एक दांत के इलाज के ₹2.37 लाख! NRI ने जब भारत की फ्लाइट का किराया देखा तो खुद ही रह गया हैरान

अमेरिका में 15 साल से रह रहे भारतीय नितिन मल्होत्रा इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने एक अनुभव की वजह से चर्चा में हैं। दांत में दर्द होने पर वह इलाज के लिए डेंटिस्ट के पास पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें जो खर्च बताया गया, उसने उन्हें हैरान कर दिया। इंश्योरेंस होने के बावजूद करीब 2,500 डॉलर यानी लगभग ₹2.37 लाख अपनी जेब से देने की बात सामने आई। इसके बाद नितिन ने अमेरिका और भारत में डेंटल ट्रीटमेंट की लागत की तुलना करते हुए एक सवाल अपने फॉलोअर्स के सामने रख दिया।

दांत में दर्द हुआ तो पहुंचे डॉक्टर के पास

नितिन ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए वीडियो में बताया कि दांत में तकलीफ होने के बाद वह जांच के लिए डेंटिस्ट के पास गए। क्लिनिक में सबसे पहले उनसे पूछा गया कि उनके पास कौन सा डेंटल इंश्योरेंस है। इंश्योरेंस कार्ड दिखाने के बाद उनके दांत का एक्स-रे किया गया।

नितिन के मुताबिक, सिर्फ एक्स-रे के लिए उनसे 180 डॉलर यानी करीब ₹17 हजार चार्ज किए गए। इसके बाद डॉक्टर ने जांच करके इलाज का अनुमानित खर्च बताया।

इंश्योरेंस के बाद भी देना था ₹2.37 लाख

नितिन का कहना है कि क्लिनिक ने उन्हें बताया कि सामान्य तौर पर इलाज का बिल करीब 8,000 डॉलर यानी लगभग ₹7.60 लाख हो सकता है। हालांकि, इंश्योरेंस के तहत एडजस्टमेंट के बाद उनकी जेब से 2,500 डॉलर देने की बात कही गई। इतनी बड़ी रकम सुनकर नितिन ने भारत में होने वाले डेंटल ट्रीटमेंट की कीमत से इसकी तुलना की। उनका कहना था कि भारत में दांतों की सफाई, रूट कैनाल और दूसरे इलाज अपेक्षाकृत कम खर्च में हो सकते हैं।

इलाज से सस्ती लगी भारत की फ्लाइट

नितिन ने बताया कि उन्होंने अमेरिका से भारत की फ्लाइट का किराया भी चेक किया। उनके मुताबिक, टिकट करीब 1,200 डॉलर यानी लगभग ₹1.14 लाख में मिल रही थी। यहीं से उनके मन में सवाल आया कि अगर भारत की फ्लाइट का खर्च ही करीब 1.14 लाख रुपये है और अमेरिका में सिर्फ डेंटल ट्रीटमेंट के लिए 2.37 लाख रुपये देने पड़ रहे हैं, तो क्यों न भारत जाकर इलाज कराया जाए।

‘क्या मुझे भारत जाकर इलाज कराना चाहिए?’

नितिन ने वीडियो में अपने फॉलोअर्स से पूछा कि ऐसी स्थिति में उन्हें क्या करना चाहिए। अमेरिका में इलाज कराएं या भारत आकर दांतों का इलाज करवाएं? उन्होंने दावा किया कि भारत में रूट कैनाल, दांतों की सफाई और अन्य डेंटल केयर करीब ₹10 हजार से ₹15 हजार में हो सकती है। हालांकि, इलाज की वास्तविक कीमत डॉक्टर, शहर, प्रक्रिया और मरीज की स्थिति के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

Instagram पर यह पोस्ट देखें

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

नितिन के वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स की भी खूब प्रतिक्रियाएं आईं। कई लोगों ने अमेरिका में डेंटल केयर को बेहद महंगा बताया। एक यूजर ने लिखा कि ऐसी स्थिति में भारत की फ्लाइट बुक करना ही बेहतर है। एक अन्य यूजर ने कहा कि अमेरिका में दांतों का इलाज वाकई काफी महंगा पड़ता है। वहीं एक कमेंट में नितिन की तुलना पर सहमति जताते हुए लिखा गया कि यहां तो फ्लाइट का खर्च ही इलाज से कम नजर आ रहा है।

