पेरू के नाज्का शहर के बाहर शनिवार को पर्यटकों को ले जा रहा एक छोटा प्लेन क्रैश हो गया। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई है। एजेंसी रिपोर्ट्स के मुताबिक प्लेन ने पास के इका शहर से उड़ान भरी थी। नाज्का लाइन्स के पास पहुंचने के बाद प्लेन खेत में जाकर गिरा। इसमें आग लग गई। प्लेन में 2 पायलट्स के अलावा 11 पर्यटक थे। हादसे के बाद प्लेन के मलबे के पास जले हुए शव बिखरे पड़े थे। दरअसल, 2000 साल पुरानी नाज्का लाइन्स को पूरी तरह से केवल प्लेन या व्यूइंग टावर से ही देखा जा सकता है। इसलिए प्लेन पर्यटकों को लेकर निकला था। मरने वाले कहां से थे, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। पेरू प्लेन हादसे के बाद खेत में बिखरे शव… 14 साल से सीनिक फ्लाइट्स ऑर्गनाइज कर रही थी कपंनी जो प्लेन हादसे का शिकार हुआ, उसे पेरू की कंपनी ‘एरोडियाना’ ऑपरेट कर रही थी। एयरलाइन की वेबसाइट के मुताबिक, वह पिछले 14 साल से सेसना ग्रैंड कारवां प्लेन का इस्तेमाल करके नाज्का लाइन्स के ऊपर सीनिक फ्लाइट्स (नजारे दिखाने वाली उड़ानें) की सुविधा दे रहे हैं। हादसे की जांच की जा रही है। एरोडियाना ने कोई कमेंट नहीं दिया। पेरू के मूल निवासियों ने बनाईं थीं नाज्का लाइन्स पेरू की राजधानी लीमा से लगभग 400 किमी दक्षिण में पेरू के नाज्का और पाल्पा रेगिस्तान में कुछ आकृतियां बनी हैं। माना जाता है कि इन्हें 200 ईसा पूर्व से 600 ईस्वी के बीच नाज्का सभ्यता के लोगों ने बनाया। रेगिस्तान की गहरे रंग की पत्थरीली सतह हटाकर नीचे की हल्की मिट्टी को दिखाया गया, जिससे ये आकृतियां बन गईं। कई आकृतियां 100 से 300 मीटर और उससे भी बड़ी हैं। कुछ सीधी रेखाएं कई किलोमीटर तक जाती हैं। इन्हें क्यों बनाया गया, यह आज भी रहस्य है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये धार्मिक अनुष्ठान, वॉटर सोर्स, अंतरिक्ष की गणनाओं या फिर संस्कृति से जुड़ी हो सकती हैं। यहां बहुत कम बारिश और शुष्क जलवायु होने के कारण ये आकृतियां करीब 2,000 साल से सुरक्षित बनी हुई हैं। नाज्का में पहले भी हो चुके हैं हादसे पिछले कुछ दशकों में इस मशहूर हैरिटेज साइट पर विमान दुर्घटना का यह पहला मामला नहीं है।

यूरोप के कई देश इस समय अपने यहाँ भीषण गर्मी के कारण जंगलों में लगी आग (दावानल) की रोकथाम करने और आसपास के शहरों एवं बस्तियों को उनसे बचाने में लगे हैं।
दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के अटलांटिक तट पर के जंगलों में लगभग एक सप्ताह से आग धधक रही है। अधिकारी हालांकि स्थिति को कुछ हद तक स्थिर बता रहे हैं, लेकिन यह चिंता भी बनी हुई है कि आग एक बार फिर बेकाबू हो सकती है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने, वहाँ के बोर्दो (Bordeaux) शहर की ओर बढ़ रही आग की भयावह घटनाओं को “दूसरे विश्व युद्ध के बाद से सबसे भीषण जंगल की आग” (दावानल) बताया। बोर्दो की उनकी यात्रा के समय आग, शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर रह गई थी।
टूरिस्ट इलाकों को खाली कराया गया
सरकारी अधिकारी बोर्दो के उत्तर-पश्चिम में स्थित कैंपिंग की जगहों, हॉलिडे रिसॉर्ट और मनोरंजन पार्क खाली करवा रहे हैं। इस आदेश से आस-पास के इलाके में लगभग 4,000 लोग प्रभावित हुए हैं, हालांकि प्रसिद्ध समुद्र तटीय रिसॉर्ट इसमें शामिल नहीं है। मौसम में संभावित परिवर्तन को देखते हुए सावधानी के तौर पर लोगों को हटाया जा रहा है।
