‘Fine Shyt’ रिलीज होते ही विवादों में Guru Randhawa! ऑफिस में महिलाओं के डांस पर क्यों उठे सवाल?

पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा एक बार फिर अपने नए म्यूजिक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। उनका नया गाना ‘Fine Shyt’ रिलीज होने के कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है। जहां कुछ यूजर्स ने गाने के म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर नाराजगी जताई, वहीं कई लोगों ने वीडियो के कॉन्सेप्ट पर सवाल उठाए हैं। खासतौर पर कॉरपोरेट ऑफिस में महिला कर्मचारियों के तौर पर दिखाए गए कलाकारों को गुरु रंधावा के किरदार के आसपास डांस करते हुए दिखाने को लेकर आपत्ति जताई जा रही है।

कॉरपोरेट ऑफिस में दिखाया गया है पूरा सेटअप

‘Fine Shyt’ का म्यूजिक वीडियो एक कॉरपोरेट ऑफिस के माहौल में फिल्माया गया है। वीडियो में Guru Randhawa एक सीनियर प्रोफेशनल के किरदार में नजर आते हैं। वहीं, कई महिला कलाकार ऑफिस कर्मचारियों के रूप में दिखाई देती हैं, जो उनके किरदार के आसपास डांस और परफॉर्म करती नजर आती हैं।

वीडियो के इसी सेटअप ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। आलोचना करने वाले यूजर्स का कहना है कि गाने में डांस और ग्लैमर दिखाना अलग बात है, लेकिन कामकाजी महिलाओं को उनके वर्कप्लेस के संदर्भ में इस तरह पेश करना एक अलग संदेश देता है।

वीडियो में Disclaimer भी, लेकिन विवाद नहीं थमा

वीडियो की शुरुआत में एक डिस्क्लेमर दिया गया है। इसमें बताया गया है कि वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोग 18 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और वीडियो में दिखाए गए घटनाक्रम काल्पनिक हैं। इसके अलावा दर्शकों को मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी गई है कि वे वीडियो में दिखाए गए डांस मूव्स को अपने ऑफिस में दोहराने की कोशिश न करें। ऐसा करने पर HR की कार्रवाई या बैन का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इस डिस्क्लेमर के बावजूद सोशल मीडिया पर वीडियो के कॉन्सेप्ट को लेकर सवाल उठते रहे।

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Instagram पर वायरल हुई आलोचना

Instagram यूजर @sohasyap ने वीडियो का एक हिस्सा शेयर करते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्हें वीडियो में महिलाओं के डांस या उनके कॉस्ट्यूम से परेशानी नहीं है, बल्कि आपत्ति इस बात पर है कि उन्हें कामकाजी महिलाओं के रूप में एक पुरुष के आसपास डांस करते हुए क्यों दिखाया गया।

पोस्ट में यह सवाल भी उठाया गया कि इस तरह का कॉन्सेप्ट ऑफिस सेटिंग में रखने की जरूरत क्या थी। यूजर के मुताबिक, इसी तरह की एनर्जी और डांस को किसी अलग, एस्थेटिक सेट पर भी फिल्माया जा सकता था।

लड़कियों को नहीं, कॉन्सेप्ट को जिम्मेदार ठहराएं

वीडियो का बचाव करने वाले लोगों की प्रतिक्रियाओं के बाद Instagram यूजर ने अपनी बात विस्तार से स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना वीडियो में काम कर रही महिला कलाकारों के खिलाफ नहीं है।

उनका कहना था कि ये महिलाएं अपने काम के लिए वीडियो का हिस्सा बनी हैं और इसलिए निशाना कलाकारों को नहीं, बल्कि वीडियो के कॉन्सेप्ट और उसे बनाने वाली टीम को बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि गुरु रंधावा एक बड़े कलाकार हैं और उनके म्यूजिक वीडियो बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचते हैं। ऐसे में वीडियो में दिखाई जाने वाली चीजें किसी न किसी तरह दर्शकों पर प्रभाव डाल सकती हैं।

विदेशी कलाकारों पर सवाल क्यों नहीं?’