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₹30 हजार से शुरू किया सैंडविच का ठेला, आज ₹25 लाख महीना! फेल इंटरनेट कैफे के बाद ऐसे बदली अभिषेक की किस्मत

कारोबार में पहली कोशिश नाकाम हो जाए तो बहुत से लोग दोबारा जोखिम लेने से बचते हैं। लेकिन भोपाल के अभिषेक साहू की कहानी कुछ अलग है। करीब 15 साल पहले शुरू किया गया उनका इंटरनेट कैफे एक साल के अंदर बंद हो गया। इसके बाद उन्होंने हार मानने के बजाय महज ₹30 हजार के लोन से एक छोटे से सैंडविच कार्ट की शुरुआत की। आज उनका यही छोटा कारोबार सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

पहला बिजनेस एक साल में ही हो गया बंद

अभिषेक साहू करीब 15 साल पहले भोपाल पहुंचे थे। उन्होंने शुरुआत इंटरनेट कैफे से की। उस दौर में इंटरनेट कैफे एक अच्छा बिजनेस आइडिया माना जाता था, लेकिन उनका कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं चला।

करीब एक साल बाद ही उन्हें इंटरनेट कैफे बंद करना पड़ा। पहली कोशिश की असफलता के बावजूद अभिषेक ने कारोबार करने का विचार नहीं छोड़ा। इस बार उन्होंने ऐसा बिजनेस चुना, जिसमें कम पूंजी लगाकर शुरुआत की जा सके।

₹30 हजार जुटाए और बदल दी दिशा

पहले कारोबार के बाद अभिषेक ने फूड बिजनेस की तरफ रुख किया। उन्होंने ₹30 हजार का लोन लिया और एक छोटा सा सैंडविच कार्ट शुरू किया। खास बात यह थी कि उनके पास सैंडविच बनाने की कोई बड़ी प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं थी। उन्होंने YouTube की मदद से अलग-अलग सैंडविच की रेसिपी सीखीं और फिर उन्हें अपने छोटे से कार्ट पर आजमाना शुरू किया। यानी दूसरी शुरुआत बड़े निवेश या बड़े सेटअप से नहीं, बल्कि सीमित पैसे और खुद सीखने की कोशिश से हुई।

धीरे-धीरे लोगों को पसंद आने लगा स्वाद

शुरुआत में यह एक छोटा सा सैंडविच कार्ट था, लेकिन समय के साथ ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी। लोगों को सैंडविच पसंद आने लगे और धीरे-धीरे इस छोटे कारोबार ने अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। अभिषेक के बिजनेस की कहानी में सोशल मीडिया ने भी अहम भूमिका निभाई। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके सैंडविच कार्ट पर बनी एक Instagram Reel वायरल हो गई। इसके बाद भोपाल के अलग-अलग हिस्सों से लोग उनके सैंडविच का स्वाद लेने पहुंचने लगे।

अब 30-50 मिनट तक इंतजार करते हैं ग्राहक

कभी जिस कारोबार की शुरुआत एक छोटे कार्ट से हुई थी, आज उसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ग्राहक सैंडविच के लिए इंतजार करने को भी तैयार रहते हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, कई ग्राहकों को ऑर्डर के लिए करीब 30 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। इसके बावजूद लोगों की भीड़ कम नहीं हुई।

हर दिन सैकड़ों सैंडविच की बिक्री

सोशल मीडिया पर अभिषेक की कहानी शेयर करने वाले यूजर प्रथम के मुताबिक, उनका Hari Har Sandwich अब हर दिन लगभग 600 से ज्यादा सैंडविच बेचता है। वीकेंड पर यह संख्या और बढ़ जाती है। पोस्ट में दावा किया गया है कि शनिवार और रविवार जैसे दिनों में 1,000 से ज्यादा सैंडविच बिकते हैं। इसी पोस्ट के अनुसार, इस छोटे से फूड बिजनेस का मासिक टर्नओवर करीब ₹25 लाख तक पहुंच चुका है।