22 जुलाई के बाद से, आग ने बोर्दो के पास के प्रभावित इलाके में लगभग 42,000 हेक्टेयर (42,000 वर्ग मीटर) ज़मीन को तबाह कर दिया है— अब तक 2,20,000 से ज़्यादा स्थानीय लोगों और टूरिस्टों को वहाँ से हटा कर सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया गया है।
तापमान फिर से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने की आशंका
राष्ट्रपति माक्रों को भरोसा है कि “हम लोगों की सुरक्षा की यह लड़ाई जीतेंगे।” बोर्दो के पास के इलाके में लगभग 2,500 अग्निशमन कर्मी (फायरफाइटर्स) तैनात हैं, उनकी मदद के लिए करीब 1,500 सैनिक भी वहाँ भेजे गए हैं। जर्मनी ने फ्रांस के इस संकटग्रस्त इलाके में सामान आदि पहुँचाने के लिए दो परिवहन हेलीकॉप्टर और एक परिवहन विमान भेजा है।
कई अन्य यूरोपीय देश भी संकट की इस घड़ी में फ्रांस की सहायता कर रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता तपती लू की भावी लहर को लेकर है। मौसम विभाग 'मेटियो-फ़्रांस' के अनुसार, देश के बड़े हिस्सों में तापमान पुन: 40 डिग्री सेल्सियस या अधिक तक पहुँच सकता है। आपातकालीन टीमों ने बोर्दो के पास के जंगल में 100 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी 'फ़ायरब्रेकर' (आग को फैलने से रोकने वाली खाली जगह) बनाई है; इस उपाय का उद्देश्य आग की लपटों को दूसरे इलाकों में फैलने से रोकना है।
आग अभी तक काबू में नहीं
अग्निशमन कर्मी 29 जुलाई तक आग के फैलाव को रोकने में किसी हद तक सफल रहे हैं। इस बीच, पास के बिस्कारोस इलाके में रहने वाले लगभग 15,000 लोग अपने घरों को लौट पाए हैं, हालाँकि आग अभी तक पूरी तरह से काबू में नहीं आई है। एक अधिकारी ने बताया कि इस भीषण आग को पूरी तरह बुझाने में “कई हफ़्ते या महीने भी” लग सकते हैं।
आमतौर पर गर्मियों के महीनों और छुट्टियों के मौसम में गिरोंद (Gironde) नाम के इलाके में सबसे ज़्यादा पर्यटक आते हैं, लेकिन यह इलाका भी जंगल की आग से प्रभावित हुआ है। क्षेत्रीय प्रशासन ने छुट्टियां मनाने आए लोगों और यात्रियों से इस इलाके में न जाने की अपील की है और हॉलिडे कैंप, स्काउट कैंप और दिव्यांगों के लिए खास कैंपों का संचालन रोक दिया है। पूरे इलाके में खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी कुछ समय के लिए रोक लगा दी गई है।
स्पेन में ख़तरा फिर से बढ़ने की आशंका
बढ़ते तापमान से स्पेन के अविला (Ávila) प्रांत में—जो राजधानी मैड्रिड के पश्चिम में है—और मैड्रिड व तोलेदो के आस-पास के इलाकों में हालत फिर से बिगड़ने की आशंका है। इन इलाकों में जंगल की आग से अब तक 80,000 हेक्टेयर (वर्ग मीटर) से ज़्यादा जंगलों और झाड़ियों वाला इलाका जलकर खाक हो चुका है। सावधानी के तौर पर लगभग 90,000 लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाना पड़ा है।
मैड्रिड में संकट प्रबंधन समिति की एक बैठक के बाद प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने कहा, “हमें आशा की किरण दिखाई दे रही है।” उन्होंने कहा कि सरकार तब तक सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करेगी “जब तक आग की आखिरी लपट बुझ न जाए।”
