क्या देशभर में चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन? जिंद-सोनीपत रूट के बाद अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी ये जानकारी

देश में पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन के सफल परिचालन के बाद अब इसे दूसरे रेल रूट्स पर भी चलाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिंद-सोनीपत रूट पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के बाद अब इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेल मंत्री ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि दूसरे रेल रूट्स पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का फैसला संसाधनों की उपलब्धता, ऑपरेशनल फिजिबिलिटी और दूसरी जरूरी चीजों पर निर्भर करेगा।

संसद में सांसदों ने पूछे थे हाइड्रोजन तकनीक से जुड़े कई सवाल

आपको बता दें कि राज्यसभा में अलग अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने रेलवे की इस नई तकनीक को लेकर कई सवाल उठाए थे। सांसदों ने इसके विकास पर हुए कुल खर्च, देश भर में स्वीकृत और प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं का ब्योरा, इन परियोजनाओं के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की उपलब्धता, लागत और ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन के लिए विकसित की जा रही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी को लेकर रेल मंत्री से जवाब मांगा था।

जिंद-सोनीपत रूट पर दर्ज हुई कॉमर्शियल सर्विस की सक्सेस

सांसदों के सवालों का लिखित जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च सदन को बताया कि 17 जुलाई 2026 को जिंद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत की गई थी। 17 जुलाई से लेकर 3 अगस्त तक 89 किलोमीटर लंबे जिंद-सोनीपत सेक्शन पर इस ट्रेन ने कुल 2492 किलोमीटर की दूरी तय की है। रेल मंत्री ने अपने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे में हाइड्रोजन संचालित ट्रेन तकनीक के इस्तेमाल को प्रदर्शित करने के लिए इस हाइड्रोजन ट्रेन को पायलट आधार पर विकसित किया गया है।

जींद में बना डेडिकेटेड प्लांट और सेफ्टी प्रोटोकॉल

रेल मंत्री ने बताया कि इस ट्रेनसेट को हाइड्रोजन उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा के जींद में एक डेडिकेटेड हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। सुरक्षा मानकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही हाइड्रोजन स्टोरेज फैसिलिटी तैयार की गई है, जिससे निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो सके।

पर्यावरण को फायदा: जीरो कार्बन उत्सर्जन

इस तकनीक के फायदों के बारे में बताते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि हाइड्रोजन ट्रेनसेट शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन सुनिश्चित करता है, जिसमें बाई-प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ जलवाष्प (Water Vapour) ही निकलती है। उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेनसेट फ्यूल सेल तकनीक पर काम करता है। इसमें ट्रैक्शन पावर जेनरेशन के लिए कोई मूविंग पार्ट या पारंपरिक इंजन नहीं होता है। इस वजह से इसके मूवमेंट में शोर भी नहीं होता और ध्वनि प्रदूषण कम होता है। यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे को हाइड्रोजन तकनीक के क्षेत्र में मजबूती से स्थापित करता है।

141 करोड़ रुपये थी इस प्रोजेक्ट की लागत

इस प्रोजेक्ट पर आए खर्च का ब्योरा देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट को कुल 141 करोड़ रुपये के खर्च से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेनसेट और इसका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रायोगिक तौर पर तैयार किया गया है, इसलिए इस चरण में स्थापित ट्रैक्शन सिस्टम के साथ हाइड्रोजन चालित ट्रेनों की लागत की सीधी तुलना करना उचित नहीं है। रेल मंत्री ने इस ट्रेन की प्रमुख विशेषताओं के बारे में भी बताया है। यह ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और विकास पर आधारित है। ब्रॉड-गेज प्लेटफॉर्म पर 10 डिब्बों के साथ यह दुनिया की सबसे लंबी और 2400 किलोवाट क्षमता वाली सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट है। इसमें 1200 किलोवाट के दो ड्राइविंग पावर कार लगे हैं, जो मिलकर 2400 किलोवाट बिजली पैदा करते हैं, और इसके साथ आठ पैसेंजर कोच जोड़े गए हैं।

क्या अन्य रूटों पर भी चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?

