मुंबई-गुरुग्राम की चमक छोड़ भोपाल लौटे कारोबारी, आखिर ऐसा क्या मिला कि वापस जाने का मन नहीं?

गुरुग्राम और मुंबई जैसे महानगरों में करीब 17 साल बिताने के बाद कारोबारी और संस्थापक करण कुकरेजा ने अपने शहर भोपाल लौटने का फैसला किया। उनका कहना है कि इस बदलाव ने उनकी जिंदगी का नजरिया ही बदल दिया। जहां बड़े शहरों में करियर की रफ्तार के साथ ट्रैफिक, लंबा सफर और भागदौड़ रोजमर्रा का हिस्सा बन जाते हैं, वहीं भोपाल में उन्हें काम के साथ सुकून भी मिल रहा है।

कुकरेजा के मुताबिक, छोटे शहर में लौटने का सबसे बड़ा फायदा समय और जीवनशैली में महसूस होता है। कम दूरी, कम यात्रा और अपने शहर का परिचित माहौल उनकी जिंदगी को ज्यादा आरामदायक बना रहा है। खास बात यह है कि उनका मानना है कि अब छोटे शहरों में भी काम और कारोबार के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। ऐसे में क्या करियर के लिए हमेशा महानगर में रहना जरूरी है? कुकरेजा की कहानी इस सोच पर विचार करने को मजबूर करती है।

15-20 मिनट में सफर, समय की बड़ी बचत

कुकरेजा ने भोपाल की जिंदगी का जिक्र करते हुए बताया कि शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचने में अक्सर सिर्फ 15 से 20 मिनट लग जाते हैं। महानगरों में जहां लोग घंटों ट्रैफिक में फंसे रहते हैं, वहीं भोपाल में कम दूरी और अपेक्षाकृत कम यातायात उनकी दिनचर्या को काफी आरामदायक बनाता है। उन्होंने अपने काम की एक झलक भी साझा की, जिसमें बालकनी, बारिश और लैपटॉप के साथ उनका कार्यस्थल नजर आया। उनके मुताबिक, छोटे शहर में काम करने का मतलब यह नहीं है कि आपको अच्छी पेशेवर जिंदगी से समझौता करना पड़ेगा।

अब छोटे शहरों में भी बन रहे नए मौके

कुकरेजा का मानना है कि आज के समय में छोटे शहर सिर्फ रहने की जगह नहीं रह गए हैं। दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में भी कारोबार और काम के नए अवसर तेजी से सामने आ रहे हैं।

उन्होंने महानगरों में पहले से स्थापित लोगों से अपने गृह नगरों के बारे में दोबारा सोचने की अपील की। उनके अनुसार, छोटे शहरों में काम करने का तरीका भले ही अलग हो, लेकिन यहां भी बहुत कुछ नया शुरू किया जा सकता है।

‘करियर और सुकून में से एक चुनना जरूरी नहीं’

कुकरेजा की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि उन्होंने महानगर छोड़ने के बाद करियर को खत्म होते नहीं देखा। इसके उलट, उन्हें लगता है कि छोटे शहर में रहते हुए भी नए काम और कारोबार खड़े किए जा सकते हैं। उनका संदेश है कि अगर किसी ने महानगर में अपनी जिंदगी व्यवस्थित कर ली है, तो एक बार यह जरूर सोचना चाहिए कि क्या वही काम अपने शहर से भी किया जा सकता है। उनके मुताबिक, अपने शहर लौटने पर समय, जिंदगी की रफ्तार और काम के बीच बेहतर संतुलन मिल सकता है।

भोपाल की जिंदगी ने लोगों को भी सोचने पर मजबूर किया

कुकरेजा के अनुभव पर इंटरनेट यूजर्स की भी प्रतिक्रिया आई। कई लोगों ने माना कि दूसरे और तीसरे स्तर के शहर बेहतर जीवनशैली दे सकते हैं। एक यूजर ने कहा कि छोटे शहरों में जीवन की गुणवत्ता वास्तव में बेहतर हो सकती है। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि हर सफल करियर के लिए महानगर में रहना जरूरी नहीं है। कुकरेजा की कहानी इसी बदलती सोच की ओर इशारा करती है, जहां लोग अब बड़ी नौकरी और बड़े शहर के बजाय अपने समय, सुकून और बेहतर जिंदगी को भी उतनी ही अहमियत देने लगे हैं।

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9-5 की नौकरी के बाद UK में लोग करते हैं ये काम, भारतीय महिला ने VIDEO में दिखाया पूरा सच