अपनी सफाई में Instagram यूजर ने उन लोगों को भी जवाब दिया जिन्होंने इसे संकीर्ण सोच का मामला बताया था। उन्होंने कहा कि उनका सवाल ग्लोबल या विदेशी कलाकारों द्वारा किए जाने वाले ऐसे कंटेंट से अलग नहीं है।

उनका तर्क था कि अगर किसी वीडियो में महिलाओं को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, वह चर्चा का विषय बन सकता है तो कलाकार चाहे कोई भी हो, उस पर सवाल उठाना गलत नहीं है।

सोशल मीडिया पर गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी भी निशाने पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर सिर्फ वीडियो की थीम ही चर्चा में नहीं रही। कई यूजर्स ने गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। एक यूजर ने गाने को सीधे तौर पर ‘Noise Pollution’ बताया। वहीं एक अन्य यूजर ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि आलोचना के बावजूद यह गाना सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर सकता है और जल्द ही इस पर बड़ी संख्या में डांस रील्स देखने को मिल सकती हैं। एक अन्य कमेंट में गाने को लेकर व्यंग्य किया गया, जबकि एक हिंदी कमेंट में यूजर ने गाना सुनने के बाद अपनी नाराजगी बेहद मजाकिया अंदाज में जाहिर की।

‘गुरु रंधावा इस्तीफा दोकमेंट ने खींचा ध्यान

बहस के बीच एक यूजर ने ‘गुरु रंधावा इस्तीफा दो’ लिखकर कमेंट किया। यह टिप्पणी हालिया छात्र प्रदर्शनों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जोड़कर की गई थी।

यानी एक म्यूजिक वीडियो पर शुरू हुई बहस में सोशल मीडिया यूजर्स ने राजनीतिक तंज का एंगल भी जोड़ दिया।

डांस स्टाइल को लेकर भी यूजर्स ने साधा निशाना

कुछ लोगों ने वीडियो की कोरियोग्राफी पर भी सवाल उठाए। एक यूजर ने तंज करते हुए कहा कि गुरु रंधावा के लिए डांस का मतलब शायद सिर्फ एक खास तरह के बोल्ड या अजीब स्टेप्स रह गया है।

वहीं एक अन्य यूजर ने वीडियो की ऑफिस सेटिंग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उसके मुताबिक, वर्कप्लेस को इस तरह के चित्रण से जोड़ना उचित नहीं है और वीडियो बनाने वालों ने आलोचना की असली वजह को समझने के बजाय सिर्फ उम्र और किरदार से जुड़े सवालों पर ध्यान दिया।

कामकाजी महिलाओं की ऐसी तस्वीर क्यों?’

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने इस विवाद को महिलाओं के रोजगार और समाज में उनकी स्थिति से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

उसका कहना था कि महिलाओं को आज भी घर से बाहर निकलकर निजी कंपनियों में काम करने को लेकर कई तरह की सामाजिक पाबंदियों और सवालों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोकप्रिय म्यूजिक वीडियो में ऑफिस जाने वाली महिलाओं को इस तरह दिखाना उन धारणाओं को और मजबूत कर सकता है जिनसे कामकाजी महिलाएं पहले से जूझ रही हैं।

विवाद के बीच असली सवाल कॉन्सेप्ट पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया की बहस ने गाने से ज्यादा उसके विजुअल प्रेजेंटेशन को चर्चा में ला दिया है। जहां कुछ यूजर्स इसे महज मनोरंजन और म्यूजिक वीडियो का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि बड़े कलाकारों के कंटेंट का व्यापक प्रभाव होता है।

फिलहाल, गुरु रंधावा के ‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। किसी को गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी पसंद नहीं आई, तो किसी ने ऑफिस सेटिंग में महिलाओं की प्रस्तुति को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं कुछ यूजर्स इसे सिर्फ एक काल्पनिक म्यूजिक वीडियो मानते हुए आलोचना को जरूरत से ज्यादा बता रहे हैं।

14 महीने तक किसी को नहीं हुआ शक, दो कंपनियों में चुपचाप करता रहा नौकरी; लेकिन मर्जर ने ऐसा फंसाया कि अब समझ नहीं आ रहा क्या करे!

‘Fine Shyt’ रिलीज होते ही विवादों में Guru Randhawa! ऑफिस में महिलाओं के डांस पर क्यों उठे सवाल?

पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा एक बार फिर अपने नए म्यूजिक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। उनका नया गाना ‘Fine Shyt’ रिलीज होने के कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है। जहां कुछ यूजर्स ने गाने के म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर नाराजगी जताई, वहीं कई लोगों ने वीडियो के कॉन्सेप्ट पर सवाल उठाए हैं। खासतौर पर कॉरपोरेट ऑफिस में महिला कर्मचारियों के तौर पर दिखाए गए कलाकारों को गुरु रंधावा के किरदार के आसपास डांस करते हुए दिखाने को लेकर आपत्ति जताई जा रही है।

कॉरपोरेट ऑफिस में दिखाया गया है पूरा सेटअप

‘Fine Shyt’ का म्यूजिक वीडियो एक कॉरपोरेट ऑफिस के माहौल में फिल्माया गया है। वीडियो में Guru Randhawa एक सीनियर प्रोफेशनल के किरदार में नजर आते हैं। वहीं, कई महिला कलाकार ऑफिस कर्मचारियों के रूप में दिखाई देती हैं, जो उनके किरदार के आसपास डांस और परफॉर्म करती नजर आती हैं।

वीडियो के इसी सेटअप ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। आलोचना करने वाले यूजर्स का कहना है कि गाने में डांस और ग्लैमर दिखाना अलग बात है, लेकिन कामकाजी महिलाओं को उनके वर्कप्लेस के संदर्भ में इस तरह पेश करना एक अलग संदेश देता है।

वीडियो में Disclaimer भी, लेकिन विवाद नहीं थमा

वीडियो की शुरुआत में एक डिस्क्लेमर दिया गया है। इसमें बताया गया है कि वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोग 18 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और वीडियो में दिखाए गए घटनाक्रम काल्पनिक हैं। इसके अलावा दर्शकों को मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी गई है कि वे वीडियो में दिखाए गए डांस मूव्स को अपने ऑफिस में दोहराने की कोशिश न करें। ऐसा करने पर HR की कार्रवाई या बैन का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इस डिस्क्लेमर के बावजूद सोशल मीडिया पर वीडियो के कॉन्सेप्ट को लेकर सवाल उठते रहे।

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Instagram पर वायरल हुई आलोचना

Instagram यूजर @sohasyap ने वीडियो का एक हिस्सा शेयर करते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्हें वीडियो में महिलाओं के डांस या उनके कॉस्ट्यूम से परेशानी नहीं है, बल्कि आपत्ति इस बात पर है कि उन्हें कामकाजी महिलाओं के रूप में एक पुरुष के आसपास डांस करते हुए क्यों दिखाया गया।

पोस्ट में यह सवाल भी उठाया गया कि इस तरह का कॉन्सेप्ट ऑफिस सेटिंग में रखने की जरूरत क्या थी। यूजर के मुताबिक, इसी तरह की एनर्जी और डांस को किसी अलग, एस्थेटिक सेट पर भी फिल्माया जा सकता था।

लड़कियों को नहीं, कॉन्सेप्ट को जिम्मेदार ठहराएं

वीडियो का बचाव करने वाले लोगों की प्रतिक्रियाओं के बाद Instagram यूजर ने अपनी बात विस्तार से स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना वीडियो में काम कर रही महिला कलाकारों के खिलाफ नहीं है।

उनका कहना था कि ये महिलाएं अपने काम के लिए वीडियो का हिस्सा बनी हैं और इसलिए निशाना कलाकारों को नहीं, बल्कि वीडियो के कॉन्सेप्ट और उसे बनाने वाली टीम को बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि गुरु रंधावा एक बड़े कलाकार हैं और उनके म्यूजिक वीडियो बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचते हैं। ऐसे में वीडियो में दिखाई जाने वाली चीजें किसी न किसी तरह दर्शकों पर प्रभाव डाल सकती हैं।

विदेशी कलाकारों पर सवाल क्यों नहीं?’