फिलहाल भारतीय रेलवे सिर्फ जिंद-सोनीपत सर्किट पर ही पायलट आधार पर इस हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन तकनीक का संचालन कर रहा है। देश के दूसरे हिस्सों में इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दोहराया कि अन्य रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का निर्णय भविष्य में संसाधनों की उपलब्धता, परिचालन संबंधी व्यावहारिकताओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा।

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन सस्ती है या महंगी? यहां जान लें किराया, टाइमिंग, रूट की पूरी जानकारी

भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन रविवार, 19 जुलाई से हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर नियमित यात्री सेवा शुरू करेगी। यह भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। साथ ही, यह पर्यावरण के अनुकूल और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था की दिशा में अहम कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। “नमो ग्रीन रेल” थीम पर शुरू की गई इस सेवा का संचालन और रखरखाव उत्तर रेलवे का दिल्ली मंडल करेगा।

उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन 19 जुलाई से जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर नियमित व्यावसायिक सेवा शुरू कर देगी।

जींद-सोनीपत के बीच चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद जंक्शन और सोनीपत के बीच चलेगी। इसे ट्रेन नंबर 74010 और 74009 के रूप में चलाया जाएगा। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में तैयार की गई यह ट्रेन 89 किलोमीटर की दूरी करीब दो घंटे में पूरी करेगी। इसकी अधिकतम परिचालन गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। यह हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली डीएमयू (डीजल मल्टीपल यूनिट) ट्रेन के रूप में सोमवार से रविवार तक हर दिन सेवा देगी।

इन स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन

यह ट्रेन जींद जंक्शन से सोनीपत के बीच कुल 14 स्टेशनों पर रुकेगी। रास्ते में पांडु पिंडारा सहित कई छोटे स्टेशनों पर भी यात्रियों को सुविधा मिलेगी। ट्रेन जिन स्टेशनों पर रुकेगी, वे हैं— जींद जंक्शन, जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा हॉल्ट, भंभेवा, ईशापुर खेड़ी हॉल्ट, बुटाना हॉल्ट, खंडारी हॉल्ट, गोहाना, राभड़ा हॉल्ट, लाठ हॉल्ट, मोहाना हरियाणा, बरवासनी हॉल्ट और सोनीपत।

टिकट का किराया कितना होगा?

जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को सामान्य डीएमयू ट्रेन जितना ही किराया देना होगा। यानी इस ट्रेन के लिए कोई अलग या अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। रेलवन (RailOne) मोबाइल ऐप के अनुसार, जींद जंक्शन से जींद सिटी तक सामान्य श्रेणी का टिकट 10 रुपये का है। वहीं, जींद से सोनीपत तक पूरे 89 किलोमीटर के सफर के लिए सामान्य श्रेणी का किराया 25 रुपये रखा गया है। यानी इस हाइड्रोजन ट्रेन में सामान्य श्रेणी का न्यूनतम किराया 10 रुपये और अधिकतम किराया 25 रुपये होगा।

हाइड्रोजन ट्रेन का समय

ट्रेन नंबर 74010 सुबह 7:40 बजे जींद जंक्शन से रवाना होगी और सुबह 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी। रास्ते में यह ट्रेन जींद सिटी (7:47 बजे), पांडु पिंडारा (7:55 बजे), ललित खेड़ा हॉल्ट (8:08 बजे), भंभेवा (8:18 बजे), ईशापुर खेड़ी हॉल्ट (8:25 बजे), बुटाना हॉल्ट (8:32 बजे), खंडारी हॉल्ट (8:40 बजे), गोहाना (8:48 बजे), राभड़ा हॉल्ट (8:57 बजे), लाठ हॉल्ट (9:06 बजे), मोहाना हरियाणा (9:15 बजे) और बरवासनी हॉल्ट (9:26 बजे) पर रुकेगी।

वापसी का समय

वापसी में ट्रेन नंबर 74009 सुबह 10:40 बजे सोनीपत से चलेगी और दोपहर 1:00 बजे जींद जंक्शन पहुंचेगी। इस दौरान ट्रेन बरवासनी हॉल्ट, मोहाना हरियाणा, लाठ हॉल्ट, राभड़ा हॉल्ट, गोहाना, खंडारी हॉल्ट, बुटाना हॉल्ट, ईशापुर खेड़ी हॉल्ट, भंभेवा, ललित खेड़ा हॉल्ट, पांडु पिंडारा और जींद सिटी स्टेशन पर भी रुकेगी। यह नई समय-सारणी 19 जुलाई 2026 से लागू होगी। यह ट्रेन रोजाना चलेगी और इसमें यात्री सामान्य अनारक्षित टिकट लेकर सफर कर सकेंगे।

Jagannath Rath Yatra: पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भगदड़ जैसे हालात, 200 श्रद्धालु अस्पताल पहुंचे, एक की मौत की भी खबर

Jagannath Rath Yatra in Puri: ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान गुरुवार (16 जुलाई) को भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में करीब 200 श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें इलाज के लिए पुरी मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भारी भीड़ की वजह से करीब 200 श्रद्धालुओं को सांस लेने में दिक्कत हुई। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, अब उनका इलाज पुरी मेडिकल अस्पताल में चल रहा है।