सांचेज़ सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं
27 जुलाई के बाद से स्पेन में आग को और अधिक फैलने से रोक दिया गया है। आपातकालीन टीमें पूर्वी स्पेन के कास्तेयों प्रांत में जंगल की आग बुझाने में अभी भी जुटी हुई हैं; वहां लगभग 16,000 लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।
स्पेन में भी तापमान पुन: 40 डिग्री सेल्सियस तक या उससे भी अधिक पहुंचने की आशंका है। स्पेन की मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इससे पूरे देश में आग लगने का ख़तरा बहुत ज़्यादा या चरम स्तर तक बढ़ जाएगा। इस अनुमान को देखते हुए, प्रधानमंत्री सांचेज़ ने देश भर के सभी नागरिकों से “बहुत ज़्यादा सावधानी बरतने और हर संभव एहतियात अपनाने” की अपील की है।
पड़ोसी देश पुर्तगाल में भी, 27 जुलाई से 1,000 से ज़्यादा अग्निशमन कर्मी तैनात किए गए हैं। देश के मध्य और उत्तरी हिस्सों के जंगलों में भी आग लग गई है। उत्तर में ब्रागा और ब्रागांका के आस-पास के इलाके तथा मध्य पुर्तगाल में संतारम के पास के इलाके सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। ज़्यादा तापमान के कारण, लगभग पूरे देश में आग लगने का ख़तरा अधिकतम या बहुत ही ऊँचे स्तर पर है। मौसम एजेंसी के अनुसार, तटीय इलाकों में यह खतरा थोड़ा कम है।
फ्रांस में पहली बार देखी गई एक दुर्लभ प्रघटना
धुएं और राख के कई किलोमीटर ऊंचे बादल, बिजली का कड़कना और अनिश्चित हवाएं: दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस में लगी आग एक ऐसी प्राकृतिक प्रघटना को जन्म दे रही है जो आग बुझाने वालों के साहस की परीक्षा ले रही है।
जंगल की आग से पैदा हुआ एक ऐसा तूफ़ान जो खुद ही मौसम तंत्र (वेदर सिस्टम) वाला बेहद गर्म बादल बनाता है— पायरोक्यूम्यलोनिम्बस (pyrocumulonimbus)—उसे फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी जंगलों में लगी विनाशकारी आग के दौरान पहली बार देखा गया है। यह बादल, जिसे क्यूम्यलोनिम्बस फ्लेमजेनिटस (cumulonimbus flammagenitus) भी कहा जाता है, तब बनता है जब ज़मीन के पास की हवा इतनी ज़्यादा गर्म हो जाती है कि
वह बहुत तेज़ी से ऊपर उठने लगती है—अपने साथ धुआं, जलवाष्प और राख ले जाती है—और अक्सर कई किलोमीटर ऊपर के समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर) तक पहुँच जाती है। वहाँ, यह मिश्रण ठंडी हवाओं के संपर्क में आता है और अपना खुद का ऐसा मौसम तंत्र बनाता है, जिसमें आग को और अधिक भड़काने वाली तेज़ हवाएँ चलती हैं। इस बादल से ज़मीन पर अक्सर बिजली भी गिरती है और साथ में गड़गड़ाहट की आवाज़ भी होती है।
NASA उसे “आग उगलने वाले ड्रैगन्स” कहता है
“आग उगलने वाले ड्रैगन्स” को—जैसा कि NASA इन्हें कहता है— पहले मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में ज्वालामुखी पर्वत फटने और बड़े पैमाने पर लगी आग के दौरान देखा गया है। उन इलाकों में यह घटना बार-बार होती है, लेकिन फ्रांस में यह “अभूतपूर्व” है।
आमतौर पर इस तरह की 'आग के तूफ़ान' (firestorm) को बुझाना या काबू में करना संभव नहीं होता, क्योंकि आग उगलती हवाएं लगातार अपनी दिशा बदलती रहती हैं।