ब्रिटेन में रह रही भारतीय महिला अनुष्का व्यास का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। वीडियो में उन्होंने UK और भारत की 9-5 नौकरी के बाद की जिंदगी का अंतर दिखाने की कोशिश की है। अनुष्का ने गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे अपने घर के पास एक पार्क का वीडियो शेयर किया, जहां लोग काम खत्म करने के बाद परिवार के साथ समय बिताते, घूमते और फिटनेस पर ध्यान देते नजर आए। उनका कहना है कि UK में नौकरी के बाद भी लोगों के पास अपनी जिंदगी के लिए वक्त बचता है।

वहीं, भारत में ऑफिस खत्म होने के बाद लंबा सफर, ट्रैफिक और कई बार अतिरिक्त काम दिन का बाकी समय भी ले लेते हैं। अनुष्का के मुताबिक, इसी वजह से कई लोगों की पूरी उम्मीद वीकेंड पर टिक जाती है। उनके वीडियो ने सोशल मीडिया पर वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

गुरुवार शाम 5:30 बजे पार्क का दिखाया नजारा

अनुष्का ने इंस्टाग्राम पर शेयर वीडियो में गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे अपने घर के पास एक पार्क का नजारा दिखाया। उन्होंने बताया कि यह न तो वीकेंड था और न ही कोई छुट्टी का दिन। इसके बावजूद पार्क में लोग परिवार के साथ समय बिता रहे थे, पिकनिक कर रहे थे और फिटनेस पर ध्यान दे रहे थे।

‘यहां काम के बाद भी जिंदगी बचती है’

अनुष्का के मुताबिक, UK में लोग अपना काम खत्म करने के बाद परिवार और निजी जिंदगी के लिए समय निकाल पाते हैं। उनके अनुसार, शाम का समय सिर्फ घर पहुंचने और आराम करने में ही नहीं निकलता, बल्कि लोग घूमने, एक्सरसाइज करने और अपनों के साथ वक्त बिताने का मौका भी पाते हैं।

भारत में 9-5 के बाद शुरू होती है दूसरी जद्दोजहद?

अनुष्का ने भारत की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि कई लोगों के लिए ऑफिस का समय खत्म होने के बाद भी दिन खत्म नहीं होता। ऑफिस से निकलने के बाद ट्रैफिक और लंबा सफर समय ले लेता है। कई बार बॉस की तरफ से अतिरिक्त काम भी मिल जाता है। ऐसे में घर पहुंचते-पहुंचते काफी देर हो जाती है।

वीकेंड का भी नहीं मिल पाता पूरा आराम

उन्होंने कहा कि लगातार थकान के कारण कई लोग वीकेंड का इस्तेमाल भी सिर्फ आराम करने में कर देते हैं। ऐसे में परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताना या अपनी सेहत और फिटनेस पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है।

‘सिर्फ पैसा नहीं, क्वालिटी ऑफ लाइफ भी जरूरी’

अनुष्का का कहना है कि बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस भी उन वजहों में शामिल है, जिनके कारण कुछ भारतीय विदेश में बसना पसंद करते हैं। उनके मुताबिक, अच्छी नौकरी और कमाई के साथ सुकून, परिवार के लिए समय और अपनी जिंदगी जीने की आजादी भी जरूरी है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी राय रखी। कुछ लोगों ने UK के वर्क-लाइफ बैलेंस को बेहतर बताया, तो कुछ ने भारतीय वर्क कल्चर में बदलाव की जरूरत पर बात की। एक यूजर ने इसे “अनरियल वर्क-लाइफ बैलेंस” बताया, जबकि दूसरे ने कहा कि काम के बाद मिलने वाला सुकून भी बेहद जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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आज की जेन जी जनरेशन अपने रहने के लिए ऐसी जगह पसंद करती है, जहां काम और पढ़ाई के साथ घूमने-फिरने, एंटरटेनमेंट और सोशल लाइफ का भी अच्छा बैलेंस हो। उनके लिए किसी शहर की पहचान सिर्फ बड़ी इमारतों या अच्छे जॉब ऑप्शन से नहीं होती, बल्कि वहां का कल्चर, नाइटलाइफ, खाने-पीने की जगहें और रोज की जिंदगी भी काफी मायने रखती है।

इसी वजह से दुनिया के कुछ शहर जेन जी के बीच तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं। यहां किफायती लाइफस्टाइल, आसानी से घूमने की सुविधा और क्वालिटी ऑफ लाइफ जैसी कई चीजें युवाओं को अट्रैक्ट करती हैं। ‘टाइम आउट’ ने भी इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जेन जी के लिए दुनिया के बेहतरीन शहरों की एक स्पेशल लिस्ट तैयार की है।