Odisha TV की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘बड़ा डंडा’ पर रथ खिंचते हुए देखने का इंतजार कर रहे एक श्रद्धालु की दम घुटने से मौत हो गई। जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की आशंका है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रथ खींचने के दौरान बड़ा डांडा (ग्रैंड रोड) पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने से कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। भीड़ के दबाव और उमस के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु अस्वस्थ हो गए, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह घटना ‘पहांडी’ रस्म के दौरान बाहरी सुरक्षा घेरे से करीब 500 मीटर की दूरी पर हुई। भारी भीड़ के कारण अफरातफरी मच गई, जिसमें 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। घायलों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग श्रद्धालु शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया और स्थिति को संभालने के लिए बचाव दलों को तैनात किया गया।

एक श्रद्धालु की मौत होने की भी खबर

सूत्रों ने बताया कि इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दम घुटने से एक श्रद्धालु की मौत होने की भी खबर है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। घटना के बाद मौके पर मौजूद पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। एंबुलेंस की मदद से प्रभावित श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा में हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस बार भी रथ खींचने के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, जिसके चलते भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भगदड़ जैसी स्थिति किन कारणों से पैदा हुई।

‘पहंडी’ अनुष्ठान संपन्न

ओडिशा के पुरी में नौ दिनों तक चलने वाली वार्षिक रथ यात्रा की शुरुआत लागातार बारिश और लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में ‘पहंडी’ की रस्म के साथ हुई। ‘पहंडी’ की रस्म में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा के विग्रहों को 12वीं सदी के पुरी मंदिर से रथों तक ले जाया जाता है।

घंटियों, शंख और झांझ की ध्वनि के बीच, चक्रराज सुदर्शन को सबसे पहले मुख्य मंदिर से बाहर लाया गया और देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथ पर विराजमान किया गया। पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने बताया कि श्री सुदर्शन भगवान विष्णु का अस्त्र है, जिनकी पूजा पुरी में भगवान जगन्नाथ के रूप में की जाती है।

उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई भगवान बलभद्र के विग्रह को भी उनके ‘तालध्वज’ रथ पर स्थापित किया गया। सेवादारों द्वारा ‘शून्य पहंडी’ (रथ तक ले जाते समय देवी सुभद्रा के विग्रह का मुख आकाश की ओर होता है) शैली में भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र की बहन देवी सुभद्रा के विग्रह को उनके रथ तक ले लाया गया।

अंत में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ के विग्रह को मंदिर से बाहर लाया गया, तो ‘बड़ा डंडा’ (रथमार्ग) पर भक्तों की भावनाएं उमड़ पड़ीं। उन्होंने अपने हाथ उठाकर और ‘जय जगन्नाथ’ का जयघोष कर महाप्रभु के रथ पर विराजमान होने का जश्न मनाया। ओडिसी नर्तकों, लोक कलाकारों और सांस्कृतिक दलों ने ‘कालिया ठाकुर’ के सामने प्रस्तुति दी।

‘पहंडी’ अनुष्ठान में तीनों देव विग्रहों को एक औपचारिक जुलूस के साथ उनके संबंधित रथों तक लाया जाता है। ये रथ मंदिर के ‘सिंह द्वार’ के सामने खड़े किए जाते हैं, ताकि उन्हें श्री गुंडिचा मंदिर ले जाया जा सके। इस 12वीं सदी के मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर स्थित श्री गुंडिचा मंदिर को इन देवी-देवताओं का जन्मस्थान माना जाता है।

बारिश के बीच भारी भीड़

पुरी में हो रही भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। वे ‘बड़ा डंडा’ पर नृत्य करते और रथ यात्रा का जश्न मनाते हुए देखे गए। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक अधिकारी के अनुसार, पुरी में पिछले 48 घंटों में 233 मिमी बारिश हुई है। समुद्र के किनारे बसे इस शहर में दिन के दौरान हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

इससे पहले दिन में, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तैयारियों का जायजा लिया और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा पर ज़ोर दिया। बारिश की वजह से जल-जमाव एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा, इसलिए उन्होंने पुरी जिला प्रशासन, नगरपालिका अधिकारियों और संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहने और पानी निकालने के लिए तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

ये भी पढ़ें- India First Hydrogen Train: जींद-सोनीपत के बीच चलने जा रही पहली हाइड्रोजन ट्रेन, इलेक्ट्रिक और डीजल ट्रेन से इसमें क्या फर्क?

India First Hydrogen Train: जींद-सोनीपत के बीच चलने जा रही पहली हाइड्रोजन ट्रेन, इलेक्ट्रिक और डीजल ट्रेन से इसमें क्या फर्क?