नतीजा यह होता है कि आग हर दिशा में फैलती है और कई जगहों पर आग की लपटें एक साथ उठने लगती हैं, जिससे स्थिति का अंदाज़ा लगाना पूरी तरह से मुश्किल हो जाता है।
निपटने के दो ही संभावित तरीके
इससे निपटने के केवल दो ही संभावित तरीके ज्ञात हैं। या तो बरसात शुरू हो जाए—हालांकि इसके लिए तीन दिनों तक भारी वर्षा होनी चाहिए—या फिर आग को ऐसी जगह की ओर मोड़ने का कोई तरीका मिले कि वह खुद ही बुझ जाए, जैसा कि बड़वानल वाली आग के समय समुद्रों में होता है।
दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस में लगी भीषण आग के प्रसंग में कहा जाता है कि कि दमकलकर्मियों के पास पीछे हटने के अलावा कोई चारा नहीं था। “हमें यह मानना होगा कि प्रकृति की यह ताकत हमारे नियंत्रण से बाहर है। यह युद्ध जैसी स्थिति है, जहां हम लगातार आग की चपेट में हैं और हर किसी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचना है।”
ऐसी स्थिति में केवल “धैर्य और संयम” ही काम आता है। आग बुझाने की सीधी कोशिशों के अलावा दमकलकर्मी यही कर सकते हैं कि वे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जगहों की सुरक्षा करें और जानवरों को आग की लपटों से दूर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचायें। इस बीच स्पेन से लेकर इटली, ग्रीस और तु्र्की तक के कई देश अपने जंगलों में लगी आग से जूझ रहे हैं। नदियां सूख रही हैं और 30 जुलाई के दिन, पश्चिमी यूरोप में आँधी और तूफ़ान आने की भविष्यवाणी आग में घी पड़ने का काम कर सकती है।
महाराष्ट्र के फेमस लोहागढ़ किले का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक लोकल युवक दिल्ली से आए कुछ टूरिस्ट को किले के अंदर सिगरेट पीने से मना करता है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। लोहागढ़ किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक धरोहर है। यहां पर स्मोकिंग, शराब और किसी भी तरह के नशीले पदार्थ का इस्तेमाल या उन्हें साथ लाना नियमों के खिलाफ है। वीडियो के वायरल होने के बाद से लोग इस पर तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं।
लोहागढ़ किले में टूरिस्टों का वीडियो वायरल
‘एक्स’ पर शेयर किए गए वीडियो में एक लोकल युवक किले के अंदर स्मोकिंग कर रहे टूरिस्ट से सवाल करता नजर आता है। वह उनसे पूछता है, “तुम्हें यहां सिगरेट पीने की इजाजत किसने दी?” जब टूरिस्ट ने कहा कि उन्हें इस तरह के किसी नियम की जानकारी नहीं थी और वहां ऐसा कोई बोर्ड भी नहीं दिखा, जिस पर स्मोकिंग करने की मनाही लिखी हो, तो स्थानीय युवक ने कहा, “तुम्हें कॉमन सेंस होना चाहिए। क्या तुम मंदिर के अंदर स्मोकिंग करोगे? ये किला हमारा मंदिर है।” वीडियो में पर्यटक बार-बार कहते सुनाई देते हैं कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि किले के परिसर में स्मोकिंग करना मना है।
टूरिस्टों को दी चेतावनी
इस दौरान एक टूरिस्ट ने स्थानीय युवक से शांत रहने की बात कही, जबकि दूसरे ने कहा कि उनका नियम तोड़ने का कोई इरादा नहीं था। इसके बाद स्थानीय युवक ने उनके सिगरेट के पैकेट अपने पास रख लिए ताकि वे किले के अंदर दोबारा स्मोकिंग न करें। साथ ही उसने चेतावनी दी कि अगर वे फिर से सिगरेट पीते हुए मिले, तो वह इस मामले की शिकायत पुलिस से करेगा।
लोहगड वर दिल्लीचे पब्लिक!