असफलता से शुरुआत, लेकिन वहीं नहीं रुके

अभिषेक साहू की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ ₹25 लाख का टर्नओवर नहीं है। असली बात यह है कि पहला बिजनेस बंद होने के बाद उन्होंने खुद को दोबारा आजमाया।

इंटरनेट कैफे के अनुभव के बाद उन्होंने कम पैसे वाला बिजनेस चुना, YouTube से स्किल सीखी और धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बनाया। यही छोटा कदम आगे चलकर बड़े कारोबार में बदलता गया।

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही चर्चा?

प्रथम ने X पर अभिषेक की कहानी शेयर करते हुए उनके सफर को उजागर किया। पोस्ट के वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने उनकी दोबारा शुरुआत करने की हिम्मत की तारीफ की। एक यूजर ने लिखा कि इस कहानी की सबसे खास बात ₹25 लाख का टर्नओवर नहीं, बल्कि पहली असफलता के बाद सिर्फ ₹30 हजार से दोबारा शुरुआत करने का फैसला है। दूसरे यूजर ने इसे एक शानदार ‘कमबैक’ बताया।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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200 कैदियों के बच्चों की माँ आभा रानी!Aabharani Choudhury | Odisha | Mother to Prisoner’s Children

200 कैदियों के बच्चों की माँ  आभा रानी!Aabharani Choudhury | Odisha | Mother to Prisoner’s Children

कुछ बच्चे अपने माता-पिता के किए की सज़ा भुगतते हुए अपना बचपन जेल की चारदीवारी में बिताने को मजबूर हो जाते हैं। लेकिन ओडिशा की आभा रानी चौधरी ने ऐसे बच्चों को सिर्फ सहारा नहीं, बल्कि एक घर और माँ का प्यार दिया।
पिछले 23 वर्षों में उन्होंने 200+ कैदियों के बच्चों को बेहतर जिंदगी की राह दिखाई है। आज भी उनके आश्रम में 36 बच्चे प्यार और देखभाल के साथ बड़े हो रहे हैं।
आखिर कैसे आभा रानी बनीं 200 कैदियों के बच्चों की माँ?

200 कैदियों के बच्चों की माँ आभा रानी!Aabharani Choudhury | Odisha | Mother to Prisoner’s Children | Changemaker

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माँ की Spinal Injury के बाद बेटे ने संभाली माँ और घर की जिम्मेदारी | Life With Ammi | Moeen Raza

माँ की Spinal Injury के बाद बेटे ने संभाली माँ और घर की जिम्मेदारी | Life With Ammi | Moeen Raza

जिस माँ ने कभी उंगली पकड़कर मुझे चलना सिखाया था, आज मैं उनका हाथ पकड़कर उन्हें चलना सिखा रहे हैं।
रायपुर, छत्तीसगढ़ के Moeen Raza ने माँ की Spinal Injury के बाद उनकी देखभाल के लिए अपनी जिंदगी बदल दी।
उन्होंने घर पर रहकर सारी जिम्मेदारी उठाई जब बाहर जाकर काम करना मुश्किल हुआ,
घर पर पैसों की समस्या आई तो उन्होंने सोशल मीडिया के ज जरिए अपनी कहानी लोगों तक पहुँचाई और यही उनकी कमाई का जरिया भी बन गया।
आज दो साल बाद अम्मी पहले से काफी बेहतर हैं। अब बस उनकी एक ही ख्वाहिश है – उन्हें फिर अपने पैरों पर खड़ा देखना।

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दिव्यांग माँ सड़क किनारे चला रही है किचन | Handicapped kitchen | Delhi | Inspiring Woman Story

दिव्यांग माँ सड़क किनारे चला रही है किचन | Handicapped kitchen | Delhi | Inspiring Woman Story

