बल्कि फोर्कलिफ्ट, कार्गो और जमा देने वाली ठंड उनका इंतजार कर रही थी। मैकमर्डो रिसर्च स्टेशन पर उन्होंने सामान संभालने का काम शुरू किया। खास बात यह है कि इससे पहले ली ने करीब 30 साल ह्यूलेट-पैकार्ड (HP) जैसी टेक्नोलॉजी कंपनी में काम किया था और उन्हें उम्मीद थी कि वह इसी कंपनी से रिटायर होंगी। उनकी आगे की कहानी बताती है ली के अंटार्कटिका पहुंचने के बाद के अनुभव, वहां के काम और बेहद ठंडे माहौल में जिंदगी कैसे बदली, इसकी कई दिलचस्प बातें भी सामने आती हैं।

लेकिन अचानक नौकरी जाने के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया। लंबे कॉर्पोरेट करियर के बाद उन्हें नई नौकरी की तलाश करनी पड़ी और इसी दौरान उन्हें अंटार्कटिका में काम करने का मौका मिला। बिल्कुल अलग माहौल में काम करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इस बदलाव को स्वीकार किया और एक नई तरह की जिंदगी का अनुभव किया। उनकी यह कहानी बताती है कि करियर में बदलाव के लिए उम्र हमेशा रुकावट नहीं बनती।

नौकरी जाने के बाद बदली सोच

HP में करीब 30 साल काम करने के बाद जब 59 साल की उम्र में ली की नौकरी चली गई, तो उन्होंने फिर से टेक्नोलॉजी कंपनी में नौकरी तलाशना शुरू किया। उन्होंने दूसरी कंपनियों में आवेदन किया और अपने पुराने प्रोफेशनल संपर्कों से भी मदद ली, लेकिन अनुभव और रेफरल होने के बावजूद उन्हें जल्दी नौकरी नहीं मिली। करीब एक महीने की कोशिश के बाद एक दोस्त ने उन्हें सलाह दी कि सिर्फ अच्छी सैलरी वाली नौकरी तलाशने के बजाय ऐसा काम क्यों न किया जाए, जिसमें उन्हें सच में दिलचस्पी हो।

अंटार्कटिका से पहले ही था खास लगाव

ली के लिए अंटार्कटिका बिल्कुल अनजान जगह नहीं थी। वह पर्यटक के तौर पर पहले ही दो बार वहां जा चुकी थीं और इस जगह को लेकर उनकी दिलचस्पी बढ़ गई थी। दोस्त की सलाह के बाद उन्होंने सोचना शुरू किया कि अगर अंटार्कटिका उन्हें इतना पसंद है, तो क्यों न वहां घूमने के बजाय काम करने का मौका तलाशा जाए। इसके बाद उन्होंने रिसर्च स्टेशनों पर मिलने वाली नौकरियों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की।

सप्लाई टेक्नीशियन की मिली नौकरी

रिसर्च करने के दौरान ली को Amentum में काम करने का मौका मिला। यह कंपनी अमेरिकी अंटार्कटिक कार्यक्रम को कई तरह की सेवाएं देती है। ली ने यहां सप्लाई टेक्नीशियन की नौकरी के लिए आवेदन किया। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया के साथ बैकग्राउंड चेक और शारीरिक जांच से भी गुजरना पड़ा। आखिरकार उनका चयन हो गया। इस नौकरी में सैलरी उनकी पिछली नौकरी के मुकाबले काफी कम थी, लेकिन उनके पास बचत थी और घर का लोन भी पहले ही चुका चुकी थीं, इसलिए उन्हें तुरंत ज्यादा सैलरी वाली नौकरी की जरूरत नहीं थी।