India’s First Hydrogen Train: भारतीय रेलवे के इतिहास में शुक्रवार का दिन एक बेहद ऐतिहासिक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जींद रेलवे स्टेशन से जींद और सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस शुरुआत के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों के खास क्लब में शामिल हो जाएगा जहां हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें चल रही हैं।

यह ट्रेन पूरी तरह से हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर चलती है। लेकिन आम लोगों के मन में यह सवाल जरूर है कि आखिर यह ट्रेन पारंपरिक डीजल और बिजली से चलने वाली ट्रेनों से कितनी और कैसे अलग है? आइए जानते हैं इस हाइड्रोजन ट्रेन की पूरी तकनीक, इसके फीचर्स और डीजल-इलेक्ट्रिक ट्रेनों से इसके बड़े अंतर को।

डीजल और इलेक्ट्रिक ट्रेन से यह कितनी अलग है?

पारंपरिक डीजल और इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेन कई मामलों में पूरी तरह से अलग है:-

1- जीरो कार्बन एमिशन

डीजल इंजन भारी मात्रा में धुआं और कार्बन छोड़ता है जिससे एयर पल्यूशन फैलता है। हाइड्रोजन ट्रेन ट्रेन पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है। इसमें हाइड्रोजन को बिजली में बदला जाता है। बाई प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ पानी की भाप निकलती है। इस प्रक्रिया में कार्बन का उत्सर्जन जीरो होता है।

2- ओवरहेड तारों की जरूरत नहीं

बिजली से चलने वाली ट्रेनों को लगातार बिजली सप्लाई के लिए पटरियों के ऊपर ओवरहेड बिजली के तारों की जरूरत होती है। हाइड्रोजन ट्रेन को किसी भी तरह के ओवरहेड तारों की जरूरत नहीं होती है। इसके बजाय ट्रेन के भीतर लगे हाइड्रोजन फ्यूल सेल से ही जरूरत की बिजली खुद जेनरेट होती है। इससे कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन पर आधारित थर्मल पावर प्लांटों से मिलने वाली बिजली पर निर्भरता काफी कम हो जाती है।

3- बेहद कम शोर

डीजल लोकोमोटिव इंजनों की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेन बेहद कम शोर करती है। इससे यात्रियों का सफर काफी शांत और आरामदायक होगा।

इस हाइड्रोजन ट्रेन में और भी अनोखी बातें

भारतीय रेलवे की यह पहली हाइड्रोजन ट्रेन कई मॉर्डर्न टेक्नोलॉजी से लैस है। इस ट्रेन में कुल 10 कोच दिए गए हैं। ये मौजूदा समय विकसित की गई दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन से चलने वाली यात्री ट्रेनों में से एक है। यह ट्रेन 3200 HP (हॉर्सपावर) प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है। ये ताकत इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों की श्रेणी में खड़ा करता है।

शून्य-उत्सर्जन नियमों का पालन करने के साथ-साथ इसकी हॉर्सपावर और खिंचाव क्षमता काफी मजबूत है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पारंपरिक डीजल इंजनों के प्रदर्शन की बराबरी कर सके। इसका इस्तेमाल औद्योगिक, शंटिंग, इंटरमॉडल और हैवी-हॉल ऑपरेशन्स के लिए भी किया जा सकता है।

सुरक्षा व्यवस्था और रिफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

हाइड्रोजन बेहद संवेदनशील ईंधन है, इसलिए ट्रेन और रिफ्यूलिंग केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ट्रेन के संचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए भारतीय रेलवे ने ईंधन भरने के लिए एक हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम, तकनीकी सहायता इंफ्रास्ट्रक्चर और महत्वपूर्ण स्पेयर पार्ट्स स्थापित किए हैं।

इसके अलावा बिना किसी रुकावट के काम सुनिश्चित करने के लिए एक स्टैंडबाय कंप्रेसर यूनिट भी दी गई है। जहां हाइड्रोजन का उत्पादन, स्टोरेज और वितरण (डिस्पेंसिंग) किया जाएगा वहां हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्टर और दूसरे सुरक्षा सेंसर लगाए गए हैं। सुरक्षित और विश्वसनीय कामकाज के लिए इन प्रणालियों की नियमित जांच और सफाई की जाएगी।