अपनी सफाई में Instagram यूजर ने उन लोगों को भी जवाब दिया जिन्होंने इसे संकीर्ण सोच का मामला बताया था। उन्होंने कहा कि उनका सवाल ग्लोबल या विदेशी कलाकारों द्वारा किए जाने वाले ऐसे कंटेंट से अलग नहीं है।

उनका तर्क था कि अगर किसी वीडियो में महिलाओं को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, वह चर्चा का विषय बन सकता है तो कलाकार चाहे कोई भी हो, उस पर सवाल उठाना गलत नहीं है।

सोशल मीडिया पर गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी भी निशाने पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर सिर्फ वीडियो की थीम ही चर्चा में नहीं रही। कई यूजर्स ने गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। एक यूजर ने गाने को सीधे तौर पर ‘Noise Pollution’ बताया। वहीं एक अन्य यूजर ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि आलोचना के बावजूद यह गाना सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर सकता है और जल्द ही इस पर बड़ी संख्या में डांस रील्स देखने को मिल सकती हैं। एक अन्य कमेंट में गाने को लेकर व्यंग्य किया गया, जबकि एक हिंदी कमेंट में यूजर ने गाना सुनने के बाद अपनी नाराजगी बेहद मजाकिया अंदाज में जाहिर की।

‘गुरु रंधावा इस्तीफा दोकमेंट ने खींचा ध्यान

बहस के बीच एक यूजर ने ‘गुरु रंधावा इस्तीफा दो’ लिखकर कमेंट किया। यह टिप्पणी हालिया छात्र प्रदर्शनों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जोड़कर की गई थी।

यानी एक म्यूजिक वीडियो पर शुरू हुई बहस में सोशल मीडिया यूजर्स ने राजनीतिक तंज का एंगल भी जोड़ दिया।

डांस स्टाइल को लेकर भी यूजर्स ने साधा निशाना

कुछ लोगों ने वीडियो की कोरियोग्राफी पर भी सवाल उठाए। एक यूजर ने तंज करते हुए कहा कि गुरु रंधावा के लिए डांस का मतलब शायद सिर्फ एक खास तरह के बोल्ड या अजीब स्टेप्स रह गया है।

वहीं एक अन्य यूजर ने वीडियो की ऑफिस सेटिंग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उसके मुताबिक, वर्कप्लेस को इस तरह के चित्रण से जोड़ना उचित नहीं है और वीडियो बनाने वालों ने आलोचना की असली वजह को समझने के बजाय सिर्फ उम्र और किरदार से जुड़े सवालों पर ध्यान दिया।

कामकाजी महिलाओं की ऐसी तस्वीर क्यों?’

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने इस विवाद को महिलाओं के रोजगार और समाज में उनकी स्थिति से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

उसका कहना था कि महिलाओं को आज भी घर से बाहर निकलकर निजी कंपनियों में काम करने को लेकर कई तरह की सामाजिक पाबंदियों और सवालों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोकप्रिय म्यूजिक वीडियो में ऑफिस जाने वाली महिलाओं को इस तरह दिखाना उन धारणाओं को और मजबूत कर सकता है जिनसे कामकाजी महिलाएं पहले से जूझ रही हैं।

विवाद के बीच असली सवाल कॉन्सेप्ट पर

‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया की बहस ने गाने से ज्यादा उसके विजुअल प्रेजेंटेशन को चर्चा में ला दिया है। जहां कुछ यूजर्स इसे महज मनोरंजन और म्यूजिक वीडियो का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि बड़े कलाकारों के कंटेंट का व्यापक प्रभाव होता है।

फिलहाल, गुरु रंधावा के ‘Fine Shyt’ को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। किसी को गाने की म्यूजिक और कोरियोग्राफी पसंद नहीं आई, तो किसी ने ऑफिस सेटिंग में महिलाओं की प्रस्तुति को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं कुछ यूजर्स इसे सिर्फ एक काल्पनिक म्यूजिक वीडियो मानते हुए आलोचना को जरूरत से ज्यादा बता रहे हैं।

14 महीने तक किसी को नहीं हुआ शक, दो कंपनियों में चुपचाप करता रहा नौकरी; लेकिन मर्जर ने ऐसा फंसाया कि अब समझ नहीं आ रहा क्या करे!