2025 में पहुंचीं मैकमर्डो स्टेशन

ली 2025 में अंटार्कटिका पहुंचीं। उनकी यात्रा ऑकलैंड और क्राइस्टचर्च से होते हुए आगे बढ़ी और फिर उन्होंने बोइंग C-17 ग्लोबमास्टर III विमान से अंटार्कटिका की यात्रा की। मैकमर्डो स्टेशन पहुंचने के बाद उन्होंने IT और कम्युनिकेशन्स वेयरहाउस में काम शुरू किया। यहां उनका काम सामान और सप्लाई से जुड़ा था, जो उनके पुराने कॉर्पोरेट काम से काफी अलग अनुभव था।

काम के साथ मिली नई तरह की जिंदगी

अंटार्कटिका में ली को सिर्फ नई नौकरी ही नहीं, बल्कि बिल्कुल अलग तरह की जिंदगी भी मिली। उन्होंने बताया कि वहां लोग फोन में व्यस्त रहने के बजाय खाने के समय साथ बैठकर बातचीत करते हैं। काम के अलावा उन्होंने आर्ट शो, लाइन डांसिंग, मैराथन और बिंगो जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया। उन्होंने DJ के तौर पर भी वॉलंटियर किया और 1980 के दशक के संगीत पर साप्ताहिक शो होस्ट किया। स्टेशन पहुंचने के करीब एक हफ्ते के अंदर ही उन्हें महसूस होने लगा कि वह इस नई जिंदगी में खुद को सहज महसूस कर रही हैं और यहीं रहना चाहती हैं।

अंटार्कटिका में बिताए समय ने ली के लिए सिर्फ करियर का रास्ता नहीं बदला, बल्कि जिंदगी को देखने का उनका नजरिया भी बदल दिया। लंबे समय तक कॉर्पोरेट दुनिया में काम करने के बाद उन्हें वहां ऐसा माहौल मिला, जहां लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं और साथ मिलकर रहते हैं। इस अनुभव से उन्हें समझ आया कि जिंदगी हमेशा हमारी सोची हुई योजना के मुताबिक नहीं चलती, लेकिन बदलाव आने पर उसके साथ आगे बढ़ना सीखा जा सकता है। ली की कहानी बताती है कि नौकरी छूटना या करियर में बदलाव आना किसी नई शुरुआत का रास्ता भी बन सकता है। उम्र या पुराना करियर किसी को खुद के लिए नई राह चुनने से नहीं रोकता। कभी-कभी जिंदगी में आया अचानक बदलाव ही इंसान को ऐसा अनुभव दे जाता है, जिसकी उसने पहले कभी कल्पना भी नहीं की होती।

कृष्ण वाणी: मन को मजबूत कैसे बनाये? भगवान श्री कृष्ण ने भगवत गीता में बताया मुश्किलों से लड़ने का सीक्रेट!

भगवान श्री कृष्ण की भगवद गीता की सीख हमें जीवन को एक अलग नजरिए से देखने की राह दिखाती है। जीवन में कई बार ऐसा समय आता है, जब नौकरी को लेकर चिंता बनी रहती है, पैसों की परेशानी जल्दी खत्म नहीं होती या किसी रिश्ते को ठीक करने की कोशिश के बावजूद हालात वैसे ही रहते हैं। ऐसे समय में मन बार-बार यही सोचता है कि आखिर बदलाव कब आएगा और हमें कोई रास्ता या संकेत कब मिलेगा। हर दिन एक जैसा लगने लगता है और इंतजार करना भी मुश्किल हो जाता है। गीता का यह संदेश हमें याद दिलाता है कि जीवन में कोई भी सिचुएशन हमेशा एक जैसी नहीं रहती।