बचपन से दिव्यांग आरती की जिंदगी आसान कभी नहीं रही।
शादीशुदा जिंदगी में भी उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन हर बार टूटने के बाद उन्होंने खुद को फिर से संभाला।
आज दिल्ली के प्रीत विहार मेट्रो स्टेशन के पास अपने छोटे-से Handicapped kitchen स्टॉल पर आरती सिर्फ खाना नहीं खिलाती, बल्कि अपने दोनों बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हर दिन नई उम्मीद भी पकाती हैं।
अगर आप दिल्ली में हैं, तो एक बार इनके स्टॉल पर ज़रूर जाएँ। आपका एक ऑर्डर किसी माँ के हौसले को और मजबूत बना सकता है। :heart:

📌Handi Service, प्रीत विहार मेट्रो स्टेशन, दिल्ली

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भारत का वो Indie Singer जिसने Music के सारे नियम बदल दिए | Anuv Jain | Indie Sensation

भारत का वो Indie Singer जिसने Music के सारे नियम बदल दिए | Anuv Jain | Indie Sensation

जिस दर्द को शब्दों में कह पाना मुश्किल था, Anuv Jain ने उसे संगीत में बदल दिया। 11 साल की उम्र में पिता कोमा में चले गए। कुछ साल बाद उन्हें हमेशा के लिए खो दिया। घर की मुश्किलें बढ़ीं, माँ ने परिवार संभाला।
Anuv ने Family Business में भी वक्त दिया, लेकिन दिल हमेशा Music में था।
आखिर माँ से सिर्फ एक मौका मांगा, अपने सपने को चुनने का। और आज Anuv Jain दुनिया भर में अपने गानों से करोड़ों लोगों के दिल छू रहा है। कभी-कभी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द ही हमारी सबसे बड़ी पहचान बन जाता है।
@anuvjain

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अनाया बांगर जल्द खेलना चाहती है ऑस्ट्रेलिया के लिए, दक्षिण अफ्रीका की यह ऑलराउंडर हुई नाराज

अनाया बांगर ने हाल ही में यह घोषणा कि वह जल्द ही ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट टीम के लिए खेलना चाहती हैं। हाल ही में उनको बिग बैश के लिए हरी झंडी मिल गई है। इस पर दक्षिण अफ्रीका की ऑलराउंडर खिलाड़ी मारीजैन कैप ने कड़ी आपत्ती जताई। उन्होंने कहा कि  अनाया बांगर को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। इस पर अनाया बांगर ने कहा है कि ना ही उनका शरीर टेस्टोस्टेरोन बनाएगा ना ही उनके शरीर में खोई हुई मांसपेशिया आएंगी तो इससे किसी को भी क्यों तकलीफ होनी चाहिए।

गौरतलब है कि ‘ट्रांसजेंडर’ खिलाड़ी अनाया बांगड़ सामुदायिक स्तर पर खेलने की अनुमति मिलने के बाद ऑस्ट्रेलिया में अपनी क्रिकेट यात्रा फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं और भले ही उन्हें अभी तक कोई टीम नहीं मिली है लेकिन उन्हें विश्वास है कि इससे उनके लिए अगले साल महिला बिग बैश लीग में खेलने के द्वार खुल जाएंगे।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगड़ की ‘बेटी’ अनाया ने इस साल मार्च में लिंग परिवर्तन की सर्जरी कराने से पहले मुंबई के लिए आयु वर्ग के पुरुषों का क्रिकेट  खेला था। अनाया ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘आज का दिन मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कई वर्षों तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहने के बाद मैं आखिरकार उस खेल में वापसी के रास्ते के बारे में बात कर सकती हूं जो मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।’’

इस 25 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा, ‘‘मैं मार्च 2027 से ऑस्ट्रेलिया में महिला क्रिकेट में वापसी करने की तैयारी कर रही हूं, जिसका उद्देश्य एलीट क्रिकेट खेलना है। मैं यह दावा नहीं कर रही हूं कि मुझे किसी टीम में जगह मिल गई है। मैं बस इतना कह रही हूं कि मुझे टीम में जगह बनाने का मौका मिला है और मैं इसके लिए कड़ी मेहनत करूंगी।’’