बिना डिग्री के 100 से ज़्यादा आविष्कार | G.D. Naidu Story | Indian Innovator | R Madhavan

तीसरी क्लास के बाद पढ़ाई छूट गई… लेकिन सीखना कभी नहीं।
गरीब किसान परिवार में जन्मे जी.डी. नायडू ने बिना इंजीनियरिंग की डिग्री के 100 से ज़्यादा आविष्कार किए और दुनिया उन्हें “भारत का एडिसन” कहने लगी।
आज उनकी प्रेरणादायक कहानी बड़े पर्दे पर आने वाली है, जहाँ उनका किरदार आर. माधवन निभा रहे हैं।
ऐसे महान भारतीयों की कहानियाँ सिर्फ़ इतिहास नहीं, आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा हैं।
क्या आपने पहले जी.डी. नायडू का नाम सुना था? कमेंट में ज़रूर बताइए।

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Government School के 1,500 बच्चों ने अपने हक़ के लिए उठाई आवाज़ | Gen Alpha Protest

स्कूल में पढ़ाई होनी चाहिए, आंदोलन नहीं।
लेकिन जब बच्चों को साफ़ पानी, शौचालय, पंखे और शिक्षक जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़क पर उतरना पड़े,
तो सवाल बच्चों पर नहीं, सिस्टम पर उठता है।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से शुरू हुई यह आवाज़ अब बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और देश के कई हिस्सों तक पहुँच रही है।
क्या आपको लगता है कि बच्चों को अपने अधिकारों के लिए इस तरह प्रदर्शन करना पड़ना चाहिए?
अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।

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Autism से नहीं, लोगों की सोच से जीती मेरी बेटी | Autism Awareness Story | Mother Daughter Story

“इसे घर में बंद कर दो…”
ये सिर्फ़ एक लाइन नहीं थी। ये उस सोच की आवाज़ थी, जो अलग दिखने वाले बच्चों को समझने के बजाय उनसे दूर भागती है।
लेकिन एक माँ ने हार नहीं मानी।
उसने अपनी बेटी को दुनिया से छिपाया नहीं, दुनिया से मिलवाया।
आज वही बेटी घर की ज़िम्मेदारियाँ निभाती है, हर दिन कुछ नया सीखती है और साबित करती है कि सही प्यार, धैर्य और भरोसा किसी भी इंसान की ज़िंदगी बदल सकता है।

@chandrima.dutta16

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PM Modi ने दिया ‘GRWM’ चैलेंज! National Handloom Day पर युवाओं से की खास अपील

PM Modi Instagram Reel: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक नया रील वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने देश के युवाओं से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को खास तरीके से मनाने की अपील की। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे ‘Get Ready With Me (GRWM)’ जैसे वीडियो बनाएं, जिसमें वे हथकरघा से बने पारंपरिक कपड़े पहनकर अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा करें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का यह ट्रेंड भारत की समृद्ध बुनाई परंपरा और कारीगरों की कला को लोगों तक पहुंचाने का एक शानदार तरीका बन सकता है। इससे देश के बुनकरों और उनके परिवारों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस से पहले शेयर किए गए इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने इस दिन के ऐतिहासिक महत्व को भी याद किया। उन्होंने बताया कि 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जब देशभर के लोग ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट हुए और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का संकल्प लिया था।

7 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस से पहले शेयर किए गए इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने इस दिन के ऐतिहासिक महत्व को भी याद किया। उन्होंने बताया कि 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। उस दिन देशभर के लोगों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट होकर स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का संकल्प लिया था।

उन्होंने कहा, “पिछले हफ्ते ही आप में से कई लोगों ने फ्रेंडशिप डे मनाया। आज, मैं आपसे अपील करता हूं कि 7 अगस्त को नेशनल हैंडलूम डे भी उसी उत्साह और जोश के साथ मनाएं।”

भारत के बुनकर समुदाय के योगदान पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि नेशनल हैंडलूम डे उन परिवारों को पहचानने और उनका समर्थन करने का एक मौका है जो पारंपरिक कारीगरी से हाथ से बुने हुए कपड़े बनाते हैं।

उन्होंने कहा, “नेशनल हैंडलूम डे हमारे उन बुनकर परिवारों को पहचानने और उनका समर्थन करने के बारे में है, जो अपने हाथों से सुंदर कपड़े बनाते हैं। जरा हमारे देश में बनने वाले हैंडलूम उत्पादों की अद्भुत विविधता को तो देखिए।”

