पिता से पैसे मांगने से किया इनकार, ₹130 की टिप से शुरू किया सफर, आज सालाना ₹1 करोड़ तक कमाई

दुनिया के सबसे महंगे शहरों में गिने जाने वाले दुबई में बिना नौकरी और बचत के कदम रखना किसी चुनौती से कम नहीं था। Aaliya Lala के लिए भी शुरुआत आसान नहीं रही। अबू धाबी से दुबई पहुंचीं लाला के सामने करियर बनाने के साथ-साथ रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की भी चुनौती थी। हालात ऐसे थे कि खाने के लिए भी पैसे जुटाना मुश्किल हो गया था, लेकिन उन्होंने परिवार से मदद मांगने के बजाय खुद रास्ता निकालने का फैसला किया। छोटी-छोटी कमाई से शुरुआत करने वाली लाला ने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में कदम रखा।

मॉडलिंग और फोटोग्राफी से होते हुए उनका सफर ट्रैवल और लाइफस्टाइल कंटेंट तक पहुंचा। आज वह इंटरनेशनल ब्रांड्स, लग्जरी होटल्स और टूरिज्म बोर्ड्स के साथ काम करती हैं। उनकी कहानी बताती है कि मुश्किल शुरुआत के बावजूद लगातार मेहनत और नए अवसर तलाशने की कोशिश किस तरह करियर की दिशा बदल सकती है।

एक शॉवरमा के लिए करना पड़ा छोटा काम

अब लाखों रुपये की सालाना कमाई करने वाली लाला के लिए शुरुआत बेहद साधारण थी। अबू धाबी से दुबई आने के बाद उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे। पिता से आर्थिक मदद मांगना उन्हें मंजूर नहीं था। ऐसे में उन्होंने अपनी रूममेट के लिए पानी लाने का काम शुरू किया और टिप के तौर पर रोज करीब Dh5-6 मिलने लगे। इसी पैसे से वह दिन में एक शॉवरमा खरीदकर गुजारा करती थीं। करीब एक महीने बाद उन्हें नौकरी मिली और जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी।

मॉडलिंग से शुरू हुआ सफर, कैमरे के दोनों तरफ किया काम

लाला ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की और बाद में फोटोग्राफी भी की। इससे उन्हें कैमरे के सामने और पीछे, दोनों तरह के काम का अनुभव मिला। पिछले 14 से ज्यादा वर्षों में उन्होंने कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। हालांकि यह सफर भी आसान नहीं रहा। वह दो बार अपने सोशल मीडिया पेज खो चुकी हैं और हर बार उन्हें फिर से शुरुआत करनी पड़ी।

आठ साल यात्रा नहीं की, फिर दुनिया देखने की ठानी

लाला बताती हैं कि करीब आठ साल तक उन्होंने यात्रा नहीं की। इसके बाद उनके भीतर दुनिया को देखने और अलग-अलग संस्कृतियों को करीब से समझने की इच्छा पैदा हुई। लोगों, संस्कृति, खान-पान और नए अनुभवों से जुड़ने के जुनून ने उन्हें ट्रैवल कंटेंट की ओर मोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने पर्यटन बोर्डों, इंटरनेशनल ब्रांड्स और लग्जरी होटलों के साथ काम करना शुरू किया।

एक कमाई नहीं, कई इनकम सोर्स बनाए

समय के साथ लाला ने सिर्फ कंटेंट क्रिएशन पर निर्भर रहने के बजाय अपनी कमाई के कई रास्ते तैयार किए। वह एक मीडिया हाउस भी चलाती हैं, जहां इंफ्लुएंसर्स, ब्रांड्स और ट्रैवल एजेंसियों के बीच काम कराया जाता है। इसके अलावा वह UAE के रियल एस्टेट और वित्तीय बाजारों में भी निवेश करती हैं।

सालाना कमाई 1 करोड़ रुपये तक

लाला के मुताबिक, ब्रांड्स और पर्यटन बोर्डों से मिलने वाले काम के आधार पर उनकी औसत सालाना कमाई करीब Dh300,000 से Dh400,000 है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग ₹78 लाख से ₹1.04 करोड़ के बराबर बैठती है। इसके अलावा उनकी मीडिया कंपनी, रियल एस्टेट और निवेश से भी आय होती है।

अब लक्ष्य सिर्फ कमाना नहीं, संपत्ति बनाना है

लाला की कहानी में सबसे बड़ा बदलाव सिर्फ कमाई का आंकड़ा नहीं, बल्कि उनकी सोच में आया बदलाव है। कभी एक शॉवरमा के लिए टिप पर निर्भर रहने वाली लाला अब कई आय स्रोतों के जरिए लंबे समय की वित्तीय सुरक्षा बनाने पर ध्यान दे रही हैं।