अनाया ने इससे पहले बीसीसीआई से महिला क्रिकेट प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति देने की अपील की थी, लेकिन भारतीय बोर्ड से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। ICC ने 2023 में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को महिला प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित कर दिया था।

अनाया ने कहा कि हाल ही में हुई उनकी जांच से पता चलता है कि अगले साल मार्च में होने वाले एक और परीक्षण में भी उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर समान बना रह सकता है, जिससे उनके लिए महिला क्रिकेट में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त होगा।उन्होंने कहा, ‘‘अगर वह परीक्षण मेरे अनुकूल रहा तो मैं शीर्ष स्तर की क्रिकेट में खेलने की पात्रता हासिल कर लूंगी।’’

भाई बहन की इस जोड़ी ने साथ मिलकर सपनों को बदला हकीकत में | Saqib and Huma Qureshi | Baby Do Die Do

भाई बहन की इस जोड़ी ने साथ मिलकर सपनों को बदला हकीकत में | Saqib and Huma Qureshi | Baby Do Die Do

जब दुनिया ने उनके सपनों पर शक किया, उनकी माँ ने भरोसा किया।
हुमा कुरैशी और साकिब सलीम के लिए मुंबई का सफर सिर्फ एक्टिंग में करियर बनाने का नहीं था। ये एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ने का सफर था।
एक का हौसला टूटता, तो दूसरा संभालता।
और शायद यही वजह है कि दोनों ने अपने-अपने सपनों को हकीकत में बदला।
क्योंकि कभी-कभी आपको पूरी दुनिया के भरोसे की जरूरत नहीं होती, बस एक अपने का भरोसा काफी होता है।

@iamhumaq
@saqibsaleem

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Cerebral Palsy से जूझ रही बहन का सहारा बना उसका छोटा भाई | Heartwarming Brother-Sister Bond

Cerebral Palsy से जूझ रही बहन का सहारा बना उसका छोटा भाई | Heartwarming Brother-Sister Bond

#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews Alpha को Cerebral Palsy है इसलिए उसे हर जगह अपने भाई की जरूरत पड़ती है।
लेकिन उसके भाई Alwin ने महसूस किया कि शायद उसे भी Alpha की उतनी ही जरूरत है।
Alwin अपनी बड़ी बहन को बाहर की दुनिया दिखाता है, उसके साथ हर जगह जाता है,
और Alpha अपने छोटे भाई को छोटी-छोटी खुशियों में जिंदगी देखना सिखाती है। 

@aalwye

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Down Syndrome बहन ने सिखाया प्यार का असली मतलब | Down Syndrome Sister Emotional story

Down Syndrome बहन ने सिखाया प्यार का असली मतलब | Down Syndrome Sister Emotional story

दुनिया ने Dimple में देखा कि वो क्या नहीं कर सकती थी।
लेकिन उसकी बहन ने देखा कि वो कितना प्यार कर सकती थी।
Dimple को Down syndrome था।
वो देर से बोलना सीख पाई और बहुत से लोग उसकी बात समझ नहीं पाते थे।
लेकिन उसकी बहन उसकी छोटी-छोटी आवाज़ों और चेहरे के भाव तक समझ जाती थी।
कभी-कभी तो जानबूझकर नाराज़ होने का नाटक करती,
सिर्फ इसलिए कि Dimple उसे गले लगाए और प्यार से चूमे।
आज Dimple इस दुनिया में नहीं है।
और सबसे बड़ा अफसोस ये है कि उसकी बहन उसे आखिरी बार देख भी नहीं पाई।
लेकिन शायद कुछ रिश्तों को आखिरी मुलाकात की जरूरत नहीं होती।
क्योंकि कुछ लोग शब्दों से नहीं,
दिल से समझे जाते हैं।

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