महाराष्ट्रातील गड-किल्ल्यांचे पावित्र्य राखण्यासाठी सिगरेट, तंबाखू व मद्यसेवनावर (दारू) पूर्णपणे कायदेशीर मनाई आहे।
हे यांना माहिती नसावं की सिया पॉईंट बघायला आले असावे?लोहगड pic.twitter.com/50CWQZYpoW
— Bhakta’s Vikas/भक्तांचा विकास (@kisora_pat7606) July 29, 2026
लोगों ने दिया रिएक्शन
सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई यूजर्स ने स्थानीय युवक की सराहना की। वहीं, कुछ लोगों का मानना था कि टूरिस्टों को समझाने का तरीका थोड़ा शांत और संयमित होना चाहिए था। एक यूजर ने लिखा, “ऐतिहासिक और धार्मिक जगहों का सम्मान करना हर किसी की जिम्मेदारी है। ऐसे स्थानों की रक्षा के लिए लोगों ने अपने प्राण दिए हैं, इसलिए यहां कॉमन सेंस दिखाना जरूरी है।” एक और व्यक्ति ने लिखा, “भारत में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना कानूनन प्रतिबंधित है। इसके लिए हर जगह बोर्ड लगाने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, पर्यटक होने के कारण उन्हें समझाने का तरीका थोड़ा नरम होना चाहिए था और अपशब्दों से बचना चाहिए था।”
लोगों ने उठाए सवाल
वहीं, कुछ लोगों ने स्थानीय युवक के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, “अगर किसी को नियमों की जानकारी नहीं है, तो उसे शांति से समझाना चाहिए। वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालने की क्या जरूरत थी?” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “अगर पहली बार समझाने के बाद भी कोई नियम नहीं मानता, तो उसकी शिकायत करनी चाहिए। लेकिन किसी से बात करते समय मर्यादा और शालीनता भी बनाए रखनी चाहिए।”
थाईलैंड में तीन भारतीय पर्यटकों का अपहरण कर उनके परिवारों से 1.20 करोड़ रुपए की फिरौती मांगने का मामला सामने आया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में पांच भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें दुबई में बैठे एक पाकिस्तानी नागरिक ने इस किडनैपिंग को अंजाम देने के निर्देश दिए थे। पीड़ितों की पहचान मोहित (23), आशीष (24) और हिमांशु (20) के रूप में हुई है। आरोपियों ने उन्हें सस्ते 7 दिन के टूर पैकेज का लालच देकर थाईलैंड के पटाया शहर बुलाया था। वहां पहुंचने के बाद उन्हें एक घर में बंधक बना लिया गया और उनके परिवारों से तीनों के बदले 40-40 लाख रुपए, यानी कुल 1.20 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गई। इंडियन टूरिस्टों के रेसक्यू का फुटेज दुबई से संचालित हो रहा था प्लान पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अवतार सिंह (38), जगजीत सिंह (38), रंभालक कुमार (24), सुखबीर सिंह (37) और कुलरा सिंह (27) के रूप में हुई है। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे दुबई में स्थित एक पाकिस्तानी नागरिक से चैट एप्लीकेशन के जरिए पिछले एक महीने से संपर्क में थे। आरोपियों ने पीड़ितों को सात दिन के सस्ते टूर पैकेज का झांसा देकर थाईलैंड के पटाया शहर बुलाया था। वहां पहुंचने पर उन्हें एक घर में बंधक बना लिया गया। मास्टरमाइंड फिरौती की रकम क्रिप्टोकरेंसी के जरिए लेना चाहता था। पीड़ितों ने बताया कि उन्हें कई दिनों तक भूखा रखा गया, उनके हाथ-पैर बांधकर और उल्टा लटकाकर पीटा गया। खूद दिखाने के लिए पीड़ितों पर लाल स्प्रे पेंट लगाया आरोपियों ने पीड़ितों के शरीर पर लाल स्प्रे पेंट लगाया था, ताकि वीडियो कॉल के दौरान ऐसा लगे कि उन्हें गंभीर चोटें आई हैं और खून बह रहा है। इस तरह वे पीड़ितों के परिवारों पर दबाव बनाकर हर व्यक्ति से 40 लाख रुपये की फिरौती मांग रहे थे। पीड़ितों के परिजनों ने जब भारतीय दूतावास से संपर्क किया, तो दूतावास ने 21 जुलाई को चोनबुरी इमिग्रेशन और पटाया पुलिस को अलर्ट किया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और खुफिया जानकारी के आधार पर पटाया के एक टाउनहाउस में छापा मारा। वहां तीनों पीड़ित अलग-अलग कमरों में बंधे हुए मिले। उनके मुंह पर टेप लगा था और शरीर पर चोट के निशान थे। पुलिस को मौके से टेप, लकड़ी का डंडा और लाल स्प्रे पेंट बरामद हुआ है। पहले भी एक टूरिस्ट को किडनैप किया गया था रेस्क्यू किए गए पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि उनके आने से पहले भी एक भारतीय को उसी घर में बंधक बनाया गया था। उसे तब छोड़ा गया जब उसके परिजनों ने करीब 30 लाख रुपये की फिरौती चुका दी थी। पुलिस अब मामले के मुख्य सूत्रधार और अन्य पाकिस्तानी संदिग्धों की तलाश कर रही है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों को इस काम के बदले नकदी, कीमती सामान और थाईलैंड से बाहर जाने के लिए एयरलाइन टिकट का वादा किया गया था।
Silk Route (सिल्क रूट का यूनिक एक्सपीरियंस)
Nako Village (नाको गांव में मिलेगा हिमालय का अलग रूप)
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adventure and tranquility (एडवेंचर और सुकून का परफेक्ट कॉम्बिनेशन)
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प्राचीन बौद्ध मठों का एक्सपीरियंस: तवांग (Tawang) और आसपास के प्रसिद्ध मठों में आपको आध्यात्मिक माहौल और शांति का यूनिक एक्सपीरियंस मिलेगा।

रोमांच से भरपूर पहाड़ी रास्ते: घुमावदार पहाड़ी सड़कें और ऊंचे दर्रे एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए खास अट्रैक्शन होंगे।
कितना होगा खर्च?