उनका लक्ष्य अपने कारोबार का विस्तार करना, मजबूत एसेट्स तैयार करना, समझदारी से निवेश करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने काम को बढ़ाना है। साथ ही वह ऐसी आर्थिक आजादी चाहती हैं, जिसमें वह यात्रा कर सकें, नए अवसर तलाश सकें और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित बना सकें।

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क्या हर सैलरी हाइक के लिए नौकरी बदलना सही है? निहार पाटिल ने बताया दूसरा रास्ता

पुणे के निहार पाटिल की जॉब स्विचिंग को लेकर दी गई सलाह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उनका कहना है कि करियर में एक ऐसा पड़ाव आता है, जब हर बार सिर्फ सैलरी बढ़ाने के लिए नौकरी बदलना जरूरी नहीं होता। खासकर जब नई नौकरी में मिलने वाला हाइक महज 20-30 हजार रुपये का हो, तो टैक्स और दूसरे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह बढ़ोतरी उतनी बड़ी नहीं रह जाती।निहार के मुताबिक, नौकरी चुनते समय केवल पैकेज पर ध्यान देने के बजाय अच्छा मैनेजर, बेहतर प्रोजेक्ट, जॉब सिक्योरिटी और वर्क-लाइफ बैलेंस भी देखना चाहिए।

उनका मानना है कि एक स्थिर नौकरी के साथ अपने खाली समय का इस्तेमाल नई स्किल सीखने, कुछ नया शुरू करने या अतिरिक्त इनकम सोर्स बनाने में किया जा सकता है। इसी सोच को लेकर उनकी बात पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

1.5 से 2 लाख की सैलरी के बाद बदलें नजरिया

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में निहार ने कहा कि भारत में जब किसी की मासिक सैलरी करीब 1.5 से 2 लाख रुपये तक पहुंच जाती है, तो नौकरी बदलने को लेकर सोच थोड़ी अलग होनी चाहिए। उनका तर्क है कि इस स्तर पर ऐसी कंपनियों और भूमिकाओं की संख्या कम हो जाती है, जहां बहुत बड़ा सैलरी जंप मिल सके। ऐसे में अगर नई नौकरी से सिर्फ 20-30 हजार रुपये ज्यादा मिल रहे हैं, तो टैक्स कटने के बाद हाथ में आने वाला वास्तविक अंतर काफी कम महसूस हो सकता है।

ज्यादा CTC का मतलब ज्यादा रिस्क भी?

निहार ने नौकरी बदलने से जुड़े एक और पहलू की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि ज्यादा सैलरी के साथ CTC भी बढ़ता है और कंपनियों में होने वाली री-स्ट्रक्चरिंग या छंटनी के दौरान यह एक जोखिम बन सकता है। ऐसे में अगर मौजूदा कंपनी में काम अच्छा चल रहा है, मैनेजर सपोर्टिव है और करियर स्थिर है, तो केवल छोटे सैलरी हाइक के लिए नौकरी छोड़ना जरूरी नहीं है।

9 से 5 के बाद बनाएं अपना ‘5 से 9’

निहार की सलाह का सबसे दिलचस्प हिस्सा नौकरी के बाहर की जिंदगी को लेकर है। उनका कहना है कि जब आपकी 9 से 5 की नौकरी स्थिर हो जाए, तो उसके बाद के समय को अपनी ग्रोथ के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। नई स्किल सीखना, अपना कोई प्रोजेक्ट शुरू करना या कमाई का दूसरा जरिया तैयार करना भविष्य में ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

उनके मुताबिक, करियर का अंतिम लक्ष्य केवल नौकरी से ज्यादा पैसा कमाना नहीं होना चाहिए। असली मकसद ऐसी जिंदगी बनाना होना चाहिए, जहां आपकी पूरी आर्थिक सुरक्षा सिर्फ एक नौकरी पर निर्भर न हो।

सोशल मीडिया पर छिड़ी दिलचस्प बहस

निहार की बात पर सोशल मीडिया यूजर्स की राय भी बंटी नजर आई। कुछ लोगों ने उनकी सोच को सही बताते हुए कहा कि एक स्तर के बाद फोकस मल्टीपल इनकम सोर्स, बेहतर लाइफस्टाइल और उद्देश्यपूर्ण जिंदगी पर होना चाहिए। वहीं, कुछ यूजर्स ने कॉरपोरेट वर्क कल्चर की हकीकत सामने रखी। एक यूजर ने कहा कि इतनी ज्यादा सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के पास अक्सर दूसरी चीजों के लिए समय ही नहीं बचता, क्योंकि कंपनियां उनसे दिन-रात उपलब्ध रहने की उम्मीद करती हैं।

एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कई कंपनियों में 9 से 5 का मतलब अब 9 से 9 हो चुका है। ऐसे में नौकरी के बाद किसी दूसरी चीज पर ध्यान देना आसान नहीं।

सिर्फ नौकरी या पूरी जिंदगी? असली सवाल यही है

एक यूजर ने इस बहस में संतुलित नजरिया रखते हुए कहा कि 5 से 9 को बेहतर बनाने के साथ-साथ 9 से 5 में भी संतुलन जरूरी है, क्योंकि अगर नौकरी ही नीरस और थकाऊ हो जाए तो बाकी चीजों पर भी असर पड़ता है।

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45000 की नौकरी छोड़ दिल्ली की स्नेहा ने सीखी स्पेनिश, एक लैंग्वेज ने ऐसी बदली जिंदगी कि अब बिना जॉब भी स्विट्जरलैंड में बिता रहीं लाइफ!

