पैरों से लिखकर 70 बच्चों को मुफ्त पढ़ाते हैं ये शिक्षक | Teacher Without Hands | Teachers Day

पैरों से लिखकर 70 बच्चों को मुफ्त पढ़ाते हैं ये शिक्षक | Teacher Without Hands | Teachers Day

#जिनके खुद दोनों हाथ नहीं हैं, वही आज 70 जरूरतमंद बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं।
जगन्नाथ महारा ने अपनी मुश्किलों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। पैरों से लिखकर पढ़ाई पूरी की और आज उन बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं, जिन्हें शायद हालात पढ़ने का मौका भी न दें।
उनकी पाठशाला सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि उम्मीद और बदलाव की मिसाल है।
एक शिक्षक, जो खुद संघर्ष से निकले और अब दूसरों के अंधेरे में शिक्षा की रोशनी जला रहे हैं।
आइए, जगन्नाथ सर की इस मुहिम में उनका साथ दें और इन बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में मदद करें।

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2.9 करोड़ रुपये की US नौकरी छोड़ी, IIT टॉपर ने कानपुर में खोली किराने की दुकान, वजह हैरान कर देगी!

सोशल मीडिया पर एक ऐसी भावुक कहानी तेजी से वायरल हो रही है, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया है। IIT Bombay के एक टॉपर ने विदेश में मिले करोड़ों रुपये के जॉब ऑफर को छोड़कर अपने माता-पिता के साथ रहने का फैसला किया। बताया जा रहा है कि उन्हें अमेरिका की एक कंपनी से शानदार पैकेज मिला था, लेकिन परिवार की परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्होंने यह बड़ा निर्णय लिया। इस कहानी ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि असली सफलता पैसा है या अपने अपनों के साथ खड़ा रहना।

जहां एक तरफ युवा विदेश जाकर करियर बनाने का सपना देखते हैं, वहीं इस फैसले ने एक अलग ही उदाहरण पेश किया है। यह कहानी अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे भावनात्मक और प्रेरणादायक बता रहे हैं।

2.9 करोड़ रुपये का शानदार ऑफर ठुकराया

रिपोर्ट्स के अनुसार, कंप्यूटर साइंस से B.Tech गोल्ड मेडलिस्ट विवेक शर्मा को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक स्टार्टअप से करीब $240,000 (लगभग ₹2.9 करोड़) सालाना का जॉब ऑफर मिला था। इस ऑफर में वीजा, रिलोकेशन और ग्लोबल करियर का शानदार मौका भी शामिल था।

साधारण परिवार से निकलकर IIT तक का सफर

विवेक का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता रेलवे में क्लर्क थे और मां ट्यूशन पढ़ाकर घर चलाने में मदद करती थीं। परिवार ने उनकी पढ़ाई के लिए कई त्याग किए, यहां तक कि गहने बेचकर और बचत से उन्हें कोटा भेजा गया।

अचानक बदली जिंदगी की कहानी

जब सब कुछ ठीक चल रहा था और वह अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उनकी जिंदगी में बड़ा मोड़ आया। उनके पिता को हार्ट अटैक आ गया और मां को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता चला।

विदेश नहीं, परिवार चुना

इस मुश्किल समय में विवेक ने बड़ा फैसला लिया और विदेश जाने की बजाय कानपुर में ही रुकने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने माता-पिता की देखभाल शुरू की और उनके साथ रहना चुना।

ग्रोसरी शॉप से नई शुरुआत

रिपोर्ट के मुताबिक, विवेक अब अपने घर के नीचे एक छोटी किराने की दुकान चला रहे हैं और साथ ही जरूरतमंद बच्चों को कोडिंग भी सिखा रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार से बढ़कर कुछ नहीं होता।

सोशल मीडिया पर भावुक प्रतिक्रियाएं

इस कहानी को पढ़कर लोग सोशल मीडिया पर भावुक हो गए हैं। कई यूजर्स ने कहा कि असली सफलता पैसा नहीं बल्कि परिवार और जिम्मेदारी है। उनकी यह कहानी लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।