IRCTC के ‘अरुणोदय अरुणाचल’ फ्लाइट टूर पैकेज की शुरुआती कीमत ₹53,500 प्रति व्यक्ति रखी गई है। इस पैकेज में ट्रैवल से जुड़ी कई सुविधाएं शामिल हैं, जिससे आपको अलग-अलग बुकिंग (booking) की चिंता नहीं करनी पड़ती। अगर आप नॉर्थ-ईस्ट की खूबसूरत वादियों में यादगार छुट्टियां (holiday) बिताना चाहते हैं, तो यह पैकेज (package) एक शानदार ऑप्शन साबित हो सकता है।

Garh Panchkot (गढ़ पंचकोट)

Garchumuk (गारचुमुक)

Taki (टाकी)
Raichak (रायचक)

बारिश के मौसम में सड़कें काफी फिसलन भरी हो जाती हैं, जिसकी वजह से हादसे होने का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से प्रशासन लगातार लोगों से सावधानी के साथ और धीमी रफ्तार में वाहन चलाने की अपील करता है। वहीं इसी बीच सोशल मीडिया पर पश्चिम बंगाल का एक हैरान कर देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बारिश के दौरान तेज रफ्तार में बाइक चला रहा एक युवक मोड़ पर अपना बैलेंस खो देता है और सड़क किनारे चट्टान से टकरा जाता है। गनीमत रही कि सड़क के पास गहरी खाई होने के बावजूद उसकी जान बच गई। इस घटना के बाद लोग बारिश में सावधानी से वाहन चलाने की सलाह दे रहे हैं।
वायरल हो रहा वीडियो
ये घटना पश्चिम बंगाल के कुर्सियांग व्यू पॉइंट की बताई है। ये जगह सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग के बीच स्थित एक लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेस है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक बाइक सवार रेनकोट पहनकर बारिश से भीगी सड़क पर तेज रफ्तार में बाइक चलाता नजर आता है। इसी दौरान वह चलते-चलते पीछे की ओर भी देखता है, जिससे उसका ध्यान सड़क से हट जाता है। कुछ ही देर बाद बाइक सवार सड़क के किनारे खाई की तरफ बढ़ने लगता है। ये देखकर वीडियो बना रहा व्यक्ति उसे जोर से आवाज देकर सावधान करता है।
काफी तेज थी चक्कर
इसके बाद मोड़ पर बाइक का बैलैंस बिगड़ जाता है और वह सड़क किनारे मौजूद एक चट्टान से जाकर टकरा जाती है। सड़क के ठीक पास गहरी खाई होने की वजह से ये हादसा बेहद खतरनाक साबित हो सकता था। अगर समय रहते बाइक नहीं रुकती तो बड़ा हादसा हो सकता था। टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक सवार का एक जूता दूर जाकर गिर गया। इसके बाद उसने किसी तरह बाइक को संभालने की कोशिश की, लेकिन बैलैंस बिगड़ने से वह सड़क के दूसरी ओर घास पर गिर पड़ा और उसकी मोटरसाइकिल भी वहीं गिर गई।
उसी समय पीछे आ रहा एक अन्य बाइक सवार तुरंत उसकी मदद के लिए पहुंच गया। फिलहाल इस हादसे में बाइक सवार को कितनी चोट आई, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वीडियो पर लिखा था, “आज शायद यमराज का दिन छुट्टी का था।” वहीं पोस्ट के कैप्शन में राइडर ने लिखा, “सेफ ड्राइव सेव लाइफ।”
यूजर ने किया कमेंट
इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग तरह की रिएक्शन दे रहे हैं। कई यूजर्स ने बारिश के मौसम में सावधानी से वाहन चलाने की सलाह दी, जबकि कुछ ने इस घटना पर मजाकिया अंदाज में भी कमेंट किए। एक यूजर ने लिखा, “गलती पूरी तरह राइडर की थी। आगे मोड़ होने के बावजूद वह दूसरी तरफ देख रहा था। भाई, जिम्मेदारी से बाइक चलाओ।” दूसरे यूजर ने कहा, “तुम्हारे दोस्त ने तुम्हें दूसरी जिंदगी दे दी।” वहीं एक यूजर ने मजाक करते हुए लिखा, “यमराज का मिस्ड कॉल था, लेकिन रिसीव नहीं हुआ।”