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1. लोगों से अटैचमेंट छोड़ें

जब कोई परेशानी लंबे समय तक चलती है, तो हमें लगने लगता है कि अब जिंदगी शायद हमेशा ऐसी ही रहेगी। करियर में बार-बार निराशा मिलना, पैसों की कमी या किसी अपने का साथ न होना उस समय बहुत बड़ी परेशानी लग सकती है। धीरे-धीरे इंसान उसी सिचुएशन को अपनी जिंदगी का हिस्सा मान लेता है और सोचने लगता है कि इसमें अब कुछ नहीं बदलेगा। लेकिन श्री कृष्ण की सीख हमें याद दिलाती है कि जिंदगी में कोई भी सिचुएशन हमेशा एक जैसी नहीं रहती। जैसे मौसम बदलता है, वैसे ही सुख-दुख और जिंदगी के हालात भी बदलते रहते हैं।2. नई आदतें और हुनर अपनाएं

कई बार हम सिर्फ नतीजे देखकर तय करते हैं कि हमारी जिंदगी आगे बढ़ रही है या नहीं। प्रमोशन नहीं मिला, तो लगता है कि करियर रुक गया है। सैलरी नहीं बढ़ी, तो लगता है कि मेहनत का कोई फायदा नहीं हुआ। असल जिंदगी में बदलाव धीरे-धीरे होता है और उसका असर तुरंत दिखाई नहीं देता। हो सकता है कि इस दौरान आपका एक्सपीरियंस बढ़ रहा हो, आप नई चीजें सीख रहे हों या आपको अपनी जिंदगी और जरूरतों को पहले से बेहतर समझ आने लगा हो।3. करियर रीसेट करें

मुश्किल दौर से गुजरना और पूरी जिंदगी को मुश्किल मान लेना, दोनों अलग बातें हैं। कोई रिश्ता खत्म हो गया, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपको आगे कभी अच्छा रिश्ता नहीं मिलेगा। करियर में रुकावट आई है, तो इसका मतलब यह भी नहीं कि आप आगे सफल नहीं हो सकते। इसी तरह आज पैसों की परेशानी है, तो जरूरी नहीं कि आगे भी हालात वैसे ही रहें। श्री कृष्ण की सीख है कि बाहर की सिचुएशन चाहे जैसी हों, हमें खुद को अंदर से मजबूत और शांत रखने की कोशिश करनी चाहिए।4. बदलाव की शुरुआत खुद से करें

समय बदलने का इंतजार करना ठीक है, लेकिन इसके लिए हाथ पर हाथ रखकर बैठना जरूरी नहीं है। अगर नौकरी नहीं मिल रही है, तो नई जगह कोशिश की जा सकती है या कोई नया हुनर सीखा जा सकता है। पैसों की परेशानी है, तो खर्चों पर ध्यान देकर बचत शुरू की जा सकती है। किसी रिश्ते में परेशानी है, तो अपनी सीमाएं तय करने या सही तरीके से बात करने की जरूरत हो सकती है। कई बार जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए कुछ पुरानी आदतों, लोगों या कामों को छोड़ना भी जरूरी होता है।

5. कल की चिंता छोड़ें

मुश्किल समय में हमारा ध्यान अक्सर इस बात पर लगा रहता है कि चीजें कब ठीक होंगी। लेकिन श्री कृष्ण की सीख है कि हमें फ्यूचर के नतीजे की चिंता में अपना आज खराब नहीं करना चाहिए। जो काम इस समय हमारे हाथ में है, उसे पूरी ईमानदारी और मेहनत से करते रहें।

श्री कृष्ण की यह सीख उन लोगों के लिए बहुत खास है, जो काफी समय से किसी मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। गीता हमें यह उम्मीद नहीं देती कि हर परेशानी एक पल में खत्म हो जाएगी, बल्कि यह समझाती है कि आज की मुश्किल को अपने पूरे जीवन की सच्चाई न मानें। सही दिशा में छोटे-छोटे कदम उठाते रहें, क्योंकि समय और हालात हमेशा एक जैसे नहीं रहते।