बहुत से लोग मानते हैं कि फाइनेंशियल सिक्योरिटी पाने का एकमात्र तरीका एक स्टेबल नौकरी है। लेकिन एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर का कहना है कि वह बिना किसी रेगुलर कॉर्पोरेट नौकरी के, दुनिया के सबसे महंगे देशों में से एक, स्विट्जरलैंड में छह महीने बिता पाईं।

एक इंस्टाग्राम वीडियो में, स्नेह गौर ने बताया कि कैसे उन्होंने फिक्स्ड सैलरी वाली नौकरी छोड़कर कमाई के अलग-अलग जरीये बनाए, जिससे उन्हें अपनी शर्तों पर जीने और काम करने की आजादी मिली। उनकी कहानी ने अब ऑनलाइन चर्चा छेड़ दी है।

गौर ने बताया कि उनके सफर की शुरुआत तब हुई जब वह एक कॉर्पोरेट नौकरी कर रही थीं और महीने के लगभग 45,000 रुपये कमा रही थीं। उस समय, उनका मानना ​​था कि सफलता का मतलब है डिग्री हासिल करना, अच्छी नौकरी पाना और प्रमोशन पाना।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता था कि सफलता का मतलब यही है – डिग्री लेना, सैलरी पाना, नौकरी करना और अगला प्रमोशन पाना।” लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि वह कुछ अलग करना चाहती थीं। अपनी मर्जी से रहने की जगह चुनने, घूमने-फिरने और उन चीजों पर काम करने की आजादी जो मुझे सच में पसंद थीं।” एक ही रास्ते पर चलने के बजाय, उन्होंने स्पैनिश सीखने का फैसला किया।

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गौर के मुताबिक, उस एक स्किल ने नए मौके खोले। इससे उन्हें स्पेन जाने, अलग-अलग देशों के लोगों से मिलने और इंटरनेशनल अनुभव पाने में मदद मिली। बाद में, उन्होंने उस जानकारी को एक बिजनेस में बदल दिया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले उन्होंने स्पैनिश सिखाना शुरू किया, और फिर स्पेन ट्रैवल गाइड, डिजिटल प्रोडक्ट्स, ऑनलाइन एंटरप्रेन्योर और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम और ब्रांड कोलैबोरेशन जैसे काम शुरू किए।

गौर ने बताया कि कमाई के कई जरिया होने का मतलब था कि अब उन्हें कंपनी की सैलरी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता था। उन्होंने कहा, “जब मैं स्विट्ज़रलैंड गई, तो मैं कंपनी की सैलरी पर निर्भर नहीं थी क्योंकि मेरा लैपटॉप और मेरी रिमोट टीम ही काफी थी।”

स्नेहा ने बताया कि “कभी-कभी आपकी जिंदगी बदलने वाली चीज सिर्फ प्रमोशन नहीं, बल्कि कोई स्किल होती है।” अपनी पोस्ट के कैप्शन में गौर ने लिखा, “कोई नौकरी नहीं। कंपनी से कोई सैलरी नहीं। फिर भी हर सुबह स्विट्जरलैंड में आंख खुली। सच तो यह है कि स्पेन में रहते हुए ही मैंने कुछ ऐसा बनाया जिससे मुझे जहां चाहूं वहां रहने की आजादी मिली। न कोई ऑफिस, न कोई बॉस, न किसी की इजाजत की जरूरत। आजादी का यही वो रूप है जिसे पाने की कोशिश करना सही है।”

इस पोस्ट पर लोगों ने खूब प्रतिक्रिया दी और कई यूजर्स उनकी यात्रा के बारे में और जानना चाहते थे। एक यूजर ने लिखा, “कृपया मुझे बताएं।” एक और ने पूछा, “एक सीधा सा सवाल है कि आप किस वीजा पर 6 महीने तक रहीं? स्पेन का सामान्य रेजिडेंट परमिट तो सिर्फ 3 महीने की इजाजत देता है, या फिर आपने स्पेन की नागरिकता ले ली थी?” एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “इसके लिए कैसे अप्लाई करें?” वहीं कई अन्य लोगों ने हार्ट और फायर इमोजी के साथ प्रतिक्रिया दी।