Viral Video: सर्बिया घूमने गए एक भारतीय कपल के साथ कथित छेड़छाड़ का मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सर्बिया में जब कपल व्लॉग बना रहे थे उसी समय कुछ लोगों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी है और कई यूजर्स दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं कुछ ने कपल के शांत रवैये की भी तारीफ की है। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
क्या है पूरी घटना
भारतीय कपल अपर्णा मालू और अजमल कोलंबिल सर्बिया पहुंचने के बाद अपना ट्रैवल व्लॉग शूट कर रहे थे। इसी दौरान तीन लोग उनके पास आ गए और कथित तौर पर उनसे अभद्र व्यवहार करने लगे। वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि जब दोनों सीढ़ियों से नीचे उतर रहे थे, तभी पीछे से आए तीन लोगों में से एक शख्स महिला के बेहद करीब पहुंचा और उसके बैग को खींचने की कोशिश करता हुआ नजर आया। अपर्णा और अजमल को शुरुआत में ये समझ नहीं आया कि उनके साथ क्या हो रहा है, इसलिए वे आगे बढ़ते रहे।
कैमरे में रिकॉर्ड हुई पूरी घटना
लेकिन जब एक शख्स ने दोबारा अपर्णा का बैग खींचा, तब उन्होंने पीछे मुड़कर उन लोगों का सामना किया। कपल ने उनसे पूछा, “क्या आप महिलाओं के साथ ऐसा ही बर्ताव करते हैं? आपकी प्रॉब्लम क्या है?” इस पर उनके साथ मौजूद एक व्यक्ति ने इशारा करते हुए कहा कि बैग खींचने वाले शख्स की दिमागी दिक्कतें है। इस पर अपर्णा के पति ने जवाब दिया, “अगर उसे कोई दिक्कत है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह ऐसा करे। यह बिल्कुल गलत है। हम दूसरे देश से आए हैं।” जैसे ही उन लोगों को पता चला कि उनकी हरकत कैमरे में रिकॉर्ड हो रही है, वे वहां से गालियां देते हुए चले गए।
बैग से कुछ निकाल रहा था
घटना के बारे में अपर्णा ने अपने पोस्ट में लिखा, “जब हम व्लॉग बना रहे थे, तभी ये तीन लोग हमारे पीछे आ गए। पहले उन्होंने मेरे बैग से कुछ निकालने की कोशिश की, लेकिन मुझे तुरंत इसका एहसास नहीं हुआ। थोड़ी देर बाद महसूस हुआ कि कोई मेरे बैग को छू रहा है, इसलिए मैंने बैग आगे कर लिया। तभी उनमें से एक ने मेरी ड्रेस खींच दी।” वीडियो वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया कि उनके पति ने उन लोगों का सामना क्यों नहीं किया।
एक्शन फिल्म नहीं चल रही थी
इस पर अपर्णा ने जवाब देते हुए कहा, “मैं आपकी चिंता समझती हूं, लेकिन ये भी याद रखिए कि हमें उस देश में पहुंचे मुश्किल से दो घंटे ही हुए थे। उस समय हम सिर्फ शाम की सैर पर निकले थे। ऐसी स्थिति में हमारे दिमाग में सबसे पहले लड़ाई करने का विचार नहीं आया।” उन्होंने आगे लिखा, “असल जिंदगी किसी एक्शन फिल्म जैसी नहीं होती। मेरे पति न तो ‘रॉकी भाई’ हैं और न ही विजय। कोई भी अकेला व्यक्ति तीन लोगों से लड़कर हीरो की तरह बाहर नहीं निकलता। उस समय हमारी पहली प्राथमिकता अपनी सेफ्टी थी, न कि किसी को कुछ साबित करना।”
लोगों ने दिए रिएक्शन
अपर्णा ने ये भी बताया कि उन्होंने इस घटना की शिकायत स्थानीय अधिकारियों से की है और उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने लिखा, “यह बेहद शर्मनाक व्यवहार है। उम्मीद है कि आप दोनों सुरक्षित होंगे।” दूसरे यूजर ने कहा,”आपको उसी समय मौके पर ही पुलिस को फोन कर देना चाहिए था।” एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, “सबसे पहले अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। अपना ख्याल रखें और मजबूत बने रहें।”

