क्या देशभर में चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन? जिंद-सोनीपत रूट के बाद अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी ये जानकारी

देश में पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन के सफल परिचालन के बाद अब इसे दूसरे रेल रूट्स पर भी चलाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिंद-सोनीपत रूट पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के बाद अब इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेल मंत्री ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि दूसरे रेल रूट्स पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का फैसला संसाधनों की उपलब्धता, ऑपरेशनल फिजिबिलिटी और दूसरी जरूरी चीजों पर निर्भर करेगा।

संसद में सांसदों ने पूछे थे हाइड्रोजन तकनीक से जुड़े कई सवाल

आपको बता दें कि राज्यसभा में अलग अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने रेलवे की इस नई तकनीक को लेकर कई सवाल उठाए थे। सांसदों ने इसके विकास पर हुए कुल खर्च, देश भर में स्वीकृत और प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं का ब्योरा, इन परियोजनाओं के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की उपलब्धता, लागत और ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन के लिए विकसित की जा रही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी को लेकर रेल मंत्री से जवाब मांगा था।

जिंद-सोनीपत रूट पर दर्ज हुई कॉमर्शियल सर्विस की सक्सेस

सांसदों के सवालों का लिखित जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च सदन को बताया कि 17 जुलाई 2026 को जिंद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत की गई थी। 17 जुलाई से लेकर 3 अगस्त तक 89 किलोमीटर लंबे जिंद-सोनीपत सेक्शन पर इस ट्रेन ने कुल 2492 किलोमीटर की दूरी तय की है। रेल मंत्री ने अपने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे में हाइड्रोजन संचालित ट्रेन तकनीक के इस्तेमाल को प्रदर्शित करने के लिए इस हाइड्रोजन ट्रेन को पायलट आधार पर विकसित किया गया है।

जींद में बना डेडिकेटेड प्लांट और सेफ्टी प्रोटोकॉल

रेल मंत्री ने बताया कि इस ट्रेनसेट को हाइड्रोजन उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा के जींद में एक डेडिकेटेड हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। सुरक्षा मानकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही हाइड्रोजन स्टोरेज फैसिलिटी तैयार की गई है, जिससे निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो सके।

पर्यावरण को फायदा: जीरो कार्बन उत्सर्जन

इस तकनीक के फायदों के बारे में बताते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि हाइड्रोजन ट्रेनसेट शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन सुनिश्चित करता है, जिसमें बाई-प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ जलवाष्प (Water Vapour) ही निकलती है। उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेनसेट फ्यूल सेल तकनीक पर काम करता है। इसमें ट्रैक्शन पावर जेनरेशन के लिए कोई मूविंग पार्ट या पारंपरिक इंजन नहीं होता है। इस वजह से इसके मूवमेंट में शोर भी नहीं होता और ध्वनि प्रदूषण कम होता है। यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे को हाइड्रोजन तकनीक के क्षेत्र में मजबूती से स्थापित करता है।

141 करोड़ रुपये थी इस प्रोजेक्ट की लागत

इस प्रोजेक्ट पर आए खर्च का ब्योरा देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट को कुल 141 करोड़ रुपये के खर्च से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेनसेट और इसका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रायोगिक तौर पर तैयार किया गया है, इसलिए इस चरण में स्थापित ट्रैक्शन सिस्टम के साथ हाइड्रोजन चालित ट्रेनों की लागत की सीधी तुलना करना उचित नहीं है। रेल मंत्री ने इस ट्रेन की प्रमुख विशेषताओं के बारे में भी बताया है। यह ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और विकास पर आधारित है। ब्रॉड-गेज प्लेटफॉर्म पर 10 डिब्बों के साथ यह दुनिया की सबसे लंबी और 2400 किलोवाट क्षमता वाली सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट है। इसमें 1200 किलोवाट के दो ड्राइविंग पावर कार लगे हैं, जो मिलकर 2400 किलोवाट बिजली पैदा करते हैं, और इसके साथ आठ पैसेंजर कोच जोड़े गए हैं।

क्या अन्य रूटों पर भी चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?

फिलहाल भारतीय रेलवे सिर्फ जिंद-सोनीपत सर्किट पर ही पायलट आधार पर इस हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन तकनीक का संचालन कर रहा है। देश के दूसरे हिस्सों में इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दोहराया कि अन्य रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का निर्णय भविष्य में संसाधनों की उपलब्धता, परिचालन संबंधी व्यावहारिकताओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा।

भारत को मिलने जा रही पहली हाइड्रोजन ट्रेन कैसी है? जानें इसकी खासियत समेत सबकुछ

India First Hydrogen Train: भारत के रेलवे इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, जहां देश अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन के साथ हरित परिवहन की दिशा में एक नया कदम बढ़ाएगा। इस अत्याधुनिक ट्रेन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने 17 जुलाई करेंगे, जिसकी तैयारियां तेजी से शुरू हो चुकी हैं। यह ट्रेन जींद–सोनीपत रेल ट्रैक पर संचालित होगी, जिसे पर्यावरण के लिए बहुत अनुकुल माना जा रहा है। इसके साथ ही, अमृत भारत योजना के तहत बने जींद स्टेशन का भी उद्घाटन संभव है।

क्या है खासियत?

हाइड्रोजन से चलने वाली इस ट्रेन की खासियत यह है कि इससे प्रदूषण नहीं होता, और यह ट्रेन सिर्फ पानी और गर्मी छोड़ेगी। इसके अलावा, इस ट्रेन में कुल 10 कोच और 1200-किलोवाट का इंजन है। जानकारी के अनुसार, शुरुआत में यह ट्रेन 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी।

किस-किस देश में चल रही यह ट्रेन?

भारत इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा। अभी सिर्फ जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका के पास यह टेक्नोलॉजी है।

रविवार को हुई समीक्षा बैठक

रविवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में देर शाम हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्डा ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस बैठक में उपायुक्त डॉ. विशाली शर्मा, अतिरिक्त उपायुक्त प्रदीप कुमार, सभी एसडीएम, नगर निगम और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम से जुड़ी विभागवार जिम्मेदारियों की समीक्षा की गई और समयबद्ध तरीके से सभी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए।

यह पूरे जिले के लिए गौरव का विषय” 

डॉ. कृष्ण लाल मिड्डा ने अधिकारियों से कहा कि, “17 जुलाई को प्रधानमंत्री का प्रस्तावित दौरा पूरे जिले के लिए गौरव का विषय है। सभी विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी गंभीरता से निभाएं और तैयारियों में किसी भी प्रकार की कमी न रहने दें। प्रत्येक अधिकारी यह सोचकर कार्य करे कि उसका विभाग इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी सर्वोत्तम भूमिका निभाए।

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