PM ने हैंडलूम को बढ़ावा देने के लिए ‘GRWM’ ट्रेंड का सुझाव दिया

सोशल मीडिया के मशहूर ट्रेंड का जिक्र करते हुए, पीएम मोदी ने लोगों से हैंडलूम के कपड़े पहनने और उन्हें ऑनलाइन शेयर करने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने कहा, “मेरी एक छोटी सी गुजारिश है। क्यों न हैंडलूम के कपड़ों के साथ एक ‘Get Ready With Me’ (GRWM) वीडियो बनाया जाए और उसे दुनिया के साथ शेयर किया जाए? इससे दूसरों को भी हैंडलूम अपनाने और हमारे कारीगरों का समर्थन करने की प्रेरणा मिलेगी।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ये पहल देश भर के बुनकर परिवारों की आजीविका को मजबूत करके ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन में योगदान दे सकती है।

उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सबसे छोटे और सबसे गरीब बुनकर परिवारों को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ का निर्माण करना है। आइए, हम सभी कम से कम एक हथकरघा (हैंडलूम) उत्पाद खरीदें, उसका एक वीडियो बनाएं और उसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि हमारे बुनकर भाई-बहनों की प्रतिभा और कारीगरी पूरे भारत और दुनिया के लोगों तक पहुंच सके।”

यह भी पढ़ें: Delhi Weather Today: दिल्ली में आज भी बारिश का येलो अलर्ट, IMD ने ट्रैफिक और जलभराव को लेकर दी चेतावनी

अपनी सबसे बड़ी कमी को ही ताकत बनाया | Sai Pallavi | Ramayana | Sai Pallavi as Sita

आज लाखों लोगों के लिए आत्मविश्वास की मिसाल बनने वाली साई पल्लवी भी कभी अपने चेहरे, आवाज़ और Acne को लेकर खुद से लड़ती थीं।
लेकिन उन्होंने अपनी कमियाँ छिपाने के बजाय, उन्हें अपनाना चुना।
शायद इसलिए उनकी कहानी सिर्फ़ एक अभिनेत्री की नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की भी है जो आज भी आईने में खुद को जज करते हैं।
क्योंकि असली खूबसूरती बेदाग़ चेहरे में नहीं, खुद को अपनाने की हिम्मत में होती है।
आपके लिए खूबसूरती का मतलब क्या है? कमेंट में ज़रूर बताइए।

@saipallavi.senthamarai

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अपनी सबसे बड़ी कमी को ही ताकत बनाया | Sai Pallavi | Ramayana | Sai Pallavi as Sita
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5 साल से बिना रुके भूखों को खाना खिला रहे हैं ये शख्श | Maa Ki Rasoi Muzaffarpur | Real life hero

कुछ लोग सिर्फ अपनी ज़िंदगी बदलते हैं।
और कुछ लोग, दूसरों की ज़िंदगी आसान बना देते हैं।
मुज़फ्फरपुर के प्रकाश गुप्ता पिछले 5 सालों से ‘माँ की रसोई’ के ज़रिए हर दिन 120 से ज़्यादा ज़रूरतमंदों तक भोजन पहुंचा रहे हैं। उनके लिए यह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल है।
अगर आपके शहर में भी कोई भूखा है, तो शायद मदद की शुरुआत एक थाली से हो सकती है।
आप भी अगर प्रकाश गुप्ता के इस अभियान के साथ जुड़ना चाहते हैं
तो इस नंबर पर संपर्क करें – 8083848726

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चॉल से 2 घरों तक! 14 साल की उम्र में खरीदा पहला घर | Mahima Makwana Inspiring Story | Musafir Cafe

महज़ 5 महीने की उम्र में पिता को खो दिया।
9 साल की उम्र में काम शुरू किया।
14 साल की उम्र में अपनी माँ का सबसे बड़ा सपना पूरा कर दिया – अपना घर।
महिमा मकवाना की कहानी याद दिलाती है कि परिस्थितियाँ आपकी शुरुआत तय कर सकती हैं, लेकिन मंज़िल नहीं।

@mahima_makwana

Mahima Makwana Musafir Cafe, Mumbai Chawl to Success Story, TV Actress to Bollywood Actress, Happy Birthday Mahima Malwana

चॉल से 2 घरों तक! 14 साल की उम्र में खरीदा पहला घर | Mahima Makwana Inspiring Story | Musafir Cafe |