नौकरी के बीच भी जिंदगी और घूमने का मजा! यही है नई जनरेशन का लाइफ फॉर्मूला

आज के यंग प्रोफेशनल्स सिर्फ पैसे कमाने पर ही नहीं, बल्कि बेहतर लाइफस्टाइल और मानसिक सुकून पर भी ध्यान दे रहे हैं। यही वजह है कि ‘माइक्रो-रिटायरमेंट’ तेजी से पॉपुलर हो रहा है। इसमें लोग नौकरी छोड़े बिना कुछ महीनों या एक साल का प्लान करके ब्रेक लेकर घूमते हैं, नई स्किल्स सीखते हैं या अपने शौक पूरे करते हैं।

 

माइक्रो-रिटायरमेंट

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माइक्रो-रिटायरमेंट का मतलब नौकरी छोड़ देना नहीं, बल्कि कुछ समय के लिए अपनी मर्जी से काम से ब्रेक लेना है। यह ब्रेक कुछ महीनों से लेकर एक साल तक का हो सकता है। इस दौरान लोग घूमने-फिरने, नई चीजें सीखने, परिवार के साथ समय बिताने या अपने अधूरे सपने पूरे करने पर ध्यान देते हैं। जब उन्हें लगता है कि वे फिर से तैयार हैं, तो वे अपने करियर में वापसी कर लेते हैं।

 

 

बढ़ता ट्रेंड

आज के युवाओं के लिए सिर्फ अच्छी सैलरी ही सब कुछ नहीं है। वे अपनी मानसिक शांति, अच्छी हेल्थ और जिंदगी के एक्सपीरियंस को भी उतना ही इम्पोर्टेंस देते हैं। लगातार काम करने से होने वाली थकान और स्ट्रेस से बचने के लिए कई लोग माइक्रो-रिटायरमेंट का रास्ता चुन रहे हैं। उनका मानना है कि जिंदगी का आनंद लेने के लिए रिटायरमेंट तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

 

 

 

फाइनेंशियल प्लान

अगर आप माइक्रो-रिटायरमेंट लेना चाहते हैं, तो सबसे पहले पैसों की अच्छी प्लानिंग करना जरूरी है। ब्रेक के दौरान नौकरी से इनकम नहीं होगी, इसलिए पहले से सेविंग होना, इमरजेंसी फंड तैयार रखना और बिना कारण के कर्ज से बचना जरूरी है। अच्छी तैयारी होने पर आप बिना पैसों की चिंता के अपने ब्रेक का मजा ले सकते हैं।

 

 

ब्रेक आइडियाज

माइक्रो-रिटायरमेंट के समय का सही इस्तेमाल करना भी जरूरी है। इस दौरान आप नई जगहों की ट्रिप कर सकते हैं, कोई नई भाषा या स्किल सीख सकते हैं, फिटनेस पर ध्यान दे सकते हैं, अपना छोटा बिजनेस आइडिया आजमा सकते हैं या परिवार और दोस्तों के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं।

 

बेनिफिट्स ऑफ माइक्रो-रिटायरमेंट

कुछ समय तक काम से दूर रहने से मन और शरीर दोनों को आराम मिलता है। इस ब्रेक में लोग नई जगहों पर घूमते हैं, नई स्किल्स सीखते हैं और खुद को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। कई लोगों का कहना है कि इस तरह का ब्रेक लेने के बाद वे अपने काम पर और बेहतर तरीके से फोकस के साथ वापस लौटते हैं।

 

 

माइक्रो-रिटायरमेंट से पहले ध्यान रखें

माइक्रो-रिटायरमेंट सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन यह हर किसी के लिए आसान नहीं होता। अगर परिवार की जिम्मेदारियां ज्यादा हैं या फाइनेंशियल कंडीशन मजबूत नहीं है, तो लंबा ब्रेक लेना मुश्किल हो सकता है। इसलिए ऐसा फैसला करने से पहले अपनी सेविंग, जिम्मेदारियों और आगे की करियर प्लानिंग को ध्यान में रखना जरूरी है। सही तैयारी के साथ लिया गया माइक्रो-रिटायरमेंट ही परफेक्ट हो सकता है।