स्मार्ट ऑपरेशन और ड्राइवर-फ्रेंडली डिजाइन

इस ट्रेन में रख-रखाव के खर्च और समय को बचाने के लिए आधुनिक तकनीकों का भरपूर इस्तेमाल किया गया है। इसमें रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम लगा है। यह ब्रेक लगाने के दौरान उत्पन्न होने वाली ऊर्जा को स्टोर कर लेता है। इससे ट्रेन की कार्यकुशलता और इसकी परिचालन सीमा बढ़ जाती है। ट्रेन में इंटीग्रेटेड हाइड्रोजन फ्यूल सेल मैनेजमेंट सिस्टम दिया गया है। ये लगातार फ्यूल सेल के तापमान और उसकी हेल्थ की निगरानी करता रहता है। रियल टाइम का डेटा, फॉल्ट डिटेक्शन और सेल्फ-डायग्नोस्टिक्स की सुविधा दी गई है ताकि मेंटेनेंस का काम आसान हो सके और ट्रेन का डाउनटाइम कम रहे।

इसके मॉड्यूलर डिजाइन में पहले से असेंबल की गई बैटरी बैंक और कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं। इसे भविष्य में अपग्रेड करना बेहद आसान होगा। कंप्रेशर्स और ट्रैक्शन मोटर ब्लोअर जैसे उपकरण इलेक्ट्रिकली संचालित हैं, जिससे घूमने वाले मैकेनिकल पार्ट्स पर निर्भरता कम होती है और रखरखाव का खर्च भी घटता है।

इस लोकोमोटिव का केबिन ड्राइवरों के अनुकूल डिजाइन किया गया है। इसका ऑपरेटिंग अनुभव काफी हद तक डीजल लोकोमोटिव जैसा ही है। लेकिन ड्राइवरों के लिए अतिरिक्त आरामदायक फीचर्स जोड़े गए हैं। यह प्लेटफॉर्म काफी लचीला है जिससे जरूरत पड़ने पर 4-एक्सल और 6-एक्सल वाले लोकोमोटिव दोनों को बैटरी और चार्जर कॉन्फ़िगरेशन के साथ बदला जा सकता है।

ये भी पढ़ें- Onam Bumper Lottery: सिर्फ 500 का टिकट और लॉटरी जीतने पर अब मिलेंगे 30 करोड़ रुपये! CM सतीशन ने कर दिया बड़ा ऐलान

भारत को मिलने जा रही पहली हाइड्रोजन ट्रेन कैसी है? जानें इसकी खासियत समेत सबकुछ

India First Hydrogen Train: भारत के रेलवे इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, जहां देश अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन के साथ हरित परिवहन की दिशा में एक नया कदम बढ़ाएगा। इस अत्याधुनिक ट्रेन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने 17 जुलाई करेंगे, जिसकी तैयारियां तेजी से शुरू हो चुकी हैं। यह ट्रेन जींद–सोनीपत रेल ट्रैक पर संचालित होगी, जिसे पर्यावरण के लिए बहुत अनुकुल माना जा रहा है। इसके साथ ही, अमृत भारत योजना के तहत बने जींद स्टेशन का भी उद्घाटन संभव है।

क्या है खासियत?

हाइड्रोजन से चलने वाली इस ट्रेन की खासियत यह है कि इससे प्रदूषण नहीं होता, और यह ट्रेन सिर्फ पानी और गर्मी छोड़ेगी। इसके अलावा, इस ट्रेन में कुल 10 कोच और 1200-किलोवाट का इंजन है। जानकारी के अनुसार, शुरुआत में यह ट्रेन 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी।

किस-किस देश में चल रही यह ट्रेन?

भारत इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा। अभी सिर्फ जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका के पास यह टेक्नोलॉजी है।

रविवार को हुई समीक्षा बैठक

रविवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में देर शाम हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्डा ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस बैठक में उपायुक्त डॉ. विशाली शर्मा, अतिरिक्त उपायुक्त प्रदीप कुमार, सभी एसडीएम, नगर निगम और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम से जुड़ी विभागवार जिम्मेदारियों की समीक्षा की गई और समयबद्ध तरीके से सभी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए।

यह पूरे जिले के लिए गौरव का विषय” 

डॉ. कृष्ण लाल मिड्डा ने अधिकारियों से कहा कि, “17 जुलाई को प्रधानमंत्री का प्रस्तावित दौरा पूरे जिले के लिए गौरव का विषय है। सभी विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी गंभीरता से निभाएं और तैयारियों में किसी भी प्रकार की कमी न रहने दें। प्रत्येक अधिकारी यह सोचकर कार्य करे कि उसका विभाग इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी सर्वोत्तम भूमिका निभाए।

यह भी पढ़ें: E20 Petrol: एथेनॉल वाले पेट्रोल के विवाद के बीच मशहूर टीचर अभिनय मैथ की कीमती वोल्वो XC 90 चलते-चलते रुकी! फिर ये हुआ उनके साथ