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Meta CEO Mark Zuckerberg ने भारत से मांगी माफी, 5-6 घंटे तक Facebook से हटाया गया था PM Modi का वीडियो

mark jukerburg_modi

Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSEAM) और Deepfake Content की उपलब्धता को लेकर माफी मांगी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, Zuckerberg ने Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों की मंत्रालय के साथ हुई बैठक के दौरान इस मामले पर खेद जताया।  Meta, Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी है।

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हटाया था PM Modi का वीडियो

Zuckerberg की यह माफी ऐसे समय में सामने आई है जब इससे पहले बुधवार को एक संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Facebook वीडियो को हटाए जाने के मामले में Meta प्रमुख को तीन दिन के भीतर माफी मांगने को कहा था। प्रधानमंत्री मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो कुछ समय के लिए Facebook से हटाए जाने पर समिति ने गंभीर नाराजगी जताई थी।

समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो Meta को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी Safe Harbour protection वापस लेने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित मामलों में अभियोजन और FIR दर्ज होने का रास्ता खुल सकता है।

लोकसभा सचिवालय की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो Facebook से करीब 5-6 घंटे तक हटाया जाना समिति ने गंभीरता से लिया था। यह वीडियो परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री के संदेश से संबंधित था। समिति ने इस घटना को लेकर Meta से स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग की थी।

मेटा की टीम को सरकार ने बुलाया था 

सरकार पीएम मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाने से भी नाराज थी। मोदी ने 23 जुलाई को यह वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने पेपर लीक को बड़ी समस्या बताया था। उन्होंने ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की भी बात कही थी। आईटी मंत्रालय और मेटा के अधिकारियों के बीच 2 दिन की बैठक चल रही है। सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली बुलाया है। 5 अगस्त को बैठक का पहला दिन था।

मार्क जुकरबर्ग को दिया गया था 3 दिन का समय 

समिति की ओर से कहा गया था कि मेटा  प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को मामले में माफी मांगनी चाहिए। अगर निर्धारित समय में माफी नहीं आती है, तो समिति भारत में उपलब्ध कानूनी संरक्षण को वापस लेने की दिशा में कदम उठाने पर विचार कर सकती है। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Safe Harbour protection इंटरनेट प्लेटफॉर्म को यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, बशर्ते वे लागू नियमों और कानूनी दायित्वों का पालन करें।

क्यों महत्वपूर्ण हुआ मामला

प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को हटाए जाने की घटना ने भारत में Big Tech platforms, content moderation और social media accountability को लेकर बहस को तेज कर दिया था।  Meta की ओर से पहले इस वीडियो को गलती से हटाए जाने की बात सामने आई थी और वीडियो बाद में बहाल कर दिया गया था।

 

Zuckerberg ने अधिकारियों के जरिए भेजी माफी

 

MeitY के सूत्रों के अनुसार, Mark Zuckerberg ने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों को लेकर शीर्ष अधिकारियों के माध्यम से अपनी माफी पहुंचाई। सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान Meta ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़ी रकम का भुगतान किया गया था। सूत्र के मुताबिक, Meta ने गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और इस पर अफसोस जताया। हालांकि, मंत्रालय की ओर से इस संबंध में अभी सार्वजनिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

CSEAM और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर भी सख्ती

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उन intermediary platforms के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जहां CSEAM और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक सामग्री उपलब्ध होने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, समिति की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जो प्लेटफॉर्म खुद तय करते हैं कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाएगा, उन्हें केवल intermediary की सामान्य परिभाषा के तहत सुरक्षा नहीं दी जा सकती। समिति ने कथित तौर पर कहा कि ऐसे मामलों में IT Act के तहत Safe Harbour protection लागू नहीं होगा।

Google India को लेकर भी समिति ने मांगी कार्रवाई

संसदीय समिति ने Google India से जुड़े एक कथित साइबर फ्रॉड मामले का भी उल्लेख किया है। समिति के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि फर्जी ऐप्स के माध्यम से निवेश करने पर उन्हें 48 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। पत्र में कहा गया कि Hyderabad Cyber Police की कार्रवाई में Google India के प्रमुख को कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले में सह-आरोपी के तौर पर शामिल किए जाने की बात सामने आई है। समिति ने इस मामले में भी भारत सरकार से Google India के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई करने की इच्छा जताई है।