1. टोक्यो, जापान

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टोक्यो इस लिस्ट में पहले नंबर पर है। यहां सर्वे में शामिल सभी यूथ ने रोज खुश रहने की बात कही। शहर की तेज और आसान पब्लिक ट्रांसपोर्ट, देर रात तक चलने वाली नाइटलाइफ, म्यूजिक बार और कई जगहों पर मुफ्त म्यूजियम एंट्री जैसी फैसिलिटी यूथ को काफी पसंद आती हैं। यहां काम, मनोरंजन और घूमने के लिए बहुत सारे ऑप्शन मिलते हैं।

2. वेलेंसिया, स्पेन

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समुद्र के किनारे बसा वेलेंसिया अपने खूबसूरत मौसम और आरामदायक माहौल के लिए जाना जाता है। यहां रहने का खर्च कई बड़े यूरोपीय शहरों की तुलना में कम है। समुद्र तट, आउटडोर एक्टिविटीज और अच्छे लोगों की वजह से यहां की लाइफस्टाइल काफी सुकून भरी है। घर से काम करने वाले यूथ के लिए यह अच्छा शहर माना जाता है।

3. बैंकॉक, थाईलैंड

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बैंकॉक अपनी चहल-पहल, स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड और शानदार नाइटलाइफ के लिए यूथ के बीच काफी पॉपुलर है। यहां कम बजट में खाने, घूमने और एंटरटेनमेंट के कई ऑप्शन मिल जाते हैं। शहर का माहौल काफी एनर्जेटिक है, इसलिए यहां रहने वाले युवा काम के साथ घूमने और दोस्तों के साथ समय बिताने का मजा भी ले सकते हैं।

4. कोपेनहेगन, डेनमार्क

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कोपेनहेगन को अच्छी लाइफ क्वालिटी और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए पसंद किया जाता है। यहां साइकिल से घूमना काफी आसान है और शहर में हरियाली भी खूब देखने को मिलती है। साफ-सुथरा माहौल और पर्यावरण को लेकर जागरूक लाइफस्टाइल इसे उन युवाओं के लिए खास बनाती है, जो करियर के साथ अपनी सेहत और प्राइवेट लाइफ पर भी ध्यान देना चाहते हैं।

5. पोर्टो, पुर्तगाल

पोर्टो अपनी खूबसूरत पुरानी इमारतों, समुद्र तटों और मिलनसार लोगों के लिए जाना जाता है। यहां कम्युनिटी का माहौल काफी अच्छा है, जिससे नए लोगों के लिए घुलना-मिलना आसान हो जाता है। बाहर खाना-पीना भी कई दूसरे यूरोपीय शहरों की तुलना में कम खर्चीला है। शहर की संस्कृति और शांत माहौल युवाओं को काफी अट्रैक्ट करता है।

6. बर्लिन, जर्मनी

बर्लिन को युवा और क्रिएटिव लोगों का शहर कहा जा सकता है। यहां की नाइटलाइफ, आर्ट सीन, म्यूजिक और बड़े पार्क युवाओं को खूब पसंद आते हैं। शहर में मनोरंजन के कई बजट-फ्रेंडली ऑप्शन हैं। साथ ही स्टार्टअप और क्रिएटिव इंडस्ट्री में काम करने वालों के लिए भी यहां अच्छे मौके मिलते हैं।

7. न्यूयॉर्क, अमेरिका

न्यूयॉर्क अपनी तेज रफ्तार जिंदगी और हर समय एक्टिव रहने वाले माहौल के लिए मशहूर है। शहर में पैदल घूमना आसान है और यहां हर तरह के म्यूजियम, थिएटर, रेस्टोरेंट और कल्चरल इवेंट मिल जाते हैं। नौकरी और करियर के बहुत सारे मौके होने के कारण यह युवाओं को अट्रैक्ट करता है, लेकिन यहां रहना काफी महंगा हो सकता है।

8. शंघाई, चीन

शंघाई आधुनिक इमारतों, शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित माहौल के लिए जाना जाता है। यहां टेक्नोलॉजी और बिजनेस से जुड़े करियर के कई मौके मिलते हैं। नए लोगों के लिए भी शहर में कई तरह की फैसिलिटीज हैं। यही वजह है कि करियर पर फोकस करने वाले युवा इसे एक अच्छा ऑप्शन मानते हैं।

9. एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड

एडिनबर्ग अपनी पुरानी बिल्डिंग, इतिहास और खूबसूरत हरियाली के लिए खास है। यहां सुरक्षा अच्छी है और शहर में पैदल घूमना भी आसान है। इसके अलावा यहां की अनोखी नाइटलाइफ युवाओं को अट्रैक्ट करती है। काम और आराम के बीच अच्छा बैलेंस बनाने के लिए भी यह शहर पसंद किया जाता है।

10. मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया

मेलबर्न अपनी क्रिएटिविटी, कला और खाने-पीने के लिए मशहूर है। यहां अच्छे रेस्टोरेंट के साथ इंडी थिएटर, लाइव कॉमेडी और म्यूजिक जैसे एंटरटेनमेंट के कई ऑप्शन मिलते हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में कम बजट में खाने-पीने की जगहें भी मिल जाती हैं। यही वजह है कि करियर की शुरुआत करने वाले युवा प्रोफेशनल्स के लिए मेलबर्न अट्रैक्टिव सिटी है।

4 लाख रुपये महीना कमाता है युवक, फिर भी छोड़ना चाहता है भारत! बताई चौंकाने वाली वजह

अच्छी नौकरी, शानदार कमाई और बड़ी बचत के बावजूद कई युवा बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाने का सपना देखते हैं। ऐसा ही मामला सामने आया है एक 26 वर्षीय रिमोट कर्मचारी डैनियल का, जो हर महीने करीब 4 लाख रुपये कमाता है। आर्थिक रूप से मजबूत होने के बाद भी वह भारत छोड़कर ऑस्ट्रेलिया में बसने की योजना बना रहा है।

डैनियल का कहना है कि उसका फैसला पैसों से ज्यादा जीवन की गुणवत्ता और भविष्य को लेकर है। उसकी सोच पर सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

4 लाख की सैलरी, फिर भी विदेश जाने की तैयारी

डैनियल ने पर्सनल फाइनेंस कोच अंशुमान शर्मा के शो में बताया कि वह एक विदेशी कंपनी के लिए रिमोट काम करता है और उसकी सैलरी यूरो में आती है। उसकी मासिक आय करीब 4 लाख रुपये है, जबकि खर्च लगभग 1.20 लाख रुपये तक सीमित है।

अच्छी बचत होने के कारण वह अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा भविष्य की योजना के लिए जमा कर रहा है। उसका लक्ष्य साल के अंत तक ऑस्ट्रेलिया के लिए आवेदन करना है।

विदेश जाने की वजह सिर्फ पैसा नहीं

जब उनसे पूछा गया कि अगर ऑस्ट्रेलिया जाकर भी वही रिमोट नौकरी करनी है तो देश बदलने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है, तो डैनियल ने कहा कि उसका फैसला बेहतर जीवन और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को लेकर है।

उसका कहना है कि वह अपने बच्चों के लिए ऐसा माहौल चाहता है, जहां उन्हें बेहतर अवसर मिल सकें।

फाइनेंस एक्सपर्ट ने दी बचत की सलाह

अंशुमान शर्मा ने डैनियल को सलाह दी कि वह हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये की रिकरिंग डिपॉजिट शुरू करे। उनके अनुसार, इससे कुछ महीनों में विदेश जाने की प्रक्रिया और PR आवेदन के लिए जरूरी फंड तैयार किया जा सकता है।

देश छोड़ने की सोच पर हुई चर्चा

डैनियल ने भारत में बढ़ते खर्च, टैक्स और कुछ व्यवस्थाओं को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उसने कहा कि उसकी पीढ़ी के कई युवा बेहतर अवसरों और भविष्य की तलाश में विदेश जाने के बारे में सोच रहे हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर लोगों की राय बंटी हुई नजर आई।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

डैनियल की बात वायरल होने के बाद इंटरनेट पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ यूजर्स ने उसकी सोच को समझने की कोशिश की और बेहतर लाइफस्टाइल की तलाश को सही बताया।

वहीं, कुछ लोगों ने विदेश में रहने की वास्तविक लागत और चुनौतियों का हवाला देते हुए कहा कि वहां ज्यादा कमाई के बावजूद खर्च भी काफी बढ़ जाता है।

एक यूजर ने लिखा कि विदेश में रहने के बाद कई लोग वापस भारत आने के बारे में भी सोचते हैं, जबकि कुछ ने डैनियल की योजना को लेकर सवाल उठाए।

कमाई से ज्यादा मायने रखती है जिंदगी की प्राथमिकता

डैनियल की कहानी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बेहतर भविष्य के लिए देश बदलना सही फैसला है या नहीं। जहां कुछ लोग इसे नए अवसरों की तलाश मानते हैं, वहीं कुछ के लिए अपने देश में रहकर आगे बढ़ना बेहतर विकल्प है।

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